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बिहार के वीर जवान मुरारी कुमार की झारखंड में नक्सल मुठभेड़ में शहादत, गुमला में हुआ ऑपरेशन

बिहार के बेगूसराय जिले के एक जवान मुरारी कुमार ने झारखंड के गुमला जिले में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान शहादत दी है। यह घटना तब हुई जब वे नक्सलियों के खिलाफ अभियान में तैनात थे। उनकी शहादत की खबर मिलते ही उनके गांव और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों और ग्रामीणों में दुख की भावना है, और सभी उनकी शहादत को सलाम कर रहे हैं।

मुरारी कुमार बिहार के बेगूसराय जिले के निवासी थे और झारखंड में नक्सल विरोधी ऑपरेशन में शामिल थे। उनकी बहादुरी और बलिदान को लेकर क्षेत्र में चर्चा हो रही है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे अभियानों में ऐसी घटनाएं दुखद होती हैं, लेकिन वे हमारे देश की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी दर्शाती हैं।

मुरारी कुमार की शहादत पर बिहार और झारखंड के लोगों में गहरा दुख है, और सभी उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। यह घटना हमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की चुनौतियों की याद दिलाती है और उनके बलिदान को याद रखने की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।

खाड़ी युद्ध के बढ़ते खतरे में फंसे भारतीय: गिरिडीह के परिवारों की सुरक्षा को लेकर सरकार से मदद की अपील

खाड़ी देशों में जारी युद्ध और लगातार बमबारी की खबरों ने गिरिडीह के कई परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के विभिन्न प्रखंडों के ऐसे परिवार, जिनके सदस्य रोजगार के लिए खाड़ी देशों में रह रहे हैं, इन दिनों अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। गिरिडीह शहर के वार्ड नंबर 16 स्थित आजाद नगर निवासी सन्नी और शम्मी भी उन भारतीयों में शामिल हैं, जो पिछले कुछ वर्षों से खाड़ी देशों में कार्यरत हैं।

सन्नी आबूधाबी में एक कंपनी में अकाउंट से संबंधित कार्य करते हैं, जबकि उनके छोटे भाई शम्मी दुबई के एक बैंक में कार्यरत हैं। मौजूदा युद्ध की स्थिति ने उनके परिवार की चिंता बढ़ा दी है। दोनों भाइयों के पिता अंसार अहमद ने बताया कि युद्ध की खबरें सामने आने के बाद से परिवार में चिंता का माहौल है। उन्होंने कहा कि परिजन दिनभर टीवी और मोबाइल पर खबरें देखते रहते हैं और बेटों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं।

अंसार अहमद ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि यदि स्थिति और गंभीर होती है, तो वहां रह रहे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने सरकार से देश में ही युवाओं के लिए बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की भी मांग की, ताकि उन्हें विदेश जाने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने बताया कि वे अपने बच्चों को विदेश नहीं भेजना चाहते थे, लेकिन शिक्षा ऋण और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उन्हें बाहर काम करने जाना पड़ा।

दोनों भाइयों की मां सलेहा परवीन ने कहा कि युद्ध और बमबारी की खबरें सुनकर काफी डर लगता है। उन्होंने बताया कि एक मां होने के नाते हर समय मन में चिंता बनी रहती है, लेकिन उन्हें अपने बेटों पर और वहां की व्यवस्था पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि उन्हें यूएई की व्यवस्था और देश की नरेंद्र मोदी सरकार पर पूरा विश्वास है कि अगर कोई संकट की स्थिति आती है तो भारतीयों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। परिजनों ने कहा कि वे अपने बेटों से संपर्क में हैं और फिलहाल दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन युद्ध की खबरों के बीच परिवार के लोगों की चिंता कम होने का नाम नहीं ले रही है।

दुबई में फंसे झारखंड के नवविवाहित जोड़े की वापसी के लिए सरकार से मदद की अपील

रांची के एक नवविवाहित जोड़े का हनीमून का सपना दुबई में फंसने की चिंता में बदल गया है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के अधिकारी अतुल उरांव और उनकी पत्नी डॉ. कंचन बाड़ा 27 फरवरी को दुबई हनीमून मनाने पहुंचे थे, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वे वहीं फंस गए हैं।

दोनों की वापसी 4 मार्च को तय थी, लेकिन अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कई उड़ानें रद्द कर दी गईं। इसके कारण हजारों पर्यटक और यात्री वहां फंस गए हैं। अतुल उरांव ने बताया कि वे अपने जीवन के सबसे खास पल को मनाने दुबई आए थे, लेकिन अचानक हालात बदल गए। उनकी पत्नी डॉ. कंचन बाड़ा ने कहा कि यहां का माहौल सामान्य नहीं लग रहा है और वे फिलहाल सुरक्षित हैं, लेकिन हर नई खबर के साथ बेचैनी बढ़ जाती है।

रांची में दोनों परिवारों में गहरी चिंता का माहौल है। परिजन लगातार संपर्क में रहने की कोशिश कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय हालात पर नजर बनाए हुए हैं। परिवार के लोगों ने झारखंड सरकार से मानवीय आधार पर हस्तक्षेप की मांग की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अनुरोध किया गया है कि केंद्र सरकार और यूएई स्थित भारतीय दूतावास से समन्वय कर नवदंपति समेत खाड़ी देशों में फंसे झारखंडियों की सुरक्षित वापसी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यह केवल एक जोड़े की नहीं, बल्कि उन कई लोगों की चिंता है जो मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण वहां फंसे हुए हैं।

बिहार-झारखंड सीमा पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: हथियार और गोलियों के साथ दो युवक गिरफ्तार

बिहार और झारखंड की सीमा से सटे इलाके में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दो युवकों को गिरफ्तार किया है, जो हथियार के बल पर लूटपाट की तैयारी कर रहे थे। हुसैनाबाद पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को देसी कट्टा और गोलियों के साथ पकड़ लिया। यह घटना सोमवार शाम को हुई, जब पुलिस को मानखाप गांव की ओर से दरुआ मोड़ होते हुए दो युवकों के हथियार के साथ जपला की तरफ बढ़ने की सूचना मिली थी।

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दरुआ मोड़ के पास वाहन जांच शुरू कर दी और रात करीब 7:20 बजे बिना नंबर प्लेट की काले रंग की बाइक पर सवार दो युवकों को रुकने का इशारा किया गया। लेकिन वे भागने लगे, जिन्हें पुलिस बल की तत्परता से पकड़ लिया गया। पकड़े गए युवकों की पहचान हुसैनाबाद थानाक्षेत्र के मानखाप गांव निवासी अभिषेक कुमार (19) और नितिश कुमार चंद्रवंशी (18) के रूप में हुई है।

तलाशी के दौरान अभिषेक कुमार के पास से एक देसी कट्टा और दो गोली बरामद की गई। इसके अलावा, दोनों के पास से मोबाइल फोन और बिना नंबर प्लेट की बाइक भी जब्त की गई। जांच में पता चला है कि अभिषेक कुमार पिछले वर्ष भी सड़क लूट के एक मामले में जेल जा चुका है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि दोनों किसी आपराधिक घटना को अंजाम देने की फिराक में थे। पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और जब्त मोटरसाइकिल के मालिक का भी पता लगाया जा रहा है।

धनबाद में एचडीएफसी बैंक शाखा में आग लगने की घटना: शॉर्ट सर्किट की आशंका, दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाया

धनबाद के सरायढेला में स्थित एचडीएफसी बैंक की एक शाखा में सोमवार देर रात आग लगने की घटना सामने आई है। इस घटना में आग बैंक के बिजली पैनल बोर्ड में शॉर्ट सर्किट के कारण लगने की आशंका जताई जा रही है। घटना के समय बैंक बंद था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

बताया गया है कि बैंक परिसर से धुआं उठता देख राहगीरों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी, जिसके बाद दमकलकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का काम शुरू किया। अंदर अत्यधिक धुआं भरा होने के कारण दमकलकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। आग पर काबू पाने के लिए बैंक की खिड़की और दीवार के पिछले हिस्से को तोड़ना पड़ा, ताकि धुआं बाहर निकल सके और आग बुझाई जा सके।

सुरक्षा के मद्देनजर पूरे भवन की बिजली आपूर्ति तत्काल बंद कर दी गई। काफी प्रयासों के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। घटना के बाद सरायढेला पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की मुख्य वजह माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच के बाद ही आग लगने का वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएगा।

इस घटना में बैंक के अंदर रखे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और फर्नीचर को नुकसान पहुंचने की आशंका है, लेकिन नुकसान का आकलन अभी तक नहीं हो सका है। बैंक अधिकारी इस पूरे मामले में फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार कर रहे हैं। घटना की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

होली की भीड़: झारखंड और बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़, आरक्षित सीटें खाली नहीं

होली के त्योहार के नजदीक आने के साथ ही, झारखंड और बिहार के प्रवासी अपने घरों को लौट रहे हैं। पिछले एक सप्ताह से, ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जिससे यात्रियों को बिना टिकट या सीट के भी यात्रा करनी पड़ रही है। बड़े शहरों से आने वाली अधिकांश ट्रेनें पूरी तरह भर चुकी हैं, जिससे यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए किसी भी तरह का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

झारखंड और बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों में टिकट उपलब्ध नहीं होने के बावजूद, लोग किसी भी तरह अपने घरों को लौट रहे हैं। ट्रेनों की जनरल और स्लीपर बोगियां यात्रियों से खचाखच भरी हुई हैं, जिससे आरक्षित सीटों पर यात्रा कर रहे यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सामान्य कोचों में जगह न मिलने के कारण, कई यात्री आरक्षित बोगियों में घुसकर सफर कर रहे हैं, जिससे आरक्षित यात्रियों को असुविधा हो रही है।

होली के कारण, एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ-साथ लोकल ट्रेनों में भी भारी भीड़ है। यात्रियों का एकमात्र उद्देश्य अपने परिवार के साथ होली मनाने के लिए घर पहुंचना है। इस दौरान, रेलवे स्टेशनों पर आरपीएफ के जवान मुस्तैद नजर आ रहे हैं, जो भीड़ को नियंत्रित करने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

इस बीच, रेलवे प्रशासन ने होली के अवसर पर विशेष ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। 08183 टाटा बक्सर होली स्पेशल मंगलवार शाम 5:10 बजे टाटानगर से चलेगी, जो 31 मार्च तक हर मंगलवार को चलेगी। वहीं, 08184 बक्सर टाटा होली स्पेशल 4 मार्च से 1 अप्रैल तक प्रत्येक बुधवार को बक्सर से दोपहर 12 बजे खुलेगी। यह विशेष ट्रेनें यात्रियों को अपने घरों को लौटाने में मदद करेंगी और होली के त्योहार को और भी खास बनाएंगी।

गोड्डा में बैंक लूट की बड़ी कोशिश: गार्ड को गोली मारकर अपराधी फरार, पुलिस जांच में जुटी

गोड्डा जिले के महागामा थाना क्षेत्र में स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में दिनदहाड़े लूट की कोशिश की गई, जिसमें एक अपराधी ने बैंक के गार्ड विनोद कुमार सिंह पर गोली चला दी, जिससे वह घायल हो गए। घटना के बाद बैंक परिसर में अफरातफरी मच गई। जानकारी के अनुसार, हेलमेट पहने दो लोगों ने बैंक में घुसने का प्रयास किया, लेकिन जब गार्ड विनोद कुमार सिंह ने उन्हें रोककर हेलमेट हटाने को कहा, तो अपराधियों में से एक ने उस पर गोली चला दी। गोली गार्ड के कंधे के पास लगी, जिससे वह घायल हो गए।

घटना के बाद, अपराधियों ने भागते समय दो राउंड हवाई फायरिंग भी की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डकैती के प्रयास में तीन शख्स शामिल थे, जिनमें से एक पहले से ही बैंक के अंदर बैठा था, जबकि दो हेलमेट लगाकर अंदर आ रहे थे।

बैंक कर्मियों ने घटना की सूचना महागामा थाना पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र की घेराबंदी कर सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि आरोपी की पहचान की जा सके। महागामा के सीडीपीओ चंद्रशेखर आजाद ने बताया कि गार्ड को कंधे में गोली लगी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाला जा रहा है। अपराधियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही मामले का खुलासा कर लिया जाएगा।

धनबाद के तोपचांची में सड़क विवाद को लेकर खूनी झड़प, 6 लोग घायल

धनबाद जिले के तोपचांची थाना क्षेत्र में एक गंभीर घटना घटी, जहां सड़क निर्माण को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद ने खूनी झड़प का रूप ले लिया। इस घटना में मुखिया समेत 6 लोग घायल हो गए, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना सिंघदाहा दास टोला में हुई, जहां विधायक फंड से सड़क निर्माण कार्य चल रहा था।

जानकारी के अनुसार, जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया, जो जल्द ही मारपीट में बदल गया। आरोप है कि सुनील दास को रास्ते में रोककर हमलावरों ने लोहे की रॉड और चाकू से उन पर हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। जब सुनील दास के परिजन और अन्य लोग मौके पर पहुंचे, तो उन पर भी हमला किया गया।

इस झड़प में गांव के मुखिया हरिचरण दास के चेहरे पर रॉड और चाकू से वार किया गया, जिससे वे बुरी तरह जख्मी हो गए। उनके पुत्र अनुज कुमार दास के गले में चाकू से वार किया गया। हमले में दो महिलाओं सहित कुल 6 लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए धनबाद स्थित शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

तोपचांची थाना प्रभारी अजय भारती ने बताया कि यह विवाद सड़क निर्माण को लेकर हुआ है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आवेदन मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुखिया हरिचरण दास की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें आगे के इलाज के लिए रेफर करने की तैयारी चल रही है। पुलिस घटना की जांच में जुटी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

झारखंड के कोडरमा में तालाब में डूबने से तीन बच्चों की मौत, परिजनों में मचा कोहराम

झारखंड के कोडरमा जिले में एक दुखद हादसा हुआ है, जहां तीन बच्चे तालाब में डूबने से मारे गए हैं। यह घटना जयनगर थाना क्षेत्र के कोसमाडीह गांव में शनिवार दोपहर हुई। मृतकों में 10 वर्षीय प्रियांशु कुमार, 5 वर्षीय रोहित कुमार और 11 वर्षीय संध्या कुमारी शामिल हैं। गांव के निवासी मंटू यादव ने बताया कि तीनों बच्चे शनिवार दोपहर अपने घर से खेलने के लिए बाहर गए थे, लेकिन देर शाम तक जब वे घर नहीं लौटे, तो उनके परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। शुरुआत में परिजनों को बच्चा चोरों द्वारा बच्चों के अपहरण का संदेह हुआ, लेकिन जब एक ग्रामीण ने बताया कि तीनों बच्चों को गांव से सटे तालाब की ओर जाते देखा गया था, तो परिजन और ग्रामीण तुरंत तालाब की ओर भागे। तालाब पर पहुंचने पर ग्रामीणों ने देखा कि तीनों बच्चों के शव पानी में उपला रहे थे। बच्चों की मौत की खबर सुनते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में मातम छा गया। ग्रामीणों ने तीनों बच्चों के शव गांव लाए और घटना की सूचना जयनगर पुलिस को दी। पुलिस ने सभी बच्चों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए सदर अस्पताल कोडरमा भेज दिया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मृतक के परिजनों को आपदा राहत के तहत मुआवजा देने की गुहार लगाई है। यह घटना कोडरमा जिले में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े करती है।

गिरिडीह में ज्वेलर से बड़ी लूट: 3.5 लाख नकद और 30 ग्राम सोना लूटा, पुलिस ने शुरू की जांच

गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड में एक बड़ी लूट की घटना घटी है, जहां एक जेवर व्यवसायी से साढ़े तीन लाख रुपये नकद, 30 ग्राम सोना और तीन जोड़ी चांदी की पायल लूट ली गई। यह घटना भरकट्टा ओपी थाना क्षेत्र के भलुआ पुल के पास हुई, जहां अपराधियों ने पिस्टल दिखाकर वारदात को अंजाम दिया।

जानकारी के मुताबिक, केंदुवाडीह निवासी शंकर स्वर्णकार सरिया स्थित अपनी आभूषण दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, जब पहले से घात लगाए तीन अज्ञात अपराधियों ने उनकी बाइक को जबरन रोक लिया। अपराधियों ने पिस्टल तान दी और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी, जिसके बाद उन्होंने शंकर स्वर्णकार से 3.50 लाख रुपये नकद, 30 ग्राम सोना और तीन जोड़ी चांदी की पायल छीन ली।

घटना के बाद, पीड़ित व्यवसायी ने शोर मचाया, जिससे आसपास के लोग जुटे और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और पीड़ित से विस्तृत पूछताछ की। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली है और संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी है।

ओपी प्रभारी अमन कुमार ने बताया कि लूट की घटना की सूचना दर्ज कर ली गई है और जल्द ही इस छिनतई कांड का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस का दावा है कि तकनीकी साक्ष्य और स्थानीय सूचना तंत्र के आधार पर अपराधियों तक जल्द पहुंचा जाएगा। घटना से क्षेत्र में दहशत का माहौल है, और स्थानीय लोगों का कहना है कि देर शाम इस मार्ग पर पुलिस गश्ती की कमी रहती है, जिसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं।

जमशेदपुर में राष्ट्रपति मुर्मू ने किया भूमि पूजन:समाज के सर्वांगीण विकास का केंद्र बनेगा कैंपस, 4 हजार सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में ऐतिहासिक भूमि पूजन

झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बना, जब कदमा क्षेत्र में प्रस्तावित श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के निर्माण के लिए भव्य भूमि पूजन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच भूमि पूजन कर केंद्र की आधारशिला रखी। उनके करकमलों से संपन्न हुए इस शुभारंभ ने पूरे राज्य में उत्साह और गौरव का वातावरण निर्मित कर दिया।

गरिमामय उपस्थिति ने बढ़ाया समारोह का महत्व

इस ऐतिहासिक अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। इन सभी गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी ने इस आयोजन को केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य के सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास में दर्ज होने वाला महत्वपूर्ण अध्याय बना दिया।

समारोह स्थल को पारंपरिक सजावट से सुसज्जित किया गया था। वैदिक पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच राष्ट्रपति ने विधिवत पूजा-अर्चना की और शिलापट्ट का अनावरण किया। पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दिया।

जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी

भूमि पूजन समारोह में स्थानीय और राज्य स्तर के कई जनप्रतिनिधियों की भी अहम भागीदारी रही। सांसद बिद्युत बरन महतो, विधायक सरयू राय और विधायक पूर्णिमा साहू सहित कई गणमान्य व्यक्ति मंच पर उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने इस परियोजना को जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए मील का पत्थर बताया।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि प्रस्तावित केंद्र केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं होगा, बल्कि यह सांस्कृतिक जागरण और सामाजिक समरसता का केंद्र बनेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल से क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और सुदृढ़ होगी।

समाज के सर्वांगीण विकास की दिशा में पहल

प्रस्तावित श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है। आयोजकों के अनुसार, यह परिसर धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी प्रमुख केंद्र बनेगा। यहां बच्चों और युवाओं के लिए शैक्षणिक, सांस्कृतिक और नैतिक विकास से जुड़े विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

केंद्र में भारतीय परंपराओं, संस्कृति और मूल्यों पर आधारित कार्यशालाएं, प्रवचन, संगीत एवं नृत्य कार्यक्रम, योग शिविर और सामाजिक सेवा गतिविधियां आयोजित करने की योजना है। आयोजकों का कहना है कि यह केंद्र समाज में संस्कार, सेवा और समर्पण की भावना को सशक्त करेगा और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगा।

स्थानीय लोगों में दिखा उत्साह

भूमि पूजन के अवसर पर कदमा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों में खासा उत्साह देखा गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक समारोह स्थल पर उपस्थित रहे। लोगों ने इसे अपने शहर के लिए गौरव का क्षण बताया।

स्थानीय नागरिकों का कहना था कि इस केंद्र के निर्माण से क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी और सामुदायिक एकता को बल मिलेगा। कई लोगों ने इसे आध्यात्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया, जिससे भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था

राष्ट्रपति के आगमन को ध्यान में रखते हुए शहर में अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। लगभग 4 हजार पुलिसकर्मियों और 125 दंडाधिकारियों की तैनाती शहर के विभिन्न प्रमुख स्थलों और काफिले मार्ग पर की गई थी। सुरक्षा एजेंसियों ने आयोजन स्थल और आसपास के इलाकों में विशेष सतर्कता बरती।

राष्ट्रपति के कारकेड में शामिल सभी वाहनों की विस्तृत जांच की गई और उन्हें गोलमुरी पुलिस लाइन में सुरक्षित रखा गया। सुरक्षा व्यवस्था के तहत सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन की सहायता भी ली गई। दूरबीन से लैस पुलिसकर्मियों को रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया था।

रैपिड एक्शन पुलिस की टीम को कदमा और बारीडीह स्थित आयोजन स्थल के अलावा मानगो बस स्टैंड के पास भी तैनात किया गया, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। पूरे शहर में सुरक्षा का व्यापक घेरा बना रहा, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सका।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई दिशा

श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे नई दिशा देने का भी प्रयास है। इस परियोजना से क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा की गई इस आधारशिला स्थापना को राज्य के विकास और सांस्कृतिक समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह केंद्र निस्संदेह जमशेदपुर के प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थलों में अपनी विशेष पहचान स्थापित करेगा।

झारखंड विधानसभा में ओबीसी छात्रवृत्ति मामले पर हंगामा, सरकार से जवाब तलब

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन ओबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति का मामला जोरदार तरीके से उठा। विधायकों ने सरकार से छात्रवृत्ति भुगतान में देरी का जवाब मांगा, जिस पर कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने बताया कि केंद्रांश की राशि केंद्र सरकार से प्राप्त नहीं होने के कारण राज्यांश जारी नहीं किया जा सका है। उन्होंने स्वीकार किया कि इसी प्रक्रिया के कारण भुगतान में देरी हुई है और सरकार वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रही है।

इस दौरान, जमीन के अवैध हस्तांतरण, मुआवजा, और उद्योग से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा हुई। विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने कहा कि अवैध हस्तांतरण से आदिवासी समुदाय का अनुपात घट रहा है, जबकि मंत्री दीपक बिरूआ ने कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई होती है और गलत हस्तांतरण पर जमीन वापसी भी की जाती है।

इसके अलावा, विकास, शिक्षा, और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सरकार ने कई मामलों में जांच और कार्रवाई का भरोसा दिलाया, जिसमें कोडरमा में आयरन फैक्ट्री पर प्रदूषण की शिकायत, हुसैनाबाद-तिसरा सड़क के लिए डीपीआर, और भवनाथपुर में सीसीएल क्वार्टरों का बिजली-पानी कनेक्शन शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ED केस में मिली अंतरिम राहत, MP-MLA कोर्ट की कार्रवाई पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ी राहत देते हुए प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज केस में चल रही कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दिया है, जिसमें जस्टिस जॉयमंगल बागची भी शामिल थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा लिए गए संज्ञान को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने रांची की MP-MLA कोर्ट में चल रही कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी और प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस आदेश के बाद, निचली अदालत में आगे की प्रक्रिया स्थगित रहेगी, जिससे मुख्यमंत्री को अस्थायी राहत मिल गई है।

मुख्यमंत्री की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता प्रज्ञा सिंह बघेल ने पक्ष रखा और दलील दी कि रांची सिविल कोर्ट के सीजेएम द्वारा संज्ञान लिये जाने और उसके बाद MP-MLA कोर्ट में कार्यवाही शुरू होने की प्रक्रिया विधि सम्मत नहीं है। बहस के बाद, अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले में हस्तक्षेप करते हुए विशेष अदालत की कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया।

इससे पहले, झारखंड हाईकोर्ट ने MP-MLA कोर्ट के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद, यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद, आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी। सुप्रीम कोर्ट की इस अंतरिम राहत को मुख्यमंत्री के लिए बड़ी कानूनी उपलब्धि माना जा रहा है, हालांकि अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

धनबाद सिविल कोर्ट में बम धमकी: जांच जारी, सुरक्षा कड़ी

झारखंड के धनबाद में सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी भरा एक ईमेल मिलने से पूरे न्यायालय परिसर में हड़कंप मच गया। इस धमकी के बाद पूरे परिसर को खाली करा लिया गया और सभी जजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। पुलिस और प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे परिसर को सील कर दिया और बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड और मेटल डिटेक्टर की टीम को बुलाया गया।

पुलिस ने बताया कि धमकी भरे ईमेल की सूचना मिलते ही प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश समेत सभी जजों को तत्काल न्यायालय भवन से बाहर निकाला गया। बड़ी संख्या में मौजूद वकील, मुवक्किल और कर्मचारी भी सुरक्षित बाहर निकाले गए। पुलिस ने एक मोटरसाइकिल से रिमोट बरामद किया है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

साइबर सेल की टीम ईमेल भेजने वाले की पहचान करने के लिए सक्रिय हो गई है और मेल की तकनीकी जांच कर आईपी एड्रेस और लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह धमकी किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।

इस घटना के बाद पूरे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और तलाशी अभियान जारी है। पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए तैयार है। धनबाद पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह की धमकियों से सावधान रहें और यदि उन्हें कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

जमशेदपुर में राष्ट्रपति के आगमन से पहले मॉक ड्रिल:जगन्नाथ मंदिर की आधारशिला रखेंगी, सुरक्षा को लेकर पुलिस चप्पे-चप्पे पर तैनात

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 26 फरवरी को जमशेदपुर आगमन प्रस्तावित है। अपने दौरे के दौरान वे कदमा मरीन ड्राइव में बनने वाले जगन्नाथ मंदिर की आधारशिला रखेंगी और टाटा मणिपाल मेडिकल कॉलेज का भी दौरा करेंगी। इससे पूर्व बुधवार को पुलिस प्रशासन ने जमशेदपुर हवाई अड्डे से कदमा स्थित कार्यक्रम स्थल और वहां से मेडिकल कॉलेज होते हुए वापस हवाई अड्डे तक पूरे रूट पर मॉक ड्रिल किया गया। राष्ट्रपति के कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। सभी सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां पूरी सुरक्षा व्यवस्था के तहत 6 आईपीएस अधिकारियों की निगरानी में लगभग 1500 जवान तैनात रहेंगे। इसके अतिरिक्त, एनएसजी स्क्वाड, एसटीएफ टीम और पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारी भी पूरे रूट और कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहेंगे। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति करीब चार घंटे तक शहर में रहेंगी। उनके दौरे को लेकर सभी सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शहर में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह कार्यक्रम संपन्न कराने की तैयारी है।

झारखंड बजट 2026-27: 1.58 लाख करोड़ का ऐतिहासिक प्रावधान, केंद्र से 16 हजार करोड़ बकाया का आरोप; सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और ग्रामीण विकास पर हेमंत सरकार का बड़ा दांव

झारखंड विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ रुपए का बजट पेश करते हुए राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विकास, सामाजिक न्याय और आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में सरकार की प्राथमिकताओं को विस्तार से रखा। यह उनका लगातार दूसरा बजट है। बजट पेश करने से पहले उन्होंने पारंपरिक प्रक्रिया के तहत लोकभवन जाकर राज्यपाल संतोष गंगवार को बजट की प्रति सौंपी और उसके बाद सदन में बजट भाषण दिया।

अपने संबोधन में वित्त मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि झारखंड के भविष्य की दिशा तय करने वाला रोडमैप है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध, आदिवासी संस्कृति की धरोहर और खनिज आधारित अर्थव्यवस्था वाले झारखंड के गठन का मूल उद्देश्य क्षेत्रीय असमानता को दूर करना, आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना और संसाधनों का संतुलित व जनहितकारी उपयोग सुनिश्चित करना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि तमाम चुनौतियों और केंद्र से अपेक्षित आर्थिक सहयोग नहीं मिलने के बावजूद हेमंत सरकार ने हिम्मत नहीं हारी है।

केंद्र सरकार पर बकाया राशि रोकने का आरोप

बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार पर गंभीर आर्थिक उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर है, लेकिन केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी के लगभग 5 हजार करोड़ रुपए अब तक प्राप्त नहीं हुए हैं। इसी प्रकार, विभिन्न मदों में मिलने वाले अनुदान की करीब 11 हजार करोड़ रुपए की राशि भी लंबित है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत मिलने वाली धनराशि समय पर नहीं मिलना राज्य के विकास में बाधा बन रहा है।

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि पिछले पांच वर्षों से अनुदान की राशि में लगातार कटौती की जा रही है, जिससे झारखंड जैसे पिछड़े राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने माल एवं सेवा कर (GST) की दरों में बदलाव से राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 4 हजार करोड़ रुपए की क्षति होने की बात कही। साथ ही, मनरेगा के परिवर्तित स्वरूप VB-G RAM G योजना में 60:40 के अनुपात में केंद्र-राज्य साझेदारी के कारण झारखंड पर हर साल लगभग 5,640 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान जताया।

उन्होंने कोल कंपनियों के पास बकाया 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपए का मुद्दा भी उठाया और कहा कि अनेक प्रयासों के बावजूद यह राशि राज्य को नहीं मिल पाई है, जिससे खनिज संपदा से समृद्ध होने के बावजूद राज्य को राजस्व संकट झेलना पड़ रहा है।

सामाजिक सुरक्षा पर सबसे बड़ा आवंटन

इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण पर जोर है। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को सर्वाधिक 22 हजार 995 करोड़ 69 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों और जरूरतमंद वर्गों के लिए संचालित योजनाओं को और मजबूती देना चाहती है।

पोषण, छात्रवृत्ति, पेंशन योजनाएं, मातृत्व लाभ और बाल संरक्षण कार्यक्रमों के विस्तार पर विशेष बल दिया गया है। सरकार का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा का मजबूत ढांचा ही समावेशी विकास की नींव है।

शिक्षा क्षेत्र में बड़ा निवेश

मानव संसाधन विकास को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय निवेश किया है। प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए 16 हजार 251 करोड़ 43 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए 2 हजार 564 करोड़ 45 लाख रुपए निर्धारित किए गए हैं।

सरकार का उद्देश्य विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, शिक्षकों की नियुक्ति, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा और तकनीकी संस्थानों को सुदृढ़ करना है। नई विश्वविद्यालय स्थापना, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का विस्तार और युवाओं को रोजगारोन्मुख शिक्षा देने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूती

ग्रामीण विकास विभाग को 12 हजार 346 करोड़ 90 लाख रुपए का आवंटन कर सरकार ने गांवों में आधारभूत संरचना और रोजगार सृजन को गति देने का संकेत दिया है। ग्रामीण सड़कों, आवास योजनाओं और आजीविका कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान रहेगा।

पथ निर्माण विभाग को 6 हजार 601 करोड़ 28 लाख रुपए और ग्रामीण कार्य विभाग को 5 हजार 81 करोड़ 74 लाख रुपए दिए गए हैं। इससे सड़क संपर्क बेहतर करने और दूरदराज इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में कार्य होगा।

ऊर्जा, गृह और स्वास्थ्य को प्राथमिकता

ऊर्जा विभाग को 11 हजार 197 करोड़ 89 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना है। ग्रामीण विद्युतीकरण और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार पर जोर रहेगा।

गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग को 11 हजार 38 करोड़ 53 लाख रुपए दिए गए हैं। कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने, पुलिस आधुनिकीकरण और आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने की दिशा में यह प्रावधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के लिए 7 हजार 990 करोड़ 30 लाख रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। इससे सरकारी अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने, मेडिकल कॉलेजों के विस्तार और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

कृषि, पेयजल और शहरी विकास

कृषि विभाग को 4 हजार 884 करोड़ 20 लाख रुपए का प्रावधान कर किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की योजना है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को 5 हजार 194 करोड़ 53 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

नगर विकास एवं आवास विभाग को 3 हजार 919 करोड़ 40 लाख रुपए और जल संसाधन विभाग को 2 हजार 714 करोड़ 71 लाख रुपए दिए गए हैं। शहरी आधारभूत संरचना, आवास योजनाओं और सिंचाई परियोजनाओं को गति मिलेगी।

अन्य महत्वपूर्ण विभागों को भी प्रावधान

खाद्य आपूर्ति, पंचायती राज, वन एवं पर्यावरण, श्रम, उद्योग, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, भवन निर्माण और नागर विमानन जैसे विभागों को भी आवश्यकता के अनुसार बजट आवंटित किया गया है। इससे बहुआयामी विकास का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।

समावेशी और सतत विकास का दावा

वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि यह बजट सामाजिक न्याय, आर्थिक सुदृढ़ता और सतत विकास के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि चुनौतियां अनेक हैं, लेकिन सरकार जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्ध है। संसाधनों की कमी के बावजूद योजनाओं को गति देने का संकल्प दोहराया गया।

कुल मिलाकर 1.58 लाख करोड़ रुपए का यह बजट सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, ग्रामीण विकास, ऊर्जा और आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर केंद्रित है। केंद्र से लंबित राशि का मुद्दा उठाकर सरकार ने आर्थिक अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का संकेत दिया है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि बजट प्रावधानों का जमीनी क्रियान्वयन किस गति से होता है और राज्य की विकास यात्रा को कितना बल मिलता है।

रांची-दिल्ली एयर एंबुलेंस हादसा: 8 लाख जुटाकर बुक की उड़ान, 23 मिनट बाद जंगल में क्रैश; बर्न मरीज समेत 7 की दर्दनाक मौत

झारखंड के चतरा जिले में सोमवार शाम एक दिल दहला देने वाली त्रासदी सामने आई, जब रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एंबुलेंस सिमरिया थाना क्षेत्र के कसियातु जंगल में क्रैश हो गई। इस हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में गंभीर रूप से झुलसे मरीज, उनकी पत्नी और भांजा, दो पायलट, एक डॉक्टर और एक पैरामेडिक शामिल हैं। यह हादसा न सिर्फ सात जिंदगियों का अंत है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था, एयर मेडिकल सेवाओं और आपातकालीन प्रबंधन पर भी कई सवाल खड़े कर गया है।

छह दिन पहले झुलसे थे संजय कुमार

मृतक संजय कुमार (41) पलामू जिले के चंदवा निवासी व्यवसायी थे। छह दिन पहले उनके लाइन होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। आग बुझाने के दौरान उनका पैर फिसल गया और वे लपटों की चपेट में आ गए। वे 65 प्रतिशत तक झुलस गए थे। पहले उन्हें स्थानीय स्तर पर इलाज दिया गया, फिर रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अस्पताल के सीईओ अनंत सिन्हा के अनुसार, संजय को 16 फरवरी को गंभीर हालत में भर्ती किया गया था। इलाज जारी था, लेकिन उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी। बेहतर इलाज के लिए परिवार ने उन्हें दिल्ली ले जाने का निर्णय लिया। सड़क मार्ग से ले जाना जोखिम भरा था, इसलिए एयर एंबुलेंस का विकल्प चुना गया।

साढ़े सात लाख जुटाने की जद्दोजहद

संजय के बड़े भाई विजय कुमार ने बताया कि एयर एंबुलेंस के लिए 7.5 लाख रुपए का इंतजाम करना पड़ा। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, फिर भी रिश्तेदारों और परिचितों से मदद लेकर रकम जुटाई गई। शुरुआत में 2.50 लाख रुपए कम पड़ गए तो विमान कंपनी ने उड़ान भरने से मना कर दिया। आरोप है कि पूरी रकम मिलने के बाद ही उड़ान की अनुमति दी गई।

परिजन चंदवा लौटे, किसी परिचित से पैसे उधार लिए और फिर रांची पहुंचकर शेष राशि दी। इसके बाद ही विमान ने उड़ान भरी। यह परिवार के लिए उम्मीद की उड़ान थी, लेकिन किसे पता था कि यह अंतिम सफर बन जाएगा।

उड़ान के 23 मिनट बाद संपर्क टूटा

एयर एंबुलेंस ने शाम 7:11 बजे रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी। 7:34 बजे कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से उसका संपर्क टूट गया। रात 8:05 बजे रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर सक्रिय किया गया। कुछ ही देर बाद जंगल में विमान क्रैश होने की सूचना मिली।

ग्रामीणों के अनुसार, करीब 7:45 बजे जंगल की ओर से जोरदार धमाके की आवाज आई। तेज हवा और बारिश के कारण लोग तुरंत मौके पर नहीं पहुंच सके। बाद में मलबा कसियातु जंगल में मिला।

खराब मौसम की आशंका

सोमवार शाम झारखंड में अचानक मौसम बिगड़ गया था। तेज हवाएं और भारी बारिश शुरू हो गई थी। शुरुआती रिपोर्ट में खराब मौसम को हादसे का संभावित कारण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि विमान अपने निर्धारित मार्ग से दाईं ओर डायवर्ट हो गया था और रास्ता भटक गया।

हालांकि, तकनीकी खराबी, पायलटिंग एरर या नेविगेशन सिस्टम की विफलता जैसे अन्य कारणों की भी जांच की जा रही है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की टीम द्वारा विस्तृत जांच की संभावना जताई गई है।

कौन-कौन थे सवार?

हादसे में जान गंवाने वालों में शामिल हैं:

  • कैप्टन विवेक
  • कैप्टन सबराजदीप
  • मरीज संजय कुमार
  • उनकी पत्नी अर्चना देवी
  • भांजा ध्रुव कुमार
  • डॉ. विकास कुमार गुप्ता
  • पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा

इन सातों की मौत ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। संजय के दो बेटे शुभम (17) और शिवम (13) अब अनाथ जैसे हालात में हैं। परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ मौत ने रिश्तेदारों को तोड़ कर रख दिया है।

स्वास्थ्य मंत्री का बयान

हादसे के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी चतरा पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा, “अगर झारखंड में बेहतर अस्पताल होते तो हमें मरीज को बाहर नहीं भेजना पड़ता।” उन्होंने राज्य में एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल बनाने की इच्छा जताई और कहा कि स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना समय की जरूरत है।

उन्होंने हादसे की उच्च स्तरीय जांच कराने और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।

मुआवजे की मांग

चतरा विधायक जर्नादन पासवान ने इस घटना को मर्माहत करने वाली त्रासदी बताया और सरकार से मुआवजे की मांग की। वहीं सांसद कालीचरण सिंह ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा देने की अपील की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरियों की भी कहानी है। यदि राज्य में उन्नत बर्न यूनिट और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं होतीं, तो शायद मरीज को बाहर भेजने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

कई सवाल बाकी

यह हादसा कई गंभीर प्रश्न छोड़ गया है:

  • क्या खराब मौसम के बावजूद उड़ान की अनुमति देना सही था?
  • क्या एयर एंबुलेंस कंपनी ने सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया?
  • क्या आपातकालीन मेडिकल ट्रांसपोर्ट के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश मौजूद हैं?
  • क्या आर्थिक दबाव में उड़ान भरना जोखिम भरा निर्णय साबित हुआ?

जांच के बाद ही इन सवालों के जवाब मिल पाएंगे। फिलहाल सात परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल चुकी है।

राज्यसभा चुनाव 2026: बिहार की 5 समेत 37 सीटों पर महासंग्राम, 16 मार्च को मतदान—सत्ता और विपक्ष के लिए निर्णायक परीक्षा

Rajya Sabha Elections 2026: देश की संसदीय राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Election Commission of India ने राज्यसभा की 37 रिक्त हो रही सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस सूची में बिहार की 5 अहम सीटें शामिल हैं, जिन पर सियासी दलों की निगाहें टिकी हुई हैं। इन सीटों पर होने वाला चुनाव सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संसद के ऊपरी सदन में आने वाले वर्षों के राजनीतिक समीकरण तय करने वाला निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

अप्रैल 2026 में कई वरिष्ठ सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में इन सीटों पर नए प्रतिनिधियों का चयन न केवल राज्यों की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी असर डालेगा। खासकर बिहार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह चुनाव गठबंधन राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

चुनाव कार्यक्रम: 26 फरवरी से 20 मार्च तक पूरी प्रक्रिया

चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 26 फरवरी 2026 से शुरू होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च तय की गई है। 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 मार्च तक प्रत्याशी अपना नाम वापस ले सकेंगे।

16 मार्च 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। मतदान समाप्त होते ही शाम 5 बजे से मतगणना शुरू कर दी जाएगी। पूरी चुनावी प्रक्रिया 20 मार्च तक संपन्न कर ली जाएगी और इसके बाद नवनिर्वाचित सदस्यों की सूची आधिकारिक रूप से जारी की जाएगी।

यह समयसीमा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अप्रैल की शुरुआत में कई सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि नई सूची समय रहते जारी हो जाए ताकि संसद के ऊपरी सदन की कार्यवाही प्रभावित न हो।

किन-किन राज्यों में होगा मतदान?

इस बार कुल 37 सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें प्रमुख राज्यों की सीटों का विवरण इस प्रकार है:

  • महाराष्ट्र – 7 सीटें
  • तमिलनाडु – 6 सीटें
  • पश्चिम बंगाल – 5 सीटें
  • बिहार – 5 सीटें
  • ओडिशा – 3 सीटें
  • असम – 3 सीटें
  • छत्तीसगढ़ – 2 सीटें
  • हरियाणा – 1 सीट
  • हिमाचल प्रदेश – 1 सीट
  • तेलंगाना – 4 सीटें

महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में राजनीतिक परिस्थितियों में हाल के वर्षों में हुए बदलाव के कारण यह चुनाव और भी रोचक हो गया है।

बिहार की 5 सीटें क्यों हैं सबसे अहम?

बिहार की जिन 5 सीटों पर चुनाव होने हैं, उन पर वर्तमान में वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधित्व है। इन नेताओं का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। इनमें प्रमुख नाम हैं:

  • Harivansh Narayan Singh
  • Upendra Kushwaha
  • Ram Nath Thakur
  • Prem Chand Gupta
  • Amarendra Dhari Singh

इनमें हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उपसभापति भी हैं। उनका दोबारा चयन होता है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी होंगी। वहीं उपेंद्र कुशवाहा और प्रेम चंद गुप्ता जैसे नेताओं की भूमिका बिहार की क्षेत्रीय राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण रही है।

इन सीटों पर चुनाव का असर सीधे-सीधे बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी महागठबंधन के बीच शक्ति संतुलन पर पड़ेगा।

महाराष्ट्र में भी दिग्गजों की परीक्षा

महाराष्ट्र की 7 सीटों पर भी चुनाव होने जा रहे हैं। यहां से राष्ट्रीय स्तर के दो बड़े नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है:

  • Sharad Pawar
  • Ramdas Athawale

शरद पवार भारतीय राजनीति के वरिष्ठतम नेताओं में गिने जाते हैं। यदि वे पुनः मैदान में उतरते हैं तो यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है। वहीं रामदास अठावले केंद्र सरकार में मंत्री हैं, ऐसे में उनकी सीट भी एनडीए के लिए अहम है।

राज्यसभा चुनाव कैसे होते हैं?

राज्यसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा नहीं चुने जाते। इनका चुनाव संबंधित राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक करते हैं। यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत सिंगल ट्रांसफरेबल वोट (STV) प्रणाली से होता है।

मतलब साफ है—जिस दल या गठबंधन के पास विधानसभा में जितनी अधिक संख्या होगी, उसके उम्मीदवार की जीत की संभावना उतनी ही अधिक होगी। ऐसे में जहां विधानसभा में संख्या बल का अंतर कम है, वहां जोड़-तोड़, रणनीति और क्रॉस वोटिंग की संभावना बढ़ जाती है।

बिहार में संभावित सियासी गणित

बिहार की राजनीति लंबे समय से गठबंधन आधारित रही है। यहां एनडीए और महागठबंधन के बीच सत्ता का संघर्ष चलता रहा है। राज्यसभा चुनाव में प्रत्येक सीट के लिए आवश्यक वोटों का गणित बेहद अहम होता है।

यदि किसी दल के पास पूर्ण बहुमत नहीं है तो उसे सहयोगी दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना पड़ता है। ऐसे में यह चुनाव न केवल राजनीतिक ताकत का परीक्षण है, बल्कि गठबंधन की मजबूती का भी पैमाना बनेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन 5 सीटों में से कम से कम एक या दो सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।

संसद में क्या बदल सकता है समीकरण?

राज्यसभा में बहुमत का गणित अक्सर लोकसभा से अलग होता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि केंद्र सरकार के पास लोकसभा में स्पष्ट बहुमत होता है, लेकिन राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण उसे महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में क्षेत्रीय दलों का समर्थन लेना पड़ता है।

इन 37 सीटों के चुनाव के बाद राज्यसभा की संरचना में बदलाव संभव है। यदि किसी एक गठबंधन को अपेक्षा से अधिक सीटें मिलती हैं तो वह ऊपरी सदन में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

क्या पुराने चेहरों को मिलेगा दोबारा मौका?

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या राजनीतिक दल अपने मौजूदा सांसदों को दोबारा अवसर देंगे या नए चेहरों को आगे लाएंगे?

बिहार में सामाजिक और जातीय समीकरणों का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में दल यह देखेंगे कि किस समुदाय को प्रतिनिधित्व देना उनके लिए लाभकारी रहेगा। इसी तरह महाराष्ट्र और तमिलनाडु में भी क्षेत्रीय संतुलन और गठबंधन समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत की भूमिका

पश्चिम बंगाल की 5 सीटों और तमिलनाडु की 6 सीटों पर भी सबकी नजर है। दक्षिण भारत के राज्यों में क्षेत्रीय दलों की मजबूत उपस्थिति के कारण राष्ट्रीय दलों को रणनीतिक गठजोड़ करना पड़ता है।

इन राज्यों के परिणाम संसद में विपक्ष की ताकत को भी प्रभावित कर सकते हैं।

क्यों कहा जा रहा है इसे ‘मिनी जनादेश’?

राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष जनमत से न होता हो, लेकिन यह राज्यों की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का प्रतिबिंब जरूर होता है। जिन राज्यों में हाल में सरकार बदली है या गठबंधन टूटे हैं, वहां यह चुनाव सत्ता की स्थिरता का संकेत देगा।

विशेषज्ञ इसे ‘मिनी जनादेश’ इसलिए भी कह रहे हैं क्योंकि इससे यह संकेत मिलेगा कि आने वाले लोकसभा या विधानसभा चुनावों में राजनीतिक रुझान किस दिशा में जा सकते हैं।

शराब के नशे में निलंबित सीओ ने थार चलाई, लातेहार में शिव बारातियों को टक्कर

लातेहार जिले के मनिका थाना क्षेत्र के पचफेड़ी के पास महाशिवरात्रि के अवसर पर निकली शिव बारात के दौरान रविवार देर शाम अफरा-तफरी मच गई। एक अनियंत्रित थार वाहन ने कई वाहनों को टक्कर मार दी।

थार (जेएच-01EY-0049) मेदिनीनगर से रांची की ओर जा रही थी। वाहन चलाने वाले गढ़वा जिले के निलंबित अंचल अधिकारी प्रमोद कुमार नशे में थे। उनके साथ एक महिला भी सवार थी।

शिव बारात की झांकी देख रहे श्रद्धालुओं के बीच वाहन ने एक बाइक और एक चारपहिया वाहन को जोरदार टक्कर मार दी।幸हत से कोई गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन मौके पर हड़कंप मच गया।

घटना के बाद लोगों ने देखा कि थार पर ‘डिप्टी कलेक्टर’ का बोर्ड और अंदर ‘प्रशासन’ लिखा हुआ था। इससे स्थानीय लोगों में गुस्सा फैल गया और बड़ी संख्या में भीड़ जमा हो गई।

स्थिति बिगड़ते देख मनिका थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और प्रमोद कुमार को भीड़ से सुरक्षित निकालकर वाहन समेत हिरासत में ले लिया। पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

प्रशासनिक विवादों में घिरे प्रमोद कुमार

प्रमोद कुमार गढ़वा जिले के मांझिआव अंचल में कार्यरत हैं। राज्य सरकार ने 4 नवंबर, 2025 को उन्हें कार्यालय में शराब सेवन, पैसा लेन-देन और लोगों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में निलंबित किया था।

साथ ही, उनकी पत्नी श्यामा रानी ने अंचलाधिकारी के सरकारी आवास में एक महिला के साथ रंगे हाथ पकड़ने का मामला भी चर्चा में रहा।

समाचार लिखे जाने तक प्रमोद कुमार मनिका थाना में पुलिस हिरासत में थे और उन्होंने दैनिक भास्कर की पूछताछ का जवाब देने से इनकार कर दिया।

JPSC CCE 2026: झारखंड सिविल सेवा परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी, अब 20 फरवरी तक करें अप्लाई

झारखंड में सिविल सेवा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। Jharkhand Public Service Commission (जेपीएससी) ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (सीधी भर्ती) प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब उम्मीदवार 20 फरवरी 2026 तक आवेदन कर सकते हैं, जबकि परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 21 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है।

पहले आवेदन करने की अंतिम तिथि 14 फरवरी तय की गई थी, लेकिन अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोग ने समयसीमा में विस्तार किया है। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से राज्य की विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं में कुल 103 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।

103 पदों पर होगी भर्ती

इस परीक्षा के जरिए झारखंड सरकार की विभिन्न प्रतिष्ठित सेवाओं में अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। इनमें डिप्टी कलेक्टर, पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी), वित्त एवं लेखा सेवा सहित अन्य प्रशासनिक पद शामिल हैं। राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इन पदों पर चयन के लिए हजारों अभ्यर्थी हर वर्ष आवेदन करते हैं।

महत्वपूर्ण तिथियां (Important Dates)

  • आवेदन की नई अंतिम तिथि: 20 फरवरी 2026
  • परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि: 21 फरवरी 2026
  • कुल पदों की संख्या: 103

कैसे करें आवेदन?

आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) प्रणाली के तहत संपन्न होगी। आवेदन करने के लिए अभ्यर्थियों को निम्नलिखित चरणों का पालन करना होगा:

  1. सबसे पहले जेपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
  2. Civil Services Examination 2026 से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना डाउनलोड करें और पात्रता, आयु सीमा व पदों की जानकारी ध्यानपूर्वक पढ़ें।
  3. नया रजिस्ट्रेशन करें (यदि पहले से OTR नहीं किया है)।
  4. लॉगिन कर आवेदन फॉर्म सावधानीपूर्वक भरें।
  5. आवश्यक दस्तावेज, हालिया पासपोर्ट साइज फोटो, हस्ताक्षर और शैक्षणिक प्रमाणपत्र अपलोड करें।
  6. निर्धारित आवेदन शुल्क ऑनलाइन माध्यम से जमा करें।
  7. फॉर्म सबमिट करने के बाद उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन फॉर्म भरते समय किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचें, क्योंकि गलत जानकारी देने पर आवेदन निरस्त किया जा सकता है।

वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) अनिवार्य

आवेदन प्रक्रिया वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) प्रणाली के माध्यम से पूरी की जाएगी। इसका उद्देश्य अभ्यर्थियों की मूल जानकारी को एक बार दर्ज कर भविष्य की परीक्षाओं के लिए संरक्षित रखना है। इससे बार-बार व्यक्तिगत विवरण भरने की आवश्यकता नहीं पड़ती और आवेदन प्रक्रिया सरल हो जाती है।

जेपीएससी ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे आवेदन करने से पहले विस्तृत विज्ञापन और दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ लें। किसी भी प्रकार की तकनीकी या अन्य जानकारी के लिए आयोग द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर 9431301636 और 9431301419 पर कार्य दिवसों में संपर्क किया जा सकता है।


चयन प्रक्रिया: तीन चरणों में होगी परीक्षा

झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा तीन चरणों में आयोजित की जाएगी:

  • प्रारंभिक परीक्षा (Prelims)
  • मुख्य परीक्षा (Mains)
  • साक्षात्कार (Interview)

1. प्रारंभिक परीक्षा

यह वस्तुनिष्ठ (Objective) प्रकार की परीक्षा होती है, जिसमें सामान्य अध्ययन से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रारंभिक परीक्षा केवल क्वालिफाइंग प्रकृति की होती है और इसके आधार पर मुख्य परीक्षा के लिए उम्मीदवारों का चयन किया जाता है।

2. मुख्य परीक्षा

मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक (Descriptive) होती है, जिसमें उम्मीदवार की विश्लेषण क्षमता, विषय की गहराई और अभिव्यक्ति कौशल का मूल्यांकन किया जाता है। इसमें विभिन्न विषयों पर विस्तृत उत्तर लिखने होते हैं।

3. साक्षात्कार

मुख्य परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है। इस चरण में उम्मीदवार के व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और प्रशासनिक समझ का आकलन किया जाता है।

अंतिम चयन मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की गई मेरिट सूची के अनुसार किया जाता है।

Railway Protection Force की बड़ी कार्रवाई: Indian flapshell turtle के 16 जिंदा कछुए बरामद, वन्यजीव तस्करी पर कसा शिकंजा

धनबाद | पूर्व मध्य रेल के धनबाद मंडल में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक अहम कार्रवाई करते हुए 16 जीवित कछुओं को बरामद किया है। यह कार्रवाई आरपीएफ द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन WILEP के तहत की गई। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस सटीक कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि रेल मार्गों के जरिए हो रही अवैध वन्यजीव तस्करी पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार नजर बनाए हुए हैं।

गुप्त सूचना के आधार पर सक्रिय हुई टीम

आरपीएफ को विश्वसनीय स्रोतों से सूचना मिली थी कि ट्रेन संख्या 13010, Yog Nagari Rishikesh–Howrah Doon Express के माध्यम से कछुओं की तस्करी की जा रही है। सूचना मिलते ही आरपीएफ पोस्ट और अपराध अनुसंधान शाखा (सीआईबी) की संयुक्त टीम को सतर्क कर दिया गया।

जैसे ही ट्रेन धनबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या दो पर पहुंची, टीम ने बिना समय गंवाए जांच अभियान शुरू कर दिया। अधिकारियों ने विशेष रूप से सामान्य श्रेणी (जनरल कोच) के डिब्बों की गहन तलाशी ली, क्योंकि मिली सूचना इन्हीं कोचों से संबंधित थी।

लावारिस नीले थैले में मिला जूट का बोरा

तलाशी के दौरान इंजन की ओर से दूसरे जनरल कोच में एक सीट के नीचे नीले रंग का कपड़े का लावारिस थैला संदिग्ध अवस्था में मिला। मौके पर मौजूद यात्रियों से पूछताछ की गई, लेकिन किसी ने भी उस थैले पर अपना दावा नहीं किया।

संदेह गहराने पर ट्रेन के प्रस्थान से पहले थैले को प्लेटफॉर्म पर उतार लिया गया। गवाहों की उपस्थिति में जब थैले को खोला गया, तो उसके भीतर जूट के बोरे में रखे 16 जीवित कछुए बरामद हुए। सभी कछुए इंडियन फ्लैपशेल प्रजाति के थे, जिन्हें बेहद संकुचित और असुविधाजनक स्थिति में रखा गया था। इस तरह की पैकिंग से उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता था।

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति

आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार बरामद कछुए Wildlife Protection Act, 1972 के तहत संरक्षित प्रजाति में आते हैं। इस अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित जीवों की तस्करी, अवैध परिवहन या व्यापार गंभीर दंडनीय अपराध है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इंडियन फ्लैपशेल कछुए अक्सर अवैध व्यापार का शिकार होते हैं। इन्हें मांस, पालतू व्यापार या पारंपरिक मान्यताओं के कारण तस्करी के जरिए विभिन्न राज्यों और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता है।

वन विभाग को सौंपे जाएंगे कछुए

बरामदगी के तुरंत बाद आरपीएफ ने जब्ती सूची तैयार की और सभी कछुओं को अपने कब्जे में लेकर पोस्ट लाया। प्राथमिक जांच और आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई पूरी करने के बाद इन्हें वन विभाग को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

वन विभाग द्वारा कछुओं की चिकित्सकीय जांच कराई जाएगी और उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक आवास में पुनर्वासित करने की व्यवस्था की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जीवित अवस्था में बरामदगी होना एक सकारात्मक पहलू है, क्योंकि समय रहते कार्रवाई से इनकी जान बचाई जा सकी।

ऑपरेशन WILEP के तहत लगातार कार्रवाई

ऑपरेशन WILEP के तहत रेलवे नेटवर्क के जरिए हो रही वन्यजीव तस्करी पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आरपीएफ और खुफिया इकाइयों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है।

इस कार्रवाई में आरपीएफ के चितरंजन सिंह, शशिकांत तिवारी, बबुलेश कुमार, प्रमोद कुमार, संजीव कुमार और अमित कुमार वर्मा की अहम भूमिका रही। टीम की तत्परता और सूझबूझ के कारण यह बड़ी बरामदगी संभव हो सकी।

तस्करों की पहचान के लिए जांच तेज

हालांकि थैला लावारिस मिला, लेकिन आरपीएफ ने इस मामले में तस्करों की पहचान के लिए जांच तेज कर दी है। सीसीटीवी फुटेज, टिकट विवरण और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदिग्ध व्यक्तियों की तलाश की जा रही है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव तस्करी के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।

देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पंचशूलों की विशेष पूजा, शिखरों पर पुनर्स्थापना के साथ बाबा-पार्वती का पारंपरिक गठबंधन सम्पन्न

झारखंड के देवघर स्थित विश्वप्रसिद्ध Baidyanath Temple में महाशिवरात्रि के पावन पर्व से पूर्व आस्था, परंपरा और वैदिक अनुष्ठानों का भव्य दृश्य देखने को मिला। रविवार को महाशिवरात्रि मनाई जानी है, लेकिन उससे एक दिन पहले शनिवार को मंदिर प्रांगण में वह विशेष धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुआ, जिसका इंतजार भक्त पूरे वर्ष करते हैं। बाबा बैद्यनाथ और मैया पार्वती मंदिरों के शिखरों पर स्थापित पंचशूलों को परंपरानुसार शुद्धिकरण, पूजन और पुनर्स्थापना की प्रक्रिया से गुजारा गया। इसके साथ ही बाबा और माता पार्वती के बीच पारंपरिक ‘गठबंधन’ की रस्म अदा की गई, जिसे इस धाम की अत्यंत प्राचीन और विशिष्ट परंपरा माना जाता है।

यह अनुष्ठान केवल धार्मिक क्रिया भर नहीं, बल्कि शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीकात्मक उत्सव है। देवघर धाम में महाशिवरात्रि से पूर्व पंचशूल उतारने, उनका पूजन करने और पुनः स्थापित करने की परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित रहे और पंचशूलों के दर्शन एवं स्पर्श कर स्वयं को धन्य महसूस किया।

पंचशूलों का महत्व और धार्मिक मान्यता

पंचशूल का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। यह त्रिशूल की ही एक विशेष संरचना मानी जाती है, जिसमें पाँच शूल होते हैं। शिव मंदिरों के शिखरों पर स्थापित पंचशूल दैवीय ऊर्जा, संरक्षण और आध्यात्मिक शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में यह परंपरा विशेष महत्व रखती है।

मान्यता है कि पंचशूल मंदिर और आसपास के क्षेत्र की नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करते हैं और भक्तों के जीवन में शुभता लाते हैं। इसी कारण महाशिवरात्रि से पूर्व इन पंचशूलों का विधिवत शुद्धिकरण और पुनर्पूजन अनिवार्य माना जाता है।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शुद्धिकरण और पूजन

शनिवार को मंदिर के प्रधान पुजारी सह सरदार पंडा गुलाबनंद ओझा के नेतृत्व में षोडषोपचार विधि से पंचशूलों का पूजन सम्पन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, धूप-दीप, पुष्प, चंदन और पवित्र जल से इनका शुद्धिकरण किया गया।

यह पूजा केवल मुख्य मंदिर तक सीमित नहीं रही। बाबा बैद्यनाथ और मैया पार्वती मंदिर के अलावा मंदिर परिसर के अन्य 22 मंदिरों के शिखरों से उतारे गए पंचशूलों का भी सामूहिक पूजन किया गया। यह दृश्य अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण था।

शिखरों से उतारने की प्राचीन परंपरा

महाशिवरात्रि से एक या दो दिन पूर्व मंदिर परिसर के सभी मंदिरों के शिखरों से पंचशूलों को उतारने की परंपरा है। शुक्रवार को बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती मंदिर के शिखरों से पंचशूल उतारे गए थे, जबकि अन्य मंदिरों के पंचशूल पहले ही नीचे लाए जा चुके थे।

भंडारी परिवार की देखरेख में भंडारियों की टीम ने दोपहर के समय वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सावधानीपूर्वक पंचशूलों को शिखरों से उतारा। यह प्रक्रिया अत्यंत श्रद्धा और अनुशासन के साथ संपन्न की जाती है।

पंचशूलों का पारंपरिक मिलन

पंचशूलों के उतारने के बाद बाबा और पार्वती मंदिर के पंचशूलों का पारंपरिक मिलन कराया गया। यह मिलन शिव और शक्ति के दिव्य संगम का प्रतीक माना जाता है।

इस अनुष्ठान को देखने के लिए मंदिर परिसर में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालु इस पावन क्षण के साक्षी बनने के लिए घंटों पहले से कतार में खड़े थे। जब पंचशूलों का मिलन हुआ, तो “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

पुनर्स्थापना की वैदिक प्रक्रिया

विशेष पूजा के बाद सभी 22 मंदिरों के शिखरों पर पंचशूलों को पुनर्स्थापित किया गया। यह प्रक्रिया भी वैदिक विधि-विधान के अनुसार सम्पन्न हुई।

पंचशूलों को पुनः स्थापित करते समय मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और आशीर्वचन का क्रम चला। मान्यता है कि पुनर्स्थापना के साथ मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और अधिक सशक्त हो जाती है।

बाबा और मैया पार्वती का ‘गठबंधन’

पंचशूल पुनर्स्थापना के उपरांत बाबा बैद्यनाथ और मैया पार्वती मंदिर के बीच पारंपरिक ‘गठबंधन’ की रस्म अदा की गई। यह देवघर धाम की अत्यंत विशिष्ट और प्राचीन परंपरा है।

गठबंधन शिव और शक्ति के अविभाज्य संबंध का प्रतीक है। भक्त इसे अत्यंत शुभ मानते हैं और मान्यता है कि इस अवसर पर दर्शन करने से दांपत्य सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़

पंचशूलों के दर्शन और स्पर्श के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में उमड़ पड़े। भक्तों ने मस्तक सटाकर पंचशूलों को नमन किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवघर पहुंचे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। कतारबद्ध दर्शन व्यवस्था लागू की गई और पुलिस बल तैनात रहा।

महाशिवरात्रि की चार प्रहर पूजा

मंदिर प्रशासन ने बताया कि महाशिवरात्रि की चार प्रहर की पूजा रात्रि में सम्पन्न होगी। तड़के सुबह 3:15 बजे मंदिर का पट खुलेगा। विशेष पूजा-अर्चना के बाद लगभग 4:25 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए पट खोल दिए जाएंगे।

अनुमान है कि दो लाख से अधिक श्रद्धालु इस अवसर पर जलार्पण करेंगे। सुबह 4 बजे से 6 बजे तक जल चढ़ाने का विशेष क्रम चलेगा। इसके बाद अगले दिन सुबह 8 बजे पुनः पट खोलकर नियमित पूजा प्रारंभ होगी।

आस्था का महासागर

महाशिवरात्रि के अवसर पर देवघर धाम आस्था के महासागर में बदल जाता है। देश के विभिन्न राज्यों से शिवभक्त यहां पहुंचते हैं। “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयकारों से पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है।

पंचशूलों की पूजा और गठबंधन की रस्म ने इस आध्यात्मिक उत्सव की शुरुआत को और भी भव्य बना दिया है। श्रद्धालु इसे शुभ संकेत मानते हैं कि बाबा बैद्यनाथ और मैया पार्वती की कृपा पूरे वर्ष बनी रहेगी।

प्रशासनिक तैयारी

भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने व्यापक तैयारी की है। सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएं और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है।

जलार्पण के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गई हैं। महिला, वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

सदियों पुरानी परंपरा का जीवंत स्वरूप

देवघर में महाशिवरात्रि से पूर्व पंचशूल उतारने और पुनर्स्थापित करने की परंपरा सदियों से जीवंत है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

हर वर्ष यह अनुष्ठान नई ऊर्जा और आस्था के साथ सम्पन्न होता है। पंचशूलों का स्पर्श कर भक्त अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

हजारीबाग में हाथियों का तांडव जारी: 24 घंटे में 8 की मौत, गांवों में दहशत

Hazaribagh : हजारीबाग जिले के चुरचू प्रखंड में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। गोंदवार गांव में छह लोगों की जान लेने के 24 घंटे के भीतर ही हाथियों ने दो और लोगों को मौत के घाट उतार दिया। लगातार हो रही घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

भुरकुंडा टोला में महिला को कुचला

गोंदवार गांव से सटे बहेरा पंचायत के कजरी गांव के भुरकुंडा टोला में शुक्रवार रात पांच हाथियों के झुंड ने राजेश मुर्मु के घर पर हमला कर दिया। घर में सो रही उनकी पत्नी फुलमुनी देवी को हाथियों ने कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

हमले के दौरान राजेश मुर्मु किसी तरह दीवार फांदकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। ग्रामीणों ने शोर मचाकर हाथियों को भगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक महिला की जान जा चुकी थी।

गुरुवार को 6 लोगों की गई थी जान

इससे एक दिन पहले, गुरुवार देर रात आंगो थाना क्षेत्र और चुरचू प्रखंड के गोंदवार गांव में हाथियों ने तांडव मचाया था। पांच हाथियों के झुंड ने घरों के गेट उखाड़ दिए और अंदर घुसकर सो रहे लोगों को कुचल दिया।

मृतकों में सुमन कुमारी (26), धनेश्वर राम (52), सूरज राम (50), सविता देवी (25), अनुराग राम (1 वर्ष) और संजना कुमारी (3 माह) शामिल हैं। इनमें सूरज राम, सविता देवी और दोनों मासूम बच्चे एक ही परिवार के थे। घटना के वक्त सभी लोग अपने घरों में सो रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शी ने सुनाई आपबीती

हमले में बचे रोहित राम ने बताया कि रात में पहले हाथियों ने घर का दरवाजा तोड़ा। बाहर निकलने पर सामने हाथी दिखा। उन्होंने घर में रखी कढ़ाही से हाथी को मारकर खुद को बचाया और खिड़की से कूदकर बाहर भागे। इसके बाद शोर मचाकर अन्य लोगों को जगाया।

वन विभाग पर लापरवाही का आरोप

घटनाओं की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में हाथियों की लगातार मौजूदगी की जानकारी होने के बावजूद विभाग ने ठोस कदम नहीं उठाए। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई होती तो इतने लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

पंचायत भवन में शरण ले रहे ग्रामीण

लगातार हमलों से भयभीत ग्रामीणों ने रात पंचायत भवन में गुजारी। गांव में लोग घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं। महिलाओं और बच्चों में विशेष रूप से भय का माहौल है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से हाथियों को सुरक्षित जंगल क्षेत्र में खदेड़ने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है।

लगातार हो रही इन घटनाओं ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष के गंभीर स्वरूप को उजागर कर दिया है।

रामगढ़ की चूटूपालू घाटी में भीषण सड़क हादसा, ड्राइवर की जिंदा जलकर मौत

झारखंड : झारखंड के Ramgarh district स्थित चूटूपालू घाटी में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। हादसे में एक कंटेनर ड्राइवर की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि ट्रेलर चालक मौके से फरार हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और करीब तीन किलोमीटर लंबा जाम लग गया।

🔥 ब्रेक फेल होने से हुआ हादसा

मिली जानकारी के अनुसार, कंटेनर रांची से रामगढ़ की ओर आ रहा था। इसी दौरान चूटूपालू घाटी के तीखे मोड़ पर अचानक ब्रेक फेल हो गया और कंटेनर ने आगे चल रहे ट्रेलर को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी भीषण थी कि कंटेनर का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें तुरंत आग लग गई। ड्राइवर केबिन में बुरी तरह फंस गया और बाहर नहीं निकल सका। देखते ही देखते आग ने पूरी केबिन को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे चालक की जलकर मौके पर ही मौत हो गई।

फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो सकी है।

🚓 पुलिस और फायर ब्रिगेड ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही रामगढ़ पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

हादसे के कारण घाटी में करीब तीन किलोमीटर लंबा जाम लग गया। वाहनों की लंबी कतार लग गई और यात्रियों को काफी देर तक परेशानी झेलनी पड़ी। पुलिस ने यातायात को धीरे-धीरे सामान्य कराया।

⚠️ खतरनाक मोड़ों के कारण अक्सर होते हैं हादसे

स्थानीय लोगों का कहना है कि चूटूपालू घाटी में तीखे और खतरनाक मोड़ होने के कारण अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। यह कोई पहली घटना नहीं है।

घाटी का यह इलाका दुर्घटनाओं के लिए पहले से ही संवेदनशील माना जाता है। लोगों ने प्रशासन से सुरक्षा उपाय बढ़ाने और यातायात नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

📌 प्रशासन की अपील

पुलिस ने वाहन चालकों से घाटी क्षेत्र में सावधानीपूर्वक और नियंत्रित गति से वाहन चलाने की अपील की है, खासकर भारी वाहनों के चालकों को ब्रेक और अन्य तकनीकी स्थिति की नियमित जांच करने की सलाह दी गई है।

झारखंड में तापमान 2–3°C तक कम होने का अनुमान: गुमला, हजारीबाग समेत 5 जिलों में ठंड, 24 घंटे में कई जिलों का न्यूनतम पारा 10 डिग्री से नीचे

राजधानी रांची समेत झारखंड के कई हिस्सों में गुरुवार को हल्के बादल छाए रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार इस बदलाव से मौसम में ज्यादा अंतर नहीं आएगा और फिलहाल बारिश की संभावना नहीं है। हालांकि बादल हटने के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। शुक्रवार के बाद न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आने की संभावना जताई गई है। विभाग ने बताया कि उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण राज्य के मौसम में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। यह विक्षोभ कमजोर पड़ने के बाद 13 फरवरी तक एक नया पश्चिमी विक्षोभ देश के पश्चिमोत्तर भाग में दस्तक दे सकता है, जिससे एक बार फिर मौसम में बदलाव संभव है।

पिछले 24 घंटों में राज्य के कई जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। सबसे कम न्यूनतम तापमान गुमला में 6.4 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं, राजधानी रांची का न्यूनतम पारा 10.9 डिग्री दर्ज किया गया। राज्य में अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग एक डिग्री अधिक है, जबकि अधिकांश शहरों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 1–3 डिग्री कम रहा। गुमला, हजारीबाग, लोहरदगा, सिमडेगा और मेदिनीनगर में रात के समय ठंड का असर अभी भी महसूस किया जा रहा है। इन जिलों में सुबह और देर रात कड़ाके की ठंड बनी हुई है।

राजधानी रांची में दोपहर के समय गर्मी का असर भी दिखने लगा है। कई लोग बिना स्वेटर के नजर आ रहे हैं और हल्की धूप में खड़े होने पर पसीना महसूस कर रहे हैं। जमशेदपुर, सरायकेला-खरसावां, देवघर और गोड्डा समेत अन्य जिलों में भी दोपहर के समय यही स्थिति है। पूर्वी व पश्चिम सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा में अधिकतम तापमान 32–33 डिग्री के बीच पहुंच गया है। इन क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान लगभग 14 डिग्री दर्ज किया गया है, जिससे सुबह-शाम हल्की ठंड के बावजूद दोपहर में स्वेटर की जरूरत नहीं पड़ रही।

जंगल और पठारी इलाकों में सुबह-शाम ठंड बरकरार है। हालांकि झारखंड में ठंड की विदाई धीरे-धीरे हो रही है, लेकिन जंगल और पठारी इलाकों में अब भी ठंड का असर बना हुआ है। गुमला, खूंटी, लोहरदगा, लातेहार, रांची, हजारीबाग और रामगढ़ में सुबह और शाम कंकनी महसूस की जा रही है। गुमला में न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री तक दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार इन जिलों में न्यूनतम तापमान 10–11 डिग्री के बीच रहने की संभावना है। अन्य जिलों में मौसम सामान्य हो रहा है, लेकिन रात के समय ठंड का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

गुमला के टांगीनाथ से लौट रही बस पलटी, 2 की मौत; 5 साल के मासूम और महिला की गई जान, 40 से अधिक घायल

गुमला जिले के रायडीह प्रखंड में मंगलवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में पांच वर्षीय मासूम शिवम केशरी और एक अज्ञात महिला की मौत हो गई, जबकि 40 से अधिक यात्री घायल हो गए। दुर्घटना चैनपुर–मांझाटोली मुख्य पथ पर कटकांया स्थित पुराने शंख घाट मोड़ के पास हुई। बताया जा रहा है कि डुमरी प्रखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल टांगीनाथ धाम से मुंडन संस्कार संपन्न कर लौट रही रिजर्व बस अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई। हादसा इतना तेज हुआ कि यात्रियों को संभलने का मौका नहीं मिला और बस में चीख-पुकार मच गई।

मुंडन कार्यक्रम से लौट रहा पूरा परिवार: जानकारी के अनुसार सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर निवासी मनीष केशरी के पुत्र का मुंडन संस्कार टांगीनाथ धाम में आयोजित किया गया था। इसमें सिमडेगा, ठेठईटांगर, तामड़ा और ओडिशा सहित विभिन्न स्थानों से परिवार के रिश्तेदार शामिल हुए थे। धार्मिक अनुष्ठान के बाद सभी श्रद्धालु मेहता नामक रिजर्व बस से वापस लौट रहे थे। इसी दौरान शंखमोड़–मांझाटोली के संकरे और खतरनाक मोड़ पर चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठा और बस पलट गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार करीब 20 यात्री बस के नीचे दब गए, जिन्हें स्थानीय लोगों की मदद से बाहर निकाला गया। घटना की सूचना मिलते ही मांझाटोली के उपप्रमुख दीपक कुजूर और स्थानीय समाजसेवी मौके पर पहुंचे और तुरंत राहत-बचाव कार्य शुरू कराया। घायलों को एंबुलेंस और निजी वाहनों से सदर अस्पताल पहुंचाया गया। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

मृतकों में पांच वर्षीय शिवम केशरी और बस में दब गई एक महिला शामिल हैं, जिसकी पहचान देर रात तक नहीं हो पाई थी। घायलों में महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। हादसे में सरस्वती देवी (28), मनीषा कुमारी (15), संध्या देवी (30), ज्योति केशरी (42), संगीता देवी (35), आर्यन केशरी (18), प्रशांत कुमार (22), कृष्णा बड़ाईक (25), सोमरा सिंह (45), अयोध्या प्रसाद केशरी (70), मीरा देवी (55) समेत कृष्ण बड़ाइक, जसमनी देवी, पूजा देवी, शशि कुजूर, आरती कुमारी, अनिता देवी, सुरेंद्र ठाकुर, राहुल कुमार केसरी और अन्य लोग घायल हुए हैं। सभी का इलाज सदर अस्पताल में जारी है।

‘गांव छोड़ो या गोली खाने को तैयार रहो’: चतरा में पूर्व TSPC कमांडर के घर माओवादी पोस्टर, पुलिस मुखबिरी का आरोप

चतरा जिले के कुंदा थाना क्षेत्र स्थित गेंदरा गांव में माओवादी संगठन ने एक बार फिर दहशत फैलाने की कोशिश की। बुधवार आधी रात पूर्व TSPC कमांडर श्याम भोक्ता के घर पर धमकी भरा पोस्टर चिपकाया गया। पोस्टर में उन्हें और उनके परिवार को गांव छोड़ने की चेतावनी दी गई थी। इसमें माओवादी संगठन की दक्षिणी जोनल कमेटी का नाम अंकित था और लिखा था: “SPO श्याम भोक्ता, गांव छोड़कर भाग जाओ, वरना गोली खाने के लिए तैयार रहो।” माओवादी संगठन ने उन्हें पुलिस का दलाल बताते हुए 28 दिसंबर की घटना का जिक्र किया और अगली बार मौका नहीं देने की चेतावनी दी। घटना के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल फैल गया।

पिछले साल की मुठभेड़ का जिक्र भी किया गया है। 28-29 दिसंबर की रात गेंदरा गांव में वर्चस्व और जमीन विवाद को लेकर हिंसक मुठभेड़ हुई थी। उस समय लावालौंग निवासी देवेंद्र गंझू और चुरामन गंझू अपने साथियों के साथ श्याम भोक्ता पर हमला करने पहुंचे थे। ग्रामीणों की एकजुटता और जवाबी फायरिंग में दोनों हमलावर मारे गए थे। श्याम भोक्ता के साले गोपाल गंझू के सिर में गोली लगी थी, जबकि श्याम स्वयं भी घायल हुए थे। ताजा पोस्टर में देवेंद्र और चुरामन को ‘शहीद’ बताया गया और ‘लाल सलाम’ किया गया। साथ ही उन ग्रामीणों को भी चेतावनी दी गई, जिन्होंने उस मुठभेड़ में प्रतिरोध किया था।

श्याम भोक्ता की पत्नी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने मामले में केवल मोहन कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा, जबकि अन्य हमलावरों को खुला छोड़ दिया गया। उनका कहना है कि इसी लापरवाही के कारण आज उनका परिवार फिर से खतरे में है। पोस्टर में पुलिस प्रशासन को भी चुनौती दी गई और लिखा गया कि एसपीओ को प्रलोभन देना बंद करो। इस घटनाक्रम ने चतरा पुलिस की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सिमरिया एसडीपीओ शुभम खंडेलवाल ने बताया कि पोस्टर बरामद कर लिया गया है और अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट किया जा रहा है कि पोस्टर वास्तव में नक्सलियों द्वारा लगाया गया था या किसी शरारती तत्व की साजिश थी। श्याम भोक्ता के परिवार की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

लेबर कोड के खिलाफ हड़ताल का असर, झारखंड में कोयलांचल में चक्का जाम; उत्पादन व बैंकिंग सेवाएं प्रभावित

केंद्र सरकार द्वारा लागू चार नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के विरोध में गुरुवार को देशभर के मजदूर संगठनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया। इसका व्यापक असर झारखंड के कई जिलों में देखने को मिला। धनबाद के कोयलांचल क्षेत्र में मजदूर यूनियनों ने संयुक्त मोर्चा के बैनर तले चक्का जाम किया, जिससे बीसीसीएल और ईसीएल की कोलियरियों में कोयला उत्पादन और परिवहन कार्य पूरी तरह ठप हो गया।

हड़ताल का प्रभाव धनबाद के बस्ताकोला क्षेत्र, गोल सिक्स, बीएनआर साइडिंग, 9 नंबर साइडिंग, केओसीपी, कंटाघर, हाजिरी घर, ब्लॉक-दो और शताब्दी कोलियरी सहित बीसीसीएल के अंतर्गत संचालित आउटसोर्सिंग इकाइयों में भी दिखा। सुबह से ही मजदूरों ने कोलियरियों और हाजिरी घरों के प्रवेश द्वारों पर प्रदर्शन कर कामकाज को पूरी तरह बाधित कर दिया। एटक, इंटक, जनता मजदूर संघ और आरसीएमएस सहित विभिन्न ट्रेड यूनियनों के नेता और कार्यकर्ता हड़ताल को सफल बनाने में सक्रिय रहे। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और लेबर कोड को मजदूर विरोधी तथा निजीकरण को बढ़ावा देने वाली नीति करार दिया।

मजदूर संगठनों का आरोप है कि चारों नए श्रम कानूनों से श्रमिकों के अधिकार कमजोर हुए हैं। स्थायी रोजगार की सुरक्षा प्रभावित हुई है और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर नकारात्मक असर पड़ा है। यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार की नीतियां बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई जा रही हैं, जबकि श्रमिकों की समस्याओं की अनदेखी हो रही है।

हड़ताल का असर केवल कोयला उत्पादन तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि बैंकिंग सेवाओं पर भी पड़ा। कई सरकारी बैंक कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए, जिससे आम लोगों को लेन-देन और अन्य बैंकिंग कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ा। ट्रेड यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इससे पहले भी 9 जुलाई 2025 को चारों लेबर कोड और कथित मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हड़ताल हो चुकी है।

जमशेदपुर में भी संयुक्त ट्रेड यूनियन की हड़ताल का असर देखने को मिला। सभी ट्रेड यूनियन साकची आम बागान से जुलूस के रूप में जुबली पार्क गेट के पास एकत्रित होकर रोड को जाम रखा।

जामताड़ा जिले के पोसोई मोड़ पर वामपंथी दलों ने गोविंदपुर साहिबगंज नेशनल हाईवे को आधे घंटे तक जाम किया, जिससे वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतार लग गई। हालांकि यह प्रदर्शन केवल सांकेतिक रूप में किया गया।

दुबई में फंसे झारखंड के 11 मजदूरों की स्वदेश वापसी, कोलकाता एयरपोर्ट पर हुआ स्वागत

दुबई में फंसे झारखंड के 11 प्रवासी मजदूर बुधवार को सुरक्षित वतन लौट आए। ये मजदूर दुबई में एक कंपनी में काम कर रहे थे। कुल 14 मजदूरों में से 11 की स्वदेश वापसी हुई है। सभी मजदूर कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां समाजसेवी सिकंदर अली ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्हें बस के माध्यम से हावड़ा स्टेशन के लिए रवाना किया गया।

मजदूरों ने बताया कि वे अक्टूबर 2025 में दुबई स्थित ईएमसी (EMC) कंपनी में ट्रांसमिशन लाइन के काम के लिए गए थे। वहां उन्हें समय पर मजदूरी नहीं दी जा रही थी और निर्धारित समय से अधिक काम करवाया जा रहा था, जिससे रहने और खाने-पीने में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अपनी समस्याओं को लेकर मजदूरों ने एक वीडियो जारी कर सरकार से मदद की अपील की थी।

मामले की जानकारी मिलने के बाद झारखंड सरकार और केंद्र सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए उनकी सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित कराई। लौटे मजदूरों के परिजनों ने राज्य सरकार, केंद्र सरकार, मीडिया और समाजसेवी सिकंदर अली का आभार व्यक्त किया।

सिकंदर अली ने इस अवसर पर कहा कि रोज़ी-रोटी की तलाश में लोग विदेश जाते हैं, जहां वे कई बार शोषण का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने सरकार से प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और बेहतर रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।

वतन वापसी करने वाले मजदूरों में गिरिडीह जिले से राजेश महतो (तिरला, बगोदर) और अजय कुमार (मंडरो, डुमरडेली) शामिल हैं। बोकारो जिले से डालेश्वर महतो (कंजकीरो, नावाडीह) वापस लौटे हैं। हजारीबाग जिले से जागेश्वर महतो (खेदाडीह, बिष्णुगढ़), बैजनाथ महतो (सिरैय), दिलीप महतो, गंगाधर महतो, त्रिलोकी महतो (पारजोरिया), दीपक कुमार (चकचुको बसरिया), रोहित महतो और सेवा महतो (गोरहर, बरकट्ठा) की भी वापसी हुई है।