ग्रामीणों के अनुसार, बच्चे डैम के पास नहाने गए थे, लेकिन गहरे पानी में डूब गए। घटना के वक्त डैम के आसपास मौजूद लोगों ने जैसे ही शोर सुना, वे तुरंत बच्चों को बचाने के लिए आगे बढ़े। लेकिन समय रहते बच्चों को बचाया नहीं जा सका।
हादसे की खबर मिलते ही बच्चों के रोते-बिलखते परिजन और सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौके पर दौड़ पड़े। पुलिस और अन्य स्थानीय अधिकारियों ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर बच्चों के शव को बरामद किया और उन्हें निकटतम अस्पताल पहुंचाया गया।
मृत बच्चों की पहचान शिवम (9 वर्ष), रोहन (7 वर्ष) और अंशुल (8 वर्ष) के रूप में हुई है। बच्चों के परिवार ने घटना के लिए नटीपीसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने घटनास्थल से जानकारी जुटानी शुरू कर दी है और आरोपियों की पहचान करने के लिए जांच कर रही है।
एनटीपीसी डैम के पास नहाने की मनानी के लिए किया जाता है, लेकिन प्रशासन ने कहा है कि नहाने की अनुमति नहीं है। मुजफ्फरपुर के एसडीएम ने कहा है कि डैम के आसपास किसी भी प्रकार की गतिविधि पर पाबंदी लगा दी गई है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कांटी में रह रहे स्थानीय लोगों ने घटना की निंदा की और कहा है कि सरकार को बच्चे नहाने के लिए डैम के पास आने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। सार्वजनिक प्रतिक्रिया में कहा गया है कि बच्चों के पिता को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने अपने बच्चों को डैम के पास नहलाने के लिए भेजा था।
इस घटना के बाद, स्थानीय लोगों ने डैम के पास किसी भी प्रकार की गतिविधि करने से इनकार कर दिया है। घटना के संबंध में कई राजनीतिक दलों ने भी सरकार को जवाबदेह ठहराया है। एनटीपीसी में सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है और घटना के बाद सरकार की नीतियों और कार्रवाई पर नज़रें टिक गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से एक महत्वपूर्ण सबक सीखा जा सकता है और स्थानीय सरकार को बच्चों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने चाहिए। घटना के बाद, स्थानीय अधिकारियों ने बच्चों के शव को सुरक्षित तरीके से शामिल करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है।
Insight: This development highlights evolving dynamics and may have broader implications in the near term.
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