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Bihar की राजनीति में नया अध्याय: नितीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री, JDU में शामिल होकर संभालेंगे नई जिम्मेदारी

बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आया है। बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने आखिरकार सक्रिय राजनीति में कदम रख दिया है और आधिकारिक रूप से जनता दल (यूनाइटेड) [JD(U)] में शामिल हो गए हैं। लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन और राजनीति से दूर रहने वाले निशांत कुमार का यह कदम न केवल उनके व्यक्तिगत राजनीतिक सफर की शुरुआत है बल्कि इसे बिहार की राजनीति में संभावित पीढ़ीगत बदलाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला JD(U) के भविष्य और बिहार की सत्ता की राजनीति में बड़े बदलावों का रास्ता खोल सकता है।


निशांत कुमार की औपचारिक एंट्री: JD(U) मुख्यालय में हुआ स्वागत

रविवार को पटना में JD(U) के मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में निशांत कुमार ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में उनका स्वागत किया गया।

राजनीति में आने से पहले निशांत ने JD(U) के विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों से मुलाकात कर भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा भी की थी। इस बैठक को उनकी राजनीतिक सक्रियता की तैयारी के रूप में देखा गया।

उनकी यह एंट्री ऐसे समय हुई है जब बिहार की राजनीति में कई बड़े बदलावों की चर्चा चल रही है, खासकर मुख्यमंत्री नितीश कुमार के संभावित रूप से राज्यसभा जाने की खबरों के बाद।


क्यों महत्वपूर्ण है निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री

निशांत कुमार का राजनीति में आना कई कारणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है:

1. पीढ़ीगत बदलाव का संकेत

JD(U) लंबे समय से नितीश कुमार के नेतृत्व में चल रही है। अब उनके बेटे का राजनीति में आना पार्टी के नेतृत्व में संभावित पीढ़ीगत बदलाव का संकेत देता है।

2. राजनीतिक विरासत का हस्तांतरण

निशांत कुमार ने पार्टी में शामिल होते ही अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प जताया है।

3. बिहार की नई राजनीतिक रणनीति

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि JD(U) आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए युवा नेतृत्व को सामने लाने की रणनीति अपना रही है।


कौन हैं निशांत कुमार

निशांत कुमार बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार के इकलौते बेटे हैं।

प्रमुख तथ्य

  • जन्म: 20 जुलाई 1975
  • शिक्षा: बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT), मेसरा, रांची से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग
  • स्वभाव: बेहद शांत और लो-प्रोफाइल व्यक्तित्व
  • राजनीति से दूरी: कई वर्षों तक सक्रिय राजनीति से दूर रहे

राजनीति में आने से पहले निशांत सार्वजनिक जीवन में बहुत कम दिखाई देते थे और मीडिया से भी दूरी बनाए रखते थे।

हालांकि, वे कई बार अपने पिता के सरकारी कार्यक्रमों में नजर आए और उनके कार्यों की खुलकर सराहना भी की।


JD(U) के भीतर क्यों बढ़ी निशांत की भूमिका

पिछले कुछ महीनों से JD(U) के भीतर यह चर्चा तेज थी कि पार्टी को भविष्य के नेतृत्व की जरूरत है।

पार्टी नेताओं का मानना है कि:

  • नितीश कुमार की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए भविष्य की तैयारी जरूरी है
  • पार्टी का वोट बैंक बनाए रखने के लिए नया चेहरा जरूरी है

इसी वजह से पार्टी के कई नेताओं ने निशांत कुमार को राजनीति में आने का सुझाव दिया था।


क्या निशांत बन सकते हैं बिहार के उपमुख्यमंत्री?

निशांत कुमार के राजनीति में आने के साथ ही यह चर्चा भी तेज हो गई है कि उन्हें जल्द ही बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।

कुछ JD(U) नेताओं का दावा है कि उन्हें भविष्य में बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, हालांकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

यदि ऐसा होता है तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होगा।


नितीश कुमार और वंशवाद की राजनीति

यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि नितीश कुमार लंबे समय तक वंशवादी राजनीति (Dynasty Politics) के आलोचक रहे हैं।

उन्होंने कई बार कहा था कि उनकी पार्टी में परिवारवाद को जगह नहीं दी जाएगी।

अब उनके बेटे की राजनीति में एंट्री ने विपक्ष को उन्हें घेरने का मौका दे दिया है।


बिहार की राजनीति में पहले से मौजूद राजनीतिक परिवार

बिहार में राजनीतिक परिवारों की लंबी परंपरा रही है। उदाहरण के लिए:

  • लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव
  • राम विलास पासवान के बेटे चिराग पासवान

इन दोनों नेताओं ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या निशांत कुमार भी उसी तरह अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभाल पाएंगे।


‘लव-कुश’ सामाजिक समीकरण की चुनौती

नितीश कुमार की राजनीति का आधार लंबे समय तक ‘लव-कुश’ सामाजिक गठजोड़ रहा है, जिसमें मुख्य रूप से कुर्मी और कोइरी समुदाय शामिल हैं।

यह गठबंधन JD(U) की चुनावी सफलता का महत्वपूर्ण आधार रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निशांत कुमार इस सामाजिक समीकरण को उसी तरह मजबूत रख पाएंगे जैसे उनके पिता ने रखा।


राजनीतिक यात्रा की शुरुआत ‘यात्रा’ से

खबरों के अनुसार निशांत कुमार अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राज्यव्यापी राजनीतिक यात्रा से कर सकते हैं।

इस यात्रा का उद्देश्य होगा:

  • पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद
  • जनता से सीधा संपर्क
  • JD(U) के संगठन को मजबूत करना

यह रणनीति नितीश कुमार के शुरुआती राजनीतिक सफर की याद दिलाती है।


JD(U) कार्यकर्ताओं में उत्साह

निशांत कुमार की एंट्री को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह देखा गया।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार पटना में JD(U) कार्यालय के बाहर जश्न जैसा माहौल था और स्वागत की विशेष तैयारियां भी की गई थीं।

पार्टी नेताओं का मानना है कि निशांत की एंट्री से संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी।


विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने इस घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए हैं।

कुछ विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह JD(U) में भी परिवारवाद की शुरुआत है।

हालांकि JD(U) नेताओं का कहना है कि निशांत कुमार की एंट्री पार्टी कार्यकर्ताओं की इच्छा और उनके व्यक्तिगत निर्णय का परिणाम है।


निशांत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां

राजनीति में नए होने के कारण निशांत कुमार के सामने कई चुनौतियां भी होंगी:

1. राजनीतिक अनुभव की कमी

वे अभी तक सक्रिय राजनीति का हिस्सा नहीं रहे हैं।

2. जटिल जातीय राजनीति

बिहार की राजनीति जातीय समीकरणों पर आधारित मानी जाती है।

3. विपक्ष का दबाव

विपक्ष उन्हें “वंशवाद” के मुद्दे पर घेर सकता है।

4. पिता की छवि

नितीश कुमार की छवि बेहद मजबूत रही है, इसलिए उनकी तुलना लगातार होती रहेगी।

“कॉरपोरेट घरानों की मुफ्त सुविधाएं बंद हों तो गरीबों की सब्सिडी भी खत्म करने को तैयार”: राहुल गांधी का बड़ा बयान

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने देश में चल रही “फ्रीबीज़” यानी मुफ्त योजनाओं की बहस को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार कॉरपोरेट घरानों को मिलने वाली रियायतें और सुविधाएं बंद कर दे, तो वे भी गरीबों को मिलने वाली सब्सिडी और मुफ्त योजनाओं को बंद करने के लिए तैयार हैं।

राहुल गांधी का यह बयान उस समय आया है जब देश में लगातार “रेवड़ी संस्कृति” या मुफ्त योजनाओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती जा रही है। उन्होंने कहा कि गरीबों को मिलने वाली सहायता को अक्सर “फ्रीबी” कहकर आलोचना की जाती है, लेकिन बड़े उद्योगपतियों को मिलने वाली सरकारी रियायतों को विकास का नाम दिया जाता है।

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या गरीबों के लिए चलने वाली कल्याणकारी योजनाओं और कॉरपोरेट सेक्टर को मिलने वाली आर्थिक रियायतों को एक ही नजरिए से देखा जाना चाहिए।


फ्रीबीज़ पर एकतरफा बहस का आरोप

राहुल गांधी ने कहा कि देश में “फ्रीबीज़” को लेकर जो बहस हो रही है, वह पूरी तरह एकतरफा है। उनके मुताबिक जब गरीबों को बिजली, पानी, शिक्षा या स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं मुफ्त या सब्सिडी के साथ दी जाती हैं तो उसे “रेवड़ी” कहा जाता है, लेकिन जब बड़े उद्योगपतियों को टैक्स छूट, सस्ती जमीन या कर्ज में राहत दी जाती है तो उसे आर्थिक विकास बताया जाता है।

उन्होंने कहा कि यदि सच में देश में मुफ्त योजनाओं को खत्म करना है तो सबसे पहले उन रियायतों को बंद करना होगा जो बड़े कॉरपोरेट समूहों को दी जाती हैं।

राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि:

  • गरीबों को मिलने वाली सब्सिडी को अक्सर “फ्रीबी” कहा जाता है।
  • लेकिन कॉरपोरेट कंपनियों को मिलने वाली रियायतों को विकास के नाम पर सही ठहराया जाता है।
  • यदि समानता की बात करनी है तो दोनों तरह की सुविधाओं पर एक जैसा दृष्टिकोण होना चाहिए।

बड़े उद्योगपतियों का जिक्र

अपने बयान में राहुल गांधी ने देश के बड़े उद्योगपतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कई बड़े कॉरपोरेट समूहों को सरकार की तरफ से कई तरह की आर्थिक सुविधाएं मिलती हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए देश के प्रमुख उद्योगपतियों जैसे

  • Gautam Adani
  • Mukesh Ambani

का नाम लिया और कहा कि इन बड़े उद्योग समूहों को मिलने वाली रियायतों को भी सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

राहुल गांधी का कहना है कि जब कॉरपोरेट कंपनियों को सस्ती जमीन, टैक्स में छूट और बड़े कर्ज मिलते हैं, तो उसकी चर्चा उतनी नहीं होती जितनी गरीबों को मिलने वाली योजनाओं की होती है।


आर्थिक असमानता पर चिंता

राहुल गांधी लंबे समय से देश में बढ़ती आर्थिक असमानता को लेकर सरकार की आलोचना करते रहे हैं। उनका कहना है कि भारत में आर्थिक विकास का फायदा समान रूप से समाज के सभी वर्गों तक नहीं पहुंच रहा है।

उन्होंने कहा कि देश में एक तरफ कुछ बड़े कॉरपोरेट समूह तेजी से संपन्न हो रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ करोड़ों लोग अभी भी गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

उनके अनुसार:

  • गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं जरूरी हैं
  • जब तक आर्थिक असमानता कम नहीं होती, तब तक इन योजनाओं को खत्म करना उचित नहीं होगा

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को आर्थिक नीति बनाते समय समाज के कमजोर वर्गों को प्राथमिकता देनी चाहिए।


“रेवड़ी संस्कृति” की बहस

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय राजनीति में “रेवड़ी संस्कृति” शब्द काफी चर्चित रहा है। कई राजनीतिक दल एक-दूसरे पर चुनाव से पहले मुफ्त योजनाओं का वादा करने का आरोप लगाते रहे हैं।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक मुफ्त योजनाएं सरकार के वित्तीय संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। उनका कहना है कि इससे सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ता है और लंबे समय में आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है।

वहीं दूसरी ओर कई अर्थशास्त्री और सामाजिक संगठनों का तर्क है कि भारत जैसे देश में, जहां बड़ी आबादी अभी भी गरीबी रेखा के आसपास जीवन जी रही है, वहां सरकार की कल्याणकारी योजनाएं बेहद जरूरी हैं।

इन योजनाओं में शामिल हैं:

  • मुफ्त या सस्ती बिजली
  • सब्सिडी वाला राशन
  • किसानों के लिए आर्थिक सहायता
  • महिलाओं के लिए नकद सहायता योजनाएं
  • मुफ्त स्वास्थ्य और शिक्षा योजनाएं

राहुल गांधी का कहना है कि इन योजनाओं को केवल राजनीतिक लाभ के नजरिए से नहीं बल्कि सामाजिक जरूरत के रूप में देखा जाना चाहिए।


सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश की कई नीतियां बड़े कॉरपोरेट समूहों के पक्ष में दिखाई देती हैं।

उनके मुताबिक छोटे व्यवसाय, किसान और मध्यम वर्ग को उतना लाभ नहीं मिल पा रहा जितना बड़े उद्योगों को मिल रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक नीति का उद्देश्य केवल बड़े निवेश को आकर्षित करना नहीं होना चाहिए, बल्कि रोजगार पैदा करना और छोटे व्यवसायों को मजबूत करना भी होना चाहिए।


राजनीतिक प्रतिक्रिया की संभावना

राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया आना तय माना जा रहा है। सत्तारूढ़ दल Bharatiya Janata Party पहले भी विपक्षी दलों पर मुफ्त योजनाओं को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है।

बीजेपी का कहना रहा है कि अत्यधिक मुफ्त योजनाएं “रेवड़ी संस्कृति” को बढ़ावा देती हैं और इससे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग होता है।

वहीं विपक्षी दलों का तर्क है कि गरीबों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सहायता कार्यक्रम लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी होते हैं।


राजनीतिक बहस और चुनावी असर

विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रीबीज़ और कॉरपोरेट रियायतों को लेकर उठी यह बहस आने वाले चुनावों में भी एक बड़ा मुद्दा बन सकती है।

भारत में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता हैं जो सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहते हैं। इसलिए राजनीतिक दल अक्सर अपने चुनावी घोषणापत्र में कई तरह की कल्याणकारी योजनाओं का वादा करते हैं।

राहुल गांधी के इस बयान को भी इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें वे आर्थिक असमानता और कॉरपोरेट प्रभाव के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहे हैं।

निशांत कुमार 8 मार्च को JD(U) में शामिल होंगे, नीतीश कुमार ने दी अपनी राजनीतिक निरंतरता की गारंटी

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मची हुई है। राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टी जनता दल (यूनाइटेड), जिसे हम सामान्यतः JD(U) के नाम से जानते हैं, 8 मार्च को निशांत कुमार को अपने संगठन में शामिल करने की तैयारी कर रही है। यह कदम उस समय लिया जा रहा है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पार्टी के अनुभवी और केंद्रीय नेतृत्वकर्ता, ने स्पष्ट किया है कि वे बिहार की राजनीति में सक्रिय बने रहेंगे। उनका यह आश्वासन पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता दोनों के लिए एक मजबूत संदेश है कि बिहार में विकास, स्थिरता और नेतृत्व का क्रम जारी रहेगा।

इस राजनीतिक घटनाक्रम ने न केवल बिहार बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी ध्यान आकर्षित किया है। राज्य की राजनीतिक स्थिरता और भविष्य की रणनीतियों के लिहाज से यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


निशांत कुमार: JD(U) के लिए नई ताकत

निशांत कुमार बिहार के युवा और उभरते नेताओं में से एक हैं। उन्होंने अपनी सक्रिय राजनीति, जनसंपर्क और युवाओं के बीच लोकप्रियता के कारण काफी ध्यान आकर्षित किया है। शिक्षा, आधारभूत संरचना और सामाजिक कल्याण कार्यों पर फोकस करने वाले निशांत कुमार के JD(U) में शामिल होने से पार्टी को खासतौर पर युवा मतदाताओं और पहले बार वोट देने वालों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिलेगी।

पार्टी के करीबी सूत्रों के अनुसार, 8 मार्च को आयोजित होने वाले समारोह में वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और बिहार की सामाजिक और राजनीतिक हस्तियों की मौजूदगी रहेगी। इस कार्यक्रम में JD(U) की आगामी योजनाओं और नीतीश कुमार की विकास दृष्टि को भी प्रमुखता से उजागर किया जाएगा।


नीतीश कुमार का नेतृत्व: स्थिरता और अनुभव

नीतीश कुमार, बिहार के वरिष्ठ और अनुभवी नेता, ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि वे बिहार की राजनीति में सक्रिय रहेंगे। उनका राजनीतिक करियर दशकों पुराना है और उन्होंने बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में कई महत्वपूर्ण दौर देखे हैं। उनका नेतृत्व राज्य को आर्थिक चुनौतियों, सामाजिक असंतुलन और राजनीतिक उतार-चढ़ाव के समय स्थिरता प्रदान करता रहा है।

नीतीश कुमार ने हाल ही में कहा कि युवा नेताओं को पार्टी में शामिल करना और उन्हें नेतृत्व देने का प्रयास, राज्य और पार्टी दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। निशांत कुमार जैसे युवा नेताओं को पार्टी में शामिल कर पार्टी भविष्य के चुनावों और विकास कार्यों के लिए तैयार हो रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार का यह आश्वासन कि वे पार्टी के साथ बने रहेंगे, एक मजबूत राजनीतिक संदेश है। यह संकेत देता है कि JD(U) बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने और नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखने के लिए गंभीर है।


JD(U) की आगामी रणनीति

निशांत कुमार का JD(U) में शामिल होना उस समय हुआ है जब पार्टी आगामी राज्य और राष्ट्रीय चुनावों की तैयारी कर रही है। पार्टी संगठनात्मक मजबूती बढ़ाने, मतदाताओं के बीच पहुंच बढ़ाने और अपने मूल विचारधारा को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय है।

विशेषज्ञों का मानना है कि युवा और अनुभवी नेताओं का संतुलन पार्टी की स्थिरता और प्रभावशीलता के लिए जरूरी है। निशांत कुमार की शिक्षा, युवा सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण की प्राथमिकताएं JD(U) की दीर्घकालिक रणनीति से मेल खाती हैं।


बिहार की राजनीतिक पृष्ठभूमि

बिहार की राजनीति हमेशा जटिल रही है। जातिगत समीकरण, क्षेत्रीय महत्व और सामाजिक संरचना यहाँ की राजनीतिक गतिविधियों को आकार देते हैं। JD(U), नीतीश कुमार के नेतृत्व में, राज्य की राजनीति में लंबे समय से प्रभावी रही है।

राज्य में अतीत में कई बार गठबंधन बदलाव, नेतृत्व परिवर्तन और राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। ऐसे समय में निशांत कुमार का JD(U) में शामिल होना पार्टी की संगठनात्मक मजबूती और स्थिर नेतृत्व का प्रतीक है।


निशांत कुमार का राजनीतिक सफर

निशांत कुमार ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत युवा और स्थानीय स्तर के मुद्दों को उठाने से की। शिक्षा, रोजगार और स्थानीय विकास में उनकी सक्रियता उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाती है। युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाता उन्हें नए नेतृत्व के रूप में देखते हैं।

उनकी सक्रियता और जमीन से जुड़ी कार्यशैली JD(U) के लिए एक महत्वपूर्ण जोड़ है। विश्लेषक मानते हैं कि उनका जुड़ना अन्य युवा नेताओं को भी मुख्यधारा की राजनीति में आने के लिए प्रेरित करेगा।


बिहार की राजनीति पर असर

निशांत कुमार के JD(U) में शामिल होने से कई असर दिखाई देंगे:

  1. युवाओं में सहभागिता: युवा और पहले बार वोट देने वाले मतदाताओं तक पहुँच बढ़ेगी।
  2. संगठनात्मक मजबूती: पार्टी की基层 मशीनरी मजबूत होगी, बेहतर समन्वय और लोकसंपर्क सुनिश्चित होगा।
  3. चुनावी रणनीति: नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी एकजुट छवि प्रस्तुत कर सकेगी।
  4. नीतिगत फोकस: शिक्षा, रोजगार और सामाजिक कल्याण पर जोर देकर विकास कार्यों में निरंतरता सुनिश्चित होगी।

विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक विशेषज्ञ डॉ. राजीव प्रसाद का कहना है:
“निशांत कुमार का JD(U) में शामिल होना केवल संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है। यह पार्टी की दीर्घकालिक रणनीति और नेतृत्व निर्माण का संकेत है।”

विश्लेषक श्वेता मिश्रा ने कहा:
“नीतीश कुमार का नेतृत्व बनाए रखना बिहार में स्थिरता का संकेत है। यह पार्टी को मतदाताओं में भरोसा बनाए रखने और संगठनात्मक सुसंगतता सुनिश्चित करने में मदद करेगा।”


JD(U) का विकासात्मक एजेंडा

नीतीश कुमार के नेतृत्व में JD(U) ने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में कई परियोजनाएं शुरू की हैं। निशांत कुमार के जुड़ने से यह एजेंडा और मजबूत होगा, खासकर उन जिलों में जहां पार्टी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।


राष्ट्रीय राजनीति पर असर

बिहार की राजनीतिक घटनाएं केवल राज्य तक सीमित नहीं हैं। बिहार की स्थिति राष्ट्रीय गठबंधनों और केंद्र की राजनीति पर भी असर डालती है। JD(U) का युवा नेताओं को शामिल करना और नीतीश कुमार का नेतृत्व बनाए रखना राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की स्थिरता और प्रभाव को सुनिश्चित करेगा।

बिहार जदयू: उमेश कुशवाहा की तीसरी पारी शुरू, जानें उनकी राजनीतिक यात्रा और पार्टी में महत्व

बिहार की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के संगठनात्मक चुनाव में उमेश सिंह कुशवाहा को एक बार फिर बिहार प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है। यह उनकी तीसरी पारी होगी, जिसमें वे पार्टी की कमान संभालेंगे। उमेश कुशवाहा को निर्विरोध चुना गया है, क्योंकि उनके खिलाफ किसी अन्य नेता ने पर्चा दाखिल नहीं किया था।

उमेश कुशवाहा पिछले पांच साल से जदयू संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं। उनकी यह तीसरी पारी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि बिहार की राजनीति इस समय कई बदलावों के दौर से गुजर रही है।

उमेश कुशवाहा को जदयू संगठन की मजबूत कड़ी माना जाता है और वे लंबे समय से पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम करते रहे हैं। उनकी भूमिका पार्टी के सामाजिक समीकरण को मजबूत करने में अहम मानी जाती है, खासकर ‘लव-कुश’ यानी कुर्मी और कोइरी वोट बैंक में। नीतीश कुमार कुर्मी समाज से आते हैं, जबकि उमेश सिंह कुशवाहा कोइरी समाज से संबंध रखते हैं।

उमेश कुशवाहा वैशाली जिले के महनार विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और वे 2015 और 2025 में यहां से चुनाव जीत चुके हैं। हालांकि 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन नीतीश कुमार ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी।

जदयू नेतृत्व को उम्मीद है कि उमेश कुशवाहा के नेतृत्व में संगठन को और मजबूत किया जा सकेगा। उनकी तीसरी पारी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि बिहार की राजनीति इस समय कई बदलावों के दौर से गुजर रही है।

Bihar Politics: जेडीयू कार्यालय में हंगामा, मोदी पोस्टरों पर कालिख; ‘बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं चलेगा’ के नारे

बिहार की राजनीति इन दिनों बेहद उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रही है। सत्ता के गलियारों में अचानक बढ़ी हलचल के बीच पटना स्थित जनता दल (यूनाइटेड) यानी जेडीयू के दफ्तर में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया जब प्रधानमंत्री के पोस्टरों पर कालिख पोत दी गई और कार्यकर्ताओं ने “बीजेपी का मुख्यमंत्री मंजूर नहीं” के नारे लगाए। इस घटना ने राज्य की सियासत को एक नई दिशा दे दी है और एनडीए गठबंधन के भीतर संभावित तनाव को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है।

घटना उस समय सामने आई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों और संभावित सत्ता परिवर्तन की अटकलों ने जेडीयू कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष पैदा कर दिया। कई कार्यकर्ताओं ने इसे पार्टी के भविष्य के लिए खतरा बताया और विरोध प्रदर्शन करते हुए पार्टी कार्यालय के बाहर और अंदर जमकर हंगामा किया।


क्या हुआ जेडीयू कार्यालय में?

पटना में स्थित जेडीयू के मुख्य कार्यालय में अचानक कार्यकर्ताओं की भीड़ जुट गई। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के पोस्टरों पर कालिख पोत दी और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कई जगहों पर पोस्टर फाड़े गए और कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शनकारी बार-बार यह नारा लगा रहे थे—
“बीजेपी का मुख्यमंत्री मंजूर नहीं” और “नीतीश ही बिहार के नेता हैं”

कई कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अगर मुख्यमंत्री पद भाजपा को दिया गया तो इससे जेडीयू कमजोर हो जाएगी और पार्टी के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो सकता है। यही वजह है कि उन्होंने खुलकर विरोध दर्ज कराया।


नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर से बढ़ा विवाद

दरअसल, पूरे विवाद की जड़ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का फैसला बताया जा रहा है। हाल ही में उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया, जिसके बाद यह अटकलें तेज हो गईं कि वे मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं।

इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में कई नए सवाल खड़े हो गए—

  • अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं तो नया मुख्यमंत्री कौन होगा?
  • क्या भाजपा को यह पद मिलेगा?
  • या जेडीयू ही मुख्यमंत्री बनाए रखेगी?

इन्हीं सवालों ने कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष को हवा दी और विरोध प्रदर्शन का रूप ले लिया।


कार्यकर्ताओं की नाराजगी की असली वजह

जेडीयू के कई कार्यकर्ता मानते हैं कि पार्टी की पहचान और मजबूती मुख्य रूप से नीतीश कुमार के नेतृत्व पर टिकी हुई है। इसलिए उनका मुख्यमंत्री पद छोड़ना पार्टी के लिए राजनीतिक जोखिम माना जा रहा है।

कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि:

  • नीतीश कुमार ही वह नेता हैं जिन पर पार्टी के कार्यकर्ताओं का सबसे ज्यादा भरोसा है।
  • अगर वे सक्रिय रूप से राज्य की राजनीति से दूर होते हैं तो नेतृत्व का संकट पैदा हो सकता है।
  • इससे आगामी चुनावों में पार्टी की स्थिति कमजोर पड़ सकती है।

इसी कारण कई कार्यकर्ता चाहते हैं कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर बने रहें और राज्यसभा जाने के फैसले पर पुनर्विचार करें।


बीजेपी CM को लेकर बढ़ी सियासी चर्चा

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों के बाद यह भी चर्चा तेज हो गई कि बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक भाजपा के भीतर मुख्यमंत्री पद के लिए कई नामों पर चर्चा चल रही है, जिनमें कुछ प्रमुख नेता शामिल हैं। हालांकि पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर पूरी सहमति नहीं बन पाई है और कई गुटों के बीच मतभेद सामने आए हैं।

यही वजह है कि जेडीयू कार्यकर्ताओं में यह आशंका बढ़ गई कि अगर भाजपा का मुख्यमंत्री बना तो जेडीयू की राजनीतिक भूमिका सीमित हो सकती है।


एनडीए गठबंधन के भविष्य पर सवाल

जेडीयू और भाजपा बिहार में लंबे समय से एनडीए के सहयोगी रहे हैं, लेकिन समय-समय पर दोनों दलों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि:

  • मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद अगर बढ़ता है तो गठबंधन पर असर पड़ सकता है।
  • जेडीयू के अंदर की नाराजगी भाजपा के साथ रिश्तों को प्रभावित कर सकती है।
  • विपक्षी दल इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार बना सकते हैं।

हालांकि फिलहाल दोनों दलों के शीर्ष नेता स्थिति को संभालने की कोशिश में लगे हुए हैं।


विपक्ष ने साधा निशाना

इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्षी दलों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष का कहना है कि यह घटना एनडीए के भीतर बढ़ती दरार का संकेत है।

कुछ विपक्षी नेताओं का आरोप है कि भाजपा धीरे-धीरे अपने सहयोगियों को कमजोर कर खुद सत्ता पर कब्जा करने की रणनीति अपनाती है। वहीं भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गठबंधन मजबूत है और किसी तरह का संकट नहीं है।


नई सरकार को लेकर भी अटकलें

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा चल रही है कि बिहार में नई सरकार का गठन अलग तरीके से हो सकता है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आने वाले समय में सरकार की संरचना बदल सकती है और उपमुख्यमंत्री पद की संख्या भी कम की जा सकती है।

हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

राहुल गांधी पर पीयूष गोयल का जोरदार हमला: नकारात्मक राजनीति के पोस्टर बॉय के रूप में उभरे

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी और गांधी परिवार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी नकारात्मक राजनीति के पोस्टर बॉय बन गए हैं और उन्होंने भारत विरोधी ताकतों के साथ हाथ मिलाकर देश के हितों से समझौता किया है। पीयूष गोयल ने कहा कि गांधी परिवार ने हमेशा देश के हितों से समझौता किया है, जिसकी शुरुआत देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय से ही हो गई थी।

पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार विदेश यात्राएं कर विभिन्न प्रोटोकॉल और सुरक्षा व्यवस्थाओं से समझौता करते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी 247 बार विदेश यात्रा कर चुके हैं और इस दौरान उन्होंने कई बार येलो बुक प्रोटोकॉल की अनदेखी की। पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए सुरक्षा इंतजामों से समझौता करते हैं और विदेश जाकर भारत और भारतीयों के हितों के खिलाफ काम करते हैं।

पीयूष गोयल ने आगे कहा कि राहुल गांधी के संबंध देश विरोधी ताकतों से रहे हैं और उन्होंने सोरोस के साथ कथित गैर-कानूनी संबंधों के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लद्दाख के संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में गए और वहां भारत के हितों के खिलाफ काम करने वाले विदेशी व्यक्तियों के साथ संपर्क बनाए। पीयूष गोयल ने कहा कि राहुल गांधी का संबंध चीन और पाकिस्तान से जुड़े लोगों से भी रहा है।

पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने संविधान से बाहर की शक्तियों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि उस समय कैबिनेट के फैसलों का सार्वजनिक रूप से विरोध किया गया और प्रधानमंत्री पद का भी अपमान हुआ। पीयूष गोयल ने कहा कि नेशनल एडवाइजरी काउंसिल के माध्यम से सरकार को प्रभावित किया गया और वामपंथी विचारधारा को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई।

पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी एक तरह से समानांतर कैबिनेट चलाते थे और सुपर प्रधानमंत्री की तरह फैसलों को प्रभावित करते थे। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार पर देश के हितों से समझौता करने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। पीयूष गोयल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी अपने कार्यकाल के दौरान देश के हितों से समझौता करने में हिचकिचाहट नहीं दिखाई।

पीयूष गोयल ने बोफोर्स मामले को लेकर आरोप लगाया कि राहुल गांधी के इशारे पर उस समय के विदेश मंत्री ने स्वीडिश अधिकारियों से बोफोर्स घोटाले की जांच रोकने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी के मित्र ओटावियो क्वात्रोची को बचाने के लिए निष्पक्ष जांच को प्रभावित किया गया। पीयूष गोयल ने कहा कि बोफोर्स मामले में कांग्रेस और राजीव गांधी की भूमिका को लेकर लंबे समय तक सवाल उठते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी परिवार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाया और भारत की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई।

पटना हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन: विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार समेत 42 विधायकों को नोटिस, चुनावी हलफनामे में गड़बड़ी के आरोप से मचा सियासी भूचाल

Patna High Court Notice to 42 MLAs: बिहार की राजनीति में उस समय भारी हलचल मच गई जब पटना उच्च न्यायालय ने एक साथ 42 विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। इन विधायकों में कोई साधारण नाम नहीं, बल्कि बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार, वरिष्ठ मंत्री विजेंद्र यादव, विधायक चेतन आनंद, पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा और राजद विधायक अमरेंद्र प्रसाद जैसे प्रभावशाली चेहरे शामिल हैं।

इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए अपने नामांकन पत्र यानी चुनावी हलफनामे (Affidavit) में संपत्ति, आपराधिक मामलों और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों को या तो छुपाया या गलत तरीके से प्रस्तुत किया। अदालत की इस सख्त कार्रवाई ने सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों खेमों में एक साथ हलचल पैदा कर दी है।

क्या है पूरा मामला? चुनावी हलफनामे से शुरू हुआ विवाद

यह पूरा मामला बिहार विधानसभा चुनाव के बाद दायर की गई चुनाव याचिकाओं से जुड़ा है। जिन सीटों पर हारने वाले प्रत्याशियों को पराजय का सामना करना पड़ा, उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि विजयी उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे में गलत या अधूरी जानकारी दी।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि—

  • कुछ विधायकों ने अपनी चल-अचल संपत्ति का पूरा विवरण नहीं दिया।
  • आपराधिक मामलों से संबंधित सूचनाएं स्पष्ट नहीं की गईं।
  • कुछ मामलों में शपथपत्र में तथ्यात्मक त्रुटियां या भ्रामक विवरण प्रस्तुत किए गए।
  • मतदान प्रक्रिया के दौरान भी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए।

प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इन आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए संबंधित सभी 42 विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है।

किन-किन दिग्गजों को मिला नोटिस?

नोटिस पाने वाले नेताओं में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायक शामिल हैं। यह तथ्य इस मामले को और व्यापक बना देता है। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं—

  • प्रेम कुमार – बिहार विधानसभा अध्यक्ष
  • विजेंद्र यादव – वरिष्ठ मंत्री
  • जीवेश मिश्रा – भाजपा विधायक
  • चेतन आनंद – विधायक
  • अमरेंद्र प्रसाद – राजद विधायक

सूत्रों के अनुसार अन्य कई विधायकों को भी नोटिस जारी हुआ है, जिनके मामलों की सुनवाई अलग-अलग याचिकाओं के आधार पर की जाएगी।

अदालत की टिप्पणी ने बढ़ाई गंभीरता

सुनवाई के दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि चुनावी हलफनामा केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह मतदाताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना स्रोत है।

अदालत ने स्पष्ट किया—

“मतदाता को यह जानने का अधिकार है कि उसका प्रतिनिधि बनने जा रहा व्यक्ति किस प्रकार की पृष्ठभूमि रखता है, उसकी संपत्ति कितनी है और उस पर आपराधिक मामले लंबित हैं या नहीं।”

यदि कोई उम्मीदवार जानबूझकर जानकारी छुपाता है या गलत जानकारी देता है, तो यह न केवल चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध भी है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: सभी ने कहा—कानून का करेंगे पालन

इस मामले पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि चुनाव परिणाम को अदालत में चुनौती देना लोकतांत्रिक अधिकार है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रत्याशी को लगता है कि चुनाव में गड़बड़ी हुई है, तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। उन्होंने कहा कि अब यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी।

भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने कहा कि अदालत के सवालों का जवाब अदालत में ही दिया जाएगा। उन्होंने इसे सामान्य कानूनी प्रक्रिया बताया।

कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने भी कहा कि यदि किसी को लगता है कि गलत हुआ है तो न्यायालय जाना उसका अधिकार है। जो भी कानूनी प्रक्रिया होगी, उसका पालन किया जाएगा।

राजनीतिक रूप से देखा जाए तो इस मामले में किसी एक दल को निशाना नहीं बनाया गया है, बल्कि विभिन्न दलों के विधायक इसमें शामिल हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि मामला विशुद्ध रूप से कानूनी और प्रक्रियात्मक है।

चुनावी हलफनामा क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

भारत में चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन के साथ एक शपथपत्र देना अनिवार्य होता है। इसमें निम्नलिखित जानकारियां देना जरूरी है—

  • कुल चल और अचल संपत्ति का विवरण
  • जीवनसाथी और आश्रितों की संपत्ति
  • लंबित आपराधिक मामले
  • शैक्षणिक योग्यता
  • देनदारियां

इस शपथपत्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता पूरी जानकारी के आधार पर अपना प्रतिनिधि चुन सके। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में भी यह स्पष्ट किया गया है कि पारदर्शिता लोकतंत्र की आत्मा है।

संभावित कानूनी परिणाम क्या हो सकते हैं?

यदि अदालत पाती है कि किसी विधायक ने जानबूझकर गलत जानकारी दी है, तो संभावित परिणाम हो सकते हैं—

  1. चुनाव निरस्त किया जा सकता है।
  2. संबंधित विधायक की सदस्यता रद्द हो सकती है।
  3. दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया जा सकता है।
  4. दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है।

हालांकि यह सब अदालत के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।

बिहार की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?

बिहार की राजनीति पहले ही कई मुद्दों को लेकर गरम है। ऐसे में 42 विधायकों को एक साथ नोटिस मिलना बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। यदि अदालत का फैसला कठोर आता है तो—

  • विधानसभा की संरचना प्रभावित हो सकती है।
  • सत्ताधारी गठबंधन की संख्या पर असर पड़ सकता है।
  • विपक्ष को राजनीतिक मुद्दा मिल सकता है।
  • चुनावी सुधार पर नई बहस शुरू हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि नैतिक जवाबदेही से भी जुड़ा है।

बिहार विधानसभा में हंगामा और तीखे सवालों के बीच कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित, बजट सत्र की दूसरी पाली में फिर शुरू होगी बहस

पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज सदन की कार्यवाही उस समय दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी, जब प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान सत्ताधारी दल के विधायकों के तीखे सवालों में मंत्री खुद ही घिरते नजर आए। लंच ब्रेक के बाद सदन की कार्यवाही पुनः आरंभ होने की घोषणा की गई है। सुबह से ही सदन का माहौल गरम रहा और कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने अपनी ही सरकार से जवाब तलब किए।

प्रश्नकाल में सरकार पर ही उठे सवाल

बजट सत्र के दौरान आज का दिन राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा था। विपक्ष की ओर से सरकार को घेरने की रणनीति पहले से तय थी, लेकिन स्थिति उस समय दिलचस्प हो गई जब सत्ताधारी दल के विधायकों ने भी विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर मंत्रियों से सीधे और तीखे सवाल पूछने शुरू कर दिए।

सूत्रों के अनुसार, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और नगर विकास विभाग से जुड़े प्रश्नों पर मंत्री संतोषजनक जवाब देने में असहज दिखे। कुछ विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में अधूरी योजनाओं, लंबित भुगतान, खराब सड़कों और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

एक विधायक ने अपने क्षेत्र में स्वीकृत पुल निर्माण योजना के लंबित रहने का मुद्दा उठाया और पूछा कि बजट आवंटन के बावजूद कार्य प्रारंभ क्यों नहीं हुआ। इस पर संबंधित मंत्री ने विभागीय प्रक्रिया और तकनीकी स्वीकृति का हवाला दिया, लेकिन विधायक ने जवाब को अपर्याप्त बताते हुए नाराजगी जताई।

सत्ता पक्ष के भीतर असंतोष के संकेत?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष के विधायकों द्वारा इस तरह के सवाल उठाया जाना सरकार के भीतर बढ़ते दबाव का संकेत हो सकता है। कई विधायक आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं।

कुछ विधायकों ने यह भी कहा कि यदि योजनाओं का लाभ समय पर जनता तक नहीं पहुंचेगा, तो इसका सीधा असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है। ऐसे में सदन के भीतर ही सरकार को आईना दिखाने की कोशिश की जा रही है।

विपक्ष ने भी साधा निशाना

हालांकि आज का केंद्र बिंदु सत्ता पक्ष के सवाल रहे, लेकिन विपक्ष ने भी इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि जब सत्ताधारी दल के विधायक ही सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

विपक्ष के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की योजनाएं कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में भारी खामियां हैं। उन्होंने मांग की कि बजट सत्र के दौरान सभी विभागों की विस्तृत समीक्षा कराई जाए और लंबित परियोजनाओं की सूची सार्वजनिक की जाए।

स्पीकर ने बनाए रखा अनुशासन

सदन में बढ़ते शोर-शराबे और लगातार हस्तक्षेप के बीच अध्यक्ष ने कई बार सदस्यों से शांत रहने और प्रश्नकाल की गरिमा बनाए रखने की अपील की। कुछ समय के लिए सदन में तीखी बहस भी हुई, जिसके बाद दोपहर 2 बजे तक कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा की गई।

अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि लंच के बाद सदन की दूसरी पाली में बजट सत्र की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाई जाएगी और सदस्यों को अपने प्रश्न रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।

राज्यसभा चुनाव 2026: बिहार की 5 समेत 37 सीटों पर महासंग्राम, 16 मार्च को मतदान—सत्ता और विपक्ष के लिए निर्णायक परीक्षा

Rajya Sabha Elections 2026: देश की संसदीय राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Election Commission of India ने राज्यसभा की 37 रिक्त हो रही सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस सूची में बिहार की 5 अहम सीटें शामिल हैं, जिन पर सियासी दलों की निगाहें टिकी हुई हैं। इन सीटों पर होने वाला चुनाव सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संसद के ऊपरी सदन में आने वाले वर्षों के राजनीतिक समीकरण तय करने वाला निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

अप्रैल 2026 में कई वरिष्ठ सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में इन सीटों पर नए प्रतिनिधियों का चयन न केवल राज्यों की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी असर डालेगा। खासकर बिहार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह चुनाव गठबंधन राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

चुनाव कार्यक्रम: 26 फरवरी से 20 मार्च तक पूरी प्रक्रिया

चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 26 फरवरी 2026 से शुरू होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च तय की गई है। 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 मार्च तक प्रत्याशी अपना नाम वापस ले सकेंगे।

16 मार्च 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। मतदान समाप्त होते ही शाम 5 बजे से मतगणना शुरू कर दी जाएगी। पूरी चुनावी प्रक्रिया 20 मार्च तक संपन्न कर ली जाएगी और इसके बाद नवनिर्वाचित सदस्यों की सूची आधिकारिक रूप से जारी की जाएगी।

यह समयसीमा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अप्रैल की शुरुआत में कई सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि नई सूची समय रहते जारी हो जाए ताकि संसद के ऊपरी सदन की कार्यवाही प्रभावित न हो।

किन-किन राज्यों में होगा मतदान?

इस बार कुल 37 सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें प्रमुख राज्यों की सीटों का विवरण इस प्रकार है:

  • महाराष्ट्र – 7 सीटें
  • तमिलनाडु – 6 सीटें
  • पश्चिम बंगाल – 5 सीटें
  • बिहार – 5 सीटें
  • ओडिशा – 3 सीटें
  • असम – 3 सीटें
  • छत्तीसगढ़ – 2 सीटें
  • हरियाणा – 1 सीट
  • हिमाचल प्रदेश – 1 सीट
  • तेलंगाना – 4 सीटें

महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में राजनीतिक परिस्थितियों में हाल के वर्षों में हुए बदलाव के कारण यह चुनाव और भी रोचक हो गया है।

बिहार की 5 सीटें क्यों हैं सबसे अहम?

बिहार की जिन 5 सीटों पर चुनाव होने हैं, उन पर वर्तमान में वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधित्व है। इन नेताओं का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। इनमें प्रमुख नाम हैं:

  • Harivansh Narayan Singh
  • Upendra Kushwaha
  • Ram Nath Thakur
  • Prem Chand Gupta
  • Amarendra Dhari Singh

इनमें हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उपसभापति भी हैं। उनका दोबारा चयन होता है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी होंगी। वहीं उपेंद्र कुशवाहा और प्रेम चंद गुप्ता जैसे नेताओं की भूमिका बिहार की क्षेत्रीय राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण रही है।

इन सीटों पर चुनाव का असर सीधे-सीधे बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी महागठबंधन के बीच शक्ति संतुलन पर पड़ेगा।

महाराष्ट्र में भी दिग्गजों की परीक्षा

महाराष्ट्र की 7 सीटों पर भी चुनाव होने जा रहे हैं। यहां से राष्ट्रीय स्तर के दो बड़े नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है:

  • Sharad Pawar
  • Ramdas Athawale

शरद पवार भारतीय राजनीति के वरिष्ठतम नेताओं में गिने जाते हैं। यदि वे पुनः मैदान में उतरते हैं तो यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है। वहीं रामदास अठावले केंद्र सरकार में मंत्री हैं, ऐसे में उनकी सीट भी एनडीए के लिए अहम है।

राज्यसभा चुनाव कैसे होते हैं?

राज्यसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा नहीं चुने जाते। इनका चुनाव संबंधित राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक करते हैं। यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत सिंगल ट्रांसफरेबल वोट (STV) प्रणाली से होता है।

मतलब साफ है—जिस दल या गठबंधन के पास विधानसभा में जितनी अधिक संख्या होगी, उसके उम्मीदवार की जीत की संभावना उतनी ही अधिक होगी। ऐसे में जहां विधानसभा में संख्या बल का अंतर कम है, वहां जोड़-तोड़, रणनीति और क्रॉस वोटिंग की संभावना बढ़ जाती है।

बिहार में संभावित सियासी गणित

बिहार की राजनीति लंबे समय से गठबंधन आधारित रही है। यहां एनडीए और महागठबंधन के बीच सत्ता का संघर्ष चलता रहा है। राज्यसभा चुनाव में प्रत्येक सीट के लिए आवश्यक वोटों का गणित बेहद अहम होता है।

यदि किसी दल के पास पूर्ण बहुमत नहीं है तो उसे सहयोगी दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना पड़ता है। ऐसे में यह चुनाव न केवल राजनीतिक ताकत का परीक्षण है, बल्कि गठबंधन की मजबूती का भी पैमाना बनेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन 5 सीटों में से कम से कम एक या दो सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।

संसद में क्या बदल सकता है समीकरण?

राज्यसभा में बहुमत का गणित अक्सर लोकसभा से अलग होता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि केंद्र सरकार के पास लोकसभा में स्पष्ट बहुमत होता है, लेकिन राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण उसे महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में क्षेत्रीय दलों का समर्थन लेना पड़ता है।

इन 37 सीटों के चुनाव के बाद राज्यसभा की संरचना में बदलाव संभव है। यदि किसी एक गठबंधन को अपेक्षा से अधिक सीटें मिलती हैं तो वह ऊपरी सदन में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

क्या पुराने चेहरों को मिलेगा दोबारा मौका?

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या राजनीतिक दल अपने मौजूदा सांसदों को दोबारा अवसर देंगे या नए चेहरों को आगे लाएंगे?

बिहार में सामाजिक और जातीय समीकरणों का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में दल यह देखेंगे कि किस समुदाय को प्रतिनिधित्व देना उनके लिए लाभकारी रहेगा। इसी तरह महाराष्ट्र और तमिलनाडु में भी क्षेत्रीय संतुलन और गठबंधन समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत की भूमिका

पश्चिम बंगाल की 5 सीटों और तमिलनाडु की 6 सीटों पर भी सबकी नजर है। दक्षिण भारत के राज्यों में क्षेत्रीय दलों की मजबूत उपस्थिति के कारण राष्ट्रीय दलों को रणनीतिक गठजोड़ करना पड़ता है।

इन राज्यों के परिणाम संसद में विपक्ष की ताकत को भी प्रभावित कर सकते हैं।

क्यों कहा जा रहा है इसे ‘मिनी जनादेश’?

राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष जनमत से न होता हो, लेकिन यह राज्यों की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का प्रतिबिंब जरूर होता है। जिन राज्यों में हाल में सरकार बदली है या गठबंधन टूटे हैं, वहां यह चुनाव सत्ता की स्थिरता का संकेत देगा।

विशेषज्ञ इसे ‘मिनी जनादेश’ इसलिए भी कह रहे हैं क्योंकि इससे यह संकेत मिलेगा कि आने वाले लोकसभा या विधानसभा चुनावों में राजनीतिक रुझान किस दिशा में जा सकते हैं।

तेजस्वी यादव का बड़ा ऐलान: RJD अब सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, राष्ट्रीय पार्टी बनने की दिशा में करेगी विस्तार

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बयान देकर पार्टी के भविष्य के दृष्टिकोण और दिशा को लेकर बड़ा पन्ना खोला है। पटना में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अब राष्ट्रीय जनता दल सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पार्टी जल्द ही देश के अन्य राज्यों में अपने पैर पसारने का प्रयास करेगी और राष्ट्रीय पार्टी बनने की आकांक्षा रखती है

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब RJD ने हाल ही में बिहार विधानसभा चुनावों में सफलता हासिल नहीं की थी। तेजस्वी का बयान पार्टी के पुराने राजनीतिक रुख से एक बड़ा बदलाव दर्शाता है और पार्टी की राजनीतिक सोच में विस्तार को उजागर करता है।

तेजस्वी यादव के बयान की प्रमुख बातें

तेजस्वी यादव ने पटना में दिए अपने बयान में कहा:
📌 “अब हमारी पार्टी सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी। हम आने वाले समय में **अन्य राज्यों में भी चुनाव लड़ने, संगठन का विस्तार करने और राष्ट्रीय पार्टी बनने की दिशा में काम करेंगे।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि RJD ने पहले अन्य राज्यों में चुनाव न लड़ने का फैसला इसलिए किया था ताकि धर्मनिरपेक्ष वोटों का बंटवारा न हो और सहयोगी दलों को लाभ मिले, लेकिन अब समय बदल गया है और पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का अवसर है

तेजस्वी ने यह भी कहा:
➡️ “हम बिहार विधानसभा में चुनाव हार गए, इसका मतलब यह नहीं कि पार्टी कमजोर है, बल्कि परिस्थितियाँ प्रतिकूल थीं। हमारा समय फिर आएगा।”

यहां ये शब्द RJD के कारणों और चुनौतियों को समझने में मदद करते हैं — उन्होंने हार को अस्थायी बताया और पार्टी कार्यकर्ताओं को आशा तथा दृढ़ता के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

नीतीश कुमार पर हमला और RJD की राजनीति

तेजस्वी यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी आरोप लगाए हैं कि वह “अपने फैसलों में प्रभावित अधिकारियों और अपने सहयोगी दल के दबाव में हैं” और इसलिए राज्य की जनता के मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की 100 दिनों की सीमा के बाद वे सरकार की विफलताओं पर जोर देंगे और जनता के बीच यह मामला उठाएंगे कि चुनाव में जिन वादों को उन्होंने लिया था, वे पूरा नहीं किए गए।

यह बयान RJD के राजनीतिक संघर्ष को दर्शाता है, जिसमें विपक्षी दल सत्ता पक्ष की नीतियों और कार्यों की आलोचना करते हुए खुद को जनता की आवाज़ के रूप में पेश करते हैं।

राष्ट्रीय पार्टी बनने की महत्वाकांक्षा क्यों?

भारत में राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने के लिए केंद्र सरकार के चुनाव आयोग के मानदंडों को पूरा करना होता है। इसके लिए दल को विभिन्न राज्यों में समर्थन और सक्रिय वोट बैंक दिखाना आवश्यक होता है।

RJD का यह कदम पार्टी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। तेजस्वी का मानना है कि RJD के पास वह राजनीतिक विरासत, विचारधारा और समर्थन है जो इसे राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावशाली दल बना सकता है।

उनके इस दृष्टिकोण के पीछे यह तर्क भी दिखता है कि भारतीय राजनीति में संवैधानिक रूप से सेक्युलर और सामाजिक न्याय की विचारधारा वाली पार्टियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी बनना चाहिए ताकि वे देशभर के मुद्दों पर अपनी आवाज उठा सकें।

RJD का इतिहास और अब का नवाचार

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की स्थापना 1997 में लालू प्रसाद यादव ने की थी और पार्टी ने बिहार में अपनी एक मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई। लालू यादव के नेतृत्व में RJD ने सामाजिक न्याय, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के मुद्दों को आगे बढ़ाया और राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली दल के रूप में उभरी।

तेजस्वी यादव, जो लालू प्रसाद यादव के पुत्र हैं, ने धीरे-धीरे पार्टी में अपनी भूमिका बढ़ाई और जनवरी 2025 में उन्हें RJD का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। इससे तेजस्वी को पार्टी के फैसलों में अधिक अधिकार और नेतृत्व निभाने का अवसर मिला।

अब तेजस्वी यादव ने पार्टी को एक नई दिशा देने का निश्चय किया है — वह चाहते हैं कि RJD केवल बिहार तक सीमित न रहे बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराए

गया में जीतन राम मांझी का राहुल गांधी पर तीखा वार, बोले– किसानों के हित वाले बिल पर फैला रहे भ्रम

Bihar Politics: बिहार के गया में एक निजी अस्पताल के उद्घाटन समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री Jitan Ram Manjhi ने कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। मीडिया से बातचीत में मांझी ने कहा कि जिस किसान बिल को राहुल गांधी नुकसानदेह बता रहे हैं, वह वास्तव में अधिकांश लोगों के हित में है और विपक्ष उसे गलत तरीके से पेश कर रहा है।

‘उल्टी खोपड़ी’ वाली टिप्पणी

गया शहर के एसएसपी कोठी के पास आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारों ने जब राहुल गांधी की किसान बिल पर आलोचना को लेकर सवाल किया, तो मांझी ने तंज कसते हुए कहा कि “राहुल गांधी की खोपड़ी उल्टी है।” उनका कहना था कि वे उस सच्चाई को देख ही नहीं पा रहे हैं, जो करोड़ों किसानों के भविष्य से जुड़ी है।

95 बनाम 5 का तर्क

केंद्रीय मंत्री ने बिल के समर्थन में आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि इससे देश के 95 प्रतिशत लोगों को सीधा फायदा हो रहा है। उनके मुताबिक, केवल 5 प्रतिशत मामलों में तकनीकी या लेन-देन से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं, जिन्हें विपक्ष बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।

मांझी ने कहा कि जब भारी बहुमत को लाभ मिल रहा हो, तो सीमित कमियों के आधार पर पूरे विधेयक को खारिज करना उचित नहीं है।

विपक्ष पर राजनीतिक आरोप

मांझी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जनता के सामने रखने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि यह बिल किसानों और आम जनता के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, लेकिन इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष के पास ठोस मुद्दों की कमी है, इसलिए जनहित की योजनाओं को विवादों में घसीटा जा रहा है।

जेल से बाहर आते ही आक्रामक दिखे पप्पू यादव, बोले- बेटियों के लिए 100 बार मरना मंजूर

Pappu Yadav बेउर जेल से रिहा होते ही पहले से अधिक आक्रामक अंदाज में नजर आए। मीडिया से बातचीत में पूर्णिया सांसद ने अपनी गिरफ्तारी को ‘अन्याय’ करार दिया और बिहार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि “बिहार की गिरती व्यवस्था” के खिलाफ है।

बिहार की मौजूदा राजनीति पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज की राजनीति बदले की भावना से संचालित हो रही है। उन्होंने इसे अंग्रेजी हुकूमत से भी बदतर बताते हुए कहा कि उस समय कम से कम संघर्ष का स्पष्ट मोर्चा था, लेकिन आज “दोस्त और दुश्मन की पहचान मुश्किल हो गई है।” उन्होंने सत्ता पक्ष पर ‘चरित्रहीन राजनीति’ करने का आरोप लगाया।

पप्पू यादव ने दावा किया कि बिहार में हर दिन 100 से 150 बच्चियां लापता हो रही हैं। उन्होंने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां यह आंकड़ा 53 तक पहुंचा है, लेकिन बिहार में स्थिति कहीं अधिक भयावह है।

दरभंगा में 6 साल की बच्ची और गया में 14 साल की किशोरी के साथ हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने नेताओं और समाज की चुप्पी पर सवाल उठाए। भावुक होते हुए सांसद ने कहा, “बेटियों की इज्जत की रक्षा के लिए मैं 100 बार भी मरना पसंद करूंगा।”

अपनी सेहत और जेल के अनुभव साझा करते हुए सांसद ने प्रशासन की संवेदनहीनता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान Patna Medical College and Hospital (PMCH) में उन्हें 24 घंटे में एक बोतल पानी तक उपलब्ध नहीं कराया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि जेल के भीतर उनकी जान को खतरा था और पूरे मामले की शिकायत वे विधानसभा अध्यक्ष से करेंगे। उन्होंने प्रशासनिक कार्यप्रणाली की जांच की मांग करने की बात कही।

पप्पू यादव के इन बयानों से स्पष्ट है कि जेल से बाहर आने के बाद वे बिहार की राजनीति में आक्रामक तेवर के साथ सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी हलचल तेज होने के आसार हैं।

बिहार बजट सत्र: महिला शिक्षकों के ट्रांसफर से लेकर टीआरई-4 तक गूंजा सदन

पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शिक्षकों से जुड़े मुद्दों ने जोर पकड़ लिया है। शुक्रवार को बिहार विधान परिषद में पूर्व मुख्यमंत्री Rabri Devi ने महिला शिक्षकों के ट्रांसफर का मुद्दा प्रमुखता से उठाया, जिससे सदन में व्यापक चर्चा हुई।

👩‍🏫 महिला शिक्षकों को गृह जिले में पोस्टिंग की मांग

राबड़ी देवी ने सदन में कहा कि महिला शिक्षकों को उनके गृह जिले में ही पदस्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि दूर-दराज जिलों में पोस्टिंग होने के कारण महिला शिक्षकों को रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने यह भी कहा कि महिला शिक्षकों को अपने परिवार, बच्चों और घरेलू जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखना होता है। ऐसे में अगर उनकी पोस्टिंग गृह जिले में हो, तो वे बेहतर ढंग से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेंगी।

राबड़ी देवी ने सरकार से इस दिशा में नीतिगत निर्णय लेने की मांग की।

📚 शिक्षा मंत्री का जवाब

राबड़ी देवी की मांग पर शिक्षा मंत्री Sunil Kumar ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सदन में कहा कि सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करेगी और जो भी संभव होगा, वह किया जाएगा।

हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ट्रांसफर नीति से जुड़े कई प्रशासनिक और तकनीकी पहलू होते हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाता है।

🚨 लॉ एंड ऑर्डर पर भी घिरी सरकार

महिला शिक्षकों के मुद्दे के साथ-साथ राबड़ी देवी ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार में अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं और सरकार इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पा रही है।

उन्होंने गृह मंत्री Samrat Choudhary से इस्तीफे की मांग भी की। सदन के बाहर विपक्षी विधायकों ने इस मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा किया, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया।

📝 सीएल (Casual Leave) को लेकर उठी तकनीकी समस्या

बिहार विधान परिषद में एमएलसी Sanjeev Kumar Singh ने शिक्षकों की छुट्टियों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया।

उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार, यदि कोई शिक्षक सीएल (Casual Leave) लेता है, तो उसके आगे-पीछे या बीच में पड़ने वाले रविवार या अन्य निर्धारित अवकाश को सीएल में नहीं जोड़ा जाता।

लेकिन जब शिक्षक ई-शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से आवेदन करते हैं, तो सिस्टम रविवार या अवकाश को भी सीएल में जोड़ देता है। इससे शिक्षकों की छुट्टियां अनावश्यक रूप से कम हो जाती हैं और उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीकी खामियों की जांच कर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

🎓 टीआरई-4 को लेकर बढ़ा असंतोष

शिक्षक भर्ती परीक्षा (टीआरई-4) को लेकर भी राज्य में असंतोष देखा जा रहा है। बीपीएससी के जारी कैलेंडर में टीआरई-4 का कोई स्पष्ट शेड्यूल नहीं होने के कारण अभ्यर्थियों में नाराजगी है।

पटना में कई अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन कर सरकार से स्पष्ट समय-सीमा घोषित करने की मांग की है।

सरकार की ओर से यह कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया के लिए आवश्यक रोस्टर भेजा जा चुका है और आगे की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। हालांकि अभ्यर्थी जल्द अधिसूचना जारी करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

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राहुल गांधी पर कार्रवाई की मांग, बीजेपी ने दिया विशिष्ट प्रस्ताव का नोटिस

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ एक विशिष्ट प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस दिया है। दुबे ने मांग की है कि राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त की जाए और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाए। इस कदम से संसद और सियासी गलियारों में एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

नोटिस में क्या लगाए गए हैं आरोप?

निशिकांत दुबे द्वारा दिए गए नोटिस में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी विदेशी संस्थाओं और संगठनों, जैसे सोरोस फाउंडेशन, फोर्ड फाउंडेशन और यूएसएड से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम और अमेरिका जैसे देशों की यात्राएं करते रहे हैं। नोटिस में दावा किया गया है कि इन विदेश यात्राओं के दौरान वे कथित तौर पर ऐसे तत्वों के संपर्क में रहे जो भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े बताए जाते हैं।

दुबे ने अपने प्रस्ताव में यह भी कहा है कि नेता प्रतिपक्ष का पद संवैधानिक और राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, और इस पद पर बैठे व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वह राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखे। उनके अनुसार, यदि किसी भी प्रकार की गतिविधि राष्ट्रीय हितों के विपरीत प्रतीत होती है, तो उस पर सदन में चर्चा आवश्यक है।

संसद परिसर में दुबे का बयान

संसद परिसर में समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत करते हुए निशिकांत दुबे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने विशेषाधिकार हनन का नोटिस नहीं दिया है, बल्कि एक विशिष्ट प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया अपनाई है। उन्होंने कहा कि विशिष्ट प्रस्ताव एक स्वतंत्र प्रक्रिया होती है, जिसके माध्यम से सदन किसी विषय पर अपनी राय या निर्णय दर्ज कर सकता है।

दुबे ने कहा, “मैं नियम-कानून का उल्लंघन करने वाला नहीं हूं। मैंने संसदीय प्रक्रिया का पालन करते हुए विशिष्ट प्रस्ताव का नोटिस दिया है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा गंभीर है और इसे सदन के सामने रखा जाना चाहिए।

क्या होता है विशिष्ट प्रस्ताव?

संसदीय प्रक्रिया में विशिष्ट प्रस्ताव (Substantive Motion) एक स्वतंत्र प्रस्ताव होता है, जिसे सदन की अनुमति से पेश किया जाता है। इसका उद्देश्य किसी विशेष विषय पर सदन की स्पष्ट राय या निर्णय प्राप्त करना होता है। यदि सदन इसे स्वीकार करता है, तो उस पर चर्चा होती है और मतदान भी कराया जा सकता है।

कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया

राहुल गांधी के खिलाफ दिए गए इस नोटिस पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी ने ऐसा कौन सा विशेषाधिकार हनन किया है, जिसके आधार पर उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की जा रही है।

उन्होंने पिछली घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब पहले उनकी सदस्यता समाप्त की गई थी, तब जनता ने उन्हें और अधिक समर्थन देकर दोबारा संसद भेजा। वेणुगोपाल ने कहा, “अगर सरकार हमें फांसी पर चढ़ाना चाहती है तो उसके लिए भी हम तैयार हैं। हम किसी भी प्रस्ताव से डरने वाले नहीं हैं और संसद में सच बोलते रहेंगे।”

कांग्रेस का कहना है कि यह कदम राजनीतिक दबाव बनाने और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश है। पार्टी नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि इस प्रस्ताव पर आगे कोई कार्रवाई होती है तो वे इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेंगे।

सियासी हलचल तेज

इस पूरे घटनाक्रम ने संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। जहां भाजपा सांसद इस मुद्दे को राष्ट्रीय हित से जोड़ रहे हैं, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बता रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह प्रस्ताव सदन में किस रूप में आगे बढ़ता है और इस पर क्या निर्णय लिया जाता है।

भाजपा के सरकार में रहते हुआ था जातीय जनगणना कराने का निर्णय: सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने जातीय जनगणना के मुद्दे पर हाईकोर्ट के निर्णय का स्वागत किया और कहा कि बिहार में जातीय जनगणना कराने का निर्णय उस राज्य सरकार का था, जिसमें भाजपा शामिल थी और उस समय राजद विपक्ष में था।

  • हाईकोर्ट का फैसला स्वागतयोग्य, काम में तेजी लाए सरकार
  • जातीय जनगणना का श्रेय लूटने के लिए झूठे आरोप न लगाये राजद
  • विरोध में याचिका दायर करने वाले का भाजपा से कोई संबंध नहीं
  • हम ऐसी दोमुंही राजनीति नहीं करते कि जिसके खिलाफ सबूत दें, उसी से हाथ मिला लें
  • यदि मजबूती से पैरवी की गई होती तो जातीय जनगणना पर रोक नहीं लगती

श्री मोदी ने कहा कि जातीय जनगणना के विरुद्ध याचिका दायर करने वाले का भाजपा से कोई संबंध नहीं है। राजद इसका श्रेय लेने के लिए अनर्गल आरोप न लगाये।

sushilModi

उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसी दोमुंही राजनीति नहीं करती कि जिसके खिलाफ जाँच एजेंसियों को सबूत जुटा कर दें, उसी से हाथ मिला कर सत्ता हथिया लें।

श्री मोदी ने कहा कि भाजपा पहले भी जातीय जनगणना के पक्ष में थी, आज हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करती है और आगे भी जातीय जनगणना का समर्थन करेगी, ताकि सभी पिछड़ी जातियों को विकास की मुख्यधारा में लाने वाले कार्यक्रम लागू हो सकें।

उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार ने मजबूती से पैरवी की होती और संवैधानिक प्रश्नों का उत्तर ठीक से दिया होता, तो जातीय जनगणना पर बीच में रोक नहीं लगती।

श्री मोदी ने कहा कि कानूनी बाधाएँ दूर होने के बाद राज्य सरकार को जातीय जनगणना का काम अब तेजी से पूरा करना चाहिए।

“इंडिया” बनाम भारत में करोड़ों गरीब-पिछड़े भारत के साथ : सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि भ्रष्ट और परिवारवादी विपक्षी दलों के मंच का नाम “इंडिया” रखने से इनकी खोटी नीयत छिपने वाली नहीं है। इनके इलीट, पश्चिम-प्रभावित और हिंदू-विरोधी “इंडिया” को करोड़ों गरीबों, पिछड़ों का संस्कृतिनिष्ठ भारत 2024 में मुँहतोड़ जवाब देगा। इंडिया बनाम भारत मैच में जीत भारत की होगी।

  • नाम बदलने से मॉल का खोटा माल नहीं बदल जाता
  • लालू, ममता, केजरीवाल की हकीकत किसी से छिपी नहीं
  • संयोजक न बनाये जाने से नीतीश कुमार की हुई किरकिरी

श्री मोदी ने कहा कि चारा घोटाला में सजायाफ्ता लालू प्रसाद और चिटफंड घोटाले में लिप्त ममता बनर्जी जैसे दागी लोग जहाँ जुटे हैं, उस नए मॉल का नाम बदल लेने से खोटा माल खरा सोना नहीं हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि बंगलोर में सबसे बड़ी किरकिरी तो नीतीश कुमार की हुई। उन्हें फर्जी “इंडिया’ का संयोजक न बनाये जाने से नाराज होकर पहले ही बैठक से निकल लेना पड़ा। वे प्रेस कांफ्रेन्स में नहीं थे।

Nitish Kumar

बंगलुरू में नीतीश-विरोधी पोस्टर भी लगाये गए थे, जबकि वहाँ सरकार कांग्रेस की है।

श्री मोदी ने कहा कि इन दलों की पटना बैठक में इसी तरह केजरीवाल नाराज होकर दिल्ली लौट गए थे। जो लोग चुनाव से पहले न मन मिला पा रहे हैं, न एक चेहरा तय कर पाए, वे देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोई चुनौती नहीं दे पाएँगे।

जब सरकार पहले से नियुक्त शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं दे पा रही है, तब नये शिक्षकों के वेतन मद में सालाना 11000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ कैसे उठायेगी? : सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जब सरकार पहले से नियुक्त शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं दे पा रही है, तब नये शिक्षकों के वेतन मद में सालाना 11000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ कैसे उठायेगी? पैसे कहाँ से आएँगे, यह बताना चाहिए।

• खाते में हजार करोड़ शेष रहते शिक्षकों का वेतन रोकना गलत
• उपयोगिता प्रमाण पत्र सौंपते ही बिहार को मिल जाएगी समग्र शिक्षा अभियान की राशि
• पिछले साल का बिहार ने केंद्र को नहीं दिया खर्च का हिसाब
• बताएँ, नये शिक्षकों के वेतन हेतु कहाँ से आएँगे 11000 करोड़- सुशील कुमार मोदी

श्री मोदी ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति और उनके वेतन का भुगतान पूरी तरह राज्य सरकार की जिम्मेवारी है। केंद्र सरकार इसमें केवल सहयोग करती है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से शिक्षक वेतन-मद में सहायता राशि न मिलने का दुष्प्रचार कर रही है, जबकि सच यह है कि बिहार सरकार ने पिछले साल के खर्च का हिसाब और उपयोगिता प्रमाण पत्र ही नहीं दिया।

SushilModi

श्री मोदी ने कहा कि जैसे ही राज्य सरकार उपयोगिता प्रमाण पत्र सौंपेगी, केंद्र से समग्र शिक्षा अभियान की सहायता राशि मिल जाएगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के खाते में अब भी 1000 करोड़ रुपये बिना खर्च हुए पड़े हैं। इससे शिक्षकों को वेतन दिया जा सकता है।

श्री मोदी ने कहा कि अपनी नाकामी छिपाने के लिए केंद्र पर तथ्यहीन आरोप लगाना नीतीश सरकार की आदत बन गयी है। यह सरकार शिक्षकों की पीठ पर लाठी चलाती है और वेतन रोक कर पेट पर लात मारती है।

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लाठी में तेल पिलाने वालों की संगत में नीतीश, बर्बर हुई पुलिस: सुशील मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति, 10 लाख युवाओं की सरकारी नौकरी पर विश्वासघात, शासन में भ्रष्टाचार और चौपट कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे पर शांतिपूर्ण ढंग से संचालित विधानसभा मार्च पर बर्बर लाठीचार्ज कर एक कार्यकर्ता की जान लेना और दर्जनों लोगों को बुरी तरह जख्मी करना निंदनीय है। क्या यही लोकतंत्र है नीतीश कुमार जी ?

  • शिक्षकों के मुद्दे पर व्यर्थ नहीं जाएगा भाजपा कार्यकर्ता का बलिदान
  • पटना की सड़कों पर लोकतंत्र लहूलुहान हुआ

श्री मोदी ने कहा कि प्रदर्शन करने के अधिकार को लाठी के बल पर रौंदने वाली सरकार किस मुँह से लोकतंत्र बचाने की बात करती है ?

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मांग के समर्थन में भाजपा के जहानाबाद जिला महामंत्री विजय कुमार सिंह का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। इसके विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

bjp patna lathi charge

श्री मोदी ने कहा कि लाठी में तेल पिलाने वालों की संगत में आकर नीतीश कुमार ने पुलिस को निरंकुश और हिंसक बना दिया है।

उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों पर भाजपा के सैंकड़ों कार्यकर्ता सड़क पर उतरे, संघर्ष किया और लाठी खायी, उसे विधान मंडल में भी पूरी ताकत से उठाया गया। अब हम ये मामला जनता की अदालत में भी ले जाएँगे।

बिहार के लोग 2024 के लोकसभा चुनाव में “भ्रष्ट नेताओं को करारा जवाब” देंगे : अमित शाह

लखीसराय । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को बिहार के लखीसराय जिले में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा । शाह ने कहा…

वह सिर्फ लालू को बेवकूफ बना रहे हैं’ और नीतीश कुमार को ‘पलटू बाबू’ (मिस्टर यू-टर्न) कहा

बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, अश्विनी चौबे, नित्यानंद राय, नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधामोहन सिंह, बिहार भाजपा के विनोद तावड़े, सुनील ओझा, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, राष्ट्रीय मंत्री रितुराज सिंन्ह, पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, रेणु देवी समेत सभी बड़े नेता स्टेज पर मौजूद थे।

CM नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अभी-अभी पलटू बाबू पूछ रहे थे कि नौ साल में क्या किया? अरे नीतीश बाबू, जिनके साथ इतना बैठे हो, जिनके कारण मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हो- उनका तो लिहाज करो।पीएम नरेंद्र मोदी जहां जा रहे हैं, वहां मोदी-मोदी हो रहा। ये मोदी का सम्मान जो पूरे दुनिया भर में हो रहा है वह उनका या भाजपा का सम्मान नहीं हो रहा बल्कि आपका और पूरे देश की जनता का सम्मान हो रहा है।

जब से भाजपा की सरकार बनी तो पाक प्रेरित आतंकियों को जगह दिखा दी। सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को घर घुसकर मारा। कांग्रेस, जदयू, राजद, ममता समेत सारे विपक्षी 70 साल से धारा 370 को गोद में खिला रहे थे। लेकिन, मोदी जी ने धारा 370 को खत्म कर दिया और कश्मीर की रक्षा की। यह लोग संसद में बैठकर काउ-काउ करते थे कि धारा 370 हटाओगे तो खून की नदियां बहेंगी। अरे राहुल बाबा खून की नदियां तो छोड़ो किसी ने कंकड़ तक चलाने की हिम्मत नहीं हुई। नरेंद्र मोदी ने देश और बिहार के विकास के लिए कई काम किए।

Amit Shah in Bihar

उन्होंने पूर्व सहयोगी नीतीश कुमार से यह बताने को भी कहा कि उन्होंने बिहार के लिए क्या किया है। “उन्होंने केवल अपने गठबंधन सहयोगियों को बदला है।”

अमित शाह बोले- अरे नीतीश बाबू, जिनके कारण मुख्यमंत्री बने हो, उनका तो लिहाज करो

मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा, ‘क्या बार-बार घर बदलने वाले नेता पर भरोसा किया जा सकता है? क्या ऐसे आदमी के हाथ में बिहार की बागडोर दी जानी चाहिए? वह भी यह जानता है. इसीलिए वह देश का पीएम बनने के लिए कांग्रेस के घर के सामने बैठे हैं. वह पीएम नहीं बनना चाहते, वह इस उम्र में सिर्फ लालू यादव को बेवकूफ बना रहे हैं.’ वह यहीं बिहार में रहना चाहते हैं और उन्होंने बीजेपी के सभी प्रतिद्वंद्वियों को इकट्ठा कर लिया है.”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की यात्रा पिछले सप्ताह 15 विपक्षी दलों के 32 नेताओं की पटना में मुलाकात के कुछ दिनों बाद हुई है और उनमें से एक को छोड़कर सभी ने संयुक्त रूप से भाजपा का मुकाबला करने और 2024 के राष्ट्रीय चुनावों से पहले एक साझा एजेंडा बनाने की कसम खाई थी।

अमित शाह ने यह भी कहा कि महागठबंधन सरकार के तहत कानून-व्यवस्था की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।

यह कहते हुए कि बिहार राज्य ने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है, शाह ने कहा, “बिहार 2024 के चुनावों में भ्रष्ट नेताओं को करारा जवाब देगा।”

अमित शाह ने कहा कि जिन्होंने विश्वासघात किया है, उन्हें दंड देने का काम मुंगेर लोकसभा वालों को करना है। जनता से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि 2024 में मोदीजी को जिताओगे, 2025 में BJP को जिताओगे।

विपक्ष की बैठक टांय-टांय फिश हो गई; ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’ परंतु बैठक के बाद जो चुहिया निकली वह भी मरी हुई : सुशील मोदी

बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सम्प्रति राज्य सभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि विपक्ष की बैठक टांय-टांय फिश हो गई। कहावत है ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’ परंतु बैठक के बाद जो चुहिया निकली वह भी मरी हुई ।

• विपक्षी एकता बैठक की निकली हवा
• अरविंद केजरीवाल गुस्से में पत्रकार वार्ता छोड़कर चले गए

श्री मोदी ने कहा कि बैठक कि एक ही उपलब्धि है कि अगली बैठक का स्थान और तिथि तय हो गई। न तो प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार, न ही नीतीश कुमार को संयोजक बनाने की चर्चा हुई। उल्टे अरविंद केजरीवाल गुस्से में प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चले गए।

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श्री मोदी ने कहा कि 7 मुख्य विपक्षी दल बैठक से नदारद थे। 15 शामिल दलों में 10 परिवारवादी दल हैं और 12 दल हैं जिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। ऐसे वंशवादी और भ्रष्टाचारी से लिप्त पार्टियां ईमानदार नरेंद्र मोदी का मुकाबला नहीं कर सकती।

कर्नाटक के परिणाम का बिहार पर कोई असर नहीं होगा: सुशील कुमार मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि कर्नाटक विधानसभा के चुनाव परिणाम का बिहार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

राजद-जदयू के लोग भी नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने के लिए वोट देंगे

श्री मोदी ने कहा कि देश की जागरूक जनता विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में अलग-अलग तरह से मतदान करती है, इसलिए 2018 में राजस्थान-छत्तीसगढ में कांग्रेस को वोट देने वालों ने भी 2019 के संसदीय चुनाव में भाजपा का समर्थन किया था।

उन्होंने कहा कि 2024 में राजद-जदयू के मतदाता भी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए बिहार में एकजुच होकर वोट देंगे।

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#PatnaHighCourt

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार का जनाधार खिसक चुका है। पिछले साल विधानसभा के तीन उपचुनावों ने जदयू को उसकी हैसियत बता दी।

उन्होंने कहा कि सात दल मिल कर भी कुढनी और गोपालगंज में भाजपा को नहीं हरा पाए थे। इनमें से जो एक दल कर्नाटक में सरकार बनाने जा रहा है, उसकी बिहार में कोई बिसात नहीं।

नीतीश सरकार जातीय जनगणना पर हाईकोर्ट में पिटी, सही ढंग से पक्ष नहीं रख पायी सरकार: सुशील कुमार मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जातीय जनगणना कराने के विरुद्ध एक भी कानूनी सवाल का जवाब दमदार ढंग से नहीं दे पाने के कारण हाईकोर्ट में फिर नीतीश सरकार की भद पिटी। जनगणना कराने का फैसला उस एनडीए सरकार था, जिसमें भाजपा शामिल थी।

भाजपा के सरकार में रहते हुआ था जातीय जनगणना का फैसला

श्री मोदी ने कहा कि अदालत की अंतरिम रोक के बाद जातीय जनगणना लंबे समय तक टल सकती है और इसके लिए मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं।

उन्होंने कहा कि जिस मुद्दे पर विरोध पक्ष से मुकुल रहोतगी जैसे बड़े वकील बहस कर चुके थे, उस पर जवाब देने के लिए वैसे ही कद्दावर वकीलों को क्यों नहीं खड़ा किया गया ?

sushil modi vs nitish kumar

श्री मोदी ने कहा कि जनगणना के संबंध में तीन बड़े न्यायिक प्रश्न थे-

  • क्या इससे निजता के अधिकार का हनन होता है?
  • क्या यह कवायद सर्वे की आड़ में जनगणना है?
  • इसके लिए कानून क्यों नहीं बनाया गया?

उन्होंने कहा कि सरकार के वकील इन तीनों सवालों पर अपनी दलील से न्यायालय को संतुष्ट नहीं कर पाये। इससे लगता है कि सरकार यह मुकदमा जीतना ही नहीं चाहती थी ।

श्री मोदी ने कहा कि स्थानीय निकायों में अतिपिछड़ों को आरक्षण देने के लिए विशेष आयोग बनाने के मुद्दे पर भी सरकार को झुकना पड़ा था। आयोग की रिपोर्ट अब तक जारी नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि जनगणना हो या आरक्षण, राजद को अतिपिछड़ा वर्ग पर नहीं, केवल एम-वाइ समीकरण पर भरोसा है। वे केवल दिखावे के लिए पिछड़ों की बात करते हैं।

JDU के पूर्व नेता, प्रवक्ता अजय आलोक BJP में हुए शामिल

पटना ।  जदयू के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर अजय आलोक ने दिल्ली में बीजेपी में शामिल हो गए। उन्होंने दिल्ली के भाजपा मुख्यालय में सदस्यता ग्रहण किया। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अजय आलोक को बीजेपी की सदस्यता दिलाई गई । मौके पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मौजूद रहे थे।

इस मौके पर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन क्लियर है, राष्ट्र प्रथम और इसी विजन के साथ वह देश को आगे बढ़ा रहे हैं। आज बीजेपी की नीतियों से प्रभावित होकर आए दिन कई नेता पार्टी में शामिल हो रहे हैं। अजय आलोक BJP में आज शामिल हुए हैं इनके आने से बीजेपी को नई मजबूती प्रदान होगी।

BJP Ajay Alok

BJP की सदस्यता लेने के बाद अजय आलोक ने कहा, भाजपा में आकर मुझे ऐसा लग रहा है कि “मैं अपने परिवार में ही आया हूं जिसके मुखिया मोदी जी हैं। अगर मेरा एक प्रतिशत योगदान भी मोदी विज़न में हो सका तो यह मेरे लिए गर्व की बात होगी।”

अजय आलोक को पिछले साल JDU ने बाहर का रास्ता दिखाया था । लालू प्रसाद यादव और RJD के विरोधी अजय आलोक महागठबंधन बनने के बाद से ही नाराज़ चल रहे थे। उन्होंने कई बार सीएम नीतीश कुमार पर भी हमला किया जिसके बाद पार्टी ने उन्हें आरसीपी सिंह का करीबी बता उनसे इस्तीफा मांग लिया था।

इस मौके पर अजय आलोक ने बिहार के CM नीतीश कुमार को भी आड़े हाथों लिया और कहा, “नीतीश कुमार को बहुत लोग पलटीमार कहते हैं जो बिल्कुल सही है. उन्होंने ही 87 साल बाद जेल मैन्युअल में संशोधन किया था और यह क्लॉज डाला था कि अगर सरकारी सेवक की हत्या होगी तो उसे कभी रिहा नहीं किया जाएग, अब आनंद मोहन और बाकी कैदियों को उन्हें रिहा करना था इसलिए उन्होंने संशोधन किया.”

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अजय आलोक के निजी जीवन की बात करें तो वे डॉक्टर हैं। उनके पिता गोपाल सिन्हा भी प्रसिद्ध डॉक्टर हैं। वहीं, वे बसपा से विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। इसके अलावा, वे टीवी डिबेट का चर्चित चेहरा हैं।

लोकसभा 2024 में BJP का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों को मिलकर रणनीति बनाने की जरूरत : CM नीतीश-ममता मुलाकात

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कोलकाता में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। विपक्षी दल 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए BJP के खिलाफ एकजुट हो, दलों को एक करने में नीतीश कुमार अहम भूमिका निभा रहे हैं । बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव भी इस बैठक में मौजूद रहे।

राज्य सचिवालय नबन्ना में बैठक के बाद नीतीश कुमार ने कहा, ‘यह एक बहुत ही सकारात्मक चर्चा थी, विपक्षी दलों को एक साथ बैठने और रणनीति बनाने की जरूरत है’। ममता बनर्जी यह कहते हुए बैठक से बाहर निकलीं, ”हमें यह संदेश देना है कि हम सब एक साथ हैं।”

इस बैठक के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि मैंने नीतीश जी से यही अनुरोध किया है कि जयप्रकाश जी का आंदोलन बिहार से हुआ था तो हम भी बिहार में ऑल पार्टी मीटिंग करें। हमें एक संदेश देना है कि हम सभी एक साथ हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिहार के CM नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के साथ आज संक्षिप्त मुलाकात के बाद कहा कि विरोधी दलों के महागठबंधन को लेकर ‘अहंकार’ का कोई टकराव नहीं है । अगले साल होने वाले आम चुनाव जनता बनाम बीजेपी का होगा।

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नीतीश कुमार ने दावा किया, “भारत के विकास के लिए कुछ भी नहीं किया जा रहा है, जो सत्ताधारी हैं, वे केवल अपने विज्ञापन में रुचि रखते हैं।” विपक्षी नेता बढ़ती बेरोजगारी, रुपये के गिरते मूल्य और बढ़ती कीमतों के साथ-साथ सरकारी विज्ञापनों पर खर्च की आलोचना करते रहे हैं।

CM नीतीश कुमार ने कहा कि जो सत्ता में हैं वे सिर्फ अपनी चर्चा करते हैं और कुछ नहीं, ये आजादी की लड़ाई है, हमे अलर्ट रहना है. ये लोग इतिहास बदल रहे हैं। अब पता नहीं, ये इतिहास बदल देंगे या क्या कर देंगे? सभी को सतर्क होना है इसलिए हम सभी के साथ बातचीत कर रहे हैं। हमारे बीच बहुत अच्छी बात हुई है, आवश्यकता अनुसार हम भविष्य में अन्य पार्टियों को साथ में लाकर बातचीत करेंगे। ममता जी के साथ बेहद सकारात्मक बातचीत हुई।

‘दलित विरोधी है बिहार सरकार’ आनंद मोहन की रिहाई के पहले नीतीश सरकार के फैसले पर भड़कीं मायावती

पटना । बिहार में पिछले कुछ दिनों से लगातार सुर्खियों में चर्चित पूर्व बाहुबली सांसद आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ अब आवाज उठने लगे हैं। देशभर के दलित नेताओं के साथ अब मायावती ने भी ट्वीट कर नीतीश कुमार को दलित विरोधी करार दे दिया है।

पूर्व बाहुबली सांसद आनंद मोहन गोपालगंज के तत्कालीन आईएएस अधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे। अभी आनंद मोहन बेटे चेतन आनंद की शादी को लेकर पैरोल पर बाहर हैं।

आनंद मोहन के समर्थकों की मांग को देखते हुए नीतीश सरकार ने आनंद मोहन की रिहाई के लिए नियम में फेरबदल किया है। सरकार ने बीते 10 अप्रैल को जेल मैनुअल में जरूरी बदलाव किया है। जिसके बाद आनंद मोहन की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो सकता है।

BSP चीफ मायावती ने रविवार को आनंद मोहन मामले में दो ट्वीट किए। इसमें उन्होंने कहा, ‘बिहार की नीतीश सरकार द्वारा, आंध्र प्रदेश (अब तेलंगाना) महबूबनगर के रहने वाले गरीब दलित समाज से आईएएस बने बेहद ईमानदार जी. कृष्णैया की निर्दयता से की गई हत्या मामले में आनंद मोहन को नियम बदल कर रिहा करने की तैयारी देशभर में दलित विरोधी निगेटिव कारणों से काफी चर्चाओं में है।’

मायावती ने दूसरे ट्वीट में लिखा ‘आनंद मोहन बिहार में कई सरकारों की मजबूरी रहे हैं, लेकिन गोपालगंज के तत्कालीन डीएम श्री कृष्णैया की हत्या मामले को लेकर नीतीश सरकार का यह दलित विरोधी और अपराध समर्थक कार्य से देश भर के दलित समाज में काफी रोष है। चाहे कुछ मजबूरी हो किंतु बिहार सरकार इस पर जरूर पुनर्विचार करे।’

बिहार में लोकसभा चुनाव 2024 और विधानसभा चुनाव 2025 के पहले बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन को जेल से रिहा किए जाने के लिए बिहार सरकार के निर्णय पर सवाल उठ रहे हैं । लोगों का कहना है कि आनंद मोहन पर एक दलित आईएएस की हत्या के आरोप में वो जेल में हैं और सरकार यदि उन्हें रिहा करती है तो इससे साफ है बिहार सरकार दलित विरोधी है।

बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी द्वार ‘मिट्टी में मिला देंगे’ वाले बयान पर CM नीतीश ने दी अपनी प्रतिक्रिया

बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी द्वार ‘मिट्टी में मिला देंगे’ वाले बयान पर CM नीतीश ने दी अपनी प्रतिक्रिया

जो इस तरह के शब्दों का प्रयोग करता है तो ‘समझ लीजिए बुद्धि नहीं है, जो इच्छा है करें”

पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने शराबबंदी से जुड़े पूछे 10 सवाल, आम माफी की अपील

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने शराबबंदी कानून के तहत अभी तक गिरफ्तार सभी 8.35 लाख लोगों पर से मुकदमें वापस लेने पर जोर देते हुए सरकार से कई सवाल पूछे।

श्री मोदी ने कहा कि ये लाखों लोग हत्या, अपहरण, बलात्कार, बैंक लूट या ट्रेन डकैती जैसे किसी गंभीर अपराध में नहीं पकड़े गए हैं कि इन्हें माफ कर सुधरने का कोई मौका नहीं दिया जाए।

उन्होंने कहा कि केवल शराब पीने के कारण इतनी बड़ी संख्या में जो लोग बिहार में ‘गुनहगार’ हैं, वे दूसरे राज्यों में होते, तो अपराधी के श्रेणी में नहीं आते।

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श्री मोदी ने कहा कि शराबबंदी कानून के तहत केवल ऐसे गरीबों को जेल में डाला जा रहा है, जो 2000 हजार रुपये जुर्माना नहीं दे सकते। अमीर लोग आसानी से छूट जाते हैं।

श्री मोदी ने सरकार से पूछा

1- कि जब 6 साल के दौरान शराबबंदी कानून में तीन बार संशोधन किया जा सकता है, तो एक बार आम माफी क्यों नहीं दी जा सकती ?

2- शराबबंदी से जुड़े 4.58 लाख मुकदमों का अभी तक निष्पादन क्यों नहीं हुआ?

3- शराब पीने के कारण जो 6.06 लाख लोग गिरफ्तार हुए, उन्हें सजा क्यों नहीं हो पायी?

4 – शराब पीते पकड़े गए लोगों को गंभीर अपराधियों से अलग रखने के लिए डिटेंशन सेंटर क्यों नहीं बनाये गए?

5- शराब से जुडे मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए विशेष अदालतों के भवन आज तक क्यों नहीं बनें?

6- ज़हरीली शराब पीने से मौत की 30 से ज्यादा घटनाएँ हुईं, लेकिन एक भी शराब माफिया को सजा क्यों नहीं हुई?

7- शराबबंदी कानून के तहत अभी तक गिरफ्तार 8.35 लोगों में दलित, आदिवासी और पिछड़ा समुदाय के लोगों की संख्या कितनी है?

8- पासी समाज के लाखों लोगों के पुनर्वास की योजना क्यों विफल हुई?

9- नीरा उद्योग के प्रोत्साहन का वादा पूरा क्यों नहीं हुआ?

10-शराबबंदी के बाद राज्य में भांग, अफीम, गांजा जैसे मादक पदार्थों का सेवन क्यों बढ़ा?

जब कुछ सजायाफ्ता लोगों के लिए जेल मैन्युअल बदला जा सकता है, तब आम माफी क्यों नहीं? – सुशील मोदी

पटना । राज्यसभा सांसद सह पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार ने कहा कि जब कुछ प्रभावशाली लोगों के गंभीर मामलों में सजायाफ्ता होने के बावजूद उनकी रिहाई के लिए जेल मैन्युअल को शिथिल किया जा सकता है, तब शराबबंदी कानून तोड़ने के सामान्य अपराध से जुड़े 3 लाख 61 हजार मुकदमे भी वापस लिये जा सकते हैं।

• जब कुछ सजायाफ्ता लोगों के लिए जेल मैन्युअल बदला जा सकता है, तब आम माफी क्यों नहीं?
• शराब से जुड़े मामलों के लिए न स्पेशल कोर्ट, न स्पीडी ट्रायल

श्री मोदी ने कहा कि शराबबंदी कानून के तहत गिरफ्तार लोगों के लिए आम माफी का एलान कर सरकार को 25 हजार लोगों की तुरंत रिहाई का रास्ता साफ करना चाहिए। इसे मुख्यमंत्री अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न न बनायें।

उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून के तहत जिन 5 लाख 17 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया, वे कोई शातिर अपराधी नहीं हैं, उनमें 90 फीसद लोग दलित-पिछड़े-आदिवासी समुदाय के हैं। ऐसे लगभग 25 हजार लोग अभी भी जेल में हैं।

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श्री मोदी ने कहा कि जेलों में जगह नहीं है और अदालतें पहले ही मुकदमों के बोझ से दबी हैं। गरीब मुकदमे के चक्कर में और गरीब हो रहे हैं। ऐसे में शराबबंदी कानून तोड़ने वालों को आम माफी देने से सबको बड़ी राहत मिलेगी।

उन्होंने कहा कि 6 वर्षों में जहरीली शराब पीने से मरने की 30 घटनाओं में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 196 लोगों की मौत हुई, लेकिन इस के लिए दोषी एक भी माफिया या शराब तस्कर को सजा नहीं हुई।

श्री मोदी ने कहा कि राज्य सरकार ने शराब से जुड़े मामले तेजी से निपटाने के लिए स्पेशल कोर्ट का गठन क्यों नहीं किया ? किसी मामले में स्पीडी ट्रायल क्यों नहीं हुआ? गरीबों को उनके हाल पर क्यों छोड़ दिया गया?

बिहार में लालू और बालू का रिश्ता अटूट है, इसलिए राजद के सत्ता में आते ही पुलिस पर बढ़े माफिया के हमले: सुशील मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार में लालू और बालू का रिश्ता अटूट है, इसलिए राजद के सत्ता में आते ही बालू माफिया का दुस्साहस बढ़ जाता है और इसी का परिणाम है कि महिला अधिकारी पर जानलेवा हमला हुआ।

• लालू – बालू के रिश्ते से पुलिस पर बढ़े माफिया के हमले
• नीतीश कुमार ने राजद को खनन विभाग देकर बिल्ली को सौंपी दूध की रखवाली
• बालू माफिया ने 4.28 करोड़ में खरीदे राबड़ी देवी के 8 फ्लैट
• राजद विधायक के चहेतों ने खनन अधिकारियों से की मारपीट
• प्राकृतिक सम्पदा की लूट न रोक पाने के लिए मुख्यमंत्री जिम्मेदार

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने खनन विभाग लालू प्रसाद की पार्टी को सौंप कर बिल्ली को दूध की रखवाली देने-जैसा फैसला किया है।

श्री मोदी ने कहा कि बालू माफिया सुभाष यादव को राजद ने चतरा से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया था। दूसरे बालू माफिया राजद के पूर्व विधायक अरुण यादव बलातकार के मामले में जेल की सजा काट रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इन्हीं सुभाष यादव और अरुण यादव ने राबड़ी देवी के 8 फ्लैट एक ही दिन में 5 करोड़ 28 लाख में खरीदे थे। बालू माफिया राजद की पोलिटिकल फंडिंग करता है।

श्री मोदी ने कहा कि पिछले छह माह पुलिस पर बालू माफिया के हमले के एक दर्जन से ज्यादा घटनाएँ हुईं। बिहटा-मनेर-विक्रम इलाके में राजनीतिक संरक्षण-प्राप्त बालू माफिया के हमले की एक घटना में 1000 राउंड गोलियां चली थीं।

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श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार में बालू माफिया पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं है, इसलिए अवैध खनन बढ रहा है और राजस्व वसूली घट रही है।

उन्होंने कहा कि कैग की रिपोर्ट के अनुसार खनन विभाग में फर्जी चालान से स्कूटर, कार, एंबुलेंस में बालू की ढुलाई से विभाग को 355 करोड़ रुपया का नुकसान हुआ। साथ ही वर्ष 22-23 में अवैध खनन के कारण राजस्व में लक्ष्य से 500 करोड़ रुपया कम संग्रह हुआ।

श्री मोदी ने कहा कि जब राजद विधायक के चहेते खनन विभाग के पटना कार्यालय में घुसकर कर्मचारियों से मारपीट और तोड़फोड़ कर रहे हैं, तब विभाग अपना काम कैसे कर सकता है? ऐसी घटनाएँ संगठित अपराध से मुख्यमंत्री के समझौता कर लेने का सबूत हैं।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जब हर बात का श्रेय खुद लेते हैं, तब राज्य की प्राकृतिक सम्पदा की लूट नहीं रोक पाने की जिम्मेदारी भी उन्हें ही लेनी चाहिए।

जहरीली शराब से अब तक 300 गरीब मरे, इस्तीफा दें नीतीश: सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि 2016 में शराबबंदी लागू होने के बाद से जहरीली शराब पीने की घटनाओं में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। यह हादसा नहीं, दलितों-गरीबों की हत्या का मामला है और इसकी जिम्मेदारी लेकर नीतीश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए।

  • चम्पारण में मरने वालों के आश्रितों को भी मिले 4-4 लाख का मुआवजा
  • जहरीली शराब से मौत हादसा नहीं, दलित नरसंहार
  • जिन्हें जहरीली शराब से मौत पर हमदर्दी नहीं, वे माफिया की हत्या पर आँसू बहा रहे

श्री मोदी ने कहा कि जहरीली शराब से मरने वालों और उनके आश्रितों के प्रति नीतीश कुमार की कोई सहानुभूति नहीं है।

उन्होंने कहा कि पूर्वी चम्पारण में जहरीली शराब से जिनकी मृत्यु हुई, उनके आश्रितों को भी उत्पाद कानून के अनुसार 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि मिलनी चाहिए। खजूरबन्ना (गोपालगंज) में जहरीली शराब से मरने वाले 30 लोगों को मुआवजा दिया गया गया था।

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श्री मोदी ने कहा कि जदयू-राजद सहित जिन सात दलों के राज में दो दिन के भीतर जहरीली शराब से दलित-आदिवासी समुदाय के 30 से ज्यादा लोगों की जान गई, वे यूपी के एक माफिया के गैंगवार में मारे जाने पर आँसू बहा रहे हैं।

श्री मोदी ने कहा कि माफिया अतीक और उसके गुर्गों के मारे जाने से उत्तर प्रदेश की जनता खुश है, लेकिन जिन्होंने बिहार में शहाबुद्दीन को माफिया बनाया, वे पड़ोसी राज्य के एक दुर्दांत माफिया का मजहब देख कर उसकी मौत पर छाती पीट रहे हैं।

उन्होंने कहा कि लालू-राबड़ी राज में मंत्री वृजबिहारी प्रसाद को पुलिस सुरक्षा में रहते हुए अस्पताल परिसर में गोलियों से भून दिया गया था। अजित सरकार, अशोक सिंह सहित आधा दर्जन विधायकों की हत्या भी उसी दौर में हुई, लेकिन राजद से मिल कर सत्ता पाने वाले लोग यह सब भूल गए।

श्री मोदी ने कहा कि राजद शासन में दलित-पिछड़े हत्या-नरसंहार का शिकार होते थे, आज चाचा-भतीजा राज में जहरीली शराब के जरिये दलित-आदिवासी नरसंहार हो रहा है।

पूर्वी चम्पारण में भी छिपाये जा रहे जहरीली शराब से मौत के आंकड़े: सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि छपरा के बाद अब पूर्वी चम्पारण में जहरीली शराब पीने से 22 लोगों की जान गई, दो दर्जन से ज्यादा पीड़ितों का इलाज चल रहा है और कई आँखों की रोशनी खो चुके हैं, लेकिन सरकार आँकड़े छिपाने में लगी है।

  • मृतकों में दलित और पिछड़े समाज के लोग, कई ने खोयी नेत्र ज्योति
  • पुलिस के डर से बिना पोस्टमार्टम के जलाये जा रहे शव
  • मृतक-आश्रितों को मिले 4-4 लाख का मुआवजा, नीति तय करे सरकार

श्री मोदी ने कहा कि सरकार मौत का कारण डायरिया या अज्ञात बीमारी बता रही है। पुलिस के डर से बिना पोस्टमार्टम के भुटन मांझी सहित कई मृतकों के शव जला दिये गए। मृतकों में अधिकतर दलित और पिछड़ी जातियों के थे।

उन्होंने कहा कि जहरीली शराब से मरने वालों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने की स्पष्ट नीति बनाने के लिए मुख्यमंत्री को सर्वदलीय बैठक जल्द बुलानी चाहिए। छपरा में ऐसी घटना के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने की घोषणा की गई थी।

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श्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने छपरा की घटना के बाद राज्य सरकार पर आँकड़े छिपाने का आरोप लगाया था। अब पूर्वी चपारण में भी यही हो रहा है।

उन्होंने कहा कि आयोग नेजहरीली शराब पीने से मरने वालों के आश्रितों को अनुग्रह राशि देने की अनुशंसा की थी, लेकिन अब तक उसका पालन नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि पटना हाई कोर्ट ने जहरीली शराब पीने से बीमार होने वालों की चिकित्सा के लिए मानक प्रक्रिया (SOP) तय करने को कहा था, लेकिन राज्य सरकार यह भी नहीं बना सकी।

श्री मोदी ने कहा कि यदि सरकार ने हाई कोर्ट के निर्देश और आयोग की अनुशंसाओं को गंभीरता से लिया होता,तो पीड़ितों और उनके परिवारों को कठिन समय में बड़ी राहत मिलती।

जरूरत पड़ी तो सौ साल तक रहेगा आरक्षण, इसे कोई छू नहीं सकता: सुशील कुमार मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि संसद और विधान मंडलों में आरक्षण बाबा साहब अम्बेडकर और गांधी जी की देन है। इसे कोई छीन नहीं सकता, बल्कि जरूरत पड़ी तो यह 100 साल तक लागू रहेगा।

  • भाजपा के सहयोग से बाबा साहब को मिला भारत-रत्न, मोदी सरकार ने बनाये पंचतीर्थ
  • पीएम ने दलित ऐक्ट को शिथिल होने से बचाया
  • नीतीश उस कांग्रेस के साथ, जिसने अम्बेडकर का अपमान किया
  • लालू-राबड़ी राज में हुए दर्जन भर नरसंहार

श्री मोदी ने अम्बेडकर जयंती समारोह में कहा कि जब तक समाज में असमानता रहेगी, तब तक आरक्षण रहेगा। इसकी कोई समय सीमा तय नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने दलित उत्पीड़न निवारण कानून को शिथिल करना चाहा, तब केंद्र की भाजपा सरकार ने उस कानून में 23 नई धाराएँ जोड़ कर इसे और मजबूत बना दिया।

श्री मोदी ने कहा कि बाबा साहेब को जिस कांग्रेस ने लगातार अपमानित किया, उसी की गोद में बैठ कर नीतीश कुमार और लालू प्रसाद देश पर राज करने के सपने देख रहे हैं।

उन्होंने कहा भाजपा के समर्थन से बनी वीपी सिंह की सरकार ने बाबा साहब की मृ्त्यु के 37 साल बाद उन्हें भारत रत्न प्रदान किया, जबकि नेहरू-गांधी परिवार के लोग मृत्यु के कुछ ही महीने बाद भारत रत्न से सम्मानित होते रहे।

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श्री मोदी ने कहा जब नरेंद्र भाई मोदी के नेतृत्व में दिल्ली में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी, तब अम्बेडकर के जन्म, शिक्षा, संसदीय जीवन और देहावसान से जुड़े पांच महत्वपूर्ण स्थलों पर भव्य स्मारक बना कर उन्हें पंचतीर्थ घोषित किया गया।

उन्होंने कहा कि लालू-राबड़ी राज में बिहार के लक्ष्मणपुर बाधे, मियांपुर, नारायणपुर सहित दर्जन भर स्थानों पर दलितों का सामूहिक संहार हुआ। इनमें 200 से ज्यादा स्री-पुरुष बच्चे लाइन में खड़े कर मारे गये या उनके घरों में ही जिंदा जला दिया गया था।

श्री मोदी ने कहा कि 2001 में राबड़ी सरकार ने पंचायत और निकायों में एकल पदों पर दलितों को आरक्षण दिये बिना चुनाव करा लिये थे।

उन्होंने कहा कि जब भाजपा के सहयोग से एनडीए सरकार बनी, तभी पंचायत और निकायों में दलितों-पिछड़ों और महिलाओं को आरक्षण देकर बिहार में बाबा साहब के सपने को सार्थक किया जा सका।

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार आज उस कांग्रेस के दरवाजे पर हैं, जिसने 1952 के पहले संसदीय चुनाव और 1954 के उपचुनाव में अम्बेडकर को हराने का षड्यंत्र रचा था। कांग्रेस बाबा साहब को संसद में नहीं घुसने देना चाहती थी।

CM नीतीश कुमार का 3 दिवसीय दिल्ली दौरा; आज कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात हो सकती है

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 3 दिवसीय दौरे पर दिल्ली में हैं । 3 दिवसीय दौरे में कई विपक्षी नेताओं से करेंगे मुलाकात – मल्लिकार्जुन खरगे , सोनिया गांधी, लालू यादव, अरविंद केजरीवाल, सीताराम येचुरी और डी राजा से मिलेंगे नीतीश।

मंगलवार को सीएम नीतीश कुमार ने दिल्ली में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की। इस दौरान सीएम के साथ जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और संजय झा भी मौजूद रहे। रिपोर्ट के अनुसार दोनों शीर्ष नेताओं की यह मुलाकात राज्यसभा सांसद मीसा भारती के आवास पर हुई है। सीएम नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव से उनकी तबीयत का हालचाल जाना है।

Nitish Kumar and Mallikarjun Kharge

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आज कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात हो सकती है। नीतीश कुमार अपने 3 दिवसीय दिल्ली दौरे पर विपक्ष के नेताओं से मेल-मिलाप बढ़ा रहे हैं। नीतीश कुमार अन्य पार्टियों के नेताओं के साथ भी मुलाकात करेंगे।

विपक्षी नेताओं से सीएम नीतीश कुमार की यह मुलाकात 2024 के आम चुनाव को लेकर बेहद अहम मानी जा रही है। नीतीश कुमार जिन नेताओं से मुलाकात करने वाले हैं उनमें आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल, सीताराम येचुरी और डी राजा का नाम भी शामिल है।

बीपीएससी से नियुक्ति नियोजित शिक्षकों और पात्रता सिद्ध युवाओं के साथ बड़ा धोखा: सुशील कुमार मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि कहा कि राज्य सरकार ने बजट में धनराशि का प्रावधान किये बिना बीपीएससी के माध्यम से एक नये संवर्ग में स्कूली शिक्षक नियुक्ति की जो घोषणा की है, वह लाखों शिक्षित युवाओं के साथ धोखा है।

  • नये शिक्षक संवर्ग के लिए चाहिए 5000 करोड़, बजट में प्रावधान नहीं
  • CTET/STET पास अभ्यर्थियों को पहले नियुक्ति पत्र दे सरकार

श्री मोदी ने कहा कि सबसे पहले सरकार उन को नियुक्ति पत्र दे, जो CTET/STET/TET की परीक्षाएं पास कर चार साल से नौकरी पाने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई भी, लेकिन शेष को केवल आश्वाशन दिया जाता रहा।

उन्होंने कहा कि ऐसे 1लाख से ज्यादा प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों और 4 लाख नियोजित शिक्षकों को भी अब नये संवर्ग वाला सरकारी शिक्षक बनने के लिए बीपीएससी की परीक्षा देनी पड़ेगी। यह नई नियमावली पात्रता सिद्ध कर चुके युवाओं के मनोबल पर बड़ा बज्रपात है।

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श्री मोदी ने कहा कि नियोजित शिक्षकों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाना चाहिए और नये संवर्ग के लिए बजट प्रावधान में कम से कम 5000 करोड़ की वृद्धि करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के बजट में शिक्षकों के वेतन और स्थापना व्यय में मात्र 1200 करोड़ की वृद्धि की गई है। इससे साफ है कि अगले एक साल तक नये संवर्ग में शिक्षक भर्ती नहीं होने जा रही है।

श्री मोदी ने कहा कि यदि सरकार नई नियमावली लागू करती है, तो एक विद्यालय में एक ही पाठ्यक्रम के लिए दो तरह के शिक्षक होंगे- एक बीपीएससी से पास सरकारी टीचर और दूसरे नियोजित शिक्षक।

उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा को विसंगतियों और विफलताओं का ऐसा पिटारा बना दिया गया है कि बिहार से प्रतिभा पलायन तेज होगा ।

साजिश रामभक्तों के विरुद्ध हुई, हमले हुए, अब उन्हें ही प्रताड़ित करना चाहते हैं नीतीश: सुशील कुमार मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि रामनवमी पर बिहारशरीफ और सासाराम सहित चार शहरों में उपद्रव करना उनकी साजिश थी, जिन्होंने रामभक्तों पर पत्थरों से हमला किया और विस्फोट कराये।

  • हिम्मत है तो हाल के दंगों की न्यायिक जांच कराये सरकार
  • सरकारी जांच से पहले जब सीएम बता रहे हैं साजिश किसकी, तब नाटक क्यों ?
  • जान लें, राम भक्तों की प्रताड़ना नहीं है लाल किला पहुंचने का रास्ता

श्री मोदी ने कहा कि साजिश उनकी थी, जो सासाराम में सम्राट अशोक के शिलालेख पर मजहबी कब्जा हटाने के खिलाफ थे। साजिश उनकी थी, जो सम्राट अशोक की जयंती मनाने से भाजपा को रोकना चाहते थे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का यह कहना तो सही है कि माहौल खराब कराया गया, लेकिन वे लगे हाथ साजिश का आरोप उन्हीं राम भक्तों पर लगा रहे हैं, जिन पर हमले हुए, जिनके घर जले और जिस समुदाय के एक व्यक्ति की जान गई।

श्री मोदी ने कहा कि जब मुख्यमंत्री पहले ही तय कर रहे हैं कि दंगों की साजिश किन लोगों की, तब राज्य सरकार की जांच का कोई मतलब नहीं।

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उन्होंने कहा कि यदि नीतीश कुमार साम्प्रदायिकता से समझौता नहीं करते तो उन्हें पूरे मामले की न्यायिक जांच करानी चाहिए।

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार ने राम भक्तों को प्रतिड़ित करने और दंगाइयों को बचाने का मन बना लिया है। यही उन्हें लाल किले तक पहुँचने का रास्ता लगता है।

उन्होंने कहा कि संवेदनशील इलाकों में समय पर फ्लैग मार्च क्यों नहीं हुआ? कर्फ्यू लगाने में देर क्यों हुई? केंद्र से अर्धसैनिक बल की पर्याप्त टुकड़ी क्यों नहीं मांगी गई? शोभायात्रा के मार्ग में पड़ने वाले घरों और उनकी छतों की तलाशी पहले क्यों नहीं की गई?

श्री मोदी ने कहा रामनवमी पर चाक-चौबंद सुरक्षा देने में जो सरकार फेल रही और वह खुद ही अपनी जांच करेगी और खुद ही पास घोषित कर देगी।

बिहार के नवादा में अमित शाह ने नीतीश कुमार और जेडीयू पर बोला हमला; लोगो से की अपील बीजेपी की सरकार बनाइए “दंगा करने वालो को उलटा लटका कर सीधा करेंगे”

पटना/ नवादा । बिहार में रामनवमी पर भड़की हिंसा के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार में दो दिवसीय दौरे पर हैं। गृह मंत्री अमित शाह के सशस्त्र सीमा बल के पटना फ्रंटियर का निर्धारित दौरा रद्द होने के कुछ घंटे बाद रविवार को नवादा जिले के हिसुआ में एक रैली को संबोधित किया। रैली में उन्होंने शनिवार को सासाराम में होने वाली जनसभा को रद्द करने की बात कही।

रविवार को उन्होंने नवादा में जनसभा को संबोधित करते हुए एक तरफ चुनावी शंखनाद किया, तो वहीं दूसरी ओर नीतीश कुमार और जेडीयू नेता ललन सिंह पर जमकर हमला बोला। साथ ही लालू यादव को भी नसीहत दे डाली।

उन्होंने सासाराम जाने को लेकर कहा कि, “आज मुझे सासाराम जाना था, वहां मुझे महान सम्राट अशोक के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होना था लेकिन सासाराम में तो बवाल मचा हुआ है, हिंसा फैली है। इसलिए मैं नहीं जा पाया, सासाराम के लोगों से यहीं से माफी मांगता हूं और मैं वहां पर जरूर आऊंगा।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सासाराम और नालंदा हिंसा पर कहा कि बिहार की जनता से यह कहना चाहता हूं कि 2024 में बिहार से बीजेपी को 40 सीट दीजिए और 2025 में बीजेपी की सरकार बनाइए। दंगा करने वालो को उलटा लटका कर सीधा करेंगे। हम तुष्टीकरण की राजनीति नहीं करते हैं। सासाराम और नालंदा की घटना से मन दुखी होता है।

Amit Shah in Bihar

वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जेडीयू नेता ललन सिंह पर हमला करते हुए अमित शाह ने कहा, “अगर आप लोग सोचते हैं कि आप लोगों को दोबारा बीजेपी का साथ मिलेगा तो ये भूल जाएं। आप लोगों के लिए बीजेपी के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो गए हैं। अमित शाह ने आगे कहा, कि “मैं बिहार की जनता को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हम लोग अब नीतीश कुमार के साथ गठबंधन नहीं करने वाले।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी कालाबजारी और भ्रष्टाचारियों से बिहार को मुक्त कराएंगे। वहीं, नीतीश कुमार के पीएम उम्मीदवारी पर तंज कसते हुए अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री की कुर्सी अभी खाली नहीं है। उन्होंने कहा कि लालू यादव गलतफहमी में हैं। तेजस्वी यादव सीएम नहीं बनेंगे। नीतीश कुमार तेजस्वी को कभी सीएम नहीं बनायेंगे।

अमित शाह ने कहा कि बिहार के हर एक पंचायत में कोऑपरेटिव डेयरी बनेगी। केंद्र ने बिहार को 1 लाख 9 हजार करोड़ रुपये दिए। पीएम मोदी 8 करोड़ 70 लाख लाभुकों को मुफ्त अनाज बिहार में दे रहे हैं। 85 लाख किसनों को सस्ती बिजली, 1.10 करोड़ महिला को केंद्र ने गैस दिया। नवादा में रेललाइन, एनएच बनाया। मंच के बगल में रेललाइन गुजरी है। नवादा में खेती हो रही है। बिजली सुधरी है, रजौली में परमाणु क्षमता यूनिट की योजना बन चुकी है।

सासाराम में अमित शाह की रैली टालने के लिए बिगड़ने दिये गए हालात: सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि एक खास समुदाय के आपराधिक तत्वों के प्रति नरमी के कारण नीतीश सरकार बिहारशरीफ और सासाराम में रामनवमी शोभायात्राओं पर हमले नहीं रोक पायी, बल्कि आगजनी-पथराव की घटनाओं के बाद राम-भक्तों की ही धर-पकड़ हो रही है।

  • सख्ती से नहीं हुई उपद्रवी तत्वों की एहतियातन गिरफ्तारी
  • रामनवमी शोभायात्राओं पर हमले नहीं रोक पायी सरकार
  • खुफिया तंत्र नाकाम, डीएम-एसपी ने स्वयं निगरानी नहीं की
  • आगजनी-पथराव के बाद पीड़ित राम-भक्तों की ही धर-पकड़
Ramnavmi voilance

श्री मोदी ने कहा कि अति संवेदनशील सासाराम में तो जानबूझ कर उपद्रवी तत्वों को छूट दी गई, ताकि वहाँ अशांति हो और गृह मंत्री अमित शाह की रैली न हो सके।

उन्होंने कहा कि महागठबंधन सरकार नहीं चाहती थी कि भाजपा सासाराम में सम्राट अशोक की जयंती मनाये।

श्री मोदी ने कहा कि सासाराम में जिन तत्वों ने सम्राट अशोक के शिलालेख जैसे पुरातात्त्विक स्थल पर कब्जा कर उसे एक धर्म-विशेष की पहचान से जोड़ने की कोशिश की थी, वे अतिक्रमण हटाने में केंद्र सरकार की पहल से नाराज थे और बदला लेने के लिए मौके के इंतजार में थे।

उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय प्रशासन का खुफिया तंत्र कारगर होता और उपद्रवी तत्वों की एहतियातन गिरफ्तारी होती, तो रामनवमी शांतिपूर्ण सम्पन्न होती।

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श्री मोदी ने कहा कि बिहारशरीफ और सासाराम के ये वही स्थान हैं, जहां पहले भी रामनवमी की शोभायात्राओं पर पत्थरबाजी हुई थी। इसके बावजूद वहाँ के एसपी-डीएम ने स्वयं निगरानी नहीं की और पुलिस बल की तैनाती भी सांकेतिक थी। कहीं-कहीं तो केवल होम गार्ड तैनात कर खानापूरी की गई थी।

उन्होंने कहा कि रामनवमी पर रामभक्तों को सुरक्षा देने में सरकार तो पूरी तरह विफल रही, लेकिन अब लोगों को शांति और संयम से काम लेना चाहिए।

लालू की संगत, आँखों में पीएम बनने के सपने, कैसे दिखें केंद्र के काम? : सुशील मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि लालू प्रसाद की संगत, कुर्सी का मोह और आँखों में पीएम बनने के सपने भरे होने से नीतीश कुमार को सबसे तेज विकास करने वाली केंद्र सरकार के काम नहीं दिखते।

  • क्या बिहार में फोरलेन सड़कें, महासेतु, पटना मेट्रो बिना केंद्र की मदद के सम्भव ?
  • बिहटा-पूर्णिया एयरपोर्ट विस्तार, दरभंगा एम्स जैसी केंद्रीय योजनाओं में अड़ंगेबाजी क्यों?
  • नीतीश कुमार को न केंद्र का काम दिखता है, न काम करने देना चाहते हैं

श्री मोदी ने कहा कि क्या करोड़ों देशवासियों ने बिना काम किये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दूसरी बार प्रचंड बहुमत के साथ सेवा का मौका दिया ?

उन्होंने कहा कि बिहार में फोरलेन सड़कों का संजाल और नदियों पर महासेतु का निर्माण क्या केंद्र सरकार के बिना सम्भव था?

श्री मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने 8000 करोड़ की लागत से बरौनी खाद कारखाने का आधुनिकीकरण कर इसे फिर चालू कराया और पटना मेट्रो प्रोजेक्ट को ऋण दिलाने में बड़ी भूमिका निभायी, लेकिन नीतीश कुमार ने ट्वीट करके भी प्रधानमंत्री को धन्यवाद नहीं दिया।

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उन्होंने कहा कि एक तरफ नीतीश कुमार केंद्र पर काम न करने का अनर्गल आरोप लगाते हैं और दूसरी तरफ केंद्रीय योजनाओं में रोड़ा अटकाते हैं , ताकि प्रधानमंत्री को कोई श्रेय न मिल जाए।

श्री मोदी ने कहा कि बिहटा-पूर्णिया में एयरपोर्ट विस्तार, दरभंगा में एम्स और विक्रमशिला में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए केंद्र सरकार बजट का प्रावधान कर चुकी है, लेकिन राज्य सरकार जमीन नहीं दे पा रही है।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को न केंद्र का काम दिखता है, न वे उसे काम करने देना चाहते हैं।

श्री मोदी ने कहा कि केंद्र ही नहीं, देश के 12 से ज्यादा राज्यों में क्या भाजपा सरकारें बिना काम किये दूसरी-तीसरी बार सत्ता में लौटी हैं? हाल में त्रिपुरा, मणिपुर, असम और गुजरात में भाजपा काम के बूते ही सत्ता में लौटी। उधर नीतीश कुमार की कामकाजी पार्टी नगालैंड में साफ हो गई।

रमजान में छूट के तुगलकी फरमान स्कूलों छात्रों पर भारी पड़े, प्रारम्भिक विद्यालयों का शिक्षण काल हुआ आधा: सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि रमजान के महीने में केवल मुसलिम सरकारी कर्मचारियों एवं शिक्षकों को एक घंटे पहले ड्यूटी पर आने और जाने की छूट के पुराने आदेश की मनमानी व्याख्या कर मुख्यमंत्री के गृह जिला नालंदा में सभी प्रारम्भिक स्कूलों में पढाई की अवधि ही आधी कर दी गई, जबकि इन स्कूलों में 90 फीसद छात्र हिंदू हैं।

• रमजान में छूट के तुगलकी फरमान स्कूलों छात्रों पर भारी पड़े
• नीतीश के गृह जिले में सभी प्रारम्भिक विद्यालयों का शिक्षण काल आधा हुआ

श्री मोदी ने कहा कि राजद की साम्प्रदायिक राजनीति के दबाव में नालंदा, किशनगंज सहित कुछ जिलों के शिक्षा पदाधिकारी तुगलकी फरमान जारी कर उसे बहुसंख्यक हिंदू छात्रों पर थोप रहे हैं। ऐसे आदेश को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में राजद शासन के दौरान केवल मुसलिम कर्मचारियों को रमजान के महीने में रियायत देने का विवादास्पद आदेश जारी हुआ था, लेकिन 10 साल में कभी लागू नहीं हुआ। मार्च 2023 में इसे दोबारा जारी कर धर्मनिरपेक्षता की धज्जी उड़ायी जा रही है और अल्पसंख्यकवाद को हवा दी जा रही है।

श्री मोदी ने कहा कि नालंदा जिले में रमजान के पूरे महीने तक प्रारम्भिक विद्यालयों की सुबह की पाली का समय मात्र तीन घंटा ( प्रात: 6.30 -9.30) और दिवा पाली का समय मात्र 4घंटे ( पूर्वाह्न 9- दोपहर 1.30) रहेगा, जबकि स्कूल में पढाई की अवधि सामान्य: 6-7 घंटे होती है।

उन्होंने कहा कि किशनगंज में सभी सरकारी और निजी स्कूल रमजान के दौरान सुबह 8 बजे से अपराह्न 3 बजे तक खोलने का आदेश जारी किया गया और इसे निजी स्कूलों को भी मानना है।

लालू परिवार मीडिया के सामने दहाड़ते हैं और CBI के सामने भीगी बिल्ली बन जाते हैं: सुशील मोदी

पटना । राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सम्प्रति राज्य सभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री ललन सिंह ने कभी फर्जी, कमजोर दस्तावेज नहीं बल्कि मजबूत तथ्यों पर आधारित इतने पुख्ता सबूत जांच एजेंसी को उपलब्ध कराया है कि आज तक कोई बचकर निकल नहीं पाया है। चारा घोटाला हो या आईआरसीटीसी घोटाला हर घोटाले के सबूत के पीछे ललन सिंह का हाथ है। इन्हीं के कागजातों के आधार पर लालू प्रसाद को चारा घोटाला के 4 मामलों में सजा हो चुकी है। श्री ललन सिंह केवल पुख्ता सबूत ही नहीं बल्कि मुकदमे के हर पल-पल की स्वयं मॉनिटरिंग भी करते हैं।

• लालू परिवार मीडिया के सामने दहाड़ते हैं और सीबीआई के सामने भीगी बिल्ली बन जाते हैं
• ललन सिंह के कारण भागलपुर दंगे में बरी किए जा चुके कामेश्वर यादव को 15 वर्ष बाद सजा हुई

रेलवे की नौकरी के बदले जमीन घोटाले जिसमें पिछले दिनों तेजस्वी यादव और लालू परिवार से पूछताछ हुई उसके भी सारे कागजात 2008 में श्री ललन सिंह और स्वर्गीय शरद यादव ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दिया था। परंतु केंद्र में राजद के समर्थन से यूपीए की सरकार चल रही थी। अतः प्रधानमंत्री सचिवालय से कागज गायब करा दिए गए।

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2014 में एनडीए की सरकार बनने के बाद पुनः कागजात सुपुर्द किए गए। कभी मुकदमा बंद नहीं हुआ था। इस घोटाले की जांच अगस्त में महागठबंधन की सरकार बनने के 1 वर्ष पहले ही प्रारंभ हो गई थी।

श्री ललन सिंह को परिणाम का पूरा अंदेशा है चूँकि कागज उन्हीं के दिए हुए हैं इसलिए डरे हुए हैं। कागज कभी मरते नहीं हैं। संचिका कभी बंद नहीं होती है। भागलपुर दंगे में एक दोषमुक्त किए जा चुके आरोपी कामेश्वर यादव को 15 वर्षों के बाद श्री ललन सिंह के प्रयास से मुकदमा खोलकर नीतीश सरकार में सजा दिलाई गई थी।

लालू परिवार मीडिया के सामने दहाडते हैं और सीबीआई के सामने भीगी बिल्ली बन जाते हैं। झुकने या लड़ने का प्रश्न नहीं है बल्कि पुख्ता सबूत होंगे तो कोई बच नहीं सकता। आखिर लालू प्रसाद झुके या ना झुके चार मामलों में सजायाफ्ता हो चुके हैं।

तेजस्वी बतायें, फ्रेंड्स कालोनी में 150 करोड़ के मकान के मालिक कैसे बने: सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि तेजस्वी यादव को बताना होगा कि दिल्ली की फ्रेंड्स कालोनी में डेढ़ सौ करोड़ के चार मंजिला मकान (डी-1088) के मालिक कैसे बन गए? सीबीआई उनसे ऐसे सवालों का जवाब चाहती है।

ललन सिंह सीबीआई तक पहुँचा चुके हैं पुख्ता सबूत

उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में हजारी राय के दो भतीजों ( दिलचंद कुमार, प्रेमचंद कुमार) को जबलपुर और कोलकाता में रेलवे की ग्रुप-डी की नौकरी मिली। हजारी राय से एक जमीन 21 फरवरी 2007 को एके इन्फोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम लिखवा ली गई।

Sushil Modi vs Tejashwi

श्री मोदी ने कहा कि दिल्ली की फ्रेंड्स कालोनी वाले मकान का स्वामित्व एके इन्फोसिस्टम्स के पास था। बाद में मामूली धन राशि देकर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव इसी कंपनी के मालिक बन गए।

उन्होंने कहा कि जदयू के स्वर्गीय शरद यादव और ललन सिंह ने इस मामले में यूपीए सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ज्ञापन देकर सीबीआई जांच की मांग की थी। बाद में ललन सिंह ने नीतीश कुमार के इशारे पर सीबीआई को पुख्ता सबूत उपलब्ध कराये।

उन्होंने कहा कि सीबीआई इस मामले में सच जानना चाहती है, जबकि राजद और जदयू भ्रष्टाचार से जुड़े इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं।

मोदी सरनेम मामले में सूरत कोर्ट का फैसला स्वागत-योग्य, छिन सकती है राहुल की सांसदी: सुशील कुमार मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मोदी सरनेम वाले सभी लोगों को चोर बताने वाले राहुल गांधी के अमर्यादित बयान के विरुद्ध मैंने भी पटना के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है और अगर इसमें भी उन्हें सूरत की अदालत की तरह सजा सुनाया गई, तो उनकी संसद सदस्यता छिन जा सकती है।

  • पटना में मैंने भी किया है मानहानि का मुकदमा, गवाही अगले माह
  • अमर्यादित टिप्पणी करने वालों को कड़ा संदेश दे सकती है न्यायपालिका
  • “चौकीदार चोर है” वाले बयान के कारण उन्हें कोर्ट में मांगनी पड़ी थी माफी

सूरत कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए श्री सुशील मोदी ने कहा कि “मोदी” सरनेम वाले लाखों लोगों ने सांसद राहुल गांधी की टिप्पणी से अपमानित अनुभव किया। उनके विरुद्ध पटना सहित कई अन्य जगह भी मुकदमें दायर हुए।

उन्होंने कहा कि मेरे मामले में वे जमानत ले चुके हैं, लेकिन अगले महीने गवाही के लिए उन्हें पटना सीजेएम के कोर्ट में उपस्थित होना पड़ सकता है।

श्री मोदी ने कहा कि इससे पहले राहुल गांधी ने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपमानित करने की मंशा से “चौकीदार चोर है” जैसा घटिया बयान दिया था।

उन्होंने कहा कि राफेल विमान सौदे और “चौकीदार चोर है” वाले मामले में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगनी पड़ी थी। फिर भी उन्होंने जुबान पर लगाम लगाना नहीं सीखा।

श्री मोदी ने कहा कि यदि सरनेम वाले बयान के कारण राहुल गांधी को विभिन्न अदालतों से कड़ी सजा सुनायी जाती है, तो यह अमर्यादित भाषा बोलने वालों के विरुद्ध कड़ा संदेश होगा।

राजनीतिक स्थिरता लाने और विकसित राज्य बनाने का संकल्प ले बिहार: सुशील कुमार मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने बिहार दिवस (22 मार्च) पर प्रदेशवासियों को बधाई दी और अपील कि लोग राजनीतिक स्थिरता लाने और दस साल में विकसित राज्य बनाने का संकल्प लें।

  • श्रीबाबू के दूरदर्शी नेतृत्व में हुआ था राज्य का प्रारम्भिक विकास
  • 29 साल में 23 मुख्यमंत्री आये-गए, अस्थिरता से बाधित हुआ विकास
  • 1990 में ऐसी सरकार आयी, जिसने अपराध और भ्रष्टाचार का राजनीतिकरण किया, विकास नहीं
  • 2005 में आयी एनडीए सरकार, विकास पटरी पर लौटा, बिहार दिवस मनाने की शुरुआत उसी दौर में
  • निजी महत्वाकांक्षाओं के हावी होने से फिर अस्थिरता मेंं फंसा बिहार

श्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद 14 साल तक राजनीतिक स्थिरता रही और प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह उर्फ श्री बाबू के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य का प्रारम्भिक विकास हुआ।

उन्होंने कहा कि 1961 में श्री बाबू की मृत्यु के बाद अस्थिरता, भ्रष्टाचार और कुशासन के चलते बिहार लगातार पिछड़ता गया।

उन्होंने कहा कि 1961 से 1990 तक 29 साल में यहाँ 23 मुख्यमंत्री आये-गए और राष्ट्रपति शासन भी लगता रहा। इससे विकास बाधित हुआ।

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श्री मोदी ने कहा कि 1990 में ऐसी सरकार आयी, जिसने बीस साल राज करने के इरादे से अपराध और भ्रष्टाचार का खुलकर राजनीतिकरण किया, लेकिन विकास पर कोई ध्यान नहीं दिया। उस दौर में बिहारी कहलाना शर्म की बात हो गई थी।

उन्होंने कहा कि भले ही एक सरकार 20 साल राज नहीं कर सकी, लेकिन 15 साल में ही उसने राज्य को 50 साल पीछे धकेल दिया।

श्री मोदी ने कहा कि 2005 में जब एनडीए सरकार आयी, तब विकास पटरी पर लौटा था। उस दौर में अपराध पर कठोर नियंत्रण, वित्तीय अनुशासन, भ्रष्टाचार पर अंंकुश, ढांचागत विकास में भारी निवेश और उच्च शिक्षा के नये संस्थान खुलने से बिहारी अस्मिता का पुनर्जागरण हुआ। बिहार दिवस मनाने की शुरुआत भी उसी दौर में हुई थी।

उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने विकास और गुड गवर्नेंस दिया, जिससे बिहार सबसे तेज विकास करने वाला राज्य बना।

श्री मोदी ने कहा कि दुर्भाग्यवश, कुछ लोगों की पीएम-सीएम बनने की महत्वाकांक्षाएँ इतनी भारी पड़ीं कि बिहार फिर अस्थिरता के भँवर मेंं फंस गया।

उन्होंने कहा कि बिहार दिवस पर हमें राजनीतिक स्थिरता और विकास का दौर लौटाने का संकल्प लेना चाहिए।

जमीनी सच से टकरा कर टूटे CM-PM के दो हसीन सपने: सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के बीच जो भी डील हुई हो, लेकिन तेजस्वी प्रसाद यादव को जमीनी हकीकत का एहसास हो गया है कि न वे अभी सीएम बन सकते हैं, न नीतीश कुमार कभी पीएम बन सकते हैं।

  • जस्वी को कुर्सी सौंपने की डील से पलटे नीतीश कुमार
  • राजद अब नीतीश पर दबाव बनाने की स्थिति में नहीं
  • विपक्षी एकता फेल, ममता,अखिलेश ने जदयू को पूछा नहीं
  • किसी को राष्ट्रीय राजनीति ने किनारे किया, किसी को बिहार के हालात ने

श्री मोदी ने कहा कि सीएम-पीएम के सपने देखने वाले चाचा-भतीजा अपने समर्थकों से नारे लगवा कर या पोस्टर-होर्डिंग्स के जरिये अपनी महत्वाकांक्षा प्रकट करते रहे हैं। अब दोनों सफाई देते फिर रहे हैं कि उन्हें बड़े पद पाने की इच्छा नहीं है।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार 2023 में तेजस्वी यादव को कुर्सी सौंपने की बात से पलट चुके हैं और राजद भी अब कोई दबाव बनाने की स्थिति में नहीं है।

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श्री मोदी ने कहा कि जो तेजस्वी यादव कह रहे थे कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने की जल्दी नहीं है, वही अब पद की इच्छा त्याग कर अचानक संत कैसे हो गए?

उन्होंने कहा कि 2024 और 2025 में जब राजद-जदयू अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रहे होंगे, तब सीएम-पीएम तो बहुत दूर की बात होगी। अच्छी बात है कि तेजस्वी यादव ने इस सच को स्वीकार किया।

श्री मोदी ने कहा कि ममता बनर्जी और अखिलेश यादव कांग्रेस को अलग रख कर फ्रंट बनाने का एलान कर चुके हैं। नीतीश कुमार को न ममता पूछ रही हैं, न केसीआर ने भाव दिया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृष्य जहाँ नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षा को चूर कर रहा है, वहीं बिहार के हालात तेजस्वी यादव के सपनों पर ओला बरसा रहे हैं।

JDU के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची में बड़ा फेरबदल; केसी त्यागी का नाम कटा, देखें पूरी लिस्ट

पटना । मंगलवार को जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची में बड़ा फेरबदल किया। जदयू की नयी सूची से जदयू महासचिव केसी त्यागी का नाम हटा दिया।

JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने पार्टी के नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों के नामों का ऐलान किया । पार्टी द्वारा जारी सूची में मंगनी लाल मंडल को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई है।

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नई टीम में 22 नेताओं को महासचिव बनाया गया है।

JDU की नई टीम की सूची

फिरौती के लिए हत्या-अपहरण की घटनाओं से फिर सहमा बिहार: सुशील कुमार मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि कहा कि 40 लाख की फिरौती के लिए बिहटा के स्कूली छात्र की हत्या, छपरा के जमीन कारोबारी का अपहरण और लालू प्रसाद के भतीजे नागेंद्र राय के 2 करोड़ रुपये रंगदारी मांगने की घटनाएँ कानून-व्यवस्था की डरावनी स्थिति बयाँ कर रही हैं।

  • बिहटा के छात्र की हत्या, छपरा में जमीन कारोबारी अगवा, लालू के भतीजे ने मांगी 2 करोड़ की रंगदारी
  • अवैध खनन मामले के आरोपी मंत्री-पुत्र को डिप्टी सीएम के फोन पर छोड़ा गया
  • महागठबंधन सरकार ने 7 माह में चमकाया अपहरण उद्योग

श्री मोदी ने कहा कि एक माह में रंगदारी-फिरौती के लिए अपहरण और हत्या की दर्जन-भर घटनाएँ हुईं।

उन्होंने कहा कि इसी 15 मार्च को लालू प्रसाद के भतीजे नागेंद्र राय ने हथियार के साथ एक भूखंड पर पहुँच कर 2 करोड़ रुपये की रंगदारी माँगी। इस पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

श्री मोदी ने कहा कि इससे पहले 23 फरवरी को सहकारिता मंत्री सुरेंद्र यादव के पुत्र को जेसीबी मशीन लगाकर अवैध खनन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसे जेल भेजने के बजाय डिप्टी सीएम की फोन पैरवी पर छोड़ दिया गया।

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उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने अपराध और भ्रष्टाचार से समझौता कर जनता के जीवन को खतरे में डाल दिया।

श्री मोदी ने कहा कि महागठबंधन सरकार बनने के मात्र 7 महीनों में अपहरण उद्योग में लालू-राबड़ी राज जैसी तेजी लौट आयी। “बिहार में नीतीसे कुमार हैं। अपहरण उद्योग में फिर से बहार है।”

CBI की पूछताछ से कब तक भागेंगे तेजस्वी, जाँच में सहयोग करें: सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाले में तेजस्वी प्रसाद यादव अब पूछताछ , ट्रायल और सजा से बच नहीं पाएँगे।

  • ललन सिंह इतने पुख्ता सबूत सीबीआई तक पहुँचा चुके हैं कि सभी आरोपियों के अपराध प्रमाणित होंगे
  • तेजस्वी बतायें, फ्रेंड्स कालोनी में डेढ़ सौ करोड़ के चार मंजिला मकान के मालिक कैसे बन गए?

श्री मोदी ने कहा कि सीबीआई के समन पर उपस्थित न होना, फिर पत्नी की तबीयत का हवाला देना, समन के खिलाफ कोर्ट जाना और फिर विधानसभा की कार्यवाही में उपस्थिति को पूछताछ से बचने का बहाना कब तक बनाया जा सकता है? बकरे की अम्मा कब तक खैर मनायेगी?

उन्होंने कहा कि जदयू अध्यक्ष ललन सिंह इस मामले में इतने पुख्ता सबूत सीबीआई तक पहुँचा चुके हैं कि लालू प्रसाद , राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव सहित सभी प्रमुख आरोपियों के अपराध प्रमाणित होंगे और उन्हें सजा मिलेगी।

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श्री मोदी ने कहा कि सीबीआई जानना चाहती है कि तेजस्वी यादव दिल्ली की फ्रेंड्स कालोनी में डेढ़ सौ करोड़ के चार मंजिला मकान (डी-1088) के मालिक कैसे बन गए?

उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में हजारी राय के दो भतीजों ( दिलचंद कुमार, प्रेमचंद कुमार) को जबलपुर और कोलकाता में रेलवे की ग्रुप-डी की नौकरी मिली। हजारी राय से एक जमीन 21 फरवरी 2007 को एके इन्फोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम लिखवा ली गई।

श्री मोदी ने कहा कि दिल्ली की फ्रेंड्स कालोनी वाले मकान का स्वामित्व इसी एके इन्फोसिस्टम्स के पास था। बाद में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव इस कंपनी के मालिक बन गए।

उन्होंने कहा कि सीबीआई इस तरह के मामलों में यदि सच जानना चाहती है, तो तेजस्वी यादव की भलाई पूछताछ से भागने में नहीं, बल्कि सहयोग करने में है।

“जमीन दो, नौकरी लो” मामले में जांच का सामना कर रहा लालू परिवार सहानुभुति पाने के लिए गर्भवती बहू और बच्चों को टार्चर किये जाने का झूठा प्रचार कर रहा है: सुशील मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि “जमीन दो, नौकरी लो” की नीति से अरबों रुपये की अवैध सम्पत्ति बनाने के मामले में जांच का सामना कर रहा लालू परिवार सहानुभुति पाने के लिए गर्भवती बहू और बच्चों को टार्चर किये जाने का झूठा प्रचार कर रहा है।

• लालू के नाती-नातिन, पुत्रबधू से कोई पूछताछ नहीं, “टार्चर” की कहानी झूठी
• सहानुभूति पाने और जाँच को बदनाम करने के लिए किया जा रहा दुष्प्रचार
• नीतीश घोषणा करें कि गर्भवती महिला, बच्चों के घर में रहते नहीं होगी कोई पूछताछ
• हेमा यादव बतायें, हृदयानंद और ललन चौधरी ने क्यों उन्हें गिफ्ट की थी सम्पत्ति ?
• तेजस्वी यादव फ्रेंड्स कालोनी स्थित 200 करोड़ के मकान के मालिक कैसे बने?
• क्या इस संबंध में पूछताछ करना “टार्चर” करना है?
• नीतीश कुमार और ललन सिंह दे रहे भ्रष्टचार को पोलिटिकल कवर

श्री मोदी ने कहा कि तेजस्वी यादव की गर्भवती पत्नी राजश्री और लालू प्रसाद के नाती-नातिन जब किसी मामले में आरोपी ही नहीं हैं और उनसे कोई पूछताछ भी नहीं हुई, तब टार्चर कहाँ हुुआ? राजद झूठा प्रचार करने पर उतर आया है।

उन्होंने तेजस्वी यादव के जल्द पिता बनने के समाचार के लिए उन्हें बधाई दी और कहा कि जाँच एजेंसियों के छापे की इस उपलब्धि पर तो कोई विवाद नहीं होगा।

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श्री मोदी ने पूछताछ के दौरान टार्चर की फर्जी कहानी को खारिज करते हुए नीतीश कुमार और ललन सिंह को यह घोषणा करने की चुनौती दी कि अपराध चाहे कितना भी गंभीर हो, बिहार में अभियुक्तों के घर में गर्भवती महिला और बच्चों के रहते कोई पूछताछ नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि कल के छापे में लालू प्रसाद के परिवार जनों के घर से डेढ़ किलो सोने के गहने और आधा किलो सोने का बिस्कुट, 1 करोड़ रुपये नकद और 6 सौ करोड़ रूपये से ज्यादा की अवैध सम्पत्ति के कागजात भी बरामद हुए, जबकि ललन सिंह दावा करते हैं कि छापे में कुछ नहीं मिला।

श्री मोदी ने कहा कि जब एमएलए-एमएलसी बनाने या नौकरी दिलाने के बदले में लालू प्रसाद अपनी बेटियों के नाम से करोड़ो रुपये की सम्पत्ति लिखवा रहे थे, तब किसी ने विरोध क्यों नहीं किया?

उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद की पुत्री हेमा यादव को हृदयानंद चौधरी और ललन चौधरी ने कीमती सम्पत्ति क्यों गिफ्ट की थी? बाद में यह सम्पत्ति 350 करोड़ में बेच दी गई।

श्री मोदी ने कहा कि हेमा यादव को इस सम्पत्ति को दान में लेने और बेचने के बारे में सच बताना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इसी तरह तेजस्वी प्रसाद यादव को बताना चाहिए कि वे दिल्ली की फ्रेंड्स कालोनी स्थित 200 करोड़ के चार मंजिला मकान के मालिक कैसे बने? क्या इस संबंध में पूछताछ करना “टार्चर” करना है?

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार और ललन सिंह सुनियोजित भ्रष्टचार को पोलिटिकल कवर दे रहे हैं।

भ्रष्टाचार से समझौता कर लालू परिवार को बचा रहे नीतीश कुमार: सुशील कुमार मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पीएम बनने के अपने महत्वांकाक्षी सपने के दबाव में भ्रष्टचार से समझौता कर लिया और वे चारा घोटाला से लेकर “जमीन के बदले नौकरी घोटाले” तक में संलिप्त लालू परिवार को बचाने में लगे हैं।

  • 2008 में लालू प्रसाद के विरुद्ध जांच के लिए शरद यादव, ललन सिंह ने पहल की थी
  • जदयू ने सारे दस्तावेज सीबीआई को उपलब्ध कराये थे
  • ललन सिंह ने मनमोहन सिंह को दिया था ज्ञापन, आज कार्रवाई रोकने के लिए चिट्ठी लिख रहे
  • लालू प्रसाद ने एक ही मंत्र अपनाया “-तुम मुझे जमीन दो, मैं तुम्हें नौकरी दूँगा।”
  • किसी और ने नहीं, खुद लालू ने पूरे परिवार को फँसा दिया
  • तेजस्वी यादव 29 साल की उम्र में कैसे बने अरबों रुपये की 52 सम्पत्ति के मालिक ?
  • अबू दोजाना वही हैं, जो पटना में तेजस्वी यादव का 750 करोड़ का मॉल बनवा रहे थे

श्री मोदी ने कहा कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई होने पर बार-बार लालू परिवार को फँसाने का जो झूठा प्रचार किया जाता है, उसमें कोई दम होता तो लालू प्रसाद चारा घोटाला के सभी पांच मामलों में अदालत से दोषी नहीं पाये जाते।

उन्होंने कहा कि 2008 में लालू प्रसाद के विरुद्ध भ्रष्टचार के मामलों की जांच के लिए स्वर्गीय शरद यादव और ललन सिंह ने पहल की थी। जदयू ने सारे दस्तावेज सीबीआई को उपलब्ध कराये और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ज्ञापन भी दिया था। आज यही लोग लालू प्रसाद पर कार्रवाई रोकने के लिए प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख रहे हैं।

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श्री मोदी ने कहा कि लालू प्रसाद ने सत्ता में रहते हुए यही बस एक ही मंत्र अपनाया “-तुम मुझे जमीन दो, मैं तुम्हें नौकरी दूँगा।”

उन्होंने कहा कि हर काम के लिए जमीन लेते हुए गरीब परिवार में जन्मे लालू प्रसाद सबसे बड़े जमींदार बन गए। उनके पास पटना में 1 लाख वर्ग फुट से ज्यादा कीमती जमीन है।

श्री मोदी ने कहा कि तेजस्वी प्रसाद यादव को बताना चाहिए कि वे दिल्ली की न्यू फ्रेंड्स कालोनी में अरबो रुपये के चार मंजिला मकान के मालिक कैसे बन गए?

उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव ने इंटरमीडिएट तक भी पढाई नहीं की, क्रिकेट में विफल रहे , लेकिन बिना कोई उद्योग-व्यापार किये मात्र 29 साल की उम्र में वे 52 सम्पत्तियों के मालिक कैसे बन गए? क्या इसकी जाँच नहीं होनी चाहिए ?

श्री मोदी ने कहा कि लालू प्रसाद ने विधायक, सांसद, मंत्री, एमएलसी बनावाने के बदले कीमती जमीनें परिवार के सदस्यों के नाम से लीं और खुद ही पूरे परिवार को फँसा दिया। उन्हें किसी दूसरे ने नहीं फँसाया।

उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक अबु दोजाना वही हैं, जो पटना में तेजस्वी यादव का 750 करोड़ का मॉल बनवा रहे थे ।

जो भ्रष्टचार के आरोपी हैं, वे ही खुद को पीड़ित बताने की राजनीति करने लगे; तेजस्वी बतायें, नौकरी के बदले जमीन देने वाले ललन चौधरी कौन ? – सुशील मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि केंद्र में कांग्रेस सरकार के समय ललन सिंह और स्व० शरद यादव ने तत्कालीन रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद पर नौकरी के बदले जमीन घोटाला का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। आज यही लोग सीबीआई के दुरुपयोग का शोर मचा रहे हैं।

• तेजस्वी बतायें, नौकरी के बदले जमीन देने वाले ललन चौधरी कौन ?
• लालू प्रसाद के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग ललन सिंह, स्व० शरद यादव ने की थी
• जो भ्रष्टचार के आरोपी हैं, वे ही खुद को पीड़ित बताने की राजनीति करने लगे
• राबड़ी से पूछताछ न्याय प्रक्रिया का हिस्सा, केंद्र पर आरोप अनर्गल

श्री मोदी ने कहा कि तेजस्वी यादव और ललन सिंह इधर-उधर की बातें करने के बजाय ग्रुप डी की नौकरी के बदले कीमती जमीन लालू परिवार के नाम करने वाले ललन चौधरी के बारे में क्यों नहीं बताते? ये ललन चौधरी कौन हैं और क्यों इनकी जमीन गिफ्ट में ली गई?

Sushil Modi vs Tejashwi

उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद सत्ता का दुरुपयोग कर सम्पत्ति बनाने के आदती हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने चारा घोटाला किया और रेल मंत्री बनने पर जमीन के बदले रेलवे की नौकरी बाँटने का घोटाला किया।

श्री मोदी ने कहा कि रेलवे की नौकरी के बदले जमीन लेने के मामले की जांच बंद नहीं हुई है। इस मामले में लालू- राबड़ी देवी सहित 15 आरोपियों को समन भेजना और पूछताछ करना न्याय प्रक्रिया का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि जब भी किसी घोटाले की जांच होती है, इसमें आरोपी लालू परिवार खुद को पीड़ित बताकर सहानुभुति पाने की राजनीति करने लगता है।

श्री मोदी ने कहा कि क्या यह सही नहीं कि नीतीश कुमार के कहने पर ललन सिंह ने लालू परिवार के भ्रष्टचार से संबंधित कागजात सीबीआई को पहुँचाये थे ?

उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद से मिल कर महागठबंन सरकार बनाने से पहले जो लोग लालू प्रसाद के विरुद्ध जांच में तेजी लाना चाहते थे, आज वे ही इस मामले में भाजपा और केंद्र सरकार पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं।