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पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 25 हजार का इनामी बदमाश अवैध हथियार के साथ गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 हजार के इनामी बदमाश को अवैध हथियार के साथ गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी पुलिस की लगातार कोशिशों और जांच के बाद संभव हुई है। बदमाश पर कई मामले दर्ज थे और वह लंबे समय से पुलिस की नजर में था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बदमाश का नाम पता चलने के बाद उसकी तलाश शुरू की गई थी। कई दिनों की जांच और छापेमारी के बाद आखिरकार बदमाश को अवैध हथियार के साथ गिरफ्तार किया जा सका। यह गिरफ्तारी इलाके में अपराध नियंत्रण के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

गिरफ्तार बदमाश पर कई जुर्म दर्ज हैं और पुलिस को इसके खिलाफ कई शिकायतें मिली थीं। पुलिस ने बताया कि बदमाश के पास से अवैध हथियार भी बरामद किया गया है, जिसकी जांच की जा रही है। बदमाश की गिरफ्तारी से इलाके में अपराध दर में कमी आएगी, ऐसी उम्मीद पुलिस ने जताई है।

इस मामले में पुलिस ने बताया कि बदमाश के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी और उसे अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस ने यह भी बताया कि बदमाश की गिरफ्तारी में कई पुलिसकर्मियों ने अहम भूमिका निभाई है, जिनकी वजह से यह ऑपरेशन सफल हो पाया।

पुलिस की इस कार्रवाई से स्थानीय निवासियों में राहत की भावना है और उन्हें उम्मीद है कि इससे अपराध में कमी आएगी। पुलिस ने स्थानीय निवासियों से भी सहयोग की अपील की है ताकि ऐसे बदमाशों को पकड़ने में मदद मिल सके।

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में बड़ा बदलाव: 2.4 करोड़ नाम हटाए गए

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में बड़ा बदलाव देखा गया है, जिसमें 2.4 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं। राज्य में मतदाता सूची की समीक्षा का काम लगभग पूरा हो चुका है, जिसमें मतदाताओं की संख्या 13 करोड़ के करीब पहुंच गई है। इस दौरान, लाखों मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए और सुनवाई की गई, जिसमें कई नाम हटा दिए गए क्योंकि वे प्रवासन या अन्य कारणों से राज्य से बाहर चले गए थे। साथ ही, सुधार और अद्यतन के लिए हजारों आवेदनों का भी निपटारा किया गया। जल्द ही, अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी, जिसमें राज्य के मतदाताओं की वास्तविक संख्या का पता चलेगा।

उत्तर प्रदेश के संभल में होली के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद, मस्जिदों को तिरपाल से ढका गया

उत्तर प्रदेश के संभल में होली के त्योहार के मद्देनज़र सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद बनाया गया है। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि जिले की 10 से अधिक मस्जिदों को तिरपाल से ढक दिया गया है, ताकि होली के रंग उन पर न पड़ें और किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत न हों। यह कदम सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

जिले के जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने बताया कि संभल में कुल 1215 होलिका दहन स्थल हैं, जहां पर मेले और जुलूस आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि शांति समिति की 38 बैठकें पहले ही आयोजित की जा चुकी हैं और पूरे इलाके को तीन जोन में बांटा गया है। सभी कर्मचारी अपने-अपने इलाकों में फ्लैग मार्च कर रहे हैं।

सुरक्षा के लिए तीन कंपनी पीएसी और 200 आरक्षक तैनात किए गए हैं। सभी जुलूस ड्रोन की निगरानी में निकाले जाएंगे। संभल में फ्लैग मार्च किया गया है और होलिका दहन स्थल का निरीक्षण किया गया है। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए हैं।

वृंदावन में रंगों की बारिश: बांके बिहारी और राधारानी-श्रीकृष्ण ने खेली फूलों की होली, मथुरा में जमकर नाच-Gान

वृंदावन और मथुरा में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। बांके बिहारी जी के मंदिर में रंगभरी एकादशी पर अनोखा नजारा दिखा, जहां पुजारियों ने भगवान को रंग और अबीर लगाया और भक्तों पर प्रसादी गुलाल बरसाया। मंदिर रंग-बिरंगे गुलाल में डूबा नजर आया और प्रसाद पाने के लिए भक्तों में होड़ मच गई।

इस बीच, राधारानी और श्रीकृष्ण ने भी फूलों की होली खेली। मथुरा के डीएम चंद्रप्रकाश सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार ने भी होली के गानों पर डांस किया और अधिकारियों के साथ जमकर होली खेली। गोपियों ने केशव वाटिका में मनाई गई होली में हुरियारों पर जमकर लाठी बरसाईं, जिसमें पुलिस वाले भी उनकी लाठी से बचते नजर आए।

वृंदावन की गलियां शुक्रवार दिनभर भक्तों से खचाखच भरी रहीं और हर तरफ अबीर-गुलाल उड़ता दिखा। रंगों से रंगे भक्तों ने ‘आज ब्रज में होली रे रसिया’ गाने पर जमकर डांस किया और बड़ी संख्या में भक्तों ने वृंदावन की पंचकोसी परिक्रमा की। कई भक्त अपने लड्डू गोपाल को गोद में लेकर पहुंचे थे। अनुमान है कि ब्रज की होली खेलने के लिए करीब 10 लाख भक्त वृंदावन पहुंचे हैं।

लखनऊ पैथोलॉजी मालिक हत्याकांड: बेटे ने यूट्यूब से सीखा शव ठिकाने लगाने का तरीका, 135 कॉल कर रचा गुमराह करने का जाल

लखनऊ शहर उस समय स्तब्ध रह गया जब शहर की जानी-मानी वर्धमान पैथोलॉजी के मालिक मानवेंद्र सिंह की निर्मम हत्या का खुलासा हुआ। शुरुआत में यह मामला एक रहस्यमयी गुमशुदगी का प्रतीत हो रहा था, लेकिन पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, परत-दर-परत जो सच्चाई सामने आई, उसने रिश्तों, विश्वास और परिवार की परिभाषा को झकझोर कर रख दिया। आरोप है कि इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाला कोई और नहीं, बल्कि उनका अपना बेटा अक्षत प्रताप सिंह उर्फ राजा है।

पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद आरोपी ने न केवल शव को ठिकाने लगाने के लिए बारीकी से योजना बनाई, बल्कि खुद को संदेह से बचाने के लिए 135 फोन कॉल कर ‘बेचैन बेटे’ की छवि भी गढ़ने की कोशिश की। यूट्यूब पर वीडियो देखे गए, ऑनलाइन चाकू और आरी मंगाई गई, बाजार से कार के आकार का ड्रम खरीदा गया, मोटी पॉलिथीन और 20 लीटर तारपीन का तेल लाया गया—यह सब किसी आवेश में की गई हरकत नहीं, बल्कि सुनियोजित प्रयास का संकेत देता है।

नीचे पूरे घटनाक्रम की विस्तृत पड़ताल प्रस्तुत है।

हत्या की सुबह: 20 फरवरी, तड़के 4:30 बजे

पुलिस जांच के अनुसार, 20 फरवरी की सुबह लगभग 4:30 बजे घर के अंदर यह वारदात हुई। उस समय घर में और कोई मौजूद नहीं था। आरोप है कि पिता-पुत्र के बीच पहले से चल रहे तनाव ने उस सुबह हिंसक रूप ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि हत्या अचानक गुस्से में नहीं, बल्कि मानसिक रूप से तैयार होकर की गई प्रतीत होती है।

हत्या के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी—करीब 110 किलो वजनी शव को कैसे हटाया जाए? यही वह बिंदु था जहां से आरोपी की योजनाबद्ध गतिविधियां शुरू होती हैं।

दो दिन की ‘योजना’: शव ठिकाने लगाने का खौफनाक प्रयास

हत्या के बाद आरोपी ने तुरंत शव को बाहर ले जाने की कोशिश नहीं की। पुलिस के मुताबिक, उसने करीब दो दिन तक विभिन्न विकल्पों पर विचार किया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि इतने भारी शरीर को अकेले कैसे हटाया जाए।

पूछताछ में उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि शव को छोटे हिस्सों में बांटना ही एकमात्र रास्ता बचा था। इसके लिए उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से धारदार चाकू और आरी मंगाई। डिलीवरी का समय, पैकेज रिसीव करने का तरीका—सब कुछ सामान्य गतिविधि की तरह रखा गया ताकि किसी को शक न हो।

यूट्यूब बना ‘गुरु’: डिजिटल दुनिया से अपराध की सीख

जांच में सामने आया कि हत्या के बाद आरोपी ने इंटरनेट का सहारा लिया। यूट्यूब पर उसने ऐसे वीडियो खोजे जिनमें शव को ठिकाने लगाने के तरीके बताए गए थे। यह तथ्य पुलिस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि वह अपराध को छिपाने के लिए सक्रिय रूप से जानकारी जुटा रहा था।

डिजिटल फॉरेंसिक टीम अब उसके मोबाइल और लैपटॉप की हिस्ट्री खंगाल रही है—कौन से वीडियो देखे गए, कितनी देर तक देखे गए, किन-किन कीवर्ड्स की सर्च की गई।

ड्रम की तलाश: ब्रेजा कार में फिट होने वाला ‘नीला कंटेनर’

शव के टुकड़े करने के बाद अगला चरण था धड़ को ठिकाने लगाना। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी अपनी ब्रेजा कार लेकर बाजार में ड्रम की तलाश में निकला। तीन अलग-अलग दुकानों पर पूछताछ के बाद उसे ऐसा ड्रम मिला जो कार की डिक्की में फिट हो सकता था।

उसने नीले रंग का बड़ा प्लास्टिक ड्रम खरीदा। सीसीटीवी फुटेज और बिलिंग रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। ड्रम को घर लाकर वह कई घंटों तक मोहल्ले में सन्नाटा होने का इंतजार करता रहा।

इसके साथ ही उसने आर्मी पैटर्न की मोटी पॉलिथीन और 20 लीटर तारपीन का तेल भी खरीदा। अनुमान है कि तारपीन का तेल बदबू को कम करने या साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से लिया गया होगा।

हाथ-पैर अलग, धड़ अलग: क्रूरता की पराकाष्ठा

पुलिस का दावा है कि आरोपी ने शव के हाथ-पैर अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिए। इन हिस्सों को ठिकाने लगाने में उसे अपेक्षाकृत कम कठिनाई हुई। लेकिन धड़ का वजन अधिक होने के कारण वह उसे अकेले नहीं उठा पा रहा था।

यहीं से उसकी योजना लड़खड़ाने लगी। जितनी बारीकी से उसने योजना बनाई थी, उतनी ही तेजी से मानसिक दबाव भी बढ़ता गया।

शक से बचने की चाल: 135 कॉल और गुमशुदगी की रिपोर्ट

हत्या के बाद आरोपी ने एक और रणनीति अपनाई—खुद को परेशान और व्याकुल दिखाने की। पुलिस के अनुसार, घटना के दिन से लेकर गिरफ्तारी तक उसके मोबाइल से 135 कॉल की गईं।

इन कॉल्स में रिश्तेदार, दोस्त, परिचित और कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे जिनसे वह नियमित संपर्क में नहीं था। उद्देश्य स्पष्ट था—ऐसा माहौल बनाना कि वह पिता की तलाश में हर संभव कोशिश कर रहा है।

वह एक साथी के साथ आशियाना थाने पहुंचा और गुमशुदगी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान उसका व्यवहार सामान्य से अधिक चिंतित दिखाने की कोशिश करता हुआ बताया गया है।

‘वकील अंकल, आपसे अकेले मिलना है’

हत्या के बाद आरोपी ने परिवार से जुड़े एक वकील को फोन कर अकेले मिलने की जिद की। उसने कहा कि उसे बहुत जरूरी बात करनी है। हालांकि वकील अदालत में व्यस्त थे और मुलाकात नहीं हो पाई।

पुलिस सूत्रों का दावा है कि आरोपी को धीरे-धीरे एहसास हो रहा था कि वह कानून से बच नहीं पाएगा। मानसिक दबाव में उसने कुछ करीबी लोगों के सामने हत्या की बात स्वीकार भी की, हालांकि यह बयान आधिकारिक रूप से दर्ज नहीं हुआ है।

19 फरवरी की बहस: 50 लाख रुपये बना कारण?

जांच में यह भी सामने आया कि हत्या से एक दिन पहले यानी 19 फरवरी को पिता-पुत्र के बीच पैसों को लेकर तीखी बहस हुई थी। चर्चा है कि करीब 50 लाख रुपये को लेकर विवाद था।

कुछ सूत्रों का दावा है कि बहस के दौरान थप्पड़ भी मारा गया था। हालांकि पुलिस ने इस पर औपचारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन यह स्पष्ट है कि आर्थिक विवाद ने रिश्ते में पहले से मौजूद दरार को और चौड़ा कर दिया था।

पुराने घाव: मां की आत्महत्या और रिश्तों में जहर

परिवार के करीबी लोगों की सोशल मीडिया पोस्ट से एक और आयाम सामने आया है। जब आरोपी 11 साल का था, तब उसकी मां ने आत्महत्या कर ली थी। उस घटना के बाद ससुराल पक्ष ने पिता को दोषी ठहराया।

बताया जाता है कि यह धारणा वर्षों तक बनी रही और बच्चों के मन में पिता के प्रति नकारात्मकता गहराती गई। समय के साथ संवाद कम होता गया और दूरी बढ़ती गई।

मानवेंद्र सिंह के एक महिला मित्र से संबंधों की चर्चा भी परिवार में तनाव का कारण बनी। बच्चों की नजर में पिता की छवि और खराब होती चली गई।

प्रेम संबंध और पैसों का विवाद

कुछ करीबी लोगों के अनुसार, आरोपी की एक लड़की से नजदीकियां थीं। आरोप है कि घर के लाखों रुपये संभवतः उसी पर खर्च किए गए। पिता को यह स्वीकार्य नहीं था।

पिता-पुत्र के बीच पैसों, संपत्ति और निजी जीवन को लेकर लगातार टकराव होता रहा। यह टकराव अंततः हिंसा में बदल गया—ऐसा पुलिस का अनुमान है।

जेल की पहली रात: बेचैनी और अनिद्रा

25 फरवरी को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद आरोपी ने जेल में खाना नहीं खाया। जेल सूत्रों के अनुसार, वह पूरी रात जागता रहा और बेहद बेचैन नजर आया।

मानसिक दबाव, अपराधबोध या भविष्य की चिंता—कारण जो भी हो, उसकी पहली रात सामान्य कैदी जैसी नहीं थी।

पुलिस की आगे की जांच

फिलहाल पुलिस निम्न बिंदुओं पर गहन जांच कर रही है:

  • कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की पूरी पड़ताल
  • ऑनलाइन ऑर्डर की टाइमलाइन
  • सीसीटीवी फुटेज से खरीदारी की पुष्टि
  • संभावित सहयोगियों की पहचान
  • डिजिटल सर्च हिस्ट्री का विश्लेषण

पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या आरोपी ने अकेले पूरा अपराध किया या किसी ने उसकी मदद की।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य को ब्रिटेन ने वीजा देने से इनकार कर दिया, सीएम योगी ने जापान और सिंगापुर से 2.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव हासिल किए

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य को ब्रिटेन ने वीजा देने से इनकार कर दिया है, जिसके कारण उन्हें अपना ब्रिटेन दौरा रद्द करना पड़ा है। यह दौरा 25 से 27 फरवरी तक निर्धारित था। केशव मौर्य ने इससे पहले जर्मनी का दौरा किया था, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं और समझौते किए। उन्होंने जर्मनी की प्रमुख सेमीकंडक्टर कंपनियों, रक्षा कंपनियों, और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़ी कंपनियों के साथ बैठकें कीं।

इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान और सिंगापुर के दौरे के दौरान 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव हासिल किए हैं। उन्होंने जापान में मैग्लेव ट्रेन से यात्रा की और यामानाशी प्रांत के गवर्नर कोटारो नागासाकी के साथ द्विपक्षीय बैठक की। उन्होंने यामानाशी हाइड्रोजन फैसिलिटी P2G सिस्टम की साइट विजिट की और निवेशकों से बातचीत की।

केशव मौर्य ने जर्मनी में कई प्रमुख इंडस्ट्रियल ग्रुप और संगठनों के साथ बैठकें कीं। उन्होंने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और एयरोस्पेस, स्मार्ट सिटी और ई-व्हीकल, और कौशल विकास पर चर्चा की। उन्होंने जर्मनी की प्रमुख कंपनियों के साथ समझौते किए और उत्तर प्रदेश में निवेश के अवसरों पर चर्चा की।

उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य राज्य को भारत का ‘सेमीकंडक्टर हब’ बनाना है, जिसके लिए उन्होंने जर्मन तकनीक और विशेषज्ञता का सहयोग मांगा। उन्होंने जर्मन रक्षा कंपनी ‘क्वांटम सिस्टम्स’ के साथ बैठक की और यूपी को ड्रोन बनाने का गढ़ बनाने पर चर्चा की।

इस दौरे से उत्तर प्रदेश में निवेश और विकास के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। केशव मौर्य और योगी आदित्यनाथ के दौरे से राज्य को विश्व स्तर पर पहचान मिलेगी और निवेशकों को आकर्षित किया जा सकेगा।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण के आरोप: आशुतोष महाराज ने लगाया UP डिप्टी CM पर साजिश रचने का आरोप

प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे यौन शोषण के आरोपों के मामले में नया मोड़ आ गया है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने बुधवार को मीडिया से बात की, जिसमें उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद पर मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और वाराणसी के मठ-आश्रमों में बटुकों का यौन शोषण करने का आरोप लगाया। आशुतोष महाराज ने दावा किया कि उनके पास सभी सबूत हैं और मेडिकल रिपोर्ट में भी यौन शोषण की पुष्टि हो गई है।

आशुतोष महाराज ने यूपी के डिप्टी सीएम पर माघ मेले में साजिश रचने का आरोप लगाया, हालांकि उन्होंने डिप्टी सीएम का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम ने उनसे कहा था कि अभी धरना दो, जब हम आएं, तब खत्म करना। इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने आशुतोष महाराज के आरोपों का जवाब दिया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वह बच्चा उनके पास आया ही नहीं, तो यह सब कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि उनके वकीलों ने सारे प्रमाण दिखा दिए कि वह बच्चे उनके पास थे, इसलिए अगर बच्चों के साथ कुछ हुआ है तो बच्चे जिसके साथ थे, उसी ने किया होगा। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता जांच के घेरे में अपने आप आ जाएगा और उन्हें बताना पड़ेगा कि इन बच्चों का उनके साथ संपर्क कहां हुआ।

इस मामले में प्रयागराज पुलिस पिछले 3 दिन से वाराणसी में डेरा डाले हुए है और शंकराचार्य से जुड़े सबूत जुटाने में लगी है। मामला हाई-प्रोफाइल होने से पुलिस फूंक-फूंककर कदम रख रही है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस शंकराचार्य के समर्थन में उतर आई है और प्रदेश के सभी 75 जिलों में उनके समर्थन में प्रदर्शन करेगी।

कानपुर के PSIT कॉलेज में छात्रों का हंगामा: लाठीचार्ज में कई घायल, कॉलेज 8 मार्च तक बंद

कानपुर के पनकी स्थित प्रोडेशन्स इंजीनियरिंग कॉलेज (PSIT) में बुधवार को छात्रों ने हंगामा किया, जिसमें कॉलेज की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। यह हंगामा सोमवार को कॉलेज कैंपस में एक छात्र की जेसीबी से टकराकर मौत होने के बाद हुआ था। छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की और न्याय की मांग की।

मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्रों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन स्थिति बिगड़ गई और पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई छात्र घायल हो गए। पुलिस और छात्रों के बीच झड़प होने के बाद कॉलेज को 8 मार्च तक बंद कर दिया गया है।

इस मामले में कॉलेज प्रबंधन ने छात्रों की मांगों को मान लिया है और उन्हें आश्वस्त किया है कि जल्द ही कॉलेज की टाइमिंग में बदलाव किया जाएगा। फिलहाल, कॉलेज में पीएसी तैनात है और सभी छात्रों को वहां से हटा दिया गया है।

सोमवार को हुए हादसे में बीसीए फाइनल ईयर के छात्र प्रखर सिंह की मौत हो गई थी, जो जेसीबी से टकरा गए थे। छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन ने निर्माण काम के दौरान सुरक्षा इंतजाम नहीं किए थे, जिससे यह हादसा हुआ। कॉलेज प्रबंधन ने इस मामले में जांच का आश्वासन दिया है।

इस मामले में डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आब्दी, एडीसीपी वेस्ट कपिलदेव, एसीपी कल्याणपुर आशुतोष कुमार, और एसीपी अमरनाथ यादव ने छात्रों से बातचीत की और उन्हें शांत करने की कोशिश की। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और 10 एंबुलेंस भी मौके पर पहुंची थीं।

मेरठ में दिल दहला देने वाला हादसा: नमाज पढ़ने गए पिता के घर में लगी आग, जुड़वां बेटियों समेत 5 बच्चों सहित 6 की जिंदा जलकर मौत

उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में सोमवार देर शाम एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया। लिसाड़ीगेट थानाक्षेत्र के किदवई नगर स्थित सुराही वाली मस्जिद के पास एक दो मंजिला मकान में अचानक भीषण आग लग गई। इस आग में एक ही परिवार के छह लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। मृतकों में दो महिलाएं और पांच बच्चे शामिल थे, जिनमें छह माह की जुड़वां बेटियां भी थीं। परिवार का मुखिया उस समय नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद गया हुआ था। जब तक वह लौटता, तब तक उसका पूरा संसार राख में तब्दील हो चुका था।

नमाज के दौरान मचा कोहराम

घटना सोमवार देर शाम की है। कपड़ा कारोबारी इकबाल उर्फ आसिम अपने भाई फारुख के साथ पास की मस्जिद में नमाज पढ़ने गए थे। घर में उनकी पत्नी रुखसार (30 वर्ष), मां अमीर बानो (55 वर्ष) और पांच बच्चे मौजूद थे। बच्चे घर के भीतर खेल रहे थे और महिलाएं रसोई में खाना बनाने में व्यस्त थीं। इसी दौरान अचानक मकान में आग भड़क उठी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पहले घर की ऊपरी मंजिल से धुआं उठता दिखाई दिया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और लपटें खिड़कियों से बाहर आने लगीं। आसपास के लोगों ने जब यह दृश्य देखा तो शोर मचाया और तुरंत पुलिस व फायर ब्रिगेड को सूचना दी।

संकरी गलियों ने बढ़ाई मुश्किल

लिसाड़ीगेट क्षेत्र घनी आबादी और संकरी गलियों वाला इलाका है। आग की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन गली इतनी संकरी थी कि दमकल वाहन सीधे मकान तक नहीं पहुंच सके। ऐसे में फायर फाइटर्स को पड़ोसी मकानों की छतों के रास्ते अंदर प्रवेश करना पड़ा।

करीब 30 मिनट तक घर के अंदर फंसे लोग लपटों और धुएं के बीच जिंदगी की जंग लड़ते रहे। सामने वाले मकान से सीढ़ी लगाकर राहत दल ने अंदर प्रवेश किया और एक-एक कर सभी को बाहर निकाला। हालांकि तब तक आग बहुत फैल चुकी थी और अधिकांश लोग गंभीर रूप से झुलस चुके थे।

अस्पताल में टूटा परिवार

घायलों को तत्काल शहर के अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद रुखसार और पांचों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। मृत बच्चों में महविश (12 वर्ष), हम्माद (4 वर्ष), अद्दस (3 वर्ष) और छह-छह माह की जुड़वां बेटियां नाबिया और इनायत शामिल थीं। बताया गया कि नाबिया और इनायत इकबाल और रुखसार की जुड़वां बेटियां थीं, जबकि महविश और हम्माद इकबाल के भाई फारुख के बच्चे थे।

इकबाल की मां अमीर बानो और एक पड़ोसी गंभीर रूप से झुलस गए। दोनों का अस्पताल में इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल में मोहल्ले के लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई स्तब्ध और शोकाकुल नजर आया।

पिता का रो-रोकर बुरा हाल

जब मस्जिद में नमाज पढ़ रहे इकबाल को आग की सूचना मिली तो वे बदहवास हालत में घर की ओर दौड़े। मौके पर पहुंचते ही उन्होंने अपने घर को आग की लपटों में घिरा देखा। परिवार के सदस्यों को बाहर निकाला जा रहा था। पत्नी और बच्चों की हालत देखकर वे फूट-फूटकर रोने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन उनका दुख शब्दों से परे था।

मोहल्ले के लोगों के अनुसार इकबाल मेहनती कारोबारी थे। वे कपड़े तैयार कराकर ऑर्डर पर दूसरे शहरों में आयोजित प्रदर्शनियों में बेचते थे। घर में बड़ी मात्रा में कपड़ा रखा हुआ था। संभावना है कि कपड़ों के कारण आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया।

आग की वजह पर संशय

पुलिस की शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई गई है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस सिलेंडर में लीकेज के चलते आग भड़की। फायर ब्रिगेड के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। घर में कपड़े का स्टॉक होने के कारण आग ने तेजी से फैलकर पूरे मकान को चपेट में ले लिया।

करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। दमकल कर्मियों ने छतों के रास्ते अंदर जाकर आग बुझाने का काम किया। आग इतनी भीषण थी कि दीवारें तक झुलस गईं और पूरा घर काला पड़ गया।

प्रशासन और जनप्रतिनिधि पहुंचे

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे। डीएम वीके सिंह, एसएसपी अविनाश पांडे, डीआईजी कलानिधि नैथानी और एसपी क्राइम अवनीश कुमार ने हालात का जायजा लिया। सिवाल खास के विधायक गुलाम मोहम्मद भी अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा समेत कई स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। घायलों के इलाज की समुचित व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं।

मातम में डूबा इलाका

इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरा किदवई नगर शोक में डूब गया है। जिस घर से कुछ घंटे पहले बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। पड़ोसियों की आंखों में आंसू हैं और हर कोई इस त्रासदी से स्तब्ध है। लोग बार-बार यही सवाल कर रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई।

मोहल्ले के बुजुर्गों का कहना है कि संकरी गलियों और पुराने मकानों में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। अगर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां समय पर मकान तक पहुंच पातीं, तो शायद कुछ जानें बचाई जा सकती थीं।

2027 की जंग के लिए सपा का मास्टरस्ट्रोक: अखिलेश यादव ने प्रशांत किशोर की I-PAC को सौंपी यूपी चुनाव की कमान, दिल्ली-बंगाल की सीक्रेट बैठकों के बाद बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधी चुनौती देने के लिए समाजवादी पार्टी ने अब अपनी रणनीतिक तैयारी को नए स्तर पर पहुंचा दिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) की कंपनी Indian Political Action Committee यानी I-PAC को 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के लिए अपना कैंपेन संभालने की जिम्मेदारी सौंप दी है।

यह फैसला अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे कई महीनों की गोपनीय बैठकों, राजनीतिक सलाह-मशविरों और राष्ट्रीय स्तर की रणनीतिक सोच का योगदान है। सूत्रों के अनुसार, इस साझेदारी की नींव दिसंबर 2025 में दिल्ली में हुई एक अहम बैठक में पड़ी, जहां अखिलेश और पीके के बीच लंबी चर्चा हुई। इसके बाद जनवरी 2026 में जब अखिलेश पश्चिम बंगाल दौरे पर गए, तब वहां भी दोनों के बीच विस्तार से रणनीति पर मंथन हुआ।

दो मुख्यमंत्रियों की सलाह पर हुआ बड़ा निर्णय

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अखिलेश यादव को I-PAC की सेवाएं लेने की सलाह दी थी। दोनों ही नेताओं की चुनावी सफलताओं में पीके की टीम की भूमिका पहले से चर्चित रही है।

बताया जा रहा है कि दिल्ली और कोलकाता में हुई बैठकों के दौरान यूपी की जातीय संरचना, बूथ मैनेजमेंट, शहरी-ग्रामीण वोटर पैटर्न, युवाओं और महिलाओं के वोट बैंक, और विपक्षी रणनीति जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इन बैठकों के बाद सपा नेतृत्व ने औपचारिक रूप से I-PAC को हायर करने का फैसला लिया।

नोएडा से होगी कैंपेन की औपचारिक शुरुआत

सूत्रों के मुताबिक 28 मार्च को अखिलेश यादव नोएडा से अपने चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत करेंगे। यहां “PDA भागीदारी रैली” आयोजित की जाएगी। PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक—यह वही सामाजिक समीकरण है, जिसे सपा 2024 के लोकसभा चुनाव में मजबूत कर चुकी है और 2027 में उसे और धार देना चाहती है।

नोएडा से शुरुआत का संदेश भी राजनीतिक है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की मजबूत पकड़ को चुनौती देना और शहरी वोटर्स तक सीधा संदेश पहुंचाना सपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सपा का मल्टी-लेयर चुनावी मॉडल

समाजवादी पार्टी इस बार सिर्फ एक एजेंसी पर निर्भर नहीं रहना चाहती। अलग-अलग जिम्मेदारियों के लिए अलग कंपनियों को हायर किया गया है।

  • डेटा एनालिसिस और माइक्रो-लेवल स्ट्रैटजी का काम मुंबई की शो टाइम कंसल्टिंग को सौंपा गया है।
  • सर्वे और फील्ड रिसर्च का काम कर्नाटक की एक कंपनी पूर्वी उत्तर प्रदेश से शुरू कर चुकी है।
  • बूथ मैनेजमेंट, डिजिटल आउटरीच और ट्रेनिंग की जिम्मेदारी I-PAC संभालेगी।

I-PAC की टीम लखनऊ में अपना कैंप स्थापित करेगी और जिला स्तर तक संगठनात्मक ढांचा खड़ा करेगी। ऐप आधारित टूल्स, वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, व्हाट्सऐप नेटवर्क और सोशल मीडिया कैंपेन को आक्रामक बनाया जाएगा।

अखिलेश के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति

2022 के विधानसभा चुनाव में सपा को 111 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा 255 सीटों के साथ सत्ता में लौटी थी। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने 37 सीटें जीतकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस सफलता ने अखिलेश यादव को यह भरोसा दिया है कि सही रणनीति और बेहतर बूथ मैनेजमेंट से 2027 में सत्ता वापसी संभव है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव अखिलेश के लिए ‘करो या मरो’ जैसा है। लगातार दो विधानसभा चुनाव हारने के बाद अब तीसरी बार चूक सपा के लिए भारी पड़ सकती है। इसलिए पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय किया जा रहा है। जिलाध्यक्षों से लेकर सेक्टर प्रभारी तक, सभी से रिपोर्ट ली जा रही है।

विपक्षी मुद्दों पर फोकस

अखिलेश यादव पिछले कुछ महीनों से कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, पेपर लीक, भ्रष्टाचार और महंगाई जैसे मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेर रहे हैं। वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा हमला करने से भी पीछे नहीं हट रहे।

सपा का मानना है कि शहरी मध्यम वर्ग, बेरोजगार युवा और किसान वर्ग में असंतोष है, जिसे चुनावी मुद्दा बनाया जा सकता है। I-PAC इन मुद्दों को डेटा के आधार पर क्षेत्रवार रणनीति में बदलेगी।

कौन हैं प्रशांत किशोर?

प्रशांत किशोर भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित चुनावी रणनीतिकारों में से एक रहे हैं। 2011 में संयुक्त राष्ट्र की नौकरी छोड़कर उन्होंने भारतीय राजनीति में कदम रखा।

  • 2014 में उन्होंने भाजपा के लिए रणनीति तैयार की, जिसमें नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक जीत हुई।
  • 2015 में बिहार में नीतीश कुमार की जीत में भूमिका निभाई।
  • 2016 में पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए काम किया।
  • पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन की चुनावी सफलता में भी उनकी कंपनी की अहम भूमिका रही।

हालांकि हाल के वर्षों में पीके ने I-PAC से दूरी बनाकर बिहार में अपनी राजनीतिक पहल “जन सुराज” शुरू की है। 2025 के बिहार चुनाव में उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि संगठन निर्माण पर ध्यान दिया।

I-PAC अब प्रतीक जैन जैसे पेशेवरों के नेतृत्व में काम कर रही है, जो विभिन्न राज्यों में चुनावी कैंपेन का संचालन कर रहे हैं।

यूपी में पीके का पिछला अनुभव

उत्तर प्रदेश में पीके इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए काम कर चुके हैं। उस समय “27 साल यूपी बेहाल” का नारा दिया गया था। हालांकि बाद में सपा-कांग्रेस गठबंधन बनने के कारण रणनीति में बदलाव करना पड़ा। उस चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 7 सीटें मिलीं और सपा 47 सीटों पर सिमट गई थी।

इस बार हालात अलग हैं। सपा अकेले अपने दम पर मजबूत स्थिति में है और लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन से उसका मनोबल ऊंचा है।

आगे की राह

I-PAC की एंट्री से यूपी की सियासत में नई हलचल मच गई है। भाजपा पहले से ही बूथ स्तर तक मजबूत संगठन का दावा करती रही है। ऐसे में 2027 का मुकाबला पूरी तरह हाई-टेक, डेटा-ड्रिवन और जमीनी रणनीति का होगा।

अखिलेश यादव के सामने चुनौती बड़ी है—योगी सरकार की मजबूत मशीनरी, भाजपा का कैडर और संसाधन। लेकिन सपा का मानना है कि सामाजिक समीकरण, युवाओं की नाराजगी और गठबंधन की संभावनाएं उसे बढ़त दिला सकती हैं।

2027 की जंग अभी दूर है, लेकिन सपा ने अपनी पहली चाल चल दी है। अब देखना होगा कि क्या पीके की रणनीति उत्तर प्रदेश की राजनीति का समीकरण बदल पाएगी, या फिर यह प्रयोग भी 2017 की तरह अधूरा रह जाएगा।

लखनऊ में डबल डेकर बस की खिड़की से गिरीं लाशें:पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर पलटी; 5 की मौत और 45 घायल

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को दर्दनाक हादसा हो गया। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर एक डबल डेकर बस अनियंत्रित होकर पलट गई, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई और 45 यात्री घायल हो गए। घायलों में 7 बच्चे, 12 पुरुष और 9 महिलाएं शामिल हैं। 28 गंभीर घायलों को SGPGI एपेक्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया है।

खिड़कियों से गिरे शव, दिल दहला देने वाला मंजर

हादसे के बाद सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि जब क्रेन से बस को सीधा किया गया तो खिड़कियों से शव सड़क पर गिर पड़े। सड़क पर चारों तरफ खून बिखरा हुआ था। कई घायल और मृत यात्री खिड़कियों से लटके रहे। कुछ तस्वीरों में यात्रियों के हाथ-पैर अलग दिखाई दे रहे हैं। घटनास्थल पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल था।

बस लुधियाना (पंजाब) से मोतिहारी (बिहार) जा रही थी। हादसे के समय बस की रफ्तार 80 किमी/घंटा से अधिक बताई जा रही है। दुर्घटना के बाद ड्राइवर और क्लीनर मौके से फरार हो गए।

मृतकों की पहचान

मृतकों में बीरेंद्र (30), अंजली (8), प्रियांशु (15), एक 6 वर्षीय बच्चा और 30 वर्षीय युवक शामिल हैं। घटनास्थल से खून से सना एक छोटे बच्चे का जूता मिला, जो इस हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर बन गया है।

ड्राइवर का बयान और चश्मदीदों का दावा

ड्राइवर सोमपाल, निवासी नौल्था, पानीपत (हरियाणा), ने पुलिस पूछताछ में बताया कि ढाबे पर उसने हल्की शराब पी थी। उसके अनुसार एक्सप्रेस-वे पर अचानक ब्रेकर आने से बस अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। हालांकि, जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां कोई स्पीड ब्रेकर नहीं है।
प्रत्यक्षदर्शी अंश पटेल ने बताया कि बस “सांप की तरह लहरा रही थी” और अचानक पलट गई। कुछ यात्रियों का दावा है कि ड्राइवर को झपकी आ गई थी।

प्रारंभिक जांच में बड़ी लापरवाही उजागर

1. इमरजेंसी गेट बंद
जांच में पाया गया कि इमरजेंसी गेट के सामने अतिरिक्त सीट लगा दी गई थी, जिससे आपातकालीन निकास पूरी तरह बंद था।

2. क्षमता से अधिक यात्री
बस में 16 स्लीपर और 32 सिटिंग सीट की अनुमति थी, लेकिन अंदर 43 स्लीपर बना दिए गए थे और केवल 9 सिटिंग सीट छोड़ी गई थीं। करीब 90 यात्रियों को बैठाया गया था।

3. अवैध स्ट्रक्चर और बदलाव
बस की छत पर अतिरिक्त लोहे के ढांचे लगाए गए थे और लंबाई-चौड़ाई में भी बदलाव किया गया था।

4. एक ड्राइवर से 1360 किमी का सफर
नियमों के अनुसार लंबी दूरी की बस में दो ड्राइवर होना अनिवार्य है, लेकिन यह बस करीब 1360 किमी का सफर एक ही ड्राइवर के भरोसे कर रही थी। ड्राइविंग और विश्राम के नियमों का पालन नहीं हुआ।

5. 67 चालान के बावजूद कार्रवाई नहीं
बस पर 67 चालान लंबित थे, फिर भी वह 50 से अधिक आरटीओ क्षेत्रों से होकर गुजरती रही। न पुलिस ने रोका, न परिवहन विभाग ने सख्त कार्रवाई की।

मेरठ में मोहन भागवत का तीन दिवसीय दौरा: प्रांत के प्रबुद्धजनों, खिलाड़ियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से करेंगे सीधा संवाद

मेरठ : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत आज मेरठ पहुंच रहे हैं। उनका यह दौरा न केवल संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि सामाजिक और खेल जगत के लिए भी खास महत्व रखता है। 20 और 21 फरवरी को आयोजित दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम में वे मेरठ और ब्रज प्रांत के प्रबुद्धजनों, खिलाड़ियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे। यह पहली बार है जब संघ खिलाड़ियों के साथ औपचारिक संवाद कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।

माधव कुंज में भव्य तैयारियां, तीन दिन का प्रवास

मेरठ के शताब्दी नगर स्थित माधव कुंज परिसर में कार्यक्रम को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। विशाल पंडाल सजाया गया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यहीं पर दो दिनों तक संवाद कार्यक्रम आयोजित होगा और मोहन भागवत का रात्रि विश्राम भी इसी परिसर में होगा।

संघ सूत्रों के अनुसार, यह संवाद कार्यक्रम संगठन के सामाजिक विस्तार और विभिन्न क्षेत्रों के प्रभावशाली व्यक्तियों से जुड़ाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मेरठ को कार्यक्रम के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यह शहर खेल प्रतिभाओं और खेल उत्पादों के लिए देश-विदेश में पहचान रखता है। क्रिकेट बैट, हॉकी स्टिक और अन्य खेल सामग्री के निर्माण में मेरठ का योगदान लंबे समय से रहा है।

खिलाड़ियों से संवाद: सामाजिक अनुभवों पर चर्चा

इस संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ियों को आमंत्रित किया गया है। इनमें पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना, तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार, अर्जुन अवार्ड से सम्मानित पहलवान अलका तोमर सहित कई अन्य प्रमुख खिलाड़ी शामिल होंगे।

संवाद के दौरान खिलाड़ियों से उनके सामाजिक अनुभवों, खेल जीवन की चुनौतियों और समाज में खेल की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। बताया जा रहा है कि मोहन भागवत स्वयं खिलाड़ियों के प्रश्नों का उत्तर देंगे और उनसे सामाजिक समरसता तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर विचार साझा करेंगे।

संघ का मानना है कि खिलाड़ी समाज के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं। ऐसे में उनके अनुभवों को व्यापक समाज तक पहुंचाना और उन्हें सामाजिक अभियानों से जोड़ना एक सकारात्मक पहल हो सकती है।

खेल विश्वविद्यालय की भूमिका और अध्यक्षता

उत्तर प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार तेजी से प्रयास कर रही है। मेरठ के सलावा में प्रदेश का पहला राज्य खेल विश्वविद्यालय बन रहा है। इस विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति रिटायर्ड मेजर जनरल दीप अहलावत हैं।

खिलाड़ियों के साथ आयोजित सत्र की अध्यक्षता दीप अहलावत करेंगे। विश्वविद्यालय में इस वर्ष से पढ़ाई और प्रशिक्षण शुरू करने की तैयारी है। ऐसे में संघ प्रमुख की उपस्थिति को खेल शिक्षा और सामाजिक नेतृत्व के समन्वय के रूप में भी देखा जा रहा है।

एक दिन पहले CM योगी से मुलाकात

मेरठ पहुंचने से एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में मोहन भागवत से मुलाकात की। मुख्यमंत्री स्वयं निरालानगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर पहुंचे और सरस्वती कुंज में करीब 40 मिनट तक दोनों के बीच बातचीत हुई।

मोहन भागवत इन दिनों उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं। गोरखपुर के बाद वे लखनऊ पहुंचे और वहां दो दिनों तक संगठन विस्तार तथा सामाजिक समरसता पर विशेष फोकस किया।

लखनऊ में दिए अहम बयान

लखनऊ प्रवास के दौरान मोहन भागवत ने लखनऊ यूनिवर्सिटी और इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रमों को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले मुस्लिम भी इसी भूमि के हैं और उन्हें किसी बाहरी दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने सामाजिक समरसता और पारस्परिक सम्मान पर बल दिया।

साथ ही उन्होंने ‘घर वापसी’ पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो लोग हिंदू धर्म में लौटना चाहते हैं, उनके प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर, कुएं और श्मशान जैसे सार्वजनिक स्थान सभी हिंदुओं के लिए खुले होने चाहिए और उनमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

जनसंख्या दर पर बयान

मोहन भागवत ने हिंदू समाज की घटती जनसंख्या दर पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जनसंख्या दर 2.1 है, जबकि समाज के दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए यह कम से कम 3 होनी चाहिए। उन्होंने नवविवाहित दंपतियों से कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की अपील की।

उनका तर्क था कि जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह समाज भविष्य में कमजोर पड़ सकता है। हालांकि, उनके इस बयान पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

RSS और भाजपा संबंधों पर स्पष्टता

लखनऊ में ही आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में मोहन भागवत ने यह भी कहा कि RSS भाजपा का ‘रिमोट कंट्रोल’ नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ के स्वयंसेवक भाजपा में जाते हैं और आगे बढ़ते हैं, लेकिन यह कहना गलत है कि संघ भाजपा को संचालित करता है।

उन्होंने कहा कि जो लोग भाजपा का विरोध करते हैं, वे अक्सर संघ का भी विरोध करते हैं।

अमेरिकी टैरिफ पर टिप्पणी

अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बोलते हुए मोहन भागवत ने अमेरिकी टैरिफ नीति पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह अमेरिका का पुराना तरीका है कि वह आर्थिक और सामरिक ताकत के आधार पर दबाव बनाने की कोशिश करता है।

उनका कहना था कि भारत इतना मजबूत है कि वह ऐसे दबावों के आगे झुकेगा नहीं और देश की जनता भी आत्मनिर्भरता के लिए तैयार है।

राजनीतिक और सामाजिक महत्व

मोहन भागवत का यह मेरठ दौरा कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां यह संगठन के सामाजिक विस्तार का संकेत देता है, वहीं खेल जगत के साथ संवाद की पहल एक नई रणनीति के रूप में देखी जा रही है।

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और ऐसे समय में संघ प्रमुख के लगातार दौरे और मुख्यमंत्री के साथ बैठकें राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

राज्यसभा चुनाव 2026: बिहार की 5 समेत 37 सीटों पर महासंग्राम, 16 मार्च को मतदान—सत्ता और विपक्ष के लिए निर्णायक परीक्षा

Rajya Sabha Elections 2026: देश की संसदीय राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Election Commission of India ने राज्यसभा की 37 रिक्त हो रही सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस सूची में बिहार की 5 अहम सीटें शामिल हैं, जिन पर सियासी दलों की निगाहें टिकी हुई हैं। इन सीटों पर होने वाला चुनाव सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संसद के ऊपरी सदन में आने वाले वर्षों के राजनीतिक समीकरण तय करने वाला निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

अप्रैल 2026 में कई वरिष्ठ सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में इन सीटों पर नए प्रतिनिधियों का चयन न केवल राज्यों की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी असर डालेगा। खासकर बिहार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह चुनाव गठबंधन राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

चुनाव कार्यक्रम: 26 फरवरी से 20 मार्च तक पूरी प्रक्रिया

चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 26 फरवरी 2026 से शुरू होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च तय की गई है। 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 मार्च तक प्रत्याशी अपना नाम वापस ले सकेंगे।

16 मार्च 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। मतदान समाप्त होते ही शाम 5 बजे से मतगणना शुरू कर दी जाएगी। पूरी चुनावी प्रक्रिया 20 मार्च तक संपन्न कर ली जाएगी और इसके बाद नवनिर्वाचित सदस्यों की सूची आधिकारिक रूप से जारी की जाएगी।

यह समयसीमा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अप्रैल की शुरुआत में कई सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि नई सूची समय रहते जारी हो जाए ताकि संसद के ऊपरी सदन की कार्यवाही प्रभावित न हो।

किन-किन राज्यों में होगा मतदान?

इस बार कुल 37 सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें प्रमुख राज्यों की सीटों का विवरण इस प्रकार है:

  • महाराष्ट्र – 7 सीटें
  • तमिलनाडु – 6 सीटें
  • पश्चिम बंगाल – 5 सीटें
  • बिहार – 5 सीटें
  • ओडिशा – 3 सीटें
  • असम – 3 सीटें
  • छत्तीसगढ़ – 2 सीटें
  • हरियाणा – 1 सीट
  • हिमाचल प्रदेश – 1 सीट
  • तेलंगाना – 4 सीटें

महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में राजनीतिक परिस्थितियों में हाल के वर्षों में हुए बदलाव के कारण यह चुनाव और भी रोचक हो गया है।

बिहार की 5 सीटें क्यों हैं सबसे अहम?

बिहार की जिन 5 सीटों पर चुनाव होने हैं, उन पर वर्तमान में वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधित्व है। इन नेताओं का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। इनमें प्रमुख नाम हैं:

  • Harivansh Narayan Singh
  • Upendra Kushwaha
  • Ram Nath Thakur
  • Prem Chand Gupta
  • Amarendra Dhari Singh

इनमें हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उपसभापति भी हैं। उनका दोबारा चयन होता है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी होंगी। वहीं उपेंद्र कुशवाहा और प्रेम चंद गुप्ता जैसे नेताओं की भूमिका बिहार की क्षेत्रीय राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण रही है।

इन सीटों पर चुनाव का असर सीधे-सीधे बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी महागठबंधन के बीच शक्ति संतुलन पर पड़ेगा।

महाराष्ट्र में भी दिग्गजों की परीक्षा

महाराष्ट्र की 7 सीटों पर भी चुनाव होने जा रहे हैं। यहां से राष्ट्रीय स्तर के दो बड़े नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है:

  • Sharad Pawar
  • Ramdas Athawale

शरद पवार भारतीय राजनीति के वरिष्ठतम नेताओं में गिने जाते हैं। यदि वे पुनः मैदान में उतरते हैं तो यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है। वहीं रामदास अठावले केंद्र सरकार में मंत्री हैं, ऐसे में उनकी सीट भी एनडीए के लिए अहम है।

राज्यसभा चुनाव कैसे होते हैं?

राज्यसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा नहीं चुने जाते। इनका चुनाव संबंधित राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक करते हैं। यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत सिंगल ट्रांसफरेबल वोट (STV) प्रणाली से होता है।

मतलब साफ है—जिस दल या गठबंधन के पास विधानसभा में जितनी अधिक संख्या होगी, उसके उम्मीदवार की जीत की संभावना उतनी ही अधिक होगी। ऐसे में जहां विधानसभा में संख्या बल का अंतर कम है, वहां जोड़-तोड़, रणनीति और क्रॉस वोटिंग की संभावना बढ़ जाती है।

बिहार में संभावित सियासी गणित

बिहार की राजनीति लंबे समय से गठबंधन आधारित रही है। यहां एनडीए और महागठबंधन के बीच सत्ता का संघर्ष चलता रहा है। राज्यसभा चुनाव में प्रत्येक सीट के लिए आवश्यक वोटों का गणित बेहद अहम होता है।

यदि किसी दल के पास पूर्ण बहुमत नहीं है तो उसे सहयोगी दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना पड़ता है। ऐसे में यह चुनाव न केवल राजनीतिक ताकत का परीक्षण है, बल्कि गठबंधन की मजबूती का भी पैमाना बनेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन 5 सीटों में से कम से कम एक या दो सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।

संसद में क्या बदल सकता है समीकरण?

राज्यसभा में बहुमत का गणित अक्सर लोकसभा से अलग होता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि केंद्र सरकार के पास लोकसभा में स्पष्ट बहुमत होता है, लेकिन राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण उसे महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में क्षेत्रीय दलों का समर्थन लेना पड़ता है।

इन 37 सीटों के चुनाव के बाद राज्यसभा की संरचना में बदलाव संभव है। यदि किसी एक गठबंधन को अपेक्षा से अधिक सीटें मिलती हैं तो वह ऊपरी सदन में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

क्या पुराने चेहरों को मिलेगा दोबारा मौका?

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या राजनीतिक दल अपने मौजूदा सांसदों को दोबारा अवसर देंगे या नए चेहरों को आगे लाएंगे?

बिहार में सामाजिक और जातीय समीकरणों का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में दल यह देखेंगे कि किस समुदाय को प्रतिनिधित्व देना उनके लिए लाभकारी रहेगा। इसी तरह महाराष्ट्र और तमिलनाडु में भी क्षेत्रीय संतुलन और गठबंधन समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत की भूमिका

पश्चिम बंगाल की 5 सीटों और तमिलनाडु की 6 सीटों पर भी सबकी नजर है। दक्षिण भारत के राज्यों में क्षेत्रीय दलों की मजबूत उपस्थिति के कारण राष्ट्रीय दलों को रणनीतिक गठजोड़ करना पड़ता है।

इन राज्यों के परिणाम संसद में विपक्ष की ताकत को भी प्रभावित कर सकते हैं।

क्यों कहा जा रहा है इसे ‘मिनी जनादेश’?

राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष जनमत से न होता हो, लेकिन यह राज्यों की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का प्रतिबिंब जरूर होता है। जिन राज्यों में हाल में सरकार बदली है या गठबंधन टूटे हैं, वहां यह चुनाव सत्ता की स्थिरता का संकेत देगा।

विशेषज्ञ इसे ‘मिनी जनादेश’ इसलिए भी कह रहे हैं क्योंकि इससे यह संकेत मिलेगा कि आने वाले लोकसभा या विधानसभा चुनावों में राजनीतिक रुझान किस दिशा में जा सकते हैं।

गाजियाबाद डंपिंग ग्राउंड विवाद: मीरपुर में किसानों पर लाठीचार्ज का आरोप, 25 से अधिक घायल; पुलिस बोली– हल्का बल प्रयोग, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

गाजियाबाद के ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र के मीरपुर गांव में डंपिंग ग्राउंड को लेकर चल रहा विवाद रविवार को हिंसक झड़प में बदल गया। करीब दो महीने से नगर निगम द्वारा यमुना खादर क्षेत्र के किनारे बनाए गए कचरा निस्तारण स्थल के विरोध में धरना दे रहे किसानों और पुलिस के बीच उस समय टकराव हो गया, जब प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की। किसानों का आरोप है कि पुलिस ने जबरन धरना स्थल खाली कराया, लाठीचार्ज किया और महिलाओं तक को नहीं बख्शा। वहीं पुलिस का कहना है कि लाठीचार्ज नहीं किया गया, बल्कि केवल “हल्का बल प्रयोग” कर स्थिति को नियंत्रित किया गया।

यह पूरा मामला मीरपुर, पचायरा और बदरपुर गांवों के किसानों से जुड़ा है, जो पिछले दो महीनों से डंपिंग ग्राउंड को हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस कचरा स्थल से पूरे इलाके में दुर्गंध फैल रही है, लोग बीमार हो रहे हैं और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों का तर्क है कि इस जमीन पर स्कूल या अस्पताल बनाया जाना चाहिए, न कि कूड़ाघर।

दो महीने से जारी है विरोध

मीरपुर गांव के बाहरी इलाके में नगर निगम द्वारा यमुना नदी के खादर क्षेत्र के पास डंपिंग ग्राउंड विकसित किया गया है। यहां शहर का ठोस कचरा लाकर डाला जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब से यहां कूड़ा डाला जाने लगा है, तब से आसपास के खेतों, घरों और जल स्रोतों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

गांववालों के अनुसार, दुर्गंध के कारण सांस लेने में परेशानी होती है, बच्चों और बुजुर्गों में त्वचा रोग और श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ी हैं। किसानों का दावा है कि कचरे से निकलने वाला दूषित पानी जमीन में रिसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर वे पिछले दो महीने से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।

रविवार को अचानक बढ़ा तनाव

रविवार दोपहर करीब 2 बजे स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारी किसान बड़ी संख्या में डंपिंग ग्राउंड स्थल पर पहुंच गए। इसी दौरान यह सूचना फैली कि पुलिस गिरफ्तारी के लिए ट्रक और वैन लेकर पहुंच रही है। देखते ही देखते वहां भीड़ बढ़ने लगी और नारेबाजी शुरू हो गई।

किसानों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें समझाने के बजाय बलपूर्वक हटाने की कोशिश की। जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वाहनों में बैठाकर ले जाना शुरू किया, तो भीड़ उग्र हो गई। कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।

महिलाओं का आरोप– खेतों में दौड़ाकर पीटा

घटना के दौरान मौजूद महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब वे विरोध कर रही थीं, तब पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन हटाने की कोशिश की। विरोध करने पर उन्हें खेतों की ओर दौड़ा लिया गया। कई महिलाएं भागते-भागते गिर गईं, जिसके बाद उन्हें घसीटकर पीटा गया।

एक बुजुर्ग महिला बेहोश हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि महिलाएं हाथ जोड़कर रहम की गुहार लगाती रहीं, लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी। इस दौरान कई महिलाएं घायल हो गईं। कुछ को सिर और कमर में गंभीर चोटें आई हैं।

25 से अधिक घायल होने का दावा

किसानों का दावा है कि लाठीचार्ज में करीब 25 लोग घायल हुए हैं। एक महिला के सिर में गंभीर चोट आई है, जबकि एक ग्रामीण का कूल्हा टूट गया। 70 वर्षीय किसान धन सिंह ने कहा कि उन्हें कई जगह चोट लगी है और हाथ की एक उंगली टूट गई है।

मीरपुर निवासी विनीत शर्मा का कहना है कि किसानों को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि पुलिस का कोई भी कर्मचारी घायल नहीं हुआ। हालांकि पुलिस का दावा इससे अलग है।

एक अन्य किसान भूरा ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने गाली-गलौज की और मारपीट की। उन्होंने अपने शरीर पर चोट के निशान भी दिखाए। सोनू नामक किसान ने कहा कि उन्होंने तो हाथ बांध रखे थे, फिर भी पुलिस ने बेरहमी से लाठियां बरसाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी मां तक को नहीं छोड़ा गया।

पुलिस का पक्ष– लाठीचार्ज नहीं, हल्का बल प्रयोग

घटना को लेकर पुलिस प्रशासन का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम ने कहा कि किसानों को अधिकारियों को ज्ञापन देना था, लेकिन वे डंपिंग ग्राउंड का ताला तोड़कर अंदर घुस गए। उन्हें हटाने के दौरान दो पुलिसकर्मी घायल हुए, जिन्हें अस्पताल भेजा गया है।

पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव किया गया, जिसकी वीडियो फुटेज भी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, लाठीचार्ज नहीं किया गया, बल्कि हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया गया।

घटना के दौरान डीसीपी देहात सुरेंद्रनाथ तिवारी के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात था। चार थानों से 100 से अधिक पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे। स्थिति बिगड़ने पर नगर निगम के अधिकारी और मजिस्ट्रेट मौके से चले गए।

धरना स्थल बदला, आंदोलन जारी

पुलिस द्वारा डंपिंग ग्राउंड स्थल खाली कराने के बाद ग्रामीण करीब 100 मीटर दूर स्थित मंदिर परिसर में धरने पर बैठ गए। सोमवार को भी किसान मीरपुर गांव के बाहर धरना दे रहे थे। हालांकि प्रदर्शनकारियों की संख्या घटकर 10-15 रह गई है, क्योंकि कई लोग घर लौट चुके हैं।

किसानों का कहना है कि जब तक डंपिंग ग्राउंड हटाया नहीं जाएगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा। वे प्रशासन से लिखित आश्वासन चाहते हैं।

विधायक का बयान– सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

लोनी विधानसभा से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने कहा कि वे इस समय लखनऊ में हैं, जहां विधानसभा सत्र चल रहा है। उन्होंने कहा कि डंपिंग ग्राउंड सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनाया गया है, इसलिए वे इस पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था किसी भी हाल में नहीं बिगड़नी चाहिए और पुलिस व किसानों दोनों से बातचीत की जाएगी।

पर्यावरण बनाम विकास की बहस

यह विवाद केवल एक स्थानीय धरना नहीं, बल्कि पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन की बहस को भी सामने लाता है। शहरों के बढ़ते कचरे के निस्तारण के लिए डंपिंग ग्राउंड आवश्यक माने जाते हैं, लेकिन उनके स्थान चयन और प्रबंधन को लेकर अक्सर विवाद खड़े होते हैं।

मीरपुर के किसान सवाल उठा रहे हैं कि क्या आबादी और कृषि भूमि के पास कचरा स्थल बनाना उचित है? उनका कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह स्थल बनाया गया है, तो भी स्थानीय लोगों की सहमति और स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

प्रशासन के सामने चुनौती

प्रशासन के लिए यह मामला कानून-व्यवस्था और जनभावनाओं के बीच संतुलन साधने की चुनौती बन गया है। एक ओर नगर निगम के लिए कचरा निस्तारण जरूरी है, तो दूसरी ओर ग्रामीणों की सेहत और आजीविका का सवाल भी महत्वपूर्ण है।

यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित नहीं हुआ, तो यह विवाद आगे और गहरा सकता है। फिलहाल इलाके में पुलिस बल तैनात है और स्थिति को नियंत्रण में बताया जा रहा है।

UP Codeine Cough Syrup Case: वाराणसी से पूर्व सपा युवा नेता गिरफ्तार, 2000 करोड़ के अवैध नेटवर्क की जांच तेज

उत्तर प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी के मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बड़ी कार्रवाई की है। लखनऊ यूनिट ने वाराणसी के हरहुआ रिंग रोड के पास से अमित यादव को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उसके खिलाफ लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में पहले से मुकदमा दर्ज है।

गिरफ्तार अमित यादव वाराणसी के मैदागिन क्षेत्र का निवासी है। पूछताछ में उसने बताया कि वह हरिश्चंद्र पोस्टग्रेजुएट कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुका है और समाजवादी पार्टी की युवा सभा में राज्य सचिव की जिम्मेदारी भी निभा चुका है।

कैसे जुड़ा नेटवर्क से नाम?

एसटीएफ के अनुसार, कॉलेज के दिनों में उसकी मुलाकात शुभम जायसवाल से हुई थी। जांच में सामने आया है कि शुभम के पिता भोला प्रसाद की कंपनी ‘शैली ट्रेडर्स’ पर एबॉट कंपनी की ‘फेंसेडिल’ कफ सिरप की अवैध सप्लाई और तस्करी का आरोप है। कोडीनयुक्त कफ सिरप का इस्तेमाल नशे के रूप में किया जाता है, जिसकी मांग पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक बताई जा रही है।

पुलिस का दावा है कि अधिक मुनाफे के लालच में अमित यादव ने अपनी कंपनी ‘जीएल सर्जिकल’ के नाम से एक लाख से ज्यादा बोतलें खरीदीं। बाद में फर्जी कागजों के जरिए इन्हें दूसरी कंपनी के नाम पर ऊंची कीमत पर बेचा गया।

गंभीर आपराधिक मामले पहले से दर्ज

अधिकारियों के मुताबिक अमित यादव पर दंगा, हत्या के प्रयास और धोखाधड़ी जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस पूरे प्रदेश में कोडीन कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने विधानसभा में विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि सरकार के पास नकली दवाओं या कोडीन सिरप से मौत की कोई ठोस जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि मामले में शामिल कुछ आरोपियों के संबंध समाजवादी पार्टी से जुड़े पाए गए हैं।

सीएम योगी ने दावा किया था कि आरोपी अमित यादव की तस्वीर Akhilesh Yadav के साथ देखी गई है और कथित मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल भी सपा से जुड़ा रहा है।

वहीं, अखिलेश यादव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए विपक्ष पर आरोप मढ़ रही है और निष्पक्ष जांच नहीं हो रही।

क्या है पूरा मामला?

मध्य प्रदेश में कथित तौर पर कफ सिरप के सेवन से 20 बच्चों की मौत के बाद यह मामला सुर्खियों में आया। जांच में खुलासा हुआ कि करीब 57 करोड़ रुपये की 37 लाख से ज्यादा कोडीनयुक्त कफ सिरप की बोतलें फर्जी दस्तावेजों और लाइसेंस के जरिए बेची गईं। यूपी पुलिस के अनुसार यह पूरा सिंडिकेट करीब 2,000 करोड़ रुपये के अवैध कारोबार से जुड़ा हो सकता है।

18 अक्टूबर को सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज में आबकारी विभाग ने दो संदिग्ध कंटेनरों से 11,967 बोतलें कोडीन कफ सिरप बरामद की थीं। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया।

जांच एजेंसियों की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया गया है, जबकि प्रवर्तन निदेशालय मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रहा है। कई जिलों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 77 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

सरकार का कहना है कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। वहीं विपक्ष प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे संभव हैं।

उत्तर प्रदेश में देश का पहला राष्ट्रीय गो-संस्कृति संग्रहालय स्थापित किया जाएगा; परंपरा, विज्ञान और पर्यटन का अनूठा संगम

मथुरा, उत्तर प्रदेश: ब्रजभूमि की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश में देश का पहला राष्ट्रीय गो-संस्कृति संग्रहालय स्थापित किया जाएगा। यह महत्वाकांक्षी परियोजना मथुरा स्थित Pandit Deen Dayal Upadhyay Pashuchikitsa Vigyan Vishwavidyalaya के परिसर में विकसित की जाएगी। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की पहल पर तैयार हो रही इस योजना को राज्य सरकार का विशेष समर्थन प्राप्त है।

अधिकारियों के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर के भीतर संग्रहालय निर्माण के लिए भूमि चिन्हित कर ली गई है और प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। यह संग्रहालय न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों और आधुनिक तकनीक के माध्यम से गाय और उससे जुड़े उत्पादों की उपयोगिता को भी व्यापक रूप से प्रस्तुत करेगा।

परंपरा और विज्ञान का सेतु

आगरा मंडल के आयुक्त नगेंद्र प्रताप ने जानकारी देते हुए कहा कि यह संग्रहालय आमजन को भारतीय परंपरा में गाय के धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराएगा। साथ ही, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गाय के दूध, गोबर, गोमूत्र तथा अन्य उत्पादों की उपयोगिता को सरल और प्रमाणिक तरीके से समझाया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परियोजना अंधविश्वास नहीं, बल्कि परंपरा और विज्ञान के संतुलित समन्वय पर आधारित होगी। उद्देश्य यह है कि गो-संरक्षण, गो-पालन और गो-आधारित जीवनशैली को लेकर लोगों में व्यावहारिक और तार्किक समझ विकसित हो। भविष्य की पीढ़ियों को भारतीय कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जैविक जीवनशैली से जोड़ना भी इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।

निरीक्षण और प्रशासनिक सक्रियता

शनिवार को प्रस्तावित स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया गया। इस दौरान उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र, मथुरा के जिलाधिकारी सीपी सिंह, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लक्ष्मी एन, परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सूरज पटेल, पर्यावरण सलाहकार मुकेश शर्मा तथा विश्वविद्यालय के डॉ. अमित शुक्ला सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

निरीक्षण के दौरान संग्रहालय की संरचना, थीम, प्रदर्शनी की रूपरेखा और पर्यटक सुविधाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने इस परियोजना को राष्ट्रीय स्तर का मानक देने पर बल दिया, ताकि यह केवल एक संग्रहालय न होकर ज्ञान, शोध और पर्यटन का केंद्र बन सके।

क्या होगा इस संग्रहालय में खास?

1. सौ से अधिक गोवंश नस्लों के मॉडल

संग्रहालय में लगभग 100 प्रकार के गोवंश के प्रतिरूप (मॉडल) प्रदर्शित किए जाएंगे। इनमें देश की प्रमुख गायों की नस्लें—जैसे गिर, साहीवाल, थारपारकर, हरियाणा आदि—के साथ-साथ कुछ दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्रजातियों को भी शामिल किया जाएगा। इससे आगंतुक एक ही स्थान पर भारत की समृद्ध गो-परंपरा का समग्र परिचय प्राप्त कर सकेंगे।

2. दुग्ध उत्पादों की आधुनिक प्रदर्शनी

यहां दूध और उससे बनने वाले उत्पाद—दही, पनीर, घी, मक्खन आदि—की विशेष प्रदर्शनी होगी। इंटरैक्टिव डिजिटल डिस्प्ले के माध्यम से इनके पोषण मूल्य, स्वास्थ्य लाभ और आयुर्वेदिक महत्व को सरल भाषा में समझाया जाएगा। बच्चों और विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक मॉड्यूल तैयार किए जाएंगे।

3. गो-आधारित उत्पादों का लाइव अनुभव

संग्रहालय परिसर में एक दुग्ध उत्पाद बूथ स्थापित किया जाएगा, जहां शुद्ध दूध और उससे बने उत्पाद उपलब्ध रहेंगे। इसके अतिरिक्त जैविक खाद, पंचगव्य आधारित उत्पाद और ग्रामीण उद्योग से जुड़े सामानों को भी प्रदर्शित किया जा सकता है। इससे स्थानीय स्व-रोजगार को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

4. आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयाम

भारतीय सनातन परंपरा में गाय को ‘गौमाता’ के रूप में सम्मानित किया गया है। संग्रहालय में वेदों, पुराणों और लोक परंपराओं में वर्णित गाय के महत्व को ऑडियो-विजुअल माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और गो-संस्कृति के ऐतिहासिक संबंध को भी विशेष रूप से दर्शाया जाएगा।

ब्रज क्षेत्र की पहचान को मिलेगा नया आयाम

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राष्ट्रीय स्तर पर विकसित किए जा रहे इस संग्रहालय से ब्रज क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी। मथुरा-वृंदावन पहले से ही देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों का केंद्र है। ऐसे में गो-संस्कृति संग्रहालय धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ शैक्षणिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दे सकती है। होटल, परिवहन, गाइड सेवा और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

शिक्षा और शोध का केंद्र

चूंकि यह संग्रहालय पशुचिकित्सा विश्वविद्यालय परिसर में बनाया जाएगा, इसलिए शोध और अकादमिक गतिविधियों को भी इससे जोड़ा जा सकता है। पशुपालन, डेयरी विज्ञान और जैविक कृषि पर अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष अध्ययन का अवसर मिलेगा। भविष्य में यहां गो-संरक्षण पर सेमिनार, कार्यशाला और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं।

अलीगढ़ में दामाद से शादी करने वाली महिला थाने पहुंची, बोली- अब अपने तरीके से जीना चाहती हूं

अलीगढ़ में चर्चित मामले में नया मोड़ सामने आया है। करीब 10 महीने पहले बेटी की शादी से पहले दामाद के साथ चली गई महिला अब फिर से थाने पहुंची। दामाद ने आरोप लगाया कि महिला उसे छोड़कर अपने जीजा के साथ चली गई है। हालांकि महिला ने इन आरोपों को गलत बताया है।

दामाद ने थाने में दी शिकायत

दादों थाने में दी गई शिकायत में राहुल (दामाद) ने कहा कि उसकी पत्नी अनीता का अपने जीजा से संपर्क था और दोनों के बीच फोन पर बातचीत होती थी। उसने आरोप लगाया कि 6 फरवरी को अनीता उसे छोड़कर चली गई और साथ में नकदी व जेवर भी ले गई। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद मामले को दूसरे राज्य से जुड़ा बताते हुए स्थानीय स्तर पर कार्रवाई से इनकार किया।

महिला ने आरोपों को बताया गलत

मामला मीडिया में आने के बाद अनीता स्वयं थाने पहुंची। उसने कहा कि दामाद के साथ रहने का उसका फैसला गलत था और अब वह स्वतंत्र रूप से जीवन जीना चाहती है। उसने राहुल पर मारपीट और प्रताड़ना के आरोप लगाए। महिला का कहना है कि वह अब मेहनत-मजदूरी कर अपने बच्चों के पास रहना चाहती है।

पूरा मामला कैसे शुरू हुआ

बताया जाता है कि अप्रैल 2025 में बेटी की शादी तय होने के कुछ दिन पहले महिला घर से गायब हो गई थी। उसी समय होने वाला दामाद भी अपने घर से निकल गया। बाद में दोनों ने थाने में पेश होकर साथ रहने की इच्छा जताई थी। काउंसिलिंग के बाद महिला ने अपने पहले पति के साथ जाने से इनकार कर दिया था और दामाद के साथ रहने लगी थी।

पारिवारिक स्थिति

महिला के पहले पति ने बाद में दूसरी शादी कर ली। बेटी की शादी फिलहाल तय नहीं हो सकी है। परिवार ने महिला से दूरी बना ली है।

नोट: मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है। पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि के बाद ही तथ्यों की स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।

सपा विधायक से खन्ना बोले- मंत्रीजी से कुश्ती लड़ लो: महाना ने कहा- सदन में नहीं होगी; रागिनी-नंदी में तीखी बहस

यूपी विधानमंडल में बजट सत्र का आज चौथा दिन है। स्पोर्ट्स पर चर्चा के दौरान सपा विधायक कमाल अख्तर ने कहा कि जैसे एक अच्छा डॉक्टर अच्छा स्वास्थ्य मंत्री हो सकता है, वैसे ही एक खिलाड़ी अच्छा स्पोर्ट्स मंत्री हो सकता है। मंत्री गिरीश यादव ने खड़े होकर कहा कि उन्होंने हर खेल में हिस्सा लिया है।

वित्त मंत्री ने खेल मंत्री का बचाव किया

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा, “मंत्रीजी रेसलिंग करते हैं, किसी दिन यहां कुश्ती करवा देंगे।” इस पर सतीश महाना ने चुटकी लेते हुए कहा कि कुश्ती विधानसभा में नहीं होगी, बाहर ही होगी। वित्त मंत्री ने कहा, “बाहर ही सही, लेकिन कुश्ती करा देंगे।”

विधान परिषद में भी हंगामा

विधानपरिषद में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा पर भड़क गए। उन्होंने कहा कि इनकी गलती नहीं है, इनके नेता का यही कल्चर है। सिर्फ बिल्डिंग से अस्पताल नहीं चलता। उन्होंने कुकर्म का उदाहरण देते हुए बताया कि अगर अस्पताल बनाते तो ठेका चाचा और भतीजे को दे देते।

विधानसभा में रागिनी और मंत्री नंदी में बहस

प्रश्नकाल के दौरान मंत्री नंद गोपाल नंदी रागिनी सोनकर के सवाल का जवाब देते समय उलझन में पड़ गए। स्पीकर सतीश महाना ने टोका और कहा कि प्रश्न का जवाब दें। मंत्री ने कहा कि सवाल में आपने कुछ किया, और आगे बढ़ते हुए इन्वेस्टर समिट की जानकारी देने लगे। इसके दौरान हंगामा हुआ।

सपा विधायक अनिल प्रधान की शायरी

चित्रकूट के सपा विधायक अनिल प्रधान ने किसान पर शायरी पढ़ी:

कर्ज के बोझ और बेरुखी को सहता है।
अन्नदाता होकर भी भूखा सोता है।
मेहनत की लकीरें माथे पर गहरी हैं,
लेकिन उसकी मेहनत से दुनिया अनसुनी है।

इस पर स्पीकर सतीश महाना ने कहा कि आजकल सबको शायरी का शौक चढ़ गया है।

मंत्री दिनेश प्रताप सिंह का गुस्सा

मंत्री दिनेश प्रताप सिंह सपा विधायक आरके वर्मा के सवालों का जवाब देते हुए गुस्से में आ गए। उन्होंने कहा कि नो-नो करने से कुछ नहीं होगा, उनके पास सभी दस्तावेज हैं और छाती ठोंककर कहा कि सरकार को जनता की चिंता है।

अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ शिकायत करने वाले को धमकी:फोन पर कहा- गाड़ी में आग लगवा देने, बालकों की हत्या कराएंगे; आशुतोष ब्रह्मचारी की पुलिस से शिकायत

अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ शिकायत करने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी को मिली धमकी

प्रयागराज में आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगाया और 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद उन्हें धमकियां मिलीं, जिसमें उनके वाहन में आग लगाने और नाबालिग बालकों को नुकसान पहुंचाने की चेतावनी दी गई।

धमकियों का विवरण

आशुतोष ब्रह्मचारी ने पुलिस को बताया कि 11 फरवरी 2026 की रात उन्हें फोन और वॉट्सऐप कॉल के माध्यम से धमकाया गया। वीडियो कॉल में हथियार दिखाकर डराया गया और अश्लील व आपत्तिजनक शब्द बोले गए। महाराज ने पुलिस से सुरक्षा सुनिश्चित करने और मामले की जांच की मांग की है।

शिकायत के आरोप

महाराज का आरोप है कि अविमुक्तेश्वरानंद बच्चों को गुरुकुल में रखकर उनसे अवैध कार्य कराते थे और यौन शोषण की संभावना थी। उन्होंने कोर्ट में दो बच्चों को भी पेश किया। अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने सभी साक्ष्य कोर्ट में पेश किए हैं और न्यायपालिका पर भरोसा रखते हैं।

माघ मेले का विवाद

18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर पालकी को रोकने को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। इस घटना में पुलिस ने कई समर्थकों को हिरासत में लिया था।

आगे की कानूनी कार्रवाई

आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा कि प्रशासन की निष्क्रियता के कारण उन्हें धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कोर्ट और पुलिस से सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। आगामी सुनवाई 20 फरवरी 2026 को तय है, जब दोनों पक्षों के वकील कोर्ट में पेश होंगे।