इस सूची में, भारत के सात राज्यों ने दुनिया भर के 115 राज्यों में से शीर्ष 100 में स्थान बनाया है। इन राज्यों में से सात राज्यों ने दुनिया भर के कर स्वतंत्र राज्यों में स्थान बनाया है, जिनमें भारत के राज्य हैं।
हरियाणा भारत के सबसे कर स्वतंत्र राज्य है, जिसकी रैंकिंग 24वें स्थान पर है। दिल्ली 27वें, कर्नाटक 36वें, महाराष्ट्र 40वें, आंध्र प्रदेश 42वें और तमिलनाडु 44वें स्थान पर है। इन राज्यों ने भारत में कर स्वतंत्रता में सबसे ज्यादा प्रगति हासिल की है।
इसके विपरीत, बिहार भारत के सबसे कम कर स्वतंत्र राज्यों में से एक है। इसकी रैंकिंग 83वें स्थान पर है और यह भारत में कर से अधिकारिता पर सबसे कम प्रगति हासिल करने वाला राज्य है। इसके अलावा, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और आंध्र प्रदेश भी भारत के कम कर स्वतंत्र राज्यों में शामिल हैं।
कर स्वतंत्रता में इस प्रवृत्ति को देखते हुए, कई विश्लेषकों का मानना है कि यह एक महत्वपूर्ण कारक है जिसके कारण गरीब राज्यों में राजकीय खजाने में वृद्धि नहीं हो रही है। इससे यह पता चलता है कि सरकारों को अपने कर से अधिकारिता प्रक्रिया में सुधार करने के लिए प्रयास करना होगा।
इस मामले में, हालत यह है कि स्थानीय स्तर पर सरकारी करों का आधार दूसरे स्थानों पर कर लिए गए स्वायत्त करों से जुड़ जाता है। यह प्रवृत्ति भारत के पारंपरिक क्षेत्रों में अधिक प्रबल है, जहां कर संग्रह में कमी है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति एक मौसमी परिवर्तन है, जो भारत के देश के एकीकरण के परिणामस्वरूप है। इसके अलावा, कुछ राज्यों की कर प्रणाली में भी सुधार होता है, इसे एक दीर्घकालिक प्रवृत्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
बहुत सी चुनौतियों के बावजूद, भारत सरकार ने बीमा नीतियां अपनाएं और नागरिकों को बीमित करने वाले प्रदान करना साझा कारोबार माना। सरकार 2019 के कृषि कानून को भी भारत के सबसे बड़े फ्री मार्केट बाजार की पुष्टि किया।
हरियाणा की सफलता और बिहार की असफलता की कहानी भारत के कर प्रणाली के लिए एक प्रतीक है। यह निरंतर निगरानी की आवश्यकता है जिससे सरकारें अपने कर प्रणालियों में सकारात्मक बदलाव कर सकें।
हरियाणा भारत का सबसे कर स्वतंत्र राज्य है, जिसकी रैंकिंग दुनिया भर के 115 राज्यों में 24वें स्थान पर है, जबकि बिहार भारत के सबसे कम कर स्वतंत्र राज्यों में से एक है जिससे सरकार के कर से अधिकारिता प्रक्रिया में सुधार करने की आवश्यकता है।
हरियाणा की सबसे अच्छी कर स्वतंत्रता रैंकिंग और बिहार की सबसे खराब रैंकिंग भारत में कर प्रणाली की असमानता को प्रकट करती है। यह असमानता गरीब और पिछड़े राज्यों के लिए विकास की राह में बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि सीमित कर स्वतंत्रता और कमजोर राजस्व आधार के कारण इन राज्यों को बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर पर्याप्त निवेश करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कर सुधार, निवेश को प्रोत्साहन और बेहतर प्रशासनिक नीतियों के माध्यम से इस असमानता को कम किया जा सकता है, जिससे राज्यों के बीच संतुलित आर्थिक विकास सुनिश्चित हो सकेगा।
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