मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच भारत के लिए राहत की खबर आई है, जब अमेरिका से एलपीजी और रूस से कच्चा तेल लदा जहाज सुरक्षित रूप से भारत पहुंच गया है। यह भारत के ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है, खासकर उस समय जब स्ट्रेट ऑफ हार्मुज से गुजरना काफी कठिन हो गया है। अमेरिका से एलपीजी लेकर एक जहाज रविवार को न्यू मंगलौर बंदरगाह पर पहुंचा, जिसमें कुल 16,714 टन एलपीजी लदा हुआ है।
रूस से आया कच्चा तेल लदा जहाज भारत की ओर मोड़ा गया है, जिसमें करीब 7.7 लाख बैरल कच्चा तेल लदा हुआ है। इस जहाज को पहले चीन की ओर भेजा गया था, लेकिन हाल ही में इसे भारत की ओर मोड़ दिया गया। इसे समुद्र में बनी पाइपलाइन के जरिए मंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड तक पहुंचाया जा रहा है।
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच भारत के कुछ जहाज स्ट्रेट ऑफ हार्मुज के रास्ते देश पहुंचने में कामयाब रहे हैं। 16 मार्च को शिवालिक नाम का जहाज 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा था। इसके एक दिन बाद 17 मार्च को नंदा देवी करीब 92,712 मीट्रिक टन गैस लेकर भारत पहुंचा। फिर 18 मार्च को क्रूड ऑयल टैंकर के साथ जग लाडकी गुजरात में अडाणी पोर्ट्स पर आया।
फारस की खाड़ी में भारत के जहाज और नागरिकों की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार ने शनिवार को जानकारी दी थी। शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश सिन्हा के मुताबिक फारस की खाड़ी इलाके में 22 भारतीय जहाज और 611 नाविक फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया कि सभी सुरक्षित हैं और सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है।
भारत के लिए यह राहत की खबर है, जब देश को ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक एलपीजी और कच्चा तेल मिल रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण ऊर्जा संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, लेकिन अब यह स्थिति में सुधार हो रहा है। सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि देश को आवश्यक ऊर्जा संसाधन मिल सकें।