भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को शानदार वापसी करते हुए निवेशकों को बड़ी राहत दी। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट के बाद बाजार में मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों तेजी के साथ बंद हुए।
दिन के कारोबार के अंत में BSE Sensex लगभग 900 अंकों की तेजी के साथ 80,000 के करीब बंद हुआ, जबकि Nifty 50 करीब 285 अंकों की बढ़त के साथ 24,750 के ऊपर पहुंच गया। इस उछाल के साथ ही निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, गिरावट के बाद सस्ती वैल्यूएशन और कई सेक्टरों में मजबूत खरीदारी ने बाजार की तेजी को गति दी।
लगातार गिरावट के बाद बाजार में वापसी
पिछले चार दिनों से भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर चल रहा था। इसके पीछे मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव था। खासकर मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार को दबाव में रखा था।
हालांकि गुरुवार को बाजार ने इस नकारात्मक माहौल से बाहर निकलते हुए जोरदार रिकवरी दिखाई। कई बड़े निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने गिरावट का फायदा उठाते हुए बाजार में खरीदारी की।
इससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांक तेजी के साथ ऊपर चढ़ गए और बाजार में सकारात्मक माहौल बन गया।
किन सेक्टरों ने बाजार को दिया सहारा
आज के कारोबार में कई सेक्टरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। खासकर बैंकिंग, मेटल, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑयल-एंड-गैस सेक्टर के शेयरों में तेजी रही।
1. बैंकिंग सेक्टर
बैंकिंग शेयरों ने बाजार की तेजी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कई प्रमुख बैंकों के शेयरों में 2% से 4% तक की तेजी दर्ज की गई।
बैंकिंग सेक्टर में निवेशकों का भरोसा बढ़ने का कारण मजबूत आर्थिक संकेत और बेहतर लोन ग्रोथ की उम्मीद है।
2. मेटल सेक्टर
मेटल कंपनियों के शेयरों में भी शानदार उछाल देखने को मिला। वैश्विक बाजार में धातुओं की कीमतों में तेजी के कारण इस सेक्टर में खरीदारी बढ़ी।
एल्यूमिनियम और स्टील कंपनियों के शेयरों में 3% से 6% तक की तेजी देखी गई।
3. इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल गुड्स
सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और निवेश बढ़ने की उम्मीद के चलते इंफ्रा सेक्टर में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी।
इससे कई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शेयरों में तेजी दर्ज की गई।
मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी तेजी
आज के कारोबार में केवल बड़े शेयर ही नहीं बल्कि मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली।
कई मिड-कैप कंपनियों के शेयरों में 3% से 5% तक की तेजी देखी गई। इससे बाजार की चौड़ाई सकारात्मक रही।
यह संकेत देता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर निवेशकों की भागीदारी बढ़ रही है।
इन दिग्गज कंपनियों के शेयरों में आई तेजी
आज के कारोबार में कई ब्लू-चिप कंपनियों के शेयरों ने बाजार को मजबूती दी।
तेजी वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे:
- Reliance Industries
- Larsen & Toubro
- Adani Ports
- Hindalco
- Tata Steel
इन कंपनियों के शेयरों में 2% से 4% तक की तेजी देखी गई, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी को मजबूती मिली।
निवेशकों की संपत्ति में भारी बढ़ोतरी
शेयर बाजार में आई तेजी का सीधा फायदा निवेशकों को हुआ।
BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप एक ही दिन में कई लाख करोड़ रुपये बढ़ गया। इससे निवेशकों की कुल संपत्ति में भी बड़ा इजाफा हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में जब बड़े पैमाने पर खरीदारी होती है तो उसका असर पूरे बाजार की वैल्यूएशन पर दिखाई देता है।
वैश्विक बाजारों का असर
भारतीय शेयर बाजार पर हमेशा वैश्विक बाजारों का प्रभाव पड़ता है।
हाल के दिनों में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया था। इस कारण तेल की कीमतें बढ़ीं और निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बना।
लेकिन गुरुवार को एशियाई बाजारों में कुछ स्थिरता देखने को मिली, जिससे भारतीय बाजार को भी समर्थन मिला।
कच्चे तेल की कीमतें अभी भी चिंता का विषय
हालांकि बाजार में तेजी आई, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें अभी भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव पैदा कर सकती है।
यदि तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो इससे महंगाई और चालू खाता घाटा दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
विदेशी निवेशकों की भूमिका
भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बड़ी भूमिका होती है।
हाल के दिनों में एफआईआई ने भारतीय बाजार से कुछ पूंजी निकाली थी, जिससे बाजार पर दबाव बना था। लेकिन गुरुवार को घरेलू निवेशकों और म्यूचुअल फंड्स की खरीदारी ने बाजार को संभाल लिया।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि एफआईआई फिर से भारतीय बाजार में निवेश बढ़ाते हैं तो बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है।