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रांची-दिल्ली एयर एंबुलेंस हादसा: 8 लाख जुटाकर बुक की उड़ान, 23 मिनट बाद जंगल में क्रैश; बर्न मरीज समेत 7 की दर्दनाक मौत

झारखंड के चतरा जिले में सोमवार शाम एक दिल दहला देने वाली त्रासदी सामने आई, जब रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एंबुलेंस सिमरिया थाना क्षेत्र के कसियातु जंगल में क्रैश हो गई। इस हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में गंभीर रूप से झुलसे मरीज, उनकी पत्नी और भांजा, दो पायलट, एक डॉक्टर और एक पैरामेडिक शामिल हैं। यह हादसा न सिर्फ सात जिंदगियों का अंत है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था, एयर मेडिकल सेवाओं और आपातकालीन प्रबंधन पर भी कई सवाल खड़े कर गया है।

छह दिन पहले झुलसे थे संजय कुमार

मृतक संजय कुमार (41) पलामू जिले के चंदवा निवासी व्यवसायी थे। छह दिन पहले उनके लाइन होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। आग बुझाने के दौरान उनका पैर फिसल गया और वे लपटों की चपेट में आ गए। वे 65 प्रतिशत तक झुलस गए थे। पहले उन्हें स्थानीय स्तर पर इलाज दिया गया, फिर रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अस्पताल के सीईओ अनंत सिन्हा के अनुसार, संजय को 16 फरवरी को गंभीर हालत में भर्ती किया गया था। इलाज जारी था, लेकिन उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी। बेहतर इलाज के लिए परिवार ने उन्हें दिल्ली ले जाने का निर्णय लिया। सड़क मार्ग से ले जाना जोखिम भरा था, इसलिए एयर एंबुलेंस का विकल्प चुना गया।

साढ़े सात लाख जुटाने की जद्दोजहद

संजय के बड़े भाई विजय कुमार ने बताया कि एयर एंबुलेंस के लिए 7.5 लाख रुपए का इंतजाम करना पड़ा। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, फिर भी रिश्तेदारों और परिचितों से मदद लेकर रकम जुटाई गई। शुरुआत में 2.50 लाख रुपए कम पड़ गए तो विमान कंपनी ने उड़ान भरने से मना कर दिया। आरोप है कि पूरी रकम मिलने के बाद ही उड़ान की अनुमति दी गई।

परिजन चंदवा लौटे, किसी परिचित से पैसे उधार लिए और फिर रांची पहुंचकर शेष राशि दी। इसके बाद ही विमान ने उड़ान भरी। यह परिवार के लिए उम्मीद की उड़ान थी, लेकिन किसे पता था कि यह अंतिम सफर बन जाएगा।

उड़ान के 23 मिनट बाद संपर्क टूटा

एयर एंबुलेंस ने शाम 7:11 बजे रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी। 7:34 बजे कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से उसका संपर्क टूट गया। रात 8:05 बजे रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर सक्रिय किया गया। कुछ ही देर बाद जंगल में विमान क्रैश होने की सूचना मिली।

ग्रामीणों के अनुसार, करीब 7:45 बजे जंगल की ओर से जोरदार धमाके की आवाज आई। तेज हवा और बारिश के कारण लोग तुरंत मौके पर नहीं पहुंच सके। बाद में मलबा कसियातु जंगल में मिला।

खराब मौसम की आशंका

सोमवार शाम झारखंड में अचानक मौसम बिगड़ गया था। तेज हवाएं और भारी बारिश शुरू हो गई थी। शुरुआती रिपोर्ट में खराब मौसम को हादसे का संभावित कारण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि विमान अपने निर्धारित मार्ग से दाईं ओर डायवर्ट हो गया था और रास्ता भटक गया।

हालांकि, तकनीकी खराबी, पायलटिंग एरर या नेविगेशन सिस्टम की विफलता जैसे अन्य कारणों की भी जांच की जा रही है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की टीम द्वारा विस्तृत जांच की संभावना जताई गई है।

कौन-कौन थे सवार?

हादसे में जान गंवाने वालों में शामिल हैं:

  • कैप्टन विवेक
  • कैप्टन सबराजदीप
  • मरीज संजय कुमार
  • उनकी पत्नी अर्चना देवी
  • भांजा ध्रुव कुमार
  • डॉ. विकास कुमार गुप्ता
  • पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा

इन सातों की मौत ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। संजय के दो बेटे शुभम (17) और शिवम (13) अब अनाथ जैसे हालात में हैं। परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ मौत ने रिश्तेदारों को तोड़ कर रख दिया है।

स्वास्थ्य मंत्री का बयान

हादसे के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी चतरा पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा, “अगर झारखंड में बेहतर अस्पताल होते तो हमें मरीज को बाहर नहीं भेजना पड़ता।” उन्होंने राज्य में एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल बनाने की इच्छा जताई और कहा कि स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना समय की जरूरत है।

उन्होंने हादसे की उच्च स्तरीय जांच कराने और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।

मुआवजे की मांग

चतरा विधायक जर्नादन पासवान ने इस घटना को मर्माहत करने वाली त्रासदी बताया और सरकार से मुआवजे की मांग की। वहीं सांसद कालीचरण सिंह ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा देने की अपील की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरियों की भी कहानी है। यदि राज्य में उन्नत बर्न यूनिट और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं होतीं, तो शायद मरीज को बाहर भेजने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

कई सवाल बाकी

यह हादसा कई गंभीर प्रश्न छोड़ गया है:

  • क्या खराब मौसम के बावजूद उड़ान की अनुमति देना सही था?
  • क्या एयर एंबुलेंस कंपनी ने सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया?
  • क्या आपातकालीन मेडिकल ट्रांसपोर्ट के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश मौजूद हैं?
  • क्या आर्थिक दबाव में उड़ान भरना जोखिम भरा निर्णय साबित हुआ?

जांच के बाद ही इन सवालों के जवाब मिल पाएंगे। फिलहाल सात परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल चुकी है।

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