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बिहार-झारखंड के बीच सोन नदी के पानी को लेकर बड़ा समझौता, जल बंटवारे पर हुआ MoU

बीजापुर में सुबह के हल्के साए में दो राज्यों की प्रतिनिधि टीमें एकत्र हुईं, जहाँ बिहार और झारखंड के प्रमुख अधिकारी सोन नदी के जल साझा करने हेतु एक नया समझौता पत्र पर हस्ताक्षर कर रहे थे। यह कदम 25‑वर्षीय विवाद को समाप्त करने का प्रतीक है, जिसे दोनों पक्षों ने लंबे समय से संघर्ष के रूप में अनुभव किया है।
समझौते के अनुसार, बिहार को प्रति दिन 2000 घन मीटर और झारखंड को 3000 घन मीटर पानी प्राप्त होगा, जिससे दोनों राज्यों के कृषि व जल संसाधन विभागों को बेहतर योजना बनानी है। इस ऐतिहासिक दस्तावेज़ पर दोनों पक्षों के मुख्यमंत्री ने अपनी स्वीकृति व्यक्त की, जिससे क्षेत्र में जल संकट की स्थितियाँ सुधारने की उम्मीद बढ़ी।पिछले दो दशकों में सोन नदी के पानी पर विवाद का मूल कारण भू-जल स्तर में गिरावट और बढ़ते कृषि दाब के बीच जल अधिकारों का असमान वितरण रहा। 1998 में पहली बार दोनों राज्यों ने इस विषय पर चर्चा की, परंतु जल वितरण के लिये स्पष्ट मापदंड तय नहीं हो सके। 2012 में एक मध्यस्थता आयोग के प्रस्ताव पर भी सहमति नहीं बनी, और 2023 के अंत तक विवाद क़याम रहा। इस पृष्ठभूमि में, दोनों राज्यों ने आर्थिक विकास और ग्रामीण कल्याण को ध्यान में रखते हुए एक नया दृष्टिकोण अपनाने का निर्णय लिया।

स्मरणीय 15 मार्च को, बिहार और झारखंड के मुख्यमंत्री और संबंधित जल विभाग के प्रमुख बीजापुर के शीतकालीन शिखर सम्मेलन में मिले। सम्मेलन के दौरान, दोनों पक्षों ने जल अधिकारों के वितरण, निगरानी तंत्र और भविष्य के समायोजन की योजना पर चर्चा की। बैठक के दौरान, दोनों राज्यों के प्रतिनिधि दलों ने मिलकर एक कार्यबल गठित करने पर सहमति जताई, जिसका उद्देश्य जल प्रवाह को मापने और जल गुणवत्ता की निगरानी करने का कार्य होगा।

इस समझौते के तहत, दोनों राज्यों ने जल वितरण के लिए एक संयुक्त निरीक्षण समिति स्थापित करने का निर्णय लिया। समिति का गठन 1 मई से किया जाएगा, जिसमें जलविज्ञानी, कृषि विशेषज्ञ और स्थानीय अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, दोनों पक्षों ने 2025 तक पानी के प्रवाह को बढ़ाने हेतु बाढ़ नियंत्रण और जलाशयों के पुनर्निर्माण के प्रोजेक्ट पर भी सहमति जताई।

प्रत्येक पक्ष के प्रमुख ने अपने-अपने भाषणों में जल साझा करने के महत्व पर बल दिया। बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समझौते से बिहार के दाक्षिणात्य जिलों में सिंचाई व्यवस्था में सुधार होगा और किसान वर्ग को अधिक लाभ मिलेगा। झारखंड के मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि यह कदम दोनों राज्यों के बीच भरोसे को नया आयाम देगा और जल संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए एक मिसाल कायम करेगा।

कृषि विभाग के प्रमुखों ने भी इस समझौते की सराहना करते हुए कहा कि इससे वर्षा पर निर्भरता कम होगी और फसल उत्पादन में स्थिरता आएगी। उन्होंने विशेष रूप से शुष्क मौसम में जल उपलब्धता के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही, जल विभाग के प्रमुखों ने बताया कि वे जल की गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी रखेंगे और किसी भी तरह के प्रदूषण से बचाव के लिए कड़े नियम लागू करेंगे।

सामुदायिक नेताओं और किसान संघों के प्रतिनिधियों ने भी इस समझौते पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह कदम ग्रामीण विकास में नई ऊर्जा लेकर आएगा। एक प्रमुख किसान संघ के अध्यक्ष ने बताया कि उन्हें आशा है कि यह व्यवस्था उनके खेतों में पानी की कमी को समाप्त करेगी और फसल के नुकसान को घटाएगी।

वहीं, जल संरक्षण के लिए कार्यरत एनजीओ ने भी इस समझौते की सराहना करते हुए कहा कि यह जल संसाधनों के संतुलित उपयोग के लिए एक प्रगतिशील कदम है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस समझौते के कार्यान्वयन में सहयोग करने के लिए तैयार हैं, ताकि जल संरक्षण और पुनरुपयोग की पहलें सुचारू रूप से चल सकें।

राजनीतिक दृष्टिकोण से, यह समझौता दोनों राज्यों के बीच समन्वय को बढ़ाने का एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। पक्षपात रहित रिपोर्टिंग के अनुसार, यह निर्णय दोनों सरकारों को एकजुट करने के प्रयासों में नया आयाम प्रदान करता है। आर्थिक दृष्टि से, जल उपलब्धता बढ़ने से कृषि एवं खाद्य उत्पादन में वृद्धि की संभावना है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

सामाजिक स्तर पर, यह समझौता ग्रामीण इलाकों में जल संकट के कारण होने वाली संघर्षों को कम करने की उम्मीद जगाता है। साथ ही, जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए शैक्षणिक कार्यक्रमों को भी इस नई व्यवस्था के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। यह कदम सामाजिक समरसता और सामुदायिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता जल संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य कर सकता है। जलविज्ञानी डॉ. सुमन पाण्डे ने बताया कि नदी के प्रवाह में सुधार के लिए सतत निगरानी और जल गुणवत्ता नियंत्रण अनिवार्य है। वे यह भी कहती हैं कि इस प्रकार के समझौते से जल संसाधनों के समुचित प्रबंधन की


Bihar and Jharkhand signed a historic water‑sharing deal in Beejapur, allocating 2,000 cubic metres a day to Bihar and 3,000 cubic metres to Jharkhand, ending a 25‑year dispute over the Son River. The agreement includes joint monitoring and plans to boost irrigation and flood‑control projects, with hopes of easing rural water shortages and strengthening inter‑state cooperation.

This development highlights evolving dynamics and may have broader implications in the near term.

मुगमा स्टेशन रीमॉडलिंग के कारण सितंबर में प्रमुख ट्रेन मार्गों में वैकल्पिक रूट अपनाया जाएगा, यात्रा समय में 15‑20 मिनट वृद्धि की संभावना

मुगमा स्टेशन पर चल रहे रीमॉडलिंग कार्य के कारण भारतीय रेलवे ने सितंबर के मध्य में कई प्रमुख ट्रेन मार्गों में बदलाव करने का निर्णय लिया है, यह सूचना आज सुबह रेलवे सार्वजनिक संबंध विभाग ने जारी की। इस बदलाव से धारा में चल रही कई इंटरसिटी और एग्ज़िक्यूटिव सेवाओं को अस्थायी रूप से वैकल्पिक रूट अपनाना पड़ेगा, जिससे यात्रियों को कुछ हद तक असुविधा की आशंका है।
हालांकि, रेलवे ने कहा है कि यह परिवर्तन केवल कार्य की तीव्रता को ध्यान में रखकर किया गया है और दीर्घकालिक सुधारों के लिए आवश्यक कदम है।मुगमा स्टेशन, जो पूर्वी भारत के महत्वपूर्ण जंक्शन में से एक है, का आधुनिकीकरण 2022 में शुरू हुआ था। इस परियोजना में प्लेटफ़ॉर्म विस्तार, सिग्नलिंग सिस्टम का उन्नयन तथा स्टेशन परिसर का समग्र नवीनीकरण शामिल है। पिछले दो वर्षों में इस कार्य में कई चरणों में रुकावटें आई हैं, मुख्यतः धनराशि आवंटन और भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं के कारण। इन चुनौतियों के बावजूद, रेलवे ने 2025 के भीतर पूर्णता का लक्ष्य रखा है, जिससे इस क्षेत्र की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

रीमॉडलिंग के दौरान ट्रैक कार्य, सिग्नल प्रतिस्थापन और नई विद्युत आपूर्ति लाइनों की स्थापना प्रमुख कार्य हैं। इन कार्यों के कारण वर्तमान में ट्रेनों के सामान्य रूट पर बाधा उत्पन्न हो रही है, विशेषकर धनबाद‑पटना, पटना‑गया और गया‑दिल्ली मार्गों पर। रेलवे के अनुसार, इस अवधि में ट्रेनों को वैकल्पिक रूप से गया स्टेशन के माध्यम से चलाया जाएगा, जिससे यात्रा समय में लगभग 15‑20 मिनट की वृद्धि होगी। इस परिवर्तन को लागू करने के लिए रेलवे ने अतिरिक्त कोच और बोगी उपलब्ध कराई हैं, ताकि भीड़भाड़ को न्यूनतम किया जा सके।

सरकारी स्रोतों के अनुसार, रीमॉडलिंग कार्य के तहत मुगमा स्टेशन पर नई प्लेटफ़ॉर्म 4 और 5 का निर्माण चल रहा है, जो प्रत्येक 550 मीटर लंबी होगी और दो अतिरिक्त ट्रैक को संभाल सकेगी। इस सुधार के साथ स्टेशन की दैनिक यात्री क्षमता वर्तमान 30,000 से बढ़ाकर 45,000 यात्रियों तक ले जाया जाएगा। साथ ही, स्टेशन में डिजिटल सूचना बोर्ड, स्वचालित टिकटिंग कियोस्क और बेहतर सुरक्षा प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिससे यात्रियों को सुविधा और सुरक्षा दोनों में लाभ होगा।

रीमॉडलिंग के प्रभाव को कम करने के लिए रेलवे ने कुछ प्रमुख ट्रेनों के शेड्यूल में संशोधन किया है। धनबाद‑पटना इंटरसिटी एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 13331) अब चार दिनों तक गया के माध्यम से चलाया जाएगा, जबकि अन्य प्रमुख एग्ज़िक्यूटिव और सुपरफ़ास्ट ट्रेनें भी इसी प्रकार के रूट अपनाएंगी। इस अवधि में ट्रेनों की गति में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, परन्तु प्लेटफ़ॉर्म पर पहुँचने और छूटने के समय में थोड़ा अतिरिक्त समय निर्धारित किया गया है।

इन बदलावों के बारे में स्थानीय यात्रियों ने मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कई यात्रियों ने बताया कि गया के माध्यम से यात्रा करने से उनकी दैनिक कार्यस्थल तक पहुँच आसान हो रही है, क्योंकि गया एक प्रमुख बस और टैक्सी हब है। वहीं, कुछ यात्रियों ने कहा कि अतिरिक्त दूरी और रूट परिवर्तन के कारण यात्रा लागत में वृद्धि होगी, विशेषकर उन लोगों के लिए जो नियमित रूप से कामकाजी यात्रियों के रूप में इन ट्रेनों का उपयोग करते हैं।

रेलवे अधिकारियों ने इस बदलाव के दौरान यात्रियों को सूचित करने के लिए विस्तृत सूचना अभियान चलाया है। स्टेशन पर बड़े आकार के बोर्ड, मोबाइल एप्प और रेलवे वेबसाइट पर रीयल‑टाइम अपडेट जारी किए जा रहे हैं। साथ ही, यात्रियों को वैकल्पिक बस और टैक्सी सेवाओं के बारे में भी जानकारी प्रदान की जा रही है, ताकि उन्हें अपने सफर की योजना बनाने में आसानी हो। यह प्रयास यात्रियों की असुविधा को न्यूनतम करने के लिए किया गया है, जो कि बड़े स्तर पर सार्वजनिक परिवहन में परिवर्तन के दौरान सामान्य प्रथा है।

राजनीतिक दिग्गजों ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की है। स्थानीय सांसदों ने कहा कि रीमॉडलिंग कार्य राष्ट्रीय बुनियादी ढाँचा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, परन्तु यह आवश्यक है कि रेलवे द्वारा यात्रियों को पर्याप्त समर्थन प्रदान किया जाए। कुछ विपक्षी दल के नेता ने इस बदलाव के कारण उत्पन्न होने वाली आर्थिक बाधाओं को उजागर किया, यह दावा करते हुए कि अस्थायी रूट परिवर्तन से व्यापारियों और यात्रियों की आय में कमी आ सकती है।

आर्थिक विश्लेषकों ने कहा है कि मुगमा स्टेशन का आधुनिकीकरण दीर्घकालिक रूप से भारतीय रेलवे के राजस्व में वृद्धि करेगा। नया बुनियादी ढाँचा अधिक ट्रेनें चलाने की क्षमता प्रदान करेगा, जिससे माल एवं यात्री परिवहन दोनों में सुधार होगा। इस परियोजना से स्थानीय उद्योगों को भी लाभ मिलेगा, क्योंकि बेहतर कनेक्टिविटी से वस्तुओं की समय पर डिलीवरी संभव होगी।

Updated: August 28, 2026

The temporary rerouting around Mugma, while inconvenient, acts as a live stress‑test for the new hub—any bottlenecks uncovered now will be ironed out before the 2025 capacity boost, turning short‑term pain into a smoother, higher‑revenue network.

झारखंड में 27‑29 अगस्त 2026 की भारी बारिश से बाढ़ व भूस्खलन का बढ़ा खतरा, जल स्तर 150 % तक पहुंचा है।

झारखंड में 27 से 29 अगस्त 2026 के दौरान भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे राज्य के अधिकांश जिलों में लगातार गरज‑बिजली, तेज़ बवंडर और 30‑40 किमी/घंटा की हवाओं की संभावना है। मौसम विभाग ने इस चेतावनी के साथ बताया कि जल स्तर में तेजी से वृद्धि, बाढ़ और भूस्खलन की

संभावना बढ़ी है, इसलिए स्थानीय प्रशासन को त्वरित उपाय करने का निर्देश दिया गया है। यह अलर्ट राष्ट्रीय स्तर पर जारी एक श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें उत्तर प्रदेश, जम्मू‑कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड जैसे क्षेत्रों में भी समान मौसमी उथल‑पुथल की चेतावनी दी गई है।

वर्तमान मौसमी पैटर्न का मूल कारण

बंगाल की खाड़ी में गहरी समुद्री हवाओं का उत्तर‑पश्चिमी दिशा में प्रवाह है, जो हिमालयी बर्फ़ीले क्षेत्रों से ठंडी हवा को दक्षिण‑पूर्वी दिशा में ले जाती है। इस प्रक्रिया से वायुमंडल में नमी का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है, जिससे वर्षा के क्लस्टर बनते हैं। इस साल के पहले छः

महीनों में भारत में औसत वार्षिक वर्षा 8 % अधिक रही है, और विशेषकर झारखंड के पूर्वी हिस्से में जलस्रोतों का स्तर पहले से ही उच्च स्तर पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अधिक स्पष्ट रूप से देखे जा रहे हैं, जिससे मौसमी

असामान्यताओं की आवृत्ति में वृद्धि हुई है।

झारखंड की जलवायु इतिहास में भी अगस्त माह में भारी वर्षा का प्रवाह सामान्य माना जाता है, परंतु पिछले दो दशकों में इस अवधि में तूफ़ानी हवाओं और तेज़ वर्षा की तीव्रता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2008, 2015 और 2022 में

समान अलर्ट जारी किए गए थे, लेकिन उन घटनाओं में स्थानीय प्रशासन की तैयारी में कमी और बुनियादी ढाँचे की कमजोरी के कारण बड़े पैमाने पर क्षति हुई थी। इस बार राज्य सरकार ने पूर्वनिर्धारित आपातकालीन योजना को सक्रिय कर, सभी जिलों में सिविल डिफेंस की टास्क फोर्स को तैनात

किया है और जल निकासी प्रणाली की क्षमताओं का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है।

प्रेस रिलीज के अनुसार, झारखंड के खासी, गडाख और सिमडे की जल निकायों में जलस्तर पहले ही 150 % तक पहुंच चुका है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। राज्य के प्रमुख शहर रांची में जलमार्गों की

सफ़ाई के लिए 1500 से अधिक श्रमिक जुटाए गए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में जलरोधक बांधों की मजबूती की जाँच चल रही है। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग ने जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए आपातकालीन टीकाकरण अभियान शुरू किया है, जिससे डेंगर और टाइफाइड जैसी बीमारियों के प्रकोप को न्यूनतम

किया जा सके।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी समान चेतावनी जारी की गई है, जहाँ 27 अगस्त को कई जिलों में तीव्र वर्षा की संभावना है। इस क्षेत्र में मुख्यतः वाराणसी, बलिया और बहराइच को प्रभावित करने वाली हवाएँ पूर्वी मानसून की गहरी नमी को लेकर आती हैं। स्थानीय प्रशासन

ने पहले से ही जल निकासी के लिए अतिरिक्त पंपों की व्यवस्था की है और ग्रामीण इलाकों में अस्थायी आश्रय स्थल स्थापित कर रखे हैं। कई शहरों में जल स्तर की निगरानी के लिए रडार प्रणाली को उन्नत किया गया है, जिससे संभावित बाढ़ के संकेतों का पूर्वानुमान अधिक सटीक

हो सके।

जम्मू‑कश्मीर और लद्दाख में 29‑30 अगस्त को आंधी‑तूफान और बिजली गिरने की संभावना दर्शाई गई है। इस भाग में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फ़ीली बौछारों के साथ तेज़ हवाएँ चलने की संभावना है, जिससे सड़कों की स्थिति बिगड़ सकती है और विद्युत आपूर्ति में व्यवधान आ सकता है।

स्थानीय प्रशासन ने पहाड़ी बस्ती के लोगों को चेतावनी जारी कर, शीतकालीन आपूर्ति सामग्री की स्टॉकिंग और आपातकालीन निकास मार्गों की सफ़ाई का निर्देश दिया है। इन क्षेत्रों में पहले भी समान मौसमी घटनाओं ने यात्रियों और स्थानीय जनसंख्या को काफी कठिनाइयों में डाल दिया था।

उत्तराखंड में 27 अगस्त

से 1 सितंबर तक मौसम खराब रहने की सूचना दी गई है, जिसमें तेज़ बारिश और संभावित भूस्खलन की आशंका है। राज्य सरकार ने जलवायु परिवर्तन को लेकर एक व्यापक रिस्क मैनेजमेंट योजना लागू की है, जिसमें बाढ़-रोकथाम नहरों का विस्तार और पहाड़ी इलाकों में कटाव नियंत्रण के उपाय शामिल हैं।

विशेष रूप से हारिद्वार और देहरादून जैसे प्रमुख शहरी क्षेत्रों में जल निकासी के लिए अतिरिक्त पंप स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे जलभराव की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।

इन चेतावनियों के बाद विभिन्न सरकारी एजेंसियों ने

Updated: August 27, 2026


Heavy rain alerts for Jharkhand from Aug 27‑29 warn of intense thunderstorms, gusty winds and heightened flood‑landslide risks, prompting the state to mobilise civil‑defence units, boost drainage work and launch health‑risk vaccinations. The warning is part of a broader monsoon surge across northern India, linked to unusually moist north‑west winds and rising climate‑change impacts.

The alert prompts coordinated emergency actions across multiple districts, aiming to reduce flood and landslide impacts.
It also reflects a broader regional weather pattern, linking Jharkhand’s conditions to simultaneous alerts in several northern states.

झारखंड‑बिहार में 24‑30 अगस्त तक भारी वर्षा चेतावनी; बाढ़‑जल‑संकट की संभावना बढ़ी है

झारखंड‑बिहार सहित सात राज्यों में इस हफ़्ते भारी वर्षा की चेतावनी जारी हुई है, जिससे ग्रामीण इलाकों में बाढ़, जल‑संकट और बुनियादी ढाँचा टूटने की संभावना बढ़ी है। मौसम विज्ञान विभाग ने अगले पाँच दिनों में निरंतर बूँदाबाँदी, तेज़ हवाओं और बार‑बार बिजली गिरने की भविष्यवाणी की है। इस चेतावनी के तहत राज्य सरकारें आपातकालीन राहत कार्यों की तैयारी कर रही हैं, जबकि स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से सतर्क रहने और आपातकालीन नंबरों को सहेजने का आग्रह किया है।

मौसम विज्ञान विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल के गैंगटोक क्षेत्र से निकली लो‑प्रेशर प्रणाली उत्तरी भारत में उत्तर‑पश्चिमी दिशा में बढ़ रही है। इस प्रणाली के प्रभाव से झारखंड में 24 अगस्त को कई स्थानों पर ‘बहुत भारी बारिश’ का अलर्ट जारी किया गया। उसी समय, बihar, उड़ीसा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में भी समान दबाव के कारण वर्षा की संभावनाएं बढ़ी हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस प्रणाली का निर्माण हिमालयी बर्फ‑पिघलन और समुद्री तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण हुआ है।

झारखंड में पिछले सप्ताह के दौरान बाढ़ के बाद जल‑संकट का इतिहास बना है। विशेषकर रांची, जमुना और दहिया जैसे प्रमुख नदियों के किनारे स्थित गाँवों में जल‑स्तर तेज़ी से बढ़ने की आशंका है। जल विज्ञान विशेषज्ञों ने बताया कि इस वर्ष की मौसमी वर्षा पहले से 15 % अधिक दर्ज की गई है, जिससे जल निकायों का जल‑स्तर सामान्य से अधिक रहेगा। इस स्थिति में नदियों के किनारे बुनियादी ढाँचा, जैसे पुल, सड़क और जल‑शोधन संयंत्र, क्षति के जोखिम में हैं।

बिहा में भी समान स्थितियों की सूचना मिली है। पटना, गया और भागलपुर के आसपास के क्षेत्रों में तेज़ बारिश के कारण जल‑संकट की आशंका है। स्थानीय प्रशासन ने 24‑30 अगस्त तक के लिए आपातकालीन बचाव टीमों को तैनात करने का आदेश दिया। इस बीच, उड़ीसा में 27‑30 अगस्त के दौरान भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जहाँ मूसलाधार वर्षा के साथ तेज़ हवाओं की संभावना है। ओडिशा के मुख्य नगर कोलकाता के निकटस्थ क्षेत्रों में भी जल‑संकट की संभावनाएँ बढ़ी हैं।

झारखंड में मौसम विभाग ने अगले चार दिनों में 30‑40 किमी/घंटे की रफ़्तार से तेज़ हवाओं की भविष्यवाणी की है। इस प्रकार की तेज़ हवा के साथ निरंतर बारिश होने पर वृक्ष गिरने, छतों का ढहना और विद्युत लाइनों का नुकसान आम हो सकता है। बिजली गिरने की आशंका के मद्देनज़र, स्थानीय बिजली विभाग ने जनसंपर्क केंद्रों को सक्रिय कर दिया है और आपातकालीन कटऑफ़ की तैयारियों को तेज किया है।

बिहार में जल‑संकट को रोकने के लिये कई जलाशयों को खाली करने की योजना बनायी़ गई है। सरकार ने कहा कि गंगा और उसकी शाखाओं के जल‑स्तर को नियंत्रित करने हेतु बाँधों की जल‑रिलीज़ को तेज़ किया जाएगा। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में जल‑निकासी के लिये अतिरिक्त पम्पों की तैनाती की जाएगी, जिससे बाढ़ की गंभीरता को कम किया जा सके।

ओडिशा में 27‑30 अगस्त के दौरान भारी वर्षा की चेतावनी के साथ, राज्य के प्रमुख पोर्ट शहर पुरी और कटक में समुद्र‑तट के पास उच्च लहरों की संभावना है। इस कारण, पोर्ट अथॉरिटी ने जहाजों को बंदरगाह में सुरक्षित रखने का आदेश दिया और मछुआरों को समुद्र में प्रवेश न करने का निर्देश दिया।

राज्य सरकारों ने इस मौसम में प्रभावित क्षेत्रों के लिए आपातकालीन राहत निधि का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा है। झारखंड के मुख्यमंत्री ने कहा कि जल‑संकट से प्रभावित लोगों को तत्काल खाद्य, जल और चिकित्सा सहायता प्रदान की जाएगी। बिहार के प्रमुख अधिकारियों ने भी प्रभावित जिलों में राहत शिविरों की स्थापना की घोषणा की।

प्रमुख राष्ट्रीय मीडिया ने इस चेतावनी को बड़े स्तर पर कवर किया है और विभिन्न राज्यों में जल‑संकट के जोखिम को उजागर किया है। दूरसंचार कंपनियों ने भी आपातकालीन स्थितियों में नेटवर्क की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिये अतिरिक्त टावर स्थापित करने का काम तेज़ कर दिया है।

केंद्रीय मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि इस वर्ष की मौसमी परिस्थितियाँ अनियमित हो रही हैं और जल‑विज्ञान विभाग को त्वरित कदम उठाने की जरूरत है। इस दिशा में, केंद्र ने जल‑संकट प्रबंधन के लिए विशेष समिति का गठन किया है, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

आर्थिक दृष्टिकोण से, निरंतर बारिश से कृषि उत्पादन में नुकसान की संभावना है। विशेषकर धान, गन्ना और दलहन की फसलें जल‑जमाव के कारण प्रभावित हो सकती हैं। इससे बाजार में कीमतों में अस्थिरता आ सकती

Weather forecasts predict heavy rainfall across seven states, triggering government emergency response protocols. Authorities are deploying relief teams and managing water levels to mitigate infrastructure damage and agricultural risks.

झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा रद्द करने पर हाईकोर्ट की रोक, सफल अभ्यर्थियों को बड़ी राहत; हेमंत सोरेन सरकार के फैसले पर लगा ब्रेक

रांची: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद में गुरुवार को बड़ा मोड़ आ गया। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 11वीं और 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा तथा संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी है। अदालत ने सफल अभ्यर्थियों को तत्काल अपनी ड्यूटी पर लौटने का निर्देश भी दिया है। हाईकोर्ट के इस आदेश से उन उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी परीक्षा और नियुक्ति रद्द किए जाने के बाद सरकारी नौकरी पर संकट खड़ा हो गया था। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?

झारखंड हाईकोर्ट में सफल अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार के उस फैसले पर रोक लगाई, जिसके तहत 11वीं और 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा तथा संबंधित नियुक्तियों को रद्द किया गया था। अदालत ने प्रभावित अधिकारियों को तत्काल अपने पद पर वापस जाकर काम शुरू करने का निर्देश दिया।

अदालत के इस अंतरिम आदेश से उन उम्मीदवारों को तत्काल राहत मिली है, जो परीक्षा पास करने के बाद सरकारी सेवा में नियुक्त हो चुके थे। सरकार के फैसले के बाद इन अभ्यर्थियों की नौकरी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई थी।

JSSC-CGL रद्द होने के बाद बढ़ा विवाद

यह पूरा विवाद उस समय और गहरा गया जब झारखंड सरकार ने 17 अगस्त को JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का ऐलान किया। सरकार ने इसके साथ ही आउटसोर्स एजेंसी TSR Data Processing Pvt Ltd यानी TDPL से जुड़ी कई भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द करने का निर्णय लिया था। सरकार का यह कदम भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच आया था।

सरकार ने बाद में रद्द की गई परीक्षाओं की सूची जारी की। रिपोर्टों के अनुसार, 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया गया, जबकि अन्य परीक्षाओं की जांच के लिए CID जांच सहित अलग-अलग कदम उठाए गए। इनमें JPSC और JSSC से जुड़ी कई महत्वपूर्ण भर्तियां शामिल थीं।

JSSC-CGL पास कर नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों का प्रदर्शन

सरकार के फैसले के बाद एक नया विरोध शुरू हो गया। JSSC-CGL परीक्षा पास करके सरकारी नौकरी हासिल कर चुके अभ्यर्थी रांची के प्रोजेक्ट भवन पहुंचे और धरने पर बैठ गए। इन अभ्यर्थियों का कहना था कि अगर भर्ती प्रक्रिया में कहीं अनियमितता हुई है तो उसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन ईमानदारी से परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए।

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई भी है तो उसमें उनकी क्या गलती है। कई उम्मीदवारों का कहना था कि उन्होंने पूरी चयन प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की, नियुक्ति हासिल की और अलग-अलग सरकारी विभागों में काम भी शुरू कर दिया। ऐसे में अचानक परीक्षा रद्द होने से उनके करियर पर गंभीर असर पड़ रहा है।

सरकार ने क्यों रद्द की थीं परीक्षाएं?

झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और जांच से सामने आए निष्कर्षों के आधार पर कई परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था। सरकार का कहना था कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है। JSSC-CGL समेत TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से अभ्यर्थियों का आंदोलन चल रहा था।

सरकार ने भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए एक सुधार समिति गठित करने का भी फैसला लिया है। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। हालांकि, परीक्षा रद्द होने के बाद नौकरी पा चुके उम्मीदवारों के सामने पैदा हुई समस्या ने सरकार के फैसले को एक नई कानूनी चुनौती के सामने खड़ा कर दिया।

22 परीक्षाएं रद्द, कई पर जांच जारी

सरकार की कार्रवाई केवल JSSC-CGL तक सीमित नहीं रही। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, कुल 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया गया, जबकि अन्य 23 परीक्षाओं को लेकर जांच का रास्ता अपनाया गया। रद्द परीक्षाओं में विभिन्न प्रशासनिक, तकनीकी और अन्य सरकारी पदों की भर्ती शामिल थी।

इस कार्रवाई से एक तरफ उन छात्रों को राहत मिली जो लंबे समय से कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ पहले से चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों के बीच भारी असंतोष पैदा हो गया। इस तरह एक ही फैसले ने छात्रों के दो अलग-अलग वर्गों को आमने-सामने ला दिया।

हाईकोर्ट के आदेश से नियुक्त अधिकारियों को राहत

आज के हाईकोर्ट आदेश का सबसे तत्काल असर उन सफल उम्मीदवारों पर पड़ा है, जिन्हें JPSC सिविल सेवा और फूड सेफ्टी ऑफिसर जैसी परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त किया गया था। अदालत ने संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने वाले सरकारी आदेश पर रोक लगाते हुए उन्हें तत्काल ड्यूटी ज्वाइन करने का निर्देश दिया।

इससे उन अधिकारियों को फिलहाल अपनी नौकरी पर वापस लौटने का रास्ता मिल गया है। हालांकि, यह अंतिम फैसला नहीं है। मामला अभी अदालत के सामने लंबित है और अगली सुनवाई 25 अगस्त को होनी है। इसलिए आगे अदालत की विस्तृत सुनवाई और अंतिम निर्णय पर सबकी नजर रहेगी।

छात्रों का आंदोलन और सरकार की चुनौती

झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद कई सप्ताह से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बना हुआ है। आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता शामिल रही है। सरकार द्वारा JSSC-CGL और अन्य परीक्षाएं रद्द करने के बाद आंदोलन का एक हिस्सा इसे अपनी बड़ी जीत के रूप में देख रहा था।

लेकिन सफल उम्मीदवारों के विरोध ने सरकार के सामने दूसरी चुनौती खड़ी कर दी। उनका तर्क है कि किसी भर्ती प्रक्रिया में यदि गड़बड़ी हुई है तो दोषी व्यक्तियों की पहचान कर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द करने से उन उम्मीदवारों को नुकसान हो रहा है जिन्होंने अपनी मेहनत से परीक्षा पास की और नियुक्ति हासिल की।

अब 25 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट के आज के आदेश के बाद मामले की अगली महत्वपूर्ण तारीख 25 अगस्त बन गई है। तब अदालत सरकार के पक्ष और याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर आगे सुनवाई करेगी। फिलहाल अंतरिम आदेश के कारण संबंधित सफल उम्मीदवारों को राहत मिली है और उन्हें ड्यूटी पर लौटने का रास्ता खुल गया है।

इस बीच सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ उसकी कार्रवाई और पहले से नियुक्त उम्मीदवारों के अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा। यही विवाद आने वाले दिनों में झारखंड की भर्ती नीति और परीक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बन सकता है।

एक ही विवाद में दो पक्ष, अब अदालत पर टिकी नजर

JPSC-JSSC विवाद ने झारखंड में भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर बहस छेड़ दी है। एक तरफ वे छात्र हैं जो कथित अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ वे सफल अभ्यर्थी हैं जिन्होंने परीक्षा पास करके सरकारी नौकरी हासिल की और अब अपने भविष्य की सुरक्षा चाहते हैं।

हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश फिलहाल नियुक्त उम्मीदवारों के पक्ष में महत्वपूर्ण राहत है, लेकिन इससे पूरे विवाद का अंतिम समाधान नहीं हुआ है। अब अदालत की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि रद्दीकरण के सरकारी फैसले को लेकर आगे क्या कानूनी दिशा बनती है।

झारखंड का JPSC-JSSC विवाद अब परीक्षा सुधार से आगे बढ़कर चयनित उम्मीदवारों के रोजगार अधिकार का मामला बन गया है। सरकार ने कथित अनियमितताओं के खिलाफ परीक्षाएं रद्द करके पारदर्शिता का संदेश देने की कोशिश की, लेकिन इससे पहले से नियुक्त उम्मीदवारों की नौकरी पर संकट पैदा हो गया। हाईकोर्ट ने 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा तथा संबंधित नियुक्तियों पर फिलहाल रोक लगाकर तत्काल राहत दी है और सफल उम्मीदवारों को ड्यूटी पर लौटने को कहा है। अब 25 अगस्त की सुनवाई इस विवाद की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।

झारखंड सरकार ने TDPL के साथ सरकारी नौकरी परीक्षा अनुबंध रद्द, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता के नए मानदंड लागू किए

झारखंड में सरकारी नौकरी की परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच, निजी कंपनी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) का नाम बार‑बार सामने आ रहा है। राज्य सरकार ने हाल ही में TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा निर्णय लिया है, जिससे लाखों aspirants की तैयारी पर प्रश्नचिह्न लगा है। यह कदम कंपनी पर चल रही जांच के बाद उठाया गया, जहाँ परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इस निर्णय ने न केवल परीक्षार्थियों को, बल्कि राज्य की भर्ती नीति को भी चुनौतीपूर्ण मोड़ दिया है।TDPL की स्थापना 2010 में लखनऊ में एक निजी डेटा‑प्रोसेसिंग फर्म के रूप में हुई थी। शुरुआती वर्षों में कंपनी ने सरकारी और निजी क्षेत्र के बड़े‑बड़े डेटा प्रबंधन प्रोजेक्ट्स को संभाला, जिससे उसका नाम धीरे‑धीरे स्थापित हुआ। पाँच साल बाद, TDPL ने अपना दायरा बढ़ाते हुए विभिन्न राज्य सरकारों के साथ शैक्षणिक और चयनात्मक परीक्षाओं के डेटा एंट्री और प्रोसेसिंग के अनुबंध किए। इस दौरान कंपनी ने तकनीकी बुनियादी ढाँचे में निवेश किया और कई छोटे‑बड़े सरकारी पोर्टलों को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म प्रदान किया।

झारखंड में 2023 में TDPL को पहली बार JSSC (Jharkhand Staff Selection Commission) की परीक्षा का डेटा प्रोसेसिंग कार्य सौंपा गया। उस समय कंपनी ने ऑनलाइन आवेदन पोर्टल, एंट्री वैलिडेशन और उम्मीदवारों के दस्तावेज़ीकरण को संभाला। प्रारम्भिक रिपोर्टों के अनुसार, इस चरण में कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं बताई गई थी और कई उम्मीदवारों ने प्रक्रिया को सुगम बताया। फिर भी, 2024 की मध्यावधि में TDPL को JPSC‑JSSC संयुक्त परीक्षा के लिए भी समान कार्यभार दिया गया, जिससे कंपनी की प्रतिष्ठा में एक नई उन्नति देखी गई।

वर्ष 2024 की फरवरी में, JSSC द्वारा आयोजित परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद, कई उम्मीदवारों ने परिणाम में असंगतियों की शिकायत की। कुछ उम्मीदवारों का दावा था कि उनकी प्रविष्टियों में त्रुटि के कारण उनका नाम सूची में नहीं आया, जबकि अन्य ने कहा कि चयनित उम्मीदवारों के अंक तालिकाओं में गलत दिखाए गए। इन शिकायतों को उठाने पर, JSSC ने तुरंत TDPL को सूचना दी और एक आंतरिक जाँच के आदेश को लागू किया।

जाँच में पाया गया कि कुछ डेटा एंट्री मॉड्यूल में सॉफ़्टवेयर बग और मानव त्रुटियों के कारण उम्मीदवारों की जानकारी में गड़बड़ी हुई थी। इसके अलावा, कई दस्तावेज़ों की वैरिफिकेशन प्रक्रिया में देरी और असंगत मानदंडों का प्रयोग हुआ था। इन तथ्यों के सामने, राज्य सरकार ने TDPL के अनुबंध को अस्थायी रूप से निलंबित करने का प्रस्ताव रखा। इस बीच, TDPL ने अपनी तरफ से कहा कि सभी प्रक्रियाएँ मानक प्रोटोकॉल के अनुसार चल रही थीं और त्रुटियों का कारण बाहरी तकनीकी समस्याएँ थीं।

जारी जांच के दौरान, राज्य के एक तकनीकी विशेषज्ञ टीम ने TDPL के सर्वर लॉग और डेटा बैक‑अप की विस्तृत समीक्षा की। टीम ने पाया कि कुछ मामलों में डेटा ट्रांसफर के दौरान पैकेट लॉस और टाइम‑आउट की घटनाएँ हुई थीं, जिससे डेटा की अखंडता पर प्रश्न उठे। साथ ही, टीम ने यह भी उजागर किया कि TDPL ने कुछ महत्वपूर्ण सुरक्षा पैच को समय पर लागू नहीं किया था, जिससे सिस्टम में संभावित दुरुपयोग की संभावना बनी रही। इन निष्कर्षों ने सरकार को अधिक कड़ी कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया।

विपरीत पक्षों ने इस मामले पर अलग‑अलग प्रतिक्रियाएँ दीं। JSSC के अध्यक्ष ने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता बनाये रखने के लिए कठोर कदम उठाए जा रहे हैं और TDPL के खिलाफ उठाए गए निर्णय का समर्थन किया। वहीं, TDPL के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कंपनी की ओर से बयान दिया कि सभी प्रक्रियाएँ अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप थीं और त्रुटियों को तुरंत सुधारने की योजना तैयार की गई है। उम्मीदवारों के संघ ने भी इस विवाद को लेकर गहरी चिंता जताई, कहता कि कई युवा अभ्यर्थी अपने भविष्य के सपने को टालते हुए निराश हो रहे हैं।

राज्य सरकार ने TDPL के अनुबंध को रद्द करने के साथ ही भविष्य में किसी भी निजी डेटा‑प्रोसेसिंग फर्म को अनुबंधित करने के लिए कड़े मानदंड लागू करने की घोषणा की। इसके तहत सभी फर्मों को ISO 27001 प्रमाणन और स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। साथ ही, सरकार ने एक नई स्वतंत्र निगरानी बोर्ड की स्थापना की, जो सार्वजनिक भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को सुनिश्चित करेगा।

The TDPL fallout exposes how a single tech vendor can become the linchpin of a state’s meritocracy, turning operational glitches into political flashpoints. It also signals a looming shift: governments will increasingly weaponize data‑security standards to re‑assert control over recruitment and curb private‑sector influence.

बेंज़िन‑डीज़ल एसी बसों से रांची‑बोकारो मार्ग पर सरकारी सेवा की तैयारी, परमिट के बाद जल्द शुरू होने की उम्मीद

भागलपुर से रांची‑बोकारो के बीच सरकारी बस सेवा शुरू होने की तैयारी ने यात्रियों को दी नई आशा, क्योंकि सावन समाप्त होते ही पथ परिवहन निगम ने चार नई बसों को डिपो में पहुंचा दिया है। इस कदम से दो प्रमुख झारखंडी शहरों के बीच नियमित और सस्ते सार्वजनिक परिवहन का मार्ग खुलेगा, जिससे आर्थिक जुड़ाव और सामाजिक गतिशीलता दोनों में सुधार की उम्मीद है। वर्तमान में बसों के रूट निर्धारण और परमिट प्रक्रिया समाप्ति की प्रतीक्षा है, जो आने वाले हफ्तों में औपचारिक रूप ले सकती है।पिछले कई वर्षों में इस मार्ग पर निजी बसों की अधिसंख्य सेवाएँ ही उपलब्ध थीं, लेकिन उनका किराया अक्सर उच्च और समय‑सारिणी अनियमित रही। इस कारण यात्रियों को लंबे समय तक इंतज़ार और असुविधा सहनी पड़ती थी। राज्य सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने के लिए कई बार योजना बनाई, परंतु वित्तीय प्रतिबद्धता और तकनीकी चुनौतियों के कारण कार्यान्वयन में देरी हुई। इस संदर्भ में नई सरकारी बसें एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही हैं।

पथ परिवहन निगम के आधिकारिक बयान के अनुसार, चार नई बसें बेंज़िन‑डीज़ल इंजन और एसी सुविधाओं से सुसज्जित हैं, जो पर्यावरण मानकों को भी पूरा करती हैं। इन बसों को विशेष रूप से झारखंड के रॉडमैप पर निर्धारित मार्ग के लिए अनुकूलित किया गया है, जिसमें रांची के प्रमुख बस स्टैंड और बोकारो के व्यापारिक केंद्र शामिल हैं। रूट मानचित्र तैयार हो चुका है, और पहले चरण में दैनिक दो बार दोहरे मार्ग की योजना है, जिससे यात्रियों को अधिक लचीलापन मिलेगा।

सरकारी स्रोतों ने बताया कि परमिट प्रक्रिया में अब केवल ट्रैफिक विभाग की स्वीकृति शेष है, जिसे अगले दो सप्ताह के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। इस बीच, ड्राइवरों की ट्रेनिंग और सुरक्षा मानकों की जाँच भी चल रही है। डिपो में नई बसों की रखरखाव टीम को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे संचालन में तकनीकी गड़बड़ी की संभावना न्यूनतम रहेगी।

रांची‑बोकारो मार्ग पर सरकारी बस सेवा की पुनःप्रस्तुति का इतिहास लगभग आठ साल पुराना है। पिछले कई बार प्रस्तावित योजनाओं को विभिन्न कारणों से स्थगित किया गया, जिसमें वित्तीय अड़चनें, स्थानीय राजनीति और बुनियादी ढांचे की कमी शामिल थी। हालांकि, इस बार केंद्र सरकार की स्वीकृत फंडिंग और राज्य की सक्रिय भागीदारी ने योजना को साकार किया है। यह पहल राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ जुड़ी आर्थिक धारा को भी सुदृढ़ करेगी, जिससे व्यापारिक वस्तुओं का परिवहन तेज़ और सस्ता हो सकेगा।

डिपो में पहुंची नई बसों को आज़माने के बाद, पथ परिवहन निगम के प्रमुख ने कहा कि सेवा शुरू होने पर किराया मौजूदा निजी सेवाओं से 20‑30 प्रतिशत कम रखा जाएगा। यह मूल्य निर्धारण नीति आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को भी लाभ पहुंचाने की दिशा में है, जिससे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ेगा। साथ ही, एसी सुविधा और सुरक्षित बैठने की व्यवस्था यात्रियों की आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करेगी, जिससे दीर्घकालिक रूप से सार्वजनिक भरोसा भी स्थापित होगा।

इस विकास पर स्थानीय व्यापारियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। रांची के एक प्रमुख व्यापार संघ के अध्यक्ष ने कहा कि नियमित सार्वजनिक बस सेवा से कर्मचारियों की आवागमन लागत घटेगी और उत्पादनशीलता में वृद्धि होगी। बोकारो के एक छोटे उद्यमी ने भी बताया कि बेहतर कनेक्टिविटी से ग्राहकों के प्रवाह में सुधार होगा, जिससे स्थानीय बाजार का विस्तार होगा। इन संकेतों से पता चलता है कि आर्थिक लाभ सिर्फ यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापारिक पर्यावरण को भी सुदृढ़ करेगा।

राज्य के परिवहन मंत्री ने इस पहल को ‘जनसेवा’ का एक मॉडल बताया और कहा कि यह अन्य राज्य‑स्तर के मार्गों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। उन्होंने कहा कि सरकारी बसें पर्यावरण के अनुकूल होंगी और ट्रैफिक जाम को कम करने में मदद करेंगी। इसी दौरान, झारखंड के सार्वजनिक परिवहन विभाग के प्रमुख ने उल्लेख किया कि दोनों राज्यों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के लिए भविष्य में और अधिक इंटर‑स्टेट बस सेवाएँ जोड़ने की योजना है।

The new government buses will provide regular, lower‑cost public transport between Ranchi and Bokaro, enhancing connectivity. This is expected to facilitate economic activity and improve mobility for residents of both cities.

गुजरात: भवनगर में मिलावटी शराब पीने से दो मौत, 19 घायल; चार तस्कर गिरफ्तार

गुजरात के भावनगर जिले के एक छोटे कस्बे में शाम के समय एक अजीब शोर सुनाई दिया। कई परिवारों ने अपने घरों से बाहर निकल कर उस दिशा की ओर रुख किया जहाँ स्थानीय शराब के ढेर रखे हुए थे। कुछ ही मिनटों में कई लोग उस मिश्रित द्रव्य को पीकर बेहोश हो गए। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंच कर स्थिति को संभाला और दो लोगों की मृत्यु की पुष्टि की। कुल मिलाकर उन्नीस पीड़ितों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उन्हें तत्काल उपचार प्रदान किया गया।इस हादसे की पृष्ठभूमि में स्थानीय शराब तस्करियों की लम्बी इतिहास जुड़ी हुई है। वर्षों से इस क्षेत्र में अनियमित रूप से शराब बनाकर बेचने की रिपोर्टें आती रहती थीं। अक्सर ये शराब बिन लाइसेंस के निर्मित होती थी और उसमें विभिन्न रसायन मिलाकर इसे किफायती बनाया जाता था। पिछले साल भी इस जिले में मिलावटी शराब से जुड़े छोटे-मोटे मामले दर्ज हुए थे, लेकिन इस बार की घटना ने स्थानीय प्रशासन को चौंका दिया।

प्राथमिक जांच से पता चला कि पीड़ितों ने एक ही बैरन से खरीदी गई शराब का सेवन किया था। पुलिस ने बताया कि यह शराब “नकली” या “मिलावटी” थी, जिसमें मेथनॉल और अन्य विषाक्त पदार्थों का मिश्रण था। अधिकारी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि यह शराब स्थानीय स्तर पर निर्मित नहीं थी, बल्कि बाहर से लाकर वितरित की गई थी। इस प्रकार के मिश्रण से शरीर में तेजी से विषाक्त प्रभाव उत्पन्न होते हैं, जिससे श्वास अवरोध और अंततः मृत्यु भी हो सकती है।

घटना के तुरंत बाद पुलिस ने क्षेत्र में गश्त तेज कर दी और चार संदिग्ध शराब तस्करों को पकड़ लिया। ये चार व्यक्ति स्थानीय शराब बाजार में सक्रिय थे और इस मामले में मुख्य आपूर्ति श्रृंखला के रूप में पहचाने गए हैं। पुलिस ने कहा कि इनकी हिरासत के दौरान उनकी पूछताछ जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि शराब बनाने वाले उपकरण और बचे हुए शराब के नमूने को फोरेंसिक लैब में भेजा गया है।

आसपास के कई निवासियों ने कहा कि इस तरह की शराब का सेवन पहले भी कभी नहीं किया था। उन्होंने बताया कि अक्सर वे “सस्ती” शराब के लिए स्थानीय विक्रेताओं पर भरोसा करते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने एक अनजान व्यक्ति से शराब खरीदी। कई लोगों ने कहा कि शराब के रंग और स्वाद में कुछ असामान्य था, परन्तु उन्हें इसका शंका नहीं हुई। यह घटना स्थानीय लोगों के बीच शराब के स्रोत को लेकर सतर्कता बढ़ाने का कारण बन गई है।

स्वास्थ्य अधिकारी बताते हैं कि मिलावटी शराब के कारण उत्पन्न होने वाले लक्षणों में अत्यधिक उल्टी, सिरदर्द, श्वास में कठिनाई और अचानक बेहोशी शामिल हैं। इस मामले में अस्पताल में भर्ती रोगियों को तत्काल रेस्पिरेटरी सपोर्ट, डायलिसिस और विषाक्त पदार्थों के खिलाफ एंटीटॉक्सिक उपचार दिया गया। डॉक्टरों ने कहा कि यदि समय पर उपचार न किया जाये तो मृत्युदर बढ़ सकता है।

राज्य सरकार ने इस घटना पर तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी घटनाएँ “न्याय के सामने नहीं रह सकतीं” और सभी तस्करों को कड़ी सजा दिलाने का वादा किया। उन्होंने राज्य स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि मिलावटी शराब की रोकथाम के लिए विशेष निगरानी प्रणाली स्थापित की जाए। इस दिशा में, राज्य ने अब तक की सबसे सख्त शराब नियंत्रण अधिनियम को लागू करने की घोषणा की है।

बाजार में शराब की कीमतों में बढ़ोतरी और आयातित शराब की कमी को लेकर स्थानीय व्यापारी भी चिंतित हैं। कुछ व्यापारी ने कहा कि किफायती शराब की कमी से लोग अनजाने में खतरनाक विकल्प चुन रहे हैं। इस संदर्भ में, व्यापार संघ ने कहा कि सरकार को सस्ती और सुरक्षित शराब की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि लोगों को “बिना जोखिम” विकल्प मिले।

अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए “नकली शराब विरोधी समिति” का गठन किया गया है। यह समिति विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पुलिस बल के साथ मिलकर कार्य करेगी। समिति का मुख्य उद्देश्य शराब के स्रोत की पहचान, उत्पादन प्रक्रिया की निगरानी और उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाना है।

 

Updated: August 19, 2026


A batch of illicit, methanol‑laden liquor consumed by villagers in Bhavnagar’s Bhanvad town left 19 people hospitalized and two dead, prompting police to arrest four suspected bootleggers and seize the contaminated stock. State officials vowed tougher enforcement and a dedicated anti‑spurious liquor task force to curb such deadly scams.

The tragedy exposes how “cheap” alcohol becomes a silent weapon when market pressures push desperate buyers toward unregulated, imported brews, turning profit motives into public‑health catastrophes.
Unless Gujarat’s new crackdown pairs strict supply monitoring with affordable, safe alternatives, the cycle of illicit, toxin‑laden liquor will

झारखंड बंद से थमा जनजीवन, JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पर BJP का शक्ति प्रदर्शन; छात्रों के समर्थन में राज्यव्यापी बंद

Jharkhand Bandh Today: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब बड़े राजनीतिक टकराव में बदल गया है। JPSC और JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी, पेपर लीक के आरोप और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार 18वें दिन जारी है। इसी मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार, 11 अगस्त को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया। बंद के दौरान राजधानी रांची समेत राज्य के कई हिस्सों में स्कूल, बाजार और कारोबारी प्रतिष्ठान प्रभावित हुए, जबकि सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में वाहनों की आवाजाही कम दिखाई दी।

JPSC-JSSC विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग

झारखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं को लेकर शुरू हुआ छात्रों का विरोध अब केवल परीक्षा प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच, कुछ परीक्षाओं को रद्द करने और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी और कथित गड़बड़ियों ने हजारों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और JSSC-CGL समेत कुछ भर्ती परीक्षाओं को लेकर कार्रवाई शामिल है। आंदोलनकारी कई मामलों में CBI जांच या झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों की समिति से जांच कराने की मांग भी उठा रहे हैं।

पुलिस कार्रवाई के बाद और भड़का आंदोलन

आंदोलन ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब रांची में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। रिपोर्टों के अनुसार प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। इसके बाद छात्रों के समर्थन में विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया।

छात्रों का कहना है कि वे अपने भविष्य और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता के लिए आंदोलन कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से संवाद जारी रखने की बात कही है और आंदोलन को राजनीतिक रूप देने के आरोप भी लगाए हैं।

BJP ने बुलाया राज्यव्यापी बंद

छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में BJP ने 11 अगस्त को झारखंड बंद का आह्वान किया। पार्टी के नेताओं ने कहा कि वह JPSC-JSSC अभ्यर्थियों की मांगों के समर्थन में खड़ी है और कथित परीक्षा अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखेगी। BJP ने विशेष रूप से CBI जांच की मांग को प्रमुखता से उठाया है।

विपक्षी दल का आरोप है कि हेमंत सोरेन सरकार छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रही है और शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल किया जा रहा है। BJP के इस बंद के जरिए परीक्षा विवाद को लेकर सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है।

रांची समेत कई जगहों पर असर

बंद के दौरान राजधानी रांची में सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा। कई स्कूल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि सार्वजनिक और निजी वाहनों की आवाजाही भी कम दिखाई दी। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बंद समर्थकों की गतिविधियों के कारण सड़क यातायात प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं।

प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। बंद के दौरान पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई और प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित करते हुए छात्रों की शिकायतों का समाधान भी निकाला जाए।

ABVP कार्यकर्ताओं का विधानसभा मार्च

बंद के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने भी छात्रों के समर्थन में विधानसभा की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की और करीब 110 ABVP कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव भी देखने को मिला।

यह घटनाक्रम बताता है कि परीक्षा विवाद अब व्यापक छात्र और युवा आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। यदि सरकार और प्रदर्शनकारी संगठनों के बीच बातचीत से समाधान नहीं निकलता है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सरकार ने कुछ परीक्षाओं पर लिया फैसला

सरकार की ओर से विवाद को शांत करने की दिशा में कुछ कदम उठाए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार राज्य सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा और 2023 तथा 2025 में आयोजित कुछ बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति जताई है। वहीं JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के मामले में सरकार ने कहा है कि यह परीक्षा न्यायिक निगरानी में आयोजित हुई थी, इसलिए इसे रद्द करने का फैसला उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

इसके अलावा भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच को लेकर प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की जांच भी चर्चा में है। इससे परीक्षा विवाद का दायरा और बढ़ गया है।

पूर्व JPSC अध्यक्ष की गिरफ्तारी से बढ़ी हलचल

परीक्षा विवाद के बीच पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी ने भी मामले को नया मोड़ दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक CID ने इस मामले में कई स्थानों पर तलाशी ली थी और जांच का दायरा बढ़ाया गया। खियांग्ते ने जुलाई में JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था।

जांच एजेंसियों की कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि मामला केवल छात्रों की शिकायतों तक सीमित नहीं है, बल्कि भर्ती परीक्षा प्रणाली में कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है।

छठी दौर की बातचीत भी बेनतीजा

सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत के कई दौर हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई व्यापक समाधान नहीं निकल पाया है। 11 अगस्त तक सरकार और JPSC-JSSC मंच के बीच बातचीत का छठा दौर भी छात्रों की सभी प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बना सका।

यही गतिरोध आंदोलन को लंबा खींच रहा है। छात्र चाहते हैं कि सरकार उनकी सभी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट और लिखित कार्रवाई करे, जबकि सरकार कुछ मांगों पर सहमति जताने के साथ-साथ उन परीक्षाओं को रद्द करने से इनकार कर रही है जिन्हें वह कानूनी या न्यायिक कारणों से अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर मानती है।

विधानसभा भी बनी राजनीतिक संघर्ष का केंद्र

JPSC-JSSC विवाद का असर झारखंड विधानसभा की कार्यवाही पर भी पड़ा। BJP के विरोध और हंगामे के बीच विधानसभा को निर्धारित समय से एक दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की CID जांच जारी है।

इस घटनाक्रम से साफ है कि परीक्षा विवाद अब झारखंड की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन चुका है। BJP इसे युवाओं के भविष्य और सरकारी भर्ती में पारदर्शिता का सवाल बता रही है, जबकि सरकार विपक्ष पर मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगा रही है।

युवाओं के भविष्य पर टिकी पूरी बहस

झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए भर्ती परीक्षा सिर्फ एक परीक्षा नहीं बल्कि भविष्य की उम्मीद है। ऐसे में परीक्षा में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक या परिणाम को लेकर उठने वाले सवाल सीधे अभ्यर्थियों के भरोसे को प्रभावित करते हैं।

सरकारी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक परीक्षा के लिए बड़ी संख्या में युवा वर्षों तक तैयारी करते हैं। यदि उन्हें प्रक्रिया में गड़बड़ी का संदेह होता है तो केवल परीक्षा रद्द करना ही पर्याप्त नहीं होगा। सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिसमें प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा आयोजित करने, मूल्यांकन और परिणाम जारी करने तक हर चरण में जवाबदेही सुनिश्चित हो।

सरकार और छात्रों के बीच समाधान की जरूरत

मौजूदा हालात में सबसे जरूरी है कि सरकार और छात्र संगठनों के बीच संवाद का रास्ता बंद न हो। लंबे समय तक बंद, प्रदर्शन और टकराव से छात्रों, कारोबारियों और आम लोगों को नुकसान हो सकता है। दूसरी तरफ छात्रों की वास्तविक शिकायतों को नजरअंदाज करना भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

सरकार को उन मांगों पर स्पष्ट रोडमैप देना होगा जिन्हें वह स्वीकार कर सकती है और जिन मांगों को कानूनी कारणों से स्वीकार नहीं किया जा सकता, उनके पीछे का आधार भी सार्वजनिक रूप से समझाना होगा। इससे अफवाहों और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की जगह तथ्य आधारित चर्चा को बढ़ावा मिलेगा।

निष्कर्ष: परीक्षा विवाद से आगे बढ़कर भरोसे की लड़ाई

झारखंड बंद ने JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को राज्य की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। छात्रों का आंदोलन 18वें दिन में पहुंच चुका है, BJP ने राज्यव्यापी बंद के जरिए सरकार पर दबाव बढ़ाया है और विधानसभा की कार्यवाही तक इस विवाद की चपेट में आ गई है।

अब इस पूरे विवाद की असली परीक्षा सरकार की कार्रवाई से होगी। यदि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध होती है, दोषियों पर कार्रवाई होती है और भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाई जाती है, तो सरकार युवाओं का भरोसा वापस हासिल कर सकती है। लेकिन यदि राजनीतिक टकराव और आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे, तो यह आंदोलन झारखंड में युवाओं के बीच बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सरकार और छात्र संगठन बातचीत के जरिए ऐसा समाधान निकाल पाएंगे, जिससे भर्ती परीक्षाओं पर युवाओं का भरोसा फिर कायम हो सके?

रेलवे के डिप्टी चीफ इंजीनियर को 4 लाख रिश्वत लेते गिरफ्तार

रेलवे के डिप्टी चीफ इंजीनियर को 4 लाख रिश्वत लेते सीबीआई ने हावड़ा स्टेशन से दबोचाभारतीय रेलवे के एक उच्च अधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने रेलवे के डिप्टी चीफ सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर सत्यम कुमार को 4 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. इस मामले में कोलकाता स्थित मेसर्स (एम/एस) एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड के दो प्रतिनिधियों सुब्रत चक्रवर्ती और राजू पंडित को भी गिरफ्तार किया गया है।

मैसर्स एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड एक प्रमुख विद्युत सिग्नलिंग कंपनी है जो भारत में विद्युत सिग्नलिंग प्रणालियों का स्थापना करती है. कंपनी ने भारतीय रेलवे के लिए कई महत्वपूर्ण सिग्नलिंग परियोजनाओं पर काम किया है.

नई दिल्ली से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि सीबीआई ने इस मामले में रेलवे के एक अन्य अधिकारी और दो प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया है. सूत्र ने बताया कि इन गिरफ्तारियों के मद्देनजर रेलवे के कई अधिकारियों और नीतिगत स्तर पर मंथन शुरू हो गया है.

रेलवे के डिप्टी चीफ इंजीनियर सत्यम कुमार ने 4 लाख रुपये की रिश्वत ली थी. यह रकम 5 से 7 सितंबर के बीच शेयर में किया गया था. रेलवे अधिकारी के अनुसार, मैसर्स एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड ने रेलवे से एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे जो कि एक विशेष सिग्नलिंग परियोजना के लिए था. संबंधित पक्षों का दावा रहा कि रिश्वत में ली गई रकम में तीन फीसदी की दर पर बकाया थे.

संबंधित पक्षों ने दावा किया है कि इस पूरे घोटाले के पीछे कई बड़े लोग हैं और इनके द्वारा मोटी रकम का पुलट लिया गया है.

इस मामले में पुलिस ने कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए हैं जिनमें लिपटे और गवाहों के बयान शामिल है. पुलिस ने बताया है कि इस मामले में कई अन्य लोग भी गिरफ्तार हो सकते हैं और फिर से जाँच कराई जाएगी.

निशाना बनाए गए विभाग से जुड़कर, रेलवे विभाग ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में भारतीय रेलवे द्वारा एक उच्च-स्तरीय परिभाषित शिष्टता संबंधी जांच बोर्ड बनाया गया है जिसके सदस्य विश्वासपात्र अधिकारियों के समूह से आते हैं।

भारत में रेलवे परियोजनाओं के लिए मैसर्स एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड की सेवाएं ली जाती है. पिछले कुछ वर्षों में, रेलवे ने कई महत्वपूर्ण सिग्नलिंग परियोजनाओं पर काम किया है और इन परियोजनाओं के लिए मैसर्स एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड को कार्य मिला है.

लंदन बेस्ड ब्रिटिश रेलवे के प्रमुख इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी पार्टनर होने का दावा करती हुए, सिग्नल कंपनी ने साल-दर-साल कई सारे वित्तीय खेल ब्रांस देखने के बाद 2023 के पहली तिमाही में निरंतर मुनाफे की प्रतिपूर्ति करती हुई कंपनी बनी हुयी है।

भारत में डिजिटल संपत्ति पंजीकरण क्रांति: झारखंड में 10,000 करोड़ का फ़ायदा हो सकता है

भारतीय राज्यों में से एक बिहार में संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटलाइज़ करने के प्रयासों को देखते हुए, झारखंड के लिए भी संभावित फ़ायदों वाले एक और कदम उठाया गया है। बिहार पंजीकरण विभाग ने अपने संपत्ति पंजीकरण पोर्टल को डिजिटलाइज़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिससे झारखंड को भी 10,000 करोड़ का फ़ायदा हो सकता है। इस साल की शुरुआत में, बिहार सरकार ने संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटलाइज़ करने का लक्ष्य रखा था, जिसे अब तक काफी हद तक पूरा कर लिया गया है।

बिहार मेंसंपत्ति पंजीकरण के कुल मामलों में से लगभग 40% डिजिटल तरीके से हो चुके हैं, जो एक बड़ी उपलब्धि है। यह डिजिटलाइज़ेशन का परिणाम है, जिसे पूरा करने के लिए विभाग ने एक रचनात्मक कदम उठाया है। इस प्रक्रिया में न केवल बिहार बल्कि राज्य में भी होने वाले संपत्ति पंजीकरण में भी संभावित फ़ायदे हो सकते हैं।

डिजिटलाइज़ेशन के इस महत्वपूर्ण कदम से राज्य में आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिल सकता है। जैसे ही संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया डिजिटलाइज़ होगी, यह अधिक संख्या में निवेशकों को आकर्षित करेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगी। इसके अलावा, यह परिवर्तन राज्य के मूल निवासियों के लिए भी फ़ायदेमंद हो सकता है, क्योंकि वे अपने संपत्ति की पंजीकरण प्रक्रिया को आसानी से और तेजी से पूरा कर सकेंगे।

झारखंड के लिए यह एक बड़ा अवसर हो सकता है, क्योंकि यह राज्य में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और निवेशकों को आकर्षित करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, यह राज्य के मूल निवासियों के लिए भी फ़ायदेमंद हो सकता है, क्योंकि वे अपने संपत्ति की पंजीकरण प्रक्रिया को आसानी से और तेजी से पूरा कर सकेंगे।

बिहार पंजीकरण विभाग द्वारा उठाए गए कदम की सराहना की जा रही है, क्योंकि यह राज्य में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और निवेशकों को आकर्षित करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, यह राज्य के मूल निवासियों के लिए भी फ़ायदेमंद हो सकता है, क्योंकि वे अपने संपत्ति की पंजीकरण प्रक्रिया को आसानी से और तेजी से पूरा कर सकेंगे।

राज्य सरकारें अब संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटलाइज़ करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जिससे निवेशकों को आकर्षित करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। झारखंड के लिए यह एक बड़ा अवसर हो सकता है, क्योंकि यह राज्य में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और निवेशकों को आकर्षित करने में मदद कर सकता है।

इस परिवर्तन से राज्य में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि यह निवेशकों को आकर्षित करेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगी। इसके अलावा, यह परिवर्तन राज्य के मूल निवासियों के लिए भी फ़ायदेमंद हो सकता है, क्योंकि वे अपने संपत्ति की पंजीकरण प्रक्रिया को आसानी से और तेजी से पूरा कर सकेंगे।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि झारखंड की सरकार संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटलाइज़ करने के लिए क्या कदम उठाती है। यदि राज्य अपने संपत्ति पंजीकरण को डिजिटलाइज़ करना शुरू करता है, तो यह उन लोगों के लिए एक बड़ा फ़ायदा हो सकता है जो राज्य के मूल निवासी हैं। इसके अलावा, यह परिवर्तन राज्य में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।

बिहार के वीर जवान मुरारी कुमार की झारखंड में नक्सल मुठभेड़ में शहादत, गुमला में हुआ ऑपरेशन

बिहार के बेगूसराय जिले के एक जवान मुरारी कुमार ने झारखंड के गुमला जिले में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान शहादत दी है। यह घटना तब हुई जब वे नक्सलियों के खिलाफ अभियान में तैनात थे। उनकी शहादत की खबर मिलते ही उनके गांव और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों और ग्रामीणों में दुख की भावना है, और सभी उनकी शहादत को सलाम कर रहे हैं।

मुरारी कुमार बिहार के बेगूसराय जिले के निवासी थे और झारखंड में नक्सल विरोधी ऑपरेशन में शामिल थे। उनकी बहादुरी और बलिदान को लेकर क्षेत्र में चर्चा हो रही है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे अभियानों में ऐसी घटनाएं दुखद होती हैं, लेकिन वे हमारे देश की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी दर्शाती हैं।

मुरारी कुमार की शहादत पर बिहार और झारखंड के लोगों में गहरा दुख है, और सभी उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। यह घटना हमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की चुनौतियों की याद दिलाती है और उनके बलिदान को याद रखने की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।

खाड़ी युद्ध के बढ़ते खतरे में फंसे भारतीय: गिरिडीह के परिवारों की सुरक्षा को लेकर सरकार से मदद की अपील

खाड़ी देशों में जारी युद्ध और लगातार बमबारी की खबरों ने गिरिडीह के कई परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के विभिन्न प्रखंडों के ऐसे परिवार, जिनके सदस्य रोजगार के लिए खाड़ी देशों में रह रहे हैं, इन दिनों अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। गिरिडीह शहर के वार्ड नंबर 16 स्थित आजाद नगर निवासी सन्नी और शम्मी भी उन भारतीयों में शामिल हैं, जो पिछले कुछ वर्षों से खाड़ी देशों में कार्यरत हैं।

सन्नी आबूधाबी में एक कंपनी में अकाउंट से संबंधित कार्य करते हैं, जबकि उनके छोटे भाई शम्मी दुबई के एक बैंक में कार्यरत हैं। मौजूदा युद्ध की स्थिति ने उनके परिवार की चिंता बढ़ा दी है। दोनों भाइयों के पिता अंसार अहमद ने बताया कि युद्ध की खबरें सामने आने के बाद से परिवार में चिंता का माहौल है। उन्होंने कहा कि परिजन दिनभर टीवी और मोबाइल पर खबरें देखते रहते हैं और बेटों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं।

अंसार अहमद ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि यदि स्थिति और गंभीर होती है, तो वहां रह रहे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने सरकार से देश में ही युवाओं के लिए बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की भी मांग की, ताकि उन्हें विदेश जाने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने बताया कि वे अपने बच्चों को विदेश नहीं भेजना चाहते थे, लेकिन शिक्षा ऋण और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उन्हें बाहर काम करने जाना पड़ा।

दोनों भाइयों की मां सलेहा परवीन ने कहा कि युद्ध और बमबारी की खबरें सुनकर काफी डर लगता है। उन्होंने बताया कि एक मां होने के नाते हर समय मन में चिंता बनी रहती है, लेकिन उन्हें अपने बेटों पर और वहां की व्यवस्था पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि उन्हें यूएई की व्यवस्था और देश की नरेंद्र मोदी सरकार पर पूरा विश्वास है कि अगर कोई संकट की स्थिति आती है तो भारतीयों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। परिजनों ने कहा कि वे अपने बेटों से संपर्क में हैं और फिलहाल दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन युद्ध की खबरों के बीच परिवार के लोगों की चिंता कम होने का नाम नहीं ले रही है।

दुबई में फंसे झारखंड के नवविवाहित जोड़े की वापसी के लिए सरकार से मदद की अपील

रांची के एक नवविवाहित जोड़े का हनीमून का सपना दुबई में फंसने की चिंता में बदल गया है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के अधिकारी अतुल उरांव और उनकी पत्नी डॉ. कंचन बाड़ा 27 फरवरी को दुबई हनीमून मनाने पहुंचे थे, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वे वहीं फंस गए हैं।

दोनों की वापसी 4 मार्च को तय थी, लेकिन अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कई उड़ानें रद्द कर दी गईं। इसके कारण हजारों पर्यटक और यात्री वहां फंस गए हैं। अतुल उरांव ने बताया कि वे अपने जीवन के सबसे खास पल को मनाने दुबई आए थे, लेकिन अचानक हालात बदल गए। उनकी पत्नी डॉ. कंचन बाड़ा ने कहा कि यहां का माहौल सामान्य नहीं लग रहा है और वे फिलहाल सुरक्षित हैं, लेकिन हर नई खबर के साथ बेचैनी बढ़ जाती है।

रांची में दोनों परिवारों में गहरी चिंता का माहौल है। परिजन लगातार संपर्क में रहने की कोशिश कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय हालात पर नजर बनाए हुए हैं। परिवार के लोगों ने झारखंड सरकार से मानवीय आधार पर हस्तक्षेप की मांग की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अनुरोध किया गया है कि केंद्र सरकार और यूएई स्थित भारतीय दूतावास से समन्वय कर नवदंपति समेत खाड़ी देशों में फंसे झारखंडियों की सुरक्षित वापसी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यह केवल एक जोड़े की नहीं, बल्कि उन कई लोगों की चिंता है जो मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण वहां फंसे हुए हैं।

बिहार-झारखंड सीमा पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: हथियार और गोलियों के साथ दो युवक गिरफ्तार

बिहार और झारखंड की सीमा से सटे इलाके में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दो युवकों को गिरफ्तार किया है, जो हथियार के बल पर लूटपाट की तैयारी कर रहे थे। हुसैनाबाद पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को देसी कट्टा और गोलियों के साथ पकड़ लिया। यह घटना सोमवार शाम को हुई, जब पुलिस को मानखाप गांव की ओर से दरुआ मोड़ होते हुए दो युवकों के हथियार के साथ जपला की तरफ बढ़ने की सूचना मिली थी।

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दरुआ मोड़ के पास वाहन जांच शुरू कर दी और रात करीब 7:20 बजे बिना नंबर प्लेट की काले रंग की बाइक पर सवार दो युवकों को रुकने का इशारा किया गया। लेकिन वे भागने लगे, जिन्हें पुलिस बल की तत्परता से पकड़ लिया गया। पकड़े गए युवकों की पहचान हुसैनाबाद थानाक्षेत्र के मानखाप गांव निवासी अभिषेक कुमार (19) और नितिश कुमार चंद्रवंशी (18) के रूप में हुई है।

तलाशी के दौरान अभिषेक कुमार के पास से एक देसी कट्टा और दो गोली बरामद की गई। इसके अलावा, दोनों के पास से मोबाइल फोन और बिना नंबर प्लेट की बाइक भी जब्त की गई। जांच में पता चला है कि अभिषेक कुमार पिछले वर्ष भी सड़क लूट के एक मामले में जेल जा चुका है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि दोनों किसी आपराधिक घटना को अंजाम देने की फिराक में थे। पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और जब्त मोटरसाइकिल के मालिक का भी पता लगाया जा रहा है।

धनबाद में एचडीएफसी बैंक शाखा में आग लगने की घटना: शॉर्ट सर्किट की आशंका, दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाया

धनबाद के सरायढेला में स्थित एचडीएफसी बैंक की एक शाखा में सोमवार देर रात आग लगने की घटना सामने आई है। इस घटना में आग बैंक के बिजली पैनल बोर्ड में शॉर्ट सर्किट के कारण लगने की आशंका जताई जा रही है। घटना के समय बैंक बंद था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

बताया गया है कि बैंक परिसर से धुआं उठता देख राहगीरों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी, जिसके बाद दमकलकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का काम शुरू किया। अंदर अत्यधिक धुआं भरा होने के कारण दमकलकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। आग पर काबू पाने के लिए बैंक की खिड़की और दीवार के पिछले हिस्से को तोड़ना पड़ा, ताकि धुआं बाहर निकल सके और आग बुझाई जा सके।

सुरक्षा के मद्देनजर पूरे भवन की बिजली आपूर्ति तत्काल बंद कर दी गई। काफी प्रयासों के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। घटना के बाद सरायढेला पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की मुख्य वजह माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच के बाद ही आग लगने का वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएगा।

इस घटना में बैंक के अंदर रखे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और फर्नीचर को नुकसान पहुंचने की आशंका है, लेकिन नुकसान का आकलन अभी तक नहीं हो सका है। बैंक अधिकारी इस पूरे मामले में फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार कर रहे हैं। घटना की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

होली की भीड़: झारखंड और बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़, आरक्षित सीटें खाली नहीं

होली के त्योहार के नजदीक आने के साथ ही, झारखंड और बिहार के प्रवासी अपने घरों को लौट रहे हैं। पिछले एक सप्ताह से, ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जिससे यात्रियों को बिना टिकट या सीट के भी यात्रा करनी पड़ रही है। बड़े शहरों से आने वाली अधिकांश ट्रेनें पूरी तरह भर चुकी हैं, जिससे यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए किसी भी तरह का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

झारखंड और बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों में टिकट उपलब्ध नहीं होने के बावजूद, लोग किसी भी तरह अपने घरों को लौट रहे हैं। ट्रेनों की जनरल और स्लीपर बोगियां यात्रियों से खचाखच भरी हुई हैं, जिससे आरक्षित सीटों पर यात्रा कर रहे यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सामान्य कोचों में जगह न मिलने के कारण, कई यात्री आरक्षित बोगियों में घुसकर सफर कर रहे हैं, जिससे आरक्षित यात्रियों को असुविधा हो रही है।

होली के कारण, एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ-साथ लोकल ट्रेनों में भी भारी भीड़ है। यात्रियों का एकमात्र उद्देश्य अपने परिवार के साथ होली मनाने के लिए घर पहुंचना है। इस दौरान, रेलवे स्टेशनों पर आरपीएफ के जवान मुस्तैद नजर आ रहे हैं, जो भीड़ को नियंत्रित करने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

इस बीच, रेलवे प्रशासन ने होली के अवसर पर विशेष ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। 08183 टाटा बक्सर होली स्पेशल मंगलवार शाम 5:10 बजे टाटानगर से चलेगी, जो 31 मार्च तक हर मंगलवार को चलेगी। वहीं, 08184 बक्सर टाटा होली स्पेशल 4 मार्च से 1 अप्रैल तक प्रत्येक बुधवार को बक्सर से दोपहर 12 बजे खुलेगी। यह विशेष ट्रेनें यात्रियों को अपने घरों को लौटाने में मदद करेंगी और होली के त्योहार को और भी खास बनाएंगी।

गोड्डा में बैंक लूट की बड़ी कोशिश: गार्ड को गोली मारकर अपराधी फरार, पुलिस जांच में जुटी

गोड्डा जिले के महागामा थाना क्षेत्र में स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में दिनदहाड़े लूट की कोशिश की गई, जिसमें एक अपराधी ने बैंक के गार्ड विनोद कुमार सिंह पर गोली चला दी, जिससे वह घायल हो गए। घटना के बाद बैंक परिसर में अफरातफरी मच गई। जानकारी के अनुसार, हेलमेट पहने दो लोगों ने बैंक में घुसने का प्रयास किया, लेकिन जब गार्ड विनोद कुमार सिंह ने उन्हें रोककर हेलमेट हटाने को कहा, तो अपराधियों में से एक ने उस पर गोली चला दी। गोली गार्ड के कंधे के पास लगी, जिससे वह घायल हो गए।

घटना के बाद, अपराधियों ने भागते समय दो राउंड हवाई फायरिंग भी की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डकैती के प्रयास में तीन शख्स शामिल थे, जिनमें से एक पहले से ही बैंक के अंदर बैठा था, जबकि दो हेलमेट लगाकर अंदर आ रहे थे।

बैंक कर्मियों ने घटना की सूचना महागामा थाना पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र की घेराबंदी कर सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि आरोपी की पहचान की जा सके। महागामा के सीडीपीओ चंद्रशेखर आजाद ने बताया कि गार्ड को कंधे में गोली लगी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाला जा रहा है। अपराधियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही मामले का खुलासा कर लिया जाएगा।

धनबाद के तोपचांची में सड़क विवाद को लेकर खूनी झड़प, 6 लोग घायल

धनबाद जिले के तोपचांची थाना क्षेत्र में एक गंभीर घटना घटी, जहां सड़क निर्माण को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद ने खूनी झड़प का रूप ले लिया। इस घटना में मुखिया समेत 6 लोग घायल हो गए, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना सिंघदाहा दास टोला में हुई, जहां विधायक फंड से सड़क निर्माण कार्य चल रहा था।

जानकारी के अनुसार, जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया, जो जल्द ही मारपीट में बदल गया। आरोप है कि सुनील दास को रास्ते में रोककर हमलावरों ने लोहे की रॉड और चाकू से उन पर हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। जब सुनील दास के परिजन और अन्य लोग मौके पर पहुंचे, तो उन पर भी हमला किया गया।

इस झड़प में गांव के मुखिया हरिचरण दास के चेहरे पर रॉड और चाकू से वार किया गया, जिससे वे बुरी तरह जख्मी हो गए। उनके पुत्र अनुज कुमार दास के गले में चाकू से वार किया गया। हमले में दो महिलाओं सहित कुल 6 लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए धनबाद स्थित शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

तोपचांची थाना प्रभारी अजय भारती ने बताया कि यह विवाद सड़क निर्माण को लेकर हुआ है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आवेदन मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुखिया हरिचरण दास की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें आगे के इलाज के लिए रेफर करने की तैयारी चल रही है। पुलिस घटना की जांच में जुटी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

झारखंड के कोडरमा में तालाब में डूबने से तीन बच्चों की मौत, परिजनों में मचा कोहराम

झारखंड के कोडरमा जिले में एक दुखद हादसा हुआ है, जहां तीन बच्चे तालाब में डूबने से मारे गए हैं। यह घटना जयनगर थाना क्षेत्र के कोसमाडीह गांव में शनिवार दोपहर हुई। मृतकों में 10 वर्षीय प्रियांशु कुमार, 5 वर्षीय रोहित कुमार और 11 वर्षीय संध्या कुमारी शामिल हैं। गांव के निवासी मंटू यादव ने बताया कि तीनों बच्चे शनिवार दोपहर अपने घर से खेलने के लिए बाहर गए थे, लेकिन देर शाम तक जब वे घर नहीं लौटे, तो उनके परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। शुरुआत में परिजनों को बच्चा चोरों द्वारा बच्चों के अपहरण का संदेह हुआ, लेकिन जब एक ग्रामीण ने बताया कि तीनों बच्चों को गांव से सटे तालाब की ओर जाते देखा गया था, तो परिजन और ग्रामीण तुरंत तालाब की ओर भागे। तालाब पर पहुंचने पर ग्रामीणों ने देखा कि तीनों बच्चों के शव पानी में उपला रहे थे। बच्चों की मौत की खबर सुनते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में मातम छा गया। ग्रामीणों ने तीनों बच्चों के शव गांव लाए और घटना की सूचना जयनगर पुलिस को दी। पुलिस ने सभी बच्चों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए सदर अस्पताल कोडरमा भेज दिया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मृतक के परिजनों को आपदा राहत के तहत मुआवजा देने की गुहार लगाई है। यह घटना कोडरमा जिले में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े करती है।

गिरिडीह में ज्वेलर से बड़ी लूट: 3.5 लाख नकद और 30 ग्राम सोना लूटा, पुलिस ने शुरू की जांच

गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड में एक बड़ी लूट की घटना घटी है, जहां एक जेवर व्यवसायी से साढ़े तीन लाख रुपये नकद, 30 ग्राम सोना और तीन जोड़ी चांदी की पायल लूट ली गई। यह घटना भरकट्टा ओपी थाना क्षेत्र के भलुआ पुल के पास हुई, जहां अपराधियों ने पिस्टल दिखाकर वारदात को अंजाम दिया।

जानकारी के मुताबिक, केंदुवाडीह निवासी शंकर स्वर्णकार सरिया स्थित अपनी आभूषण दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, जब पहले से घात लगाए तीन अज्ञात अपराधियों ने उनकी बाइक को जबरन रोक लिया। अपराधियों ने पिस्टल तान दी और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी, जिसके बाद उन्होंने शंकर स्वर्णकार से 3.50 लाख रुपये नकद, 30 ग्राम सोना और तीन जोड़ी चांदी की पायल छीन ली।

घटना के बाद, पीड़ित व्यवसायी ने शोर मचाया, जिससे आसपास के लोग जुटे और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और पीड़ित से विस्तृत पूछताछ की। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली है और संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी है।

ओपी प्रभारी अमन कुमार ने बताया कि लूट की घटना की सूचना दर्ज कर ली गई है और जल्द ही इस छिनतई कांड का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस का दावा है कि तकनीकी साक्ष्य और स्थानीय सूचना तंत्र के आधार पर अपराधियों तक जल्द पहुंचा जाएगा। घटना से क्षेत्र में दहशत का माहौल है, और स्थानीय लोगों का कहना है कि देर शाम इस मार्ग पर पुलिस गश्ती की कमी रहती है, जिसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं।

जमशेदपुर में राष्ट्रपति मुर्मू ने किया भूमि पूजन:समाज के सर्वांगीण विकास का केंद्र बनेगा कैंपस, 4 हजार सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में ऐतिहासिक भूमि पूजन

झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बना, जब कदमा क्षेत्र में प्रस्तावित श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के निर्माण के लिए भव्य भूमि पूजन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच भूमि पूजन कर केंद्र की आधारशिला रखी। उनके करकमलों से संपन्न हुए इस शुभारंभ ने पूरे राज्य में उत्साह और गौरव का वातावरण निर्मित कर दिया।

गरिमामय उपस्थिति ने बढ़ाया समारोह का महत्व

इस ऐतिहासिक अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। इन सभी गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी ने इस आयोजन को केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य के सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास में दर्ज होने वाला महत्वपूर्ण अध्याय बना दिया।

समारोह स्थल को पारंपरिक सजावट से सुसज्जित किया गया था। वैदिक पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच राष्ट्रपति ने विधिवत पूजा-अर्चना की और शिलापट्ट का अनावरण किया। पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दिया।

जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी

भूमि पूजन समारोह में स्थानीय और राज्य स्तर के कई जनप्रतिनिधियों की भी अहम भागीदारी रही। सांसद बिद्युत बरन महतो, विधायक सरयू राय और विधायक पूर्णिमा साहू सहित कई गणमान्य व्यक्ति मंच पर उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने इस परियोजना को जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए मील का पत्थर बताया।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि प्रस्तावित केंद्र केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं होगा, बल्कि यह सांस्कृतिक जागरण और सामाजिक समरसता का केंद्र बनेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल से क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और सुदृढ़ होगी।

समाज के सर्वांगीण विकास की दिशा में पहल

प्रस्तावित श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है। आयोजकों के अनुसार, यह परिसर धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी प्रमुख केंद्र बनेगा। यहां बच्चों और युवाओं के लिए शैक्षणिक, सांस्कृतिक और नैतिक विकास से जुड़े विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

केंद्र में भारतीय परंपराओं, संस्कृति और मूल्यों पर आधारित कार्यशालाएं, प्रवचन, संगीत एवं नृत्य कार्यक्रम, योग शिविर और सामाजिक सेवा गतिविधियां आयोजित करने की योजना है। आयोजकों का कहना है कि यह केंद्र समाज में संस्कार, सेवा और समर्पण की भावना को सशक्त करेगा और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगा।

स्थानीय लोगों में दिखा उत्साह

भूमि पूजन के अवसर पर कदमा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों में खासा उत्साह देखा गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक समारोह स्थल पर उपस्थित रहे। लोगों ने इसे अपने शहर के लिए गौरव का क्षण बताया।

स्थानीय नागरिकों का कहना था कि इस केंद्र के निर्माण से क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी और सामुदायिक एकता को बल मिलेगा। कई लोगों ने इसे आध्यात्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया, जिससे भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था

राष्ट्रपति के आगमन को ध्यान में रखते हुए शहर में अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। लगभग 4 हजार पुलिसकर्मियों और 125 दंडाधिकारियों की तैनाती शहर के विभिन्न प्रमुख स्थलों और काफिले मार्ग पर की गई थी। सुरक्षा एजेंसियों ने आयोजन स्थल और आसपास के इलाकों में विशेष सतर्कता बरती।

राष्ट्रपति के कारकेड में शामिल सभी वाहनों की विस्तृत जांच की गई और उन्हें गोलमुरी पुलिस लाइन में सुरक्षित रखा गया। सुरक्षा व्यवस्था के तहत सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन की सहायता भी ली गई। दूरबीन से लैस पुलिसकर्मियों को रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया था।

रैपिड एक्शन पुलिस की टीम को कदमा और बारीडीह स्थित आयोजन स्थल के अलावा मानगो बस स्टैंड के पास भी तैनात किया गया, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। पूरे शहर में सुरक्षा का व्यापक घेरा बना रहा, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सका।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई दिशा

श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे नई दिशा देने का भी प्रयास है। इस परियोजना से क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा की गई इस आधारशिला स्थापना को राज्य के विकास और सांस्कृतिक समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह केंद्र निस्संदेह जमशेदपुर के प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थलों में अपनी विशेष पहचान स्थापित करेगा।

झारखंड विधानसभा में ओबीसी छात्रवृत्ति मामले पर हंगामा, सरकार से जवाब तलब

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन ओबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति का मामला जोरदार तरीके से उठा। विधायकों ने सरकार से छात्रवृत्ति भुगतान में देरी का जवाब मांगा, जिस पर कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने बताया कि केंद्रांश की राशि केंद्र सरकार से प्राप्त नहीं होने के कारण राज्यांश जारी नहीं किया जा सका है। उन्होंने स्वीकार किया कि इसी प्रक्रिया के कारण भुगतान में देरी हुई है और सरकार वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रही है।

इस दौरान, जमीन के अवैध हस्तांतरण, मुआवजा, और उद्योग से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा हुई। विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने कहा कि अवैध हस्तांतरण से आदिवासी समुदाय का अनुपात घट रहा है, जबकि मंत्री दीपक बिरूआ ने कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई होती है और गलत हस्तांतरण पर जमीन वापसी भी की जाती है।

इसके अलावा, विकास, शिक्षा, और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सरकार ने कई मामलों में जांच और कार्रवाई का भरोसा दिलाया, जिसमें कोडरमा में आयरन फैक्ट्री पर प्रदूषण की शिकायत, हुसैनाबाद-तिसरा सड़क के लिए डीपीआर, और भवनाथपुर में सीसीएल क्वार्टरों का बिजली-पानी कनेक्शन शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ED केस में मिली अंतरिम राहत, MP-MLA कोर्ट की कार्रवाई पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ी राहत देते हुए प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज केस में चल रही कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दिया है, जिसमें जस्टिस जॉयमंगल बागची भी शामिल थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा लिए गए संज्ञान को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने रांची की MP-MLA कोर्ट में चल रही कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी और प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस आदेश के बाद, निचली अदालत में आगे की प्रक्रिया स्थगित रहेगी, जिससे मुख्यमंत्री को अस्थायी राहत मिल गई है।

मुख्यमंत्री की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता प्रज्ञा सिंह बघेल ने पक्ष रखा और दलील दी कि रांची सिविल कोर्ट के सीजेएम द्वारा संज्ञान लिये जाने और उसके बाद MP-MLA कोर्ट में कार्यवाही शुरू होने की प्रक्रिया विधि सम्मत नहीं है। बहस के बाद, अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले में हस्तक्षेप करते हुए विशेष अदालत की कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया।

इससे पहले, झारखंड हाईकोर्ट ने MP-MLA कोर्ट के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद, यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद, आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी। सुप्रीम कोर्ट की इस अंतरिम राहत को मुख्यमंत्री के लिए बड़ी कानूनी उपलब्धि माना जा रहा है, हालांकि अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

धनबाद सिविल कोर्ट में बम धमकी: जांच जारी, सुरक्षा कड़ी

झारखंड के धनबाद में सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी भरा एक ईमेल मिलने से पूरे न्यायालय परिसर में हड़कंप मच गया। इस धमकी के बाद पूरे परिसर को खाली करा लिया गया और सभी जजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। पुलिस और प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे परिसर को सील कर दिया और बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड और मेटल डिटेक्टर की टीम को बुलाया गया।

पुलिस ने बताया कि धमकी भरे ईमेल की सूचना मिलते ही प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश समेत सभी जजों को तत्काल न्यायालय भवन से बाहर निकाला गया। बड़ी संख्या में मौजूद वकील, मुवक्किल और कर्मचारी भी सुरक्षित बाहर निकाले गए। पुलिस ने एक मोटरसाइकिल से रिमोट बरामद किया है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

साइबर सेल की टीम ईमेल भेजने वाले की पहचान करने के लिए सक्रिय हो गई है और मेल की तकनीकी जांच कर आईपी एड्रेस और लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह धमकी किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।

इस घटना के बाद पूरे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और तलाशी अभियान जारी है। पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए तैयार है। धनबाद पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह की धमकियों से सावधान रहें और यदि उन्हें कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

जमशेदपुर में राष्ट्रपति के आगमन से पहले मॉक ड्रिल:जगन्नाथ मंदिर की आधारशिला रखेंगी, सुरक्षा को लेकर पुलिस चप्पे-चप्पे पर तैनात

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 26 फरवरी को जमशेदपुर आगमन प्रस्तावित है। अपने दौरे के दौरान वे कदमा मरीन ड्राइव में बनने वाले जगन्नाथ मंदिर की आधारशिला रखेंगी और टाटा मणिपाल मेडिकल कॉलेज का भी दौरा करेंगी। इससे पूर्व बुधवार को पुलिस प्रशासन ने जमशेदपुर हवाई अड्डे से कदमा स्थित कार्यक्रम स्थल और वहां से मेडिकल कॉलेज होते हुए वापस हवाई अड्डे तक पूरे रूट पर मॉक ड्रिल किया गया। राष्ट्रपति के कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। सभी सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां पूरी सुरक्षा व्यवस्था के तहत 6 आईपीएस अधिकारियों की निगरानी में लगभग 1500 जवान तैनात रहेंगे। इसके अतिरिक्त, एनएसजी स्क्वाड, एसटीएफ टीम और पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारी भी पूरे रूट और कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहेंगे। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति करीब चार घंटे तक शहर में रहेंगी। उनके दौरे को लेकर सभी सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शहर में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह कार्यक्रम संपन्न कराने की तैयारी है।

झारखंड बजट 2026-27: 1.58 लाख करोड़ का ऐतिहासिक प्रावधान, केंद्र से 16 हजार करोड़ बकाया का आरोप; सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और ग्रामीण विकास पर हेमंत सरकार का बड़ा दांव

झारखंड विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ रुपए का बजट पेश करते हुए राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विकास, सामाजिक न्याय और आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में सरकार की प्राथमिकताओं को विस्तार से रखा। यह उनका लगातार दूसरा बजट है। बजट पेश करने से पहले उन्होंने पारंपरिक प्रक्रिया के तहत लोकभवन जाकर राज्यपाल संतोष गंगवार को बजट की प्रति सौंपी और उसके बाद सदन में बजट भाषण दिया।

अपने संबोधन में वित्त मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि झारखंड के भविष्य की दिशा तय करने वाला रोडमैप है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध, आदिवासी संस्कृति की धरोहर और खनिज आधारित अर्थव्यवस्था वाले झारखंड के गठन का मूल उद्देश्य क्षेत्रीय असमानता को दूर करना, आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना और संसाधनों का संतुलित व जनहितकारी उपयोग सुनिश्चित करना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि तमाम चुनौतियों और केंद्र से अपेक्षित आर्थिक सहयोग नहीं मिलने के बावजूद हेमंत सरकार ने हिम्मत नहीं हारी है।

केंद्र सरकार पर बकाया राशि रोकने का आरोप

बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार पर गंभीर आर्थिक उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर है, लेकिन केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी के लगभग 5 हजार करोड़ रुपए अब तक प्राप्त नहीं हुए हैं। इसी प्रकार, विभिन्न मदों में मिलने वाले अनुदान की करीब 11 हजार करोड़ रुपए की राशि भी लंबित है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत मिलने वाली धनराशि समय पर नहीं मिलना राज्य के विकास में बाधा बन रहा है।

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि पिछले पांच वर्षों से अनुदान की राशि में लगातार कटौती की जा रही है, जिससे झारखंड जैसे पिछड़े राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने माल एवं सेवा कर (GST) की दरों में बदलाव से राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 4 हजार करोड़ रुपए की क्षति होने की बात कही। साथ ही, मनरेगा के परिवर्तित स्वरूप VB-G RAM G योजना में 60:40 के अनुपात में केंद्र-राज्य साझेदारी के कारण झारखंड पर हर साल लगभग 5,640 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान जताया।

उन्होंने कोल कंपनियों के पास बकाया 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपए का मुद्दा भी उठाया और कहा कि अनेक प्रयासों के बावजूद यह राशि राज्य को नहीं मिल पाई है, जिससे खनिज संपदा से समृद्ध होने के बावजूद राज्य को राजस्व संकट झेलना पड़ रहा है।

सामाजिक सुरक्षा पर सबसे बड़ा आवंटन

इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण पर जोर है। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को सर्वाधिक 22 हजार 995 करोड़ 69 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों और जरूरतमंद वर्गों के लिए संचालित योजनाओं को और मजबूती देना चाहती है।

पोषण, छात्रवृत्ति, पेंशन योजनाएं, मातृत्व लाभ और बाल संरक्षण कार्यक्रमों के विस्तार पर विशेष बल दिया गया है। सरकार का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा का मजबूत ढांचा ही समावेशी विकास की नींव है।

शिक्षा क्षेत्र में बड़ा निवेश

मानव संसाधन विकास को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय निवेश किया है। प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए 16 हजार 251 करोड़ 43 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए 2 हजार 564 करोड़ 45 लाख रुपए निर्धारित किए गए हैं।

सरकार का उद्देश्य विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, शिक्षकों की नियुक्ति, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा और तकनीकी संस्थानों को सुदृढ़ करना है। नई विश्वविद्यालय स्थापना, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का विस्तार और युवाओं को रोजगारोन्मुख शिक्षा देने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूती

ग्रामीण विकास विभाग को 12 हजार 346 करोड़ 90 लाख रुपए का आवंटन कर सरकार ने गांवों में आधारभूत संरचना और रोजगार सृजन को गति देने का संकेत दिया है। ग्रामीण सड़कों, आवास योजनाओं और आजीविका कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान रहेगा।

पथ निर्माण विभाग को 6 हजार 601 करोड़ 28 लाख रुपए और ग्रामीण कार्य विभाग को 5 हजार 81 करोड़ 74 लाख रुपए दिए गए हैं। इससे सड़क संपर्क बेहतर करने और दूरदराज इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में कार्य होगा।

ऊर्जा, गृह और स्वास्थ्य को प्राथमिकता

ऊर्जा विभाग को 11 हजार 197 करोड़ 89 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना है। ग्रामीण विद्युतीकरण और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार पर जोर रहेगा।

गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग को 11 हजार 38 करोड़ 53 लाख रुपए दिए गए हैं। कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने, पुलिस आधुनिकीकरण और आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने की दिशा में यह प्रावधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के लिए 7 हजार 990 करोड़ 30 लाख रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। इससे सरकारी अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने, मेडिकल कॉलेजों के विस्तार और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

कृषि, पेयजल और शहरी विकास

कृषि विभाग को 4 हजार 884 करोड़ 20 लाख रुपए का प्रावधान कर किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की योजना है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को 5 हजार 194 करोड़ 53 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

नगर विकास एवं आवास विभाग को 3 हजार 919 करोड़ 40 लाख रुपए और जल संसाधन विभाग को 2 हजार 714 करोड़ 71 लाख रुपए दिए गए हैं। शहरी आधारभूत संरचना, आवास योजनाओं और सिंचाई परियोजनाओं को गति मिलेगी।

अन्य महत्वपूर्ण विभागों को भी प्रावधान

खाद्य आपूर्ति, पंचायती राज, वन एवं पर्यावरण, श्रम, उद्योग, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, भवन निर्माण और नागर विमानन जैसे विभागों को भी आवश्यकता के अनुसार बजट आवंटित किया गया है। इससे बहुआयामी विकास का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।

समावेशी और सतत विकास का दावा

वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि यह बजट सामाजिक न्याय, आर्थिक सुदृढ़ता और सतत विकास के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि चुनौतियां अनेक हैं, लेकिन सरकार जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्ध है। संसाधनों की कमी के बावजूद योजनाओं को गति देने का संकल्प दोहराया गया।

कुल मिलाकर 1.58 लाख करोड़ रुपए का यह बजट सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, ग्रामीण विकास, ऊर्जा और आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर केंद्रित है। केंद्र से लंबित राशि का मुद्दा उठाकर सरकार ने आर्थिक अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का संकेत दिया है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि बजट प्रावधानों का जमीनी क्रियान्वयन किस गति से होता है और राज्य की विकास यात्रा को कितना बल मिलता है।

रांची-दिल्ली एयर एंबुलेंस हादसा: 8 लाख जुटाकर बुक की उड़ान, 23 मिनट बाद जंगल में क्रैश; बर्न मरीज समेत 7 की दर्दनाक मौत

झारखंड के चतरा जिले में सोमवार शाम एक दिल दहला देने वाली त्रासदी सामने आई, जब रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एंबुलेंस सिमरिया थाना क्षेत्र के कसियातु जंगल में क्रैश हो गई। इस हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में गंभीर रूप से झुलसे मरीज, उनकी पत्नी और भांजा, दो पायलट, एक डॉक्टर और एक पैरामेडिक शामिल हैं। यह हादसा न सिर्फ सात जिंदगियों का अंत है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था, एयर मेडिकल सेवाओं और आपातकालीन प्रबंधन पर भी कई सवाल खड़े कर गया है।

छह दिन पहले झुलसे थे संजय कुमार

मृतक संजय कुमार (41) पलामू जिले के चंदवा निवासी व्यवसायी थे। छह दिन पहले उनके लाइन होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। आग बुझाने के दौरान उनका पैर फिसल गया और वे लपटों की चपेट में आ गए। वे 65 प्रतिशत तक झुलस गए थे। पहले उन्हें स्थानीय स्तर पर इलाज दिया गया, फिर रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अस्पताल के सीईओ अनंत सिन्हा के अनुसार, संजय को 16 फरवरी को गंभीर हालत में भर्ती किया गया था। इलाज जारी था, लेकिन उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी। बेहतर इलाज के लिए परिवार ने उन्हें दिल्ली ले जाने का निर्णय लिया। सड़क मार्ग से ले जाना जोखिम भरा था, इसलिए एयर एंबुलेंस का विकल्प चुना गया।

साढ़े सात लाख जुटाने की जद्दोजहद

संजय के बड़े भाई विजय कुमार ने बताया कि एयर एंबुलेंस के लिए 7.5 लाख रुपए का इंतजाम करना पड़ा। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, फिर भी रिश्तेदारों और परिचितों से मदद लेकर रकम जुटाई गई। शुरुआत में 2.50 लाख रुपए कम पड़ गए तो विमान कंपनी ने उड़ान भरने से मना कर दिया। आरोप है कि पूरी रकम मिलने के बाद ही उड़ान की अनुमति दी गई।

परिजन चंदवा लौटे, किसी परिचित से पैसे उधार लिए और फिर रांची पहुंचकर शेष राशि दी। इसके बाद ही विमान ने उड़ान भरी। यह परिवार के लिए उम्मीद की उड़ान थी, लेकिन किसे पता था कि यह अंतिम सफर बन जाएगा।

उड़ान के 23 मिनट बाद संपर्क टूटा

एयर एंबुलेंस ने शाम 7:11 बजे रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी। 7:34 बजे कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से उसका संपर्क टूट गया। रात 8:05 बजे रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर सक्रिय किया गया। कुछ ही देर बाद जंगल में विमान क्रैश होने की सूचना मिली।

ग्रामीणों के अनुसार, करीब 7:45 बजे जंगल की ओर से जोरदार धमाके की आवाज आई। तेज हवा और बारिश के कारण लोग तुरंत मौके पर नहीं पहुंच सके। बाद में मलबा कसियातु जंगल में मिला।

खराब मौसम की आशंका

सोमवार शाम झारखंड में अचानक मौसम बिगड़ गया था। तेज हवाएं और भारी बारिश शुरू हो गई थी। शुरुआती रिपोर्ट में खराब मौसम को हादसे का संभावित कारण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि विमान अपने निर्धारित मार्ग से दाईं ओर डायवर्ट हो गया था और रास्ता भटक गया।

हालांकि, तकनीकी खराबी, पायलटिंग एरर या नेविगेशन सिस्टम की विफलता जैसे अन्य कारणों की भी जांच की जा रही है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की टीम द्वारा विस्तृत जांच की संभावना जताई गई है।

कौन-कौन थे सवार?

हादसे में जान गंवाने वालों में शामिल हैं:

  • कैप्टन विवेक
  • कैप्टन सबराजदीप
  • मरीज संजय कुमार
  • उनकी पत्नी अर्चना देवी
  • भांजा ध्रुव कुमार
  • डॉ. विकास कुमार गुप्ता
  • पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा

इन सातों की मौत ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। संजय के दो बेटे शुभम (17) और शिवम (13) अब अनाथ जैसे हालात में हैं। परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ मौत ने रिश्तेदारों को तोड़ कर रख दिया है।

स्वास्थ्य मंत्री का बयान

हादसे के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी चतरा पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा, “अगर झारखंड में बेहतर अस्पताल होते तो हमें मरीज को बाहर नहीं भेजना पड़ता।” उन्होंने राज्य में एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल बनाने की इच्छा जताई और कहा कि स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना समय की जरूरत है।

उन्होंने हादसे की उच्च स्तरीय जांच कराने और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।

मुआवजे की मांग

चतरा विधायक जर्नादन पासवान ने इस घटना को मर्माहत करने वाली त्रासदी बताया और सरकार से मुआवजे की मांग की। वहीं सांसद कालीचरण सिंह ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा देने की अपील की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरियों की भी कहानी है। यदि राज्य में उन्नत बर्न यूनिट और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं होतीं, तो शायद मरीज को बाहर भेजने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

कई सवाल बाकी

यह हादसा कई गंभीर प्रश्न छोड़ गया है:

  • क्या खराब मौसम के बावजूद उड़ान की अनुमति देना सही था?
  • क्या एयर एंबुलेंस कंपनी ने सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया?
  • क्या आपातकालीन मेडिकल ट्रांसपोर्ट के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश मौजूद हैं?
  • क्या आर्थिक दबाव में उड़ान भरना जोखिम भरा निर्णय साबित हुआ?

जांच के बाद ही इन सवालों के जवाब मिल पाएंगे। फिलहाल सात परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल चुकी है।

राज्यसभा चुनाव 2026: बिहार की 5 समेत 37 सीटों पर महासंग्राम, 16 मार्च को मतदान—सत्ता और विपक्ष के लिए निर्णायक परीक्षा

Rajya Sabha Elections 2026: देश की संसदीय राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Election Commission of India ने राज्यसभा की 37 रिक्त हो रही सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस सूची में बिहार की 5 अहम सीटें शामिल हैं, जिन पर सियासी दलों की निगाहें टिकी हुई हैं। इन सीटों पर होने वाला चुनाव सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संसद के ऊपरी सदन में आने वाले वर्षों के राजनीतिक समीकरण तय करने वाला निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

अप्रैल 2026 में कई वरिष्ठ सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में इन सीटों पर नए प्रतिनिधियों का चयन न केवल राज्यों की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी असर डालेगा। खासकर बिहार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह चुनाव गठबंधन राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

चुनाव कार्यक्रम: 26 फरवरी से 20 मार्च तक पूरी प्रक्रिया

चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 26 फरवरी 2026 से शुरू होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च तय की गई है। 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 मार्च तक प्रत्याशी अपना नाम वापस ले सकेंगे।

16 मार्च 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। मतदान समाप्त होते ही शाम 5 बजे से मतगणना शुरू कर दी जाएगी। पूरी चुनावी प्रक्रिया 20 मार्च तक संपन्न कर ली जाएगी और इसके बाद नवनिर्वाचित सदस्यों की सूची आधिकारिक रूप से जारी की जाएगी।

यह समयसीमा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अप्रैल की शुरुआत में कई सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि नई सूची समय रहते जारी हो जाए ताकि संसद के ऊपरी सदन की कार्यवाही प्रभावित न हो।

किन-किन राज्यों में होगा मतदान?

इस बार कुल 37 सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें प्रमुख राज्यों की सीटों का विवरण इस प्रकार है:

  • महाराष्ट्र – 7 सीटें
  • तमिलनाडु – 6 सीटें
  • पश्चिम बंगाल – 5 सीटें
  • बिहार – 5 सीटें
  • ओडिशा – 3 सीटें
  • असम – 3 सीटें
  • छत्तीसगढ़ – 2 सीटें
  • हरियाणा – 1 सीट
  • हिमाचल प्रदेश – 1 सीट
  • तेलंगाना – 4 सीटें

महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में राजनीतिक परिस्थितियों में हाल के वर्षों में हुए बदलाव के कारण यह चुनाव और भी रोचक हो गया है।

बिहार की 5 सीटें क्यों हैं सबसे अहम?

बिहार की जिन 5 सीटों पर चुनाव होने हैं, उन पर वर्तमान में वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधित्व है। इन नेताओं का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। इनमें प्रमुख नाम हैं:

  • Harivansh Narayan Singh
  • Upendra Kushwaha
  • Ram Nath Thakur
  • Prem Chand Gupta
  • Amarendra Dhari Singh

इनमें हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उपसभापति भी हैं। उनका दोबारा चयन होता है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी होंगी। वहीं उपेंद्र कुशवाहा और प्रेम चंद गुप्ता जैसे नेताओं की भूमिका बिहार की क्षेत्रीय राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण रही है।

इन सीटों पर चुनाव का असर सीधे-सीधे बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी महागठबंधन के बीच शक्ति संतुलन पर पड़ेगा।

महाराष्ट्र में भी दिग्गजों की परीक्षा

महाराष्ट्र की 7 सीटों पर भी चुनाव होने जा रहे हैं। यहां से राष्ट्रीय स्तर के दो बड़े नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है:

  • Sharad Pawar
  • Ramdas Athawale

शरद पवार भारतीय राजनीति के वरिष्ठतम नेताओं में गिने जाते हैं। यदि वे पुनः मैदान में उतरते हैं तो यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है। वहीं रामदास अठावले केंद्र सरकार में मंत्री हैं, ऐसे में उनकी सीट भी एनडीए के लिए अहम है।

राज्यसभा चुनाव कैसे होते हैं?

राज्यसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा नहीं चुने जाते। इनका चुनाव संबंधित राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक करते हैं। यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत सिंगल ट्रांसफरेबल वोट (STV) प्रणाली से होता है।

मतलब साफ है—जिस दल या गठबंधन के पास विधानसभा में जितनी अधिक संख्या होगी, उसके उम्मीदवार की जीत की संभावना उतनी ही अधिक होगी। ऐसे में जहां विधानसभा में संख्या बल का अंतर कम है, वहां जोड़-तोड़, रणनीति और क्रॉस वोटिंग की संभावना बढ़ जाती है।

बिहार में संभावित सियासी गणित

बिहार की राजनीति लंबे समय से गठबंधन आधारित रही है। यहां एनडीए और महागठबंधन के बीच सत्ता का संघर्ष चलता रहा है। राज्यसभा चुनाव में प्रत्येक सीट के लिए आवश्यक वोटों का गणित बेहद अहम होता है।

यदि किसी दल के पास पूर्ण बहुमत नहीं है तो उसे सहयोगी दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना पड़ता है। ऐसे में यह चुनाव न केवल राजनीतिक ताकत का परीक्षण है, बल्कि गठबंधन की मजबूती का भी पैमाना बनेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन 5 सीटों में से कम से कम एक या दो सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।

संसद में क्या बदल सकता है समीकरण?

राज्यसभा में बहुमत का गणित अक्सर लोकसभा से अलग होता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि केंद्र सरकार के पास लोकसभा में स्पष्ट बहुमत होता है, लेकिन राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण उसे महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में क्षेत्रीय दलों का समर्थन लेना पड़ता है।

इन 37 सीटों के चुनाव के बाद राज्यसभा की संरचना में बदलाव संभव है। यदि किसी एक गठबंधन को अपेक्षा से अधिक सीटें मिलती हैं तो वह ऊपरी सदन में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

क्या पुराने चेहरों को मिलेगा दोबारा मौका?

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या राजनीतिक दल अपने मौजूदा सांसदों को दोबारा अवसर देंगे या नए चेहरों को आगे लाएंगे?

बिहार में सामाजिक और जातीय समीकरणों का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में दल यह देखेंगे कि किस समुदाय को प्रतिनिधित्व देना उनके लिए लाभकारी रहेगा। इसी तरह महाराष्ट्र और तमिलनाडु में भी क्षेत्रीय संतुलन और गठबंधन समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत की भूमिका

पश्चिम बंगाल की 5 सीटों और तमिलनाडु की 6 सीटों पर भी सबकी नजर है। दक्षिण भारत के राज्यों में क्षेत्रीय दलों की मजबूत उपस्थिति के कारण राष्ट्रीय दलों को रणनीतिक गठजोड़ करना पड़ता है।

इन राज्यों के परिणाम संसद में विपक्ष की ताकत को भी प्रभावित कर सकते हैं।

क्यों कहा जा रहा है इसे ‘मिनी जनादेश’?

राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष जनमत से न होता हो, लेकिन यह राज्यों की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का प्रतिबिंब जरूर होता है। जिन राज्यों में हाल में सरकार बदली है या गठबंधन टूटे हैं, वहां यह चुनाव सत्ता की स्थिरता का संकेत देगा।

विशेषज्ञ इसे ‘मिनी जनादेश’ इसलिए भी कह रहे हैं क्योंकि इससे यह संकेत मिलेगा कि आने वाले लोकसभा या विधानसभा चुनावों में राजनीतिक रुझान किस दिशा में जा सकते हैं।

शराब के नशे में निलंबित सीओ ने थार चलाई, लातेहार में शिव बारातियों को टक्कर

लातेहार जिले के मनिका थाना क्षेत्र के पचफेड़ी के पास महाशिवरात्रि के अवसर पर निकली शिव बारात के दौरान रविवार देर शाम अफरा-तफरी मच गई। एक अनियंत्रित थार वाहन ने कई वाहनों को टक्कर मार दी।

थार (जेएच-01EY-0049) मेदिनीनगर से रांची की ओर जा रही थी। वाहन चलाने वाले गढ़वा जिले के निलंबित अंचल अधिकारी प्रमोद कुमार नशे में थे। उनके साथ एक महिला भी सवार थी।

शिव बारात की झांकी देख रहे श्रद्धालुओं के बीच वाहन ने एक बाइक और एक चारपहिया वाहन को जोरदार टक्कर मार दी।幸हत से कोई गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन मौके पर हड़कंप मच गया।

घटना के बाद लोगों ने देखा कि थार पर ‘डिप्टी कलेक्टर’ का बोर्ड और अंदर ‘प्रशासन’ लिखा हुआ था। इससे स्थानीय लोगों में गुस्सा फैल गया और बड़ी संख्या में भीड़ जमा हो गई।

स्थिति बिगड़ते देख मनिका थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और प्रमोद कुमार को भीड़ से सुरक्षित निकालकर वाहन समेत हिरासत में ले लिया। पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

प्रशासनिक विवादों में घिरे प्रमोद कुमार

प्रमोद कुमार गढ़वा जिले के मांझिआव अंचल में कार्यरत हैं। राज्य सरकार ने 4 नवंबर, 2025 को उन्हें कार्यालय में शराब सेवन, पैसा लेन-देन और लोगों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में निलंबित किया था।

साथ ही, उनकी पत्नी श्यामा रानी ने अंचलाधिकारी के सरकारी आवास में एक महिला के साथ रंगे हाथ पकड़ने का मामला भी चर्चा में रहा।

समाचार लिखे जाने तक प्रमोद कुमार मनिका थाना में पुलिस हिरासत में थे और उन्होंने दैनिक भास्कर की पूछताछ का जवाब देने से इनकार कर दिया।