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मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर ने कोझिकोडे यात्रा से पहले कंठपुरम के महिलाओं को घर में सीमित रखने वाले बयानों को अस्वीकार किया, द्व

कोझिकोडे के लिये अपनी आधिकारिक यात्रा से एक दिन पहले, मलयेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने नई दिल्ली में बीआरआईसीएस शिखर सम्मेलन के दौरान मीडिया को बताया कि उन्होंने इस्लामी विद्वान कंठपुरम अहमद का कुछ बयानों से असहमतिपूर्ण रुख अपनाया है। यह टिप्पणी कंठपुरम के हालिया बयानों के बाद आई, जिसमें उन्होंने महिलाओं

को घर के भीतर सीमित रहने की बात कही थी, जिससे सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर व्यापक बहस छिड़ गई। अनवर ने स्पष्ट किया कि वह इस विचारधारा को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर सकते, परंतु भारत‑मलेशिया के द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान नहीं पहुँचाने का आश्वासन भी दिया। यह बयान विदेश मंत्रालय के

साथ समन्वय में दिया गया, जिससे दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों पर प्रभाव को लेकर अटकलें तेज़ हो गईं।

कंठपुरम अहमद, जो भारतीय मुस्लिम समुदाय में एक प्रमुख विद्वान और शिया‑सुन्नी विचारधारा के संग्राहक के रूप में मान्यता प्राप्त हैं, ने पिछले सप्ताह कोझिकोडे के एक सार्वजनिक मंच पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा

कि इस्लामी शरिया के अनुसार महिलाओं को घर में रहना चाहिए और सार्वजनिक स्थानों में उनका प्रवेश सीमित होना चाहिए। यह बयान भारतीय मीडिया में तुरंत चर्चा का विषय बना और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इसे लैंगिक समानता के विरुद्ध मानते हुए तीखा विरोध किया। इस घटना ने पहले से ही भारत‑मलेशिया के

आपसी समझौते और धार्मिक सौहार्द की नाजुक स्थिति को चुनौती दी।

अनवर इब्राहिम ने इस परिप्रेक्ष्य में कहा कि भारत‑मलेशिया संबंधों को आर्थिक, रक्षा और रणनीतिक स्तर पर गहरा सहयोग मिला है, और इस प्रकार के बयानों का द्विपक्षीय सहयोग पर असर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ते हुए कहा कि वह व्यक्तिगत

विचारों के साथ संरेखित नहीं होते, परंतु धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र में विभिन्न विचारधाराओं को सहिष्णुता के साथ स्वीकार करना आवश्यक है। इस बयान को विभिन्न राजनयिक स्रोतों ने संतुलित माना, क्योंकि यह कंठपुरम के विचारों को अस्वीकार करते हुए भी दो देशों के संबंधों को स्थिर रखने का प्रयत्न करता है।

इसी बीच, कंठपुरम के

समर्थक और उनके विरोधियों के बीच तकरार तेज़ हो गई। कंठपुरम के अनुयायियों ने दावा किया कि उनका बयान धार्मिक स्वतंत्रता के तहत है और इसे व्यक्तिगत अधिकारों की उलँघना नहीं माना जाना चाहिए। वहीं महिलाओं के अधिकार संगठनों ने इस बयान को पुरुषवादी और सामाजिक उत्पीड़न का प्रमाण कहा, और कंठपुरम पर

कानूनी कार्रवाई की मांग की। इन दोनों ध्रुवीय समूहों ने सामाजिक मंचों, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में अपने-अपने तर्क पेश किए, जिससे सार्वजनिक विमर्श में तनाव बढ़ा।

कोझिकोडे में अनवर इब्राहिम की आधिकारिक यात्रा के दौरान कई प्रमुख कार्यक्रम निर्धारित थे, जिनमें आर्थिक सहयोग समझौते और शैक्षिक परियोजनाओं पर चर्चा शामिल थी। भारतीय प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली बैठक में दोनों देशों के व्यापारिक आंकड़े, विशेषकर तेल, गैस और उच्च तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने की बात होगी। इस यात्रा को भारत‑मलेशिया के आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जबकि कंठपुरम के बयानों ने इस

यात्रा के सामाजिक-राजनीतिक आयाम को जटिल बना दिया।

पर्यटक और व्यापारियों के संघ ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि धार्मिक बयानों से व्यापारिक वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वे इस तरह की बयानों को नियंत्रण में रखें, जिससे निवेशकों का भरोसा बना रहे।

इसके विपरीत, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि यह मामला धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती है, और यह दोनों देशों की आंतरिक नीतियों को प्रभावित कर सकता है।

मलेशिया के विदेश मंत्रालय ने कोझिकोडे में आयोजित होने वाले आधिकारिक कार्यक्रमों की तैयारी को जारी रखा, जबकि उन्होंने कंठपुरम

के बयानों को अस्वीकृत करने की घोषणा नहीं की। इसके बजाय उन्होंने कहा कि सरकार सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है और साथ ही सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को संवाद में लाने का प्रयास करेगी। इस बीच, भारत की विदेश मंत्रालय ने भी कहा कि भारत

में धार्मिक विविधता का सम्मान किया जाता है और किसी भी प्रकार के विभाजनकारी बयानों को नज़रअंदाज़ किया जाएगा।

कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देशों के विदेश मामलों के विशेषज्ञों ने इस विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि इस तरह के बयानों का प्रभाव केवल द्विपक्षीय संबंधों तक

सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक धर्मनिरपेक्ष मंचों में भी चर्चा का विषय बनता है। इस परिप्रेक्ष्य में, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने लैंगिक समानता के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, जिससे इस मुद्दे की अंतरराष्ट्रीय संवेदनशीलता स्पष्ट

Updated: September 13, 2026


Summary: Malaysian Prime Minister Anwar Ibrahim distanced himself from cleric Kanjipuram Ahmad’s remarks urging women to stay home, stressing that such views will not jeopardise the robust India‑Malaysia strategic partnership. The controversy has sparked a heated debate over gender equality and religious freedom as Anwar’s upcoming official visit to Kozhikode proceeds with economic and defence talks on the agenda.

Anwar’s diplomatic tightrope—rejecting a patriarchal creed while preserving a lucrative India‑Malaysia partnership—highlights how economic imperatives now blunt the political cost of religious backlash.
The episode underscores a growing global test: can secular alliances survive when partner societies clash over gender norms, or will trade

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