पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज में आयोजित एक जनसभा में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मतदाताओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि मतदाता सूची से नाम कटने के पीड़ितों को अपने वोट के माध्यम से बदला लेना चाहिए।
ममता बनर्जी ने अमित शाह पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाने के पीछे उनका हाथ है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें हिम्मत है, तो सीधे मुकाबला करें, पीठ पीछे वार न करें। उन्होंने न्यायाधिकरण में अपील करने का भी आग्रह किया जिनके नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
ममता बनर्जी ने ईवीएम और बूथ एजेंटों को लेकर सतर्कता का निर्देश दिया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और बूथ एजेंटों को 4 मई (मतगणना की तारीख) तक चौबीसों घंटे सतर्क रहने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर जान-बूझकर ईवीएम मशीनें खराब की जा सकती हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि मशीनों की मरम्मत की बजाय उन्हें तुरंत बदलने की मांग करें।
ममता बनर्जी ने वक्फ एक्ट और एनआरसी पर कड़ा रुख दिखाया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह बंगाल में एनआरसी के नाम पर किसी भी हाल में डिटेंशन कैंप नहीं बनने देंगी। उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि अगर मतदाता सूची में घुसपैठिए थे, तो प्रधानमंत्री और गृह मंत्री उन्हीं के वोटों से कैसे जीते? उन्हें पहले इस्तीफा देना चाहिए।
ममता बनर्जी ने प्रशासन और तबादलों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा लगभग 500 अधिकारियों के तबादले पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह नियंत्रण केवल चुनाव तक सीमित है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं के रिश्तेदारों को बंगाल में तैनात किया गया है, जबकि राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा है। उन्होंने विकास कार्यों के ठप होने के लिए भी आयोग की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
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