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Bihar News in Hindi: The BiharNews Post - Bihar No.1 News Portal

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बिहार दौरा : लालू के गढ़ से Lok Sabha Election 2024 का भरेंगे हुंकार; पिछले एक साल में बिहार का छठा दौरा होगा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज 16 सितंबर को बिहार दौरे पर रहेंगे । आगामी Lok Sabha Election 2024 को लेकर BJP पार्टी के कद्दावर नेता बिहार का दौरा कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज अमित शाह बिहार का दौरा करेंगे। गृह मंत्री का पिछले एक साल में बिहार का छठा दौरा होगा।

गृहमंत्री के आगमन को लेकर सीमा पर तैनात सशस्त्र सुरक्षा बलों के द्वारा सीमा पर ज्वाइंट पेट्रोलिंग कराई जा रही है। सीमावर्ती इलाकों में सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भारत-नेपाल के जोगबनी स्थित इंटिग्रेटेड चेक पोस्ट पर जाने का कार्यक्रम है। अमित शाह यहां पर SSB जवानों के लिए आवासीय भवन का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही SSB 56 बटालियन स्थित भवन का भी ऑनलाइन उद्घाटन करेंगे।

Amit Shah

गृहमंत्री अमित साह एक बजकर दस मिनट पर दरभंगा एयरपोर्ट से हेलीकॉप्टर से चलेंगे और एक बजकर 25 मिनट पर झंझारपुर स्टेडियम पहुंचेंगे। एक बजकर तीस मिनट पर वे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेंगे। झंझारपुर के ललित कर्पूरी स्टेडियम में दोपहर 2 बजे एक रैली को करेंगे संबोधित।

यह इलाका लालू यादव का गढ़ है। यादव और मुस्लिम, आरजेडी का MY समीकरण माना जाता है। झंझारपुर की जनसभा से अमित शाह एक साथ दो इलाकों को साधेंगे। मिथिलांचल में अमित शाह जहां पर अपनी यह सभा करेंगे यह इलाका ( दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, समस्तीपुर सुपौल, मधेपुरा, सहरसा ) सबसे अधिक यादव और मुस्लिम समुदाय बहुल क्षेत्र है। अमित शाह अपनी इस रैली से लालू के परंपरागता वोटरों में सेंघमारी करने का प्रयास करेंगे।

बिहार दौरा के क्रम में अमित शाह आज BJP कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी करेंगे। जोगबनी में लगभग एक हजार बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक होनी है जिसमें वे उन्हें 2024 चुनाव को लेकर गुरुमंत्र देंगे । माना जा रहा है कि अमित शाह बिहार दौरे पर 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिए उनके साथ बैठक भी करेंगे।

BPSC 67th Mains Result 2023: बीपीएससी 67वीं मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी

कुल 2104 अभ्यर्थी हुए सफल

मुख्य परीक्षा 30, 31 दिसंबर 2022 और 7 जनवरी 2023 को पटना में आयोजित की गई थी

bpsc
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बीपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bih.nic.in पर जाकर रिजल्ट देख सकते हैं

अभ्यर्थी BPSC 67th Mains Result 2023 ऐसे करें चेक

  • BPSC ऑफिसियल वेबसाइट bpsc.bih.nic.in पर जाएँ। 
  • आपकी स्क्रीन पर वेबसाइट का होमपेज खुल जायेगा। 
  • अब आप होमपेज पर “इनफार्मेशन काउंटर” के सेक्शन पर जाएँ।
  • यहाँ आपको BPSC 67th Main Result 2023 पर क्लिक करना है। 
  • आपके सामने BPSC 67th Main Result 2023 Pdf खुल जायेगा। 
  • अब अपने रोल नंबर से अपना रिजल्ट चेक करें। 

BPSC 67th मुख्य परीक्षा में हुए सभी सफल कैंडिडेट्स का 120 अंको का इंटरव्यू होगा, जिसके बाद ही फाइनल मेरिट लिस्ट घोषित की जाएगी। मुख्य परीक्षा रिजल्ट के 15 दिन बाद कैंडिडेट्स को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा, इंटरव्यू के एडमिट कार्ड इंटरव्यू तिथि के 1 सप्ताह पहले आधिकारिक वेबसाइट पर bpsc.bih.nic.in उपलब्ध कराये जाएंगे।  

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्र शेखर ने हिंदू धार्मिक ग्रंथ ‘रामचरितमानस’ की तुलना पोटेशियम साइनाइड से की

गुरुवार को हिंदी दिवस पर बिहार हिंदी ग्रंथ आकादमी में आयोजित कार्यक्रम को शिक्षा मंत्री संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने यह बयान दिया। उन्होंने हिंदू धार्मिक ग्रंथ रामचरितमानस की तुलना पोटेशियम साइनाइड से की। यह पहली बार नहीं है जब बिहार के मंत्री ने रामचरितमानस पर अपनी टिप्पणी से विवाद खड़ा किया है।

शिक्षा मंत्री चंद्र शेखर ने कहा, “यदि आप पचपन प्रकार के व्यंजन परोसें और उसमें पोटेशियम साइनाइड मिलाएं, तो क्या आप इसे खाएंगे? हिंदू धर्म के ग्रंथों का भी यही हाल है।” उन्होंने कहा कि बाबा नागार्जुन और लोहिया समेत कई लेखकों ने भी इसकी आलोचना की है।

“रामचरितमानस पर मेरी आपत्ति दृढ़ है, और यह जीवन भर बनी रहेगी। यहां तक ​​कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी इस पर टिप्पणी की है, ”बिहार के मंत्री ने कहा।

उन्होंने कहा, “जब तक गटर में कदम रखने वालों की जातियां नहीं बदली जाएंगी, इस देश में आरक्षण और जाति जनगणना की जरूरत रहेगी।”

शिक्षा मंत्री चंद्र शेखर के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरा। BJP प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, ”मंत्री चंद्र शेखर लगातार रामचरितमानस पर विवादित बयान दे रहे हैं। क्या नीतीश कुमार को यह बात सुनाई नहीं दे रही है? नीतीश कुमार लगातार सनातन का अपमान कर रहे हैं।”

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि चन्द्रशेखर को इससे कोई दिक्कत है तो उन्हें अपना धर्म बदल लेना चाहिए।

यह पहली बार नहीं है जब चंद्र शेखर ने रामचरितमानस पर अपनी टिप्पणी से विवाद खड़ा किया है। जनवरी में RJD मंत्री ने कहा था कि रामचरितमानस ‘समाज में नफरत फैलाता है’।

बिहार के मुजफ्फरपुर में 32 स्कूली बच्चों से सवार नाव नदी में डूबी; 10 से ज्यादा लापता

मुजफ्फरपुर । मुजफ्फरपुर से एक दुखद घटना सामने आई है। मुजफ्फरपुर जिले के बेनीबाद सहायक थाना क्षेत्र में गुरुवार को बागमती नदी में एक नाव पलट गई। बताया जा रहा है कि नाव में 30-35 बच्चे सवार थे, जिनमे महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इस घटना में एक दर्जन से अधिक बच्चे लापता बताए जा रहे हैं। बताया जाता है कि बच्चे नाव पर सवार होकर स्कूल जा रहे थे।

यह हादसा सुबह साढ़े 9 बजे गायघाट थाना क्षेत्र के बेनीबाद OP में हुआ। घटना की जानकारी मिलते ही गायघाट और बेनीबाद पुलिस के साथ SDRF-NDRF की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया और अब तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। कुछ लोगों ने तैर कर अपनी जान बचाई।

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जानकारी के अनुसार अब तक 20 बच्चों को नदी से बाहर निकाल लिया गया है और बाकी एक दर्जन से अधिक बच्चे लापता हैं। बताया जा रहा है कि बच्चों के स्कूल नदी के उस पार है और हर रोज की तरह आज भी वे सब नाव से स्कूल जा रहे थे। अचानक से नदी का बहाव तेज होने के कारण नाव पलट गई और यह हादसा हो गया। इस दर्दनाक घटना के इलाके में ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है।

इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से वो नदी पर पुल की मांग कर रहे हैं लेकिन उनकी बात को नहीं सुना गया। हादसा प्रशासन और सरकार की उदसीनता का नतीजा है। नाव पर बच्चों के साथ कुछ महिलाओं के भी सवार होने की भी बात कही जा रही है।

बिहार में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पटना की दीवारों पर BJP-RJD की लड़ाई

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर BJP-RJD के नारों से भरी राजधानी पटना की दिवार। जिससे चुनावी माहौल अभी से बनना तैयार हो गया है।

राजधानी पटना की सड़क के किनारे की दीवार पर तरह-तरह के नारे लिखे गए है। BJP द्वारा लिखवाए गए नारे के जवाब में RJD द्वारा भी नारे लिखवाए गए हैं।

पटना में आर ब्लॉक ब्रिज की दीवारों पर एक-दूसरे के बगल में ही भाजपा और राजद के नारे लिखे हुए हैं।

BJP-RJD poster

RJD के नारे

“मोदी सरकार से चाहिए छुटकारा, किसानों का है स्पष्ट इशारा”,

“मोदी सरकार से चाहिए छुटकारा, नौजवानों का है स्पष्ट इशारा”

“गरीबों का उपहास किया, मोदी सरकार ने जनता को निरासग किया”,

” बहुत हो चुकी महंगाई की मार, अबकी बार बदलेगी मोदी सरकार”

BJP के नारे

“घमंडीया गठबंधन, ना नीति, ना नियत, ना नेता”,

परिवारवाद से बनाना दूरी है, फिर एक बार मोदी जरुरी है”,

“दिया ना शिक्षा, ना दिया रोजगार,

पलटू कुमार को कबतक सहेगा बिहार”,

“हर मोर्चे पर असफल,

राष्ट्रीय जनता दल” ,

“कभी आपका तो कभी हमारा यार है,

असली बेवफा तो नीतीश कुमार है”

Land for Job Scam: गृह मंत्रालय ने CBI को लालू यादव के खिलाफ केस चलाने की दी अनुमति

नई दिल्ली। मंगलवार को लैंड फॉर जॉब घोटाला (Land for Job Scam) मामले में गृह मंत्रालय ने लालू यादव के खिलाफ CBI को केस चलाने की अनुमति दे दी है। इसकी जानकारी सीबीआई ने इस बात की जानकार एवेन्यू कोर्ट को दी गई। दलीलों पर गौर करते हुए अदालत ने मामले को 21 सितंबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

विशेष लोक अभियोजक अधिवक्ता डीपी सिंह के माध्यम से सीबीआई ने विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल को सूचित किया कि लालू प्रसाद के खिलाफ मंजूरी गृह मंत्रालय से मिल गई है, लेकिन रेलवे के तीन पूर्व अधिकारियों के खिलाफ मंजूरी अभी तक नहीं मिली है। सीबीआई ने आगे कहा कि शेष मंजूरी एक सप्ताह के भीतर प्राप्त होने की उम्मीद है।

लालू यादव 2004 से 2009 तक रेल मंत्री रहे थे। माना जा रहा है कि लालू के ऊपर रेलवे में नौकरी के बदले जमीन रजिस्ट्री कराने का मालला दर्ज था। इस मामले में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद की मुश्किलें बढ़ने वाली है।

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इसके साथ ही इस मामले में डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के खिलाफ सीबीआई की तरफ से दायर चार्जशीट पर सुनवाई एक बार फिर से टल गई है। दिल्ली का राउज एवेन्यू कोर्ट में अब 21 सितंबर को मामले की सुनवाई होगी।

हाल ही में CBI ने लैंड फॉर जॉब कथित घोटाला मामले में लालू प्रसाद समेत बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है।

CBI के अनुसार, तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री, उनकी पत्नी, बेटे, पश्चिम मध्य रेलवे (डब्ल्यूसीआर) के तत्कालीन जीएम, डब्ल्यूसीआर के दो सीपीओ, निजी व्यक्तियों सहित 17 आरोपियों के खिलाफ नामित अदालत में यह दूसरा आरोपपत्र है। नौकरी के बदले जमीन घोटाले से संबंधित एक मामले में कंपनी भी शामिल है।

सनातन विवाद में कूदे RJD के बिहार अध्यक्ष जगदानंद सिंह कहा ‘टीका लगाकर घूमने वालों ने भारत को गुलाम बनाया’

सनातन धर्म को लेकर लालू प्रसाद यादव की पार्टी RJD के बिहार अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बयान पर विवाद हो गया है। जगदानंद सिंह ने कहा कि टीका लगाकर घूमने वालों ने भारत को गुलाम बनाया है। भारत जब गुलाम हुआ तो न कर्पूरी ठाकुर थे, न लालू प्रसाद थे, न राम मनोहर लोहिया थे। सिर टीका लगाकर घूमने वालों के कारण भारत गुलाम बना।

हालाँकि JDU ने जगदानंद सिंह के बयान से किनारा किया है । JDU नेता और बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बने जमा खान ने कहा कि जदयू और जदयू के नेता नीतीश कुमार सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि जगदानंद सिंह को इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। देश में आपसी प्रेम और भाईचारा बना रहे यह हर किसी की जिम्मेवारी है।

जगदानंद सिंह ने RSS एवं BJP पर भी हमला बोला और कहा कि ये सिर्फ हिंदू मुसलमान करने में जुटे हैं, हिंदू- मुसलमान में भारत को बांटने से काम नहीं चलेगा। बना लो मंदिर और तोड़ तो मस्जिद, इससे भारत नहीं चलेगा। उन्होंने सनातन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिसमें भेदभाव हो, लोगों को जाति के नाम पर बांटा जाए, वो धर्म नहीं होता है।

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इस बयान ने बिहार में सियासी घमासान मच गया। BJP इसका विरोध कर रही है। जगदानंद सिंह के बयान पर पटलवार करते हुए BJP प्रवक्ता अरविंद सिंह ने बताया कि भारत को वैसे टीकाधारी लोगों ने गुलाम बनाया था जो कुर्सी के लिए सत्ता के लिए, पद के लिए और राज के लिए अपना जमीर, जागीर और धर्म तक बेच दिया। उसी तरह से आज भी सावन में जानवरों का मांस पकाया और खाया जाता है सत्ता के लिए।

कुछ लोग मुख्यमंत्री बनने के लिए नकली बाइबिल और कुछ लोग प्रधानमंत्री बनने के लिए नकली जनेऊ धारण कर रहे हैं। ऐसे लोगों से देश को सावधान रहना होगा। पुत्र के लिए और सत्ता के लिए जो अपने धर्म का नहीं हो सका वह इस देश का क्या होगा। वह सबको बेच सकता है। और जो परवचन दे रहे हैं वह सबकुछ बेच चुके हैं।

‘बिहार में दुर्गा पूजा, छठ और दिवाली की छुट्टियां रद कर शरिया लागू किया जा सकता है’ – केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह

बिहार की नीतीश सरकार पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का बड़ा आरोप ‘कल संभव है कि बिहार में शरिया लागू कर दी जाये और हिंदू त्योहार मनाने पर रोक लग जाये’।

गिरिराज सिंह ने ये X किया है

दरअसल, बिहार सरकार के माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से मंगलवार को पत्र जारी किया गया है। इस पत्र में कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्राथमिक विद्यालयों  में कम-से-कम 200 दिन और मध्य विद्यालयों  में कम से कम 220 दिन क्लास चलना चाहिये। लेकिन चुनाव, परीक्षा, विधि-व्यवस्था, त्योहार, अनुष्ठान संबंधी आयोजन, बाढ़, प्राकृतिक आपदाओं, विभिन्न प्रकार के आयोग की परीक्षाओं /भर्ती परीक्षाओं के कारण स्कूलों में पढाई प्रभावित हो जाती है। इसके अलावा त्योहारों और अनुष्ठानों के मौके पर स्कूलों बंद होने की प्रक्रिया में एकरूपता नहीं है।

ऐसे में शिक्षा  विभाग ने ये निर्णय लिया है कि सभी राजकीय / राजकीयकृत / प्रारंभिक और माध्यमिक/ उच्च माध्यमिक विद्यालयों में साल 2023 के बचे हुए दिनों के लिए एक समान अवकाश होगा।

शिक्षा विभाग के नये आदेश ने बिहार के सरकारी स्कूलों में इस साल की 15 दिनों की छुट्टियां रद्द की है। पहले से घोषित छुट्टी के मुताबिक 30 अगस्त से 31 दिसंबर तक सरकारी स्कूलों में 25 दिन की छुट्टी होनी थी। लेकिन शिक्षा विभाग ने इसमें से 15 दिनों की छुट्टी रद्द कर दी है।

रद्द छुट्टियां ये हैं…

  • रक्षाबंधन- 30 अगस्त
  • चेहल्लूम-6 सितंबर
  • श्रीकृष्ण जन्माष्टमी-07 सितंबर
  • हरितालिका तीज-18-19 सितंबर
  • अनंत चतुर्दशी/हजरत मो. साहब की जयंती-28 सितंबर
  • महात्मा गांधी जयंती-02 अक्टूबर
  • जीवित पुत्रिका व्रत(जीउतिया)-06 अक्टूबर
  • दुर्गा पूजा/श्री कृष्ण सिंह जयंती-19 से 24 अक्टूबर
  • दीपावली, चित्रगुप्त पूजा, भैया दूज, छठ पूजा-13 से 21 नवंबर
  • गुरूनानक जयंती, कार्तिक पूर्णिमा-27 नवंबर
  • क्रिसमस डे-25 दिसंबर

अहम बात ये है कि जन्माष्टमी जैसे पर्व पर केंद्र सरकार ने एनआई एक्ट के तहत छुट्टी घोषित कर रखी है। यानि सारे सरकारी दफ्तर से लेकर बैंक तक उस दिन बंद रहेंगे लेकिन बिहार के सरकारी स्कूलों को खोलने का आदेश दिया गया है। बिहार सरकार ने 21 अक्टूबर को दुर्गा पूजा के महासप्तमी की छुट्टी घोषित कर रखी है। लेकिन शिक्षा विभाग ने महासप्तमी को स्कूल खोलने का आदेश जारी कर दिया है। 

Bihar Transfer-Posting : बिहार में SDM सहित कई अधिकारियों का हुआ तबादला; 21 अनुमंडलों में नए SDO और 48 अधिकारियों तबादला, जानें कहां-कहां हुई ट्रांसफर-पोस्टिंग

पटना । रविवार को बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने व्यापक पैमाने पर ट्रांसफर-पोस्टिंग की । बिहार प्रशासनिक सेवा के चार दर्जन अफसरों के साथ IAS अफसर का भी स्थानांतरण आदेश जारी किया। तबादले किये अधिकारीयों में कई अनुमंडल पदाधिकारी और लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के साथ ही परिवहन एवं अन्य विभागों के अधिकारी शामिल है। इसमें कई अधिकारियों को नई जिम्मेवारी दी गई है तो कई कई अधिकारियों को साइडलाइन किया गया है।

बिहार सरकार ने 21 अनुमंडल में नए SDO की पोस्टिंग की है। बिहार प्रशासनिक सेवा के मूल कोटि और उप सचिव स्तर के अफसरों का ट्रांसफर किया गया है। कुल 48 अधिकारी इधर से उधर हुए हैं। 48 में से कुल 22 अधिकारियों को अनुमंडल पदाधिकारी के पद पर तैनाती की गई है। अनीता सिंह को अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी जहानाबाद बनाया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी अधिसूचना रविवार को जारी की है।

Bihar Transfer-Posting : जानें कहां-कहां हुई ट्रांसफर-पोस्टिंग

  • समाज कल्याण विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी इंद्रवीर कुमार को सुपौल सदर का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • पटना निवासी पश्चिमी चंपारण के जिला भू अर्जन पदाधिकारी नीरज कुमार को सुपौल में वीरपुर का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।  
  • बक्सर निवासी सारण में मढ़ौरा के अपर अनुमंडल पदाधिकारी नलिन प्रताप राणा को पूर्वी चंपारण के पकड़ी दयाल का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • मुख्यमंत्री सचिवालय के विशेष कार्य पदाधिकारी कुमार ओमकेश्वर को नालंदा में राजगीर का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • भागलपुर निवासी बक्सर के जिला पंचायत राज पदाधिकारी उमेश कुमार भारती को दरभंगा में बिरौल का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • जहानाबाद निवासी नालंदा के वरीय उप समाहर्ता आशुतोष रंजन को रोहतास में सासाराम सदर का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • मधेपुरा निवासी बेगूसराय के वरीय उप समाहर्ता संजीत कुमार को भोजपुर के जगदीशपुर का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • औरंगाबाद निवासी जहानाबाद की अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी श्रेया कश्यप को भोजपुर जिला के पीरो का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
Police transfer
  • मुख्यमंत्री सचिवालय के विशेष कार्य पदाधिकारी किसलय श्रीवास्तव को गया सदर का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • पटना निवासी कैमूर के अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी सुजीत कुमार को गया में टेकारी का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • रोहतास निवासी जमुई के अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अनुग्रह नारायण सिंह को गया में शेरघाटी का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • रोहतास निवासी हाजीपुर की अपर अनुमंडल पदाधिकारी डॉक्टर प्रेरणा सिंह को सारण मढ़ौरा का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • भागलपुर निवासी सोनपुर के अनुमंडल पदाधिकारी सुनील कुमार को सीवान में सीवान सदर का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • गया निवासी शेखपुरा के वरीय उपसमाहर्ता अमित कुमार को मुजफ्फरपुर के मुजफ्फरपुर पूर्वी का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • मुख्यमंत्री सचिवालय के विशेष कार्य पदाधिकारी सूर्य प्रकाश गुप्ता को पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • मुजफ्फरपुर निवासी सिवान सदर के अनुमंडल पदाधिकारी रामबाबू बैठा को वैशाली में हाजीपुर सदर का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • पूर्णिया निवासी कटिहार की जिला पंचायत राज पदाधिकारी रोजी कुमारी को अररिया में फारबिसगंज का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • सीवान निवासी सीतामढ़ी के पुपरी अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अरुण कुमार को पूर्वी चंपारण में अरेराज का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  •  नवादा निवासी भोजपुर के जगदीशपुर की अनुमंडल पदाधिकारी सीमा कुमारी को शिवहर का जिला पंचायत राज पदाधिकारी बनाया गया है।
  • बक्सर निवासी भोजपुर में पीरो के अनुमंडल पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार को पश्चिम चंपारण का जिला भू अर्जन पदाधिकारी बनाया गया है।
  • समस्तीपुर निवासी अररिया के वरीय उपसमाहर्ता विजय कुमार को कैमूर में भभुआ अनुमंडल पदाधिकारी के रूप में नियुक्ति मिली है।
  • आपदा प्रबंधन विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी अविनाश कुमार को जहानाबाद सदर का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • कटिहार निवासी शिवहर के वरीय उपसमाहर्ता अशोक कुमार मंडल को भागलपुर में कहलगांव का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • पटना निवासी नालंदा के राजगढ़ की अनुमंडल पदाधिकारी अनिता सिन्हा को जहानाबाद का अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी बनाया गया है।
  • पटना निवासी सासाराम के अनुमंडल पदाधिकारी मनोज कुमार को अररिया का जिला परिवहन पदाधिकारी बनाया गया है।
  • पटना निवासी भभुआ अनुमंडल पदाधिकारी साकेत कुमार को सीतामढ़ी में पुपरी का अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी बनाया गया है।
  • भागलपुर निवासी सारण के जिला भू अर्जन पदाधिकारी नवनील कुमार को अररिया सदर का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है।
  • पश्चिमी चंपारण निवासी मुजफ्फरपुर पूर्वी के अनुमंडल पदाधिकारी ज्ञान प्रकाश को जिला पंचायत राज पदाधिकारी बक्सर के रूप में नियुक्ति मिली है।
  • सीवान निवासी पश्चिमी चंपारण के नरकटियागंज अनुमंडल पदाधिकारी धनंजय कुमार को अररिया का जिला पंचायत राज पदाधिकारी बनाया गया है।
  • नालंदा निवासी पूर्वी चंपारण के अरेराज अनुमंडल पदाधिकारी संजीव कुमार को सहरसा का जिला पंचायत राज पदाधिकारी बनाया गया है।
  • रोहतास निवासी गया सदर के अनुमंडल पदाधिकारी राजेश कुमार को सारण का जिला भू अर्जन पदाधिकारी बनाया गया है।
  • पटना निवासी गया के टेकारी की अनुमंडल पदाधिकारी करिश्मा को कैमूर का अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी बनाया गया है।
  • मधुबनी निवासी गया के शेरघाटी अनुमंडल पदाधिकारी अनिल कुमार रमण को जमुई का अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी बनाया गया है।
  • अरवल निवासी जहानाबाद सदर के अनुमंडल पदाधिकारी मनोज कुमार को किशनगंज का अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी बनाया गया है।
  • बक्सर निवासी सारण मढ़ौरा के अनुमंडल पदाधिकारी योगेंद्र कुमार को कटिहार जिला पंचायत राज पदाधिकारी बनाया गया है।
  • रोहतास निवासी पूर्वी चंपारण के पकड़ी दयाल अनुमंडल पदाधिकारी कुमार रविंद्र को पश्चिम चंपारण का जिला आपूर्ति पदाधिकारी बनाया गया है।
  • सहरसा निवासी वैशाली के हाजीपुर अनुमंडल पदाधिकारी अरुण कुमार को किशनगंज का जिला परिवहन पदाधिकारी बनाया गया है।
  • सीतामढ़ी निवासी दरभंगा के बिरौल अनुमंडल पदाधिकारी संजीव कुमार कापर को समस्तीपुर का जिला भू अर्जन पदाधिकारी बनाया गया है।

तेजस्वी यादव ने बिहार में एक्सप्रेसवे की मांग को लेकर की नितिन गडकरी से मुलाकात; बिहार में एक्सप्रेसवे की मांग की

नई दिल्ली । बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से बिहार के कई परियोजनाओं को लेकर मुलाकात की। तेजस्वी यादव ने कहा कि नितिन गडकरी से बहुत सकरात्मक बातचीत हुई है। नितिन गडकरी एक सकरात्मक व्यक्ति है और वो विकास को लेकर बहुत सकरात्मक रहते हैं।

दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। बातचीत के दौरन डिप्टी सीएम तेजस्वी ने केंद्रीय मंत्री से बिहार में एक्सप्रेसवे नहीं होने पर बात की। मुलाकात के दौरान तेजस्वी ने बिहार में परिवहन के विकास से जुड़ी कई मांगें रखीं।

बैठक में बक्सर से भागलपुर तक एक्सप्रेसवे, गंगा पर जेपी सेतु के समानांतर पुल, पटना से कोइलवर और अनीसाबाद से दीदारगंज के बीच एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण की मांग की गई. इसके अलावा केंद्र की लंबे अरसे से लंबित परियोजनाओं जैसे पटना-गया, हाजीपुर-छपरा, महेशखूंट-सहरसा-पूर्णिया एनएच, मुजफ्फरपुर बाईपास को शीघ्र पूर्ण कराने पर भी विमर्श हुआ।

मुलाकात के बाद तेजस्वी ने कहा कि नितिन गडकरी ने अपनी विशेष गाड़ी ‘हाइड्रोजन कार’ आजमाने के लिए कहा और इससे वो अपने आवास चल रहे हैं। यह कार इसलिए भी अहम है क्योंकि इस कार की अभी देश में टेस्टिंग चल रही है। यह कार सिर्फ नितिन गडकरी के पास है जो इस कार में सफर करते हैं।

Bihar Teacher Exam 2023 : बिहार में आज से सबसे बड़ी शिक्षक भर्ती परीक्षा का आयोजन; 1.70 लाख पदों के लिए 8.10 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है, जाने परीक्षा के नियम और निर्देश

Bihar Teacher Exam 2023 : बिहार में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा सबसे बड़ी शिक्षक नियुक्ति परीक्षा 24 से 26 अगस्त तक दो पालियों में आयोजित की जा रही है। 1.70 लाख पदों के लिए 8.10 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन दिया है। पटना में 40 सेंटर तो सूबे में 876 सेंटर पर इस परीक्षा का आयोजन हो रहा है।

बिहार के जिला और पुलिस प्रशासन को परीक्षा को कदाचार मुक्त कराने का निर्देश दिया है। सभी केन्द्रों पर धारा 144 लागू रहेगा। हर केन्द्र पर पर्यवेक्षक रहेंगे। परीक्षा केन्द्र के 100 गज के अंदर किसी को रहने की इजाजत नहीं दी जाएगी। परीक्षा को लेकर अफवाह फैलाने वालों पर विशेष नजर रखी जाएगी। खासकर फर्जी प्रश्न पत्र वायरल करने वाले गैंग पर प्रशासन की विशेष नजर होगी।

कोई भी बिना अनुमति के परीक्षा केन्द्र से बाहर नहीं निकल सकते । परीक्षा में प्रश्न पत्र सीधे परीक्षा हॉल में भेजा जाएगा और अभ्यर्थियों के समक्ष खोला जाएगा। परीक्षा समाप्ति के बाद OMR सीट सील होगी। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी। इसबार आयोग ने OMR बॉक्स को सील करने के लिए एक जैकेट तैयार किया है।

Bihar Teacher Exam 2023 : जाने परीक्षा के नियम और निर्देश

  • अभ्यर्थियों को परीक्षा केन्द्रों पर प्रथम पाली 0730 बजे पूर्वाह्न एवं द्वितीय पाली 0100 बजे अपराह्न से प्रवेश दिया जायेगा। परीक्षा केन्द्र पर ढाई घंटे पहले अभ्यर्थियों को पहुंचना होगा। जांच-पड़ताल के बाद एक घंटे पहले परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया जाएगा। पेपर शुरू होने से एक घंटा पहले गेट बंद कर दिए जाएंगे।
  • परीक्षा में बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज होगी। आंख की पुतली का मिलान करने के साथ एडमिड कार्ड का भी मिलान किया जाएगा। अभ्यर्थियों को परीक्षा केन्द्र पर ढाई घंटे पहले पहुंचना होगा। एक घंटे पहले परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया जाएगा।
  • सभी अभ्यर्थियों के लिए हर शिफ्ट में ई एडमिट कार्ड की एक एक्स्ट्रा कॉपी अपने साथ परीक्षा केंद्र ले जाना अनिवार्य होगा। परीक्षा के दौरान वीक्षक के सामने हस्ताक्षर कर उन्हें देना होगा।
  • परीक्षा केन्द्र पर छात्रों को सिर्फ ब्लैक, ब्लू बॉल पेन और व्हाइट बॉल पेन के साथ प्रवेश मिलेगा। हर तरह के इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट पर रोक होगी।
  • परीक्षार्थी अपने ऑनलाईन आवेदन में भरे गये मूल फोटो पहचान पत्र साथ में रखना सुनिश्चित करेंगे।
  • इस परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रकृति होगी। परीक्षार्थियों को मार्कर परीक्षा कक्ष में ले जाना वर्जित है।
  • परीक्षा समाप्ति के बाद भी अभ्यर्थी बिना वीक्षक की अनुमति के बाहर नहीं निकल सकते।

Bihar Teacher Exam 2023

परीक्षा केंद्र सभी 38 जिलों में बनाए गए हैं। तीन दिन तक चलने वाली परीक्षा को देखते हुए सभी जिला मुख्यालयों के होटल और लॉज की बुकिंग अभ्यर्थियों ने पहले ही करा ली है। होटल में कमरे फुल हो चुके हैं। अभ्यर्थी सगे- संबंधियों और जाननेवालों के यहां भी पहुंच रहे हैं।

पटना हाईकोर्ट ने बिहार में जाति सर्वेक्षण के दौरान ट्रांसजेंडरओं को जाति की सूची में रखने के खिलाफ दायर हुई जनहित याचिका को निष्पादित करते हुए यह कहा है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को भूल वश ही जाति की सूची में दर्ज किया गया है

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में जाति सर्वेक्षण के दौरान ट्रांसजेंडरओं को जाति की सूची में रखने के खिलाफ दायर हुई जनहित याचिका को निष्पादित करते हुए यह कहा है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को भूल वश ही जाति की सूची में दर्ज किया गया है। उन्हे इस सर्वेक्षण में एक जाति विशेष ना मानते हुए एक अलग ग्रुप माना जाए जिनकी अपनी एक निश्चित पहचान है।

चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने रेशमा प्रसाद की जनहित याचिका पर सुनवाई की।इन्ही ग्रुप के सदस्यों की सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक हालात से जुड़े जो आंकड़े जुटाए गए, वही तय करेंगे कि ट्रांस जेंडर के सामाजिक उत्थान के लिए उन्हे कल्याणकारी योजनाओं की कितनी ज़रूरत है ।

याचिकाकर्ता जो स्वयं एक ट्रांसजेंडर समुदाय से है, उसने हाई कोर्ट से अनुरोध किया कि जाति सर्वेक्षण के आंकड़े जुटाना में एन्यूमैरेटरों को जो फार्म दिया गया है, उस फॉर्म में ट्रांसजेंडर को जाति की सूची में उल्लेखित किया गया है।

Patnahighcourt

ये ट्रांसजेंडरों के अलग अस्तित्व एवं पहचान होने के मौलिक अधिकार का हनन है।राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि 24 अप्रैल,2023 को ही सभी जिला अधिकारियों को यह सूचित किया गया कि वह ट्रांसजेंडररो का जेंडर तय करने के लिए महिला पुरुष के साथ एक तीसरा विकल्प (बॉक्स )भी रखे,जो “अन्य” के नाम से जाना जाएगा ।

ट्रांसजेंडर इसी तीसरे विकल्प को भरेंगे।साथ ही वे जिस जाति से होंगे, वो जाति का उल्लेख करेंगे।

हाई कोर्ट ने कहा कि चूंकि जाति सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, इसलिए जनहित याचिकाकर्ता को या उसके ट्रांसजेंडर समुदाय के किसी भी सदस्यों को यह छूट दिया कोर्ट ने कि वह अपने जेंडर को तीसरे विकल्प में और अपनी जाति, जिसमें वह आते हैं।उसे जाति का विकल्प चुनने के लिए राज्य सरकार को अलग से अर्ज़ी दे सकते है।

बिहार में झमाझम बारिश का दौर फिलहाल जारी रहेगा; मौसम विभाग ने वर्षा, मेघ गर्जन और ठनका का अलर्ट किया जारी

मॉनसून की सक्रियता से बिहार में पिछले कुछ दिनों से झमाझम बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने शनिवार 12 अगस्त को भी उत्तर बिहार में कुछ जगहों पर भारी बरसात की चेतावनी जारी की है।

सावन में बिहार के लोगों ने उमस भरी गर्मी झेला है। बारिश के बाद एक बार फिर उमस भरी गर्मी से सभी परेशान हुए। लोग लंबे समय से यहां झमाझम वर्षा का इंतजार कर रहे थे। इसके बाद बारिश की गतिविधि बढ़ी है। 3 दिनों से बारिश हो रही है ।

बिहार में बारिश को लेकर मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। वर्षा, मेघ गर्जन और ठनका की चेतावनी है। राज्यभर में विभाग ने अलर्ट जारी किया है।

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मौसम विज्ञान केंद्र पटना के पूर्वानुमान के मुताबिक शनिवार को पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी और सुपौल जिले के कुछ इलाकों में अति भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सावधान रहने के लिए कहा गया है। वहीं, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, शिवहर, सहरसा एवं पूर्णिया जिले में भी कहीं-कहीं भारी बारिश की आशंका है।

बिहार में झमाझम बारिश का दौर फिलहाल एक-दो दिन और चलेगा। 14 अगस्त के बाद मॉनसून संबंधी गतिविधियों में कमी आने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक शुक्रवार को बीते 24 घंटे के भीतर दरभंगा और मधुबनी जिले में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई। दरभंगा के हायाघाट में 89, घनश्यामपुर में 88 और मधुबनी के मधेपुर में 86 मिलमीटर पानी गिरा।

पश्चिम चंपारण समेत चार जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, तो मुजफ्फरपुर और पूर्णिया समेत पांच जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी हुआ है। इसके साथ ही उत्तर, उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व बिहार सीमांचल में शनिवार को वज्रपात यानी ठनका गिरने की भी आशंका है।

SC ने बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन की समयपूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली पूर्व IAS अधिकारी जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया की याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी

SC ने शुक्रवार को बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन की समयपूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली पूर्व IAS अधिकारी जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया की याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और दीपांकर दत्ता की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की तारीख 26 सितंबर तय करते हुए कहा, हम इसे सितंबर में किसी भी गैर-विविध दिन पर उठाएंगे।

बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पूर्व सांसद आनंद मोहन को मिली सजा में छूट के संबंध में मूल रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश किया है।

शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया को मामले से संबंधित मूल फाइलों की प्रति प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार के समक्ष आवेदन करने को कहा।

AnandMohan in SC

सुनवाई के दौरान, बिहार सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने पीठ को अवगत कराया कि बिहार सरकार ने एक ही दिन में 97 दोषी व्यक्तियों की सजा में छूट पर विचार किया और उसने केवल गैंगस्टर से नेता बने आनंद मोहन सिंह को सजा में छूट नहीं दी। इस पर, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने कहा, क्या इन सभी 97 लोगों पर एक लोक सेवक की हत्या का आरोप लगाया गया था? उनका मामला यह है कि आनंद मोहन को रिहा करने के लिए नीति बदल दी गई।

जवाब में वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा कि वह उन दोषियों को वर्गीकृत करते हुए एक विस्तृत प्रतिक्रिया दाखिल करेंगे, जिन्हें उनके अपराध के आधार पर छूट दी गई है । सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को 2 सप्ताह की अवधि के भीतर एक अतिरिक्त जवाबी हलफनामा दायर करने की अनुमति दी ।

इसने याचिकाकर्ता को प्रत्युत्तर हलफनामा, यदि कोई हो, दाखिल करने के लिए एक सप्ताह की अवधि भी दी। मारे गए नौकरशाह की विधवा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने उन्हें मामले से संबंधित आधिकारिक फाइलों की प्रति नहीं दी है।

Breaking News : बिहार में जातीय सर्वेक्षण को हरी झंडी देने के पटना हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट में 14 अगस्त को

जस्टिस संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने पटना हाईकोर्ट द्वारा जातीय सर्वेक्षण के मामलें में 1 अगस्त, 2023 को दिये फैसले के खिलाफ गैर-सरकारी संगठन (NGO) ‘एक सोच एक प्रयास’ की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की।

वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने यह कहते हुए मामले की सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया कि इसी मुद्दे पर सुनवाई वाली अन्य याचिकाएं सूचीबद्ध नहीं हैं। उन्होंने पीठ से मामले की सुनवाई 11 अगस्त या 14 अगस्त को करने का अनुरोध किया। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने भी मामले की सुनवाई 14 अगस्त को करने का अनुरोध किया। इस पर पीठ ने सहमति जताई।

NGO ‘एक सोच एक प्रयास’ की याचिका के अलावा एक अन्य याचिका नालंदा निवासी अखिलेश कुमार ने दायर की है। इसमें दलील दी गई है कि इस कवायद के लिए राज्य सरकार की अधिसूचना संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार केवल केंद्र सरकार ही जनगणना कराने का अधिकार रखती है।

इससे पहले पटना हाईकोर्ट अपने फैसले में जातीय सर्वेक्षण को सही ठहराते हुए इसके विरुद्ध दायर सभी याचिकायों को रद्द कर दिया था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया था कि पटना हाईकोर्ट के इस मामलें में दिये गये फैसला का अध्ययन कर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

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इसके पूर्व राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केवियट दायर कर सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि इस सम्बन्ध में कोई आदेश पारित करने के पहले राज्य सरकार का भी पक्ष सुना जाये।राज्य सरकार ने पटना हाईकोर्ट के जातीय सर्वेक्षण के सम्बन्ध में आदेश आने के बाद बड़ी जोर शोर से पुनः जातीय सर्वेक्षण का कार्य प्रारम्भ कर दिया है ।

इससे पूर्व पटना हाईकोर्ट ने मई,2023 में राज्य सरकार द्वारा जातीय सर्वेक्षण कराये जाने पर अंतरिम रोक लगा दी थी।इसके बाद राज्य सरकार द्वारा कराये जा रहे जातीय सर्वेक्षण पर तत्काल विराम लग गया।

पटना हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने 3 जुलाई,2023 से 7 जुलाई,2023 तक पांच दिनों की लम्बी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा।1अगस्त,2023 को पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जातीय सर्वेक्षण को सही ठहराते हुए इसके विरुद्ध दायर सभी याचिकायों को ख़ारिज कर दिया।

पटना हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गयी है।इस मामलें पर सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई किये जाने की संभावना है ।

Breaking News : बिहार में जातिगत जनगणना पर पटना हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती पर सुनवाई आज

पटना हाईकोर्ट द्वारा जातीय सर्वेक्षण के मामलें में 1अगस्त,2023 को दिये फैसले को अखिलेश कुमार ने एक याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट चुनौती दी गयी है। जिसपर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज होगी । सुप्रीम कोर्ट की वकील तान्याश्री व अधिवक्ता ऋतु राज ने अखिलेश कुमार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किया है।

पटना हाईकोर्ट अपने फैसले में जातीय सर्वेक्षण को सही ठहराते हुए इसके विरुद्ध दायर सभी याचिकायों को रद्द कर दिया था।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया था कि पटना हाईकोर्ट के इस मामलें में दिये गये फैसला का अध्ययन कर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

इसके पूर्व राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केवियट दायर कर सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि इस सम्बन्ध में कोई आदेश पारित करने के पहले राज्य सरकार का भी पक्ष सुना जाये।राज्य सरकार ने पटना हाईकोर्ट के जातीय सर्वेक्षण के सम्बन्ध में आदेश आने के बाद बड़ी जोर शोर से पुनः जातीय सर्वेक्षण का कार्य प्रारम्भ कर दिया है ।

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इससे पूर्व पटना हाईकोर्ट ने मई,2023 में राज्य सरकार द्वारा जातीय सर्वेक्षण कराये जाने पर अंतरिम रोक लगा दी थी।इसके बाद राज्य सरकार द्वारा कराये जा रहे जातीय सर्वेक्षण पर तत्काल विराम लग गया।

पटना हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने 3 जुलाई,2023 से 7 जुलाई,2023 तक पांच दिनों की लम्बी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा।1अगस्त,2023 को पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जातीय सर्वेक्षण को सही ठहराते हुए इसके विरुद्ध दायर सभी याचिकायों को ख़ारिज कर दिया।

पटना हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गयी है।इस मामलें पर सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई किये जाने की संभावना है ।

पटना हाईकोर्ट ने भागलपुर के पास अगवानी घाट पर गंगा नदी के ऊपर बन रहे पुल के ध्वस्त होने के मामलें पर सुनवाई करते हुए निर्माण कंपनी एस पी सिंगला को अंडरटेकिंग देने को कहा कि वह अपने खर्च से पुल के ध्वस्त भाग का निर्माण करेगा

पटना हाईकोर्ट ने भागलपुर के पास अगवानी घाट पर गंगा नदी के ऊपर बन रहे पुल के ध्वस्त होने के मामलें पर सुनवाई की। अधिवक्ता मणिभूषण सेंगर व ललन कुमार की जनहित याचिकायों पर चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए निर्माण कंपनी एस पी सिंगला को हलफ़नामा दायर कर अंडरटेकिंग देने को कहा कि वह अपने खर्च से इस पुल के ध्वस्त भाग का निर्माण करेगा। इस मामलें पर अगली सुनवाई 25 अगस्त,2023 को होगी।

विकास कुमार मेहता की ओर से कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत करते हुए वरीय अधिवक्ता एस डी संजय ने कहा कि राज्य सरकार की रिपोर्ट की कॉपी उन्हें दी जाये। उस रिपोर्ट की कॉपी का अध्ययन करने के बाद वे अपना पक्ष कोर्ट के समक्ष रखेंगे।

इससे पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को घटना की पूरी जानकारी देते हलफ़नामा दायर करने का निर्देश दिया था। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दायर हलफ़नामा का जवाब देने के लिए याचिकाकर्ताओं को पुनः दो सप्ताह का समय दिया था।पिछली सुनवाई में कोर्ट में एस पी सिंगला कंपनी के एम डी एस पी सिंगला उपस्थित थे।

इससे पूर्व जस्टिस पूर्णेन्दु सिंह की सिंगल बेंच ने ग्रीष्मावकाश के दौरान ललन कुमार की याचिका पर सुनवाई की थी।उन्होंने गंगा नदी पर बन रहे खगड़िया के अगुबानी – सुल्तानगंज के निर्माणाधीन चार लेन पुल के ध्वस्त होने के मामलें को गंभीरता से लेते हुए निर्माण करने वाली कंपनी के एम डी को 21जून,2023 को कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया था।

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इस मामलें में अधिवक्ता मणिभूषण प्रताप सेंगर ने एक जनहित याचिका दायर की थी।उन्होंने अपनी जनहित याचिका में कहा कि भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण सामग्री और निर्माण कंपनी के घटिया कार्य से ये पुल दुबारा टूटा है।ये पुल 1700 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा था ।

उन्होंने इस याचिका में कहा है कि इस मामलें की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराये जाने या न्यायिक जांच कराया जाये।जो भी दोषी और जिम्मेदार है,उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने अपने जनहित याचिका में ये मांग की है कि इस निर्माण कंपनी को लिस्ट कर इससे और अन्य जिम्मेदार और दोषी लोगों से इस क्षति की वसूली की जाये।

कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता एस डी संजय व राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी के शाही और सरकारी अधिवक्ता अमीश कुमार ने पक्ष प्रस्तुत किया। इन मामलों पर अगली सुनवाई 25 अगस्त, 2023 को की जाएगी।

Breaking News : बिहार में जातिगत जनगणना पर पटना हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

पटना हाईकोर्ट द्वारा जातीय सर्वेक्षण के मामलें में 1अगस्त,2023 को दिये फैसले को अखिलेश कुमार ने एक याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट चुनौती दी गयी है। सुप्रीम कोर्ट की वकील तान्याश्री व अधिवक्ता ऋतु राज ने अखिलेश कुमार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किया है।

पटना हाईकोर्ट अपने फैसले में जातीय सर्वेक्षण को सही ठहराते हुए इसके विरुद्ध दायर सभी याचिकायों को रद्द कर दिया था।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया था कि पटना हाईकोर्ट के इस मामलें में दिये गये फैसला का अध्ययन कर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

इसके पूर्व राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केवियट दायर कर सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि इस सम्बन्ध में कोई आदेश पारित करने के पहले राज्य सरकार का भी पक्ष सुना जाये।राज्य सरकार ने पटना हाईकोर्ट के जातीय सर्वेक्षण के सम्बन्ध में आदेश आने के बाद बड़ी जोर शोर से पुनः जातीय सर्वेक्षण का कार्य प्रारम्भ कर दिया है ।

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इससे पूर्व पटना हाईकोर्ट ने मई,2023 में राज्य सरकार द्वारा जातीय सर्वेक्षण कराये जाने पर अंतरिम रोक लगा दी थी।इसके बाद राज्य सरकार द्वारा कराये जा रहे जातीय सर्वेक्षण पर तत्काल विराम लग गया।

पटना हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने 3 जुलाई,2023 से 7 जुलाई,2023 तक पांच दिनों की लम्बी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा।1अगस्त,2023 को पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जातीय सर्वेक्षण को सही ठहराते हुए इसके विरुद्ध दायर सभी याचिकायों को ख़ारिज कर दिया।

पटना हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गयी है।इस मामलें पर सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई किये जाने की संभावना है ।

भाजपा के सरकार में रहते हुआ था जातीय जनगणना कराने का निर्णय: सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने जातीय जनगणना के मुद्दे पर हाईकोर्ट के निर्णय का स्वागत किया और कहा कि बिहार में जातीय जनगणना कराने का निर्णय उस राज्य सरकार का था, जिसमें भाजपा शामिल थी और उस समय राजद विपक्ष में था।

  • हाईकोर्ट का फैसला स्वागतयोग्य, काम में तेजी लाए सरकार
  • जातीय जनगणना का श्रेय लूटने के लिए झूठे आरोप न लगाये राजद
  • विरोध में याचिका दायर करने वाले का भाजपा से कोई संबंध नहीं
  • हम ऐसी दोमुंही राजनीति नहीं करते कि जिसके खिलाफ सबूत दें, उसी से हाथ मिला लें
  • यदि मजबूती से पैरवी की गई होती तो जातीय जनगणना पर रोक नहीं लगती

श्री मोदी ने कहा कि जातीय जनगणना के विरुद्ध याचिका दायर करने वाले का भाजपा से कोई संबंध नहीं है। राजद इसका श्रेय लेने के लिए अनर्गल आरोप न लगाये।

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उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसी दोमुंही राजनीति नहीं करती कि जिसके खिलाफ जाँच एजेंसियों को सबूत जुटा कर दें, उसी से हाथ मिला कर सत्ता हथिया लें।

श्री मोदी ने कहा कि भाजपा पहले भी जातीय जनगणना के पक्ष में थी, आज हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करती है और आगे भी जातीय जनगणना का समर्थन करेगी, ताकि सभी पिछड़ी जातियों को विकास की मुख्यधारा में लाने वाले कार्यक्रम लागू हो सकें।

उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार ने मजबूती से पैरवी की होती और संवैधानिक प्रश्नों का उत्तर ठीक से दिया होता, तो जातीय जनगणना पर बीच में रोक नहीं लगती।

श्री मोदी ने कहा कि कानूनी बाधाएँ दूर होने के बाद राज्य सरकार को जातीय जनगणना का काम अब तेजी से पूरा करना चाहिए।

बिहार सरकार द्वारा बिहार में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 1अगस्त,2023 को पटना हाइकोर्ट निर्णय देगा

पटना हाइकोर्ट कल 1अगस्त,2023 को राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर निर्णय देगा। चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने इस सम्बन्ध में 3 जुलाई,2023 से पांच दिनों की लम्बी सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रखा था।

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी के शाही ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत किया था ।उन्होंने कहा कि ये सर्वे है,जिसका उद्देश्य आम नागरिकों के सम्बन्ध आंकड़ा एकत्रित करना,जिसका उपयोग उनके कल्याण और हितों के
किया जाना है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि जाति सम्बन्धी सूचना शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश या नौकरियों लेने के समय भी दी जाती है।एडवोकेट जनरल शाही ने कहा कि जातियाँ समाज का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हर धर्म में अलग अलग जातियाँ होती है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस सर्वेक्षण के दौरान किसी भी तरह की कोई अनिवार्य रूप से जानकारी देने के लिए किसीको बाध्य नहीं किया जा रहा है ।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि जातीय सर्वेक्षण का कार्य लगभग 80 फी सदी पूरा हो गया है।उन्होंने कहा कि ऐसा सर्वेक्षण राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र में है।

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इससे पहले हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए राज्य सरकार द्वारा की जा रही जातीय व आर्थिक सर्वेक्षण पर रोक लगा दिया था।कोर्ट ने ये जानना चाहा था कि जातियों के आधार पर गणना व आर्थिक सर्वेक्षण कराना क्या कानूनी बाध्यता है।

कोर्ट ने ये भी पूछा था कि ये अधिकार राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में है या नहीं।साथ ही ये भी जानना कि क्या इससे निजता का उल्लंघन होगा।

पहले की सुनवाई में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया था कि राज्य सरकार ने जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत करते हुए अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि सर्वेक्षण कराने का ये अधिकार राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र के बाहर है।ये असंवैधानिक है और समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को ये भी बताया था कि राज्य सरकार जातियों की गणना व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होनें ने बताया कि ये संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।

उन्होंने कहा था कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है।उन्होंने बताया था कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

Bihar Weather Update : बिहार में गर्मी से परेशान लोगों को राहत की बारिश का पूर्वानुमान; 3 अगस्त तक सभी जिलों में बारिश के आसार

मौसम विभाग के अनुसार बिहार के विभिन्न जिलों में अगले तीन-चार दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। इस दौरान कुछ स्थानों पर वज्रपात की भी चेतावनी जारी की गई है। उत्तर बिहार में मानसून के सक्रिय होने से 3 अगस्त तक सभी जिलों में बारिश होने की उम्मीद की जा रही है। पटना समेत आसपास के कुछ स्थानों पर मेघ गर्जन व वज्रपात की संभावना है। पूरे बिहार में राहत की बारिश का पूर्वानुमान 29 से 3 अगस्त के लिए जारी किया गया है।

राज्य में अभी तक 35 फीसदी कम बारिश हुई है। कुछ जिलों में बारिश का अलर्ट है। वहीं, 29 जुलाई के बाद से भारी बारिश का अलर्ट है।

मौसम विज्ञान केन्द्र पटना के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर पश्चिम बिहार, उत्तर मध्य बिहार, उत्तर पूर्व बिहार, दक्षिण पश्चिम बिहार, दक्षिण मध्य बिहार और दक्षिण पूर्व बिहार में बारिश के आसार हैं। इनमें कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट भी जारी किया गया है। 28 जुलाई यानी शुक्रवार को बिहार के 32 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इनमें से पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, सहरसा, मधेपुरा और सुपौल जिले के कुछ स्थानों पर बारिश के आसार हैं।

वहीं पटना, गया, समेत 25 जिलों के एक या दो स्थानों पर बारिश होने की संभावना हैं। बक्सर, भोजपुर, रोहतास, भभुआ, औरंगाबाद, अरवल में मौसम शुष्क बने रहेंगे। यानी इन जिलों में आज गर्मी से लोग परेशान हैं। 

मौसम विज्ञान केन्द्र पटना के अनुसार 30 और 31 जुलाई को राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश की संभावना है। इसे लेकर मौसम विभाग की ओर से येलो अलर्ट जारी किया गया है।

आज से उत्तर बिहार में मानसून के सक्रिय होने की संभावना है : इसके प्रभाव से दो अगस्त तक बारिश होने की उम्मीद की जा रही है। भारत मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 30 जुलाई को कई जगहों पर अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है। इस दौरान कुछ स्थानों पर वज्रपात भी हो सकता है। तापमान में उतार-चढ़ाव रहेगा और आसमान में बादल छाए रहेंगे।

3 अगस्त तक सभी जिलों में बारिश के आसार है : मौसम विभाग ने 29 जुलाई से 3 अगस्त राज्य सभी 38 जिलों के कई इलाकों में बारिश की संभावना जताई है। उत्तर पश्चिम बिहार, उत्तर मध्य बिहार, उत्तर पूर्व बिहार, दक्षिण पश्चिम बिहार, दक्षिण मध्य बिहार और दक्षिण पूर्व बिहार में बारिश के आसार हैं। इनमें कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट भी जारी किया गया है। 

मौसम ने सावधानी बरतने की अपील की है : मौसम विभाग ने लोगों से अपील कि है कि खराब मौसम के दौरान अपने पशुधन और खुद को बाहर निकलने से बचें। मौसम साफ होने पर अपने काम संपादित करे। आंधी के दौरान संवेदनशील संरचनाओं से दूर रहें और मेघगर्जन के दौरान पेड़-पौधे के नीचे शरण न लें। ओलावृष्टि के समय सुरक्षित स्थान पर जाकर बैठ जाएं।

पटना हाईकोर्ट ने एलएन मिश्रा कॉलेज,मुजफ्फरपुर से एमबीए कर रही छात्रा यशी सिंह के अपहरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए एसपी, मुजफ्फरपुर को चार सप्ताह में अनुसंधान का ब्यौरा दायर करने का आदेश दिया

पटना हाईकोर्ट ने एलएन मिश्रा कॉलेज,मुजफ्फरपुर से एमबीए कर रही छात्रा यशी सिंह के अपहरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए एसपी, मुजफ्फरपुर को चार सप्ताह में अनुसंधान का ब्यौरा दायर करने का आदेश दिया। जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा ने इस मामलें पर सुनवाई की।

साहेबगंज कॉलेज के पूर्व प्राचार्य राम प्रसाद राय की नतनी ऐसी सिंह का अपहरण 22 दिसंबर 2022 को कॉलेज जाते वक्त हो गया था।घटना के 6 माह बाद भी पुलिस अब तक छात्रा की बरामदगी नहीं कर पाई है।

लड़की के नाना,पिता, माता ने बिहार के मुख्यमंत्री, डीजीपी बिहार,आईजी मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग,राष्ट्रीय महिला आयोग, आर्थिक अपराध विभाग ,एसपी मुजफ्फरपुर को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं।साथ ही उनसे मिलकर अपनी व्यथा सुना चुके हैं।

पर पुलिस ने अबतक कोई कार्रवाई नहीं की है।यहां तक कि पुलिस अनुसंधान में एक सोनू कुमार नाम के लड़के जो अपराधी किस्म का है, का नाम अपहरण के मामले में सामने आया है । उसने नशे की सुई देकर छात्रा को मुजफ्फरपुर की चतुर्भुज स्थान में जाकर बेच दिया है।

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फिर भी मुजफ्फरपुर पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली है। बिहार के सभी सम्बन्धित वरीय अधिकारियों से मिलकर उनके माता-पिता थक चुके हैं।याचिकाकर्ता के वकील अरविंद कुमार ने बताया कि मेरी बात सम्बन्धित आईओ से हुई, तो उन्होंने बताया कि सोनू कुमार को पकड़ा गया था ।दो-तीन दिन रखने के बाद मैंने उसे छोड़ दिया,क्योंकि उसके खिलाफ मुझे कोई सबूत नहीं मिले।जबकि सोनू का नाम अपहरणकर्ता में जांच के दौरान आ चुका है।

अंत में पटना हाई कोर्ट में अपनी याचिका दायर की।इस पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए मुजफ्फरपुर के एसपी को पूरे अनुसंधान का ब्यौरा 4 सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।इस मामलें पर अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद की जाएगी।

दरभंगा में 30 जुलाई तक इंटरनेट बैन; सांप्रदायिक सौहार्दता को लेकर बिहार सरकार के गृह विभाग ने लिया निर्णय

दरभंगा जिले में फेसबुक, व्हाट्सएप सहित सभी सोशल साइट्स पर अगले 3 दिन तक लगा बैन, सांप्रदायिक सौहार्दता को लेकर बिहार सरकार के गृह विभाग ने लिया निर्णय, सभी सोशल साइट्स 27 जुलाई यानि आज शाम 4 बजे से 30 जुलाई के शाम 4 बजे तक बंद रहेंगी। इस दौरान सभी सोशल साइट्स बैन रहेंगी।

जिले में बढ़ रहे सांप्रदायिक मामलों को लेकर सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने यह कदम उठाया है। जिले में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से दरभंगा में समाजिक-सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश के मद्देनजर गृह विभाग बिहार सरकार द्वारा इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1875 की धारा-5 के तहत यह निर्णय लिया गया है।

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कुछ दिन पहले दरभंगा के विभिन्न जगहों पर जिले के विभिन्न जगहों पर विवाद हुआ था, जिसके बाद कई तरह के फर्जी वीडियो वायरल किये गयेए थे। दरभंगा के DM और SSP की रिपोर्ट पर सरकार ने यह फैसला लिया है। गृह विभाग की तरफ से इसको लेकर आदेश जारी किया गया है। शनिवार को मुहर्रम को देखते हुए लॉ एंड ऑर्डर को कंट्रोल करने के लिए प्रशासन द्वारा यह कदम उठाया गया है।

दरभंगा में बीते 23 जुलाई को शिवधारा इलाके में धार्मिक झंडा लगाने को लेकर दो पक्षों के बीच भारी विवाद हो गया था। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया था और रोड़ेबाजी शुरू हो गई थी। देखते ही देखते पूरा इलाका रणक्षेत्र में बदल गया था। रोड़ेबाजी में पुलिस के 6 से अधिक जवान घायल हो गये थे, जबकि सड़क किनारे खड़ी कई गाड़ियों को शीशे तोड़ दिये गये थे।

बिहार के कटिहार में बेहतर बिजली आपूर्ति को लेकर विरोध प्रदर्शन हिंसक होने पर पुलिस गोलीबारी में 2 की मौत हो गई; मौत के बाद फूटा लोगों का गुस्सा, जमकर मचाया हंगामा

कटिहार/पटना: बिहार के कटिहार जिले में बुधवार को अपर्याप्त बिजली आपूर्ति को लेकर प्रदर्शन ने तूल पकड़ लिया, पथराव के बाद पुलिस की गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।

पटना में पुलिस मुख्यालय के अनुसार, “बारसोई पुलिस स्टेशन से बमुश्किल 100 मीटर की दूरी पर हुई इस घटना में” एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी और बिजली विभाग के कर्मचारी” घायल हो गए। पीएचक्यू ने कहा, “लगभग 1,000 स्थानीय निवासी बिजली विभाग कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर रहे थे। कुछ असामाजिक तत्व भीड़ में घुस गए और उन्होंने पथराव करना शुरू कर दिया। जब एक पुलिस दल ने उपद्रवियों को रोकने की कोशिश की, तो उन पर भी ईंटों, पत्थरों और लाठियों से हमला किया गया।”

कटिहार के जिलाधिकारी रवि प्रकाश ने पीटीआई-भाषा को फोन पर बताया, ”दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है जबकि एक अन्य का उपमंडल अस्पताल में इलाज चल रहा है.”

मृतकों में से एक की मौके पर ही मौत हो गई, जिसकी पहचान बासल गांव निवासी खुर्शीद आलम (34) के रूप में की गई। दूसरे मृतक की पहचान ज्ञात नहीं हो पाई है, हालांकि वह और अन्य घायल प्रदर्शनकारी पास के गांवों के निवासी बताए गए हैं। घटना स्थल पर कैंप कर रहे कटिहार के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार ने संवाददाताओं से कहा, “आप स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि बिजली कार्यालय का शायद ही कोई हिस्सा बचा हो जहां तोड़फोड़ और पथराव के संकेत न मिले हों।”

बिहार बीजेपी अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने नीतीश की कड़ी आलोचना की….

एसपी ने कहा, “प्रदर्शनकारी अचानक हिंसक हो गए और परिसर में धावा बोल दिया। संबंधित उपमंडल पुलिस अधिकारी समेत अधिकारियों को भीड़ ने बंधक बना लिया, जिन्हें चोटें भी आई हैं। इसलिए, आत्मरक्षा में गोलियों का इस्तेमाल किया गया। जांच जारी है और पुलिसकर्मियों पर हमले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” इस बीच, इस घटना की विपक्षी भाजपा और सीपीआई (एमएल)-लिबरेशन ने तीखी आलोचना की, जो बाहर से नीतीश कुमार सरकार का समर्थन करती है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और राज्य भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नित्यानंद राय ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि यह घटना मुख्यमंत्री की जद (यू) और राज्य के सत्तारूढ़ महागठबंधन के सबसे बड़े घटक राजद के नेतृत्व वाली सरकार की “बर्बरता” को दर्शाती है।

उन्होंने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, जो राजद से हैं, के इस्तीफे की भी मांग की और शिक्षकों की नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों और आशा कार्यकर्ताओं द्वारा राज्य की राजधानी में इसी तरह के विरोध प्रदर्शन पर लाठीचार्ज की हालिया घटनाओं के लिए उन्हें दोषी ठहराया। सीपीआई (एमएल)-एल, जो सरकार का हिस्सा न होते हुए भी महागठबंधन का हिस्सा है, ने भाजपा पर कटिहार में “भीड़ को उकसाने” का आरोप लगाया। सीपीआई (एमएल)-एल के विधायक दल के नेता मेहबूब आलम, जो कि बारसोई स्थित बारसोई क्षेत्र के बलरामपुर के विधायक हैं, ने भी प्रत्येक मृतक के परिजनों को “20 लाख रुपये मुआवजा” और घायल प्रदर्शनकारी को अनुग्रह राशि देने की मांग की।

आलम ने कहा, “भीड़ अचानक हिंसक हो गई और हमें यकीन है कि भाजपा ने उन्हें उकसाया था। इसके कार्यकर्ता अराजकता में पनपते हैं, जैसा कि हाल ही में एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस कर्मियों पर मिर्च पाउडर फेंकने से स्पष्ट था।” संदर्भ राज्य की शिक्षक भर्ती नीति के विरोध में 13 जुलाई को आयोजित ‘विधानसभा मार्च’ का था, जब प्रदर्शनकारियों में से एक विजय कुमार सिंह की मृत्यु हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है और मृतक के शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं हैं।

आलम ने यह भी कहा, “पुलिस को संयम बरतना चाहिए था और गोली नहीं चलानी चाहिए थी। मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।”

नीतीश कैबिनेट की बैठक में 35 एजेंडों पर लगी मुहर; जानें किन एजेंडों पर लगी मुहर

पटना। मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में कुल 35 एजेंडों को मंजूरी दी गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों और विकासात्मक परियोजनाओं को शामिल किया गया।

बिहार कैबिनेट निर्णयों पर मुख्य सचिव ने कहा कि कैबिनेट ने कुल 35 प्रस्तावों पर अपनी सहमति दी। प्रमुख निर्णयों में नगर विकास विभाग के तहत आरा में जल निकासी के लिए 77 करोड़ रुपये के आवंटन को मंजूरी दी गयी। साथ ही बेतिया-नरकटियागंज गौनाहा बाजार पथ के निर्माण के लिए 74.42 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गयी।

एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर अंडा नहीं खाने वाले बच्चों को सप्ताह में दो दिन बुधवार व शुक्रवार को भुनी हुई मूंगफली देने का निर्णय लिया गया। इसके लिए 216.16 करोड़ रुपए स्वीकृत किये गये। इसी तरह मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के तहत 30 हजार निजी नलकूप लगाने के लिए 222 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गयी।

बैठक के दौरान कैबिनेट ने बिहार सूचना आयोग में पहले से मौजूद पदों के अलावा विभिन्न श्रेणियों के 5 पदों के सृजन की मंजूरी दे दी। सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों और सदर अस्पताल में शौचालय और स्नानघर के निर्माण के लिए सुलभ इंटरनेशनल को दी गई अनुमति थी।

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कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना को भी हरी झंडी मिल गई। पांच मंडल मुख्यालयों- गया, दरभंगा, पटना और मुजफ्फरपुर में महिला छात्रावासों का निर्माण किया जाएगा, जिसका उद्देश्य राज्य में महिलाओं के लिए सुरक्षित आवास प्रदान करना है।

कैबिनेट में चर्चा के प्रमुख एजेंडे इस प्रकार हैं

  • बेतिया-नरकटियागंज गौनाहा बाजार सड़क निर्माण के लिए 74.42 करोड़ रुपये स्वीकृत
  • मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत 5 मंडल मुख्यालयों में बनेंगे महिला छात्रावास
  • कैबिनेट द्वारा स्वच्छता संबंधी उपाय किए जाने पर सुलभ इंटरनेशनल सरकारी अस्पतालों में शौचालयों का निर्माण करेगा
  • स्वास्थ्य विभाग ने की सख्त कार्रवाई: कई डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त
  • स्मार्ट सिटी पहल का विस्तार: भागलपुर, पटना, मुजफ्फरपुर और बिहारशरीफ में बनाई जाएंगी सोसायटी
  • कैबिनेट ने मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत लाभ को मंजूरी दी
  • कृषि यंत्रीकरण योजना के लिए 119 करोड़ रुपये स्वीकृत
  • बिहार फसल सहायता योजना सब्जी फसलों को लाभ पहुंचाती है
  • राज्य सरकार ने आयोग और बोर्ड के सदस्यों के वेतन को बीपीएससी के बराबर किया

स्मार्ट सिटी पहल के तहत भागलपुर, पटना, मुजफ्फरपुर और बिहारशरीफ में सोसायटी बनाने की तैयारी है। इन समाजों से शहरी विकास और इन शहरों के निवासियों के लिए रहने की स्थिति में सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद की जाती है।

हालाँकि, कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य विभाग के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाइयों के मामलों को भी संबोधित किया गया। अशोक कुमार सिंह और रवि कुमार आनंद कुमार समेत कई डॉक्टरों की सेवा समाप्त कर दी गयी।

इसके अलावा कैबिनेट ने कृषि रोड मैप चतुर्थ के तहत चालू वित्तीय वर्ष में कृषि यांत्रिकीकरण योजना के लिए 119 करोड़ रुपये की निकासी की मंजूरी दे दी. इस कदम का उद्देश्य राज्य के कृषि क्षेत्र में कृषि पद्धतियों को बढ़ाना और उत्पादकता को बढ़ावा देना है।

बिहार में 34540 सहायक शिक्षकों की बहाली के बचे सीट पर कोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक बहाली नहीं किये जाने से पटना हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में 34540 सहायक शिक्षकों की बहाली के बचे सीट पर कोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक बहाली नहीं किये जाने से नाराजगी जाहिर की। जस्टिस पी बी बजनथ्री की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने शिक्षा विभाग के सम्बन्धित सचिव और प्राथमिक शिक्षा के निदेशक को अगली तारीख पर कोर्ट में उपस्थित हो कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अगली तारीख पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ अदालती आदेश के अवमानना के दोषी के लिए आरोप तय किया जायेगा।

कोर्ट का कहना था कि 19 अकटुबर, 2016 को हाई कोर्ट ने छह माह के भीतर सहायक शिक्षक के बचे हुये 2213 सीट पर बहाली प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया था।लेकिन करीब सात साल के बाद भी बहाली नहीं की जा सकी।

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कोर्ट ने कोर्ट में उपस्थित निदेशक से जानना चाहा कि सहायक शिक्षक की बहाली करने के अधिकारी कौन हैं।कोर्ट के सवाल पर उन्होंने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी सहायक शिक्षक को बहाली करने के अधिकारी हैं।

इस पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी जिला में बहाली करने के लिए अधिकृत हो सकते हैं।लेकिन यह मामला पूरे राज्य का हैं।

कोर्ट ने इस मामले पर अगली सुनवाई दो सप्ताह के बाद की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने औरंगाबाद जिले के नाउरगढ़ में खुदाई के दौरान मिली मूर्तियों व अन्य पुरातत्विक महत्त्व की सामग्रियों के रख रखाव व सरंक्षण के लिए की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा तलब किया

पटना हाईकोर्ट ने औरंगाबाद जिले के नाउरगढ़ में खुदाई के दौरान मिली मूर्तियों व अन्य पुरातत्विक महत्त्व की सामग्रियों के रख रखाव व सरंक्षण के लिए की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा तलब किया है। अवधेश पाण्डेय की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने सुनवाई की।

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि औरंगाबाद जिले के नाउरागढ़ में भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई के दौरान बड़ी तादाद में मूर्तियां व अन्य ऐतिहासिक महत्त्व की सामग्रियां प्राप्त हुई थी।लेकिन उनका उचित ढंग से रख रखाव और संरक्षण नहीं किया जा रहा है।इस प्रकार के महत्त्व की मूर्तियां और ऐतिहासिक महत्त्व धरोहरों की उपेक्षा की जा रही है।

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अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने बताया कि इस तरह की पुरातत्विक महत्त्व और ऐतिहासिक मूर्तियों और अन्य सामग्रियों को निकाला गया।वहां पर एक स्टेडियम बनाया जाने लगा।इस पर कोर्ट ने रोक लगा दी है ।साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया ।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 8अगस्त,2023 को होगी।

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“इंडिया” बनाम भारत में करोड़ों गरीब-पिछड़े भारत के साथ : सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि भ्रष्ट और परिवारवादी विपक्षी दलों के मंच का नाम “इंडिया” रखने से इनकी खोटी नीयत छिपने वाली नहीं है। इनके इलीट, पश्चिम-प्रभावित और हिंदू-विरोधी “इंडिया” को करोड़ों गरीबों, पिछड़ों का संस्कृतिनिष्ठ भारत 2024 में मुँहतोड़ जवाब देगा। इंडिया बनाम भारत मैच में जीत भारत की होगी।

  • नाम बदलने से मॉल का खोटा माल नहीं बदल जाता
  • लालू, ममता, केजरीवाल की हकीकत किसी से छिपी नहीं
  • संयोजक न बनाये जाने से नीतीश कुमार की हुई किरकिरी

श्री मोदी ने कहा कि चारा घोटाला में सजायाफ्ता लालू प्रसाद और चिटफंड घोटाले में लिप्त ममता बनर्जी जैसे दागी लोग जहाँ जुटे हैं, उस नए मॉल का नाम बदल लेने से खोटा माल खरा सोना नहीं हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि बंगलोर में सबसे बड़ी किरकिरी तो नीतीश कुमार की हुई। उन्हें फर्जी “इंडिया’ का संयोजक न बनाये जाने से नाराज होकर पहले ही बैठक से निकल लेना पड़ा। वे प्रेस कांफ्रेन्स में नहीं थे।

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बंगलुरू में नीतीश-विरोधी पोस्टर भी लगाये गए थे, जबकि वहाँ सरकार कांग्रेस की है।

श्री मोदी ने कहा कि इन दलों की पटना बैठक में इसी तरह केजरीवाल नाराज होकर दिल्ली लौट गए थे। जो लोग चुनाव से पहले न मन मिला पा रहे हैं, न एक चेहरा तय कर पाए, वे देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोई चुनौती नहीं दे पाएँगे।

पटना हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के खिलाफ कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया

पटना हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के खिलाफ कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। जस्टिस पीवी बजंत्री की खंडपीठ ने एक अवमानना के सिलसिले में श्री पाठक के विरुद्ध जमानतीय वारंट जारी किया।

एक शिक्षिका सुकृति कुमारी को नियमित शिक्षक का वेतन नहीं दे कर नियोजित शिक्षक का वेतन दिया गया,जबकि कोर्ट ने उन्हें नियमित शिक्षक का वेतन देने का निर्देश दिया था ।

अपर मुख्य शिक्षा सचिव के के पाठक की ओर से अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने जून, 2023 में पदभार ग्रहण किया है।तब से वे अदालती अवमानना से सम्बन्धित मामलों पर कार्रवाई कर रहे है।

याचिकाकर्ता शिक्षिका सुकृति कुमारी के मामलें में अदालती आदेश का पालन किया जा चुका है।लेकिन कोर्ट ने अदालती आदेश के पालन में हुए बिलम्ब को गंभीरता से लेते हुए जमानतीय वारंट जारी किया।

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अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने कोर्ट को बताया कि पूर्व में कोर्ट द्वारा जारी जमानतीय वारंट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी है,जिस पर कल सुनवाई होना तय हुआ है।इस मामलें को भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा जायेगा।

इस मामलें पर अगली सुनवाई अगले सप्ताह की जाएगी।

जब सरकार पहले से नियुक्त शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं दे पा रही है, तब नये शिक्षकों के वेतन मद में सालाना 11000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ कैसे उठायेगी? : सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जब सरकार पहले से नियुक्त शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं दे पा रही है, तब नये शिक्षकों के वेतन मद में सालाना 11000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ कैसे उठायेगी? पैसे कहाँ से आएँगे, यह बताना चाहिए।

• खाते में हजार करोड़ शेष रहते शिक्षकों का वेतन रोकना गलत
• उपयोगिता प्रमाण पत्र सौंपते ही बिहार को मिल जाएगी समग्र शिक्षा अभियान की राशि
• पिछले साल का बिहार ने केंद्र को नहीं दिया खर्च का हिसाब
• बताएँ, नये शिक्षकों के वेतन हेतु कहाँ से आएँगे 11000 करोड़- सुशील कुमार मोदी

श्री मोदी ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति और उनके वेतन का भुगतान पूरी तरह राज्य सरकार की जिम्मेवारी है। केंद्र सरकार इसमें केवल सहयोग करती है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से शिक्षक वेतन-मद में सहायता राशि न मिलने का दुष्प्रचार कर रही है, जबकि सच यह है कि बिहार सरकार ने पिछले साल के खर्च का हिसाब और उपयोगिता प्रमाण पत्र ही नहीं दिया।

SushilModi

श्री मोदी ने कहा कि जैसे ही राज्य सरकार उपयोगिता प्रमाण पत्र सौंपेगी, केंद्र से समग्र शिक्षा अभियान की सहायता राशि मिल जाएगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के खाते में अब भी 1000 करोड़ रुपये बिना खर्च हुए पड़े हैं। इससे शिक्षकों को वेतन दिया जा सकता है।

श्री मोदी ने कहा कि अपनी नाकामी छिपाने के लिए केंद्र पर तथ्यहीन आरोप लगाना नीतीश सरकार की आदत बन गयी है। यह सरकार शिक्षकों की पीठ पर लाठी चलाती है और वेतन रोक कर पेट पर लात मारती है।

…………………………

पटना हाईकोर्ट में पटना एवं राज्य के अन्य क्षेत्रों में खुले आम नियमों का उल्लंघन कर मांस-मछली बेचने पर पाबन्दी लगाने सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई 18 जुलाई,2023 तक टली

पटना हाईकोर्ट में पटना एवं राज्य के अन्य क्षेत्रों में खुले आम नियमों का उल्लंघन कर मांस-मछली बेचने पर पाबन्दी लगाने सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई 18 जुलाई,2023 तक टली। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ इस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस बारे में पटना नगर निगम को विस्तृत जानकारी देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया था। पटना नगर निगम की ओर से कोर्ट को बताया कि आधुनिक बूचडखाने के निर्माण और विकास के लिए स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है।

साथ ही निविदा की कार्रवाई की जा रही है। पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने के लिए पटना नगर निगम ने तीन सप्ताह की मोहलत मांगी,जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया था।ये जनहित याचिका अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने दायर की है।

पिछली सुनवाई में अधिवक्ता मानिनी जायसवाल ने कोर्ट को बताया था कि पटना समेत राज्य विभिन्न क्षेत्रों में अस्वास्थ्यकर और नियमों के विरुद्ध मांस मछली काटे और बेचे जाते हैं।उन्होंने कहा कि इससे जहाँ आम आदमी के स्वास्थ्य पर पर बुरा असर पड़ता हैं, वहीं खुले में इस तरह से खुले में जानवरों के काटे जाने से छोटे लड़कों के मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

याचिकाकर्ता के वकील मानिनी जयसवाल ने कोर्ट से यह भी आग्रह किया था कि खुले और अवैध रूप से चलने वाले बूचडखानों को नगर निगम द्वारा तत्काल बंद कराया जाना चाहिए ।

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उन्होंने कोर्ट को बताया था कि पटना के राजा बाज़ार, पाटलिपुत्रा , राजीव नगर, बोरिंग केनाल रोड , कुर्जी, दीघा , गोला रोड , कंकड़बाग आदि क्षेत्रों में नियमों का उल्लंघन कर खुले में मांस मछ्ली की बिक्री होती है।

अधिवक्ता मानिनी जयसवाल ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि अस्वस्थ और बगैर उचित प्रमाणपत्र के ही जानवरों को मार कर इनका मांस बेचा जाता है ,जो कि जनता के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

उनका कहना था कि शुद्ध और स्वस्थ मांस मछ्ली उपलब्ध कराने के लिए सरकार को आधुनिक सुविधाओं सुविधाओं के साथ बूचड़खाने बनाए जाने चाहिए,ताकि मांस मछली बेचने वालोंं को भी सुविधा मिले।

इस मामलें पर अब अगली सुनवाई 18 जुलाई, 2023 को की जाएगी।

राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों व उनके अंतर्गत कॉलेजों में छात्रों के हॉस्टलों की दयनीय हालत पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इन हॉस्टलों की स्थिति में सुधार के लिए ठोस कार्रवाई करने का निर्देश दिया

राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों व उनके अंतर्गत कॉलेजों में छात्रों के हॉस्टलों की दयनीय हालत पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की। विकास चंद्र उर्फ़ गुड्डू बाबा की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस के वी कृष्णन की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इन हॉस्टलों की स्थिति में सुधार के लिए ठोस कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामलें को निष्पादित कर दिया।

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इस मुद्दे पर राज्य सरकार ने विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से विचार विमर्श किया।उन्होंने भी हॉस्टालों की स्थिति के सम्बन्ध में अपना रिपोर्ट दिया।राज्य सरकार इस मामलें पर कार्रवाई की योजना बना रही है।

याचिकाकर्ता विकास चंद्र उर्फ़ गुड्डू बाबा ने अपनी जनहित याचिका में बताया था कि राज्य के विश्वविद्यालयों व उनके अंतर्गत कालेजों में छात्रों के हॉस्टलों की स्थिति काफी दयनीय है।उन हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।

छात्रों के लिए साफ सुथरे और अच्छे कमरे,स्वच्छ शौचालयों,शुद्ध पेय जल,कैंटीन,बिजली आदि सुविधायें उपलब्ध नहीं है।
याचिका में ये भी कहा गया कि इससे छात्रों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता हैं ।

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इसका प्रभाव उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य पर पड़ता है ।इस याचिका ये अनुरोध किया गया कि छात्रों के लिए नये हॉस्टलों का निर्माण किया जाये,जिनमें उनके लिए सारी सुविधाएं उपलब्ध हो,ताकि उन्हें रहने और पढ़ने लिए सही माहौल मिले।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि इस मामलें में 23 अक्टूबर,2019 को बिहार सरकार के मुख्य सचिव और सभी सबंधित पक्षों को दिया गया।इसमें ये कहा गया कि छात्रों के लिए साफ सुथरे कमरे,स्नानघर, शौचालयों,बिजली आदि की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी।

कोर्ट ने आज इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से उम्मीद जाहिर की कि वह विभिन्न विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों की स्थिति सुधारने के उचित व प्रभावी कदम उठाएगी।इसके साथ ही कोर्ट ने इस जनहित को निष्पादित कर दिया।

लाठी में तेल पिलाने वालों की संगत में नीतीश, बर्बर हुई पुलिस: सुशील मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति, 10 लाख युवाओं की सरकारी नौकरी पर विश्वासघात, शासन में भ्रष्टाचार और चौपट कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे पर शांतिपूर्ण ढंग से संचालित विधानसभा मार्च पर बर्बर लाठीचार्ज कर एक कार्यकर्ता की जान लेना और दर्जनों लोगों को बुरी तरह जख्मी करना निंदनीय है। क्या यही लोकतंत्र है नीतीश कुमार जी ?

  • शिक्षकों के मुद्दे पर व्यर्थ नहीं जाएगा भाजपा कार्यकर्ता का बलिदान
  • पटना की सड़कों पर लोकतंत्र लहूलुहान हुआ

श्री मोदी ने कहा कि प्रदर्शन करने के अधिकार को लाठी के बल पर रौंदने वाली सरकार किस मुँह से लोकतंत्र बचाने की बात करती है ?

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मांग के समर्थन में भाजपा के जहानाबाद जिला महामंत्री विजय कुमार सिंह का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। इसके विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

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श्री मोदी ने कहा कि लाठी में तेल पिलाने वालों की संगत में आकर नीतीश कुमार ने पुलिस को निरंकुश और हिंसक बना दिया है।

उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों पर भाजपा के सैंकड़ों कार्यकर्ता सड़क पर उतरे, संघर्ष किया और लाठी खायी, उसे विधान मंडल में भी पूरी ताकत से उठाया गया। अब हम ये मामला जनता की अदालत में भी ले जाएँगे।

पटना हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के खिलाफ कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया

पटना हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के खिलाफ कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। जस्टिस पीवी बजंत्री की खंडपीठ ने एक अवमानना के सिलसिले में पाठक को

कोर्ट ने आज 13 जुलाई,2023 को निश्चित रूप से कोर्ट में स्वयं उपस्थित होने का आदेश दिया था।लेकिन किसी कारणवश के के पाठक स्वयं उपस्थित नहीं होकर,अपने वकील के जरिए हाजिर हुए।

कोर्ट ने इसे आदेश की अवमानना करार देते हुए उनकी हाजिरी को सुनिश्चित करने हेतु जमानती वारंट जारी करने का निर्देश दिया।

अपर मुख्य शिक्षा सचिव की ओर से कोर्ट के समक्ष उपस्थित अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने बताया कि श्री पाठक ने जून, 2023 में अपने पद पर योगदान दिया।नालंदा जिला के एक शिक्षक घनश्याम प्रसाद सिंह को हेड मास्टर के पद पर प्रोन्नत का आदेश जारी किया गया।

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उन्होंने बताया कि अपर मुख्य सचिव पाठक ने नालंदा के जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र लिख कर आदेश का पालन किये जाने का निर्देश दिया ।

जिला शिक्षा पदाधिकारी,नालंदा ने आदेश का पालन कर विभाग को सूचित किया।उस शिक्षक ने भी आदेश के अनुपालन होने को स्वीकार भी किया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 20 जुलाई,2023 को होगी।

बिहार सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पटना हाइकोर्ट में सुनवाई 7 जुलाई, 2023 को भी जारी रहेगी, जाने क्या हुआ आज की सुनवाई में

पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई अधूरी रही।इस मामलें पर कल 7जुलाई,2023 को भी सुनवाई जारी रहेगी। इस मामलें में दायर याचिकायों पर चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

आज भी राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी के शाही ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि ये सर्वे है,जिसका उद्देश्य आम नागरिकों के सम्बन्ध आंकड़ा एकत्रित करना,जिसका उपयोग उनके कल्याण और हितों के
किया जाना है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि जाति सम्बन्धी सूचना शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के समय भी दी जाती है।जातियाँ समाज का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हर धर्म में अलग अलग जातियाँ होती है।

उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण के दौरान किसी भी तरह की कोई अनिवार्य रूप से जानकारी देने के लिए किसीको बाध्य नहीं किया जा रहा है ।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि जातीय सर्वेक्षण का कार्य लगभग 80 फी सदी पूरा हो गया है।उन्होंने कहा कि ऐसा सर्वेक्षण राज्य सरकार के अधिकार में है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि इससे सर्वेक्षण से किसी के निजता का उल्लंघन नहीं हो रहा है।महाधिवक्ता शाही ने कहा कि बहुत सी सूचनाएं पहले से ही सार्वजनिक होती हैं।

इससे पहले हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए राज्य सरकार द्वारा की जा रही जातीय व आर्थिक सर्वेक्षण पर रोक लगा दिया था।कोर्ट ने ये जानना चाहा था कि जातियों के आधार पर गणना व आर्थिक सर्वेक्षण कराना क्या कानूनी बाध्यता है।

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कोर्ट ने ये भी पूछा था कि ये अधिकार राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में है या नहीं।साथ ही ये भी जानना कि इससे निजता का उल्लंघन होगा क्या।

पहले की सुनवाई में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।

उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण कराने का ये अधिकार राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र के बाहर है।ये असंवैधानिक है और समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार जातियों की गणना व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होनें ने बताया कि ये संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।

उन्होंने कहा था कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है।उन्होंने बताया था कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

इस मामलें पर कल 6 जुलाई,2023 को भी सुनवाई जारी रहेगी।इस मामलें पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार, ऋतिका रानी,अभिनव श्रीवास्तव और राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी के शाही ने कोर्ट के समक्ष पक्षों को प्रस्तुत किया।

बिहार सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पटना हाइकोर्ट में सुनवाई कल 6 जुलाई, 2023 को भी जारी रहेगी, जाने क्या हुआ आज की सुनवाई में

पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कल 6 जुलाई,2023 को भी जारी रहेगी। इस मामलें में दायर याचिकायों पर चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

आज राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी के शाही ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत किया।उन्होंने कहा कि ये सर्वे है,जिसका उद्देश्य आम नागरिकों के सम्बन्ध आंकड़ा एकत्रित करना,जिसका उपयोग उनके कल्याण और हितों के लिए किया जाना है।

उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण के दौरान किसी भी तरह की कोई अनिवार्य रूप से जानकारी देने के लिए किसीको बाध्य नहीं किया जा रहा है ।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि जातीय सर्वेक्षण का कार्य लगभग 80 फी सदी पूरा हो गया है।उन्होंने कहा कि ऐसा सर्वेक्षण राज्य सरकार के अधिकार में है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि इससे सर्वेक्षण से किसी के निजता का उल्लंघन नहीं हो रहा है।महाधिवक्ता शाही ने कहा कि बहुत सी सूचनाएं पहले से ही सार्वजनिक है ।

इससे पहले हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए राज्य सरकार द्वारा की जा रही जातीय व आर्थिक सर्वेक्षण पर रोक लगा दिया था।कोर्ट ने ये जानना चाहा था कि जातियों के आधार पर गणना व आर्थिक सर्वेक्षण कराना क्या कानूनी बाध्यता है।

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कोर्ट ने ये भी पूछा था कि ये अधिकार राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में है या नहीं।साथ ही ये भी जानना कि इससे निजता का उल्लंघन होगा क्या।

कल की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।

उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण कराने का ये अधिकार राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र के बाहर है।ये असंवैधानिक है और समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार जातियों की गणना व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होनें ने बताया कि ये संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।

उन्होंने कहा था कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है।उन्होंने बताया था कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

इस मामलें पर कल 6 जुलाई,2023 को भी सुनवाई जारी रहेगी ।

‘Land For Job Scam’ मामले में लालू परिवार की बढ़ी मुश्किलें; घोटाले में CBI ने दाख‍िल की चार्जशीट

दिल्ली । केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में Land For Job Scam मामले में आरोप पत्र दाखिल किया है। बिहार के पूर्व सीएम लालू यादव के परिवार की मुश्किलें कम होने नाम नहीं ले रही है। CBI आरोप पत्र में नौकरी के बदले जमीन घोटाले से संबंधित मामले में बिहार के डिप्टी CM तेजस्वी यादव, RJD प्रमुख और पूर्व सीएम पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू यादव, बिहार की पूर्व CM राबड़ी देवी और कई अन्य लोगों का नाम शामिल किया है।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल ताजा आरोप पत्र में तेजस्वी यादव और कंपनियों समेत 17 को आरोपी बनाया गया है। CBI ने मामले में एके इन्फोसिस्टम्स और कई बिचौलियों को भी नामजद किया है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की तरफ से कोर्ट में कहा गया था कि, “कोर्ट की छुट्टी के बाद सीबीआई अपना पूरक आरोप पत्र दाखिल करेगी.” जिसके बाद कोर्ट ने कहा था कि, इस मामले में अगली सुनवाई 12 जुलाई को की जाएगी। अदालत ने कहा था कि, “मामले में लगातार देरी स्वीकार्य नहीं है.” जिसके जवाब में CBI ने कहा था कि, इस मामले में जांच चल रही है और उन्हें नए तथ्यों को शामिल करने के लिए थोड़ा समय और चाहिए। ज‍िसके बाद आज यानी सोमवार को CBI ने चार्जशीट दायर की है।

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नौकरी के बदले जमीन घोटाला ( Land For Job Scam) मामले में यह दूसरा आरोपपत्र है और इसमें तेजस्वी के अलावा लालू और राबड़ी का नाम के साथ-साथ 14 अन्य लोगों के भी नाम शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक इस मामले में पहला आरोपपत्र दाखिल होने के बाद सामने आए नए दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर यह आरोप पत्र दाखिल किया गया है।

दूसरे आरोपपत्र में अभियुक्तों के नाम की सूची (Name of the accused in the 2nd chargesheet of Land For Job Scam :-

01) Shri Lalu Prasad Yadav, Ex-Union Minister of Railways,
02) Smt. Rabri Devi,
03) Sh. Tejashwi Prasad Yadav,
04) Sh. Maheep Kapur, Ex-GM of West Central Railway (WCR),
05) Sh. Manoj Pande, Ex-CPO of WCR,
06) Dr. P. L. Bankar, Ex-CPO of WCR
07) Sh. Dil Chand Kumar,
08) Sh. Gyan Chand Rai,
09) Sh. Hazari Rai,
10) M/s A. K Infosystems Pvt Ltd,
11) Sh. Mahesh Singh,
12) Sh. Mohd. Dhanif Ansari,
13) Sh. Shatrudhan Rai,
14) Sh. Vishwakarma Rai,
15) Sh. Ashok Kumar Yadav,
16) Sh. Ram Briksh Yadav and
17) Sh. Rajnath Singh.

जानें क्या है नौकरी के बदले जमीन घोटला ( Land For Job Scam )

Land For Job Scam घोटाला उस समय हुआ जब लालू प्रसाद कांग्रेस नीत केंद्र की UPA-1 सरकार में रेल मंत्री थे। CBI ने आरोप लगाया है कि 2004-09 की अवधि के दौरान लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान बिना किसी विज्ञापन या सार्वजनिक सूचना के नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन कर पसंदीदा लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई।

भारतीय रेलवे के विभिन्न क्षेत्रों में समूह ‘डी’ पदों पर विभिन्न व्यक्तियों को नियुक्त किया गया था और इसके बदले में संबंधित व्यक्तियों ने तत्कालीन रेल मंत्री प्रसाद के परिवार के सदस्यों को और इस मामले में लाभार्थी कंपनी ‘एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड’ को अपनी जमीन हस्तांतरित की थी।

जांच एजेंसी CBI के मुताबिक, रेलवे में नौकरी के बदले में उम्मीदवारों ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लालू यादव के परिवार के सदस्यों को बाजार रेट से काफी कम दरों पर जमीन बेची थी।

बिहार सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पटना हाइकोर्ट में सुनवाई कल 4 जुलाई,2023 को भी जारी रहेगी, जाने क्या हुआ आज की सुनवाई में

पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कल 4 जुलाई,2023 को भी जारी रहेगी। इन मामलों में दायर याचिकायों पर चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

इससे पूर्व हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए राज्य सरकार द्वारा की जा रही जातीय व आर्थिक सर्वेक्षण पर रोक लगा दिया था।

कोर्ट ने ये जानना चाहा था कि जातियों के आधार पर गणना व आर्थिक सर्वेक्षण कराना क्या कानूनी बाध्यता है।कोर्ट ने ये भी पूछा है कि ये अधिकार राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में है या नहीं।साथ ही ये भी जानना कि इससे निजता का उल्लंघन होगा क्या।

आज की सुनवाई में याचिकाकर्ता की अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया था कि राज्य सरकार जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण कराने का ये अधिकार राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र के बाहर है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार जातियों की गणना व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होनें ने बताया कि ये संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।

अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है।उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

दूसरी तरफ राज्य सरकार राज्य सरकार का कहना था कि जन कल्याण की योजनाएं बनाने और सामाजिक स्तर सुधारने के लिए ये सर्वेक्षण किया कराया जा रहा है।

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इससे पूर्व राज्य सरकार ने पटना हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई करते हुए जातीय जनगणना सम्बन्धी मामलें पर पटना हाइकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने इंकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अपना पक्ष 3 जुलाई,2023 को पटना हाइकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा था ।सुप्रीम कोर्ट में जातीय जनगणना से सम्बंधित मामलें पर अगली सुनवाई 14 जुलाई,2023 निर्धारित की गयी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाइकोर्ट में इस मामलें पर 3 जुलाई,2023 को सुनवाई की तिथि निर्धारित होने को देखते हुए ये 14जुलाई,2023 की तिथि तय की थी।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस राजेश बिंदल की खंडपीठ ने इन मामलों पर सुनवाई की थी।सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार ने पटना हाइकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी,जिसमें कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई करने सम्बन्धी याचिका को रद्द कर दिया था।

साथ ही राज्य सरकार ने पटना हाइकोर्ट द्वारा 4 मई, 2023को पारित अंतरिम आदेश को भी चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने राज्य सरकार के 3 जुलाई,2023 के पूर्व सुनवाई करने की याचिका को कोर्ट ने 9मई,2023 को सुनवाई करने के बाद खारिज कर दिया था।

इस आदेश विरुद्ध को राज्य सरकार ने एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर की है।पटना हाइकोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई की तिथि 3 जुलाई,2023 ही रखा।

9 मई, 2023 को सुनवाई करने के बाद हाईकोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई की तिथि 3 जुलाई,2023 ही निश्चित किया था।गौरतलब कि पहले 4मई,2023 को कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए जातीय जनगणना पर रोक लगा दी थी।

इन मामलों पर कल भी सुनवाई जारी रहेगी।

बिहार में निबंधित और योग्य फार्मासिस्ट के पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर होने वाले असर के मामले पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी

पटना हाईकोर्ट में राज्य में निबंधित और योग्य फार्मासिस्ट के पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर होने वाले असर के मामले पर सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी। चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ इस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में राज्य सरकार को पुनः जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था।ये जनहित याचिका मुकेश कुमार ने दायर किया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रशान्त सिन्हा ने कोर्ट को बताया था कि डॉक्टरों द्वारा लिखें गए पर्ची पर निबंधित फार्मासिस्टों द्वारा दवा नहीं दी जाती है।

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि बहुत सारे सरकारी अस्पतालों में अनिबंधित नर्स,एएनएम,क्लर्क ही फार्मासिस्ट का कार्य करते है।वे बिना जानकारी और योग्यता के ही मरीजों को दवा बांटते है।जबकि ये कार्य निबंधित फार्मासिस्टों द्वारा किया जाना है।

उन्होंने कहा कि इस तरह से अधिकारियों द्वारा अनिबंधित नर्स,एएनएम,क्लर्क से काम लेना न केवल सम्बंधित कानून का उल्लंघन है,बल्कि आम आदमी के स्वास्थ्य के साथ खिलबाड़ है।

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उन्होंने कोर्ट को बताया कि फार्मेसी एक्ट,1948 के तहत फार्मेसी से सम्बंधित विभिन्न प्रकार के कार्यों के अलग अलग पदों का सृजन किया जाना चाहिए।लेकिन बिहार सरकार ने इस सम्बन्ध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

इस आम लोगों का स्वास्थ्य और जीवन पर खतरा उत्पन्न हो रहा है।उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया था कि फार्मेसी एक्ट,1948 के अंतर्गत बिहार राज्य फार्मेसी कॉउन्सिल के क्रियाकलापों और भूमिका की जांच के लिए एक कमिटी गठित की जाए।

ये कमिटी कॉउन्सिल की क्रियाकलापों की जांच करें,क्योंकि ये गलत तरीके से जाली डिग्री देती है।उन्होंने कोर्ट को बताया था कि बिहार राज्य फार्मेसी कॉउन्सिल द्वारा बड़े पैमाने पर फर्जी पंजीकरण किया गया है।

राज्य में बड़ी संख्या मे फर्जी फार्मासिस्ट कार्य कर रहे है।इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

बिहार के लोग 2024 के लोकसभा चुनाव में “भ्रष्ट नेताओं को करारा जवाब” देंगे : अमित शाह

लखीसराय । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को बिहार के लखीसराय जिले में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा । शाह ने कहा…

वह सिर्फ लालू को बेवकूफ बना रहे हैं’ और नीतीश कुमार को ‘पलटू बाबू’ (मिस्टर यू-टर्न) कहा

बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, अश्विनी चौबे, नित्यानंद राय, नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधामोहन सिंह, बिहार भाजपा के विनोद तावड़े, सुनील ओझा, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, राष्ट्रीय मंत्री रितुराज सिंन्ह, पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, रेणु देवी समेत सभी बड़े नेता स्टेज पर मौजूद थे।

CM नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अभी-अभी पलटू बाबू पूछ रहे थे कि नौ साल में क्या किया? अरे नीतीश बाबू, जिनके साथ इतना बैठे हो, जिनके कारण मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हो- उनका तो लिहाज करो।पीएम नरेंद्र मोदी जहां जा रहे हैं, वहां मोदी-मोदी हो रहा। ये मोदी का सम्मान जो पूरे दुनिया भर में हो रहा है वह उनका या भाजपा का सम्मान नहीं हो रहा बल्कि आपका और पूरे देश की जनता का सम्मान हो रहा है।

जब से भाजपा की सरकार बनी तो पाक प्रेरित आतंकियों को जगह दिखा दी। सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को घर घुसकर मारा। कांग्रेस, जदयू, राजद, ममता समेत सारे विपक्षी 70 साल से धारा 370 को गोद में खिला रहे थे। लेकिन, मोदी जी ने धारा 370 को खत्म कर दिया और कश्मीर की रक्षा की। यह लोग संसद में बैठकर काउ-काउ करते थे कि धारा 370 हटाओगे तो खून की नदियां बहेंगी। अरे राहुल बाबा खून की नदियां तो छोड़ो किसी ने कंकड़ तक चलाने की हिम्मत नहीं हुई। नरेंद्र मोदी ने देश और बिहार के विकास के लिए कई काम किए।

Amit Shah in Bihar

उन्होंने पूर्व सहयोगी नीतीश कुमार से यह बताने को भी कहा कि उन्होंने बिहार के लिए क्या किया है। “उन्होंने केवल अपने गठबंधन सहयोगियों को बदला है।”

अमित शाह बोले- अरे नीतीश बाबू, जिनके कारण मुख्यमंत्री बने हो, उनका तो लिहाज करो

मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा, ‘क्या बार-बार घर बदलने वाले नेता पर भरोसा किया जा सकता है? क्या ऐसे आदमी के हाथ में बिहार की बागडोर दी जानी चाहिए? वह भी यह जानता है. इसीलिए वह देश का पीएम बनने के लिए कांग्रेस के घर के सामने बैठे हैं. वह पीएम नहीं बनना चाहते, वह इस उम्र में सिर्फ लालू यादव को बेवकूफ बना रहे हैं.’ वह यहीं बिहार में रहना चाहते हैं और उन्होंने बीजेपी के सभी प्रतिद्वंद्वियों को इकट्ठा कर लिया है.”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की यात्रा पिछले सप्ताह 15 विपक्षी दलों के 32 नेताओं की पटना में मुलाकात के कुछ दिनों बाद हुई है और उनमें से एक को छोड़कर सभी ने संयुक्त रूप से भाजपा का मुकाबला करने और 2024 के राष्ट्रीय चुनावों से पहले एक साझा एजेंडा बनाने की कसम खाई थी।

अमित शाह ने यह भी कहा कि महागठबंधन सरकार के तहत कानून-व्यवस्था की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।

यह कहते हुए कि बिहार राज्य ने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है, शाह ने कहा, “बिहार 2024 के चुनावों में भ्रष्ट नेताओं को करारा जवाब देगा।”

अमित शाह ने कहा कि जिन्होंने विश्वासघात किया है, उन्हें दंड देने का काम मुंगेर लोकसभा वालों को करना है। जनता से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि 2024 में मोदीजी को जिताओगे, 2025 में BJP को जिताओगे।

पटना हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अंततः विधवा ज्योति कुमारी को दरभंगा जिला प्रशासन ने दिया साढ़े चार लाख रुपए का मुआवजा दिया

पटना हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अंततः विधवा ज्योति कुमारी को दरभंगा जिला प्रशासन ने दिया साढ़े चार लाख रुपए का मुआवजा दिया। दरअसल कोविड के दौरान पति की मृत्यु हो गई थी।

लेकिन उसकी विधवा पत्नी को जिला प्रशासन ने राज्य सरकार द्वारा घोषित मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं किया।बार बार गुहार लगाने के बाद भी जब दरभंगा जिला प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया, तो बाध्य होकर विधवा ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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अधिवक्ता रतन कुमार कुमर ने रिट याचिका दायर कर यह मामला उठाया।जस्टिस मोहित कुमार शाह ने सुनवाई की।कोर्ट के कड़े रुख के बाद दरभंगा के समाहर्त्ता ने विधवा ज्योति कुमारी के नाम से जारी साढ़े चार लाख रुपए का चेक दिया।

इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले को निष्पादित कर दिया।

राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों व उनके अंतर्गत कॉलेजों में छात्रों के हॉस्टलों की दयनीय हालत पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई ई करते हुए राज्य सरकार को जवाब देने के लिए 14 जुलाई,2023 तक का मोहलत दिया

राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों व उनके अंतर्गत कॉलेजों में छात्रों के हॉस्टलों की दयनीय हालत पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की। विकास चंद्र उर्फ़ गुड्डू बाबा की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस के वी कृष्णन की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाब देने के लिए 14 जुलाई,2023 तक का मोहलत दिया है।

याचिकाकर्ता विकास चंद्र उर्फ़ गुड्डू बाबा ने अपनी जनहित याचिका में बताया कि राज्य के विश्वविद्यालयों व उनके अंतर्गत कालेजों में छात्रों के हॉस्टलों की स्थिति काफी दयनीय है।उन हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।

छात्रों के लिए साफ सुथरे और अच्छे कमरे,स्वच्छ शौचालयों,शुद्ध पेय जल,कैंटीन,बिजली आदि सुविधायें उपलब्ध नहीं है।
याचिका में ये कहा गया कि इससे छात्रों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता हैं ।

इसका प्रभाव उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य पर पड़ता है ।इस याचिका ये अनुरोध किया गया कि छात्रों के लिए नये हॉस्टलों का निर्माण किया जाये,जिनमें उनके लिए सारी सुविधाएं उपलब्ध हो,ताकि उन्हें रहने और पढ़ने लिए सही माहौल मिले।

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याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि इस मामलें में 23 अक्टूबर,2019 को बिहार सरकार के मुख्य सचिव और सभी सबंधित पक्षों को दिया गया।इसमें ये कहा गया कि छात्रों के लिए साफ सुथरे कमरे,स्नानघर, शौचालयों,बिजली आदि की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी।

कोर्ट ने आज इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को अबतक की गयी कार्रवाई का ब्यौरा राज्य को 14 जुलाई,2023 प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।इस मामलें पर अब अगली सुनवाई 14 जुलाई, 2023 को होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ पटना सिविल कोर्ट में दायर परिवाद पत्र पर जल्द सुनवाई करने के गुहार परिवादी पटना हाई कोर्ट से लगाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ पटना सिविल कोर्ट में दायर परिवाद पत्र पर जल्द सुनवाई करने के गुहार परिवादी पटना हाई कोर्ट से लगाई है।कोर्ट ने दायर याचिका में त्रुटियों को दो सप्ताह के भीतर दूर करने का आदेश दिया है।

कांग्रेस कमेटी के मानवाधिकार विभाग के प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता इंद्रदेव प्रसाद की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका पर जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा ने सुनवाई की।

कोर्ट ने दायर याचिका में हाई कोर्ट प्रशासन की ओर से उठाई गई आपत्तियों को दो सप्ताह के भीतर दूर करने का आदेश दिया। अधिवक्ता इंद्रदेव प्रसाद ने अर्जी दायर कर कोर्ट से केस को जल्द निष्पादित करने के लिए पटना सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी को आदेश देने की मांग।

उनका कहना है कि बगैर किसी तैयारी के और बिना किसी पूर्व सूचना के 24 मार्च, 20 को देश को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सम्पूर्ण देश में 21 दिनों का लॉक डाउन लगाने की घोषणा कर दी थी ।प्रधानमंत्री ने अपने सम्बोधन में यह भी कहा कि दो माह के अध्ययन के बाद प्रभावी मुकाबले एक मात्र विकल्प सोशल डिस्टेंसिंग एक दूसरे से दूरी बना कर रखना अपने घरों में बंद रहना लागू कर दिये।

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उनका कहना है कि सम्बोधन देश वासियों को आतंकित करने वाली झूठी सूचनाओं पर आधारित हैं।एक वर्ष के अध्ययन से कोरोना का संक्रमण उस तरह से नहीं फैली, जिस तरह से फैलने की बात सम्बोधन में कही गई थी।

सिविल कोर्ट में केस दायर किये जाने के बाद 12 मई, 2021 तक तारीख दी गई।उसके बाद इस केस में कोई तारीख नहीं दी जा रही हैं।

विपक्ष की बैठक टांय-टांय फिश हो गई; ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’ परंतु बैठक के बाद जो चुहिया निकली वह भी मरी हुई : सुशील मोदी

बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सम्प्रति राज्य सभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि विपक्ष की बैठक टांय-टांय फिश हो गई। कहावत है ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’ परंतु बैठक के बाद जो चुहिया निकली वह भी मरी हुई ।

• विपक्षी एकता बैठक की निकली हवा
• अरविंद केजरीवाल गुस्से में पत्रकार वार्ता छोड़कर चले गए

श्री मोदी ने कहा कि बैठक कि एक ही उपलब्धि है कि अगली बैठक का स्थान और तिथि तय हो गई। न तो प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार, न ही नीतीश कुमार को संयोजक बनाने की चर्चा हुई। उल्टे अरविंद केजरीवाल गुस्से में प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चले गए।

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श्री मोदी ने कहा कि 7 मुख्य विपक्षी दल बैठक से नदारद थे। 15 शामिल दलों में 10 परिवारवादी दल हैं और 12 दल हैं जिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। ऐसे वंशवादी और भ्रष्टाचारी से लिप्त पार्टियां ईमानदार नरेंद्र मोदी का मुकाबला नहीं कर सकती।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी मेडिकल कालेजों समेत ज़िला अस्पतालों में वेंटीलेटर,एमआरआई मशीन,सिटी स्कैन जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी मेडिकल कालेजों समेत ज़िला अस्पतालों में वेंटीलेटर,एमआरआई मशीन,सिटी स्कैन जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने रणजीत पंडित की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 11अगस्त,2023 तक की गयी कार्रवाईयों का ब्यौरा निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया राज्य के बहुत सारे प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रो के अपने भवन नहीं है।इसके लिए राज्य सरकार को भूमि उपलब्ध करा कर अपने भवन प्राथमिक चिकित्सा केंद्र हेतु बनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य के सभी नौ सरकारी मेडिकल कालेजों में जो सिटी स्कैन मशीन लगाए गए हैं, वे पीपीपी मोड पर लगाए गए है।इन्हें मेडिकल कॉउन्सिल ऑफ इंडिया मान्यता नहीं देता है।

इसी तरह से राज्य के पाँच मेडिकल कालेजों में एमआरआई मशीन लगाया है, जो कि पीपीपी मोड पर लगाया गया कि।उन्होंने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के बार बार आदेश देने बाद भी सिटी स्कैन और एमआरआई मशीन नहीं लगाया गया।

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कोर्ट के 3 अगस्त,2022 के आदेश के छह महीने पूरा होने के बाद भी इन्हें अस्पतालों में अबतक नहीं लगाया गया है।

इस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता दीनू कुमार और अधिवक्ता रितिका रानी ने याचिकाकर्ता की ओर से और एडवोकेट जनरल ने राज्य सरकार की ओर से पक्षों को प्रस्तुत किया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 11अगस्त,2023 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने अदालती आदेश की अवमानना से जुड़े मामले को गंभीरता से लेते हुए इंडियन बैंक के चीफ मैनेजर को 7 जुलाई,2023 को कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया हैं

पटना हाईकोर्ट ने अदालती आदेश की अवमानना से जुड़े मामले को गंभीरता से लेते हुए इंडियन बैंक के चीफ मैनेजर को 7 जुलाई,2023 को कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया हैं ।जस्टिस राजीव राय ने हरिंदर कौर की अवमानना मामलें पर सुनवाई की।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आदेश का अनुपालन 7 जुलाई,2023 तक नहीं किया गया, तो इंडियन बैंक के चीफ मैनेजर स्वयं कोर्ट में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा ।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आरके शुक्ला ने कोर्ट को बताया कि दिनांक 21मार्च,2017 को पटना हाई कोर्ट ने एक आदेश पारित कर याचिकाकर्ता के पति द्वारा इलाहाबाद बैंक (वर्तमान में इंडियन बैंक)में जमा कराये गए 17 लाख रुपये को ब्याज समेत याचिकाकर्ता को लौटाने का आदेश दिया था ।

आदेश के अनुपालन में इलाहाबाद बैंक द्वारा 17 लाख रुपये तो लौटा दिये गए ,लेकिन उसका ब्याज नहीं याचिकाकर्ता को नहीं लौटाया गया।

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कोर्ट ने जब ब्याज देने के संबंध में बैंक के अधिवक्ता से स्पष्टीकरण माँगा, तो उन्होंने पटना हाई कोर्ट द्वारा पारित फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ब्याज देना बैंक की देनदारी नहीं है।चूँकि इस राशि को बैंक द्वारा इस्तेमाल नहीं किया गया है ।

उन्होंने कोर्ट से कहा कि आदेश के अनुपालन में मूल राशि लौटा दी गई है। इस पर कोर्ट ने असहमति जताते हुए बैंक को ब्याज की राशि याचिकाकर्ता को लौटाने का आदेश दिया ।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई तक इस आदेश का पालन नहीं किया गया, तो इंडियन बैंक के चीफ मैनेजर अदालत में स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देंगे । इस मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई,2023 को होगी ।

राज्य कर नगर निकाय चुनाव में ओबीसी/ईबीसी को दिए गए आरक्षण मामले की सुनवाई अब पटना हाई कोर्ट के दो जजों की खंडपीठ करेगी

राज्य कर नगर निकाय चुनाव में ओबीसी/ईबीसी को दिए गए आरक्षण मामले की सुनवाई अब पटना हाई कोर्ट के दो जजों की खंडपीठ करेगी। जस्टिस राजीव रॉय ने इस मामले को दो जजों की खंडपीठ को भेजने का निर्देश दिया।

गौरतलब है कि समर्पित आयोग की ओर से राज्य सरकार को दी गई रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को हाई कोर्ट के समक्ष रखने का आदेश दिया था।

जिसके बाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गई।इस याचिका पर जस्टिस सत्यव्रत वर्मा सुनवाई कर रहे थे।

इस दौरान राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से दायर अर्जी पर सवाल उठाते हुये कहा गया कि इस केस को दो जजों की खंडपीठ को करना चाहिये।उन्होंने इस केस को खंडपीठ के समक्ष भेजने का अनुरोध किया।

कोर्ट ने इस मामले में गर्मी की छुट्टी के बाद कोई निर्णय लेने का आदेश दिया था विदित है कि पटना हाईकोर्ट ने नगर निकाय चुनाव में ओबीसी/ईबीसी को दिए गए आरक्षण को गैरकानूनी करार देते हुए आरक्षित सीट को सभी के लिए खोलने का आदेश दिया था।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनाव को स्थगित कर दिया।नगर निकाय का चुनाव दो चरणों में होना था। पहले चरण का चुनाव 10 अक्टूबर,2022 को और दूसरे चरण का चुनाव 20 अक्टूबर,2022 को होना था।

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इसी बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने हाई कोर्ट में पुनर्विचार अर्जी दायर की। लेकिन बाद में इस अर्जी को वापस ले ली।

हाई कोर्ट में आवेदकों की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि नगर निकाय चुनाव में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नजरअंदाज किया जा रहा है। पिछड़ी जाति को नगर निकाय चुनाव में आरक्षण नही दिया जा रहा है।

जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पिछड़ी जातियों को आरक्षण देने के लिए समर्पित आयोग बना निर्णय लेने के बाद ही चुनाव कराने का आदेश दिया है।लेकिन राज्य सरकार पिछड़ी जाति को आरक्षण दिये बिना चुनाव कराने का निर्णय लिया है।

वही राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया गया कि पंचायत चुनाव के समय ही पिछड़ी जातियों को आरक्षण का लाभ देने के लिए पिछड़ी जातियों का डाटा कलेक्शन किया गया था।उसी डाटा के आधार पर नगर निकाय का चुनाव कराने का फैसला लिया गया है।

राजधानी पटना समेत राज्य के कई अन्य शहरों में बने बड़ी और बहुमंजिली ईमारतों में आग बुझाने की पर्याप्त और प्रभावी व्यवस्था नहीं होने के मामलें में पटना हाईकोर्ट में दो सप्ताह बाद की जाएगी

राजधानी पटना समेत राज्य के कई अन्य शहरों में बने बड़ी और बहुमंजिली ईमारतों में आग बुझाने की पर्याप्त और प्रभावी व्यवस्था नहीं होने के मामलें में पटना हाईकोर्ट में दो सप्ताह बाद की जाएगी।अधिवक्ता मणिभूषण प्रताप सेंगर की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

उन्होंने अपनी जनहित याचिका में बताया कि पटना समेत राज्य के कई शहरों में बड़ी ईमारतों में आग बुझाने की प्रभावी व्यवस्था न के बराबर है।उन्होंने बताया कि इन ईमारतों में बिजली के शॉर्ट सर्किट होने या किसी अन्य कारण से आग लगने पर आग बुझाने की सही व्यवस्था नहीं होने के कारण अक्सर जान माल की बड़े पैमाने पर क्षति होती है।

उन्होंने बताया कि शहरों में शहरों में नियमों का उल्लंघन करने के कारण आग बुझाने में काफी कठिनाई होती है।सड़कों व गलियों मे होने वाले अतिक्रमणों के कारण चौड़ाई कम होती जा रही है।इससे भी आग बुझाने वाले फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

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उन्होंने ये भी जानकारी दी है कि पटना में 51 ईमारतों को आग बुझाने की व्यवस्था की जांच के बाद अस्थायाई अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया गया है।जबकि 12 ईमारतों को उनके आग बुझाने की व्यवस्था की जांच कर स्थायी अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया गया है ।

उन्होंने बताया कि पटना में हजार से अधिक ऐसी ईमारतें है, जिन्हें आग बुझाने की व्यवस्था का अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं दिया गया है ।इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट में पटना एवं राज्य के अन्य क्षेत्रों में खुले आम नियमों का उल्लंघन कर मांस- मछली बेचने पर पाबन्दी लगाने सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के बाद होगी

पटना हाईकोर्ट में पटना एवं राज्य के अन्य क्षेत्रों में खुले आम नियमों का उल्लंघन कर मांस- मछली बेचने पर पाबन्दी लगाने सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के बाद होगी। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने मामलें पर सुनवाई करते हुए पटना नगर निगम को विस्तृत हलफनामा दायर करने के लिए पुनः दो सप्ताह का समय दिया।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस बारे में पटना नगर निगम को विस्तृत जानकारी देने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा था। पटना नगर निगम ने कोर्ट को बताया था कि आधुनिक बूचडखाने के निर्माण और विकास के लिए स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है।

ये जनहित याचिका अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने दायर की है। अधिवक्ता मानिनी जयसवाल ने कोर्ट को बताया कि पटना समेत राज्य विभिन्न क्षेत्रों में अस्वास्थ्यकर और नियमों के विरुद्ध मांस मछली काटे और बेचे जाते हैं।

उन्होंने सुनवाई के दौरान बताया था कि इससे जहाँ आम आदमी के स्वास्थ्य पर पर बुरा असर पड़ता हैं, वहीं खुले में इस तरह से खुले में जानवरों के काटे जाने से छोटे लड़कों के मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

याचिकाकर्ता के वकील मानिनी जयसवाल ने कोर्ट से यह भी आग्रह किया था कि खुले और अवैध रूप से चलने वाले बूचडखानों को नगर निगम द्वारा तत्काल बंद कराया जाना चाहिए ।

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उन्होंने कोर्ट को बताया था कि पटना के राजा बाज़ार, पाटलिपुत्रा , राजीव नगर, बोरिंग केनाल रोड , कुर्जी, दीघा , गोला रोड , कंकड़बाग आदि क्षेत्रों में नियमों का उल्लंघन कर खुले में मांस मछ्ली की बिक्री होती है।

अधिवक्ता मानिनी जायसवाल ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि अस्वस्थ और बगैर उचित प्रमाणपत्र के ही जानवरों को मार कर इनका मांस बेचा जाता है ,जो कि जनता के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

उनका कहना था कि शुद्ध और स्वस्थ मांस मछ्ली उपलब्ध कराने के लिए सरकार को आधुनिक सुविधाओं सुविधाओं के साथ बूचड़खाने बनाए जाने चाहिए,ताकि मांस मछली बेचने वालोंं को भी सुविधा मिले।

साथ ही जनता को भी स्वस्थ और प्रदूषणमुक्त मांस मछली मिल सके।इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह के बाद होगी।