भारत सरकार ने नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत ड्राफ्ट आयकर नियम और फॉर्म जारी कर दिए हैं, जिनका उद्देश्य कर अनुपालन को अधिक पारदर्शी बनाना, फर्जी दावों पर रोक लगाना और ऑडिटर व कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाना है। इन प्रस्तावित नियमों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए नियमों में घर किराया भत्ता (HRA) दावों में मकान मालिक के साथ रिश्ता बताना अनिवार्य होगा।
वर्तमान में, HRA दावा करते समय कर्मचारी को केवल किराये का विवरण देना होता है, लेकिन नए नियमों के तहत मकान मालिक से संबंध का खुलासा अनिवार्य होगा। कर विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए किराया दावों पर प्रभावी रोक लगेगी।
नए नियमों में विदेशी आय पर टैक्स क्रेडिट (एफटीसी) के दावों को लेकर ऑडिटर के साथ-साथ कंपनियों की जिम्मेदारी भी बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, कंपनियों के पैन आवेदन प्रक्रिया में भी सख्ती की गई है, जिसमें आवेदन के समय यह घोषणा देना अनिवार्य होगा कि कंपनी के पास पहले से कोई पैन नहीं है।
नए कर ऑडिट फॉर्म 26 के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि यदि वैधानिक ऑडिटर की रिपोर्ट में कोई प्रतिकूल टिप्पणी, अस्वीकरण या पात्रता है, तो उसका आय, हानि या बुक प्रॉफिट पर प्रभाव स्पष्ट रूप से बताया जाए। इसके अलावा, कर ऑडिट रिपोर्ट में अब इस्तेमाल किए गए अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर, क्लाउड या सर्वर का विवरण, आईपी पता, डेटा भंडारण का देश और भारत में स्थित बैकअप सर्वर का पता भी दर्ज करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए प्रावधानों से कंपनियों और करदाताओं की अनुपालन लागत बढ़ सकती है, लेकिन लंबे समय में इससे कर व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता को मजबूती मिलेगी।