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बिहार: वैध आय से अधिक संपत्ति मामले में अधीक्षण अभियंता पर SVU ने चार स्थानों पर किए छापे, बरामदगी

बंबई में काली कमाई को वैध दिखाने के आरोपों के बीच, बिहार के इंजीनियर राजेंद्र कुमार पर स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने एक साथ छः ठिकानों में छापेमारी की, जिसमें चार करोड़ रुपये की अचल संपत्ति, सात लाख रुपये के मूल्यवान आभूषण और दो लाख रुपये की नकदी बरामद हुई।

राजेंद्र कुमार, लघु जल संसाधन विभाग में अधीक्षण अभियंता, छपरा, पटना, गोपालगंज और मुंबई के साथ-साथ दो अन्य स्थानों पर कार्यरत थे। पिछले दो वर्षों में उनके नाम पर कई प्रॉपर्टी ट्रांसफर दर्ज हुए, जिनकी वैध आय के मुकाबले अत्यधिक मूल्यांकन किया गया था। इस पर SVU ने अनियमित लेन‑देन की जांच शुरू की और वित्तीय दस्तावेज़ों में असंगतियों को नोट किया।

बिहार सरकार ने इस मामले को लेकर अपना ध्यान आकर्षित किया। 2022 में, राजेंद्र कुमार को जल संरक्षण परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन के लिए कई सम्मान मिल चुके थे। हालांकि, उनके संपत्ति पोर्टफ़ोलियो में लगातार वृद्धि ने उच्चाधिकारियों को संदेह में डाल दिया, जिससे अंततः विशेष निगरानी इकाई को इस पर कार्रवाई करने का आदेश मिला।

छापेमारी के दौरान, मुंबई के वेस्टर्न इलाके में स्थित उनकी निजी संपत्ति के एक बड़े घर से 2.5 लाख वर्ग फुट की जमीन बरामद हुई, जिस पर पहले ही वैध दस्तावेज़ नहीं थे। पटना के एक अपार्टमेंट में लगभग 1.8 करोड़ रुपये की मूल्यांकित संपत्ति पाई गई, जबकि छपरा में स्थित एक छोटे बंगलो में 76 लाख रुपये के सोने‑चांदी के आभूषण मिले। इन सभी संपत्तियों को कानूनी रूप से उनके नाम पर पंजीकृत नहीं किया गया था।

SVU ने बताया कि राजेंद्र कुमार ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर कई लेन‑देन किए थे, जिससे असली मालिकाना हक़ को छुपाने की कोशिश हुई। उनके द्वारा प्रस्तुत आय प्रमाणपत्रों में आय की सीमा 3 करोड़ रुपये से अधिक थी, परंतु उनके पास दर्ज किए गए संपत्तियों का कुल मूल्य इस सीमा से दो गुना से अधिक था। इस अंतर को लेकर जांचकर्ता आर्थिक असंगतियों को उजागर कर रहे हैं।

छापे के बाद, राजेंद्र कुमार को तुरंत हिरासत में ले लिया गया। उनके खिलाफ धोखाधड़ी, आयकर चोरी और मनी लॉन्डरिंग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने उनकी संपत्ति को जब्त कर ली है और आगे की जांच के लिए वित्तीय लेन‑देन के रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट और रजिस्ट्री दस्तावेज़ों की मांग की है।

बिहार के वित्त मंत्री ने इस मामले को सख्त निगरानी का उदाहरण कहा और कहा कि सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति का खुलासा पारदर्शिता को बढ़ावा देगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि कोई और अधिकारी इस तरह के नियमों का उल्लंघन करता है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, राज्य में सार्वजनिक सेवकों के संपत्ति विवरण को सार्वजनिक करने की मांग बढ़ी है।

मोहल्ले के निवासियों ने बताया कि राजेंद्र कुमार के आसपास कई अनौपचारिक विकास कार्य चल रहे थे, जिनमें जमीन के बड़े टुकड़े बेचे जा रहे थे। स्थानीय व्यापारियों ने कहा कि उनके साथ कई बार नकद लेन‑देन हुए थे, लेकिन कोई लिखित दस्तावेज़ नहीं दिया गया। इस प्रकार की ग़ैर‑पारदर्शी प्रथाओं ने स्थानीय समुदाय में असंतोष को बढ़ाया है।

ब्यूरो ऑफ़ इंटेग्रिटी एंड एंटी‑कॉरप्शन (BIAC) ने भी इस केस को ट्रैक किया है और कहा कि यह केस सरकारी कर्मचारियों में आर्थिक असंगतियों का एक बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में तेज़ कार्रवाई से सार्वजनिक विश्वास बहाल हो सकता है और भविष्य में इसी प्रकार की धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी। BIAC ने राजेंद्र कुमार के खिलाफ फाइल की गई सभी रिपोर्टों की समीक्षा करने का वचन दिया।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की भ्रष्टाचार की घटनाएँ सार्वजनिक वित्तीय प्रणाली को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि उच्च पदस्थ अधिकारी अपनी वैध आय से अधिक संपत्ति जमा कर लेते हैं, तो यह सार्वजनिक निधियों के दुरुपयोग की संभावना को दर्शाता है। इसके साथ ही, यह केस सरकारी कर्मचारियों के वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए कड़े नियमों की आवश्यकता को उजागर करता है।

सामाजिक दृष्टिकोण से, इस मामले ने नागरिक समाज में सरकारी कर्मचारियों के प्रति भरोसा घटा दिया है। कई नागरिक समूहों ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए नियमित ऑडिट और संपत्ति घोषणा को सार्वजनिक करना आवश्यक है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि ऐसे मामलों में शीघ्रता से न्यायिक कार्रवाई की जाए और दोषियों को सख्त दंड दिया जाए।

राजनीतिक समीक्षक यह नोट कर रहे हैं कि इस मामले का असर आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है। विपक्षी दल इस मुद्दे को अपने चुनावी अभियानों में इस्तेमाल कर रहे हैं, यह दावा करते हुए कि सरकार अपने कर्मचारियों की वित्तीय नैतिकता को नियंत्रित करने में विफल रही। दूसरी ओर, ruling पार्टी ने

Updated: September 12, 2026


बिहार के इंजीनियर को मुंबई के काले धन मामले में गिरफ्तार किया गया है, जहाँ छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति बरामद हुआ
सरकारी पद से लाभ उठाकर अमूमन अर्जित संपत्ति की जांच के दौरान आय असंगतियां सामने आई हैं, जिस पर राजनीतिक हलचल शुरू हो चुकी है

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