नई दिल्ली – राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की सोशल साइंस भाग-2 की पाठ्यपुस्तक को विवाद का विषय बनने के बाद वापस बुला लिया है। इसका कारण एक अध्याय था जिसमें न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों, विशेषकर ‘भ्रष्टाचार’ पर चर्चा की गई थी। इस अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट (SC) ने कड़ी आपत्ति जताई, जिस पर NCERT ने वितरण रोक दिया और पुस्तक को बाजार से हटा लिया।
विवाद का मूल — ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ वाला अध्याय
पुस्तक का चैप्टर 4, जिसका शीर्षक था “The Role of Judiciary in Our Society”, इसमें न्यायपालिका की भूमिका के साथ न्यायिक प्रणाली द्वारा सामना किए जाने वाले चुनौतियों जैसे लंबित मामलों और भ्रष्टाचार पर भी सामग्री शामिल थी। इस खंड में अदालतों के सामने ठोस मुद्दों के रूप में न्यायाधीशों की संख्या की कमी, प्रक्रियात्मक जटिलताएं और भ्रष्टाचार की बात की गई थी, जिसे पढ़ाने का उद्देश्य था छात्रों को वास्तविकता-आधारित दृष्टिकोण देना।
एनसीईआरटी की इस नई पाठ्यपुस्तक का लक्ष्य था रिमूव प्रभावित सामग्री और स्कूल पाठ्यक्रम को नया रूप देना, लेकिन कोर्ट की आपत्ति के चलते इस प्रक्रिया को रोकना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट में मामला और कड़ी प्रतिक्रिया
इस विवाद ने सुप्रीम कोर्ट तक ध्यान आकर्षित किया, जब वरिष्ठ वकीलों ने इस मुद्दे को कोर्ट में उठाया और सीजेआई सूर्यकांत ने खुद इस पर गंभीर आपत्ति जताई। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि वह “किसी भी व्यक्ति या संस्थान को न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को बदनाम करने की अनुमति नहीं देंगे”। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को ऐसे आरोपों से बचाना आवश्यक है जो उसके प्रति आम जनता का विश्वास प्रभावित कर सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि “संस्था को बदनाम नहीं करने देंगे और न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा करेंगे”, और इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की।
NCERT की प्रतिक्रिया और माफी
NCERT ने कोर्ट की प्रतिक्रिया के तुरंत बाद इस विवादित पाठ्यपुस्तक को बाजार से हटा दिया और एक बयान जारी कर “भूल और अनुचित सामग्री” की पहचान करने की बात कही। संस्थान ने कहा कि यह गलती “पूरी तरह से अनजाने में हुई थी” और उसने जनता से क्षमा भी मांगी। NCERT ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका लक्ष्य किसी संवैधानिक संस्था का अपमान करना नहीं था और वह न्यायपालिका के प्रति सम्मान रखता है।
NCERT ने यह भी कहा कि अब यह अध्याय समीक्षा और पुनर्लेखन के बाद 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि पाठ्यक्रम में संतुलित और उपयुक्त सामग्री शामिल की जा सके।
बिके 38 कॉपियों की वापसी की कोशिश
कुल मिलाकर इस किताब की 2.25 लाख प्रतियां छापी गई थीं, लेकिन वितरण के तुरंत बाद ही NCERT ने किताब को वापस बुला लिया। उनमें से केवल 38 प्रतियां ही खरीदी गईं थीं, और एनसीईआरटी अब उन सभी को वापस लेने की कोशिश में है।
शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार अब तक 16 प्रतियां वापिस आ चुकी हैं, जबकि अन्य खरीदारों से संपर्क करके किताबें वापस लेने की प्रक्रिया जारी है। उन खरीदारों से संपर्क नहीं हो पाने पर बैंक विवरण और यूपीआई आईडी के आधार पर प्रयास किया जा रहा है।
निष्कर्ष और व्यापक परिप्रेक्ष्य
यह विवाद न केवल स्कूल पाठ्यक्रमों में सामग्री के चयन पर ध्यान केंद्रित करता है, बल्कि यह शिक्षा, संवैधानिक संस्थाओं के प्रतिनिधित्व और राष्ट्रीय संस्थाओं के प्रति सम्मान जैसे विषयों पर भी बहस का कारण बन रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा में वास्तविक चुनौतियों पर चर्चा होना आवश्यक है, लेकिन साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि संवैधानिक संस्थानों की भूमिका और प्रतिष्ठा का संतुलित और सम्मानजनक तरीके से वर्णन किया जाए, खासकर जब यह आकांक्षी युवा छात्र पीढ़ी को तैयार कर रहा हो।