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स्कॉर्पियो चोरी के बाद नीलामी में मिली शराब से कन्हैया लाल को गिरफ्तार किया गया, आर्थिक अपराध इकाई ने कार्रवाई तेज़ की।

चोरी की स्कॉर्पियो को शराब के साथ बरामद कर, उसे नीलाम करने के बाद आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) ने नवादा जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) के लिपिक कन्हैया लाल को गिरफ्तार किया, यह आज नगर थाना पुलिस के सहयोग से हुई कार्रवाई में स्पष्ट हुआ। इओयू ने इस मामले को 42/25 प्राथमिकी संख्या के तहत दर्ज कर, जारी वारंट के आधार पर कार्रवाई को तेज़ किया, जिससे भ्रष्टाचार के आरोपों पर गहरी जांच की दिशा में कदम बढ़ा।

चोरी की स्कॉर्पियो, जो कि एक महँगा स्पोर्ट्स कार मॉडल है, को पिछले साल के अंत में नवादा के एक उपनगर में चोरी कर ले लिया गया था। कार को बरामद करने के दौरान पुलिस ने पाया कि वाहन के अंदर शराब की बोतलें रखी थीं, जिससे यह संकेत मिला कि कार को गैरकानूनी रूप से शराब की डिलीवरी या कनेक्शन के लिये उपयोग किया जा रहा था। इस तथ्य ने मामला जटिल बना दिया और प्रारम्भिक जांच में कई प्रश्न उठे।

पिछले दो वर्षों में नवादा में कई हाई-प्रोफ़ाइल वाहन चोरी के मामले सामने आए हैं, जिनमें अक्सर अवैध व्यापार या मनी लॉन्डरिंग के संकेत मिले हैं। राज्य सरकार ने इन घटनाओं को रोकने के लिये विशेष कार्यदल बनाकर सुरक्षा उपायों को कड़ा किया था, लेकिन कई बार स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही या सहकारिता की कमी ने जांच को बाधित किया। इस संदर्भ में स्कॉर्पियो चोरी का मामला विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कर रहा है।

वारंट के जारी होने के बाद नगर थाना पुलिस ने नवादा डीटीओ के मुख्यालय में एक विशेष टीम गठित की। इस टीम ने लिपिक कन्हैया लाल के डेस्क, कंप्यूटर और फाइलें तलाशी लीं, जहाँ उन्हें कई अनियमित लेन‑देन की दस्तावेज़ीकरण मिली। पुलिस ने बताया कि कन्हैया लाल ने वाहन की बरामदी से संबंधित कागजात में हेराफेरी की थी और नीलामी के दौरान राजस्व को कम दिखाने के लिये आंकड़े बदल दिए थे।

जांच के दौरान प्राप्त साक्ष्य में दिखाया गया कि लिपिक ने नीलामी प्रक्रिया में कई पक्षों से रिश्वत ली थी। नीलामी में भाग लेने वाले डीलरों को अनुचित लाभ प्रदान करने के लिये वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गुप्त धनराशि का आदान‑प्रदान करता रहा। इसके अलावा, कार के बरामद होने के बाद नीलामी में बोली लगाने वाले व्यक्तियों को झूठी जानकारी प्रदान करके नीलामी मूल्य को कम रखने का प्रयास किया गया।

निवेशक और आम जनता ने इस विकास पर तीव्र प्रतिक्रिया दी। कई नागरिकों ने कहा कि इस प्रकार की भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता को क्षीण करती है। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में यह सवाल उठाया गया कि क्या यह मामला केवल एक व्यक्तिगत लापरवाही है या इसके पीछे बड़े पैमाने पर नेटवर्क है।

नवादा डीटीओ ने तत्कालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस घटना के बारे में उन्हें पूर्ण आश्चर्य हुआ और उन्होंने मामले की सच्चाई उजागर करने के लिये सभी सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि लिपिक कन्हैया लाल को तत्काल पदस्थापना से हटा दिया गया है और आगे की जांच के लिये एक स्वतंत्र समिति गठित की जाएगी।

नगर थाना पुलिस के अधीक्षक ने कहा कि लिपिक के अलावा अन्य संभावित सहकर्मियों और नीलामी में भाग लेने वाले दलालों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस मामले में सभी दस्तावेज़ी साक्ष्य और वित्तीय लेन‑देन का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे जुड़े सभी लोगों को क़ानूनी जाँच का सामना करना पड़ेगा।

राज्य सरकार के वित्त विभाग ने भी इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह मामला वित्तीय नियमों की कड़ाई से पालन न करने के गंभीर परिणामों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने हेतु इलेक्ट्रॉनिक लेन‑देन और नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के उपाय किए जाएंगे।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में यह घटना कई सवाल उठाती है। विपक्षी दलों ने इस मामले को सरकार की अक्षम्य नीति और भ्रष्टाचार के प्रति उदासीनता का प्रमाण माना है, जबकि ruling party ने कहा कि यह एक व्यक्तिगत अपराध है और व्यापक प्रणालीगत दोष नहीं दर्शाता। इस बीच, आर्थिक विश्लेषकों ने बताया कि ऐसे मामलों से स्थानीय निवेश

The scorpiao bust exposes how petty‑level embezzlement can masquerade as a high‑profile crime, turning a stolen supercar into a conduit for illicit cash flow. If unchecked, such “one‑off” graft erodes public trust and signals deeper collusion between bureaucrats and black‑

ब्रिक्स शिखर 2026: बिहार के सत्तू-मखाना को विदेशी अतिथियों को भेंट की जाएगी, निर्यात बढ़ेगा

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के मंच पर बिहार की देसी विशेषताओं को प्रस्तुत करने के लिए एक विशेष योजना तैयार की गई है। इस वर्ष की बैठक में भारत के विदेशियों के समूह और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को सत्तू और मिथिला के मखाने की भेंट दी जाएगी, जिससे

भारत की कृषि विविधता और सांस्कृतिक धरोहर का परिचय होगा। इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय उत्पादन को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना और स्थानीय किसानों को नई बाजार संभावनाएँ प्रदान करना है। सरकार ने इस कार्यक्रम को मीडिया किट के रूप में तैयार किया है, जिसमें राज्य‑विशिष्ट

उत्पादों की विस्तृत जानकारी शामिल है।

बिहार के सत्तू और मखाने की कहानी दशकों पुरानी है, परन्तु हाल के वर्षों में इनके उत्पादन में तकनीकी सुधार और गुणवत्ता नियंत्रण ने इसे निर्यात के योग्य बना दिया है। सत्तू, जो कि फसल के बायप्रोडक्ट से बनाया जाता है, को

पोषण‑समृद्ध स्नैक के रूप में विदेशियों में लोकप्रियता मिली है। वहीं मिथिला का मखाना, जो प्राचीन काल से आयुर्वेदिक उपयोगों में प्रसिद्ध है, को अब उच्च प्रोटीन और फाइबर स्रोत के रूप में मान्यता मिली है। इन दोनों उत्पादों को ब्रिक्स के प्रतिनिधियों तक पहुँचाने से भारत

की कृषि नीतियों की सफलता को भी साक्ष्य मिलेगा।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी के दौरान, नई दिल्ली के विदेश मंत्रालय ने एक विशेष टीम गठित की, जिसने बिहार के प्रमुख कृषि बोर्डों और स्थानीय संगठनों के साथ समन्वय किया। इस टीम ने सत्तू और मखाने की पैकेजिंग,

गुणवत्ता परीक्षण और निर्यात मानकों को सुनिश्चित करने के लिए कई चरणों में निरीक्षण किया। साथ ही, बिहार के विभिन्न जिलों से चुने गये किसानों को इस पहल में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे उन्हें सीधे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने उत्पादन को प्रदर्शित करने

का अवसर मिला। यह प्रक्रिया स्थानीय उत्पादन‑शृंखला को सुदृढ़ करने में भी सहायक सिद्ध हुई।

समारोह के उद्घाटन दिवस, नई दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में, भारत के प्रमुख अतिथि ने सत्तू और मखाने के नमूने प्रस्तुत किए। इस अवसर पर बिहार के प्रमुख किसानों और उद्यमियों को

भी मंच पर आमंत्रित किया गया, जहाँ उन्होंने अपने उत्पादों की विशेषताओं और उत्पादन प्रक्रिया के बारे में संक्षिप्त व्याख्यान दिया। उपस्थित विदेशी प्रतिनिधियों ने इन उत्पादों की गुणवत्ता और स्वाद की सराहना की, और कई देशों के आयात एजेंटों ने संभावित व्यापार सहयोग की इच्छा जताई।

इस प्रकार, एक छोटे से भारतीय गाँव से शुरू हुए इन उत्पादों ने विश्व मंच पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी।

इसी दौरान, ब्रिक्स शिखर में भाग ले रहे विदेशी मीडिया ने बिहार के सत्तू‑मखाना किट को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों

ने इस पहल को “भारत की कृषि विविधता का नया चेहरा” कहा। इस किट में सत्तू के पोषण तथ्यों, मखाने की आयुर्वेदिक लाभों और दोनों उत्पादों की उत्पादन प्रक्रियाओं की विस्तृत ब्रोशर शामिल थे। रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया कि इस तरह के सांस्कृतिक उत्पादों

का प्रस्तुतीकरण अंतरराष्ट्रीय संबंधों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सत्तू और मखाना को ब्रिक्स शिखर में प्रस्तुत करने के पीछे आर्थिक कारण भी स्पष्ट हैं। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सत्तू का निर्यात 2023‑24 में 45 प्रतिशत बढ़ा था, जबकि मखाने की वैश्विक

मांग में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। इस पहल से निर्यातकों को नई बाजारों में प्रवेश करने का अवसर मिलेगा, जिससे ग्रामीण आय में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। साथ ही, इस कदम से भारतीय कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय मान्यता में भी सुधार होगा।

भव्य

शिखर सम्मेलन के दौरान, बिहार के कई सामाजिक संगठनों ने इस अवसर को स्थानीय रोजगार सृजन के मंच के रूप में उपयोग किया। उन्होंने सत्र के बाद आयोजित एक कार्यशाला में महिलाओं को सत्तू‑मखाना आधारित खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण प्रदान किया। इस पहल के तहत, महिलाओं को छोटे

पैमाने पर उत्पादन और पैकेजिंग तकनीक सिखाई गई, जिससे उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता प्राप्त होगी। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यक्रम से ग्रामीण स्तर पर उत्पादन‑शृंखला में नई जड़ें स्थापित होंगी।

दूसरी ओर, ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने इस पहल को सराहते हुए भारत के कृषि निर

Updated: September 12, 2026


Summary: विदेशी प्रेषकों के मखाने और सात्तू को शिखर सम्मेलन में प्रमोट किया गया ताकि ब्रांडिंग और निर्यात बढ़े।
स्थानीय किसानों को नये बाजार से जोड़ते समय हरित उद्यमिता के अवसर विस्तारित करेंगे।

This development could shape future developments as the situation continues to evolve.

बिहार के छपरा के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर पर SVU ने 3 करोड़ से अधिक अवैध संपत्ति मामले में दर्ज किया

बिहार के छपरा जिले में सुपरिटेंडेंट इंजीनियर राजेंद्र कुमार के खिलाफ विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने बड़े पैमाने पर संपत्ति चोरी के आरोपों पर कार्रवाई शुरू की। अपर पुलिस महानिदेशक सुधांशु कुमार ने बताया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक

जांच में यह पता चला है कि राजेंद्र कुमार के पास आय से कई गुना अधिक, 3 करोड़ 1 लाख रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति है, जिससे सरकारी पद पर बैठे अधिकारी की नैतिकता पर प्रश्न उठ रहे हैं।

राजेंद्र कुमार 2008 में बिहार सरकारी सेवा में शामिल हुए थे

और तब से विभिन्न विकास परियोजनाओं में प्रमुख भूमिका निभाते रहे। उनके पद के दौरान कई बुनियादी ढाँचे के कार्यों में तेजी लाई गई, जिसके कारण उन्हें स्थानीय स्तर पर लोकप्रियता भी मिली। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में उनके वित्तीय लेन‑देन में असामान्य वृद्धि देखी गई, जिससे कई नागरिक और वरिष्ठ अधिकारी

चिंतित हुए। इस संदर्भ में कई सूचनाओं के आधार पर SVU ने मामले को प्राथमिकता दी।

SVU ने कहा कि प्रारम्भिक दस्तावेजी जांच में राजेंद्र कुमार की आय, बैंक खाते, संपत्ति रजिस्ट्री और कर रिटर्न में असंगतियों की पुष्टि हुई। उनके नाम पर कई आवासीय इमारतें, कृषि भूमि और एक व्यावसायिक

इकाई पाई गई, जिनकी कुल कीमत 3 करोड़ 1 लाख रुपये से अधिक थी। इन संपत्तियों की खरीद और रखरखाव के स्रोतों की स्पष्ट व्याख्या नहीं मिली, जिससे यह संकेत मिलता है कि आय के बाहर के स्रोतों से धन का संकलन हुआ है।

जांच एजेंसी ने बताया कि प्रारम्भिक सुनवाई

में राजेंद्र कुमार ने अपने आय स्रोतों को स्पष्ट करने की कोशिश की, पर दस्तावेजी प्रमाण पर्याप्त नहीं रहे। उन्होंने कहा कि अधिकांश संपत्तियां परिवार के नाम पर दर्ज हैं, लेकिन उनकी खरीद के समय और वित्तीय स्रोत स्पष्ट नहीं हैं। SVU ने यह भी कहा कि आगे की जांच में लेन‑देन

के वास्तविक प्रवाह को उजागर किया जाएगा और यदि आवश्यक हुआ तो कोर्ट के समक्ष सबूत पेश किए जाएंगे।

राजेंद्र कुमार के खिलाफ मामला दर्ज होते ही स्थानीय मीडिया में व्यापक चर्चा हुई। कई पत्रकारों ने इस घटना को बिहार में सरकारी अधिकारियों में भ्रष्टाचार के संकेत के रूप में उजागर

किया। इसके साथ ही, सामाजिक मीडिया पर भी इस पर तेज़ी से प्रतिक्रिया मिली, जहाँ नागरिकों ने पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की। इस दौरान, राजेंद्र कुमार की सहकर्मी और अधीनस्थ कर्मचारियों ने कहा कि वह हमेशा कार्यकुशल रहे, परंतु व्यक्तिगत जीवन में उन्होंने कुछ अनियमितताओं को छुपाने की कोशिश की होगी।

बिहार सरकार ने इस मामले को लेकर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की, परंतु कहा कि सभी जांचें स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से की जाएँगी। राज्य के मुख्य सचिव ने कहा कि यदि कोई सार्वजनिक अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाता है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, राज्य के अन्य

विभागों में भी समान जांचों की संभावना को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।

अपर पुलिस महानिदेशक सुधांशु कुमार ने कहा कि SVU की टीम ने सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया है और मामले में कोई भी बाहरी दबाव नहीं

डाला गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान सभी साक्ष्य सुरक्षित रखे जा रहे हैं और उचित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही कोई निष्कर्ष निकाला जाएगा। इस पर राजेंद्र कुमार की वकील टीम ने कहा कि उनके क्लाइंट को न्यायिक प्रक्रिया का पूरा अधिकार है और वे सभी कानूनी

उपाय अपनाएंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के मामलों में सरकार की प्रतिक्रिया अक्सर राजनीतिक दबाव और सार्वजनिक राय के साथ तालमेल बिठाने में जटिलता पैदा करती है। बिहार में वर्तमान में गठबंधन सरकार के भीतर कई पार्टियों के बीच सत्ता संतुलन बना हुआ है, और इस प्रकार

के भ्रष्टाचार के मामलों से सरकार की छवि को नुकसान पहुंच सकता है। यह घटना चुनावी माहौल को भी प्रभावित कर सकती है, जहाँ विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ इस्तेमाल करने की संभावना रखते हैं।

आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यदि राजेंद्र कुमार जैसे उच्च पदस्थ अधिकारी

के पास अवैध संपत्ति का संकलन साबित हो जाता है, तो यह सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की गंभीर चेतावनी बन सकता है। इससे सरकारी परियोजनाओं में निवेश की विश्वसनीयता कम हो सकती है और निजी निवेशकों का भरोसा घट सकता है।

Updated: September 11, 2026

The SVU raid on a once‑celebrated engineer exposes how entrenched patronage in Bihar’s bureaucracy can mask wealth accumulation, turning developmental accolades into a liability for the ruling coalition.
If the illegal ₹3 crore trove is proven, it will likely fuel voter cynicism and embolden

बिहार में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल: 3000 शाखाएं बंद, 1 लाख से अधिक कर्मचारी शामिल

पटना के व्यस्त बाजारों की सुबह धुंधली थी, जब शहर के कई कोनों में बैंक की मुख्य द्वारों पर ताले लगे दिखे। आज बिहार के लगभग तीन हजार सार्वजनिक और निजी बैंक शाखाओं में कामकाज रुक गया, क्योंकि कर्मचारियों और अधिकारियों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल शुरू की।
इस हड़ताल में लगभग तैंतीस हजार कर्मचारियों के साथ-साथ साठ‑तीन हजार अधिकारी शामिल हैं, जैसा कि प्रमुख ट्रेड यूनियन ने बताया। बैंकिंग सेवाओं पर इस व्यापक व्यवधान का असर न केवल ग्राहकों के लेन‑देनों में बल्कि राज्य की दैनिक आर्थिक गतिविधियों में भी स्पष्ट होगा।हड़ताल का कारण कई महीने पहले से लम्बी चर्चा में चल रही लंबित मांगों का समाधान न होना है। कर्मचारियों ने पिछले कुछ हफ़्तों में सरकार को पाँच‑दिन कार्य सप्ताह लागू करने, वेतन वृद्धि, और सामाजिक सुरक्षा के पैकेज के बारे में कई प्रस्ताव प्रस्तुत किए थे, परन्तु अभी तक कोई ठोस उत्तर नहीं मिला। इन माँगों में सिवाय वेतन एवं भत्ते के, कार्य‑स्थल पर स्वास्थ्य सुविधाओं का सुधारा, तथा कार्य‑घंटों का पुनः नियोजन भी शामिल है।

ट्रेड यूनियन ने कहा कि यह हड़ताल केवल एक चेतावनी है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कर्मचारी वर्ग की असंतुष्टि कितनी गहरी है।

बैंकिंग क्षेत्र में पहले भी कई बार ऐसी हड़तालें देखी गई हैं, परन्तु इस बार की हड़ताल में भागीदारी की संख्या और शाखाओं का विस्तार इसे अधिक गंभीर बनाता है। पिछले साल की तुलनात्मक रिपोर्ट के अनुसार, उसी समय केवल दो‑तीन सौ शाखाओं में ही व्यवधान आया था, जबकि आज का आंकड़ा लगभग एक‑हजार प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि का मुख्य कारण कर्मचारियों द्वारा अब तक न सुलझी कई समस्याओं को लेकर बढ़ती निराशा है। सरकार ने पहले इस मुद्दे को हल करने के लिए कई बैठकों का प्रस्ताव रखा था, परन्तु उन बैठकों में कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

हड़ताल के पहले दिन, कई प्रमुख शाखाओं के सामने कर्मचारियों ने एकत्रित होकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। उन्होंने बैनर लगाए जिनपर “काम के अधिकार, सम्मान की गारंटी” जैसी नारे लिखे थे। कुछ शाखाओं के सामने पुलिस ने सुरक्षा का प्रावधान किया, जबकि कुछ जगहों पर ताले लगाने के बाद शाखाएँ बंद हो गईं। ग्राहकों ने भी लंबी कतारें खड़ी कीं, लेकिन अधिकांश लोग वैकल्पिक डिजिटल चैनलों की ओर रुख कर रहे थे। इस बीच, बैंक की एटीएम मशीनें भी कई क्षेत्रों में निष्क्रिय रहीं, जिससे नकदी निकासी में कठिनाई उत्पन्न हुई।

हड़ताल की अवधि को लेकर कई शाखाओं में आधे घंटे के लिए सीमित सेवाएं प्रदान करने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय को लेकर कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह केवल एक अस्थायी उपाय है, जो कर्मचारियों की मूलभूत माँगों को नहीं सुलझा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार शीघ्रता से समाधान नहीं निकालती, तो हड़ताल को आगे बढ़ाने की संभावना है। कई शाखाओं में, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, एटीएम की अनुपलब्धता से किसानों और छोटे व्यापारियों को सीधे प्रभावित हुआ, जो अपनी दैनिक लेन‑देन में बाधा महसूस कर रहे थे।

बैंकिंग संस्थानों की मुख्यालयों में स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, कई बड़े बैंकों के प्रबंधकों ने कर्मचारियों से संवाद स्थापित करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि वे कर्मचारियों की माँगों को सुनने के लिए तैयार हैं, लेकिन साथ ही उन्हें सरकार से भी सहयोग की अपेक्षा है। इस बीच, कुछ बैंकों ने अपने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म को सुदृढ़ करने का ऐलान किया, जिससे ग्राहकों को ऑनलाइन लेन‑देनों में सुविधा मिले। यह कदम, हालांकि, कुछ हद तक ही समस्या को हल कर सकता है, क्योंकि कई ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी अभी भी पर्याप्त नहीं है।

राज्य सरकार ने हड़ताल पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह कर्मचारियों की मांगों को समझती है और शीघ्र समाधान के लिए एक समिति गठित करेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार सभी पक्षों के साथ संवाद कर रही है, परन्तु किसी भी दबाव के तहत तुरंत कोई निर्णय नहीं लेगी। उन्होंने यह भी कहा कि बैंकिंग सेवाओं का निरंतर चलना आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है, इसलिए वैकल्पिक उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।

विपक्षी राजनीतिक दलों ने इस अवसर का उपयोग करते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना की। एक प्रमुख विपक्षी नेता ने कहा कि सरकार द्वारा कर्मचारियों की समस्याओं को नज़रअंदाज़ करने की प्रवृत्ति राज्य की सामाजिक स्थिरता को खतरे में डाल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस हड़ताल को तुरंत हल नहीं किया गया, तो इससे भविष्य में अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों में भी समान आंदोलन की आशंका बढ़ सकती है।

सामाजिक संगठनों ने इस हड़ताल को श्रमिक अधिकारों के संरक्षण के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि इस हड़ताल से न केवल बैंक कर्मचारियों की बल्कि पूरे सार्वजनिक सेवाकर्मियों की स्थिति में सुधार की उम्मीद की जा रही है।

Updated: September 11, 2026

हालांकि डिजिटल सुविधा एक अस्थायी राहत का काम कर सकती है, कृषि और व्यापार जैसे क्षेत्रों की भौतिक जड़ें आज फिर से मुद्दों का केंद्र हैं।

सीवान: हरिराम ब्रह्मस्थान में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़, कई राज्यों से आ रहे हैं दर्शनार्थी

सीवान जिले के मारवा धाम में स्थित हरिराम ब्रह्मस्थान मंदिर ने पिछले कई वर्षों में एक अनूठी सामाजिक घटना को जन्म दिया है; स्थानीय मान्यतानुसार, इस पवित्र स्थल पर प्रवेश करने वाले भक्तों को भूत‑प्रेत तथा बुरी आत्माओं की पकड़ से मुक्त किया जाता है। इस श्रद्धा के कारण न केवल बिहार के भीतर बल्कि उत्तर प्रदेश, झारखंड और मध्य प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों से भी श्रद्धालु इस मंदिर की ओर रुख कर रहे हैं। आजकल मंदिर के द्वार पर भीड़ बढ़ती दिख रही है, जहाँ यात्रियों का एक निरंतर प्रवाह बना रहता है, और यह प्रवाह स्थानीय आर्थिक व सामाजिक परिदृश्य को भी प्रभावित कर रहा है।

हरिराम ब्रह्मस्थान की उत्पत्ति का इतिहास लगभग चार सदी पुराना माना जाता है। कहा जाता है कि १७वीं शताब्दी में यहाँ एक साधु ने अपने आध्यात्मिक अभ्यास के दौरान एक अजीब घटना देखी, जहाँ अंधेरे में मंडराती हुई नकारात्मक ऊर्जा अचानक नष्ट हो गई। इस घटना के बाद इस स्थल को ‘भूत‑प्रेत मुक्त’ माना जाने लगा। समय के साथ गाँव के बुजुर्गों ने इस कथा को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया, और आज यह मान्यता स्थानीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन गई है।

स्थानीय अभिलेखों और पुरानी दस्तावेज़ों में भी इस मंदिर के उल्लेख मिलते हैं, जहाँ इसे ‘शुद्धि स्थल’ के रूप में वर्णित किया गया है। कई बार इस स्थान पर वैदिक यज्ञ और अनुष्ठान आयोजित किए गए, जिससे इसकी पवित्रता की पुष्टि होती रही। सामाजिक विज्ञानियों ने कहा है कि इस प्रकार की मान्यताएँ अक्सर सामाजिक तनाव और मनोवैज्ञानिक असुरक्षा के समय में उभरती हैं, जिससे लोगों को एक सामूहिक सुरक्षा का एहसास मिलता है।

मंदिर के प्रवेश द्वार पर कदम रखते ही पर्यटकों ने बताया कि वहाँ का माहौल अचानक शांत और सुकूनभरा हो जाता है। कई दर्शकों ने कहा कि मंदिर के चारों ओर की हवा में एक हल्की ठंडक और अजीब सी सुगंध महसूस होती है, जो उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से आराम देती है। इस परिवर्तन को स्थानीय लोग ‘भूत‑प्रेत का अंत’ के रूप में वर्णित करते हैं। कुछ शोधकर्ता इस अनुभूति को प्राकृतिक वायुमंडलीय परिवर्तन और ध्वनि विज्ञान के प्रभाव से जोड़ते हैं, परन्तु स्थानीय जनता के लिए यह आध्यात्मिक शक्ति का प्रमाण है।

मंदिर के भीतर स्थित मुख्य शिला पर कई जटिल नक्काशी और प्राचीन प्रतीक अंकित हैं, जिनमें वैदिक मंत्रों की लिपि भी शामिल है। यहाँ के पुजारी कहते हैं कि इन नक्काशियों में शुद्धिकरण के विशेष मंत्र एम्बेडेड हैं, जो प्रवेश करने वाले भक्तों को नकारात्मक ऊर्जा से बचाते हैं। इस विश्वास के कारण कई लोग यहाँ पर विशेष रूप से शाम के समय आते हैं, जब सूर्यास्त के बाद वातावरण अधिक शांतिपूर्ण माना जाता है।

धर्मस्थल के चारों ओर के बगीचे में कई प्राचीन पेड़ और जल स्रोत मौजूद हैं, जो स्थानीय पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं। यहाँ की जलधारा को ‘शुद्ध जल’ कहा जाता है, जिसका सेवन करने से शारीरिक रोगों में आराम मिलता है, ऐसा भी कहा जाता है। वैज्ञानिकों ने इस जल में विशेष खनिज संरचना का पता लगाया है, परन्तु इस तथ्य को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक अध्ययन प्रकाशित नहीं हुआ है।

स्थानीय प्रशासन ने इस बढ़ते आकर्षण को देखते हुए मंदिर के परिसर को सुसज्जित करने और सुरक्षा प्रबंध बढ़ाने की घोषणा की। जिला अधिकारी ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरणीय संरक्षण भी आवश्यक है, इसलिए उन्होंने स्वच्छता अभियान और ट्रैफ़िक नियंत्रण के उपाय लागू किए हैं। इस कदम से न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि आसपास के व्यापारियों को भी आर्थिक लाभ मिलने की आशा है।

धर्मशास्त्रियों ने भी इस स्थल की पवित्रता को मान्यता दी है और कहा है कि आध्यात्मिक शुद्धिकरण का वास्तविक प्रभाव व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है। उन्होंने यह भी बताया कि भौतिक वस्तुओं की तुलना में मन की शुद्धता अधिक महत्वपूर्ण है, और इस प्रकार के धार्मिक अनुभव अक्सर व्यक्तिगत आस्था के आधार पर ही काम करते हैं।

स्थानीय समाज में इस मंदिर के कारण सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विविधता में भी परिवर्तन आया है। विभिन्न जातियों और समुदायों के लोग यहाँ एक साथ प्रार्थना करते हैं, जिससे सामाजिक दूरी कम होती दिखाई देती है। इस प्रकार के समावेशी धार्मिक स्थान स्थानीय सामाजिक बंधनों को मजबूत करने में योगदान देते हैं, जैसा कि सामाजिक विज्ञानियों ने कई बार सिद्ध किया है।

आर्थिक दृष्टिकोण से देखे तो इस मंदिर के आसपास छोटे-छोटे व्यवसायों, जैसे कि धूप, पान, स्थानीय भोजन और हस्तशिल्प के विक्रेता, को नई आय प्राप्त हो रही है। कई स्थानीय घरों ने अपने घर को अतिथि गृह में बदल दिया है, जिससे पर्यटन से जुड़े आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस आर्थिक उछाल ने ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्रदान किए हैं, जिससे ग्रामीण-शहरी प्रवास में कमी की संभावना बनती है।

साम


Hariram Brahmasthan in Siwan’s Marwa Dham, famed for freeing devotees of negative spirits, now draws pilgrims from Bihar and neighboring states, spurring local commerce and prompting authorities to upgrade facilities. Scholars note the belief reflects collective coping mechanisms, while the site’s ancient carvings, “purifying” water and inclusive worship foster social cohesion and economic uplift.

The Hariram Brahmasthan temple’s growing pilgrim influx is expanding regional tourism, prompting infrastructure upgrades and increased commercial activity.
Its reputation as a “spirit‑free” site is fostering cross‑community gatherings, influencing local social cohesion.

उज्जैन: सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हनुमान प्रतिमा हटाने के प्रयास विफल, प्रशासन के पास नई तकनीकी योजना

उज्जैन के मध्य में स्थित “खड़े हनुमान” मंदिर को सड़क चौड़ीकरण के काम में बाधा मानते हुए प्रशासन ने दो दिनों से प्रतिमा को हटाने का प्रयास किया, परंतु हनुमान जी की प्रतिमा अब तक अपनी जगह पर अडिग बनी हुई है। इस दौरान मंदिर का अधिकांश ढाँचा हटा दिया गया है, फिर भी प्रतिमा को स्थानांतरित करने में तकनीकी तथा धार्मिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे स्थानीय जनता और प्रशासन के बीच तनाव उत्पन्न हुआ है।

उज्जैन में 2023 के अन्त में घोषित हुए ‘सड़कों का पुनर्संरचनात्मक योजना’ के तहत कई प्राचीन धरोहरों को प्रभावित किया गया, परंतु “खड़े हनुमान” मंदिर को विशेष रूप से उल्लेखित किया गया था क्योंकि यह शहर के मुख्य चौक के निकट स्थित है। 1975 में स्थापित इस मंदिर की प्रतिमा 12 फीट ऊँची और कंक्रीट मिश्रित लोहे की बनी है, जो स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक तथा ऐतिहासिक महत्व रखती है।

योजना की शुरुआत में शहरी विकास विभाग ने कहा था कि मंदिर का ढाँचा हटाने से केवल 30 मीटर की सड़क चौड़ाई बढ़ेगी, जिससे यातायात की भीड़ कम होगी। लेकिन स्थानीय इतिहासकारों ने इस बात पर इशारा किया कि हनुमान जी की प्रतिमा को हटाना न केवल धार्मिक भावना को चोट पहुँचाएगा, बल्कि शहरी विकास के लिए एक संवेदनशील सामाजिक संतुलन भी बिगाड़ेगा।

दूसरे दिन, नगर निगम की टीम ने विशेष उठाने वाले उपकरणों का प्रयोग कर प्रतिमा को स्थानांतरित करने का प्रयास किया। लेकिन कंक्रीट की जड़ें और लोहे की जड़त्व ने उपकरणों को रोक दिया, जिससे प्रयास विफल रहा। इस दौरान सुरक्षा कर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित किया, परंतु कई स्थानीय भक्तों ने विरोध प्रदर्शन किया और प्रतिमा के चारों ओर रैली आयोजित की।

तीसरे दिन, प्रशासन ने पुनः विशेषज्ञ अभियंत्रियों को बुलाया और एक नई तकनीकी योजना तैयार की। इस योजना में हाइड्रोलिक जैक और फ्रीजिंग एजेंट का उपयोग करके प्रतिमा को धीरे‑धीरे ढीला करने का प्रस्ताव रखा गया। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि प्रतिमा को अत्यधिक बल से खींचा गया तो उसकी संरचनात्मक स्थिरता टूट सकती है, जिससे ध्वंसकारी परिणाम सामने आ सकते हैं।

चौथे दिन, नगर निगम ने दोहरी टीमों को नियुक्त किया; एक टीम ने प्रतिमा के आधार को धीरे‑धीरे काटने का काम किया, जबकि दूसरी टीम ने ध्वनि और कंपन को न्यूनतम रखने के लिए शोर निरोधक आवरण लगाया। इस दौरान स्थानीय मीडिया ने विस्तृत कवरेज किया और सार्वजनिक प्रतिक्रिया को रियल‑टाइम में दर्शाया। परिणामस्वरूप, प्रतिमा के आधार के कुछ हिस्से धीरे‑धीरे खुलने लगे, परंतु पूरी तरह हटाना अभी भी असफल रहा।

पर्यावरणीय एवं सांस्कृतिक संगठनों ने इस प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। उज्जैन अभ्यंतर्य संरक्षण समिति ने कहा कि प्रतिमा के हटाने से ध्वनि, वायुमंडलीय दबाव और ध्वनि कंपन के कारण ध्वनि‑केंद्रीकृत लोहा क्षतिग्रस्त हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया कि एक वैकल्पिक मार्ग या मोड़ तैयार किया जाए, जिससे प्रतिमा को स्थायी रूप से सुरक्षित रखा जा सके।

नागरिकों की ओर से भी विभिन्न मत सामने आए। कुछ लोग मानते हैं कि विकास के लिए सांस्कृतिक धरोहरों का त्याग आवश्यक है, जबकि अन्य लोग प्रतिमा को संरक्षित करने के लिए वैकल्पिक मार्ग की मांग कर रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण से व्यापारिक प्रवाह में सुधार होगा, परंतु उन्होंने यह भी कहा कि यदि धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुँचाया गया तो सामाजिक अशांति उत्पन्न हो सकती है।

राजनीतिक पक्षों ने भी इस मुद्दे को लेकर बयान जारी किए। शहर के विधायक ने कहा कि प्रशासन को विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के बीच संतुलन बनाना चाहिए, जबकि विपक्षी नेता ने इस योजना को “धर्म‑आधारित असहिष्णुता” का आरोप लगाया। इन बयानों ने सार्वजनिक बहस को और तीव्र कर दिया, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ा।

आर्थिक दृष्टिकोण से इस परियोजना का अनुमानित बजट लगभग 150 करोड़ रुपये था, जिसमें सड़क विस्तार, पुल निर्माण और पुरानी संरचनाओं का पुनर्निर्माण शामिल है। यदि प्रतिमा को हटाने में विफलता जारी रहती है, तो अतिरिक्त खर्च और समय-सारणी में देरी का सामना करना पड़ेगा। यह देरी न केवल वित्तीय बोझ बढ़ाएगी, बल्कि स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर भी असर डालेगी।

सामाजिक प्रभाव के संदर्भ में, हनुमान मंदिर के भक्तों ने इस स्थान को “आध्यात्मिक केंद्र” बताया है, जहाँ दैनिक प्रार्थना और सामुदायिक कार्यक्रम होते हैं। प्रतिमा के हटने से इन सामाजिक गतिविधियों में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है, जिससे समुदाय की एकजुटता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, धार्मिक पर्यटन के स्रोत के रूप में यह स्थल स्थानीय होटल और रेस्तरां के राजस्व में योगदान देता आया है।

विश

Updated: September 8, 2026


Ujjain administration’s attempts to remove the standing Hanuman idol for road widening have stalled due to technical failures and public unrest. The standoff has intensified political and social tensions as experts warn of structural damage while locals demand preservation of the heritage site.

रोहतास में ‘मेरा युवा भारत’ पोर्टल के पंजीकरण हेतु जागरूकता अभियान शुरू, 5000 से अधिक युवाओं ने की डज

युवा विकास मंत्रालय ने रोहतास जिले में “मेरा युवा भारत” (My Bharat) पोर्टल के पंजीकरण हेतु व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया, जिससे 15 से 29 वर्ष के युवा डिजिटल मंच के माध्यम से सरकारी योजनाओं, कौशल प्रशिक्षण और स्वयंसेवी अवसरों का लाभ उठा सकेंगे। इस कदम को प्रदेश के युवा विकास को तेज़ी से आगे बढ़ाने के प्रमुख उपाय के रूप में प्रस्तुत किया गया है, और आज तक के सबसे बड़े डिजिटल सशक्तिकरण पहल में गिना जा रहा है।

रोहतास में इस पहल की शुरुआत से पहले, युवा वर्ग अक्सर विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में असंगत जानकारी और आवेदन प्रक्रियाओं के कारण लाभ उठाने में असमर्थ रहे थे। राष्ट्रीय स्तर पर “मेरा भारत” पोर्टल 2021 में लॉन्च हुआ था, जिसका उद्देश्य सभी आयु वर्ग के नागरिकों को एक ही मंच पर केंद्रित सेवाएं प्रदान करना था। राज्य सरकार ने इसे प्रदेश स्तर पर लागू करने के लिए विशेष अनुदान और तकनीकी सहयोग प्रदान किया, जिससे स्थानीय प्रशासन की पहुंच बढ़ी।

पिछले दो वर्षों में भारत सरकार ने युवा कौशल विकास पर 12,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जिसमें डिजिटल साक्षरता, उद्यमिता समर्थन और रोजगार सृजन के लिए विशेष योजनाएँ शामिल हैं। इन योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन तभी संभव है जब लक्षित समूह तक सूचना का सटीक प्रसारण हो, जिसके लिए “मेरा युवा भारत” एकीकृत मंच के रूप में कार्य कर रहा है। यह पोर्टल विभिन्न राज्य और केंद्रीय योजनाओं को एक ही यूज़र इंटरफ़ेस में समेटता है, जिससे आवेदन प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनती है।

रोहतास में आज से शुरू किए गए अभियान में स्थानीय अधिकारियों ने पंजीकरण स्टॉल स्थापित किए, जहाँ प्रशिक्षण सत्र, लाइव डेमो और प्रश्न-उत्तर सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। प्राथमिक विद्यालयों, कॉलेजों और निजी प्रशिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर युवा समूहों को इस पोर्टल की सुविधाओं से परिचित कराया जा रहा है। पंजीकरण प्रक्रिया केवल मोबाइल नंबर और आधार प्रमाणपत्र से पूरी होती है, और एक बार पंजीकरण हो जाने पर उपयोगकर्ता को विभिन्न योजनाओं की सूचनाएँ ईमेल या एसएमएस के माध्यम से मिलती हैं।

अभियान के दौरान 5,000 से अधिक युवा ने पंजीकरण कर लिया, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत ने कौशल विकास कार्यक्रमों में भाग लेने की इच्छा जताई। इस पहल ने ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट एक्सेस की समस्या को भी उजागर किया, जिससे जिला प्रशासन ने अतिरिक्त सार्वजनिक वाई-फ़ाई हॉटस्पॉट स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। इसके अलावा, पोर्टल पर उपलब्ध “स्वयंसेवा” खंड में सामाजिक कार्यों के लिए स्वयंसेवकों की मांग बढ़ी, जिससे स्थानीय NGOs और सरकारी विभागों के बीच सहयोग की संभावनाएँ विस्तृत हुईं।

उपरान्त, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने इस पंजीकरण अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर दोहराने की संभावना जताई है, जिससे अन्य जिलों में भी समान लाभ पहुंचाया जा सके। मंत्रालय ने कहा कि डिजिटल माध्यमों से युवा वर्ग को सशक्त बनाना सरकार की प्राथमिकता है, और इस दिशा में “मेरा युवा भारत” एक महत्वपूर्ण उपकरण बन रहा है।

राज्य के युवा मामलों के सचिव ने कहा कि इस पहल के माध्यम से युवा वर्ग को रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक सहभागिता के नए द्वार खोलेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि पंजीकरण के बाद उपयोगकर्ताओं को नियमित रूप से प्रशिक्षण मॉड्यूल और फंडिंग अवसरों की सूचना मिलती रहेगी, जिससे कौशल अंतराल कम होगा।

केंद्र सरकार के प्रमुख अधिकारी, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के प्रतिनिधि ने बताया कि “मेरा युवा भारत” पोर्टल का लक्ष्य 2025 तक 2 करोड़ युवा को डिजिटल रूप से जोड़ना है, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिले। उन्होंने कहा कि इस मंच से जुड़कर युवा न केवल रोजगार के अवसरों तक पहुंचेंगे, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चल रही कई सामाजिक अभियानों में सक्रिय भागीदारी भी कर सकेंगे।

स्थानीय कांग्रेस नेता ने इस पहल की सराहना की, परन्तु साथ ही बुनियादी बुनियादी ढांचे, जैसे तेज़ इंटरनेट और डिजिटल साक्षरता को लेकर चिंताएँ व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि केवल पंजीकरण ही पर्याप्त नहीं, बल्कि सतत प्रशिक्षण और फॉलो-अप मेकेनिज्म की आवश्यकता है, ताकि योजना के लाभ वास्तविक रूप में युवाओं तक पहुंच सकें।

दूसरी ओर, कुछ निजी उद्यमी संघों ने कहा कि “मेरा युवा भारत” पोर्टल के माध्यम से कौशल प्रमाणपत्रों को मान्यता मिलना उद्योगों के लिए भी फायदेमंद होगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि पोर्टल पर उपलब्ध प्रमाणपत्र राष्ट्रीय स्तर पर मान्य हो जाएं, तो रोजगार बाजार में युवा प्रतिभा का समुचित उपयोग संभव हो सकेगा।

आर्थिक विश्लेषकों ने संकेत दिया कि युवा वर्ग का इस डिजिटल मंच से जुड़ना राष्ट्रीय उत्पादन क्षमता में 0.5 प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है, क्योंकि कौशल प्रशिक्षण और रोजगार सृजन से श्रम शक्ति का अधिकतम उपयोग होगा। इसके अलावा, स्वयंसेवी कार्यों में भागीदारी से सामाजिक कल्याण में सुधार और सार्वजनिक खर्च की दक्षता में वृद्धि की संभावना है।

सामाजिक दृष्टिकोण से, इस पहल से ग्रामीण और शहरी युवा वर्ग के बीच डिजिटल अंतर को कम किया जा

Updated: September 8, 2026


The Youth Development Ministry launched a massive awareness drive in Rohtas to register 15‑29‑year‑olds on the “Mera Yuva Bharat” portal, linking them to government schemes, skill‑training and volunteer opportunities. Within days over 5,000 youths enrolled, prompting calls for better internet infrastructure and positioning the scheme as a template for a nationwide digital‑empowerment push.

Insight: The campaign registers 15‑29‑year‑olds on a unified portal, linking them directly to government skill‑development, employment and volunteer schemes. Broad digital enrollment aims to streamline access, improve programme uptake and support youth empowerment in the district.

बिहार में 9 सितंबर को दक्षिण-पूर्वी जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी, IMD ने 80 मिमी से अधिक वर्षा की संभावना जताई

बिहार के मौसम विभाग ने 9 सितंबर को दक्षिण‑पूर्वी भाग में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसमें सहरसा, भागलपुर, सुपौल, खगड़िया, और मोरैना सहित छह जिलों को तीव्र वर्षा, गरज‑तड़ित वाद्य और तेज हवाओं से बचाव हेतु चेतावनी दी गई है। भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने अगले दो दिनों में इस क्षेत्र में 80 मिमी से अधिक वर्षा की संभावना बताई है, जिससे बाढ़, जलजमाव और बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इस अलर्ट के साथ ही प्रशासनिक स्तर पर आपातकालीन उपायों को सक्रिय किया गया है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में शीघ्र प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो सके।

बिहार में मानसून का आगमन पिछले महीने से ही असामान्य रूप से तीव्र रहा है, और इस वर्ष पहले ही कई बार गंभीर बाढ़ की घटनाएँ दर्ज की गई हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को लेकर वैज्ञानिकों का मानना है कि बरसात की तीव्रता और अनियमितता में वृद्धि हो रही है, जिससे मौसमी आपदाओं का जोखिम बढ़ रहा है। इस संदर्भ में, 2023‑2024 के मानसूनी अवधि में राज्य के विभिन्न हिस्सों में औसत वर्षा स्तर से 30 प्रतिशत अधिक बरसाव दर्ज किया गया है, जो राष्ट्रीय औसत से भी ऊपर है।

इतिहास में बिहार ने 2017, 2020, और 2022 में बड़े पैमाने पर बाढ़ के कारण आर्थिक और सामाजिक क्षति झेली है। पिछले साल के आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित 15 लाख लोगों को अस्थायी रूप से स्थानांतरित करना पड़ा, और कृषि उत्पादन में 12 प्रतिशत की गिरावट आई। इन तथ्यों को देखते हुए, मौसमी चेतावनियों को शीघ्रता से लागू करना और सतर्कता बढ़ाना आवश्यक माना जा रहा है।

9 सितंबर को जारी किए गए ऑरेंज अलर्ट के बाद, बिहार सरकार ने जिला स्तर पर आपातकालीन संचालन केंद्र (EOC) स्थापित कर विभिन्न विभागों को समन्वित किया है। डाक्टरी, जल एवं जल संसाधन, एवं सार्वजनिक कार्य विभाग ने मिलकर जल निकासी, बाढ़ नियंत्रण, और राहत वितरण के लिए त्वरित कार्यप्रणाली तैयार की है। साथ ही, जिला प्रशासन ने स्थानीय निकायों को चेतावनी जारी करके स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों को बंद करने का निर्देश दिया है।

10 सितंबर को अलर्ट का दायरा पश्चिमी बिहार की ओर विस्तारित होने की सूचना मिली है, जिसमें पटना, भोजपुर, और गया जैसे प्रमुख जिलों को प्रभावित किया जाएगा। IMD ने इस दिन 60 से 90 मिमी वर्षा की संभावना बताई है, जिसके साथ तेज़ हवाओं की संभावना भी है। इस परिवर्तन का मुख्य कारण प्रदेश के निचले हिस्सों में जलस्रोतों का जलस्तर बढ़ना और हवाओं की दिशा में बदलाव है, जिससे बाढ़ की संभावनाएं पुनः बढ़ रही हैं।

11 सितंबर को आधिकारिक तौर पर ऑरेंज अलर्ट नहीं रहेगा, परंतु कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, जिससे हल्की-फुल्की बारिश और संभावित जलजमाव की आशंका बनी रहेगी। इस दिन मौसम विभाग ने मौसम को स्थिर रहने की उम्मीद जताई है, परंतु अचानक बदलते जलवायु पैटर्न को देखते हुए सतर्कता आवश्यक है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों को जल निकासी मार्गों को साफ रखने और संभावित जलभंडारण क्षेत्रों में सावधानी बरतने का पुनः निर्देश दिया है।

राज्य के उच्च अधिकारी, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हैं, ने इस मौसमी चेतावनी पर त्वरित कार्रवाई की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले से ही प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन बचाव दल, एम्बुलेंस, और राहत सामग्री की तैनाती कर रखी है, तथा जलसंकट के प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के साथ समन्वय स्थापित किया है।

विपरीत पक्ष में, किसान संघों ने मौसम के कारण फसल नुकसान की संभावना को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सरकार से फसल बीमा, बीज और उर्वरक की आपूर्ति में तेजी लाने का अनुरोध किया है, क्योंकि कई किसान पहले ही भारी वर्षा के कारण फसल में जलजमाव और रोग के संकेत देख रहे हैं। कृषि विभाग ने इन मांगों को मानते हुए आपातकालीन राहत पैकेज की घोषणा की है, जिसमें प्रतिपूर्ति और बीमा कवरेज को विस्तृत किया जाएगा।

वाणिज्य और उद्योग मंडलों ने भी मौसमी बाधाओं के असर पर अपनी चिंता जताई है। प्रमुख व्यापार केंद्रों में सड़कों की जलजमाव और लॉजिस्टिक देरी के कारण वस्तु आपूर्ति में व्यवधान की आशंका है, जिससे छोटे वाणिज्यियों की आय पर असर पड़ सकता है। उद्योग विभाग ने इस जोखिम को कम करने हेतु वैकल्पिक परिवहन मार्ग और आपातकालीन ढांचा तैयार करने का आदेश दिया है।

सामाजिक संगठनों ने स्थानीय स्तर पर जनजागरूकता अभियानों को तेज करने की मांग की है। उन्होंने स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित कर प्रभावित क्षेत्रों में आप

Updated: September 8, 2026

The orange alert underscores how climate‑driven rainfall spikes are converting Bihar’s monsoon from a seasonal rhythm into a recurrent crisis, forcing governance to operate like an emergency service rather than a regulator.
If the pattern persists, the state’s economic resilience will hinge on rapid institutional adaptation—streamlined insurance,

बीएमडब्ल्यू ने बिहार के 26 जिलों में भारी बारिश, तेज हवाओं के कारण ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी

मौसम आंधी का कारण बनेगी? अगले दो दिनों में भारी बारिश का अलर्ट जारी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा बिहार के बड़े हिस्से में मौसम की पहली चेतावनी जारी की गई है, जिसमें ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किए गए हैं। दिल्ली स्थित मौसम विज्ञान के केंद्रीय कार्यालय रविवार की शाम को ही सक्रिय हो गया था जब पूर्वोत्तर भारत में बारिश का मानसून सक्रिय होने का संकेत मिला था। राज्य में मौसम विज्ञान विभाग ने 26 जिलों में मौसम के बिगड़ने की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की संभावना व्यक्त की गई है।

पंद्रह जुलाई को बारिश की शुरुआत से पूर्व और पांच जुलाई को वर्षा की तीव्र वार्षिक दर का संकेत मिला था। क्षेत्रीय मौसम विज्ञान मध्य बंगाल मंगलवार की पूर्वाह्न में जारी अपनी रिलीज में राज्यों के पूर्वी हिस्से के कई जिलों में विस्तार रूप से बिजली धमाके के साथ तेज से ताकतवर हवा चल सकती है और इस क्षेत्र में मानसून की स्थिति मध्य वर्ग को तुरंत सक्रिय हो गई है।

विभाग के अनुसार पहले ऑरेंज अलर्ट के क्षेत्रफल में पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण और बक्सर जिले शामिल हैं। वहीं, भोजपुर, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास और कaimour जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञान के अनुसार इन सभी क्षेत्रों में बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं और कुछ स्थानों पर बादलों के निर्माण की सुविधा मिल सकती है।

दूसरी ओर, मौसम विज्ञान चेतावनी की वजह से क्षेत्र में मानसून की तरह लचीला बनाया जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी किए गए प्रत्येक प्रकार की चेतावनी से केवल अस्थायी रूप से मौसम की स्थिति में परिवर्तन होने के दावे किया गया है और इस स्थिति में मौसम विज्ञान विभाग ने बारिश की संभावना जारी की है।

जो क्षेत्र विशेष रूप से गंभीर हैं वे हैं बक्सर और सीवान जिलों के निचले हिस्से जहाँ नदियों का जलस्तर बढ़ने की चेतावनी दी जा सकती है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासनिक अधिकरण की ओर से मानसून की पहले से ही लापरवाही की शिकायत सामने आई और उसी के लिए दोपहर के समय प्रशासनिक परिणाम सामने आ गए।

इसके अलावा, मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी की गई बहस में सारण और बक्सर जिलों के निचले उप जिलों में बारिश के प्रभाव में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना दिखाई गई। बक्सर जिले के निचले हिस्सों में बारिश की वजह से मानसून की वजह से डंबल और गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है और इस स्थिति में प्रशासनिक प्रबंधन का कार्य शुरू हो चुका है।

इस क्षेत्र में भारी बारिश से जनजीवन को असहज बनाया गया है। स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ वाले क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना को ध्यान में रखते हुए अपना सावधानी भाव करते हुए अपने इंतजाम करने की शुरुआत की है। इस क्षेत्र के स्थानीय प्रशासन के अनुसार पिछले कुछ दिनों में स्थिति लेकर राजनीतिक उद्योग की सूचना इस स्थिति में भारी वर्षा को मजबूर कर दिया।

न्यूज़ मार्केट शनिवार को इस मामले में किसी तरह के बदलाव के कोई इशारा देता है और न्यूज़ मार्केट का दोस्त के रूप में देख जाता है। स्थानीय प्रशासन द्वारा इंटरनेट वीरान को करने में पिछले कुछ दिनों में यह कार्य कठिन हुआ है। न्यूज़ मार्केट शनिवार की शाम को इस क्षेत्र में भारी वर्षा की चेतावनी दी गई तब तक स्थिति अपने नियंत्रण में ले लिया और इस क्षेत्र में एक कड़ी परिस्थिति सामने आई थी।

न्यूज़ मार्केट के अनुसार, पिछलें दिनों में इस क्षेत्र की सभी राजनीतिक दलों द्वारा विपक्ष की भाषा की गई थी और इस मामले में सभी राजनीतिक दलों द्वारा इस मामले में विपक्षी दलों और पार्षदों द्वारा विरोध किया गया था। न्यूज़ मार्केट के अनुसार, पिछलें दिनों में इस क्षेत्र की सभी राजनीतिक दलों द्वारा विपक्ष की भाषा की गई थी और इस

Updated: August 30, 2026


राज्य के 26 जिलों में ओरेंज और येलो अलर्ट जारी करने के स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ तैयारियां स्वारंभ कर दी हैं। आने वाले दिनों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी के बीच बक्सर और सीवान जैसे क्षेत्रों में स्थिति गंभीर हो सकती है।

बिहार में विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ी, नौवें स्थान पर पहुंचा बिहार

बिहार में विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है, जिससे राज्य की पर्यटन industry को बढ़ावा मिल रहा है। हाल ही में, बिहार के एक मंत्री ने घोषणा की कि बिहार विदेशी पर्यटकों की संख्या के मामले में नौवें स्थान पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा राज्य की पर्यटन नीतियों की सफलता को दर्शाता है और भविष्य में और अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए एक सकारात्मक संकेत है।बिहार की पर्यटन industry का इतिहास बहुत पुराना है, जिसमें कई प्रमुख आकर्षणों के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थल भी शामिल हैं।

राज्य में बुद्ध की जन्मस्थली बोधगया, महाबोधि मंदिर, और नालंदा विश्वविद्यालय जैसे प्रसिद्ध स्थल हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इसके अलावा, बिहार की संस्कृति और विरासत भी विदेशी पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण का केंद्र है।

बिहार की पर्यटन नीतियों का मुख्य उद्देश्य राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इसके लिए, राज्य सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें पर्यटन स्थलों का विकास, सुविधाओं में सुधार, और प्रचार-प्रसार के लिए विशेष अभियान शामिल हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, बिहार में विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है, जो राज्य की पर्यटन industry के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

बिहार में पर्यटन की वृद्धि के पीछे कई कारण हैं, जिनमें से एक प्रमुख कारण है राज्य सरकार की प्रयास। राज्य सरकार ने पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियों और योजनाओं को लागू किया है, जिससे पर्यटन industry को मजबूती मिली है। इसके अलावा, राज्य में सुरक्षा और सुविधाओं में सुधार भी पर्यटकों को आकर्षित करने में मदद कर रहा है।

बिहार की पर्यटन industry को बढ़ावा देने में स्थानीय समुदाय भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्थानीय लोगों ने पर्यटकों के लिए विशेष सुविधाएं प्रदान करना शुरू किया है, जैसे कि होमस्टे, गाइडेड टूर, और स्थानीय उत्पादों की बिक्री। इससे न केवल पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलता है, बल्कि स्थानीय समुदाय को भी आर्थिक लाभ होता है।

बिहार में पर्यटन की वृद्धि के साथ-साथ, राज्य में कई चुनौतियाँ भी हैं। इनमें से एक प्रमुख चुनौती है पर्यावरण संरक्षण। पर्यटन की वृद्धि के साथ, पर्यावरण पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान हो सकता है। इसलिए, राज्य सरकार और स्थानीय समुदाय को पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष प्रयास करने होंगे।

पर्यटन industry को बढ़ावा देने में राज्य सरकार की नीतियों का महत्वपूर्ण योगदान है। राज्य सरकार ने पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियों और योजनाओं को लागू किया है, जिससे पर्यटन industry को मजबूती मिली है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदाय के विकास के लिए भी विशेष प्रयास किए हैं।

सीतामढ़ी: सरकारी धन की बंदरबांट और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में कार्रवाई

जिले के बोखड़ा प्रखंड के ग्राम पंचायत चकौती में सरकारी राशि की गड़बड़ी और वित्तीय अधूरापन के मामले में, जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है.

जिलाधिकारी रिची पांडेय के निर्देश पर चकौती पंचायत के मुखिया अशोक कुमार को पदच्युत करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जबकि पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा रहा है.

पिछले कुछ वर्षों से चकौती ग्राम पंचायत में वित्तीय अनियमितताएं सामने आ रही थीं, जिसमें नियमों के विरुद्ध सरकारी राशि की निकासी और उसका निजी उपयोग शामिल था.

जांच प्रतिवेदन के आधार पर, पाया गया कि बिना किसी विभागीय दिशा-निर्देश के दो योजनाओं की कुल 3 लाख रुपये की राशि मुखिया द्वारा नगद निकाली गई थी, लेकिन उसके उपयोग का कोई विवरण नहीं मिला. इसके अलावा ‘कार्यालय व्यय’ के नाम पर भी 50 हजार रुपये की अवैध नगद निकासी की गई थी.

डीएम ने सख्त कार्रवाई करते हुए पंचायत सचिव के विरुद्ध नीलामपत्र वाद दायर कर दो सप्ताह के भीतर राशि वसूली का निर्देश दिया है.

जिला प्रशासन ने साफ कर

प्राकृतिक न्याय: घर में रिसाव से लगी भीषण आग, दो घर राख

दरभंगा के गौड़ाबौराम इलाके से एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना सामने आई है, जिसमें शादी की खुशियों को खत्म करते हुए गैस रिसाव से दो घर जलकर राख हो गए. घटना बगरासी पंचायत के तेनुआ गांव की है, जहां सोमवार सुबह घर में चाय बनाने के दौरान जैसे ही गैस सिलेंडर में रेगुलेटर लगाकर माचिस जलाई गई, अचानक गैस ने आग पकड़ ली।

इस हादसे में घर के मुखिया सुरेंद्र राम और उनके दामाद ललित राम बुरी तरह झुलस गए. दोनों को पहले बिरौल अनुमंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डीएमसीएच रेफर कर दिया गया।

घर में रखा अनाज, कपड़े और फर्नीचर जलकर राख हो गया। सबसे दर्दनाक बात यह है कि सुरेंद्र राम के बेटे की शादी 30 अप्रैल को होनी थी। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन इस आग ने सब कुछ खत्म कर दिया।

तेनुआ गांव के लोगों की मदद से किसी तरह आग पर काबू पाया गया। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। फिलहाल बड़गांव थाना पुलिस मामले की जांच में जुटी है। घटना के समय गांव में लगभग 10-15 लोग मौजूद थे, जिन्होंने आग ब

“बिहार में महिला मतदाताओं को गुमराह करने का आरोप नेशनल डेमोक्रेटिक एलायन्स पर”

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने नेशनल डेमोक्रेटिक एलायन्स (एनडीए) पर आरोप लगाया है कि वे बिहार की महिला मतदाताओं को धोखा देने के लिए झूठे-सही-सुरेंगे चुनावी वादों का उपयोग कर रहे हैं।

बिहार की महिलाओं की सशक्तिकरण को लेकर एनडीए सरकार द्वारा घोषित किए गए कार्यक्रमों और योजनाओं के संबंध में तेजस्वी ने कहा कि यह सिर्फ घोषणाओं का खेल है। उन्होंने कहा, “एनडीए नीति निर्माताओं ने बिहार की महिलाओं को दावा किया है कि वे उनकी भलाई के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन असल में, वे महिलाओं का शोषण करने के लिए उनके सशक्तिकरण का उपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं।”

मीडिया में, उन्होंने कहा कि जब एनडीए सरकार ने कुछ वर्ष पहले किशोरावस्था पूरा करने वाली प्रेग्नेंट लड़की को भ्रूण हत्या (एमसीएम) अधिनियम के तहत प्रत्येक न्यूनतम कानूनी, शारीरिक और आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की थी, लेकिन उन्होंने केवल एक फोटो के माध्यम से घोषणा को प्रमोट किया।

नवविवाहिता की संदिग्ध मौत पर परिवार के सदस्यों का गायब होना

बिहार के सुपौल जिले के बिरौल थाना क्षेत्र में एक नवविवाहिता की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है। नवविवाहिता ने जिस प्रेम विवाह का वचन जोड़ा था, वही प्रेम उसकी मौत का कारण बन गया। पुलिस के अनुसार, 20 वर्षीय श्वेता देवी ने 4 अक्टूबर को बिरौल थाना में हुई एक सामाजिक समारोह में प्रेम विवाह का वचन जोड़ा था। इसके ठीक छह महीने बाद 10 अप्रैल की रात श्वेता देवी की लाश सड़क के किनारे मिली, जिसकी मौत का कारण अज्ञात बताया गया है।

पुलिस ने बताया कि श्वेता देवी की नाजुक तबीयत के कारण उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराने के लिए उसके पति और परिवारवालों को रिपोर्ट करनी पड़ी, लेकिन अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस ने श्वेता देवी के पति और परिवार को बिरौल थाना में पेश होने के लिए कहा, लेकिन उनके पति और स्वजन फरार हैं।

पुलिस ने श्वेता देवी के परिवार के मानवीय साथी से पूछताछ की है, लेकिन उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि श्वेता देवी के साथ उसके पति के संघर्ष के बारे

देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पंचशूलों की विशेष पूजा, शिखरों पर पुनर्स्थापना के साथ बाबा-पार्वती का पारंपरिक गठबंधन सम्पन्न

झारखंड के देवघर स्थित विश्वप्रसिद्ध Baidyanath Temple में महाशिवरात्रि के पावन पर्व से पूर्व आस्था, परंपरा और वैदिक अनुष्ठानों का भव्य दृश्य देखने को मिला। रविवार को महाशिवरात्रि मनाई जानी है, लेकिन उससे एक दिन पहले शनिवार को मंदिर प्रांगण में वह विशेष धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुआ, जिसका इंतजार भक्त पूरे वर्ष करते हैं। बाबा बैद्यनाथ और मैया पार्वती मंदिरों के शिखरों पर स्थापित पंचशूलों को परंपरानुसार शुद्धिकरण, पूजन और पुनर्स्थापना की प्रक्रिया से गुजारा गया। इसके साथ ही बाबा और माता पार्वती के बीच पारंपरिक ‘गठबंधन’ की रस्म अदा की गई, जिसे इस धाम की अत्यंत प्राचीन और विशिष्ट परंपरा माना जाता है।

यह अनुष्ठान केवल धार्मिक क्रिया भर नहीं, बल्कि शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीकात्मक उत्सव है। देवघर धाम में महाशिवरात्रि से पूर्व पंचशूल उतारने, उनका पूजन करने और पुनः स्थापित करने की परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित रहे और पंचशूलों के दर्शन एवं स्पर्श कर स्वयं को धन्य महसूस किया।

पंचशूलों का महत्व और धार्मिक मान्यता

पंचशूल का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। यह त्रिशूल की ही एक विशेष संरचना मानी जाती है, जिसमें पाँच शूल होते हैं। शिव मंदिरों के शिखरों पर स्थापित पंचशूल दैवीय ऊर्जा, संरक्षण और आध्यात्मिक शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में यह परंपरा विशेष महत्व रखती है।

मान्यता है कि पंचशूल मंदिर और आसपास के क्षेत्र की नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करते हैं और भक्तों के जीवन में शुभता लाते हैं। इसी कारण महाशिवरात्रि से पूर्व इन पंचशूलों का विधिवत शुद्धिकरण और पुनर्पूजन अनिवार्य माना जाता है।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शुद्धिकरण और पूजन

शनिवार को मंदिर के प्रधान पुजारी सह सरदार पंडा गुलाबनंद ओझा के नेतृत्व में षोडषोपचार विधि से पंचशूलों का पूजन सम्पन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, धूप-दीप, पुष्प, चंदन और पवित्र जल से इनका शुद्धिकरण किया गया।

यह पूजा केवल मुख्य मंदिर तक सीमित नहीं रही। बाबा बैद्यनाथ और मैया पार्वती मंदिर के अलावा मंदिर परिसर के अन्य 22 मंदिरों के शिखरों से उतारे गए पंचशूलों का भी सामूहिक पूजन किया गया। यह दृश्य अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण था।

शिखरों से उतारने की प्राचीन परंपरा

महाशिवरात्रि से एक या दो दिन पूर्व मंदिर परिसर के सभी मंदिरों के शिखरों से पंचशूलों को उतारने की परंपरा है। शुक्रवार को बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती मंदिर के शिखरों से पंचशूल उतारे गए थे, जबकि अन्य मंदिरों के पंचशूल पहले ही नीचे लाए जा चुके थे।

भंडारी परिवार की देखरेख में भंडारियों की टीम ने दोपहर के समय वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सावधानीपूर्वक पंचशूलों को शिखरों से उतारा। यह प्रक्रिया अत्यंत श्रद्धा और अनुशासन के साथ संपन्न की जाती है।

पंचशूलों का पारंपरिक मिलन

पंचशूलों के उतारने के बाद बाबा और पार्वती मंदिर के पंचशूलों का पारंपरिक मिलन कराया गया। यह मिलन शिव और शक्ति के दिव्य संगम का प्रतीक माना जाता है।

इस अनुष्ठान को देखने के लिए मंदिर परिसर में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालु इस पावन क्षण के साक्षी बनने के लिए घंटों पहले से कतार में खड़े थे। जब पंचशूलों का मिलन हुआ, तो “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

पुनर्स्थापना की वैदिक प्रक्रिया

विशेष पूजा के बाद सभी 22 मंदिरों के शिखरों पर पंचशूलों को पुनर्स्थापित किया गया। यह प्रक्रिया भी वैदिक विधि-विधान के अनुसार सम्पन्न हुई।

पंचशूलों को पुनः स्थापित करते समय मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और आशीर्वचन का क्रम चला। मान्यता है कि पुनर्स्थापना के साथ मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और अधिक सशक्त हो जाती है।

बाबा और मैया पार्वती का ‘गठबंधन’

पंचशूल पुनर्स्थापना के उपरांत बाबा बैद्यनाथ और मैया पार्वती मंदिर के बीच पारंपरिक ‘गठबंधन’ की रस्म अदा की गई। यह देवघर धाम की अत्यंत विशिष्ट और प्राचीन परंपरा है।

गठबंधन शिव और शक्ति के अविभाज्य संबंध का प्रतीक है। भक्त इसे अत्यंत शुभ मानते हैं और मान्यता है कि इस अवसर पर दर्शन करने से दांपत्य सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़

पंचशूलों के दर्शन और स्पर्श के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में उमड़ पड़े। भक्तों ने मस्तक सटाकर पंचशूलों को नमन किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवघर पहुंचे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। कतारबद्ध दर्शन व्यवस्था लागू की गई और पुलिस बल तैनात रहा।

महाशिवरात्रि की चार प्रहर पूजा

मंदिर प्रशासन ने बताया कि महाशिवरात्रि की चार प्रहर की पूजा रात्रि में सम्पन्न होगी। तड़के सुबह 3:15 बजे मंदिर का पट खुलेगा। विशेष पूजा-अर्चना के बाद लगभग 4:25 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए पट खोल दिए जाएंगे।

अनुमान है कि दो लाख से अधिक श्रद्धालु इस अवसर पर जलार्पण करेंगे। सुबह 4 बजे से 6 बजे तक जल चढ़ाने का विशेष क्रम चलेगा। इसके बाद अगले दिन सुबह 8 बजे पुनः पट खोलकर नियमित पूजा प्रारंभ होगी।

आस्था का महासागर

महाशिवरात्रि के अवसर पर देवघर धाम आस्था के महासागर में बदल जाता है। देश के विभिन्न राज्यों से शिवभक्त यहां पहुंचते हैं। “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयकारों से पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है।

पंचशूलों की पूजा और गठबंधन की रस्म ने इस आध्यात्मिक उत्सव की शुरुआत को और भी भव्य बना दिया है। श्रद्धालु इसे शुभ संकेत मानते हैं कि बाबा बैद्यनाथ और मैया पार्वती की कृपा पूरे वर्ष बनी रहेगी।

प्रशासनिक तैयारी

भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने व्यापक तैयारी की है। सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएं और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है।

जलार्पण के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गई हैं। महिला, वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

सदियों पुरानी परंपरा का जीवंत स्वरूप

देवघर में महाशिवरात्रि से पूर्व पंचशूल उतारने और पुनर्स्थापित करने की परंपरा सदियों से जीवंत है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

हर वर्ष यह अनुष्ठान नई ऊर्जा और आस्था के साथ सम्पन्न होता है। पंचशूलों का स्पर्श कर भक्त अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

Bihar Diwas 2023: तीन दिवसीय समारोह की हुई शुरुआत ; मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सहित अन्य मंत्री उद्घाटन समारोह में रहे मौजूद

पटना । बुधवार 22 मार्च को बिहार अपना 111वां स्थापना दिवस मना रहा है । 1912 में आज ही के दिन बिहार को बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग किया गया था। बिहार राज्‍य का गठन आज ही के दिन हुआ था । इसीलिए प्रतिवर्ष 22 मार्च को Bihar Diwas मनाया जाता है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को गांधी मैदान में तीन दिवसीय बिहार दिवस समारोह का उद्घाटन किया । उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सहित अन्य मंत्री उद्घाटन समारोह में रहे मौजूद ।

Bihar Diwas 2023 अवसर पर बोलते हुए, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “हमने राज्य में 2010 में बिहार दिवस मनाना शुरू किया था। अब बिहार दिवस अन्य राज्यों और विदेशों में भी मनाया जाने लगा है। बिहार का गौरवशाली इतिहास रहा है।

“पटना के गांधी मैदान में आयोजित बिहार दिवस के अवसर पर आए लोगों को संबोधित करते हुए बिहार के सीएम नीतीश ने फिर से विशेष राज्य की मांग को दोहराते हुए कहा कि हमलोग बहुत पीछे है. राज्य के विकास के लिए विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए।

उन्होंने बिहार के साथ बौद्ध धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म और सूफीवाद के विशेष संबंध का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने पद्म श्री प्राप्तकर्ता और सुपर 30 कोचिंग संस्थान के संस्थापक आनंद कुमार को सम्मानित किया। उन्होंने शौर्य श्रेणी में पश्चिम चंपारण के धीरज कुमार और दरभंगा की साइकिल गर्ल ज्योति कुमारी को जबकि समाज सेवा श्रेणी में छपरा की पाल साक्षी को सम्मानित किया।

Bihar Diwas समारोह में कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया और प्रसिद्ध गायकों के प्रदर्शन द्वारा चिह्नित किया गया।

उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा, “बिहार लगातार विकास कर रहा है. हम 10 लाख सरकारी नौकरी और 10 लाख रोजगार के अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम जल्द ही अपना वादा पूरा करेंगे।”

महायज्ञ का समापन 24 मार्च को होगा।

Ganga Vilas Cruise ‘उथले पानी’ के कारण बिहार में फंसा; SDRF ने पर्यटकों को तट तक पहुँचाया

छपरा/पटना । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाने के कुछ दिनों बाद ही Ganga Vilas Cruise अपनी 51 दिनों की यात्रा के तीसरे दिन सोमवार को बिहार के छपरा में उथले पानी के कारण फंस गया।

क्रूज के फंसने की खबर के बाद, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीम ने चिरांद सरन की यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए एक छोटी नाव में पर्यटकों को बचाया।

Ganga Vilas Cruise

51 दिनों में, विदेशी पर्यटकों के साथ लक्जरी Ganga Vilas Cruise गंगा-भागीरथी-हुगली, ब्रह्मपुत्र और वेस्ट कोस्ट नहर सहित भारत में लगभग 3,200 किलोमीटर की 27 नदी प्रणालियों को कवर करेगा।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी से शुरू हुआ Ganga Vilas Cruise वाराणसी की प्रसिद्ध गंगा आरती जैसे विरासत स्थलों और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और सुंदरबन डेल्टा जैसे अभयारण्यों सहित 50 प्रमुख पर्यटन स्थलों का दौरा करेंगे। बांग्लादेश में, क्रूज लगभग 1,100 किलोमीटर की यात्रा करेगा।

रंगारंग कार्यक्रम के साथ विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेले का आगाज, डिप्टी सीएम ने किया उद्घाटन

सोनपुर । सोनपुर में विश्वप्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र मेला का शानदार आगाज किया गया। जिसका उदघाटन बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया।

इस दौरान राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के अलावे स्थानिए सांसद राजीव प्रताप रूढ़ि सहित मंत्री आलोक मेहता के अलावा कई विधायक भी मौजूद रहें। उदघाटन के साथ 32 दिवसीय विश्वप्रसिद्ध सोनपुर मेले का शुभारंभ हो गया।

हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला के उद्घाटन अवसर पर मुख्य सांस्कृतिक पंडाल में उप मुख्यमंत्री व अन्य विशिष्ट अतिथियों को मंच पर पुष्प गुच्छ स्मृति चिन्ह व शॉल देकर सम्मानित किया गया। जिसके बाद डिप्टी सीएम ने सारण द्वारा निर्मित मेला एप का लोकार्पण किया।

उदघाटन कार्यक्रम के बाद रात दस बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा जिसमें बिहार गौरव गान, प्राची पल्लवी साहू द्वारा नृत्य और ऋचा शर्मा, पार्श्व गायिका द्वारा गायन होगा.गौरतलब हो कि सोनपुर मेला में कुल 2136 स्टाल लगाए गए हैं मेले में हर विभागों के अलावा दैनिक उपयोग के सामान भी मिलेंगे.यह मेला 7 सितंबर तक चलेगा।

जहानाबाद के मखदुमपुर में दंगल, नई दिल्ली के पहलवान अनुज बना विजेता

मखदुमपुर काली मंदिर के समीप स्वर्गीय सुशांत यादव स्मृति के द्वारा दंगल का आयोजन हुआ। दंगल देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। प्रखंड के जमुना नदी स्थित काली मंदिर के समीप स्वर्गीय सुशांत यादव के स्मृति में दंगल प्रतियोगिता आयोजित किया गया।

प्रतियोगिता में बिहार, झारखंड, हरियाणा एवं नई दिल्ली से आए पहलवानों ने अपने जलवे दिखाए। वही दंगल देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे ,दंगल के आयोजक सुमन यादव ने बताया कि उनके भाई स्वर्गीय सुशांत यादव प्रत्येक वर्ष छठ पर्व के अवसर पर दंगल आयोजित करते आते थे, इनके स्मृति ने यह दंगल आयोजित किया गया है।

उन्होंने कहा मगध इलाके में दंगल का एक अलग ही महत्व है जिस परंपरा को निर्वहन करने के लिए दंगल आयोजित किया गया है दंगल सभी पहलवानों ने अपने जलबे दिखाए ,अंततः नई दिल्ली से आये अनुज पहलवान विजेता घोषित किया गया ,वही उप विजेता धिनधोर विगहा निवासी अखिलेश यादव को चुना गया , कार्यक्रम में प्रमुख प्रतिनिधि अजय यादव, अजीत कुमार, जयंत कुमार, विजय साव, धीरज यादव जितेंद्र यादव पप्पू साव ,अनिल पासवान ,संतोष रंजन ,रणजीत यादव,समेत हजारों की संख्या में भीड़ मौजूद थे।

सिमरिया में कल्पवास मेले का हुआ उद्घाटन

बेगूसराय । सिमरिया में एक माह तक चलने वाले कल्पवास मेले का हुआ उद्घाटन। 18 नवंबर तक चलेगा कल्पवास मेला ।

डीएम रोशन कुशवाहा ,एसपी योगेंद्र कुमार, भाजपा विधायक कुंदन सिंह, एमएलसी सर्वेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया उद्घाटन ।

दो साल बाद प्राचीन शिव मंदिर वाणावार में चहल–पहल, सांसद ने मेले का किया उद्घाटन

सावन का पावन महीना शुरू हो गया है। साथ ही जहानाबाद जिले के मखदुमपुर प्रखंड के ऐतिहासिक और प्राचीन शिव मंदिर वाणावार में श्रद्धालुओं की भीड़ लगने लगी है।

गुरुवार को सांसद चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी, मखदुमपुर विधायक, डीएम रिची पांडेय, डीडीसी परितोष कुमार समेत कई अधिकारी और जिले के नेता मौजूद रहे। बराबर स्थित पातालगंगा पहुंचे, जहां श्रावणी मेला का शुभारंभ किया गया। इसके पहले डीएम, डीडीसी ने सामूहिक रूप से मेले का शुभारंभ करने के लिए भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना की।


पातालगंगा के समीप सिद्धेश्वर चोटी जाने वाले मुख्य द्वार के समीप पंडितों के द्वारा धार्मिक अनुष्ठान कार्यक्रम की शुरुआत कराई गई। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भगवान गणेश के अलावा अन्य देवी देवताओं की आराधना की गई। भोलेनाथ का अभिषेक किया गया। इसके बाद सांसद ने श्रावणी मेला का उद्घाटन किया। भीषण गर्मी के बावजूद भी अनुष्ठान को लेकर लोगों में उत्साह देखते ही बन रहा था।

अनुमान है कि इस बार लगभग 10 लाख लोग जल अर्पण के लिए गुफा में पहुंचेंगे। विधिवत उद्घाटन के बाद सांसद ने पातालगंगा समय कई जगहों का निरीक्षण किया। साथी जल्द ही रोपवे के शुरू होने का आश्वासन भी दिया। सांसद ने कहा कि मेला क्षेत्र का दौरा दो दिन पहले भी उन्होंने किया था। साथ ही सुविधाओं को बेहतर बनाने को लेकर डीएम से बात भी की थी।

आज से शुरू हुआ मेला पूरे सावन तक चलेगा। जिसको लेकर बड़ी संख्या में पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है। कोरोना काल में 2 साल तक सुनसान रहने वाला बराबर पहाड़ इस बार लगे मेले की वजह से एक बार फिर से गुलजार हो गया है।

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सूर्य भगवान की प्रतिमा की स्थापना को लेकर कलश यात्रा

जहानाबाद । जिले के घोसी गांव में सूर्य भगवान का मंदिर का निर्माण हुआ है इस मंदिर में सुय भगवान की प्रतिमा की स्थापना की जानी है। जिसके लिए गुरुवार को सुबह बड़ी संख्या में पुरुष एवं महिलाएं कलश यात्रा निकाला गया ।

घोसी गांव से चलकर फल्गु नदी से जल भरने के लिए बड़ी संख्या में पुरुष एवं महिलाएं इस कलश यात्रा में शामिल हुए घोसी बाजार होते हुए कलश यात्रा फल्गु नदी तक जाएगा। और वहां से जल लेकर घोसी गांव सूर्य मंदिर के प्रांगण में संपन्न किया जाएगा। इस कलश यात्रा में बैंड बाजे के साथ घोड़े इस सवारी को भी शामिल किया गया है।

घोसी गांव में यह कार्यक्रम 4 दिनों तक चलेगा 8 तारीख को भंडारा का आयोजन किया जाएगा । इस कार्यक्रम में बड़े-बड़े साधु महात्मा शामिल हो रहे हैं। इसमें प्रवचन का भी आयोजन किया जाएगा जिस में शामिल होकर लोग साधु महात्मा के मधुर वाणी के वचन सुनकर लोग लाभान्वित होंगे ।

ज्ञात हो कि सूर्य मंदिर बन जाने से छठ व्रतियों को काफी फायदा होगा लोग भगवान सूर्य के आराधना करने के लिए दूरदराज जाना पड़ता था। लेकिन घोसी गांव में पोखर के किनारे सूर्य मंदिर के निर्माण होने से आसपास के लोग को सूर्य भगवान की आराधना करने में काफी सुविधा होगी सूर्य भगवान का प्रतिमा स्थापना के कार्यक्रम प्रारंभ होते ही पूरे गांव में भक्ति की बयार बहने लगी है। गांव वासियों खुशी का इजहार करते हुए कहा कि आज हम लोगों के लिए अत्यंत खुशी का पल है।

छठ पर्व में सूर्य भगवान की आराधना करने के लिए दूरदराज जाना पड़ता था ।लेकिन मंदिर के निर्माण एवं सूर्य भगवान की प्रतिमा स्थापित होने से हम लोगों को अब कहीं दूर दराज छठ करने के लिए नहीं जाना पड़ेगा ।और गांव में ही छठ पूजा की आयोजन किया जाएगा इस कलश यात्रा में ढोल नगाड़े के साथ घुड़सवारी करते हुए जय श्रीराम के नारे लगाते हुए पुरुष एवं महिलाएं फल्गु नदी की पर जा रहे हैं इस कलश यात्रा से पूरा घोसी बाजार पूरा गांव एवं इलाका भक्ति में हो गया है।

सभी लोग अपने माथे पर कलश रखकर जय श्री राम एवं सूर्य भगवान की जय कार लगाते हुए इस कलश शोभायात्रा में शामिल हुए हैं।

Bihar News : राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री इस्कॉन मंदिर के लोकार्पण कार्यक्रम में हुए शामिल

पटना 03 मई 2022 : राज्यपाल श्री फागू चौहान एवं मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज इस्कॉन मंदिर के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री का स्वागत इस्कॉन मंदिर प्रबंधन द्वारा फूल माला एवं अंगवस्त्र पहनाकर तथा प्रतीक चिंह भेंटकर किया गया।

मंदिर में विधिवत पूजा अर्चना एवं राधा कृष्ण की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के बाद इसे आमलोगों के दर्शनार्थ खोल दिया गया। मंदिर के पट खुलने के पश्चात् मुख्यमंत्री ने आरती पूजन कर राज्य की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे, बिहार विधानसभा अध्यक्ष श्री विजय कुमार सिंहा, शिक्षा मंत्री श्री विजय कुमार चौधरी, भवन निर्माण मंत्री श्री अशोक चौधरी, विधायक श्री नंदकिशोर यादव, विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आर०एन० सिंह, इस्कॉन के जय पताका स्वामी गुरू महाराज, लोकनाथ स्वामी महाराज, गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज, महाविष्णु स्वामी महाराज, भक्त पुरुषोत्तम स्वामी महाराज, पटना इस्कॉन के अध्यक्ष कृष्ण कृपा दास सहित अन्य संतगण, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त परामर्शी श्री मनीष कुमार वर्मा, बिहार राज्य नागरिक परिषद् के पूर्व महासचिव श्री अरविंद कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं श्रद्धालु उपस्थित थे।

क्यों याद किये जाते हैं वीर कुँवर सिंह को

बाबू कुँवर सिंह का विजयोत्सव — 23 अप्रैल

1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में भाग लेकर बिहार सहित पूरे भारत के नाम को रौशन करने वाले जगदीशपुर के 80 वर्षीय राजा बाबू कुँवर सिंह थे। एक तरफ दिल्ली में अंतिम मुगल सम्राट 80 वर्षीय बहादुरशाह जफर अपने काँपते हुए हाथों से पत्र लिखकर समस्त भारत के देशी नरेशों को संग्राम में भाग लेने के लिए आह्वान कर रहे थे तो दूसरी तरफ करीब उसी उम्र के वीर बांकुरा बाबू कुँवर सिंह तलवार हाथ में लेकर राजपूती शान का प्रदर्शन करते हुए अपने जनपद सहित सभी देशवासियों को कुर्बानियों के लिए तैयार कर रहे थे।

मेरठ, दिल्ली एवं देश के अन्य भागों की क्रांति दानापुर छावनी में भी सुनाई पड़ रही थी। कमिश्नर टेलर दानापुर के सैनिकों को शस्त्र-विहीन करना चाहता था जिससे हिंदू-मुस्लिम सैनिक उत्तेजित हो उठे और 24 जुलाई 1857 को बगावत करते हुए अपनी वर्दी उतार कर आरा के लिए चल पड़े । दानापुर छावनी की तीन पालटनों (7, 8 एवं 40) का विद्रोह ब्रिटिश सत्ता के लिए खुली चुनौती थी । दानापुर के क्रांतिकारी सेना के जगदीशपुर पहुंचते ही बूढ़ कुँवर सिंह की रगों में जवानी का नशा चढ़ गया । अपने महल से निकलकर उन्होंने क्रांतिकारी सेना का नेतृत्व उसी तरह ग्रहण किया जैसे 11 मई 1857 को मेरठ से आए दो हजार घुड़सवार सैनिकों का नेतृत्व 80 वर्षीय मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर ने किया था । दानापुर छावनी के विद्रोही सेना के साथ कुँवर सिंह आरा पहुंचे और जेलखाने के कैदियों को रिहा कर अंग्रेजी दफ्तरों को ध्वस्त कर दिया ।

महाराजा कॉलेज परिसर में अवस्थित छोटे से किले- ‘आरा हाउस’ को घेरकर उसमें छिपे अंग्रेजों और सिक्ख सेनाओं को हथियार डालने के लिए उन्होंने बाध्य किया । तीन दिनों तक आरा हाउस का युद्ध चलते रहा । जब किले में पानी की कमी हुई तब सिक्ख सैनिकों ने 24 घंटे के अंदर एक नया कुंआ खोदकर तैयार कर लिया । उस समय आरा हाउस (ब्वायर कोठी) के अंदर आधुनिक हथियारों से सुसज्जित 50 सिक्ख एवं 16 अंग्रेज सैनिक थे जो इसमें शरण लिए अंग्रेजों एवं उनके परिवारों की रक्षा के लिए तैनात थे । आरा हाउस (ब्वायल कोठी) की लड़ाई ही बाबू साहेब की अंग्रेजी सल्तनत के साथ आरा की लड़ाई थी और यह लड़ाई करीब एक सप्ताह चली ।

वीर कुँवर सिंह
वीर कुँवर सिंह

अब पूरे आरा पर बाबू कुँवर सिंह का शासन हो गया और वे राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के 5000 क्रांतिकारी सिपाहियों के सर्वमान्य नेता तथा समस्त भोजपुरी भाषी जनता के कंठहार बन गए । जनता ने ‘तेगवा बहादुर’ की पदवी से उनका यशोगान किया । बसंतकाल में आज भी भोजपुरी भाषी अपने झोपड़ों-चौपालों और गांव के खेत-खलिहानों में गा उठते हैं–

“बाबू कुंवर सिंह ‘तेगवा बहादुर’
बंगला में उड़ेला अबीर”।

कुँवर सिंह के नेतृत्व में ब्रिटिश सल्तनत के विरूद्ध में आरा का यह विद्रोह अब पूरे शाहाबाद क्षेत्र में राष्ट्रीय क्रांति का रूप ले चुका था । अंग्रेजों के लिए आरा नगर सैनिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण स्थल था । वे हर हालत में आरा को बचाना चाहते थे । परिणामस्वरुप, आरा हाउस में घिरे अंग्रेजों की प्राण रक्षा के लिए 500 यूरोपियन गोरे सैनिकों एवं सिक्खों की एक टुकड़ी के साथ कैप्टन डनवर 29 जुलाई 1857 को दानापुर छावनी से आरा के लिए रवाना हुआ । आरा पहुंचने से पूर्व ही रात में बाबू कुँवर सिंह के सैनिकों से डनवर की फौज का मुकाबला हुआ जिसमें 500 सैनिकों में से सिर्फ 50 घायल होकर और केवल तीन जीवित अधिकारी दानापुर पहुंचे। कैप्टन डनवर सहित अन्य सभी सैनिक मारे गए ।

कैप्टन डनवर की पराजय के बाद आरा पर पूर्ण रूप से बाबू कुँवर सिंह का अधिकार हो गया और पूरा शाहाबाद स्वतंत्र हो गया । अब बाबू कुँवर सिंह ने आरा में पूर्वी पश्चिमी थाना स्थापित कर गुलाम महिया को दोनों थाने का मजिस्ट्रेट नियुक्त किया । मिल्की मुहल्ले के शेख मुहम्मद अजीमुद्दीन पूर्वी थाने के जमादार नियुक्त किए गए। दीवान शेख अफजल के दोनों पुत्र तुराव अली एवं खादिम अली इन थानों के कोतवाल बनाए गए ।

बीबीगंज की लड़ाई– कैप्टन डनवर के मारे जाने के समाचार से मेजर विंसेंट आयर 2 अगस्त 1857 को आरा की ओर कूच कर ही रहा था कि बाबू कुँवर सिंह के सैनिकों के साथ बीबीगंज में उसका भीषण संग्राम हुआ। अंततः मेजर आयर 3 अगस्त 1857 को आरा पहुंचकर कुँवर सिंह के कब्जे से आरा को मुक्त कराया ।

उसके बाद मेजर आयर की विशाल सेना का मुकाबला दुलौर में बाबू कुँवर सिंह के सैनिकों के साथ हुआ । 12 अगस्त को मेजर आयर की सेना जगदीशपुर पहुंची जहाँ कुँवर सिंह के साथ कई दिनों तक संग्राम होता रहा। अंततः मेजर आयर ने 14 अगस्त को जगदीशपुर गढ़ में आग लगा दी, सामान्य लोगों के मकान ध्वस्त कर बड़े पैमाने पर जगदीशपुर के आम लोगों की हत्या कर दी । शिवमंदिर का भी विनाश करते हुए उसने गर्व से कहा, “मैंने नए हिंदू मंदिर को नष्ट इसलिए किया, क्योंकि ब्राह्मणों ने भी कुँवर सिंह को युद्ध के लिए प्रोत्साहित किया था” (जी. डब्ल्यू फॉरेस्ट, ए हिस्ट्री ऑफ इंडियन म्यूटिनी, भाग-3, पृष्ठ 455)। उल्लेखनीय है कि दुलौर से जगदीशपुर जाने के क्रम में मेजर आयर ने रास्ते में आतंक मचाते हुए मीलों तक घायल लोगों को सड़क के किनारे पेड़ों पर टांग-टांग कर फांसी देकर लटका दिया । जो भी विप्लवी दिखाई पड़ा, उसे मार डाला गया । कड़ी शराब पीकर अंग्रेजों ने एसे राक्षसी कार्य किया (मार्टिन, इंडियन एम्पायर, भाग-2, पृ 406)। इसके बाद कैप्टन लाॅ इस्ट्राजे ने बाबू कुँवर सिंह का जितौरा गढ़ नष्ट कर दिया । लेफ्टिनेंट सैक्सन ने कुँवर सिंह के दलीपपुर एवं मीठहां के मकानों को भी नष्ट कर दिया । दानापुर छावनी के 40 नंबर पल्टन के बचे 100 सैनिकों को संगीनों और गोलियों से उड़ा दिया गया। गुलाम महिया, अब्बास अली और वन्दे अली को क्रांति के असफल होने पर गोपाली चौक पर फांसी दी गई । भेखू जोलहा, चकवरी कहार भी कुँवर सिंह के समर्थक होने के चलते मारे गए ।

बाबू कुँवर सिंह का जगदीशपुर महल सहित पूरा जगदीशपुर पूर्ण रूप से नष्ट हो गया । अंग्रेजों द्वारा जगदीशपुर गढ़ पर कब्जा के बाद बाबू कुँवर सिंह ने महल की स्त्रियों और 12 सौ सैनिकों के साथ जगदीशपुर से निकलकर अन्यत्र मोर्चाबंदी कर अंग्रेजों से बदला लेना चाहा । अंग्रेजों की विशाल सेना के चलते भले जगदीशपुर पर उनका कब्जा हुआ हो, लेकिन अत्यल्प साधनों के बावजूद मात्र जन-समर्थन के बल पर आधुनिक शस्त्रों से सुसज्जित ब्रिटिश सेना का मुकाबला जिस रूप में कुँवर सिंह ने किया, वह स्वाधीनता-संग्राम में स्वर्णाक्षरों में अंकित है । जगदीशपुर की पराजय के पश्चात बाबू कुँवर सिंह अपने समर्थकों एवं सिपाहियों के साथ सासाराम की पहाड़ियों की ओर चल पड़े, जहाँ उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ भावी संग्राम की योजना बनाकर स्वतंत्रता आंदोलन की चिंगारी को प्रज्वलित रखा । स्वतंत्रता आंदोलन के बाबू कुँवर सिंह प्रथम नायक बने जिन्होंने बहादुरशाह जफर के सपने को साकार किया । उल्लेखनीय है कि अंग्रेजी सेना द्वारा गिरफ्तार हुए मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर ने मेजर हडसन को ललकारते हुए कहा था,

“ग़ज़ियों में बू रहेगी जब तलक ईमान की,
तख्त ये लंदन तक चलेगी तेग हिंदुस्तान की।”

आरा (जगदीशपुर) में अंग्रेजों के साथ बाबू कुँवर सिंह के युद्ध का प्रभाव मुजफ्फरपुर, गया, संथाल परगना, हजारीबाग, चतरा, सिंहभूमि, पलामू तथा छपरा में जबरदस्त दिखाई दिया ।

बाबू कुँवर सिंह का विजय-अभियान-‘विजयोत्सव’— अपने साथियों एवं समर्थकों के अदम्य उत्साह और शौर्य से उत्साहित बाबू कुँवर सिंह का नया विभामय रूप भारतीय इतिहास में प्रकट हुआ । जगदीशपुर के पतन के बाद उनका क्षात्र तेज उमड़ पड़ा और वे अब पूरी भारतीय राष्ट्रीयता के अग्रदूत बनकर विदेशी सत्ता को मिटाने के लिए कृतसंकल्प हो गए। सासाराम के शाह कबीरूद्दीन ने अंग्रेजों की सहायता में बाबू कुँवर सिंह का जबरदस्त विरोध करते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोकना चाहा । बाबू कुँवर सिंह 26 अगस्त 1857 को रोहतास छोड़ते हुए अपने हजारों अनुयायियों के साथ आगे बढ़ते रहे । मिर्जापुर जाने के क्रम में उन्होंने जी. टी. रोड पर अधिकार किया । मिर्जापुर में बाबू कुँवर सिंह का अधिक प्रभाव था। घोरावत, शाहरोत होते हुए 30 अगस्त 1857 को कुँवर सिंह नेवारी और 9 सितंबर को 600 सैनिक और 5000 लोगों के साथ कटरा पहुंचे । 10 सितंबर 1857 को कुँवर सिंह ने रीवां में प्रवेश किया जहाँ हस्मत अली एवं हरचन्द्र राय ने उनका भरपूर सहयोग किया । रीवां के बाद बाबू कुँवर सिंह बांदा गए जहाँ के नवाब ने उनकी भरपूर सहायता की । 20 अक्टूबर को उनकी सेना कालपी पहुंची । 21 नवम्बर को वे ग्वालियर की क्रांतिकारी सेना, देशी सेना तथा अपने समर्थकों के साथ कानपुर पहुँचे । कानपुर के बाद अपनी सेना के साथ वे लखनऊ के लिए रवाना हुए जहाँ उनका स्वागत किया गया । लखनऊ में अवध के नवाब ने उनकी सहायता करते हुए उन्हें आजमगढ़ की ओर जाने के लिए शाही फरमान दिया । 15 अगस्त 1857 से 10 फरवरी 1858 के दौरान बाबू कुँवर सिंह ने स्वाधीनता की लड़ाई जारी रखी।

मिलमैन तथा डेम्स की पराजय — 22 मार्च 1858 को आजमगढ़ से 25 मील दूर अतरौलिया नामक स्थान पर कुँवर सिंह ने मिलमैन की विशाल सेना को तथा 28 मार्च 1858 को कर्नल डेम्स को पराजित कर आजमगढ़ पर अधिकार किया ।

जगदीशपुर की ओर

अब वे अपनी पैतृक रियासत जगदीशपुर को भी स्वतंत्र करना चाहते थे । इसी बीच उन्होंने लुगार्ड एवं डगलस को पराजित करते हुए 22 अप्रैल 1858 को जब बलिया के शिवपुर घाट पर गंगा पार कर रहे थे तब उनकी भुजा में गोली लगी जिसे काटकर उन्होंने गंगा में फेंक दिया । सावरकर ने कहा है कि वीरत्व की यह चेतना स्वतंत्रता-संग्राम के इतिहास में अविस्मरणीय बनी रहेगी । 22 अप्रैल 1858 को बाबू कुँवर सिंह 1000 पैदल सैनिकों एवं घुड़सवारों के साथ जगदीशपुर महल पहुंच गए । अपनी कटी हुई बांह तथा चोटिल जांघ के बावजूद उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध कर अपनी मातृभूमि जगदीशपुर में अपने अपूर्व रण कौशल का प्रदर्शन किया । 23 अप्रैल को जगदीशपुर में कैप्टन लीग्रैण्ड की सेना से बाबू कुँवर सिंह की सेना का मुकाबला हुआ और अंग्रेजों की पराजय के साथ-साथ कैप्टन लीग्रण्ड भी युद्ध में मारा गया । युद्ध में अंग्रेजों की पराजय के बाद प्रसिद्ध इतिहासकार चार्ल्स बाल ने युद्ध में सम्मिलित एक अंग्रेज ऑफिसर के लेख को उद्धृत करते हुए लिखा है, “वास्तव में इसके बाद जो कुछ हुआ, उसे लिखते हुए मुझे अत्यंत लज्जा आती है । युद्ध का मैदान छोड़कर हमने जंगल में भागना शुरु किया…. अफसरों की आज्ञाओं की किसी ने परवाह नहीं की । चारों ओर आहों और रोने के सिवा कुछ नहीं था । मार्ग में अंग्रेजों के गिरोह के गिरोह गर्मी से गिरकर मर गए । अस्पताल पर कुँवर सिंह ने पहले ही कब्जा कर रखा था । 16 हाथियों पर सिर्फ हमारे घायल साथी लदे हुए थे….। हमारा इस जंगल में आना ऐसी ही हुआ जैसा पशुओं का कसाई खाना में जाना । हम वहाँ केवल बध होने के लिए गए थे।”

लीग्रैण्ड की पराजय के बाद 25 अप्रैल 1858 को वीर बांकुड़े बाबू कुँवर सिंह ने अपने ध्वस्त पैतृक महल में अंतिम सांस लेकर भारतीय स्वतंत्रता के लिए युवा पीढ़ी को बड़ा संदेश दिया । विनायक दामोदर सावरकर ने लिखा है, “क्या कोई इससे भी पावन मृत्यु है, जिसकी अपेक्षा कोई राजपूत करेगा ।” सुंदरलाल ने लिखा है, “वीर कुँवर सिंह की मृत्यु के समय स्वाधीनता का ‘हरा ध्वज’ उनकी राजधानी पर फहरा रहा था।”

पराधीन भारत को ब्रिटिश सत्ता के बंधन से मुक्त करने का जो अदम्य संकल्प वृद्धावस्था में बाबू कुँवर सिंह ने लिया था, वह भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है । 1857 के आंदोलन के अविस्मरणीय अनेक योद्धाओं में बहादुरशाह जफर, नाना साहेब, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई आदि का अंत वीर बांकुड़े बाबू कुँवर सिंह जैसा सुखद नहीं था ।

23 अप्रैल 1858 भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम ‘विजयोत्सव दिवस’ है जिसका उदाहरण विश्व इतिहास में नहीं है । अपना सर्वस्व बलिदान कर अंग्रेजों द्वारा ध्वस्त जगदीशपुर महल पर पुनः विजय पताका फहराकर उसमें अंतिम साँस लेना उनके अदम्य उत्साह एवं संकल्प का परिचायक है । आजमगढ़ से गंगा पार करने तक तथा लीग्रैण्ड के साथ उनकी युद्ध की समीक्षा करते हुए भले उन्हें ‘गुरिल्ला युद्ध का अप्रतिम योद्धा’, ‘शाहाबाद का शेर’, ‘बिहार का स्वाभिमान’ तथा ‘तेगवा बहादुर’ कहा गया हो, लेकिन सही अर्थ में वे समस्त भारतवासियों के लिए प्रेरणास्वरूप हैं । जहाँ बाबू कुँवर सिंह देश के स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में देश का गौरव बढ़ा रहे हैं, वहाँ 23 अप्रैल का विजयोत्सव उनके शौर्य एवं बलिदान की गौरवमयी गाथा से देशवासियों को उत्प्रेरित कर रहा है । वे सिर्फ जगदीशपुर, बिहार के ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए मान, अभिमान और स्वाभिमान के प्रतीक हैं । उन्होंने समाज के सभी वर्गों के साथ मिलकर 1857 में अंग्रेजों से युद्ध किया था । देश के लिए अपना सर्वस्व बलिदान देने वाले वीर स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने आजादी के 75वें वर्ष को बाबू कुँवर सिंह के शौर्य के प्रतीक 23 अप्रैल को ‘अमृत महोत्सव’ के रूप में मना कर ‘तेगवा बहादुर’ बाबू कुँवर सिंह को सर्वोत्तम श्रद्धांजलि तो दिया ही है, वीरंगना रानी लक्ष्मीबाई की जयंती को ग्वालियर में ‘अमृत महोत्सव’ का दर्जा देकर अपने राजधर्म का अनुपालन भी किया है, जिनके बारे में सुभद्रा कुमारी चौहान ने लिखा है–

“बुंदेले हरबोलों के मुंह,
हमने सुनी कहानी थी ।
खुब लड़ी मर्दानी वह तो
झांसी वाली रानी थी ।”

पेड़ के अंदर से निकली मूर्तियां, स्थानीय लोग बताते हैं सैकड़ों साल पुरानी

जीवन के अनुभवों के आधार पर आस्था निर्मित होती है। आम इंसान उसी में विश्वास कर लेता है, जिसके विषय में पूर्वज उसे सुनाते हैं। विश्वास मनुष्य की मूल प्रकृति है, जबकि आस्था उसके संस्कारों का परिणाम होता है।

आस्था और विश्वास का एक ऐसा ही पेड़ है, जहानाबाद के रतनी प्रखंड में जहां दूर दूर से पूजा करने लोग आते हैं। जहानाबाद से 20 किलोमिटर जिला का सबसे दक्षिणी इलाका रतनी फरीदपुर। इसी प्रखंड में है कंटाही बिगहा। इस गांव का एक बरगद का पेड़ लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। पेड़ के अंदर पत्थर की आकृतियां हैं। जिसकी पूजा करने लोग दूर दूर से आते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि बरगद का पेड़ सैकड़ों साल पुराना है। जिसके अंदर शिव परिवार की मूर्तियां हैं।

महादेव शिव शंकर के दो रूपों में पूजा की जाती है। एक मूर्ति रूप में दूसरी शिवलिंग के रूप में। उनके मंदिर शहर, गांव और कस्बे हर जगह मिलेंगे। वैसे तो दोनो स्वरूपों की पूजा श्रेष्ठ मानी जाती है लेकिन शिवलिंग की पूजा सर्वश्रेष्ठ होती है।
कंटाही बिगहा में भी आस्थावान अपनी मन्नत पूरी होने पर पहुंचते हैं। और शिवलिंग के साथ ही पूरे शिव परिवार की पूजा करते हैं।

विश्व विरासत दिवस पर बिहार के पारंपरिक कलाओं के प्रशिक्षण के लिए बिहार संग्रहालय में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया

यह कार्यशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पटना मंडल, बिहार पुराविद परिषद्, फेसेस पटना और बिहार म्यूजियम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यशाला में पटना विमेंस कॉलेज, नोट्रे डेम अकैडमी, इंटरनेशनल स्कूल, रेडियंट इंटरनेशनल स्कूल, केंद्रीय विद्यालय नंबर-2, आर्मी पब्लिक स्कूल दानापुर और उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसन्धान संस्थान से कुल 70 छात्रों ने मधुबनी पेंटिंग, मृण्मूर्ति कला, पटना कलम, मञ्जूषा कला और टिकुली कला का प्रशिक्षण प्राप्त किया। युवा कलाकार एवं प्रशिक्षकों ने छात्रों को उनके पसंद की कलाओं का प्रशिक्षण दिया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद बिहार संग्रहालय के महानिदेशक एवं मुख्यमंत्री के सलाहकार अंजनीकुमार सिंह ने अपने उद्घाटन भाषण में आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि बिहार की पारंपरिक कला को सीखने और समझने के लिए इतनी संख्या में छात्रों के उत्साहपूर्ण भागीदारी से मैं अभिभूत हूँ। यह इस बात का प्रमाण है कि दुनिया चाहे जितनी बदल गई हो, बिहार के युवाओं की कला-प्रियता कम नहीं हुई है। हमारे युवाओं के हाथों में हमारी कलात्मक विरासत सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि बिहार की पारंपरिक कलाएं केवल शौकिया ही नहीं बल्कि रोजगार का भी बहुत बड़ा साधन है। हमने सरकार की ओर से एक प्रशिक्षण संस्थान भी खोला है, जिसमें प्रशिक्षण देने के लिए प्रोफेसर की नियुक्त डिग्री के आधार पर नहीं बल्कि काम के आधार पर किया गया है।

विशिष्ट अतिथि के तौर पर बिहार के मूर्धन्य कलाकार और रेलवे स्टेशनों को मधुबनी कला से सजाने वाले भारत के प्रथम कलाकार राजेन्द्र प्रसाद मंजुल ने कहा कि बिहार की धरती परंपरागत कलाओं की विविध रंगों से सजी एक बड़े कैनवास की तरह है, जिसे समय का धूल कभी धूमिल नहीं कर सकता। युवा पीढ़ी में इन कलाओं के प्रति अनुराग पैदा करने के इस पावन कार्य की मैं भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूँ।

विश्व विरासत दिवस

कार्यशाला को संबोधित करते हुए बिहार पुराविद परिषद् के महासचिव डॉ. उमेश चन्द्र द्विवेदी ने कहा कि कि बिहार की भूमि कला-प्रसूता है। मानव सभ्यता के विकास की उषा काल में ही यहाँ कलाओं का उदय हुआ, जिसके पुरातात्विक प्रमाण शैल और गुफा चित्रों के रूप में आज भी हमारे सामने हैं। बिहार की कलाएं मानव जीवन की गहराइयों से उद्भूत हैं, अतः शाश्वत हैं। इन कलाओं के प्रति हमारा प्रेम ही इनके संरक्षण और विकास की गारंटी है। अतः आवश्यक है कि हम इन्हें अपनी नयी पीढ़ी को सौंपने का अथक प्रयास करें।

इस अवसर पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पटना मंडल के सहायक अधीक्षक पुरातत्वविद डॉ. प्रसन्ना दीक्षित, फेसेस की महासचिव सुनिता भारती, फेसेस के संस्कृति सचिव शुभम सिंह, बिहार संग्रहालय के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुनील कुमार झा सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।

उधर इस अवसर पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण,पटना सर्किल द्वारा नालंदा महाविहार पुरातात्विक स्थल (प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय) में भी छात्रों के बीच चित्रकला व भाषण प्रतियोगिता, विश्व धरोहर स्थलों की फोटो प्रदर्शनी और वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

प्रति वर्ष 18 अप्रैल को विश्व विरासत दिवस मनाया जाता है । संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था यूनेस्को द्वारा घोषित इस दिवस को मनाये जाने का उद्देश्य अपनी विरासत के प्रति जन जागरूकता पैदा करना है । इस समय 1150 के करीब विश्व विरासत स्थल हैं इनमें से 40 भारत में स्थित हैं । विश्व विरासत स्थल वे स्थल या विरासत हैं, जिनके बारे में यह स्वीकार किया जाता है कि इनका निर्माण किसी देश, जाति या पंथ का न होकर संपूर्ण मानव जाति की उपलब्धि है और इस प्रकार उनका सार्वभौमिक मूल्य है और इसलिए उनके अस्तित्व को संरक्षित एवं सुरक्षित रखना संपूर्ण मानव जाति का कर्तव्य है ।

2,500 साल पुरानी सायक्लोपियन वाॅल को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल करने की कवायद

पटना । सरकार ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को राजगीर में 2,500 साल से अधिक पुरानी साइक्लोपियन दीवार को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में सूचीबद्ध करने के लिए एक नया प्रस्ताव भेजा है। नीतीश सरकार ने भेजा प्रस्ताव।

राजगीर की साइक्लोपियन दीवार पत्थर की 40 किमी लंबी दीवार है, जिसे तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से पहले बनाया गया था। बाहरी दुश्मनों और आक्रमणकारियों से बचाने के लिए इस दीवार को बनाया गया था।

बिहार के दांडी गढ़पूरा के ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह की 92 वर्षगांठ

बिहार के दांडी’ गढ़पूरा के ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह की 92 वर्षगांठ पर इस वर्ष भी मुंगेर से वाया श्रीकृष्ण सेतु- बलिया-बेगूसराय- मंझौल होते हुए ऐतिहासिक व गौरवशाली नमक सत्याग्रह स्थल तक एक भव्य पदयात्रा आयोजित की जायेगी। वर्ष 2012 से प्रतिवर्ष आयोजित इस पदयात्रा के 12वें वर्ष पर आज पंचवीर में एक तैयारी बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता पंचवीर पंचायत की पूर्व सरपंच व कांग्रेस नेत्री रेणु देवी ने किया। कार्यक्रम का संचालन गढ़पुरा नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा समिति के सक्रिय सदस्य व भगत सिंह यूथ फाउंडेशन के पदाधिकारी राम प्रवेश चौरसिया ने किया।

अपने संबोधन में रेणु देवी ने कहा की बापू ने एक चुटकी भर नमक से कभी नहीं अस्त होने वाली ब्रिटिश सत्ता को सदा के लिए सूर्यास्त का रास्ता दिखा दिया था. देश के प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर “आजादी का अमृत उत्सव” पर्व मनाने की शुरुआत की, यह प्रशंसनीय है. आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के अवसर पर आयोजित इस वर्ष की पदयात्रा ऐतिहासिक होगी। उन्होने कहा की गढपुरा का ऐतिहासिक व गौरवशाली नमक सत्याग्रह स्थल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक अनमोल विरासत है और “बिहार केसरी” श्रीबाबू की कर्मभूमि है। वर्तमान व आनेवाली पीढियों के हित में ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह व स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों की स्मृतियों को संजोने व संवारने की सख्त जरूरत है। उन्होंने साहबपूर कमाल विधानसभा क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ बेगूसराय जिला व राज्य के लोगों से इस पदयात्रा में शामिल होने का आग्रह किया।

समाजसेवी राम आशीष पाठक ने कहा कि इस बार की पदयात्रा में लोग बढ़-चढकर भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। श्री पाठक ने बताया कि इस वर्ष की पदयात्रा कोविड नियमों के अनुपालन करते हुये भव्यता के साथ आयोजित की जायेगी।

संचालक कर रहे राम प्रवेश चौरसिया ने कहा कि समाज के सभी वर्ग के लोगों को अपने नौनिहालों व आनेवाली पीढियों के हित में अपनी विरासतों का संरक्षण व संवर्द्धन करना चाहिए। नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम की अनमोल विरासत को वर्तमान व आनेवाली पीढियों के हित में सुरक्षित, संरक्षित व संवर्द्धित करना है,जिससे की वह एक बेहतर नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें. उन्होंने बताया की नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा रुट पर जनसंपर्क और बैठक आयोजित कर समाज के सभी वर्ग के लोगों के बीच जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इस ऐतिहासिक व गौरवशाली कार्यक्रम का हिस्सा बन सकें।

अपने संबोधन में ग्रामीण व प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष संजीव झा ने कहा की वह खुद तो निश्चित तौर पर पदयात्रा में शामिल होंगे ही, साथ ही साथ जिलेवासियों से भी यह आग्रह करते हैं की वह इस ऐतिहासिक व गौरवशाली पदयात्रा में अवश्य शामिल हों।

जेडीयू प्रखंड अध्यक्ष शंभू कर्मशील ने साहेबपुर कमाल वासियों से पदयात्रा को सफल बनाने में सहयोग का निवेदन किया । तथा जिलेवासियों को देश की इस ऐतिहासिक, गौरवशाली,अनूठी व अपने-आप में ईकलौती पदयात्रा में शामिल होने का आग्रह किया।

इस बैठक में विद्यानंद सिंह शिक्षक नेता, अनिल पाठक, विनोबा पाठक, सुधाकर सिंह, रंजीत झा, निपुण झा, अमन झा, धर्मेंद्र पाठक, हीरा सिंह, सुनील जसवाल, भूषण पाठक भूषण पाठक, नारायण झा, सुबोध पाठक इत्यादि उपस्थित थे ।

उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करके हुआ आस्था के महापर्व चैती’छठ’ का समापन

छठ अकेली ऐसी पूजा है, जिसमें उगते हुए और अस्त होते हुए सूर्य की पूजा की जाती है। अस्त होता सूरज जहां आपको कालचक्र के बारे में बताता है तो वहीं उगता सूरज नई सोच और ऊर्जा का प्रतीक है और जीवन में आगे बढ़ने के लिए इन दोनों चीजों का होना बहुत ज्यादा जरूरी है। आपको बता दें कि आम से लेकर खास तक सभी ने पूरी श्रद्धा के साथ छठ पूजा की और अपने परिवार की खुशहाली के लिए सूर्य भगवान और छठ मैया से प्रार्थना की।

बगहा
आस्था के महापर्व चैती’छठ’ आज सुबह बगहा औऱ रामनगर छठ वर्ती महिलाओं ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। श्रद्धालुओं ने सुबह-सुबह ही घाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। जिसके बाद उपवास रखने वाले व्रतियों ने छठ मैया का प्रसाद ग्रहण कर व्रत तोड़ा। आपको बता दें छठ पूजा करने का उद्देश्य जीवन में सूर्यदेव की कृपा और छठ मैया का प्रेम-आशीष पाना है। सूर्य की कृपा से आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है तो वहीं छठ मैया के आशीष से इंसान को सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

बेगूसराय
बेगूसराय में उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ ही चार दिवसीय चैती छठ पर्व समाप्त हो गया। इस मौके पर बेगूसराय जिले के भी झमटिया गंगा घाटों पर छठ व्रतियों ने सूप के साथ  भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर पूजा का समापन किया।  चैती छठ व्रत को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है एवं छठ व्रतियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में लोग गंगा घाटों पर मौजूद हैं। जिले के कई पोखरों के साथ-साथ घरों पर भी लोगों ने लोक आस्था का पर्व चैती छठ को पूरे धूमधाम से मनाया। 4 दिनों तक चलने वाले इस छठ पर्व के अंतिम दिन उगते सूर्य की उपासना कर छठ पर्व का समापन हो गया। छठ व्रतियों ने घर परिवार समाज और देश की समृद्धि की कामना की है।

गया जिला के विभिन्न घाटों पर चैती छठ पूजा सम्पन हो गया, उगते हुए सूर्य का पूजा जल, दूध, धूप फल समर्पित कर किया गया।

आज अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है

आज ‘अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ है। आधुनिकता और तेज वैश्वीकरण की भागदौड़ में लगातार पिछड़ती और विस्मृत होती जा रही अपनी मातृभाषा को याद करने और उसकी पहचान, उसकी अस्मिता को बनाए रखने का संकल्प लेने का दिन।

मेरी अपनी मातृभाषा भोजपुरी है। दुर्भाग्य से दुनिया की एक बड़ी आबादी द्वारा बोली जानेवाली यह बेहद समृद्ध भाषा आज अश्लीलता की गंभीर चुनौतियों से दो-चार है। बाज़ार के दबाव में फूहड़, बेहूदा, मातृद्रोही सिनेमा से जुड़े लोगों और असंख्य गायक-गायिकाओं ने इसे अश्लीलता का पर्याय बनाने का जैसे अभियान चला रखा हैं।

हालत यह है कि कोई भी सुसंस्कृत व्यक्ति इस भाषा का सिनेमा देखने या गीत सुनने में अब शर्म महसूस करने लगा है। हां, इस निराशाजनक समय में उम्मीद जगाते हैं कुछ ऐसे कलाकार और गायक-गायिकाएं जो अपनी भाषा के सम्मान के लिए सतत संघर्ष कर रहे हैं।

#भोजपुरी
#भोजपुरी

इस आशा के साथ कि भोजपुरी अपसंस्कृति के चंगुल से निकलकर एक बार फिर अपना खोया हुआ गौरव प्राप्त करेगी, सभी भोजपुरी भाषियों को मातृभाषा दिवस की मेरी शुभकामनाएं,मेरी अपनी एक भोजपुरी कविता ‘आस’ के साथ !

केहू ना कहेला बाकि
बिहान होते चिरई हांक लगा जालि
ओस नहाली दूब
उछाह से बहेली नदी
अगरा जाला गाछ-बिरिछ
सुरूज के पहिलका किरिन के संगे
केहू ना देखेला बाकि
चुपे अंखुआ जालि फसल
कोंपल फेंक डेला पौधा
पतईंन में उतर जाला हरियरी
फल में रस
फूल में गंध
अंखियन में नेह
केहू ना जानेला बाकि
बाबू जी के मन में बारी-बारी से
काहे धुंधुआत चल जाला
एक-एक गो नेह-नाता
साच्छात उतरे लागेले जमराज
माई के भोरे के सपना में
कइसनो मौसम में
बचा के राख लेलि भौजी
भिंडी आ करइला के बिया
मेहरारू गुल्लक में पईसा
बचवा सब आंखि में नींद
केहू ना बचावेला बाकि
घोर से घोर दुरदिन में भी
बाचल रहेला जरूर कौनो आस
तबे त हमनी
सहेज के राखेनी ओकर पाती
जेकरा से मिले के
कौनो आस ना बाचल रहेला।


लेखक — ध्रुव गुप्त(पूर्व आईपीएस अधिकारी)