Samastipur Electricity Theft News: बिहार के समस्तीपुर जिले में बिजली चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एनबीपीडीसीएल) ने पूसा क्षेत्र स्थित एक बर्फ निर्माण फैक्ट्री में कथित रूप से लंबे समय से चल रही बिजली चोरी का पता लगाया है। विभागीय जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में बिजली मीटर को दरकिनार कर सीधे विद्युत आपूर्ति का उपयोग किया जा रहा था, जिससे बिजली कंपनी को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ।
प्राथमिक जांच और तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर बिजली विभाग ने लगभग 42 लाख 85 हजार 775 रुपये की राजस्व क्षति का अनुमान लगाया है। मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित उपभोक्ता के विरुद्ध भारतीय विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
डिजिटल निगरानी से मिली पहली जानकारी
बिजली चोरी की यह घटना उस समय सामने आई जब एनबीपीडीसीएल मुख्यालय द्वारा संचालित डिजिटल निगरानी प्रणाली में संबंधित औद्योगिक कनेक्शन की खपत संबंधी आंकड़ों की समीक्षा की जा रही थी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार निगरानी के दौरान पाया गया कि फैक्ट्री में व्यावसायिक गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित होने के बावजूद बिजली मीटर में दर्ज खपत बेहद कम दिखाई दे रही थी।
खपत के आंकड़ों और औद्योगिक गतिविधियों के स्तर के बीच मौजूद इस असामान्य अंतर ने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। प्रारंभिक विश्लेषण के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच कराने का निर्णय लिया गया।
डिजिटल सर्विलांस से प्राप्त संकेतों के आधार पर अधिकारियों ने आशंका जताई कि बिजली का वास्तविक उपयोग मीटर में दर्ज नहीं हो रहा है। इसी संदेह को सत्यापित करने के लिए संयुक्त जांच अभियान की योजना तैयार की गई।
एसटीएफ और बिजली विभाग की संयुक्त कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के बाद बिजली विभाग और विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की संयुक्त टीम का गठन किया गया। टीम को फैक्ट्री परिसर में अचानक निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
गुरुवार की सुबह तड़के करीब पांच बजे अधिकारियों ने पूसा स्थित बर्फ निर्माण इकाई पर छापेमारी की। कार्रवाई को गोपनीय रखा गया ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी छेड़छाड़ या साक्ष्यों को मिटाने की संभावना न रहे।
निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि फैक्ट्री पूरी क्षमता से संचालित हो रही थी। मशीनें चल रही थीं और उत्पादन कार्य जारी था। हालांकि जब अधिकारियों ने मीटर में दर्ज हो रही बिजली खपत की जांच की तो स्थिति चौंकाने वाली थी। मीटर में खपत का आंकड़ा वास्तविक उपयोग की तुलना में अत्यंत कम या लगभग नगण्य पाया गया।
यहीं से अधिकारियों का संदेह और मजबूत हो गया कि विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में अवैध हस्तक्षेप किया गया है।
तकनीकी जांच में सामने आया मीटर बाईपास
प्रारंभिक निरीक्षण के बाद विशेषज्ञों द्वारा विद्युत कनेक्शन, मीटरिंग सिस्टम और वितरण व्यवस्था की विस्तृत तकनीकी जांच की गई। जांच के दौरान यह पाया गया कि मीटर के इनपुट सिस्टम को बाईपास कर विद्युत आपूर्ति सीधे औद्योगिक लोड तक पहुंचाई जा रही थी।
अधिकारियों के अनुसार इस व्यवस्था के कारण फैक्ट्री में उपयोग की जा रही बिजली का बड़ा हिस्सा मीटर में दर्ज ही नहीं हो रहा था। परिणामस्वरूप वास्तविक खपत और बिलिंग के बीच भारी अंतर पैदा हो गया था।
बिजली विभाग का कहना है कि इस प्रकार की तकनीकी छेड़छाड़ केवल राजस्व हानि का कारण नहीं बनती बल्कि संपूर्ण वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता और सुरक्षा पर भी असर डालती है। अवैध कनेक्शन और मीटर बाईपास जैसी गतिविधियां दुर्घटनाओं तथा विद्युत तंत्र में खराबी की आशंका को भी बढ़ा देती हैं।
80 केवीए का मिला औद्योगिक भार
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने फैक्ट्री में स्थापित विद्युत उपकरणों और मशीनों का आकलन भी किया। जांच में पाया गया कि परिसर में लगभग 80 केवीए का विद्युत भार उपयोग में लिया जा रहा था।
विशेषज्ञों के अनुसार इतनी क्षमता के विद्युत भार वाली औद्योगिक इकाई में सामान्य परिस्थितियों में पर्याप्त मात्रा में बिजली की खपत दर्ज होनी चाहिए। लेकिन मीटर में दिखाई दे रहे आंकड़े वास्तविक संचालन से मेल नहीं खा रहे थे।
इसी आधार पर विभाग ने बिजली चोरी की पुष्टि करते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की है।
₹42.86 लाख की अनुमानित राजस्व क्षति
तकनीकी मूल्यांकन और खपत के अनुमान के आधार पर विभाग ने कंपनी को हुए आर्थिक नुकसान की गणना की। अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक आकलन में लगभग 42 लाख 85 हजार 775 रुपये की राजस्व क्षति सामने आई है।
यह नुकसान उस बिजली उपयोग से संबंधित माना जा रहा है जो मीटरिंग प्रणाली को बाईपास कर बिना उचित बिलिंग के इस्तेमाल की गई। विभागीय सूत्रों का कहना है कि विस्तृत जांच पूरी होने के बाद क्षति का अंतिम आंकड़ा और भी स्पष्ट हो सकेगा।
बिजली कंपनियां ऐसे मामलों में नियमानुसार जुर्माना, बकाया वसूली और अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी करती हैं। इसलिए संबंधित उपभोक्ता पर आर्थिक दायित्व और बढ़ सकता है।
विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित उपभोक्ता संजीत कुमार के विरुद्ध भारतीय विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
धारा 135 बिजली चोरी से संबंधित प्रावधानों को परिभाषित करती है। इसके अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर बिजली की अवैध खपत करता है, मीटर से छेड़छाड़ करता है या वितरण प्रणाली को नुकसान पहुंचाकर बिजली उपयोग करता है तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में आर्थिक दंड के साथ-साथ अन्य वैधानिक प्रावधान भी लागू हो सकते हैं। अंतिम कार्रवाई जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय की जाती है।
छापेमारी में शामिल रहे कई अधिकारी
इस विशेष अभियान में बिजली विभाग और एसटीएफ के कई अधिकारी शामिल रहे। विभागीय जानकारी के अनुसार जांच टीम में विद्युत कार्यपालक अभियंता संजय कुमार सिंह, मदन कुमार, आनंद कुमार, सुदर्शन राज, मितु रंजन, रेयाज अहमद सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे।
अधिकारियों ने संयुक्त रूप से निरीक्षण, तकनीकी परीक्षण और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया पूरी की। कार्रवाई के दौरान आवश्यक साक्ष्य भी एकत्र किए गए ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया में उनका उपयोग किया जा सके।
बिजली चोरी रोकने के लिए बढ़ेगी निगरानी
बिजली विभाग का कहना है कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल निगरानी प्रणाली की मदद से बिजली चोरी के मामलों की पहचान पहले की तुलना में अधिक प्रभावी ढंग से की जा रही है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब उपभोक्ताओं की खपत के आंकड़ों का नियमित विश्लेषण किया जाता है। जहां कहीं भी असामान्य पैटर्न या संदिग्ध गतिविधियां दिखाई देती हैं, वहां विशेष जांच कराई जाती है।
डिजिटल सर्विलांस, डेटा एनालिटिक्स और तकनीकी निरीक्षण की संयुक्त व्यवस्था के कारण बिजली चोरी के मामलों का पता लगाने में काफी सफलता मिल रही है। विभाग भविष्य में इस प्रणाली को और मजबूत बनाने की योजना पर काम कर रहा है।
लगातार जारी रहेगा विशेष अभियान
एनबीपीडीसीएल ने स्पष्ट किया है कि बिजली चोरी के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। विभाग का मानना है कि बिजली चोरी से न केवल कंपनी को आर्थिक नुकसान होता है बल्कि ईमानदारी से बिल भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है।
अधिकारियों ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में यदि बिजली उपयोग और बिलिंग के आंकड़ों में असामान्यता पाई जाती है तो वहां तत्काल जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर छापेमारी अभियान चलाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि वे वैध तरीके से बिजली का उपयोग करें और किसी भी प्रकार की अनियमितता की सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।
प्रमुख तथ्य एक नजर में
- समस्तीपुर जिले के पूसा स्थित बर्फ निर्माण फैक्ट्री में बिजली चोरी का मामला सामने आया।
- डिजिटल निगरानी के दौरान खपत संबंधी आंकड़ों में असामान्यता पाई गई।
- एसटीएफ और बिजली विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी की।
- तकनीकी जांच में मीटर बाईपास कर सीधे बिजली उपयोग करने का मामला उजागर हुआ।
- फैक्ट्री का अनुमानित विद्युत भार लगभग 80 केवीए पाया गया।
- विभाग ने 42.85 लाख रुपये से अधिक की राजस्व क्षति का आकलन किया।
- संबंधित उपभोक्ता के खिलाफ विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 के तहत कार्रवाई शुरू की गई।
- बिजली विभाग ने भविष्य में भी ऐसे अभियानों को जारी रखने की बात कही है।
समस्तीपुर में सामने आया यह मामला दर्शाता है कि डिजिटल तकनीक और आधुनिक निगरानी प्रणालियां बिजली चोरी जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विभाग का कहना है कि भविष्य में भी इसी प्रकार की निगरानी और जांच के माध्यम से बिजली चोरी के मामलों की पहचान कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।