भारत की प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं की दुनिया में, UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के अंतिम परिणामों ने 6 मार्च 2026 को छात्रों और शिक्षकों के बीच उत्साह और चर्चा का नया माहौल पैदा कर दिया। हजारों अभ्यर्थियों में से एक नाम जो अपनी उच्च रैंक और प्रेरक कहानी के लिए सभी की नज़रों में रहा, वह था राघव झुनझुनवाला।
25 वर्ष की उम्र में, मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार के इस युवा ने ऑल इंडिया रैंक 4 (AIR 4) प्राप्त की। इसके साथ ही वह बिहार के टॉपर बने और देशभर के UPSC उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए।
यह कहानी केवल अंकों और रैंक की नहीं है, बल्कि यह परिवार के सहयोग, शैक्षणिक उत्कृष्टता, संघर्ष, लगातार मेहनत और रणनीति से परीक्षा की तैयारी करने की कहानी है। इस लेख में हम राघव के जीवन के विभिन्न पहलुओं — उनके प्रारंभिक जीवन, शिक्षा, तैयारी, मानसिक दृष्टिकोण और भविष्य के उम्मीदवारों के लिए सीख — पर विस्तृत रूप से चर्चा करेंगे।
प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि — सफलता की जड़ें
राघव का जन्म और पालन‑पोषण मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार में हुआ। उनके परिवार में शिक्षा को केवल प्राथमिकता नहीं बल्कि जीवन का मूल मंत्र माना जाता था। बचपन से ही उन्हें अनुशासन, जिज्ञासा और दृढ़ता की सीख मिली, जो बाद में उनके UPSC सफर में सफलता की नींव बनी।
परिवार का योगदान
- उनके पिता, नवीन झुनझुनवाला, ने शुरुआती दौर में सोचने और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में मदद की।
- उनके माता, अंजू देवी झुनझुनवाला, ने हर कदम पर उनके साथ खड़े रहकर मानसिक और भावनात्मक समर्थन प्रदान किया।
शिक्षा और अकादमिक उत्कृष्टता
स्कूलिंग वर्ष
राघव ने 10वीं कक्षा (मैट्रिक) 2017 में उत्तीर्ण की। इस दौरान उनकी अकादमिक क्षमता और समर्पण स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। उन्होंने गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषा में विशेष रूप से अच्छे अंक प्राप्त किए, जिससे उनकी तार्किक और विश्लेषणात्मक सोच मजबूत हुई।
हायर सेकेंडरी और कॉलेज
राघव ने 12वीं कक्षा 2019 में उत्तीर्ण किया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में उच्च शिक्षा के लिए सिरी राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स (SRCC) में अर्थशास्त्र (B.A. Hons) का चयन किया।
SRCC में:
- उन्होंने अपने विषय में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और ‘चरट राम गोल्ड मेडल’ प्राप्त किया।
- उन्होंने अर्थशास्त्र से संबंधित शोध कार्य भी किए, जिसमें भारत के नॉन‑परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) संकट पर एक शोध पत्र शामिल था।
UPSC का लक्ष्य — राष्ट्रीय सेवा की दिशा
राघव ने कॉमर्स पृष्ठभूमि से सिविल सेवा परीक्षा में आने का निर्णय लिया। UPSC परीक्षा व्यापक सिलेबस और कठिनाई के लिए जानी जाती है। इसमें सफलता न केवल ज्ञान बल्कि रणनीति, समय प्रबंधन और मानसिक दृढ़ता की मांग करती है।
उनकी तैयारी का उद्देश्य सिर्फ नौकरी प्राप्त करना नहीं था, बल्कि देश की सेवा और नीति निर्माण में योगदान देना था।
UPSC तैयारी — रणनीति, चुनौतियाँ और सफलता की कुंजी
तीन प्रयास, तीन अनुभव
राघव का UPSC सफर सीधा नहीं था। उन्होंने तीन लगातार प्रयास किए, जिनमें हर बार सीख और सुधार की कहानी थी।
पहला प्रयास (UPSC 2023)
- प्रीलिम्स पास करने के बाद मेन्स में सफलता नहीं मिली।
- इस अनुभव ने उन्हें परीक्षा पैटर्न और अपनी कमजोरी समझने में मदद की।
दूसरा प्रयास (UPSC 2024)
- प्रीलिम्स और मेन्स पास करने के बाद इंटरव्यू तक पहुँचे।
- अंतिम मेरिट लिस्ट में नाम नहीं आया।
- यह असफलता उन्हें और अधिक प्रेरित करने वाली साबित हुई।
तीसरा प्रयास (UPSC 2025)
- पूरी तैयारी और रणनीति के साथ तीसरे प्रयास में राघव ने AIR 4 प्राप्त की।
- यह दिखाता है कि लगातार प्रयास और सीखना सफलता की कुंजी है।
तैयारी की रणनीति और विषय चयन
विषय: अर्थशास्त्र (Economics)
राघव ने UPSC मेन्स के लिए अर्थशास्त्र को विकल्प विषय के रूप में चुना।
- यह विषय उनकी अकादमिक ताकत के अनुरूप था।
- इस विषय में उनकी गहरी समझ ने उनके उत्तरों को स्पष्ट, तार्किक और विश्लेषणात्मक बनाया।