भारत की कृषि विविधता और सांस्कृतिक धरोहर का परिचय होगा। इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय उत्पादन को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना और स्थानीय किसानों को नई बाजार संभावनाएँ प्रदान करना है। सरकार ने इस कार्यक्रम को मीडिया किट के रूप में तैयार किया है, जिसमें राज्य‑विशिष्ट
उत्पादों की विस्तृत जानकारी शामिल है।
बिहार के सत्तू और मखाने की कहानी दशकों पुरानी है, परन्तु हाल के वर्षों में इनके उत्पादन में तकनीकी सुधार और गुणवत्ता नियंत्रण ने इसे निर्यात के योग्य बना दिया है। सत्तू, जो कि फसल के बायप्रोडक्ट से बनाया जाता है, को
पोषण‑समृद्ध स्नैक के रूप में विदेशियों में लोकप्रियता मिली है। वहीं मिथिला का मखाना, जो प्राचीन काल से आयुर्वेदिक उपयोगों में प्रसिद्ध है, को अब उच्च प्रोटीन और फाइबर स्रोत के रूप में मान्यता मिली है। इन दोनों उत्पादों को ब्रिक्स के प्रतिनिधियों तक पहुँचाने से भारत
की कृषि नीतियों की सफलता को भी साक्ष्य मिलेगा।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी के दौरान, नई दिल्ली के विदेश मंत्रालय ने एक विशेष टीम गठित की, जिसने बिहार के प्रमुख कृषि बोर्डों और स्थानीय संगठनों के साथ समन्वय किया। इस टीम ने सत्तू और मखाने की पैकेजिंग,
गुणवत्ता परीक्षण और निर्यात मानकों को सुनिश्चित करने के लिए कई चरणों में निरीक्षण किया। साथ ही, बिहार के विभिन्न जिलों से चुने गये किसानों को इस पहल में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे उन्हें सीधे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने उत्पादन को प्रदर्शित करने
का अवसर मिला। यह प्रक्रिया स्थानीय उत्पादन‑शृंखला को सुदृढ़ करने में भी सहायक सिद्ध हुई।
समारोह के उद्घाटन दिवस, नई दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में, भारत के प्रमुख अतिथि ने सत्तू और मखाने के नमूने प्रस्तुत किए। इस अवसर पर बिहार के प्रमुख किसानों और उद्यमियों को
भी मंच पर आमंत्रित किया गया, जहाँ उन्होंने अपने उत्पादों की विशेषताओं और उत्पादन प्रक्रिया के बारे में संक्षिप्त व्याख्यान दिया। उपस्थित विदेशी प्रतिनिधियों ने इन उत्पादों की गुणवत्ता और स्वाद की सराहना की, और कई देशों के आयात एजेंटों ने संभावित व्यापार सहयोग की इच्छा जताई।
इस प्रकार, एक छोटे से भारतीय गाँव से शुरू हुए इन उत्पादों ने विश्व मंच पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी।
इसी दौरान, ब्रिक्स शिखर में भाग ले रहे विदेशी मीडिया ने बिहार के सत्तू‑मखाना किट को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों
ने इस पहल को “भारत की कृषि विविधता का नया चेहरा” कहा। इस किट में सत्तू के पोषण तथ्यों, मखाने की आयुर्वेदिक लाभों और दोनों उत्पादों की उत्पादन प्रक्रियाओं की विस्तृत ब्रोशर शामिल थे। रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया कि इस तरह के सांस्कृतिक उत्पादों
का प्रस्तुतीकरण अंतरराष्ट्रीय संबंधों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सत्तू और मखाना को ब्रिक्स शिखर में प्रस्तुत करने के पीछे आर्थिक कारण भी स्पष्ट हैं। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सत्तू का निर्यात 2023‑24 में 45 प्रतिशत बढ़ा था, जबकि मखाने की वैश्विक
मांग में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। इस पहल से निर्यातकों को नई बाजारों में प्रवेश करने का अवसर मिलेगा, जिससे ग्रामीण आय में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। साथ ही, इस कदम से भारतीय कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय मान्यता में भी सुधार होगा।
भव्य
शिखर सम्मेलन के दौरान, बिहार के कई सामाजिक संगठनों ने इस अवसर को स्थानीय रोजगार सृजन के मंच के रूप में उपयोग किया। उन्होंने सत्र के बाद आयोजित एक कार्यशाला में महिलाओं को सत्तू‑मखाना आधारित खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण प्रदान किया। इस पहल के तहत, महिलाओं को छोटे
पैमाने पर उत्पादन और पैकेजिंग तकनीक सिखाई गई, जिससे उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता प्राप्त होगी। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यक्रम से ग्रामीण स्तर पर उत्पादन‑शृंखला में नई जड़ें स्थापित होंगी।
दूसरी ओर, ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने इस पहल को सराहते हुए भारत के कृषि निर
Updated: September 12, 2026
Summary: विदेशी प्रेषकों के मखाने और सात्तू को शिखर सम्मेलन में प्रमोट किया गया ताकि ब्रांडिंग और निर्यात बढ़े।
स्थानीय किसानों को नये बाजार से जोड़ते समय हरित उद्यमिता के अवसर विस्तारित करेंगे।
This development could shape future developments as the situation continues to evolve.