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Breaking News of Bihar

दानापुर के रुपसपुर में संदिग्ध परिस्थिति में मिला पूर्व जिला परिषद सदस्य का शव, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

नौबतपुर के पूर्व जिला परिषद राकेश उर्फ गुड्डू सिंह का शव उनके फ्लैट से संदिग्ध परिस्थिति में बरामद किया गया है। बताया जाता है गुड्डू सिंह वर्तमान में नौबतपुर के टिसखोरा के वार्ड सदस्य भी हैं गुड्डू सिंह रूपसपुर थाना क्षेत्र के वैश्वशरैया नगर में साकेत सदन के फ्लैट में रहते थे। उसी फ्लैट में उनका शव बरामद किया गया है।

शव जहां जिस कमरे से बरामद किया गया है उसके आसपास खून के धब्बे भी दिखाई दे रहे हैं। जिससे परिजन हत्या की आशंका जता रहे हैं जता रहे हैं उनका कहना है कि इनकी हत्या की गई है।

घटनास्थल पर जानकारी के बाद रूपसपुर पुलिस भी मौके पर पहुंची साथ ही दानापुर डीएसपी एएसपी अभिनव धीमान भी पहुंचे हैं और मामले की तफ्तीश कर रहे हैं। इनका कहना है कि अभी मामले की तफ्तीश चल रही है पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि किस तरह से हत्या की गई है फिलहाल मामला संदिग्ध लग रहा है।

परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है जिसे नकारा नहीं जा सकता उसकी जांच पुलिस कर रही है बताया जाता है कि काफी दिनों से यह यह रह रहे थे इनका किनके साथ उठना बैठना और घर पर आना जान था सभी की तफ्तीश होगी। आसपास के सीसीटीवी को भी खंगाला जा रहा है।

पूर्व जिला परिषद सदस्य का शव

SDO के बॉडीगार्ड ने खुद को मारी गोली, अस्पताल पहुंचते ही तोड़ा दम

छपरा सदर एसडीओ के बॉडीगार्ड प्रवीण ने अपने सरकारी आवास में खुद को गोली मार ली।

घायल बॉडीगार्ड को सदर अस्पताल लाया गया जहां उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि आवास में प्रवीण था जहां अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी।

सूचना मिलते ही प्रवीण को सदर अस्पताल लेकर भर्ती कराया गया लेकिन वहां उसकी मौत हो गई।

ये लड़ाई अभी और खीचेगी

इन दिनों में बच्चों के भविष्य को लेकर शहर शहर भटक रहा हूं कहां उसे सुरक्षा के साथ साथ बेहतर शिक्षा मिल सके।
इस वजह से खबरों की दुनिया से इन दिनों दूर हैं, लेकिन फेसबुक के मैसेंजर पर कुछ ऐसे मैसेज आये हैं जिसे देख कर मैं अपने आपको रोक नहीं सका सवाल देश का है और ऐसे में कुर्बानी तो देनी ही पड़ेगी ।

एक मैसेज तीस्ता सीतलवाड़ से जुड़ा है मैसेज करने वाले हमारे फ्रेंड लिस्ट में भी नहीं है।
उनके प्रोफाइल पर बस एक दो पोस्ट है चार पांच वर्षो के दौरान उनका मैसेज था संतोष जी तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ्तारी पर आपकी कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है मेरे जैसे पाठक आपके आलेख का इन्तजार करता है आपका ना लिखना बहुत बड़ी बात है, मैंने उन्हें जवाब दिया बिहार से बाहर के मुद्दों पर लिखने का क्या मतलब है जिसके बारे में मेरे पास कोई खास जानकारी नहीं है इतना लिखना था कि तीस्ता सीतलवाड़ की पूरी बायोग्राफी का लिंक पांच मिनट के अंदर भेज दिया बहुत कुछ उनके बारे में ऐसी जानकारी मिली जो मुझे पता नहीं था फिर भी मेरा मानना है कि इस तरह की लड़ाई के साथ खड़े रहने में यह खतरा बना रहता है कि कही आप एक पक्षीय ना दिखने लगे ।

वैसे जेल जाने से डरने की जरुरत नहीं है बस मैं सभी लोगों को गांधी के उस मूल मंत्र को याद दिलाता हूं जिसमें गांधी ने कहा था जिस दिन जेल जाने का डर समाप्त हो जाएगा उसी दिन अंग्रेज भारत छोड़ कर चला जाएगा।
आज हम लोग उसी दौर से गुजर रहे हैं सरकार असहमति को जेल का डर दिखा कर चुप करना चाह रही है इसलिए पहले जेल जाने के डर से बाहर निकले ये लड़ाई तुरंत निर्णायक मोड़ पर आ खड़ा होगा ।

दूसरा मैसेज एक मुस्लिम यूथ का था जो मुझे अंदर से हिला दिया ये लड़का भी जेल जा चुका है इसी तरह के एक वाकिया में जब वो जेल से बाहर निकला तो मैंने पूछा तुमसे गलती हुई थी कहां जी सर मुझसे गलती हो गयी मैंं भावना में बह गया था।
लेकिन जेल जाने के बाद बहुत कुछ सीखने का मौका मिला अब ऐसी गलती नहीं होगी और ये लड़ाई जारी रहेगा । मैने कहाँ था इंसान है तो गलती होगी ही गलती को स्वीकार करना चाहिए और फिर आगे गलती ना हो इसका ख्याल रखना चाहिए ।
उसका मैसेज था

हमने आपातकाल नहीं देखा सर! आज fake news को पकड़ने वाले ईमानदार alt news के संस्थापक mohammad Zubair को गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि mohammad zubair नफ़रत फैलाने वालों को expose कर रहा था नफ़रत फैलाने वाले और झूठ फैलाने वाले को सच नहीं पसंद, सो गिरफ्तारी के बाद जश्न में है सब अब कुछ नहीं बचा सर l बहुत बुरा दौर है सर अब मैं टूट गया कुछ नहीं होने वाला है।

मैंने उसे जवाब दिया निराश होने कि जरूरत नहीं है इस देश ने समाजवाद को जातिवाद में भी बदलते देखा है उसके परिणाम को भी लोगों ने महसूस किया है और आज देखिए उन जातिवादी नेताओं का क्या हाल है ।
इस समय देश धर्मवाद से लड़ रहा है आप परेशान इसलिए हैं कि अपनी जिंदगी में ही इस लड़ाई का प्रतिफल देखना चाहते हैं परिणाम की चिंता छोड़ आप अपने कौम से कहिए देश ने उन्हें दूसरी बार अवसर दिया है कि वो यह साबित करे कि मैं देश और संविधान का सबसे बड़ा सिपाही हूं और मेरा आदर्श खान अब्दुल गफ्फार खा है, आजम खान ,ओवैसी और शहाबुद्दीन नहीं क्यों कि आपकी लड़ाई लड़ने वाले लाखों करोड़ो हिन्दू आप से यही उम्मीद करता है क्यों कि उसकी लड़ाई तब कमजोर पड़ जाती है जब आप देश के संविधान और कानून के बजाय आप अपने धर्म को उपर समझने लगते हैं ।

मोदी सरकार के बनने के बाद राष्ट्रद्रोह के नाम पर जेल भेजे गये लोगों की सूची उठा कर देख लीजिए मुसलमानों से कई गुना ज्यादा हिन्दू को इस सरकार ने जेल भेजा है जो देश के आत्मा के साथ खड़ा है इसलिए मोदी की लड़ाई आपसे नहीं है ऐसे हिन्दू से है जो देश के आत्मा को बचाये रखने के लिए लड़ रहा है । क्यों कि आपको निपटाने के लिए उसके पास पहले से ही ओवैसी और मायावती जैसे नेता मौजूद है और सच कहिए तो आप निपट भी गये हैं।
ऐसे में आप जैसे युवा को देश के संविधान के साथ खड़े रहने की जरूरत है।

इतिहास लिखेगा बस उसी जज्बे के साथ लड़ते रहिए । चलते चलते बाजपेयी जी के उस कविता का हमेशा स्मरण करे नयी ऊर्जा देगी ‘
इसे मिटाने की साजिश करने वालों से कह दोकि चिंगारी का खेल बुरा होता है;औरों के घर आग लगाने का जो सपना,वो अपने ही घर में सदा खड़ा होता है.’हार नहीं मानूंगा, रार नई ठानूंगा,काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं,गीत नया गाता हूं.।
ऐसे में जुबैर की गिरफ्तारी हुई है तो निपुर की भी गिरफ्तारी होनी चाहिए ये मांग करनी चाहिए ।

सहायक उद्यान निदेशक के ठिकानों पर EOU की रेड, मुजफ्फरपुर में दो जगहों सहित पटना में चल रही छापेमारी

मुजफ्फरपुर में पोस्टेड सहायक उद्यान निदेश शम्भू प्रसाद के कई ठिकानों पर EOU (आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने मंगलवार को छापेमारी शुरू कर दी है। मुजफ्फरपुर में उनके BMP 6 के समीप स्थित फ्लैट और मुशहरी स्थित सरकारी कार्यालय टीम तलाशी ली रही है। इसके अलावा पटना में भी दो जगहों पर कार्रवाई चल रही है। उनपर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। इस मामले में EOU में आर्थिक अपराध थाना काण्ड सं0-25 / 2022. दि 27.06.2022 अन्तर्गत धारा 13 (2) सह पठित धारा 13 (1) (b) भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम, 1988 यथा संशोधित 2018 के तहत दर्ज की गई है।

पद पर रहते हुए किया दुरुपयोग

बताया जा रहा है कि शम्भू प्रसाद पर आय से कई गुना अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। उन्होंने अपने पद पर रहते हुए इसका दुरुपयोग किया है। सूत्रों की माने तो सरकार द्वारा उद्यान विभाग में कई योजनाएं चलाई जाती है। जिसमे पौधा का रंग रोगन, पौधा लगाना, कोल्ड स्टोर का लाइसेंस देना समेत अन्य योजना शामिल है। सूत्र बताते हैं कि इन योजनाओं में उन्होंने अवैध तरीके से अपने पद का दुरुपयोग किया है। इसकी भनक लगते ही EOU की टीम ने धावा बोल दिया है।

कार की ली तलाशी

BMP 6 के समीप एक नवनिर्मित अपार्टमेंट है। जिसमे सहायक उद्यान निदेशक का फोर्थ फ्लोर पर फ्लैट है। इसमे उनकी कार भी लगी हुई है। जिसकी तलाश EOU की टीम ने ली है। हालांकि, इसमे से कुछ बरामद नहीं हुआ है। घर और कार्यलय में ही टीम अंदर में कार्रवाई व छानबीन कर रही है। अबतक बरामदगी को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गयी है।

जहानाबाद में एक ठेकेदार को अपराधियों ने मारी गोली, सदर अस्पताल में भर्ती

बड़ी खबर जहानाबाद से है जहां एक ठेकेदार को अपराधियों ने गोली मार दी। घायल शख्स का नाम रविंद्र कुमार है जिसे स्थानीय लोगों ने सदर अस्पताल पहुंचाया।

डॉक्टरों ने तुरंत देख रेख शुरू कर दिया फिलहाल रविंद्र खतरे से बाहर है। पीड़ित ने बताया कि वह मोटरसाइकिल से जा रहा था तभी पीछे से 2 पल्सर सवार अपराधी आए उसमें से एक ने गोली चला दी और आगे निकल गया।

रविंद्र की माने तो उसकी किसी से दुश्मनी नहीं है। ऐसे में यह बताना मुश्किल है कि गोली किसने चलाई? घटना की सूचना पाकर नगर थाने की पुलिस पहले घटनास्थल और फिर अस्पताल पहुंची है।

पूरा मामला जहानाबाद एरोड्रम के पास श्याम नगर मोहल्ले की है।

कौन हैं द्रौपदी मुर्मू? जिन्हें एनडीए ने बनाया राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार

👉द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा में हुआ था. वह दिवंगत बिरंची नारायण टुडू की बेटी हैं. मुर्मू की शादी श्याम चरम मुर्मू से हुई थी. द्रौपदी मुर्मू ने जीवन में आई हर बाधा का मुकाबला किया है. पति और दो बेटों को खोने के बाद भी उनका संकल्प और मजबूत हुआ है. द्रौपदी मुर्मू को गरीबों के उत्थान के लिए काम करने का 20 वर्षों का अनुभव है

👉द्रौपदी मुर्मू ओडिशा में मयूरभंज जिले के कुसुमी ब्लॉक के उपरबेड़ा गांव के एक संथाल आदिवासी परिवार से आती हैं.

👉उन्होंने 1997 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. द्रौपदी मुर्मू 1997 में ओडिशा के राजरंगपुर जिले में पार्षद चुनी गईं.

👉1997 में ही मुर्मू बीजेपी की ओडिशा ईकाई की अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष भी बनी थीं.

👉मुर्मू राजनीति में आने से पहले श्री अरविंदो इंटीग्रल एजुकेशन एंड रिसर्च, रायरंगपुर में मानद सहायक शिक्षक और सिंचाई विभाग में कनिष्ठ सहायक के रूप में काम कर चुकी थीं.

👉द्रौपदी मुर्मू ने 2002 से 2009 तक और फिर 2013 में मयूरभंज के भाजपा जिलाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया.

👉द्रौपदी मुर्मू ओडिशा में दो बार की बीजेपी विधायक रह चुकी हैं और वह नवीन पटनायक सरकार में कैबिनेट मंत्री भी थीं. उस समय बीजू जनता दल और बीजेपी के गठबंधन की सरकार ओडिशा में चल रही थी.

👉ओडिशा विधान सभा ने द्रौपदी मुर्मू को सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया.

👉द्रौपदी मुर्मू ने ओडिशा में भाजपा की मयूरभंज जिला इकाई का नेतृत्व किया था और ओडिशा विधानसभा में रायरंगपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था.

👉वह झारखंड की पहली महिला राज्यपाल भी रह चुकी हैं. झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने मुर्मू को शपथ दिलाई थी.

स्पाइस जेट के विमान में लगी आग, जिंदगी और मौत से आधे घंटे तक जुझते रहे यात्री

पटना एयरपोर्ट के पास ही स्पाइसजेट की विमान संख्या एसक्यू725 नंबर की विमान के इंजन में अचानक आग लगी और ब्लास्ट करने के साथ आग और बढ़ती जा रही थी । आग स्पाइसजेट के बाएं साइड में लगे इंजन में आग लगी थी ।

धमाके के साथ लोगों ने भी इस तस्वीर को भरपूर देखा और लोगों में भी इसे देखकर डर का माहौल था । आधे घंटे तक यह माहौल जिंदगी और मौत का स्पाइसजेट के अंदर बैठे यात्रियों का रहा काफी मशक्कत के बाद पटना एयरपोर्ट पर उसे उतारा गया और यात्रियों की जान बची ।

पटना में स्पाइस जेट विमान हादसे पर मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन ने लिया संज्ञान। डीजीसीए ने एक टिक गठित कर मामले की उच्चस्तरीय जांच का आदेश दिया है।

बर्ड हिट के कारण पटना में विमान में टेक्निकल प्रॉब्लम आई थी। पटना एयरपोर्ट पर विमान को सुरक्षित लैंडिंग करवा दिया गया।

पटना एयरपोर्ट के पास चिड़ियाघर होने के कारण अक्सर पक्षी आसमान में उड़ती रहती है इस बार इस वजह विमान से टकरा गए जिसके बाद यह हादसा हुई।

बेकाबू हुआ बिहार

जिसका डर था वही हुआ अग्निपथ को लेकर जारी आंदोलन बिहार के 30 जिला मुख्यालय होते हुए अब छोटे छोटे कस्बों में पहुंच गया है ।सुबह के 11 बजे तक जो खबरें आ रही है उसके अनुसार बिहार में अभी तक छह जगहों पर ट्रेनों में आग लगने की घटना घट चुकी है रेलवे प्रशासन के अनुसार बिहार के विभिन्न स्टेशनों पर सुबह चार बजे से ही 50 से अधिक ट्रेनें अलग अलग स्टेशनों पर खड़ी है ।पटना -मुगलसराय,समस्तीपुर -गोरखपुर और बरौनी हाजीपुर रेल लाइन पर ट्रेन का परिचालन पूरी तरह के प्रभावित है वही एक दर्जन से अधिक एनएच पर सुबह से ही छात्र डटे हुए हैं वही इस बीच पुलिस मुख्यालय ने हालात को देखते हुए पूरे बिहार में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है।

आज सुबह से जहां अभी तक सबसे अधिक हिंसा हुई है वो वह इलाका है जहां बिहार से सबसे अधिक बच्चे सेना में जाते हैं मोहिउद्दीन नगर जहां हर घर में कोई ना कोई सेना में जरूर है वहां आज सुबह सुबह सेना की तैयारी कर रहे छात्रों ने ट्रेन में आग लगा दिया ऐसा ही कुछ आरा के कुल्हड़िया ,लखीसराय, सुपौल और बेतिया में भी देखने को मिला है ।

इस बीच पटना स्थित बीजेपी दफ्तर सहित राज्य के तमाम जिले में स्थित बीजेपी कार्यालय की सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया ।

1—आरा —आक्रोशित सैन्य अभ्यर्थियो ने कुल्हड़िया में पैसेंजर ट्रेन में आग लगा दिया है जिस वजह से सासाराम पैसेंजर ट्रेन की 2 बोगी जलकर राख हो गया है ।

2—समस्तीपुर — बिहार संपर्क एक्सप्रेस ट्रेन में लगाई आग । दरभंगा से नई दिल्ली जा रही थी ट्रेन । ट्रेन की चार बोगी जलकर खाक उपद्रवियों ने ट्रेन में जमकर की तोड़फोड़ और लूटपाट । समस्तीपुर मुजफ्फरपुर रेल खंड के भोला टॉकीज रेलवे गुमटी के पास की घटना।

3—समस्तीपुर— जम्मूतवी गुवाहाटी एक्सप्रेस ट्रेन में छात्रों ने लगाई आग । ट्रेन की दो बोगी जलकर खाक ।अग्निपथ योजना को लेकर कल से जारी है छात्रों का प्रदर्शन । हाजीपुर बरौनी रेलखंड के मोहिउद्दीन नगर स्टेशन की घटना ।

4—आरा—-दूसरे दिन भी प्रदर्शन जारी हजारों की संख्या में जुटे युवाओं ने मुगलसराय पटना रेल खंड के बिहिया स्टेशन पर रेलवे ट्रैक को किया जाम कर रहे हैं प्रदर्शन रेल परिचालन बाधित

5—-वैशाली के हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर उग्र छात्रों ने तोड़फोड़ की है।

6—नालंदा में रेलवे ट्रैक पर आग लगाई, हाईवे जाम
नालंदा में भी प्रदर्शनकारियों ने रेलवे ट्रैक पर आग लगा दी। राजगीर-बख्तियारपुर रेलखंड के पावापुरी फाटक पर सेना भर्ती के अभ्यर्थियों ने ट्रैक को जाम किया। NH- 20 पर जाम लगा दिया। इसके चलते दोनों और गाड़ियों की लंबी लाइन लग गई है।

7—-बेगूसराय में रेलवे ट्रैक पर आगजनी
बेगूसराय के लखमीनिया स्टेशन पर अभ्यर्थी रेलवे ट्रैक पर टायर जलाकर की आगजनी कर रहे हैं। और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी जारी है।

8—औरंगाबाद में NH-2 के जसोईया मोड़ पर प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर दी। जिसके चलते 5 किलोमीटर लंबा जाम लग गया है।

9—बक्सर – आज तीसरे दिन भी सुबह 5 बजे से दिल्ली पटना कोलकाता रेलवे ट्रैक को छात्रों ने किया जाम , अप और डाउन लाइन पर ट्रेनों का परिचालन रोका , डुमरांव स्टेशन के पास हजारो युवा सुबह 5 बजे से ही जुट कर रेलवे ट्रैक पर कर रहे है नारेबाजी ।

10–औरंगाबाद–युवा अभ्यर्थियों ने जाखिम के समीप रेलवे स्टेशन पर ट्रैक को किया जाम जिससे लगभग तीन घंटे तक ट्रेनों का परिचालन बाधित रहा और विभिन्न स्टेशनों पर कई महत्वपूर्ण गाड़ियां खड़ी रही।सबसे बड़ी घटना दाउदनगर में घटी जहां प्रदर्शनकारियों ने भखरुआ मोड़ को जमकर जमकर आगजनी की और दाउदनगर हसपुरा पथ स्थित एक निजी स्कूल को अपना निशाना बनाया है ।

11—बेतिया छात्रों ने बेतिया रेलवे स्टेशन पर जमकर तोड़ फोड़ कर दिया है लगभग 3 घंटे रणभूमि बना है बेतिया रेलवे स्टेशन

12—समस्तीपुर —छात्रों का हंगामा जारी कई पुलिस वाहन को बनाया निशाना दोनों तरफ से जमकर चला रोड़ा पत्थर एसपी ने अतिरिक्त पुलिस फोर्स की मांग

13—लखीसराय — सेना में अग्निपथ योजना का लखीसराय में भारी विरोध
विक्रमशिला एक्सप्रेस ट्रेन में लगायी आग

14—-अरवल: अग्नीपथ योजना को लेकर छात्रों का आक्रोश प्रदर्शन

NH-139 को कई जगह पर किया जाम

जाम से कई जगह पर गाड़ियों की लगी लंबी कतार
15—नवादा में बवाल जारी ।
नवादा में तीसरा दिन भी छात्रों का बवाल जारी है. जिले के हिसुआ के विश्व शांति चौक पर आक्रोशित छात्रों ने सड़क पर की आगजनी और तोड़फोड़ जमकर बबाल काटा। उग्र छात्र तिलैया जंक्शन पहुंच कर रेलवे ट्रैक को किया जाम

16—सुपौल – आक्रोशित युवाओं ने अग्निपथ के विरोध में किया प्रदर्शन, ट्रेन में लगाई आग।
सुपौल सदर बाजार में आज युवाओं ने अग्निपथ का विरोध करते हुए सड़क जाम और प्रदर्शन किया, इस दौरान आक्रोशित युवाओं ने ट्रेन में भी आग लगा दिया।

यह मामला सदर बाजार के लोहिया नगर चौक ढाला के समीप का है जहां आक्रोशित छात्रों ने सड़क पर आगजनी करते हुए जमकर बबाल काटा, इस दौरान ट्रेन को रोककर उसमे आग भी लगा दिया।

17–सासाराम –छात्रों ने पुरानी जीटी रोड पर जमकर तोड़फोड़ किया है। कई वाहनों का शीशा तोड़ दिया है इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प भी हुई है ।

18—बाढ़ ।बख्तियारपुर के बाईपास रोड में छात्रों ने सेना के अग्निपथ योजना के विरोध में सड़क जाम कर दिया। इस दौरान छात्रों ने जमकर नारेबाजी की। छात्रों ने इस योजना को अ लोकतांत्रिक बताते हुए वापस लेने की मांग की है। मौके पर पुलिस पहुंच चुकी है ।छात्रों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है।

19—लखीसराय–छात्रों का उपद्रव जारी विक्रमशिला के बाद छात्रों ने जनसेवा एक्सप्रेस ट्रेन में भी लगाई आग
लखीसराय में दो ट्रेनों में लगाई आग पुलिस और छात्रों में हिंसक झड़प जारी कई पुलिस वाले हुए घायल
स्थिति हुआ बेकाबू।

20—बेतिया– प्रदर्शनकारियों छात्रों ने स्टेशन पर तोड़-फोड़ करने के बाद ट्रेन में लगायी आग पूरे स्टेशन परिसर में मचा कोहराम।

21—खगड़िया –छात्रों कोसी एक्सप्रेस को रोका,रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन बाधित….
NH-31 पर टायर जलाकर कर रहे हैं प्रदर्शन,वाहनों की लगी लंबी लाइन….
मानसी -सहरसा और मानसी कटिहार- रेलखंड हुआ बाधित..
मानसी थाना इलाके में हो रहा प्रदर्शन.

नीतीश जी काहे मुर्गी पर तोप चला रहे हैं

हाल ही में एक शादी समारोह के दौरान जदयू के कुछ नेताओं से मुलाकात हुई उस दौरान कुछ पत्रकार बंधु भी मौजूद थे स्वभाविक था जब राजनीतिज्ञ और पत्रकार एक साथ हो तो मुद्दा राजनीति ही होगी ।

चर्चा आरसीपी सिंह के घर को खाली कराने को लेकर हो रही थी जदयू और हमारे कुछ पत्रकार बंधु सरकार के इस निर्णय को लेकर तारीफ कर रहे थे लेकिन पता नहीं क्यों अचानक मेरी जुबान से निकल गया कि यह सही नहीं है और मुझे पता नहीं क्यों इस खेल में जो भी शामिल है वो जदयू का शुभचिंतक नहीं लगता है ,आरसीपी सिंह में लाख बुराई हो जनाधार शून्य हो फिर भी मुझे लगता है कि राज्यसभा नहीं भेजने का फैसला पार्टी का सही हो सकता है लेकिन घर खाली कराना सही नहीं है क्यों कि जदयू के निर्माण में आरसीपी सिंह की भी भूमिका रही है वही जदयू और नीतीश कुमार में वो बात नहीं रही तोड़ जोड़ कर सत्ता में बने हुए हैं ऐसे में इस तरह के विवाद से पार्टी को बचना चाहिए एक सप्ताह पहले तक राजद के साथ सरकार बनाने की तैयारी में लगे थे और जैसे ही बात बनी लालू प्रसाद को जन्मदिन तक की बधाई तक नहीं दिए ये भी कोई राजनीति होती है जिस दिन बीजेपी को यह भरोसा हो जाये कि राजद जदयू को साथ नहीं लेगा दूसरे दिन सरकार आपकी नहीं रहेगी ।

आप लोगों को यह समझना चाहिए कि मोदी और शाह राजनीतिक मजबूरी में नीतीश के साथ हैं जैसे ही मौका मिलेगा ऐसा पटकनी देगा जो आप लोग सोच नहीं सकते हैं इसलिए विभीषण पैदा मत करिए । वहां मौजूद जदयू के नेता और पत्रकार बंधु एक साथ बोल पड़े क्या संतोष जी आप भी ना आरसीपी सिंह का खेल खत्म हो चुका है बहुत उड़ रहा था उसकी क्या राजनीतिक हैसियत है आरसीपी सिंह के जाने से पार्टी मजबूत होगा ।

मैंने कहा ये हो सकता है ,मेरा बीट भी कभी जदयू नहीं रहा है इसलिए जदयू के अंदर क्या चल रहा है मुझे पता नहीं है लेकिन इतना जरूर पता है कि नीतीश कुमार के इस एक्शन से जदयू के एक दर्जन से अधिक विधायक नाराज जरुर होंगे जिनसे आरसीपी सिंह प्रकरण के दौरान मेरी लगातार बात हो रही थी लेकिन ये लोग कहां सुनने वाले थे अंत में मैंने यही कहा दिग्विजय सिंह, प्रभुनाथ सिंह, नरेन्द्र सिंह ,जार्ज साहब और शरद यादव जब सबके सब साथ थे उस समय का जदयू और आज का जदयू कहां खड़ा है और एक बात नीतीश कुमार अभी तक जीतने भी राजनीतिक फैसला लिए है उसमें उन्हें पटकनी ही खानी पड़ी है इतिहास पलट कर देख लीजिए इनकी जिद्द पार्टी को हमेशा नुकसान ही पहुंचाया है ।

अभी अभी खबर आ रही है कि जेडीयू ने पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अजय आलोक ,प्रदेश महासचिव अनिल कुमार, प्रदेश महासचिव विपिन कुमार यादव और भंगी समाज सुधार सेनानी के प्रकोष्ठ अध्यक्ष जितेन्द्र नीरज को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है ये सारे के सारे आरसीपी सिंह के करीबी माने जाते हैं ।

पहले टिकट नहीं दिये फिर आवास खाली करवा दिये और अब उसके समर्थकों को टारगेट लिया जा रहा है मतलब नीतीश चाहते हैं कि आरसीपी सिंह पार्टी छोड़ दे वैसे आरसीपी सिंह के खिलाफ पहली बार नीतीश नहीं हुए इससे पहले भी अजय आलोक सहित कई लोगों पर कार्यवाही हो चुकी है क्यों कि वो लोग आरसीपी सिंह के करीब थे फिर एक दौर आया जब आरसीपी सिंह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाये गये मंत्री भी बने इसलिए ललन सिंह ,संजय झा और आरसीपी सिंह मामले में नीतीश का दिल कब पिघल जाए कहना मुश्किल है वैसे देखना यह है कि इस कार्यवाही के बाद आरसीपी सिंह क्या करते हैं वैसे दोनों के बीच जो रिश्ता रहा है ऐसे में आरसीपी गाण्डीव उठायेंगे कहना मुश्किल है लेकिन इतना तय हो गया है बिहार की राजनीति दिलचस्प मोड़ पर आ खड़ा हुआ है ।

लालू का राज जंगलराज था तो मोदी और योगी का राज क्या है

लालू का राज जंगल राज, तो मोदी योगी का राज ?
कल काफी दिनों बाद टीवी पर समाचार देख रहे थे सारा चैनल प्रयागराज हिंसा मामले में आरोपी जावेद के घर पर हो रही पुलिसिया कार्यवाही का लाइव चला रहे थे और एंकर से लेकर ग्राउंड में मौजूद रिपोर्टर इस अंदाज में रिपोर्टिंग कर रहे थे मानो ये भी इस न्याय व्यवस्था के साथ खड़ा है और सही ठहरा रहा है ।

टीवी चैनल के स्टूडियो में बहस भी कुछ इसी अन्दाज में चल रहा था कि जो हो रहा है बहुत सही हो रहा है और ऐसे लोगों के खिलाफ इसी तरह की कार्यवाही होनी चाहिए ।
सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की इस कार्यवाही को लेकर कुछ इसी तरह की प्रतिक्रिया आ रही थी मतलब प्रशासन का यह कार्यवाही सही है और आने वाले दिनों में प्रशासन को इसी तरह से कार्यवाही करनी चाहिए।

तभी अचानक मुझे याद आया कि 5 अगस्त 1997 को पटना हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान क्यों कहां था कि बिहार में सरकार नहीं है बिहार में जंगलराज कायम हो गया।ये जानने के लिए कि ऐसा क्या हुआ था कि पटना हाईकोर्ट को ऐसी टिप्पणी करनी पड़ी थी कुछ सीनियर वकील को फोन लगा दिया। याचिकाकर्ता से तो बात नहीं हो पायी लेकिन उस समय पटना हाईकोर्ट में काम कर रहे कई वरिष्ठ वकील से बात हुई और इस पर लम्बी चर्चा हुई हालांकि शुरुआती दौर में वो समझ नहीं पाए कि ऐसा क्या हुआ है जो आज संतोष जी जंगलराज के बारे में बात कर रहे हैं खैर बात खत्म होते होते उनकी समझ में आ गया लेकिन चाह कर के भी कुछ कह नहीं पाये वैसे अधिकांश वकील प्रशासन के बुलडोजर एक्शन को गलत कहॉ।

वैसे याचिकाकर्ता के जिस आवेदन पर हाईकोर्ट ने जंगलराज जैसी तल्ख टिप्पणी की थी उसमें मुख्य तौर पर यही था कि प्रशासन आपराधिक मामलों में जाति आधारित कार्यवाही कर रही है, शहर के बड़े से बड़े कारोबारी की संपत्ति पर जबरन सत्ता संरक्षित एक खास जाति विशेष द्वारा कब्जा किया जा रहा है और प्रशासन मौन है।

जाति आधारित नरसंहार हो रहा है लेकिन कार्यवाही एकपक्षीय हो रहा है पूरी प्रशासनिक व्यवस्था अपराध और अपराधी को जाति के चश्मे से देख रहा है ।कानून जैसी कोई बात प्रदेश में है ही नहीं सरकार जो चाहती है प्रशासन वही करता है, अराजक स्थिति है कही भी कानून सम्मत कार्यवाही नहीं हो रही है कानून की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है।

1– बुलडोजर चलाना और पुलिस एनकाउंटर कौन सा राज है
बुलडोजर चलाना या फिर पकड़ कर बलात्कारी या अपराधियों को मार देना किस तरह का राज कहाँ जायेगा क्यों कि प्राकृतिक न्याय के अनुकूल यह व्यवस्धा तो सही नहीं है ।
अगर कोई व्यक्ति बिना नक्शा स्वीकृत कराये घर बना लेता है तो प्रशासन बिना नोटिस जारी किये हुए हमारे आपके मकान को पुलिस और प्रशासन तोड़ सकता है क्या ।

अगर ऐसा होने लगे तो आज धर्म के नाम पर हो रहा है ,कल किसी ओर के नाम पर होगा और तीसरे दिन किसी और के नाम पर तोड़ा जाएगा ऐसे में इस कार्यवाही को आप कौन सा शासन व्यवस्था कहेंगे । ऐसा नहीं है लालू प्रसाद के राज में भी कानून के विपरीत जो कुछ भी हो रहा था उसके समर्थन में आज की ही तरह सामाजिक न्याय के नाम पर प्रशासन और सरकार के कार्यवाही को सही ठहराने वाली जनता उस समय भी थी और उसी जनता और तथाकथित सामाजिक न्याय के सहारे लालू प्रसाद और उनकी पार्टी 15 वर्षों तक बिहार के सत्ता पर काबिज रहे और उसके बाद 5 वर्षों तक केंद्र की सत्ता पर भी काबिज रहे लेकिन आज वही तथाकथित सामाजिक न्याय के दौरान बिहार में जो कुछ भी हुआ उसका खामियाजा लालू परिवार और उसकी पार्टी भुगत रही है और नीतीश कुमार उसी युग की याद दिला कर बिहार की गद्दी पर 22 वे वर्ष में प्रवेश कर गये ।

क्यों कि भारतीय समाज अराजकता को कभी स्वीकार नहीं करता है ,शांति पसंद है ,मेहनतकश है, जिंदगी में ज्यादा हलचल और उठापटक को पसंद नहीं करता है। वो दौर जाति का था आज धर्म का है जातिवादी राजनीति करने वाले आज अछूत बने हैं कल धर्मवादी राजनीति करने वाले भी अछूत बनेंगे ये तय है।

क्यों कि जाति और धर्म के आड़ में राजनीति करने वालों से सुशासन को लेकर गलती करेंगे ही करेंगे एक दौर ऐसा भी आयेगा कि उन्हें एक पक्षीय होना ही पड़ेगा और उसी दिन से उलटी गिनती शुरू हो जायेंगी ये भी तय है ,भेल ही वक्त जितना लगे ।
एक और बात इस तरह के शासन व्यवस्था में सत्ता के इशारे पर काम करने वाले अधिकारी आज फंसे या कल फंसे फसना तय है लालू राज के कई आईपीएस अधिकारी जो सरकार के इशारे पर सारे नियम कानून को ताक पर रख दिये थे ऐसे अधिकारी एसपी से डीआईजी नहीं बन पाये ,डीएम से आयुक्त नहीं बन पाये दर्जनों अधिकारियों को पेंशन के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ रहा है वही जैसे ही लालू राज गया ऐसे अधिकारी रिटायर हो गये लेकिन फील्ड में पोस्टिंग नहीं मिली एक कुर्सी पर बिना पंखा वाले दफ्तर में पूरी नौकरी गुजारनी पड़ी ।

क्या हुआ हैदराबाद एनकाउंटर का दर्ज हो गया ना हत्या का मुकदमा ,यूपी में पिटाई वाली वीडियो पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संज्ञान ले लिया है कोई नहीं बचा पाएगा इसलिए पदाधिकारियों को भी जो कानून कहता है उसके साथ खड़ा रहना चाहिए जितने बुलडोजर चले हैं पदाधिकारियों को अपनी पेंशन से भुगतान करना होगा याद रखिएगा ।

वही धर्म के आधार पर जो भावना भड़का रहे हैं उनका हस्र भी समाजिक न्याय के सहारे समाज में विद्वेष फैलाने वाले जैसे नेता और कार्यकर्ता जैसा होगा ये तय है।

याद करिए एक दौर था जब संसद में योगी रो रहे थे पुलिसिया जुल्म को लेकर और आज ऐसे में जनता को हमेशा संविधान और न्याय व्यवस्था के साथ खड़ा रहना चहिए नहीं तो सत्ता पगला जायेगा ।

खतरे में है संघ की बादशाहत

खतरे में पड़ा संघ का वजूद
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के शिवलिंग व मस्जिद विवाद पर जो बयान आया है उससे देश की राजनीति गरमा गई है और अब एक राय ये भी है सामने आ रही है कि संघ अब भाजपा के उग्र हिन्दुत्ववादी आन्दोलन और फैसले से अपने आपको अलग करना चाह रही है ।

इसके पीछे की राजनीति पर चर्चा करने से पहले मोहन भागवत ने कहा क्या है पहले यह पढ़ लेते हैं मोहन भागवत ने कहा कि क्यों हर बार मस्जिद में आप केवल शिवलिंग ही देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी आस्था से जुड़ा मसला है जिसकी लड़ाई कोर्ट में लड़ी जा रही है। इस मामले को आपसी सहमति से निपटाया जाना चाहिए। लेकिन हर मस्जिद में शिवलिंग खोजना सही नहीं है।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद के फिल्मांकन के विवाद पर आपसी समझौते के माध्यम से रास्ता का आह्वान किया। आरएसएस चीफ ने कहा कि कुछ जगहों के प्रति हमारी विशेष भक्ति थी और हमने उनके बारे में बात की लेकिन हमें रोजाना एक नया मामला नहीं लाना चाहिए। हम विवाद को क्यों बढ़ाएँ? ज्ञानवापी के प्रति हमारी भक्ति है और उसके अनुसार कुछ करना ठीक है। लेकिन हर मस्जिद में शिवलिंग देखना ठीक नहीं है। यह क्यों किया जा रहा है।

सड़क पर ज्ञानवापी के लिए कोई आंदोलन नहींआरएसएस प्रमुख ने कहा कि सड़क पर ज्ञानवापी के लिए कोई आंदोलन नहीं और ना ही इसको लेकर कोई विवाद खड़ा करना है ,हम इतिहास नहीं बदल सकते। इसे न तो आज के हिंदुओं ने बनाया और न ही आज के मुसलमानों ने। यह उस समय हुआ जब इस्लाम हमलावरों के माध्यम से बाहर से आया था। हमलों में, देवस्थानों को ध्वस्त कर दिया गया था। बाहरी हमलावरों ने यह इसलिए किया क्योंकि वह उन लोगों का मनोबल गिराना जो भारत की स्वतंत्रता चाहते थे। मोहन भागवत के इस विचार को आगे बढ़ाते हुए संघ विचारधारा से जुड़े वरिष्ट पत्रकार डाँ वेदप्रताप वैदिक ने एक लेख लिखा है जिसमें लिखा है कि भारतीयता का ही दूसरा नाम हिंदुत्व है और 1991 में जो कानून बना है इसका पालन करना चाहिए ।

1-खतरे में है नागपुर की बादशाहत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के शिवलिंग व मस्जिद विवाद पर जो बयान आया है ये कोई आत्म परिवर्तन वाली बात नहीं है ,नागपुर की बादशाहत खतरे में पड़ गयी क्यों कि जैसे जैसे इस तरह का सवाल खड़ा होगा नागपुर कमजोर होगा ।
याद करिए राम मंदिर आन्दोलन के दौरान विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल का जलवा क्या था आज उसी आन्दोलन के बदौलत भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन गयी है लेकिन आज विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल कहां है ।
प्रवीण तोगड़िया थोड़े टाइट हुए तो गुजरात में ही उनको मारने की साजिश रच दी गयी और इसका अभास जैसे ही हुआ तोगड़िया रातोंरात विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारी का पद छोड़ भाग खड़े हुए ।

इसी तरह बजरंग दल का नायक विनय कटियार कहां है इसकी एक बड़ी वजह है याद करिए राम मंदिर आन्दोलन का वो दौर संघ का मुख्यालय भले ही नागपुर था लेकिन सारी गतिविधियों का केंद्र दिल्ली स्थिति विश्व हिन्दू परिषद का कार्यालय बन गया था और उस दौर में झंठे वाला में स्थिति संघ कार्यालय की पहचान खत्म होने के कगार पर आ गया था ,जो संघ को नागवार गुजरा और फिर विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल और दुर्गा वाहिनी से जुड़े पदाधिकारियों का पर कतरना शुरु कर दिया और इसी कड़ी में कल्याण सिंह ,कटियार ,उमाभारती सहित बीजेपी से जुड़े ऐसे तमाम नेता को कमजोर किया गया जो विश्व हिन्दू परिषद या हिन्दूवादी राजनीति के प्रभाव में थे।

2–योगी के दूसरी बार सीएम बनने से संघ सहज नहीं है
योगी के दोबारा चुने जाने के बाद से संघ और मोदी टीम को यह खतरा महसूस होने लगा है कि हिन्दू मुस्लिम की राजनीति परवान चढ़ी तो यूपी में इस तरह के दर्जनों मामले हैं जिसके सहारे योगी राष्ट्रीय पटल पर अपनी पकड़ मजबूत कर सकती है ।
योगी की छवि भी वाजपेयी की तरह सॉफ्ट नहीं है वही पहनावा-ओढावा भी संत साधु जैसा है जो हर भारतीय के अंतश्चेतना में पहले से बसा हुआ है जैसे गांधी का बसा हुआ है।

हालांकि संघ पहले से ही योगी को लेकर सतर्क था जब योगी के यूपी के मुख्यमंत्री बनने की बात हुई तो संघ ने योगी के सामने शर्त रखा था कि गोरखपुर मठ के गतिविधि से दूर रहेंगे और साथ ही उनकी जो संस्था है हिन्दू युवा वाहिनी उसको किसी भी तरह का मदद सरकार से नहीं मिलनी चाहिए और आप इस संस्थान को तत्काल भंग कर दे ।
हालांकि योगी मठ से तो दूरी नहीं बना सके लेकिन हिन्दू युवा वाहिनी से दूरी जरूर बना कर रखा लेकिन यूपी विधानसभा चुनाव के ठीक पहले शाह की गतिविधि से नाराज होकर एक बार फिर से हिन्दू युवा वाहिनी को सक्रिय कर दिया था और चार चरण के चुनाव के बाद जिस तरीके ये मोदी और शाह की तस्वीर को पूरे इलाके से हटाया गया था उसमें हिन्दू युवा वाहिनी से जुड़े कार्यकर्ताओं का ही हाथ था।

संघ को लगता है कि हिन्दू मुसलमान नैरेटिव की बात फिर चली तो यूपी में इसकी काफी गुंजाइश अभी भी बची हुई है ।
लोकसभा सीट के दृष्टिकोण से सबसे बड़ा राज्य भी है और ऐसे में योगी जैसे जैसे मजबूत होगा नागपुर का प्रभाव कम होता जायेंगा वैसे भी महाराष्ट्र और गुजरात में संघ और मोदी संचालित बीजेपी अंतिम सांसे ले रही है मध्यप्रदेश और राजस्थान योगी का स्वाभाविक सहयोगी है ,कर्नाटक और नॉर्थ ईस्ट में पहले से ही गोरखपुर मठ की पकड़ मजबूत है।

इसलिए संघ और टीम मोदी इस तरह के मामले से दूरी बनायेगा क्यों कि कश्मीर एक बार फिर मुखर होने लगा है और अब पाकिस्तान में ना तो इमरान है और ना ही अमेरिका में ट्रम्प है ऐसे में कश्मीर इनके लिए वाटरलू साबित हो जाये तो बड़ी बात नहीं होगी और ऐसा हुआ तो योगी और मजबूत होगे ऐसे में आने वाले दिनों में संघ और मोदी टीम मुसलमानों के घर सेवई और टोपी पहनने पहुंच जाएं तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।

लेखक संतोष सिंह संघ का स्वयंसेवक रहा है और तीस वर्षो से संघ के गतिविधियों को काफी करीब से देख रहा है और यह आलेख उसी अनुभव और संघ और बीजेपी से जुड़े कार्यकर्ताओं के बातचीत पर आधारित है ।

बीपीएससी प्रश्न पत्र लीक मामला बड़ी मछली पर हाथ डालने से घबरा रही है पुलिस

बीपीएससी प्रश्न पत्र लीक मामला बड़ी मछली पुलिस के पकड़ से अभी भी है बाहर।
आर्थिक अपराध इकाई बीमारी की वजह को पकड़ने के बजाय बीमार व्यक्ति को पकड़ने में लगा है।
आईएस अधिकारी रंजीत कुमार सिंह की भूमिका की जांच में तेजी क्यों नहीं लायी जा रही है ।

बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद के कार्यकाल के दौरान मैं ईटीवी की ओर से पुलिस मुख्यालय के लिए रिपोर्टिंग करता था ।हालांकिअभयानंद के पूरे कार्यकाल के दौरान मेरा इनसे हमेशा खबरों को लेकर 36 का आंकड़ा रहा और एक समय ऐसा आया जब मुझे पुलिस मुख्यालय बीट से बाहर कर दिया गया और इससे भी बात नहीं बनी तो मुझे ईटीवी छोड़ना पड़ा।

लेकिन इस तल्खी के बावजूद व्यक्तिगत रिश्ते हमेशा मधुर रहे उसकी एक बड़ी वजह ये रही कि दोनों एक दूसरे के ईमानदारी पर शक नहीं था हां अभयानंद की पुलिसिंग और मेरी पत्रकारिता की शैली की वजह से टकराव जरूर होता था लेकिन एक पुलिस अधिकारी के रुप में दम तो था ।

कल उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर प्रश्न पत्र लीक मामले को लेकर एक पोस्ट लिखे हैं जिसका अंतिम पैराग्राफ यह है कि मैंने जो पुलिस की 37 वर्षों की जिंदगी में समझा, वह यह कि पैसे का वितरण जब तक स्वाभाविक तौर पर समाज में होता रहता है, तब तक “हाय-तौबा” नहीं मचती। छोटे-मोटे अपराध होते हैं। लेकिन अगर “बवाल” मच जाए तो समझना चाहिए कि काले धन का वितरण “स्वाभाविक” तौर पर नहीं हुआ है। कई बार इस आधार पर अनुसंधान करने से सफलता मिली है।

हालांकि अभयानंद के इस सुक्षाव पर आर्थिक अपराध इकाई अमल करने कि स्थिति में है या नहीं कहना मुश्किल है लेकिन अभयानंद के इस सूत्र के सहारे पूरे मामले के जड़ तक जरूर पहुंचा जा सकता है। क्यों कि बीपीएससी प्रश्न पत्र लीक मामले का एक माह होने वाला है अभी तक 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है मीडिया रिपोर्ट की ही माने तो अभी तक आर्थिक अपराध इकाई किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पायी है प्रश्न पत्र कहां से लीक हुआ और लीक करने में कौन कौन शामिल है इसका अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है ।

वही आर्थिक अपराध इकाई बीमारी की वजह को पकड़ने के बजाय बीमार व्यक्ति को पकड़ने में लगा है ।अभी तक के अनुंसधान में जो बाते सामने आयी है उसके अनुसार सॉल्वर गैंग का सरगना पिंटू यादव भी 2011-12 में इंजीनियरिंग की परीक्षा में सेटिंग कर एनआईटी पटना में दाखिला लिया था,यह खुलासा पिंटू यादव के सहयोगी संजय ने किया है संजय ने आर्थिक अपराध इकाई के जांच अधिकारी को बताया है कि वर्ष 2011-12 बैच में, मैं और पिंटू इंजीनियरिंग में एडमिशन सेटिंग करके एनआईटी पटना में लिया था,पिंटू जैसे-तैसे पढ़कर पास कर गया लेकिन मैं लगातार फेल होता रहा और फिर मुझे नॉट फिट फॉर टेक्निकल एजुकेशन करार कर बाहर कर दिया गया।

इसी तरह 64वीं बीपीएससी परीक्षा पास करके राजस्व पदाधिकारी बने राहुल कुमार का भी कहना है कि मैं सेटिंग से ही अधिकारी बना हूं मैं डीएसपी बनना चाहता था इसलिए इस बार फिर परीक्षा में बैठा था और परीक्षा शुरू होने से एक घंटा पहले प्रश्न पत्र हल किया गया सीट मुझे परीक्षा भवन में जाने से पहले मिल गया था।

मतलब इस बार मामला प्रकाश में आ गया लेकिन बिहार में सेटिंग का खेल बहुत पहले से चल रहा है और बड़े स्तर पर चल रहा है ऐसे में आर्थिक अपराध इकाई को अब 64 वीं बीपीएससी परीक्षा की भी जांच करनी चाहिए, 2011-12 में इंजीनियरिंग की परीक्षा जो आयोजित किया था उसकी भी जांच करनी चाहिए ये सब यही दर्शाता है कि पुलिस मामले की लीपापोती करना चाह रही है। क्यों इस पूरे मामले की बड़ी बात यह है कि प्रश्न पत्र सॉल्वर गैंग को पहुंचाता कौन है इस खेल के खुलासे के बगैर इस मामले में कुछ नहीं होना है।

ये उसी तरह का आई वास है जैसे सरकार की निगरानी विभाग घूस लेते किसी सरकारी अधिकारी को पकड़ता है और जेल भेज कर सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करती है। सवाल यह है कि वो अधिकारी घूस क्यों लेता है और घूस की राशि कहां कहां पहुंचता है जब तक इस विन्दू पर जांच नहीं होगी और उस खेल में शामिल मंत्री से लेकर ब्यूरोक्रेट तक पर कार्यवाही नहीं होती है तो फिर इस तरह घूस लेते कर्मी के पकड़ने का मतलब क्या है इसलिए जांच का दायरा पहले बीपीएससी का दफ्तर होना चाहिए क्यों खेल वही से शुरु होता है ।

2–आईएस अधिकारी रंजीत कुमार सिंंह से पूछताछ क्यों नहीं हो रही है
बीएसएससी प्रश्नपत्र लीक मामले में आईएएस अधिकारी रंजीत कुमार सिंह की भूमिका क्या है यह तो पुलिस के जांच का विषय है लेकिन इसका पूरा आचरण संदिग्ध है जो जानकारी मिल रही है रंजीत कुमार सिंह जिस मोबाइल नम्बर का इस्तेमाल करते हैं वो उसके नाम से नहीं है, बीपीएससी के सचिव को जिस वाट्सएप नम्बर से प्रश्न पत्र की कॉपी भेजा है वह नंबर भी रंजीत कुमार सिंह के नाम से नहीं है।इस तथ्य की पुष्टि के लिए मै रंजीत कुमार सिंह से बात करने कि कोशिश की लेकिन वो बार बार फोन काट दे रहे थे।

वो अपना फेसबुक पेज क्यों डिलीट कर दिया जिसमें हाल के वर्षो में इसके द्वारा जो कोचिंग संस्थान चलाया जा रहा है उसके बारे में विस्तृत जानकारी दर्ज था। इनके कोचिंग में पढ़ने वाले कितने बच्चे पास किए हैं इसकी जानकारी दर्ज था। ऐसे में इन्हें पुलिस को सहयोग करना चाहिए था तो ये साक्ष्य मिटा रहे हैं इसके अलावे कई ऐसे तथ्य है जो कही ना कही रंजीत कुमार सिंह के आचरण को संदिग्ध कर रहा है ।

वही अभी तक बीपीएसपी के कर्मी और अधिकारियों से पूछताछ नहीं हुई उनकी भूमिका लगातार संदिग्ध रही है अंत में इतना कहना ही काफी है कि अगर “बवाल” हुआ है तो समझना चाहिए कि काले धन का वितरण “स्वाभाविक” तौर पर नहीं हुआ है और अब जब मामला सामने आ गया तो काले धन के स्वाभाविक वितरण पर काम शुरु हो गया है ,फिर भी ना उम्मीद मत होइए इस मामले की जांच ऐसे अधिकारी के जिम्मे है जिस पर भरोसा किया जा सकता है ।

मेधावी छात्रों की हकमारी आज के समय का सबसे बड़ा अपराध है -अभयानंद

बिहार में पहले वोट लूटा जाता था अब मेधावी छात्रों का प्रतिभा लूटा जाता है ।वोट लूटने वाले भी संगठित गिरोह चलाते थे और आज प्रतिभा लूटने वाले भी गिरोह चला रहे हैं बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद का मानना है कि आज आवाज इसलिए उठ रही है कि काले धन का वितरण “स्वाभाविक” तौर पर नहीं हो रहा है।

नौकरी के शुरुआती दौर में जब SP के रूप में, चुनाव संपन्न कराने का दायित्व मिलता था तो रिगिंग की शिकायतें आती थीं। कोई भी संवेदनशील पदाधिकारी इन शिकायतों को सुनकर परेशान हो जाता। मैंने पाया कि अगर तुरंत कार्यवाही नहीं की जाती तो चुनाव संपन्न होने से पहले बैलेट बॉक्स में स्याही डाल दी जाती थी जिससे कि उस बूथ का चुनाव रद्द कर दिया जाए और पुनः उस बूथ पर पूरी तैयारी के साथ चुनाव हो। स्याही डालने वाला पक्ष स्वाभाविक रूप से वह होता था जो उस बूथ पर कब्ज़ा नहीं कर पाया हो।

समय के साथ इस प्रकार की एक और बीमारी ने समाज में जन्म लिया। सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्न-पत्र लीक। साधारण तौर पर प्रश्न-पत्र लीक की शिकायतें यदा-कदा सुनने को मिलती थीं। हमलोग जिले के स्तर पर अनुसंधान कर, गिरोह को पकड़ कर आरोप पत्र दाखिल कर देते थे। समस्या कभी राज्य व्यापी और विकराल नहीं बन पाती थी।

अचानक स्कौलर गैंग, सॉल्वर गैंग जैसे शब्दों का प्रचलन हुआ। अलग-अलग अपराधियों के नाम से गैंग बनने लगे। चुनाव में जैसे प्रतिस्पर्धा होती है, वैसा ही दंगल परीक्षाओं की सेटिंग-गेटिंग में भी हो गया। अगर सेटिंग-गेटिंग के पैसे का वितरण न्यायपूर्ण हो गया तो हल्ला-हंगामा नहीं होगा, अन्यथा “बैलेट बॉक्स में स्याही” का विकल्प अर्थात पेपर के व्यापक लीक का रास्ता तो हमेशा है।

परीक्षा रद्द कर दी जाएगी। अगली परीक्षा में जो गिरोह सर्वाधिक ताकतवर होगा, उसके नियंत्रण में पेपर लीक होगा और पैसे में केवल एक ही गिरोह का भाग होगा।

मैंने जो पुलिस की 37 वर्षों की जिंदगी में समझा, वह यह कि पैसे का वितरण जब तक स्वाभाविक तौर पर समाज में होता रहता है, तब तक “हाय-तौबा” नहीं मचती। छोटे-मोटे अपराध होते हैं। लेकिन अगर “बवाल” मच जाए तो समझना चाहिए कि काले धन का वितरण “स्वाभाविक” तौर पर नहीं हुआ है। कई बार इस आधार पर अनुसंधान करने से सफलता मिली है।

लेखक –बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद

आरसीपी सिंह ने इशारों इशारों में नीतीश को दे डाली नसीहत

क्या खास रहा आरसीपी सिंह के पीसी में

नीतीश को पीएम बनाने की सोच पर साधा निशाना
पार्टी संगठन में छेड़छाड़ पर उठाया सवाल
बीजेपी का साथ नहीं छोड़ने को दिया नसीहत
मंत्री पद से नहीं देगे इस्तीफा

आरसीपी सिंह ने कहा कि नीतीश बाबू के साथ मेरा 25वां साल है। उन्‍होंने कहा कि नीतीश बाबू ने हमेशा मेरे हित में ही फैसला लिया है। इस बार भी उन्‍होंने मेरे और पार्टी के हित में ही फैसला लिया होगा। उन्‍होंने कहा कि दल के लिए उन्‍होंने काफी काम किया है। उन्‍होंने बताया कि वे संसदीय राजनी‍ति में 12 साल से काम कर रहे हैं।

आरसीपी सिंह

इससे अधिक वक्‍त उन्‍होंने पार्टी के संगठन के लिए दिया है। आगे भी वे संगठन के लिए काम करते रहेंगे। उन्‍होंने कहा कि आज तक किसी को नाराज करने वाला काम मैंने नहीं किया है। अगर किसी के नाराज होने की बात सामने आती है, तो उससे मिलकर नाराजगी दूर करता हूं। नीतीश कुमार की मेरे प्रत‍ि नाराजगी की खबरों का कोई आधार नहीं है।

नीतीश कुमार का हर फैसला उन्हें मंजूर है। हमारे नेता ने जो किया, वह पार्टी और उनकी भलाई के लिए ही किया होगा। मंत्री पद से इस्तीफे के सवाल पर कहा कि अभी छह जुलाई तक हूं। दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से मिलूंगा। जो कहा जाएगा, करूंगा। मैं पहले भी संगठन के लिए काम करता था।

आगे भी करूंगा। नीतीश से उनका 25 वर्ष का रिश्ता है। जदयू का अहसान भी जताया। कहा कि उन्होंने पार्टी को बूथ स्तर तक कार्यकर्ता दिए। पार्टी ने उन्हें महासचिव बनाया, सदन में दल का नेता बनाया, राष्ट्रीय अध्यक्ष् बनाया और अभी नेतृत्व की सहमति से ही केंद्रीय मंत्री हूं। जो जिम्मेदारी दी गई, उसे निष्ठा से निभाया।

आरसीपी का टिकट कटना संदेश साफ है नीतीश के शर्तो पर चलेगी सरकार

आरसीपी सिंह का टिकट काटना बीजेपी की शिखंडी के सहारे राजनीति करने की शैली पर नीतीश कुमार का यह दूसरा बार हमला है और इस हमले के साथ यह तो तय हो गया है कि आने वाले समय में नीतीश बीजेपी को लेकर और भी कड़े फैसले ले सकते हैं ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा तक बिहार की राजनीति में कोई बड़ा उलटफेर हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।
1–नीतीश दुश्मनी भी बड़ी शिद्दत से करते हैं नीतीश कुमार जिस परिवेश से आते हैं या फिर जिस तरह की राजनीति करते हैं उसमें नीतीश की मजबूरी है कि उनकी छवि सख्त वाली रहे और यही वजह है कि जिसने भी आंख उठाया उसको नीतीश ने बड़ी शिद्दत से ठिकाने लगा दिया ।चाहे वो जार्ज हो ,शरद यादव हो ,दिग्विजय सिंह हो या फिर प्रभुनाथ सिंह ये सारे कभी जदयू के बड़े चेहरे रहे हैं। इसी तरह चिराग पासवान 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए शिखंडी की तरह नीतीश को पराजित करने के लिए उम्मीदवार को खड़े किये और उसका खासा नुकसान जदयू को हुआ लेकिन सरकार के गठन के कुछ महीने बाद ही नीतीश कुमार ने चिराग का ऐसा ऑपरेशन किया कि मंत्री पद की कौन कहे आवास तक खाली करना पड़ा और बीजेपी खामोशी के साथ वो सब कुछ करता रहा जो नीतीश कहते गये।

आरसीपी सिंह को भी वफादारी बदलने की ही सजा मिली है उन्हें लगा कि नीतीश कुमार के दिन अब लद गये हैं और वो अब चाह करके भी कुछ नहीं कर पायेंगे, केन्द्र में मंत्री हैं, नीतीश के स्वजातीय हैं ,नीतीश कुमार के राजदार रहे हैं उनके हर कर्म और कुकर्म के साझेदार रहे हैं ऐसे में वफादारी बदल भी लेंगे तो भी नीतीश कुमार इस स्थिति में नहीं है कि मेरा टिकट काट दे ।हलांकि राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद नीतीश कुमार जिस तनाव से गुजर रहे थे उससे ये समझ में आ रहा था कि आरसीपी सिंह का टिकट काटने का फैसला लेना कितना मुश्किल था।

2—आरसीपी सिंह के बाद किसकी बारी
आरसीपी सिंह का टिकट काट कर नीतीश कुमार ने बीजेपी को सीधा संदेश दिया है कि पार्टी अभी भी नीतीश कुमार का है और जो नीतीश चाहेंगे वही होगा साथ ही नीतीश कुमार ने यह संदेश भी दे दिया है कि बिहार में बीजेपी के साथ गठबंधन नीतीश कुमार के शर्तों पर चलेगा ।

ऐसे में आने वाले दिनों में अमित शाह और बिहार की राजनीति में उनके साथ खड़े नेता के साथ साथ बिहार के राज्यपाल ,बिहार विधानसभा के अध्यक्ष और बीजेपी कोटे के कुछ मंत्रियों का पत्ता साफ हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी क्यों कि बीजेपी के अंदर भी जिस तरीके से केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं उससे संकेत साफ है कि बिहार आने वाले दिनों में जंग का मैदान बन सकता है ।

क्यों कि सुशील मोदी जिस तरीके से बोचहा उप चुनाव के परिणाम के सहारे पार्टी नेतृत्व को चुनौती दी है ,फिर राज्यपाल को हटाये जाने की मांग के साथ साथ जातीय जनगणना के समर्थन में बयान देकर अमित शाह को झुकने पर मजबूर कर दिया ऐसे में संकेत साफ है कि आने वाले दिनों में बिहार बीजेपी के अंदर से भी मोदी और शाह को चुनौती मिलनी शुरु हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। वैसे बीजेपी के अंदर से राज्यसभा टिकट वितरण को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं ऐसे में नीतीश कुमार जिस तरीके से आरसीपी सिंह का टिकट काटे हैं उससे बीजेपी के अंदर जो शाह विरोधी खेमा है उसको बल मिला है ।

67 #BPSC पेपर लीक कांड बड़ा खुलासा

अररिया से गिरफ्तार राजस्व पदाधिकारी राहुल कुमार खुद भी थे परीक्षार्थी । सिवान में उनका था परीक्षा का सेंटर। परीक्षा के 1 घंटे पहले उनके मोबाइल पर क्वेश्चन और आंसर शीट पहुंचा था मोबाइल से ।सॉल्वर गैंग के सरगना पिंटू यादव से लगातार थे संपर्क में ।

राजश्व पदाधिकारी ने कई और लोगों को भेजा था आपने मोबाइल से क्वेश्चन और आंसर शीट।राजस्व पदाधिकारी के पिता बिहार पुलिस विभाग में है दारोगा ।आर्थिक अपराध इकाई ने किया था दावा।

BPSC

पेपर लीक कांड में सरकारी कर्मियों की भूमिका का दावा जांच के दौरान दावे की हो रही पुष्टि सोमवार को इस मामले में कई और लोगों के खिलाफ वारंट लेगी आर्थिक अपराध इकाई की टीम इस मामले में कई और लोगों की होगी गिरफ्तारी–इओयू। bpsc पेपर लीक कांड के जांच का बढ़ा दायरा।

नेहरु का लोकतंत्र के प्रति लगाव सर्वस्पर्शी था।

हम गांधीवादी लोग नेहरू की कुछ बातों के कटु आलोचक रहे हैं। खासकर उनकी जो औद्योगिक आर्थिक नीति थी उसे हम गांधी विरोधी बताते थे और वह आलोचना ठीक ही थी।
लेकिन लोकतंत्र के प्रति उनका लगाव सर्वस्पर्शी था। जनता उन्हें जितना प्यार करती थी वह भारत की जनता को उससे ज्यादा प्यार करते थे।

उन्हें ठीक ही गांधी का राजनैतिक उत्तराधिकारी कहा जाता है। राज्य के प्रभाव की सीमाएं उनके सामने स्पष्ट थी। लोक शक्ति का महत्व वे समझते थे और इस शक्ति को सशक्त बनाने का काम कितना कठिन है यह भी जानते थे । इसलिए उनका पूरा सहयोग विनोबा और जयप्रकाश जी को मिला था।

कानून की संगठित हिंसा के बल पर चलने वाली राज्य सत्ता को कैसे अहिंसा की दिशा में ले जाएं उनकी यह एक खोज हमेशा रही। लोकतंत्र तो इसका एक बना बनाया रास्ता था ही ,परंतु इसे और चौड़ा बनाने के लिए उन्होंने अनेक जोखिम उठाए ।
कश्मीर की जनता को बिना मांगे अहिंसा और लोकतन्त्र की दृष्टि से जनमत संग्रह का वायदा करना, श्यामा प्रसाद मुखर्जी को हिंदूत्ववादी होने के बावजूद मंत्रिमंडल में शामिल करना आदि कुछ जोखिम भरे कदम तो थे ही लेकिन सबसे बड़ा जोखिम नेहरु जी ने चीन के संदर्भ में उठाया।

तिब्बत और चीन के ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए तिब्बत पर चीन के कब्जे को उन्होंने ज्यादा महत्व नहीं दिया। बौद्ध मठों का आम तिब्बतियों के प्रति मठवादी व्यवहार और माओ की जनवादी सर्वप्रिय नेता की छवि ने भी तिब्बत की समस्या के प्रति उनके मत को प्रभावित किया होगा ।

तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद चीन भारत के लिए भी एक खतरा बन सकता है यह स्पष्ट था । उप प्रधानमंत्री सरदार पटेल ने चेतावनी भी दी थी । चीन ने स्वयं भी इस ओर इशारा कर दिया था कि तिब्बत और भारत की सीमा चीन को मान्य नहीं है ।अब क्या करें ? क्या फौजी तैयारी ?

आर्थिक रूप से बर्बाद होकर सदियों की गुलामी के बाद आजाद हुए देश का उस वक्त फौजी तैयारी में लगना क्या ठीक था ? ऐसा होता तो इसके दो ही अर्थ थे।
एक तो यह कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद फौजी ताकत की दृष्टि से, दो गुटों में बटी दुनिया के , किसी एक गुट में शामिल हो जाना और दूसरा यह कि शस्त्रों की दौड़ में कूद पड़ना। दोनों रास्ते मूलतः एक ही थे , और गांधी के राजनैतिक उत्तराधिकारी नेहरू को स्वीकार्य नहीं थे।

गांधी से ही सीखा था एक सपना देखना कि हिंसा से अलग जो शक्तियां हैं उनकी दुनिया में कैसे चले ।
यही सपना व्यावहारिक भी था । शस्त्रों की दौड़ न सिर्फ बहुत सारा पैसा खा जाती है , दिमाग़ ही बदल देती है। योजनाओं की प्राथमिकता बदल जाती है।

देश के वास्तविक विकास के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचों का बनना जरूरी था । देश की भूखी नंगी जनता की बुनियादी आवश्यकताओं का पूरा होना ज़रूरी था। आधुनिक ज़माने के नए तीर्थों का बनना ज़रूरी था।
नेहरू ने युद्ध नहीं संवाद की रणनीति अपनाई। चीन को इस में बांधना चाहा ।1955 के बांडुंग सम्मेलन में ” पंचशील करार” पर चीन समेत सभी प्रमुख एशियाई देशों के हस्ताक्षर हुए।

चीन भी सामूहिक रूप से वचनबद्ध हुआ, कि सीमा विवाद युद्ध से नहीं बल्कि वार्ता से ही सुलझाया जाएगा।.
दुनिया के सामने चीन ने दिए गए वायदे को तोड़ दिया . भारतीय फौज लगभग निशस्त्र थी । भारत युद्ध हार गया। नेहरू धोखा खा गए। कहते हैं इसी सदमे से उनकी मृत्यु हो गई ।

अधिकांश लोग इस प्रकरण का जिक्र आते ही चीन की फजीहत करने के बदले नेहरू की फजीहत करने में लग जाते हैं ।
लेकिन मेरे लिए यह नेहरू का अंतरराष्ट्रीय सत्ता और शस्त्रों की होड़ में अहिंसा को दाखिल करने का स्वर्णिम प्रयोग था। यह प्रयोग यदि सफल हो जाता तो आज दुनिया युद्ध से ही नहीं आतंकवाद से भी मुक्त हो गई होती।

हिना शहाब पर नीतीश खेल सकते हैं दाव

आरसीपी सिंह के राज्यसभा जाने को लेकर अभी भी संशय बरकरार है आज भी नीतीश कुमार पटना से बाहर रहेंगे वैसे नीतीश कुमार अक्सर शनिवार को ही बड़े फैसले लेते रहे हैं। इस बीच नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह के बीच हुए मुलाकात को लेकर एक सूचना ये आ रही है कि नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह से पुछा है कि आपने मीडिया में जो बयान दिया है कि नीतीश जी के सहमति से मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे ये सही है क्या ऐसा क्यों बोल रहे हैं।        

ललन जी बताइए इनके मंत्री बनने को लेकर मैंने सहमति दिया था क्या जिस समय मंत्रिमंडल में शामिल होने की बात हो रही थी आप थे और वशिष्ठ भाई थे मैंने ऐसा कुछ कहा था क्या, आपको इस तरह से मीडिया में नहीं बोलना चाहिए था।  जानकार भी बता रहे हैं कि इसी नाराजगी की वजह नीतीश कुमार ने उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से हटाया था ऐसा नहीं है पहले भी दो पद पर रहते हुए जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर नीतीश कुमार और शरद यादव रहे हैं।         

 1—नीतीश कुमार आरसीपी सिंह को लेकर असहज क्यों हैं   बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ भी मानते हैं कि आरसीपी सिंह के मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद नीतीश और आरसीपी सिंह के बीच दूरी बढ़ी है ऐसा कई मौके पर देखने को मिला है वही जब से राज्यसभा सीट को लेकर चर्चा शुरू हुई है उसके बाद से नीतीश कुमार की जो गतिविधि रही है वो सारी गतिविधि आरसीपी सिंह के विरुद्ध रहा है ।        

 राज्यसभा सीट को लेकर उम्मीदवार के चयन का अधिकार खुद लेना फिर ऐसे विधायक जिनका आरसीपी सिंह से बहुत ही करीबी का रिश्ता रहा है उससे साफ साफ यह पूछना की आरपीसी सिंह को लेकर आपकी कोई राय तो नहीं है फिर किंग महेंद्र जिनका कार्यकाल बचा हुआ था उसके परिवार वाले चाह भी रहे थे जिस आधार पर  किंग महेंद्र को राज्यसभा भेजा जाता है वो पूरा करेगा फिर भी नीतीश नहीं माने और अनिल हेगड़े को राज्यसभा भेज दिये जबकि इस सीट के सहारे बिहार के भूमिहार राजनीति को साधा जा सकता है जो आज कल नीतीश से नाराज चल रहा है ।           

लेकिन नीतीश कुमार ने अनिल हेगड़े को टिकट देकर राजनीति में शुचिता का एक लकीर खींचने की कोशिश ,इसके अलावे इस बीच कई ऐसे मौके आये है जिस दौरान नीतीश आरसीपी सिंह से दूरी बना रहे हैं ऐसा देखने को मिला है ।चाहे वो नीतीश कुमार के पारिवारिक सदस्य हरेन्द्र कुमार के बेटे की शादी का मौका रहा हो चाहे बेटे हरेन्द्र सिंह के बेटे के रिसेप्शन का मौका रहा हो या फिर विजय चौधरी के बेटे की शादी का मौका रहा हो इसके अलावा भी कई ऐसी बात हुई हो जो दिखा रहा है कि नीतीश आरसीपी सिंह को लेकर सहज नहीं है।

2—आरसीपी सिंह के विभीषण बनने पर क्या नुकसान हो सकता है उसके आकलन में लगे है नीतीश  एक ये भी चर्चा है कि नीतीश कुमार आरसीपी सिंह को हटाने का निर्णय लेते हैं तो क्या क्या नुकसान हो सकता है इसके मूल्यांकन की वजह से नीतीश राज्यसभा सीट पर उम्मीदवार कौन हो इसको लेकर वक्त ले रहे हैं हालांकि नीतीश कुमार उम्मीदवार चयन में जितना वक्त ले रहे हैं उसका असर यह हो रहा है कि आरसीपी सिंह के समर्थक भाषाई मर्यादा तक तोड़ दिया है ।              

सोशल मीडिया पर आरसीपी सिंह के करीबी ललन सिंह को निशाने पर ले रहे हैं, नीतीश पर भी हमला बोल रहा है, सीबीआई का डर दिखाया जा रहा है ऐसे में नीतीश अंतिम क्षण में आरसीपी सिंह को टिकट देते भी हैं तो पार्टी को एकजुट रखना नीतीश के लिए मुश्लिक हो जायेगा ।         

वही आरसीपी सिंह का टिकट काटना का फैसला भी नीतीश के लिए बहुत ही मुश्किल भरा निर्णय होगा क्यों कि आरसीपी सिंह नीतीश कुमार के राजदार रहे हैं उन्हें नीतीश कुमार की खासियत और कमजोरी सब पता है ऐसे में नीतीश के लिए आरसीपी सिंह को बाहर का रास्ता दिखाना इतना आसान नहीं होगा क्यों कि आरसीपी सिंह बाहर होते हैं जो बीजेपी के नीतीश कुमार के घर का दूसरा ऐसा विभीषण मिल जायेंगा जिसके पास नीतीश कुमार के हर राजनीतिक दांव और ताकत की जानकारी है इसलिए आरसीपी सिंह को राज्यसभा का टिकट काटना नीतीश के लिए बहुत आसान नहीं होगा ।

 वैसे आरसीपी सिंह गये तो यह तय है कि नीतीश 2024 से पहले बीजेपी के खिलाफ मैदान में उतर सकते हैं लेकिन यहां समस्या यह है कि नीतीश के इस फैसले के साथ ललन सिंह ,संजय झा और अशोक चौधरी जैसे मिडिल ऑर्डर के खिलाड़ी खड़े नहीं होंगे ये भी एक संकट है ऐसे में नीतीश कुमार के सामने विकल्प बहुत ही सीमित है लेकिन इतना तय है इस परिस्थिति में भी नीतीश अगर आरसीपी सिंह को टिकट से वंचित कर देते हैं तो यह तय है कि नीतीश कुमार 20-20 के अंदाज में राजनीतिक पारी खेल सकते हैं क्यों इनके पास खोने के लिए अब कुछ नहीं बचा है ।

नीतीश के पजल गेम में उलझा बिहार आरसीपी सिंह के राज्यसभा जाने पर अभी भी संशय बरकरार

समझें तो जाने जी है इस समय बिहार जिस राजनीति के दौर से गुजर रहा है वो किसी पजल गेम से कम नहीं है ।
बिहार के सामने आरसीपी सिंह राज्यसभा जायेंगे या नहींं जायेंगे यही पजल गेम है। ऐसा पहली बार हो रहा है जब पजल गेम के एक से एक माहिर खिलड़ी भी दो राहे पर आकर खड़े हो जा रहे हैं और तय नहीं कर पा रहे हैं कि आरसीपी सिंह जायेंगे या नहीं जायेंगे मैं तो यह दावे के साथ कह सकता हूं कि आरसीपी सिंह जायेंगे या नहीं जायेंगे ये बात ललन सिंह और उपेन्द्र कुशवाहा को भी पता नहीं है ।

हां अटकल जरुर लगा सकते हैं पिछले 24 घंटे के दौरान इस पजल गेम को साँल्भ करने की दिशा में इस तीन तस्वीर की सहायता ली जा सकती है ।

1–पहली तस्वीर है आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार के बीच मुलाकात की आरसीपी सिंह पीले रंग के फाइल के अंदर लिखी गयी मजमून को पढ़ रहे हैं और नीतीश कुमार सुन रहे हैं नीतीश के चेहरे के भाव से आप कयास लगाइए क्या पढ़ रहे थे आरसीपी सिंह

2–दूसरी तस्वीर है मंंत्री विजय चौधरी के बेटे के शादी समारोह का मुख्यमंत्री सहित जदयू के अधिकांश मंत्री जब चले गये तब आरसीपी सिंह पहुंचे थे और हाल यह था कि जदयू का कार्यकर्ता भी साथ चलने से कतरा रहे थे।

3–तीसरी तस्वीर पंडित जवाहरलाल नेहरू के पूण्यतिथि पर आयोजित राजकीय समारोह का है इस कार्यक्रम में मंत्री शीला मंडल मुख्यमत्री नीतीश कुमार के बगल में बैठी हैं ,शीला मंडल आरसीपी सिंह के खासे करीब हैं उन्हें के कहने पर टिकट दिया गया था और पहली बार विधायक बनने के बाद मंत्री भी आरसीपी सिंह के ही कोटे से बनी थी। शीला पहली बार किसी राजकीय कार्यक्रम में नीतीश के साथ मंच पर देखी गयी है इस का तस्वीर मतलब निकाले पजल गेम साँल्भ करो ।

इस पजल गेम को लेकर कुछ इनपुट भी है शायद आपको साँल्फ करने में मदद करे
1–इधर राज्य सरकार के सीनियर अधिकारियों का मानना है कि आरसीपी सिंह राज्यसभा जरुर जायेंगी ज्यादा उड़ने लगे थे हैसियत बता दिया गया ।

2–आज आरसीपी सिंह चुनाव आयोग के रिटायर उप निर्वाचन पदाधिकारी बैजनाथ कुमार मिलने पहुंचे हैं कहा जा रहा है कि नॉमिनेशन फॉर्म भरने आये हैं ।

हाहहाहहाहाहा मजा आ रहा है ना आरसीपी पजलगेम को साँल्भ करने में ।वैसे इस खेल में अब बचा कुछ नहीं है बस देखना यही है कि इस गेम के निर्माता के रीढ़ में ताकत बची है की नहीं ।