पश्चिम बंगाल सरकार ने इस कानून को लागू करने से पहले की गई तैयारियों को लेकर एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया। सरकार ने दावा किया है कि इस कानून से राज्य में बाल विवाह, तलाक, और अन्य समाज कल्याण से संबंधित मुद्दों में सुधार होगा।
यूसीसी के लागू होने से पहले, पश्चिम बंगाल में शादियों में शामिल होने वाले अधिकारियों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह कदम राज्य में पारंपरिक और आधुनिक परंपराओं को संतुलित करने में मदद करेगा।
शादियों में शामिल होने वाले अधिकारियों का कहना था, यूसीसी के आने से राज्य में शादियों की प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दे हल होंगे। इससे रिश्तेदारों और दामादों के अधिकारों को भी सुरक्षित रखा जाएगा।
कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस कदम का विरोध करने की बात कही और कहा कि सरकार को यह विधेयक भारतीय संविधान के तहत आने वाली सभी अधिकारों और संपत्ति को बचाने के बारे में एक संक्षिप्त समीक्षा कर्ना चाहिए।
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा यूसीसी लागू करने से शादियों की प्रक्रिया में परिवर्तन आएगा और मुख्य रूप से यह इस तथ्य से है कि सभी शादियों के लिए एक ही कानून लागू होगा। इससे बाल विवाह, तलाक, और दहेज जैसे मुद्दों को कम करने में मदद मिल सकती है।
पश्चिम बंगाल में यूसीसी लागू करने के बाद, कई राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तन होंगे। पहले तो यह राज्य सरकार के लिए एक बड़ा प्रदर्शन होगा। सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भी, यह कदम पश्चिम बंगाल को सामाजिक और आर्थिक प्रमुख राज्य के रूप में स्थापित करने में सहायक हो सकता है।
पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने केंद्र सरकार का समर्थन प्राप्त करने के लिए कोशिशें की रही हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया है कि यूसीसी लागू होने से राज्य में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के लिए एक नया अधिकार क्षेत्र स्थापित किया जाएगा।
यूसीसी को लागू करने के विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम राज्य में प्रचारणात्मक महत्व का होगा। इससे महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर सरकार का नज़र रखने में मदद मिल सकती है।
पश्चिम बंगाल सरकार के इस कदम के परिणामस्वरूप कई संभावित लाभ होंगे। यह राज्य में नागरिक कल्याण और मौलिक अधिकारों के विकास की दिशा में एक प्रमुख कदम होगा।
यूनिफॉर्म सिविल कोड की शुरुआत पश्चिम बंगाल में एक नए युग की शुरुआत की ओर इशारा करती है।