पिछले दो वर्षों में इस समूह ने अपनी विस्तार योजना को तेज़ी से लागू किया, विशेषकर बिहार के पटना, हरियाणा के गुरुग्राम और दिल्ली के नई दिल्ली में कई हाई-एंड होटलों की स्थापना की। इन परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर बैंकों से लोन लिया गया, जबकि वास्तविक निर्माण कार्य में कई बार ठेकेदारों को अनुबंध नहीं दिया गया। इस कारण से कई होटलों की निर्माण प्रक्रिया अटक गई और ऋण की अदायगी में देरी बढ़ी। इस पृष्ठभूमि ने ED को इस धोखाधड़ी की सच्चाई उजागर करने के लिए कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया।
रात 21 अगस्त को, ED ने पटना में स्थित “सूर्य होटल” के मुख्यालय में पहले कदम रखे। तेज़ी से किए गए तलाशी में प्रमुख दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और बैंकिंग लेनदेन की सटीक जानकारी बरामद की गई। इसी समय, गुरुग्राम के “हेरिटेज रिसॉर्ट” के प्रबंधन कार्यालय में भी छापेमारी की गई, जहाँ कई बड़े फाइलें और लैपटॉप जब्त किए गए। दिल्ली के “डेल्टा होटल” के मुख्य कार्यालय में भी इसी तरह की कार्रवाई हुई, जिससे 6 प्रमुख प्रबंधकों को हिरासत में लिया गया। इन सभी घटनाक्रमों में ED ने “हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन” और “स्टेट बैंकों” के सहयोगी कर्मचारियों को भी गिरफ्तार किया।
तलाशी के दौरान मिली जानकारी से पता चला कि समूह ने 2019 से 2022 के बीच लगभग 30 अलग-अलग ऋण आवेदन दायर किए थे। इन सभी में ऋण राशि का औसत 4.3 करोड़ था, जो कई बार वास्तविक आय से अधिक था। फर्जी प्रोजेक्ट रिपोर्ट में दिखाए गए निर्माण लागत, रोजगार आँकड़े और आय अनुमान वास्तविक डेटा से काफी अलग थे। इस प्रकार, ऋण मंजूरी प्रक्रिया में बैंकों ने पर्याप्त जांच नहीं की, जिससे समूह ने बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी कर ली।
ED ने इस मामले में प्रमुख बैंकों के 12 वरिष्ठ अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया है। पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ कि कई ऋण फॉर्म में संशोधित दस्तावेज़, नकली हस्ताक्षर और फर्जी प्रमाण पत्र शामिल थे। इन बैंकों के भीतर कुछ शाखा प्रबंधकों ने समूह को “विशेष छूट” प्रदान की, जिससे ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया तेज़ हुई। इस पर बैंकों ने कहा कि वे सभी प्रक्रियाओं को पुनः जांचेंगे और दोषी कर्मियों को दंडित करेंगे।
होटल समूह के प्रमुख, श्री अजय सिंह, जिन्हें “एशियाई होटल ग्रुप” के चेयरमैन के रूप में जाना जाता है, ने हिरासत में रहने के दौरान कहा कि वह सभी आरोपों को “भ्रामक” और “राजनीतिक” कहकर खारिज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका समूह वैध व्यवसायिक संचालन कर रहा था और सभी ऋण बैंकिंग नियमों के तहत लिये गये थे। इस बीच, समूह के मुख्य वित्तीय अधिकारी ने कहा कि “हमें अभी तक कोई स्पष्ट कारण नहीं मिला कि क्यों इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं”।
बैंकों की ओर से, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने कहा कि वह इस मामले की पूरी जांच कर रही है और “सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं”। एक्सिस बैंक ने कहा कि “हमें इस प्रकार की घोटालियों से बचने के लिए अपने जोखिम प्रबंधन को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है”। राष्ट्रीय बैंक ने भी कहा कि वह “कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करेगा और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई करेगा”।
राजनीतिक वर्ग से तुरंत प्रतिक्रिया आई। बिहार की प्रमुख पार्टी के नेता ने कहा कि यह “एक बड़ी वित्तीय घोटाला है, जिसका सामना करना आवश्यक है”।
Updated: September 11, 2026
The hotel‑loan scam exposes how lax credit vetting lets charismatic entrepreneurs turn phantom projects into real‑world defaults, warning banks that rapid growth can mask systematic fraud.