चैंडी मेट्रो रेल परियोजना की शुरुआत २०१० में हुई थी, जब पहली चरण के काम की शुरुआत का प्रस्ताव सरकार ने रखा था। उस समय, राज्य सरकार ने ४५ किमी लंबी रेल पटरियों को विकसित करने और दो मुख्य मार्गों को जोड़ने का लक्ष्य तय किया था। प्रारम्भिक चरण में ५४ स्टेशन बनाकर ५४ किमी की रेल लाइन तैयार की गई, जिससे राजधानी चैंडी के प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों को जोड़ने में मदद मिली। इस पहले चरण की सफलता के बाद, दूसरे चरण के विस्तारीकरण की मांग में वृद्धि हुई, जिसका मुख्य उद्देश्य शहरी किनारों को भी कनेक्ट करना था।
दूसरे चरण की योजना में २२ किमी अतिरिक्त ट्रैक जोड़ने का प्रस्ताव है, जिसमें नई स्टेशनें, आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली और ऊर्जा‑संचय तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। इस परियोजना के लिए कुल अनुमानित लागत लगभग ५,८०० करोड़ रुपये रखी गई है, जिसमें केंद्र सरकार और तमिलनाडु राज्य दोनों ने समान हिस्सेदारी की है। वित्तीय सहयोग के साथ, परियोजना को पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप भी तैयार किया गया है, जिससे शहरी प्रदूषण में कमी की अपेक्षा की जा रही है।
ध्वजावली के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चैंडी मेट्रो रेल भारतीय शहरी बुनियादी ढांचे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो राष्ट्रीय आर्थिक विकास को तेज करेगा। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस तरह के सार्वजनिक परिवहन प्रोजेक्ट न केवल रोजगार सृजन करेंगे बल्कि जलवायु परिवर्तन के मुकाबले भी सहायक होंगे। मुख्यमंत्री जयललिता ने भी इस अवसर को राज्य के विकास में एक नया अध्याय बताया, और कहा कि मेट्रो रेल शहर के जनसंचार को सहज बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ध्वजावली समारोह में कई प्रमुख अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद थे, जिनमें भारतीय रेल के प्रमुख निदेशक, तमिलनाडु शहरी विकास विभाग के प्रमुख और कई अंतरराष्ट्रीय सलाहकार शामिल थे। उन्होंने बताया कि इस चरण में अपनाई गई तकनीकी समाधान, जैसे स्वचालित ट्रेन नियंत्रण प्रणाली और ऊर्जा‑संचय रैम्प, भारत में प्रथम बार लागू किए जा रहे हैं। इस प्रकार के नवाचार से संचालन लागत में कमी और सुरक्षा मानकों में सुधार की उम्मीद है।
ध्वजावली के बाद, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने ट्रेन के भीतर स्थित मॉडर्न कैबिन, सूचना डिस्प्ले और एयर कंडीशनिंग सिस्टम का निरीक्षण किया। दोनों ने कहा कि यात्रियों को अब बेहतर यात्रा अनुभव मिलेगा, जिसमें रियल‑टाइम सूचना, स्लीपिंग कक्षा जैसी सुविधाएं और बायो-मेगा-फिल्टर सिस्टम द्वारा वायु शुद्धिकरण शामिल है। इस तकनीकी उन्नति को राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल माना जा रहा है, जिससे अन्य शहरी रेल परियोजनाओं में भी इसका अनुकरण हो सकता है।
ध्वजावली के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ़्रेंस में, केंद्रीय रेल मंत्रालय के मुख्य सचिव ने बताया कि इस चरण में १२ नई स्टेशनें, दो टर्रेंट ट्रैक और एक उन्नत नियंत्रण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना के पूरा होने पर, चैंडी मेट्रो रेल का कुल नेटवर्क ७६ किमी तक पहुंच जाएगा, जिससे लगभग १० लाख यात्रियों को दैनिक सेवा प्रदान की जा सकेगी। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, अगले दो वर्षों में निर्माण कार्य तेज़ी से आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रमुख विपक्षी दलों ने इस बड़े निवेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि आर्थिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग कैसे सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने यह भी इंगित किया कि मौजूदा सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। हालांकि, कई स्थानीय व्यापारियों ने इस परियोजना को सकारात्मक रूप से देखा, क्योंकि इससे उनके व्यापार के आसपास के क्षेत्रों में ग्राहक आवागमन बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी।
पर्यावरणीय संगठनों ने कहा कि मेट्रो रेल के उपयोग से निजी वाहन उपयोग में कमी आएगी, जिससे शहरी वायुमंडल में सुधार होगा। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि भविष्य में इस तरह के प्रोजेक्ट्स में सौर ऊर्जा और रीसायक्लिंग तकनीकों को और अधिक अपनाया जाए। इसके अलावा, कुछ नागरिक समूहों ने सुरक्षा और सुलभता के मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया, विशेषकर विकलांग यात्रियों के लिए सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया।
राजनीतिक दृष्टि से यह कदम केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहयोग को दर्शाता है, जो राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा विकास के लिए एक मॉडल बन सकता है। आर्थिक रूप से, इस परियोजना के माध्यम से निर्माण कार्य में कई
Updated: October 11, 2026