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खान सर को बड़ी राहत: पटना कोर्ट ने कोचिंग फायरिंग केस में दी अग्रिम जमानत, जानिए पूरा मामला

Patna News: बिहार के चर्चित शिक्षक और खान ग्लोबल स्टडीज (KGS) के संस्थापक फैजल खान उर्फ खान सर को कोचिंग संस्थान फायरिंग मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। पटना की अदालत ने उन्हें और उनके तीन स्टाफ सदस्यों को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) प्रदान कर दी है। इसके अलावा, इस मामले में गिरफ्तार किए गए दो सुरक्षा कर्मियों को भी नियमित जमानत मिल गई है। अदालत के इस फैसले के बाद खान सर की तत्काल गिरफ्तारी की आशंका खत्म हो गई है, हालांकि मामले की जांच पहले की तरह जारी रहेगी।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद जून 2026 की शुरुआत में पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में स्थित खान ग्लोबल स्टडीज कोचिंग संस्थान में हुई हिंसक घटना से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ लोगों ने कोचिंग संस्थान में घुसकर तोड़फोड़ की और वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ मारपीट की। घटना के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि संस्थान के सुरक्षा कर्मियों ने फायरिंग कर दी।

फायरिंग की इस घटना में एक व्यक्ति घायल हो गया, जिसके बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। बाद में इस मामले में खान सर, उनके कुछ कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई।

एफआईआर में क्या लगाए गए आरोप?

एफआईआर में आरोप लगाया गया कि कोचिंग संस्थान के गार्डों ने बिना किसी वैध कारण के गोलीबारी की। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया कि फायरिंग के दौरान कई छात्रों और स्थानीय लोगों की जान खतरे में पड़ गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले में विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की।

हालांकि, खान सर और उनके सहयोगियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कोचिंग संस्थान पर हमला किया गया था और सुरक्षा कर्मियों ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी। उनका कहना था कि अगर समय रहते सुरक्षा गार्ड हस्तक्षेप नहीं करते, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

अदालत में क्या दलील दी गई?

अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान खान सर के वकीलों ने अदालत को बताया कि फैजल खान का फायरिंग की घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि खान सर मौके पर मौजूद जरूर थे, लेकिन उन्होंने किसी को फायरिंग का आदेश नहीं दिया और न ही वे हिंसा में शामिल थे।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि खान सर लगातार जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखा और जांच में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं की। इसलिए उनकी गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं है।

अभियोजन पक्ष ने क्या कहा?

सरकारी पक्ष ने अदालत में दलील दी कि मामला गंभीर है और फायरिंग की घटना से कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई है। हालांकि, जांच के दौरान ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया जिससे यह साबित हो सके कि खान सर ने सीधे तौर पर फायरिंग की साजिश रची या उसका आदेश दिया।

इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत देने का फैसला सुनाया।

पहले भी मिली थी अंतरिम राहत

इससे पहले भी पटना की अदालत ने खान सर को अंतरिम राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया था कि जांच जारी रखी जाए, लेकिन बिना पर्याप्त आधार के उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए।

अब अग्रिम जमानत मिलने के बाद खान सर को बड़ी कानूनी राहत मिली है। हालांकि, उन्हें जांच में सहयोग करने और अदालत द्वारा तय की गई शर्तों का पालन करना होगा।

खान सर ने क्या कहा?

अदालत के फैसले के बाद खान सर की ओर से कहा गया कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। उन्होंने कहा कि वह हमेशा कानून का सम्मान करते हैं और जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देते रहेंगे। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कोचिंग संस्थान को निशाना बनाने के पीछे एक बड़ी साजिश हो सकती है, जिसकी जांच होनी चाहिए।

राजनीतिक और शैक्षणिक जगत में चर्चा

इस मामले ने बिहार के शैक्षणिक और राजनीतिक गलियारों में भी काफी चर्चा बटोरी। खान सर देश के लोकप्रिय शिक्षकों में गिने जाते हैं और उनके लाखों छात्र ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से पढ़ाई करते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज मामले और फायरिंग की घटना ने व्यापक बहस को जन्म दिया।

कई छात्र संगठनों और समर्थकों ने खान सर के पक्ष में प्रदर्शन भी किया और निष्पक्ष जांच की मांग की।

जांच अभी जारी

अग्रिम जमानत मिलने के बावजूद यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। पुलिस फायरिंग की परिस्थितियों, तोड़फोड़ की घटना और कथित साजिश के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगी।

फिलहाल, अदालत के फैसले ने खान सर और उनके सहयोगियों को बड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन इस हाई-प्रोफाइल मामले में अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगी।

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