Pappu Yadav बेउर जेल से रिहा होते ही पहले से अधिक आक्रामक अंदाज में नजर आए। मीडिया से बातचीत में पूर्णिया सांसद ने अपनी गिरफ्तारी को ‘अन्याय’ करार दिया और बिहार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि “बिहार की गिरती व्यवस्था” के खिलाफ है।
बिहार की मौजूदा राजनीति पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज की राजनीति बदले की भावना से संचालित हो रही है। उन्होंने इसे अंग्रेजी हुकूमत से भी बदतर बताते हुए कहा कि उस समय कम से कम संघर्ष का स्पष्ट मोर्चा था, लेकिन आज “दोस्त और दुश्मन की पहचान मुश्किल हो गई है।” उन्होंने सत्ता पक्ष पर ‘चरित्रहीन राजनीति’ करने का आरोप लगाया।
पप्पू यादव ने दावा किया कि बिहार में हर दिन 100 से 150 बच्चियां लापता हो रही हैं। उन्होंने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां यह आंकड़ा 53 तक पहुंचा है, लेकिन बिहार में स्थिति कहीं अधिक भयावह है।
दरभंगा में 6 साल की बच्ची और गया में 14 साल की किशोरी के साथ हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने नेताओं और समाज की चुप्पी पर सवाल उठाए। भावुक होते हुए सांसद ने कहा, “बेटियों की इज्जत की रक्षा के लिए मैं 100 बार भी मरना पसंद करूंगा।”
अपनी सेहत और जेल के अनुभव साझा करते हुए सांसद ने प्रशासन की संवेदनहीनता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान Patna Medical College and Hospital (PMCH) में उन्हें 24 घंटे में एक बोतल पानी तक उपलब्ध नहीं कराया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि जेल के भीतर उनकी जान को खतरा था और पूरे मामले की शिकायत वे विधानसभा अध्यक्ष से करेंगे। उन्होंने प्रशासनिक कार्यप्रणाली की जांच की मांग करने की बात कही।
पप्पू यादव के इन बयानों से स्पष्ट है कि जेल से बाहर आने के बाद वे बिहार की राजनीति में आक्रामक तेवर के साथ सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी हलचल तेज होने के आसार हैं।