Bihar Election News: बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव के दौरान रिकॉर्ड मतदान को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) के सफल क्रियान्वयन ने राज्य में मतदान प्रतिशत बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 16 अगस्त 2026 को पटना पहुंचे CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि SIR के बाद बिहार में पुरुषों और महिलाओं ने बड़ी संख्या में मतदान किया और राज्य में मतदान का रिकॉर्ड टूट गया। निर्वाचन आयोग के अनुसार 2025 के विधानसभा चुनाव में बिहार का मतदान प्रतिशत 67.25 प्रतिशत रहा, जिसे राज्य में आजादी के बाद का सबसे अधिक मतदान बताया गया है।
SIR के बाद बढ़ा मतदान, CEC ने बताया अहम कारण
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार दो दिवसीय बिहार दौरे पर पहुंचे हैं। पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने बिहार में हुए SIR अभियान और उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव के मतदान के बीच संबंध पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार वह राज्य है जहां वैशाली को लोकतंत्र की जन्मस्थली माना जाता है और आयोग को गर्व है कि SIR पहली बार बिहार में सफलतापूर्वक संचालित किया गया।
CEC के मुताबिक करीब तीन महीने चले इस बड़े अभियान के बाद जब विधानसभा चुनाव हुए तो मतदाताओं की भागीदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली। उन्होंने कहा कि पुरुषों और महिलाओं ने बड़ी संख्या में मतदान किया और बिहार ने अपने पुराने मतदान रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
67.25 प्रतिशत मतदान ने बनाया नया रिकॉर्ड
नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत 67.25 प्रतिशत दर्ज किया गया। निर्वाचन आयोग के अनुसार यह बिहार में आजादी के बाद से अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है। इस चुनाव में महिला मतदाताओं की भागीदारी भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
CEC ने बिहार के मतदान प्रतिशत की तुलना अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन और जापान जैसी विकसित लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में देखे गए मतदान प्रतिशत से करते हुए कहा कि बिहार में मतदान की भागीदारी कई प्रमुख लोकतंत्रों से अधिक रही।
यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार को लंबे समय तक कम मतदान और चुनावी भागीदारी से जुड़ी कई चुनौतियों वाले राज्यों में गिना जाता रहा है। रिकॉर्ड मतदान ने राज्य की चुनावी राजनीति में मतदाताओं की बढ़ती सक्रियता को सामने रखा।
SIR क्या है और बिहार में क्यों हुआ?
Special Intensive Revision यानी SIR निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची की व्यापक जांच और पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना और मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अन्य कारणों से अयोग्य नामों को हटाना है, साथ ही पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल रखना है।
बिहार में यह प्रक्रिया 2025 विधानसभा चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर संचालित की गई थी। निर्वाचन आयोग ने इसे मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और अद्यतन बनाने के उद्देश्य से किया गया व्यापक अभियान बताया था। इसके दौरान बड़ी संख्या में मतदाता रिकॉर्ड की जांच की गई।
करीब 70 लाख नाम हटाए जाने का दावा
CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि तीन महीने चले SIR अभियान के दौरान करीब 70 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए। आयोग के अनुसार यह प्रक्रिया मतदाता सूची में मौजूद ऐसे नामों की पहचान करने के लिए की गई थी जो विभिन्न कारणों से अब पात्र नहीं थे।
हालांकि SIR बिहार में राजनीतिक रूप से बेहद विवादित भी रहा। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया और उसके प्रभाव पर सवाल उठाए थे। इसके विपरीत निर्वाचन आयोग ने इसे मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में आवश्यक कदम बताया।
विपक्ष के सवालों के बीच आयोग का बचाव
बिहार में SIR को लेकर चुनाव से पहले राजनीतिक बहस काफी तेज रही थी। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि प्रक्रिया के कारण वास्तविक मतदाताओं के नाम भी सूची से बाहर हो सकते हैं। आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए प्रक्रिया को पारदर्शी और नियमों के अनुरूप बताया था।
अब विधानसभा चुनाव के बाद CEC का यह बयान SIR को लेकर आयोग के पक्ष को और मजबूत करता है। ज्ञानेश कुमार का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बाद ही बिहार में रिकॉर्ड मतदान देखने को मिला। हालांकि SIR और मतदान प्रतिशत के बीच सीधा कारणात्मक संबंध स्थापित करने के लिए केवल दोनों घटनाओं का क्रम पर्याप्त नहीं माना जा सकता; मतदान बढ़ने में कई सामाजिक, राजनीतिक और चुनावी कारक भी भूमिका निभा सकते हैं।
महिलाओं की भागीदारी रही खास
बिहार विधानसभा चुनाव में महिलाओं की बड़ी भागीदारी भी चुनावी आंकड़ों का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। CEC ने विशेष रूप से कहा कि पुरुषों और महिलाओं दोनों ने बड़ी संख्या में मतदान किया। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य में चुनावी प्रक्रिया के प्रति व्यापक मतदाता जागरूकता और भागीदारी देखने को मिली।
महिलाओं का बढ़ता मतदान बिहार की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण चुनावी रुझान रहा है। विभिन्न चुनावों में महिला मतदाताओं की भागीदारी बढ़ने से राजनीतिक दलों की रणनीतियों में भी बदलाव आया है। ऐसे में 2025 का रिकॉर्ड मतदान केवल कुल प्रतिशत का आंकड़ा नहीं, बल्कि मतदाता समूहों की बढ़ती सक्रियता का भी संकेत है।
विकसित देशों से ज्यादा मतदान का दावा
CEC ज्ञानेश कुमार ने बिहार के मतदान प्रतिशत की तुलना अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन और जापान जैसे देशों से की। उनका कहना था कि बिहार विधानसभा चुनाव में दर्ज मतदान इन विकसित लोकतंत्रों में वर्षों के दौरान दर्ज किए गए मतदान प्रतिशत से अधिक रहा।
इस तुलना के जरिए निर्वाचन आयोग ने बिहार में लोकतांत्रिक भागीदारी के स्तर को रेखांकित किया। हालांकि अलग-अलग देशों में मतदान की गणना, चुनावी व्यवस्था, मतदाता पंजीकरण और चुनावी प्रक्रिया अलग होती है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय तुलना को व्यापक संदर्भ में देखना जरूरी है।
अब युवाओं पर आयोग का फोकस
CEC ज्ञानेश कुमार के बिहार दौरे का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य युवा मतदाताओं के बीच चुनावी जागरूकता बढ़ाना भी है। आयोग पटना में Electoral Literacy Club 2.0 और ECINET से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत कर रहा है। इसका उद्देश्य स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में चुनावी प्रक्रिया को लेकर युवाओं की समझ बढ़ाना और उन्हें लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना है।
आयोग के अनुसार Electoral Literacy Club 2.0 को डिजिटल और अनुभव आधारित प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को सिर्फ मतदान के बारे में जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की बेहतर समझ देना है।
400 से ज्यादा शिक्षण संस्थानों की भागीदारी
पटना में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में बिहार के 400 से अधिक स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्र, शिक्षक, कुलपति, प्राचार्य और संस्थानों के प्रमुखों के शामिल होने की उम्मीद है। इसके जरिए युवा पीढ़ी को मतदाता जागरूकता अभियान से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब युवा मतदाता देश और राज्यों के चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच चुनावी जानकारी को तथ्यात्मक और विश्वसनीय तरीके से युवाओं तक पहुंचाना निर्वाचन आयोग की बड़ी प्राथमिकता बन गया है।
500 बूथ लेवल अधिकारियों से भी संवाद
CEC बिहार दौरे के दौरान करीब 500 बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) से भी संवाद करेंगे। यह बैठक राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में प्रस्तावित है। इसमें BLOs से जमीनी स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं, मतदाता सेवाओं और चुनावी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।
BLO चुनावी व्यवस्था और मतदाताओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। मतदाता सूची के सत्यापन, नए मतदाताओं के पंजीकरण और रिकॉर्ड में सुधार जैसे कार्यों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए उनके अनुभवों से चुनावी व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार किए जा सकते हैं।
बिहार से देशभर में SIR का विस्तार
बिहार में SIR के बाद निर्वाचन आयोग ने इस प्रक्रिया को अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तार देने की दिशा में कदम बढ़ाया। बिहार में हुए अनुभव को आयोग व्यापक मतदाता सूची सुधार प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण मानता है।
हालांकि दूसरे राज्यों में SIR को लेकर भी राजनीतिक और कानूनी बहस सामने आई है। इसका कारण यह है कि मतदाता सूची में किसी भी बदलाव का सीधा संबंध नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ता है। इसलिए प्रक्रिया में पारदर्शिता, सत्यापन और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है।
SIR और रिकॉर्ड मतदान पर नई बहस
CEC के बयान के बाद अब एक नई बहस शुरू हो सकती है कि क्या मतदाता सूची के पुनरीक्षण ने वास्तव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने में योगदान दिया। आयोग इसे सकारात्मक परिणाम के तौर पर देख रहा है, जबकि राजनीतिक दल और चुनाव विशेषज्ञ मतदान में बढ़ोतरी के पीछे अन्य कारणों का भी अध्ययन कर सकते हैं।
मतदान प्रतिशत किसी एक कारक से निर्धारित नहीं होता। चुनाव में मुद्दे, राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, उम्मीदवारों की लोकप्रियता, महिला और युवा मतदाताओं की भागीदारी, चुनावी अभियान तथा स्थानीय परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए SIR को रिकॉर्ड मतदान में योगदान देने वाला एक कारक मानना और इसे अकेला कारण मानना दो अलग बातें हैं।
लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुद्धता क्यों जरूरी?
किसी भी लोकतांत्रिक चुनाव की विश्वसनीयता के लिए सटीक मतदाता सूची बेहद महत्वपूर्ण है। यदि मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम सूची में बने रहते हैं या एक व्यक्ति का नाम कई जगह दर्ज होता है, तो चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।
दूसरी ओर, पात्र मतदाता का नाम गलती से हट जाना भी उतनी ही गंभीर समस्या है। इसलिए SIR जैसी प्रक्रिया की सफलता का वास्तविक मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि उसने अपात्र नाम हटाने के साथ-साथ पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार की कितनी प्रभावी तरीके से रक्षा की।
बिहार से निकला बड़ा चुनावी संदेश
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड मतदान ने राज्य की चुनावी तस्वीर में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दिया। अब CEC ज्ञानेश कुमार द्वारा SIR को इस रिकॉर्ड भागीदारी से जोड़ने के बाद मतदाता सूची सुधार और मतदान भागीदारी के बीच संबंध पर चर्चा और तेज हो सकती है।
निर्वाचन आयोग के लिए आगे की चुनौती यह होगी कि मतदाता सूची को सटीक रखने के साथ-साथ मतदाताओं का भरोसा भी कायम रहे। विशेष रूप से डिजिटल युग में चुनावी प्रक्रिया को लेकर गलत सूचना और राजनीतिक आरोपों के बीच आयोग के लिए पारदर्शी संवाद बेहद जरूरी होगा।
निष्कर्ष: रिकॉर्ड मतदान से आगे भरोसे की चुनौती
CEC ज्ञानेश कुमार का बयान बिहार के चुनावी इतिहास में रिकॉर्ड मतदान और SIR को लेकर एक महत्वपूर्ण दावा सामने रखता है। नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में 67.25 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जिसे निर्वाचन आयोग ने राज्य का अब तक का सबसे ऊंचा मतदान प्रतिशत बताया। आयोग के अनुसार SIR के बाद पुरुषों और महिलाओं की बड़ी भागीदारी ने इस रिकॉर्ड को हासिल करने में योगदान दिया।
लेकिन इस उपलब्धि का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल रिकॉर्ड मतदान नहीं, बल्कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता और मतदाताओं के भरोसे को बनाए रखना है। SIR को लेकर राजनीतिक विवाद अपनी जगह है, लेकिन यदि भविष्य में आयोग पारदर्शी पुनरीक्षण, पात्र मतदाताओं की सुरक्षा और युवा मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी को एक साथ सुनिश्चित कर पाता है, तो बिहार का चुनावी अनुभव देश के लिए एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकता है।
बिहार में रिकॉर्ड मतदान ने यह जरूर दिखाया है कि मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए तैयार हैं। अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि हर पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची में हो, हर मतदाता को मतदान का अवसर मिले और पूरी चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा लगातार मजबूत होता रहे।