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मेरठ में दिल दहला देने वाला हादसा: नमाज पढ़ने गए पिता के घर में लगी आग, जुड़वां बेटियों समेत 5 बच्चों सहित 6 की जिंदा जलकर मौत

उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में सोमवार देर शाम एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया। लिसाड़ीगेट थानाक्षेत्र के किदवई नगर स्थित सुराही वाली मस्जिद के पास एक दो मंजिला मकान में अचानक भीषण आग लग गई। इस आग में एक ही परिवार के छह लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। मृतकों में दो महिलाएं और पांच बच्चे शामिल थे, जिनमें छह माह की जुड़वां बेटियां भी थीं। परिवार का मुखिया उस समय नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद गया हुआ था। जब तक वह लौटता, तब तक उसका पूरा संसार राख में तब्दील हो चुका था।

नमाज के दौरान मचा कोहराम

घटना सोमवार देर शाम की है। कपड़ा कारोबारी इकबाल उर्फ आसिम अपने भाई फारुख के साथ पास की मस्जिद में नमाज पढ़ने गए थे। घर में उनकी पत्नी रुखसार (30 वर्ष), मां अमीर बानो (55 वर्ष) और पांच बच्चे मौजूद थे। बच्चे घर के भीतर खेल रहे थे और महिलाएं रसोई में खाना बनाने में व्यस्त थीं। इसी दौरान अचानक मकान में आग भड़क उठी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पहले घर की ऊपरी मंजिल से धुआं उठता दिखाई दिया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और लपटें खिड़कियों से बाहर आने लगीं। आसपास के लोगों ने जब यह दृश्य देखा तो शोर मचाया और तुरंत पुलिस व फायर ब्रिगेड को सूचना दी।

संकरी गलियों ने बढ़ाई मुश्किल

लिसाड़ीगेट क्षेत्र घनी आबादी और संकरी गलियों वाला इलाका है। आग की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन गली इतनी संकरी थी कि दमकल वाहन सीधे मकान तक नहीं पहुंच सके। ऐसे में फायर फाइटर्स को पड़ोसी मकानों की छतों के रास्ते अंदर प्रवेश करना पड़ा।

करीब 30 मिनट तक घर के अंदर फंसे लोग लपटों और धुएं के बीच जिंदगी की जंग लड़ते रहे। सामने वाले मकान से सीढ़ी लगाकर राहत दल ने अंदर प्रवेश किया और एक-एक कर सभी को बाहर निकाला। हालांकि तब तक आग बहुत फैल चुकी थी और अधिकांश लोग गंभीर रूप से झुलस चुके थे।

अस्पताल में टूटा परिवार

घायलों को तत्काल शहर के अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद रुखसार और पांचों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। मृत बच्चों में महविश (12 वर्ष), हम्माद (4 वर्ष), अद्दस (3 वर्ष) और छह-छह माह की जुड़वां बेटियां नाबिया और इनायत शामिल थीं। बताया गया कि नाबिया और इनायत इकबाल और रुखसार की जुड़वां बेटियां थीं, जबकि महविश और हम्माद इकबाल के भाई फारुख के बच्चे थे।

इकबाल की मां अमीर बानो और एक पड़ोसी गंभीर रूप से झुलस गए। दोनों का अस्पताल में इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल में मोहल्ले के लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई स्तब्ध और शोकाकुल नजर आया।

पिता का रो-रोकर बुरा हाल

जब मस्जिद में नमाज पढ़ रहे इकबाल को आग की सूचना मिली तो वे बदहवास हालत में घर की ओर दौड़े। मौके पर पहुंचते ही उन्होंने अपने घर को आग की लपटों में घिरा देखा। परिवार के सदस्यों को बाहर निकाला जा रहा था। पत्नी और बच्चों की हालत देखकर वे फूट-फूटकर रोने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन उनका दुख शब्दों से परे था।

मोहल्ले के लोगों के अनुसार इकबाल मेहनती कारोबारी थे। वे कपड़े तैयार कराकर ऑर्डर पर दूसरे शहरों में आयोजित प्रदर्शनियों में बेचते थे। घर में बड़ी मात्रा में कपड़ा रखा हुआ था। संभावना है कि कपड़ों के कारण आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया।

आग की वजह पर संशय

पुलिस की शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई गई है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस सिलेंडर में लीकेज के चलते आग भड़की। फायर ब्रिगेड के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। घर में कपड़े का स्टॉक होने के कारण आग ने तेजी से फैलकर पूरे मकान को चपेट में ले लिया।

करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। दमकल कर्मियों ने छतों के रास्ते अंदर जाकर आग बुझाने का काम किया। आग इतनी भीषण थी कि दीवारें तक झुलस गईं और पूरा घर काला पड़ गया।

प्रशासन और जनप्रतिनिधि पहुंचे

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे। डीएम वीके सिंह, एसएसपी अविनाश पांडे, डीआईजी कलानिधि नैथानी और एसपी क्राइम अवनीश कुमार ने हालात का जायजा लिया। सिवाल खास के विधायक गुलाम मोहम्मद भी अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा समेत कई स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। घायलों के इलाज की समुचित व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं।

मातम में डूबा इलाका

इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरा किदवई नगर शोक में डूब गया है। जिस घर से कुछ घंटे पहले बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। पड़ोसियों की आंखों में आंसू हैं और हर कोई इस त्रासदी से स्तब्ध है। लोग बार-बार यही सवाल कर रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई।

मोहल्ले के बुजुर्गों का कहना है कि संकरी गलियों और पुराने मकानों में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। अगर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां समय पर मकान तक पहुंच पातीं, तो शायद कुछ जानें बचाई जा सकती थीं।

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