Hazaribagh : हजारीबाग जिले के चुरचू प्रखंड में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। गोंदवार गांव में छह लोगों की जान लेने के 24 घंटे के भीतर ही हाथियों ने दो और लोगों को मौत के घाट उतार दिया। लगातार हो रही घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
भुरकुंडा टोला में महिला को कुचला
गोंदवार गांव से सटे बहेरा पंचायत के कजरी गांव के भुरकुंडा टोला में शुक्रवार रात पांच हाथियों के झुंड ने राजेश मुर्मु के घर पर हमला कर दिया। घर में सो रही उनकी पत्नी फुलमुनी देवी को हाथियों ने कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हमले के दौरान राजेश मुर्मु किसी तरह दीवार फांदकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। ग्रामीणों ने शोर मचाकर हाथियों को भगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक महिला की जान जा चुकी थी।
गुरुवार को 6 लोगों की गई थी जान
इससे एक दिन पहले, गुरुवार देर रात आंगो थाना क्षेत्र और चुरचू प्रखंड के गोंदवार गांव में हाथियों ने तांडव मचाया था। पांच हाथियों के झुंड ने घरों के गेट उखाड़ दिए और अंदर घुसकर सो रहे लोगों को कुचल दिया।
मृतकों में सुमन कुमारी (26), धनेश्वर राम (52), सूरज राम (50), सविता देवी (25), अनुराग राम (1 वर्ष) और संजना कुमारी (3 माह) शामिल हैं। इनमें सूरज राम, सविता देवी और दोनों मासूम बच्चे एक ही परिवार के थे। घटना के वक्त सभी लोग अपने घरों में सो रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शी ने सुनाई आपबीती
हमले में बचे रोहित राम ने बताया कि रात में पहले हाथियों ने घर का दरवाजा तोड़ा। बाहर निकलने पर सामने हाथी दिखा। उन्होंने घर में रखी कढ़ाही से हाथी को मारकर खुद को बचाया और खिड़की से कूदकर बाहर भागे। इसके बाद शोर मचाकर अन्य लोगों को जगाया।
वन विभाग पर लापरवाही का आरोप
घटनाओं की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में हाथियों की लगातार मौजूदगी की जानकारी होने के बावजूद विभाग ने ठोस कदम नहीं उठाए। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई होती तो इतने लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
पंचायत भवन में शरण ले रहे ग्रामीण
लगातार हमलों से भयभीत ग्रामीणों ने रात पंचायत भवन में गुजारी। गांव में लोग घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं। महिलाओं और बच्चों में विशेष रूप से भय का माहौल है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से हाथियों को सुरक्षित जंगल क्षेत्र में खदेड़ने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष के गंभीर स्वरूप को उजागर कर दिया है।