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Bihar Politics: जेडीयू कार्यालय में हंगामा, मोदी पोस्टरों पर कालिख; ‘बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं चलेगा’ के नारे

बिहार की राजनीति इन दिनों बेहद उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रही है। सत्ता के गलियारों में अचानक बढ़ी हलचल के बीच पटना स्थित जनता दल (यूनाइटेड) यानी जेडीयू के दफ्तर में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया जब प्रधानमंत्री के पोस्टरों पर कालिख पोत दी गई और कार्यकर्ताओं ने “बीजेपी का मुख्यमंत्री मंजूर नहीं” के नारे लगाए। इस घटना ने राज्य की सियासत को एक नई दिशा दे दी है और एनडीए गठबंधन के भीतर संभावित तनाव को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है।

घटना उस समय सामने आई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों और संभावित सत्ता परिवर्तन की अटकलों ने जेडीयू कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष पैदा कर दिया। कई कार्यकर्ताओं ने इसे पार्टी के भविष्य के लिए खतरा बताया और विरोध प्रदर्शन करते हुए पार्टी कार्यालय के बाहर और अंदर जमकर हंगामा किया।


क्या हुआ जेडीयू कार्यालय में?

पटना में स्थित जेडीयू के मुख्य कार्यालय में अचानक कार्यकर्ताओं की भीड़ जुट गई। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के पोस्टरों पर कालिख पोत दी और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कई जगहों पर पोस्टर फाड़े गए और कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शनकारी बार-बार यह नारा लगा रहे थे—
“बीजेपी का मुख्यमंत्री मंजूर नहीं” और “नीतीश ही बिहार के नेता हैं”

कई कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अगर मुख्यमंत्री पद भाजपा को दिया गया तो इससे जेडीयू कमजोर हो जाएगी और पार्टी के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो सकता है। यही वजह है कि उन्होंने खुलकर विरोध दर्ज कराया।


नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर से बढ़ा विवाद

दरअसल, पूरे विवाद की जड़ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का फैसला बताया जा रहा है। हाल ही में उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया, जिसके बाद यह अटकलें तेज हो गईं कि वे मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं।

इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में कई नए सवाल खड़े हो गए—

  • अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं तो नया मुख्यमंत्री कौन होगा?
  • क्या भाजपा को यह पद मिलेगा?
  • या जेडीयू ही मुख्यमंत्री बनाए रखेगी?

इन्हीं सवालों ने कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष को हवा दी और विरोध प्रदर्शन का रूप ले लिया।


कार्यकर्ताओं की नाराजगी की असली वजह

जेडीयू के कई कार्यकर्ता मानते हैं कि पार्टी की पहचान और मजबूती मुख्य रूप से नीतीश कुमार के नेतृत्व पर टिकी हुई है। इसलिए उनका मुख्यमंत्री पद छोड़ना पार्टी के लिए राजनीतिक जोखिम माना जा रहा है।

कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि:

  • नीतीश कुमार ही वह नेता हैं जिन पर पार्टी के कार्यकर्ताओं का सबसे ज्यादा भरोसा है।
  • अगर वे सक्रिय रूप से राज्य की राजनीति से दूर होते हैं तो नेतृत्व का संकट पैदा हो सकता है।
  • इससे आगामी चुनावों में पार्टी की स्थिति कमजोर पड़ सकती है।

इसी कारण कई कार्यकर्ता चाहते हैं कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर बने रहें और राज्यसभा जाने के फैसले पर पुनर्विचार करें।


बीजेपी CM को लेकर बढ़ी सियासी चर्चा

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों के बाद यह भी चर्चा तेज हो गई कि बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक भाजपा के भीतर मुख्यमंत्री पद के लिए कई नामों पर चर्चा चल रही है, जिनमें कुछ प्रमुख नेता शामिल हैं। हालांकि पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर पूरी सहमति नहीं बन पाई है और कई गुटों के बीच मतभेद सामने आए हैं।

यही वजह है कि जेडीयू कार्यकर्ताओं में यह आशंका बढ़ गई कि अगर भाजपा का मुख्यमंत्री बना तो जेडीयू की राजनीतिक भूमिका सीमित हो सकती है।


एनडीए गठबंधन के भविष्य पर सवाल

जेडीयू और भाजपा बिहार में लंबे समय से एनडीए के सहयोगी रहे हैं, लेकिन समय-समय पर दोनों दलों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि:

  • मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद अगर बढ़ता है तो गठबंधन पर असर पड़ सकता है।
  • जेडीयू के अंदर की नाराजगी भाजपा के साथ रिश्तों को प्रभावित कर सकती है।
  • विपक्षी दल इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार बना सकते हैं।

हालांकि फिलहाल दोनों दलों के शीर्ष नेता स्थिति को संभालने की कोशिश में लगे हुए हैं।


विपक्ष ने साधा निशाना

इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्षी दलों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष का कहना है कि यह घटना एनडीए के भीतर बढ़ती दरार का संकेत है।

कुछ विपक्षी नेताओं का आरोप है कि भाजपा धीरे-धीरे अपने सहयोगियों को कमजोर कर खुद सत्ता पर कब्जा करने की रणनीति अपनाती है। वहीं भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गठबंधन मजबूत है और किसी तरह का संकट नहीं है।


नई सरकार को लेकर भी अटकलें

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा चल रही है कि बिहार में नई सरकार का गठन अलग तरीके से हो सकता है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आने वाले समय में सरकार की संरचना बदल सकती है और उपमुख्यमंत्री पद की संख्या भी कम की जा सकती है।

हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

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