बिहार की राजनीति बवंडर कभी भी बिहार विधानसभा को किया जा सकता है भंग जदयू और राजद का आपस में हो सकता है विलय।
विपक्षी एकता को लेकर नीतीश का मिशन 2024 की शुरुआत जिस तरीके से हुई है उससे नीतीश काफी उत्साहित है और कहा ये जा रहा है कि नीतीश हाल के दिनों में बेहद चौकाने वाले निर्णय ले सकते हैं और इसको लेकर नीतीश कुमार और लालू प्रसाद के बीच लगभग सहमति बन गयी है ।
जो खबर आ रही है उसके अनुसार नीतीश बिहार विधानसभा को भंग कर चुनाव में जाना चाह रहे हैं और उससे पहले नीतीश राजद और जदयू के विलय की घोषणा कर देश स्तर पर ये संदेश देना चाहते हैं कि देश को बचाने के लिए हमने अपनी पार्टी तक को दांव पर लगा दिये।
क्यों कि दिल्ली यात्रा के दौरान विपक्षी दल के नेताओं में नीतीश कुमार को लेकर जो उत्साह देखने को मिल रहा है उससे ये साफ हो गया है कि नीतीश कुमार देश के सारे विपक्षी पार्टियों को एक मंच पर लाने में कामयाब हो सकते हैं। क्यों कि नीतीश कुमार दिल्ली से गया के रास्ते में ही थे कि ममता बनर्जी ने नीतीश के अभियान में साथ आने की घोषणा कर नीतीश के अभियान को और बल दिया है ।
1– राजद जदयू का विलय ऐसा कहा जा रहा है कि बिहार से बाहर निकलने से पहले नीतीश बिहार की राजनीति में ऐसी किलाबंदी चाह रहे हैं ताकि बीजेपी की सम्भावना बिहार की राजनीति में पूरी तरह से खत्म हो जाये और इसके लिए 2015 के परिणाम से सीख लेते हुए नीतीश और लालू इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के आपसी रिश्तों में जो खाई है उसको पाटने का वक्त नहीं है और इस बार बड़े भाई छोटे भाई के लिए भी कोई जगह ना रहे इसके लिए दोनों पार्टी के आपस में ही विलय कर दिया जाए।
फिलहाल जिस फॉर्मूला पर बातचीत चल रही है उसके अनुसार नीतीश कुमार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ साथ 2024 के लोकसभा चुनाव तक बिहार के मुख्यमंत्री बने रहेंगे और उसके बाद तेजस्वी को पार्टी और सरकार सौंप देंगे वैसे इस फॉर्मूला पर बीजेपी से गठबंधन तोड़ने से पहले नीतीश की तेजस्वी और लालू प्रसाद से कई दौर की बातचीत हो चुकी है। देश स्तर पर विपक्षी एकता का स्वरुप जैसे जैसे शक्ल लेता जाएगा नीतीश बिहार में इस अभियान को आगे बढ़ाते जाएंगे क्यों कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव की बात करे तो एनडीए में भाजपा 121 और जदयू 122 सीटों में चुनाव लड़ी थी और उसमें से सात सीट जदयू ने हम को दिए थे इसी तरह महागठबंधन में 144 सीटों पर RJD, 70 सीटों पर कांग्रेस और 29 पर लेफ्ट पार्टियां चुनाव लड़ी थी।2020 के चुनाव में भाजपा 19.46%, जदयू 15.39%,राजद 23.11% वोट मिला था वही कांग्रेस को 09.48% ,भाकपा माले को लगभग 4 प्रतिशत सीबीआई 0.83% 02,माकपा 0.65%रालोसपा 01.77% मतलब सबके सब साथ आ जाये तो लगभग 55 प्रतिशत वोट का शेयर हो जायेंगा वही 2020 के चुनाव में जो ओवैसी फैक्टर राजद गठबंधन को जो नुकसान पहुंचाया उसे कम किया जा सकता है।वहीं जदयू और राजद के बीच सीट बंटवारे को लेकर कोई समस्या नहीं रहेगा जब पार्टी का एक दूसरे में विलय कर दिया जाएगा ।
विलय को लेकर नीतीश गंभीर इसलिए हैं कि इसके सहारे दो संदेश देना चाह रहे हैं एक नीतीश पलटूराम के इमेज से बाहर निकल जाएंगे और बिहार की राजनीति जो अति पिछड़ा ,महादलित और पसमांदा में बट गया था वो एक बार फिर से साथ आ जाएंगे वही देश स्तर पर पार्टी के विलय के सहारे संदेश देने कि कोशिश होगी कि मोदी को लेकर बिहार किस स्तर पर सोच रहा है।
2— जल्द ही होगा बिहार में मध्यावधि चुनाव बिहार में मध्यावधि चुनाव होगा यह तय हो गया है बस इस बात को लेकर मंथन चल रहा है कि गुजरात के साथ दिसंबर में चुनाव में जाया जाये या फिर 2023 में होने वाले राजस्थान,मध्य प्रदेश के चुनाव के साथ जाया जाए, क्यों कि एक राय ये भी बन रही है कि गुजरात विधानसभा चुनाव में विपक्षी एकता के सहारे मोदी को पहले गुजरात में ही घेरा जाए और इसके लिए नीतीश कुमार सहित विपक्ष के तमाम बड़े चेहरा गुजरात चुनाव में कैम्प करे ,वही दूसरा धरा का यह मानना है कि बिहार से ही बीजेपी मुक्त भारत की शुरुआत कि जाए और इसके लिए गुजरात के साथ बिहार का भी चुनाव करना बेहतर होगा।देखिए आगे आगे होता है क्या लेकिन इतना तो तय हो गया कि अब खेला होबे ।
भागलपुर । प्रशांत किशोर ने भागलपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नीतीश कुमार द्वारा उनपर किए गए टिप्पणी का जवाब दिया है। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार जी यहां के बुजुर्ग नेता हैं, वो कुछ बोलना चाहते हैं तो उनको बोलने दीजिए।
व्यक्तिगत टीका टिप्पणी करना ठीक नहीं है। अगर उन्होंने कुछ कहा है तो वो उनकी सोच है। कौन बीजेपी के साथ काम कर रहा है, जहां तक मैं और आपलोग जानते हैं अभी 1 महीना पहले तक नीतीश जी बीजेपी के साथ ही थे। नीतीश कुमार अगर किसी को इस तरह का सर्टिफिकेट दे रहे हैं तो ये हास्यास्पद ही है।”
नीतीश कुमार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, “17 साल मुख्यमंत्री रहने के बाद आपको याद आया कि 10 लाख नौकरी दी जा सकती है, पहले ही दे देना चाहिए था। लेकिन चलिए अब नीतीश कुमार इतने बड़े नेता हैं, उनको A से Z तक पता है। दूसरे को ABC नहीं आता है।
उन्होंने कहा है कि 10 लाख नौकरी देंगे, अगर दे देंगे तो हम जैसे लोगों को अभियान चलाने की क्या जरूरत है। अगर 10 लाख नौकरी दे देते हैं तो उनको नेता मानकर जैसे 2015 में उनका काम कर रहे थे, फिर से उनका काम करेंगे। उनका झंडा लेकर घूमेंगे। 10 लाख लोगों को नौकरी दे कर दिखाइए साल भर में। 12 महीना में 1 महीना हो गया है। 12 महीना के बाद उनसे पूछेंगे कि किसको ABC का ज्ञान है और किसको XYZ का ज्ञान है।
अगर 10 लाख नौकरी दे दिए तो मान लेंगे कि सर्वव्यापी और सर्वज्ञानी आप ही है। एक भगवान ऊपर हैं और एक नीचे आप हैं।”
जहानाबाद में संगठन की समीक्षा और विस्तार को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास की बैठक आयोजित की गई। शहर के एक निजी हॉल में आयोजित बैठक की अध्यक्षता जिला परिषद अध्यक्ष रानी कुमारी और जिला अध्यक्ष कुंदन शर्मा ने किया।
बैठक में संगठन की मजबूती को लेकर चर्चा की गई। मुख्य अतिथि के रूप में एलजेपी संगठन के महा मंत्री रविंद्र सिंह ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि कमेटी का गठन करना होगा।
रविंद्र सिंह ने बताया कि जो परिस्थिति बिहार में बन रही है चुनाव की घोषणा कभी भी हो सकती है। हर जिले में पार्टी का विस्तार किया जा रहा है।
मुजफ्फरपुर में सम्मान समारोह कार्यक्रम में पहुंचे बिहार के मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे मंत्री डॉ. संतोष सुमन मांझी ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा।
वहीं मंत्री संतोष मांझी ने मुजफ्फरपुर में रोड शो भी निकाला जिसमें काफ़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए.मंत्री संतोष मांझी ने कहा कि आज भाजपा वाले जंगलराज-जंगलराज का राग अलाप रहे हैं। लेकिन, जब नीतीश कुमार उनकी पार्टी में थे मंगलराज था। अब जंगलराज हो गया। ये भाजपा वालों की पुरानी आदत है।
मणिपुर में जदयू विधायकों द्वारा भाजपा में शामिल होने की बात पर उन्होंने कहा कि ये हमेशा से इनकी आदत रही है। जनता जब उन्हें नकारती है तो इस तरह का मैसेज देते हैं कि हम तोड़-जोड़ कर सकते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। जनता उन्हें आने वाले समय मे जवाब देगी।
मंत्री डॉ. मांझी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक परिपक्व और अनुभवी नेता हैं। उनमें वो सारे गुण और काबिलियत हैं, जो एक प्रधानमंत्री में होने चाहिए। हालांकि ये उनकी निजी राय है कि वे क्या सोचते हैं। लेकिन, व्यक्तिगत तौर पर अगर हमसे पूछा जाएगा तो मैं यही कहूंगा कि अगर वे बिहार को चला सकते हैं तो पूरे देश को चला सकते हैं। ये बिहार के लिए गौरव की बात होगी कि बिहार का बेटा देश का प्रधानमंत्री बने।
2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में कोई पांच माह झारखंड में रहने का मौका मिला था जिस दौरान झारखंड की सामाजिक ,राजनीतिक और आर्थिक मिजाज को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी अपनी पूरी ताकत झोंक दिया था, पैसा की बात छोड़िए हर बूथ पर देश के अलग अलग हिस्सों से आदिवासी ,पिछड़ा ,सवर्ण और बनिया जाति के लोगों को उतार दिया था।
इतना ही नहीं बाबूलाल मरांडी के सहारे बीजेपी हर विधानसभा क्षेत्र में महागठबंधन के सामाजिक समीकरण में सेंधमारी के लिए बहुत ही सोच समझ कर प्रत्याशी खड़ा किये थे और बीजेपी पैसा से लेकर सभी तरह का संसाधन मुहैया करा रहा था । इसी दौरान चुनावी मिजाज को समझने के लिए सारंडा जंगल में स्थित आदिवासियों के गांव में गये, पुरुष से बात करना मुश्किल हो रहा था पहले हड़िया पीने के लिए पैसा दीजिए फिर बात करेंगे पत्रकार हैं तो क्या हुआ।
जहां तक मुझे याद है बहस चल ही रहा था कि एक महिला दौड़े दौड़े आयी और बोली छोड़ी छोड़ी इधर आइए । फिर हम लोग उस महिला के साथ चल दिये वो अपने घर के पीछे ले गयी जहां दोपहर के समय काम करके लौटी हर उम्र की महिलाएं पेड़ की नीचे बैठकर आराम कर रही थी एक घंटे तक बात हुई उसी दौरान बाबूलाल मरांडी के उम्मीदवार का क्या होगा वो भी तो आदिवासी है, तपाक से एक महिला बोलती है यह रघुवर के लिए काम कर रहा है । मैं तो हैरान रह गया जहां ना अखबार पहुंचता है ना टीवी है ना सोशल मीडिया है वहां ये बात कैसे पहुंच गई कि बाबू लाल बीजेपी के लिए काम कर रहा है। इस आदिवासी महिला के इस संवाद के साथ ही मुझे लग गया कि बीजेपी के लिए इस बार कोई गुंजाइश नहीं है। वैसे इस बात की चर्चा मैंने इसलिए किया कि बिहार की तरह ही झारखंड के हर व्यक्ति में राजनीतिक समझ है।
अब विषय वस्तु पर आते हैं पिछले छह माह से बीजेपी झारखंड की सरकार को अस्थिर करने में लगी हुई है और इस खेल में मीडिया,कोर्ट,राज्यपाल,चुनाव आयोग ईडी और सीबीआई पूरी ईमानदारी के साथ खड़ी है फिर भी हेमंत पकड़ में नहीं आ रहा है।वैसे बीजेपी इस खेल को अंजाम तक पहुंचाने के लिए क्या क्या बिसात बिछा रखी है इस बार के रांची प्रवास के दौरान एक बार फिर से देखने को मिला।
1– बीजेपी का क्या है मिशन झारखंड भाजपा ने ऑफिस ऑफ प्रॉफिट और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9a का हवाला देते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग निर्वाचन आयोग से की थी इस पर आयोग निर्णय लेकर राज्यपाल को एक सप्ताह पहले ही फैसले की कॉपी भेज चुकी है लेकिन राज्यपाल अभी तक उस फैसले पर अमल रोक रखा है । जानकार बता रहे हैं कि शुरुआत में इसी फैसले के आधार पर बीजेपी हेमंत से 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ी डील करना चाहता था लेकिन पूरी कोशिश के बावजूद हेमंत तैयार नहीं हुआ फिर यह तय हुआ कि हेमंत की सदस्यता समाप्त कर दी जाये और चुनाव लड़ने से रोका नहीं जाए और इस बीच 15 विधायक को किसी भी स्थिति में तोड़ा जाये ताकि दोबारा शपथ लेने के बाद जब विधानसभा में हेमंत को बहुमत साबित करने को कहां जाये तो सरकार अल्पमत में आ जाए और ऐसी स्थिति में झारखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाएगा लेकिन त्रिपाठी जी 50 करोड़ तक पहुंच गये फिर भी पांच से ज्यादा अभी तक नहीं जुटा पाए हैं फिर भरोसा नहीं है कि पैसा लेने का बाद भी विधायकी से त्यागपत्र देगा कि नहीं देगा ।
2–कांग्रेस को तोड़ने में आरपीएन सिंह का इस्तमाल कर रही है बीजेपी अभी वर्तमान में जो बीजेपी है वह जब किसी मिशन पर काम करना शुरु करती है तो तोड़फोड़ अगर गोवा में हो रहा है तो निशाने पर महाराष्ट्र रहता है। इसी तरह यूपी चुनाव से ठीक पहले झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह को बीजेपी कांग्रेस में सिर्फ यूपी के लिए नहीं शामिल कराया था उसका लक्ष्य झारखंड था। हालांकि इस खेल को कांग्रेस समझ गयी और जिसके सहारे आरपीएन सिंह कांग्रेस को तोड़ रहे थे उसका ऑपरेशन खेला शुरु होने से पहले ही कांग्रेस ,ममता और हेमंत ने मिलकर कर दिया जिस वजह से यह खेल लम्बा खीच रहा है।
3–हेमंत झारखंड स्वाभिमान जगाने में कामयाब रहे बीजेपी के मिशन झारखंड में हेमंत को घेरने के लिए बीजेपी चारो और हमला कर रही है इस हमले में दुमका की बेटी अंकिता सिंह की हत्या का भी सहारा लिया गया ताकि प्रदेश में हिंदू मुसलमान का विवाद गहराये और कानून व्यवस्था बिगड़े ।लेकिन इन सारे व्यवधानों के बीच सोरेन अपने विधायकों को यह समझाने में कामयाब हो गये कि यह मत समझे यह हमला सिर्फ मेरे उपर है यह हमला झारखंड के आदिवासी और मूल निवासी पर है और इस बार कमजोर पड़े तो फिर उठने में कितना वर्ष लग जाएगा कहना मुश्किल है, यह बात झारखंड के विधायकों में इस तरह बैठ गया है कि अब किसी भी स्थिति में हेमंत का साथ छोड़ने को तैयार नहीं है । हमारी तीन चार विधायक से बात हुई सबका यही कहना था संतोष जी झारखंड में जमीन के पांच फीट अंदर पैसा ही पैसा है हम लोग सीधा ठहरे कौन कब कहां कानून में फसा दे पता ही नहीं चलता है ऐसे में कब तक डरते रहेंगे जो होगा देखा जायेगा लेकिन इस बार झुकेंगे नहीं पैसा हम लोगों के लिए कोई मायने नहीं रखता है देखते ही ना हम लोगों का खर्चा ही क्या है दो चार हजार रुपया रोज का काफी है इसलिए पैसा से कोई खरीद नहीं सकता। यही ताकत हेमंत को मोदी और शाह से सीधी लड़ाई में भी अंतिम क्षण तक खड़ा कर रखा है वैसे विधानसभा का सत्र बुला कर हेमंत ने बीजेपी को सीधी चुनौती दी है।
4–रघुवर की कमजोरी भी मिशन झारखंड में बड़ा बाधक है इन सबके बावजूद मोदी और शाह का जो रघुवर प्रेम है वो मिशन झारखंड के लिए एक बड़ी बाधक है क्यों कि बाबू लाल ,अर्जुन मुंडा सहित बीजेपी के अधिकांश नेता इस खेल में रघुवर की सक्रियता के कारण दिल से लगा हुआ नहीं है साथ ही बीजेपी का कोई भी विधायक चुनाव में जाने को तैयार नहीं है इस वजह से भी बीजेपी को निर्णय लेने में परेशानी हो रही है । वैसे झारखंड के राजनीतिक संकट का परिणाम जो हो लेकिन यह बात तो आ ही गयी कि मजबूत इच्छाशक्ति हो तो मोदी और शाह जैसे योद्धा से भी मजबूती के साथ लड़ा जा सकता है ।
2024 की राजनीतिक बिसात बिझनी शुरु हो गयी है और स्थिति ऐसी बनती जा रही है कि इसकी भी शुरुआत बिहार से ही होगा ।
बुधवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद कहा कि नीतीश कुमार से 2024 लोकसभा चुनावों में विपक्ष को एकजुट करने के मुद्दे पर सहमति बनी है।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार से 2024 लोकसभा चुनाव में विपक्ष की जीत और भाजपा को देश से विदा करने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर चुनाव लड़ना होगा।
एक दिवसीय बिहार दौरे पर आए तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने आज देर शाम पटना सिटी का दौरा कर तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब पहुंचकर गुरु के दरबार में मत्था टेका।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री को सिरोपा भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर के चंद्रशेखर राव ने दशमेश पिता गुरु गोविंद सिंह जी महाराज से जुड़ी हुई स्मृतियों का जहां दर्शन किया। वही इस संबंध में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से विशेष जानकारी भी प्राप्त की। हालांकि इस दौरान के चंद्रशेखर राव ने गुरु घर का हवाला देते हुए मीडिया से बात करने से सीधे तौर पर इंकार कर दिया।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के साथ मौजूद बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने तख्त श्री हरमंदिर जी पहुंचकर गुरु के दरबार में मत्था टेकने की इच्छा जताई थी। उन्होंने बताया कि बिहार पहुंचकर तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने काफी खुशी जाहिर की है।
तेजस्वी यादव का कहना था कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने देश के विकास को लेकर साथ चलने की सहमति जताई है।
जहानाबाद पहुंचे सुशील कुमार मोदी ने नीतीश कुमार, लालू परिवार और साथ ही महागठबंधन पर एक बार फिर से जमकर हमला बोला।
सुशील मोदी ने कहा कि कई राज्यों के मुख्यमंत्री पीएम बनने का सपना देख रहे हैं. अगर ऐसा होता भी है तो सोच लीजिए देश की स्थिति क्या हो जाएगी. तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर के बिहार दौरे को लेकर हमला बोलते हुए सुशील मोदी ने कहा कि तेलंगाना की स्थिति खुद ही खस्ताहाल है और उनका जनाधार वहां घट रहा है। बाई इलेक्शन में वह हार चुके हैं. जो लोगों अपने राज्य में नकार दिए जा रहे हैं और जिन का जनाधार घट रहा है वही लोग बीजेपी के खिलाफ फ्रंट बनाने की बात कर रहे हैं।
सुशील मोदी ने तंज कसते हुए कहा कि केसीआर गैर कांग्रेसी और गैर भाजपा का फ्रंट बनाने की बात कर रहे हैं. जितने भी राज्य के मुख्यमंत्री हैं वह पीएम बनने का सपना देख रहे हैं. सुशील मोदी ने कहा कि राजद कभी भी नीतीश कुमार को झटका दे सकती है और अपना मुख्यमंत्री बना सकती है.
क्योंकि बिहार विधानसभा का अध्यक्ष राजद का है और जदयू को तोड़कर राजद अपना मुख्यमंत्री बना लेगी. सीएम आपकी बात को गंभीरता से नहीं लेते हैं. इस पर सुशील मोदी ने कहा कि सीएम बहुत चीजों को गंभीरता से लेते हैं लेकिन उनके गंभीर सवालों को चुप्पी साध लेते हैं.सुशील मोदी ने कहा कि सीएम नीतीश कुमार गंभीर सवालों पर चुप्पी साध लेते हैं और हल्की फुल्की बात करके डायवर्ट कर देते हैं।
उन्होंने कहा कि सीएम मुझ पर दया करने के बजाय अपनी चिंता करें कि वह कब तक सीएम रहेंगे. दरअसल सुशील मोदी जहानाबाद में भाजपा कार्यकर्ताओं की आयोजित समीक्षा बैठक में भाग लेने आए थे जहां उनका कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया. इससे पहले भी सुशील मोदी सीएम पर हमला करते हैं और नीतीश कुमार भी उनको करारा जवाब देते रहे हैं।
पटना, 25 अगस्त 2022। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि पिछले साल राजद के बड़े राजकुमार तेज प्रताप यादव ने गुरुग्राम में जिस मॉल के बनवाने में तेजस्वी प्रसाद यादव के सलाहकार संजय यादव के लगे होने की बात कही थी, वह किसका है?
तेज प्रताप यादव के आरोप का जवाव दें डिप्टी सीएम
गुरुग्राम के मॉल को लेकर सीबीआई ने कुछ नहीं कहा
वे बतायें कि रेलवे कर्मचारी हृदयानंद चौधरी ने हेमा यादव को जमीन क्यों दान की ?
श्री सुशील मोदी ने कहा कि तेज प्रताप यादव ने संजय यादव को दुर्योधन और प्रदेश राजद अध्यक्ष जगदानंद को शिशुपाल बताते हुए जिस मॉल का जिक्र किया था, उस पर डिप्टी सीएम तेजस्वी प्रसाद यादव ने चुप्पी क्यों साध ली?
उन्होंने कहा कि सीबीआई ने गुरुग्राम वाले मॉल के स्वामित्व को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है , लेकिन यदि मीडिया एक वर्ग ने मॉल से उनका नाम जोड़ कर खबर चलायी है, तो उन्हें उस मीडिया के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा दर्ज कराना चाहिए।
श्री मोदी ने कहा कि यदि लालू प्रसाद के कार्यकाल में रेलवे को मुनाफा हुआ, तो उस समय रेलवे के होटल बेचने और रेलवे की नौकरी के बदले लोगों की कीमती जमीन लिखवाने के मामले क्यों सामने आए?
उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव इसका जवाब दें कि रेलवे में चतुर्थ वर्ग के कर्मचारी हृदयानंद चौधरी ने पटना की 70 लाख रुपये मूल्य की 7.76 डिसमल जमीन बहन हेमा यादव को क्यों दान कर दी?
उन्होंने कहा कि सीबीआई ने एक दर्जन से अधिक लोगों पर मामले दर्ज किये हैं, जिनमें रेलवे की नौकरी देने के बदले जमीन लिखवा लेने के सबूत हैं।
श्री मोदी ने कहा कि लालू प्रसाद के मंत्री रहते रेलवे की क्या हालत हुई थी और कितना फायदा हुआ, इस पर पूर्व रेलमंत्री नीतीश कुमार ही बेहतर जानकारी दे सकते हैं।
खबर हाजीपुर से है। जहाँ पटना से दरभंगा जाने के दौरान लोजपा रामविलास के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान हाजीपुर पहुंचे। जहां उन्होंने चुहरमल नगर में स्थापित रामविलास पासवान की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
और साथ ही नीतीश कुमार पर जमकर बरसे। चिराग ने कहा कि नीतीश कुमार को विश्वास मत की चिंता है जबकि जनता का विश्वास वो खो चुके है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की सरकार 6 माह से अधिक नहीं चल सकती। और बिहार में मध्यावदी चुनाव होगा। लेकिन इस बार नीतीश कुमार का खाता भी नहीं खुलेगा।
साथ शिक्षक अभ्यर्थियों पर हुए लाठी चार्ज की निंदा करते हुए सरकार पर जमकर प्रहार किया।
दरभंगा । प्रशांत किशोर मिथिलांचल के अपने दौरे पर आज दरभंगा पहुंचे। दरभंगा में उन्होंने जन सुराज के कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और लोगों से जन सुराज की सोच के बारे में संवाद स्थापित किया। उन्होंने कहा कि बिहार को अगर विकसित राज्यों की श्रेणी में खड़ा करना है तो तीन बिंदुओं पर काम करना होगा – “सही लोग, सही सोच और सामूहिक प्रयास।”
सही लोग, सही सोच और सामूहिक प्रयास से निकलेगा बिहार के विकास का ब्लूप्रिंट
दरभंगा में पत्रकारों से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने “सही लोग, सही सोच और सामूहिक प्रयास को विस्तार से समझाते हुए कहा, “हम 2 अक्तूबर से शुरू हो रहे पदयात्रा के माध्यम से बिहार के हर गांव, प्रखंड में जाना चाहते हैं और हर घर का दरवाजा खटखटाना चाहते हैं, ताकि समाज को मथ कर सही लोगों को चिन्हित किया जा सके। ऐसे सभी सही लोगों के माध्यम से हम बिहार के वास्तविक मुद्दों को समझने का प्रयास करेंगे। सही सोच का अर्थ है बिहार के विकास के लिए प्रयास करने की सोच और इसके लिए जबतक सामूहिक प्रयास नहीं होगा, कोई व्यक्ति या कोई दल अकेले बिहार को आगे नहीं बढ़ा सकता है। इसलिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।”
इस पदयात्रा के बाद बिहार के समग्र विकास के लिए 10 सबसे महत्वपूर्ण विषय जैसे शिक्षा, स्वास्थ, सड़क, रोजगार आदि पर एक विस्तृत ब्लूप्रिंट जारी करेंगे और उसमे सिर्फ समस्या नहीं गिनाएंगे बल्कि उसका ठोस समाधान भी बताएंगे। ये पूरा ब्लूप्रिंट जमीन पर लोगों से बात कर बनाई जाएगी, इसके बाद भी अगर कोई व्यक्ति इसमें कुछ सुझाव देना चाहते हैं तो वो भी दे सकते हैं।”
जन सुराज के राजनीतिक दल और प्रशांत किशोर के मुख्यमंत्री बनने पर ये कहा
प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर कहा, “मेरा मकसद सीएम या पीएम बनना नहीं है। मैं अपने जीवनकाल में बिहार को देश के अग्रणी राज्यों में देखना चाहता हूं। मैंने देश के कई राज्यों में काम किया है और बिहार उनके मुकाबले बहुत पीछे है। बिहार से कंप्यूटर, स्टील या कोई भी उत्पाद बाहर नहीं जाता है। बिहार से बाहर अगर कुछ जाता है तो वो है अनस्किल्ड लेबर। बिहार के युवा देश के अलग- अलग राज्यों में सबसे मुश्किल काम करते हैं। मैं इस स्थिति को बदलना चाहता हूं। सीएम या पीएम बनना होता तो किसी पार्टी से कुछ जोड़-तोड़ या समझौता कर के भी बन सकता था। मेरा मकसद बिहार के अच्छे लोगों को राजनीति में लाने का है। मैं सत्ता नहीं व्यवस्था परिवर्तन के लिए संघर्ष करने का प्रयास कर रहा हूं।”
प्रशांत किशोर ने कहा कि पदयात्रा के बाद एक प्रयास किया जाएगा कि जो भी लोग इस अभियान में आगे साथ चलने के लिए तैयार होंगे, उनके साथ राज्य स्तर पर एक अधिवेशन का आयोजन किया जाएगा और इसी में तय होगा कि आगे राजनीतिक दल बनाना है या नहीं बनाना है। उन्होंने कहा कि सभी लोग मिलकर ही आगे का रास्ता तय करेंगे और यह प्रकिया पूरे तौर पर लोकतांत्रिक एवं सामूहिक होगी। प्रशांत किशोर ने जोर देकर कहा अगर कोई दल बनता है तो वो प्रशांत किशोर का दल नहीं होगा, वो उन सारे व्यक्तियों का होगा जो इस सोच से जुड़कर इसके निर्माण में संस्थापक बनेंगे।
महागठबंधन सरकार पर प्रशांत किशोर का हमला जारी, कहा – बहुत दिनों तक नहीं चल सकती 7 दलों की सरकार
प्रशांत किशोर ने महागठबंधन की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि संभव है लोकसभा चुनाव तक ये लोग साथ रहे, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले इसमें फेरबदल संभव है। उन्होंने सरकार की अस्थिरता पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2012 के बाद से बिहार में ये छठवां प्रयोग है जिससे सरकार बदली है, इससे बिहार के विकास पर बुरा असर पड़ा है और विकास की गति धीमी हुई है। नीतीश कुमार की आलोचना करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि वो कुर्सी से चिपक कर बैठ गए हैं, 2014 के नीतीश कुमार और 2022 के नीतीश कुमार में जमीन आसमान का फर्क है।
समस्तीपुर । जन सुराज अभियान के तहत प्रशांत किशोर बिहार के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं। इसी क्रम में वो समस्तीपुर के दो दिवसीय दौरे पर आए हैं। अपने दौरे के दूसरे दिन आज उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जन सुराज की सोच और अपनी रणनीति के बारे में विस्तार से बात की।
बिहार के समग्र विकास का ब्लूप्रिंट ऐसा होगा
समस्तीपुर के एक स्थानीय होटल में पत्रकारों से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, “हम 2 अक्तूबर से शुरू हो रहे पदयात्रा के माध्यम से बिहार के हर गांव, प्रखंड में जाना चाहते हैं और घर का दरवाजा खटखटाना चाहते हैं, ताकि बिहार के वास्तविक मुद्दों को समझ सकें। इसके बाद बिहार के समग्र विकास के लिए 10 सबसे महत्वपूर्ण विषय जैसे शिक्षा, स्वास्थ, सड़क, रोजगार आदि पर एक विस्तृत ब्लूप्रिंट जारी करेंगे और उसमे सिर्फ समस्या नहीं गिनाएंगे बल्कि उसका ठोस समाधान भी बताएंगे। ये पूरा ब्लूप्रिंट जमीन पर लोगों से बात कर बनाई जाएगी, इसके बाद भी अगर कोई व्यक्ति इसमें कुछ सुझाव देना चाहते हैं तो वो भी से सकते हैं।”
जन सुराज के राजनीतिक दल बनने पर प्रशांत किशोर ने ये कहा
प्रशांत किशोर ने कहा कि पदयात्रा के बाद एक प्रयास किया जाएगा कि जो भी लोग इस अभियान में आगे साथ चलने के लिए तैयार होंगे, उनके साथ राज्य स्तर पर एक अधिवेशन का आयोजन किया जाएगा और इसी अधिवेशन में तय होगा कि आगे राजनीतिक दल बनाना है या नहीं बनाना है। उन्होंने कहा कि सभी लोग मिलकर ही आगे का रास्ता तय करेंगे और यह प्रकिया पूरे तौर पर लोकतांत्रिक एवं सामूहिक होगी। प्रशांत किशोर ने जोर देकर कहा अगर कोई दल बनता है तो वो प्रशांत किशोर का दल नहीं होगा, वो उन सारे व्यक्तियों का होगा जो इस सोच से जुड़कर इसके निर्माण में संस्थापक बनेंगे।
महागठबंधन सरकार पर प्रशांत किशोर का हमला जारी, कहा – बहुत दिनों तक नहीं चल सकती 7 दलों की सरकार
प्रशांत किशोर ने बिहार की नई महागठबंधन सरकार को बधाई देते हुए सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा नीतीश कुमार ने गांधी मैदान से 10 लाख नौकरी देने का वादा किया है, अगर ये सरकार ऐसा करती है तो मैं अपने इस पूरे अभियान को वापस ले लूंगा और नीतीश कुमार का समर्थन करूंगा। महागठबंधन की स्थिरता पर संदेह जाहिर करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि ऐसा नहीं लगता है कि 7 दलों का ये महागठबंधन अगले विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक चलेगा।
उन्होंने कहा संभव है कि लोकसभा चुनाव तक ये लोग साथ रहे, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले इसमें फेरबदल संभव है। प्रशांत किशोर ने सरकार की अस्थिरता पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2012 के बाद से बिहार में ये छठवां प्रयोग है जिससे सरकार बदली है, इससे बिहार के विकास पर बुरा असर पड़ा है और विकास की गति धीमी हुई है। नीतीश कुमार की आलोचना करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि वो कुर्सी से चिपक कर बैठ गए हैं, 2014 के नीतीश कुमार और 2022 के नीतीश कुमार में जमीन आसमान का फर्क है और ये जदयू के चुनावी प्रदर्शन में साफ तौर पर देखा जा सकता है।
बिहार में महागठबंधन की नई सरकार के कानून मंत्री कार्तिकेय कुमार सिंह के विवाद पर पूर्व सीएम जीतनराम मांझी ने बड़ा बयान दिया है।
महागठबंधन में शामिल हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम) के चीफ मांझी ने कहा कि नीतीश कुमार न किसी को फंसाते हैं, न किसी को बचाते हैं। एक बार उन्हें भी मुकदमे की वजह से 8 घंटे में मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
इस बैठक में बिहार भाजपा की कोर कमेटी के सभी 20 सदस्य शामिल होंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बिहार विधानसभा और विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष के चुनाव पर मंथन होगा।
साथ ही बिहार में अचानक से NDA में टूट को लेकर भी केंद्रीय नेतृत्व के साथ मंथन करेगी कोर कमेटी। बिहार बीजेपी में सांगठनिक बदलाव को लेकर भी चर्चा हो सकती है।
कल का दिन बिहार भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है। बिहार भाजपा के सभी वरिष्ठ नेता कल दिल्ली में मौजूद रहेंगे।
पटना । राज्य में नगरपालिका का चुनाव सितंबर-अक्टूबर में हो सकता है। राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारी शुरू कर दी है। आयोग ने 248 नगरपालिकाओं में चुनाव के मद्देनजर मतदानकर्मियों की व्यवस्था, मतदान दल के गठन और उनकी ट्रेनिंग को लेकर सभी प्रमंडलीय आयुक्तों व डीएम को मंगलवार को पत्र लिखा है।
ऐसे में यह माना जा रहा है कि आयोग इस महीने के अंत तक चुनाव की घोषणा कर सकता है।
पटना, 31 जुलाई 2022 । ज्ञान भवन, पटना में चल रही भारतीय जनता पार्टी की दो दिवसीय संयुक्त मोर्चा राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक का समापन आज केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के उद्बोधन के साथ हुआ। भारतीय जनता पार्टी संयुक्त मोर्चा राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के संदर्भ में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्री अरुण सिंह की प्रेस वार्ता के मुख्य बिंदु।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी 2024 में लोक सभा चुनाव और 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में लड़ेगी।
श्री शाह ने कहा कि 2024 में पहले से अधिक लोक सभा सीटें जीत करके प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी पुनः केन्द्र में प्रचंड बहुमत से सरकार बनाएगी।
भाजपा 2024 का लोक सभा चुनाव और 2025 में विधानसभा चुनाव भी जदयू गठबंधन के साथ मिलकर लड़ेगी।
माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा जी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने कहा कि हम सबको मिलकर हर घर तिरंगा कार्यक्रम को सफल बनाना है
13, 14 और 15 अगस्त, तीन दिनों तक हर घर तिरंगा फहराना है। इसे भाजपा कार्यकर्ता एक अभियान के रूप में लेंगे और अभियान को सफल बनाएंगे। 9 अगस्त से 12 अगस्त तक पूरे देश में देशभक्ति का वातावरण निर्मित करना है।
देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहली बार अत्यंत गरीब परिवार से आने वाली आदिवासी महिला सम्माननीय श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का आसीन होना ऐतिहासिक है। भाजपा की संयुक्त मोर्चा राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक इसके लिए आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का हार्दिक अभिनंदन करती है।
ज्ञान भवन, पटना में चल रही भारतीय जनता पार्टी की दो दिवसीय संयुक्त मोर्चा राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक का समापन आज केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के उद्बोधन के साथ हुआ। इससे पहले माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा जी ने संयुक्त मोर्चा पदाधिकारियों और कार्यसमिति सदस्यों का मार्गदर्शन किया और उनसे संगठन की मजबूती, आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में चल रही सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार प्रसार तथा हर घर तिरंगा कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया।
संयुक्त मोर्चा राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में हुई चर्चा और माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी एवं आदरणीय गृह मंत्री जी के उद्बोधन की मुख्य बातों की जानकारी प्रेस वार्ता में मीडिया को बताते हुए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव श्री अरुण सिंह एवं पार्टी की एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री समीर उरांव ने कहा कि संयुक्त मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारणी बैठक अत्यंत ही सफल हुई।
बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी चुनाव के लिए सदैव तैयार रहती है। भाजपा की 2024 के चुनाव की तैयारी पूरी है। उन्होंने कहा कि 2024 में लोक सभा चुनाव और 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। 2024 में पहले से अधिक लोक सभा सीटें जीत करके प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी पुन केन्द्र में सरकार बनाएगी।
श्री सिंह ने कहा कि भाजपा 2024 का लोक सभा चुनाव भी जदयू के साथ गठबंधन में लड़ेगी। भाजपा और जदयू गठबंधन 2025 में विधानसभा चुनाव भी साथ में लड़ेगा। हम सब एक साथ हैं, परस्पर प्रेम है और हमलोग एक साथ गठबंधन में ही चुनाव लड़ेंगे।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए श्री अरुण सिंह ने कहा कि माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के संबोधन से कार्यकर्ताओं में अपार विश्वास पैदा हुआ है और इस बैठक से मोर्चा के कार्यसमिति सदस्य प्रेरणा लेकर गए। केंद्रीय गृह मंत्री जी ने कहा कि हम सबको 13, 14 और 15 अगस्त, तीन दिनों तक हर घर में तिरंगा फहराना है। इसे भाजपा कार्यकर्ता एक अभियान के रूप में लेंगे और अभियान को सफल बनाएंगे।
9 अगस्त से 12 अगस्त तक पूरे देश में देशभक्ति का वातावरण निर्मित करना है। आदरणीय गृह मंत्री जी ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहली बार अत्यंत गरीब परिवार से आने वाली आदिवासी महिला सम्माननीय श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी के आसीन होने को देश के लिए ऐतिहासिक करार दिया और इसके लिए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का हार्दिक अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि श्री नरेन्द्र मोदी सरकार गांव, गरीब, किसान, दलित, पीड़ित, आदिवासी, महिला एवं पिछड़ों के कल्याण के लिए कटिबद्ध है। आज केंद्र में सबसे अधिक दलित, आदिवासी, ओबीसी और महिला मंत्री हैं।
क्या बिहार की राजनीति में सब कुछ ठीक है।क्या भाजपा और जदयू में खींचतान चलरही है। ललन सिंह और आरसीपी के बीच कोई जोर आजमाइश चल रही है। इन सारे सवालों का जवाब जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने जहानाबाद में जदयू के पूर्व जिलाध्यक्ष चंदेश्वर बिंद के श्रद्धांजलि सभा मे शामिल होने के बाद पत्रकारों को दी।
जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या वे पटना में जेपी नड्डा और अमित शाह से मिलेंगे तो उन्होंने कहावो अपनी पार्टी के कार्यक्रम में आ रहे है वो पार्टी का कार्यक्रम करके जायेंगे तो दिल्ली में संसद सत्र में तो रोज हमलोगों की मुलाकात होती रहती हैपटना में मुलाकात का क्या मतलब है पत्रकारों ने जब पूछा कि गठबंधन में सब ठीकठाक है? तो कहा अभी तक तो सब ठीकठाक है ही कहाँ आपको गड़बड़ी दिख रही है।
बिहार का मुख्यमंत्री कैसा हो के नारे पर कहा देखिये ये है जनता दल यूनाइटेड पार्टी है और जनता दल यूनाईटेड में एक ही नेता है वो सर्वमान्य नेता है श्री नीतीश कुमार जी।यहाँ मुख्यमंत्री की बैकेन्सी कहाँ है।जहाँ तक जनता दल यूनाइटेड का सवाल है नीतीश कुमार जी सीएम है और हमे इस बात का गर्व है कि नीतीश कुमार हमारे सीएम है।
आरसीपी सिंह के समर्थन में नारे के संबंध में कहा कि 15 करोड़ की आबादी 100 -200 लोग क्या बोलते है उसका कोई मतलब नही है। आरसीपी सिंह के उस बयान पर जब पत्रकारों ने कि वे खुद को नालन्दा का और नीतीश कुमार को बख्तियार पुर का बता रहे है तो उन्होंने कहा छोड़िये इन बातों को इसका कोई मतलब है।
जेडीयू के बड़े नेता उपेंद्र कुशवाहा आज जहानाबाद पहुंचे। कुशवाहा ने कई कार्यक्रमों में शिरकत की। सबसे पहले वे जहानाबाद जिला जेडीयू के अध्यक्ष रहे चंदेश्वर बिंद के परिजनों से मुलाकात की।
4 दिन पहले चंदेश्वर प्रसाद का निधन हो गया है। वहीं शाम में सॉफ्ट टेनिस टूर्नामेंट के समापन पर पुरस्कार समारोह में शामिल हुए। प्रतियोगिता के खिलाड़ियों को सम्मानित किया। वही राजनीति को लेकर अपने पुराने अंदाज में उन्होंने बात की। हालांकि आरसीपी सिंह के बयान को लेकर पूछे गए सवाल को उपेंद्र कुशवाहा टाल गए।
लेकिन जगदानंद सिंह के उस बयान को लेकर उन्होंने कटाक्ष किया जिसमें नीतीश को ये सलाह दी गई थी कि, तेजस्वी को सीएम बनाने के लिए जेडीयू का आरजेडी में विलय कर दें। कुशवाहा ने तो यहां तक कह दिया कि जगदानंद सिंह उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहां वे सठिया गए हैं।
राजनीति बहुत ही गूढ़ विषय है और इसको जब आप समझने लगेंगे तो इससे दिलचस्प कोई दूसरा विषय नहीं है। संसद भवन पर लगे अशोक स्तम्भ की आकृति में बदलाव पर हंगामा हुआ तो तर्क क्या दिया गया कि ये दहारता शेर भारत के बदलाव का प्रतीक है।
आज राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे के बाद द्रौपदी मुर्मू की जीत पर देश में पहली बार राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम के बाद विजय जुलूस निकाल जायेगी जिसमें बीजेपी के तमाम बड़े नेता शामिल होंगे ।
वही पूरे सप्ताह देश के 1 लाख 30 हजार आदिवासी गांवों में भाजपा जश्न मनाएगी उस दौरान खास ख्याल रखना है कि द्रोपदी मुर्मू के जीत की तस्वीर के साथ साथ उस तस्वीर को गाँव गॉव तक पहुँचाना है जिसमें वो मंदिर की सफाई कर रही है ।
मतलब अब आदिवासी समाज का वो चेहरा विरसा मुंडा और सिन्दू कान्हू जिसके शौर्य की चर्चा आज भी गाँव गॉव में होती है इसे देश और आदिवासी समाज के जेहन से बाहर निकाल कर ये स्थापित करना है कि आदिवासी भी हिन्दू हूँ ।
“PFI संघ के तर्ज पर काम करती है “ “एसडीपीआई की वजह से कर्नाटक में बाजेपी की सरकार बनी है” रुपया लगातार गिर रहा है 80 के करीब पहुंच गया मेन स्ट्रीम मीडिया या फिर सोशल मीडिया पर इस खबर को लेकर कहीं कोई चर्चा है ,सरकार की और से कोई बयान आया है।
जबकि जैसे जैसे रुपया कमजोर होगा देश की आर्थिक स्थिति बिगड़ेगी महंगाई आसमान छुएगा । इसी तरह बिहार की बात करे तो इतना बड़ा मेधा घोटाला हुआ है तीस हजार से अधिक बहाली जांच के घेरे में है मुख्य मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक कहीं कोई चर्चा भी है ।
मतलब हर सुबह मेरे जेब पर डाका डाला जा रहा है मेधावी छात्र लूटे जा रहे हैं लेकिन मेन स्ट्रीम मीडिया ,और सोशल मीडिया पर चर्चा तक नहीं होती है ।
होता क्या है मुसलमान ऐसा, मुसलमान ऐसा, जैसे मुसलमान ही देश की सबसे बड़ी समस्या है और इस खबर से आप बाहर ना निकले इसके लिए रोजाना सुबह से ही मेन स्ट्रीम मीडिया और सोशल मीडिया लगा रहता है।
झारखंड में जहां 70 प्रतिशत से अधिक मुसलमान है वहां शुक्रवार को स्कूल बंद हो रहा है कोई ये पुछने वाला नहीं है कि झारखंड गठन के बाद से लगातार बीजेपी की सरकार रही है क्या बीजेपी के शासन में रविवार को स्कूल बंद होता था, स्कूल में मुस्लिम बच्चे हाथ जोड़ कर प्रार्थना करते थे,कौवा कान ले गया बस सबके सब कौवा के पीछे भाग चलते हैं कोई अपना कान नहीं देखता है ।
चलिए मुद्दे पर आते हैं फुलवारी शरीफ मामले में दो संगठन चर्चा में है एक पीएफआई और दूसरा एसडीपीआई है जिसके सदस्य गिरफ्तार हुए हैं ।
यह संगठन जब देश विरोधी काम करता है तो इस संगठन को प्रतिबन्धित क्यों नहीं किया जा रहा है । इसके पीछे बड़ा खेल जब आप समझेंगे तो हैरान रह जाएंगे ।
1—क्या है पीएफआई पटना के एसएसपी डाँ मानवजीत सिंह ने पीएफआई के कार्यशैली को संघ के कार्यशैली के सहारे समझाने का प्रयास किया क्या हंगामा खड़ा हो गया मेन स्ट्रीम मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर मानो बादल फट गया हो। देखते देखते एसएसपी को खालिस्तानी धोषित कर दिया गया ,फुलवारी से गिरफ्तारी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित कर दिया इससे भी खून गर्म नहीं हुआ तो बिहार दौरे के दौरान पीएम को निशाने पर लेने की तैयारी में जुटे थे आतंकी यहां तक लिख डाला गया लेकिन किसी ने यह समझने कि कोशिश नहीं किया कि पीएफआई है क्या ।
पीएफआई संघ के तर्ज पर बना एक ऐसा स्वयंसेवी संगठन है जो भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है 2006 में यह संगठन बना है और इसका पूरा नाम है पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (Popular Front of India; संक्षिप्त: PFI) यह संस्था अपने आप को पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हक में आवाज उठाने वाला बताता है।मिश्रा आयोग (राष्ट्रीय धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यक आयोग) की रिपोर्ट के अनुरूप मुस्लिम आरक्षण के लिए अभियान चलाता है।
संघ की तरह ही ये भी शाखा लगाता है जहां लाठी डंडे चलाने की ट्रेनिंग देते हैं संघ की तरह ही इस संगठन का राजनीतिक मंच एसडीपीआई है जिसका गठन 2009 में किया गया था,सीएफआई इसका छात्र संगठन इसी तरह SDTU (Social Democratic Trade Union)इसका मजदूर संगठन है। स्कूली छात्रों के लिए भी इसका अलग संगठन है। ये सारे संगठन सार्वजनिक तौर पर काम कर रहे हैं और इनमें से अधिकांश का मुख्यालय दिल्ली है कई राज्य सरकारे इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने का पत्र केन्द्र सरकार को भेजा चुका है लेकिन वजह जो भी हो अभी तक प्रतिबंध नहीं लगा है ।
2—एसडीपीआई राजनीतिक पार्टी का लक्ष्य 2047 तक भारत इस्लामिक शासन स्थापित करना है। जिस तरीके से संघ का राजनीतिक मंच बीजेपी है वैसे ही पीएफआई का यह राजनीतिक मंच है जैसे संघ हिन्दू राष्ट्र की बात करता है वैसे ही यह इस्लामिक राष्ट्र की बात करता है ।
इस पार्टी के संविधान में जिस लक्ष्य को प्राप्त करने कि बात लिखा है उसमें लिखा है कि 2047 तक भारत में इस्लामिक राष्ट्र स्थापित करना है इस पार्टी के हर कार्यक्रम में सार्वजनिक मंच से इस बात की चर्चा होती है।यह पार्टी चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त है।याद करिए बिहार विधानसभा चुनाव 2020 पप्पू यादव ने इसी पार्टी से गठबंधन करके चुनाव लड़ा था। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस तरह के नारे के साथ राजनीति करने वाली पार्टियों पर केन्द्र सरकार प्रतिबंध क्यों नहीं लगा रही ही चुनाव आयोग खामोश क्यों है इसकी वजह है इस तरह के पार्टियों की वजह से बीजेपी को फायदा पहुंचता है।
3–कर्नाटक में बीजेपी के सत्ता में पहुंचने में एसडीपीआई की बड़ी भूमिका रही है जी है एसडीपीआई का कर्नाटक में बड़ा जनाधार है 2018 के विधानसभा चुनाव में कर्नाटक के तीन विधानसभा सीट- नरसिम्हाराजा (मैसुरू), चिकपेट (बेंगलुरू) और गुलबर्गा सिटी पर एसडीपीआई ने कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचाया था नरसिम्हाराजा सीट पर 38 हजार वोट लेकर यह दूसरे स्थान पर रही थी. वहीं चिकपेट सीट पर इसे 15 हजार वोट मिले थे. इस वजह से बीजेपी यहां जीत गई थी.राज्य में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही एसडीपीआई ने ऐलान कर दिया था कि वह तीन सीटों को छोड़ कर हर जगह सेक्युलर ताकतों का समर्थन करेगी क्योंकि यह वक्त की मांग है. इसके ऐलान की वजह से पूरे तटवर्ती इलाके में बीजेपी भारी बहुमत से जीत गई।
इसी राजनीति को समझने कि जरूरत है आज दुनिया में लोकतांत्रिक सरकार जिस तरीके से ताश के पत्तों की तरह ध्वस्त हो रही है इसकी वजह यही है सत्ता के लिए किसी भी हद तक पहुंचना ।
श्रीलंका और अब ब्रिटेन में जो कुछ हो रहा है उससे भारत को सीख लेने कि जरूरत है नहीं तो फिर श्रीलंका और ब्रिटेन से भी बुरा हाल भारत का हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।
पटना । जदयू प्रवक्ता अरविन्द निषाद का बयान माननीय RCP सिंह को यह कबुल करना चाहिये कि मैं माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के कृपा से राज्य सभा में नामित हुआ, जदयू राष्ट्रीय महा सचिव संगठन एवं जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष बना।
मनुष्य को अहंकार में नहीं बल्कि ईमानदारी से स्वीकार करना चाहिए के मैं जो भी पद प्राप्त किया वह माननीय नीतीश कुमार जी के कृपा से बने।
हाँ यह जरूर आपने किया कि राज्य सभा से लेकर जदयू के सांगठनिक पद तक माननीय नीतीश कुमार जी के कृपा से बने, हाँ यह भी सच है कि आप केन्द्रीय मंत्री अपनी मर्जी से बने न कि अपने इमानदारी और परिश्रम एवं संघर्ष के बदौलत ।
आपकी सांगठनिक ताकत का दु:खद एहसास तो हर जदयू कार्यकर्त्ता को है कि आपने जदयू को 2015 में जदयू के विधायकों की संख्या 71 थी वहीं 2020 में आपने 43 पर पहुँचा दिया ।
प्रशांत किशोर ‘जन सुराज’ अभियान के तहत बिहार के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं। इसी क्रम में वे सोमवार 4 जुलाई को सारण पहुंचे। जिले में कई अलग अलग कार्यक्रमों में भाग लेते हुए प्रशांत किशोर ने समाज के प्रबुद्ध नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, शिक्षकों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं से जन सुराज की सोच पर संवाद किया। लोगों ने भी प्रशांत किशोर से जन सुराज के बारे में जाना और सभी जरूरी सवाल पूछे। प्रशांत किशोर ने सभी सवालों के जवाब दिए और जन सुराज की परिकल्पना को लोगों के सामने रखा।
जन सुराज का अगर कोई दल बनेगा तो, वो बिहार के सभी सही लोगों का दल होगा प्रशांत किशोर ने जन सुराज के विचार को रेखांकित करते हुए बताया कि जन सुराज के माध्यम से वह लोगों के साथ संवाद स्थापित करना चाहते हैं। प्रशांत किशोर ने कहा, “उद्देश्य है बिहार में एक नई राजनीतिक व्यवस्था बनाना। सत्ता परिवर्तन हमारा मकसद नहीं है। अगर पदयात्रा के बाद सब लोगों की सहमति से कोई दल बनता भी है तो वो बिहार के सभी सही लोगों का दल होगा, प्रशांत किशोर का दल नहीं होगा। सब मिलकर अगर तय करेंगे तो दल बनाया जाएगा। मैं अभी लोगों से बात करने, उनकी समस्याओं को समझने में अपना पूरा वक्त लगा रहा हूं।”
60 के दशक से ही बिहार विकास के मामले में पिछड़ता चला गया बिहार की बदहाली पर बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि पिछले 30 साल की सरकारों ने जो अच्छे काम किए हैं उसे स्वीकार करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। चाहे लालू जी के सामाजिक न्याय की बात हो या नीतीश जी के आर्थिक विकास की बात हो, लेकिन सच्चाई यह है की 60 के दशक के बाद से ही बिहार विकास के तमाम मापदंडों पर पिछड़ता चला गया और आज बिहार विकास लगभग मामले में देश में सबसे निचले पायदान पर है। अगर यहां से बिहार को फिर से विकास के तमाम सूचकांक में देश के अग्रणी राज्यों में खड़ा करना है तो सभी सही लोगों को एक साथ आना होगा और मिलकर प्रयास करना होगा।
पदयात्रा के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक पहुंचने का प्रयास करेंगे प्रशांत किशोर ने कहा की वह 2 अक्तूबर से पश्चिम चंपारण के गांधी आश्रम से पदयात्रा शुरू करेंगे। इस पदयात्रा के माध्यम से वो बिहार के हर गली-गांव, शहर-कस्बों के लोगों से मुलाकात करेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेंगे। उनसे समझेंगे कि कैसे बिहार को बेहतर बनाया जा सकता है। पदयात्रा में जब तक पूरा बिहार पैदल न चल ले, तब तक वापस पटना नहीं जाएंगे। समाज में ही रहेंगे और समाज को समझने का प्रयास करेंगे। समाज को मथ कर सही लोगों को एक मंच पर लेकर आएंगे।
प्रशांत किशोर जन सुराज की सोच को लेकर बिहार के अलग अलग जिलों में जा रहे हैं। इसी क्रम में आज वे जहानाबाद पहुंचे। यहां पहुंचने से पहले पटना जिले के धनरुआ में युवाओं द्वारा उनका स्वागत व अभिनंदन किया गया। इसके बाद जहानाबाद में अलग अलग कई कार्यक्रमों में उन्होंने प्रबुद्ध नागरिकों, महिलाओं और युवाओं से जन सुराज की सोच को लेकर संवाद किया और लोगों के सभी सवालों के जवाब दिए।
जन सुराज का अगर कोई दल बनेगा तो, वो बिहार के सभी सही लोगों का दल होगा प्रशांत किशोर ने जन सुराज के विचार को रेखांकित करते हुए बताया कि जन सुराज के माध्यम से वह लोगों के साथ संवाद स्थापित करना चाहते हैं। प्रशांत किशोर ने कहा, “उद्देश्य है बिहार में एक नई राजनीतिक व्यवस्था बनाना। सत्ता परिवर्तन हमारा मकसद नहीं है। अगर पदयात्रा के बाद सब लोगों की सहमति से कोई दल बनता भी है तो वो बिहार के सभी सही लोगों का दल होगा, प्रशांत किशोर का दल नहीं होगा। सब मिलकर अगर तय करेंगे तो दल बनाया जाएगा। मैं अभी लोगों से बात करने, उनकी समस्याओं को समझने में अपना पूरा वक्त लगा रहा हूं।”
बिहार को विकसित बनाना है तो यहां के लोगों को साथ मिलकर प्रयास करना होगा बिहार की बदहाली पर बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि जो लोग विकास का दावा कर रहे हैं अगर उनको सच मान भी लिया जाए तो भी देश में सबसे ज्यादा अशिक्षित लोग, बेरोजगार लोग, गरीब लोग बिहार में रहते हैं। बिहार के विकास के लिए सही लोग, सही सोच और सामूहिक प्रयास पर बल देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि देश के अग्रणी राज्यों में अगर बिहार को खड़ा करना है तो बिहार के लोगों को मिलकर प्रयास करना होगा।
समाज में रहेंगे, समाज को समझने का प्रयास करेंगे प्रशांत किशोर ने कहा की वह 2 अक्तूबर से पाश्चिम चंपारण के गांधी आश्रम से पदयात्रा शुरू करेंगे। इस पदयात्रा के माध्यम से वो बिहार के हर गली-गांव, शहर-कस्बों के लोगों से मुलाकात करेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेंगे। उनसे समझेंगे कि कैसे बिहार को बेहतर बनाया जा सकता है। पदयात्रा में जब तक पूरा बिहार पैदल न चल लें तब तक वापस पटना नहीं जाएंगे, समाज में रहेंगे, समाज को समझने का प्रयास करेंगे। इसका एक ही मकसद है कि समाज को मथ कर सही लोगों को एक साथ एक मंच पर लाना।
प्रशांत किशोर की अपील – हिंसा नहीं करें आंदोलनकारी छात्र अग्निपथ योजना का विरोध कर रहे आंदोलनकारी युवाओं से प्रशांत किशोर ने अपील करते हुए कहा कि अगर आंदोलन को सफल बनाना है तो विरोध प्रदर्शन का अहिंसात्मक तरीका अपनाएं और मजबूती से अपनी बात रखें।
राजनीति में बयान और तस्वीर बेमतलब कभी नहीं होता हर बयान और तस्वीर के पीछे कोई ना कोई संदेश जरुर छिपा रहता है । मुख्यमंत्री के आधिकारिक ग्रुप से कल एक तस्वीर जारी हुई है मौका था इन्वेस्टर्स मीट सह वस्त्र एवं चर्म नीति 2022 के लोकार्पण समारोह का जहां नीतीश कुमार उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन का पीठ थपथपा रहे हैं बिहार में मेरी जानकारी में ये पहली ऐसी तस्वीर है जिसमें नीतीश कुमार किसी मंत्री के काम की तारीफ इस तरह से सार्वजनिक रूप से किये हो।
वैसे शाहनवाज हुसैन जब से उद्योग मंत्री बने हैं विभाग की सक्रियता बढ़ी है इसमें भी कोई शक नहीं है लेकिन नीतीश कुमार कुछ दिन पहले तक शाहनवाज को लेकर सहज नहीं थे ये भी सार्वजनिक रूप से कई मौके पर देखने का मिला है तो फिर ऐसा क्या हुआ जो नीतीश के इतने चहेते बन गये ।
नीतीश के निशाने पर हैं अमित शाह 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग के सहारे जो कुछ भी हुआ उसको लेकर नीतीश अभी भी सहज नहीं है जिस वजह से बीजेपी के साथ रहने के बावजूद भी हमेशा दाव लगाते रहते हैं ।
एक बड़ी चर्चित गीत है ना कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना बस इसी अंदाज में नीतीश बिहार की राजनीति का साध रहे हैं और इसके लिए जब जब दिल्ली बीजेपी नीतीश कुमार पर दबाव बनाने कि कोशिश करता है लालू प्रसाद के परिवार से नजदीकी बढ़ाने का प्रयास ये तेज कर देते हैं ।
वही बीजेपी के अंदर मोदी और शाह के खिलाफ जो गोलबंदी शुरू हुई है उसका लाभ कैसे मिले इस पर नीतीश काम शुरु कर दिये हैं और यही वजह है कि नीतीश का रिश्ता कभी भी शाहनवाज और गडकरी से अच्छा नहीं रहा है क्यों कि दोनों नेता नीतीश की आलोचना कई मौके पर मुखर होकर कर चुके हैं ।
गांधी सेतु के दूसरे लेन के उद्घाटन समारोह के दौरान नीतीश और गडकरी की जो मुलाकात हुई देखने से ऐसा ही लग रहा था कि जैसे की वर्षो बाद बिछड़ा हुआ भाई मिल रहा हो।
इतना ही नहीं इस पूरे कार्यक्रम के दौरान मंत्री नित्यानंद राय बिहार विधानसभा की घटना के बाद कार्यक्रम के दौरान दूरी बनाते हुए दिखे क्यों कि राज्यसभा चुनाव के दौरान जिस अंदाज में उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने नित्यानंद को झिड़की लगाये थे उससे साफ हो गया था कि फिलहाल बिहार में शाह की नुमाइंदगी को तवज्जो मिलने वाली नहीं है और इस राजनीति को नीतीश का भी समर्थन प्राप्त है।
वैसे दिल्ली से होने वाले निर्णय में अभी भी टीम शाह भारी है लेकिन नहीं चाहते हुए भी नीतीश इसी रणनीति के सहारे पहले भूपेन्द्र यादव को बिहार से बाहर का रास्ता दिखाया दिया और फिर बिहार विधान परिषद में संख्या बल नहीं होने के बावजूद दो सीट देने पर बीजेपी को मजबूर कर दिये।
आने वाले समय में इस तरह की चौकाने वाली तस्वीरे और देखने को मिले तो कोई बड़ी बात नहीं होगी क्यों लम्बें वक्त के बाद बीजेपी के केन्द्रीय टीम में नीतीश की पहुंच मजबूत होते दिख रही है।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को कहा कि सम्पूर्ण क्रांति के अवसर पर हमें संकल्प लेना है कि इस निक्कमी सरकार को उखाड़ फेंकना है। महंगाई का प्रकोप है, भ्रष्टाचार चरम पर है। शिक्षा का बंटाधार है, स्वास्थ्य व्यवस्था गर्त में है।
सम्पूर्ण क्रांति दिवस पर महागठबंधन की ओर से राजधानी पटना के बापू सभागार में प्रतिनिधि सम्मेलन के मौके पर तेजस्वी यादव ने यह बातें कहीं। विपक्ष द्वारा जारी सरकार के खिलाफ आरोप पत्र को लेकर सीएम नीतीश कुमार ने कहा है कि सबको अपना-अपना काम करने का अधिकार है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि जेल से डरो नहीं, जेल को भरो। तेजस्वी ने जातीय जनगणना की जीत को सम्पूर्ण विपक्ष की जीत बताया और इसके लिए महागठबंधन के साथी लेफ्ट को बधाई दी। इसके पूर्व महागठबंधन की ओर से आरोप पत्र जारी किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्ष तेजस्वी ने किया जबकि मंच का संचालन आलोक मेहता ने किया।
जातिय गणना पेपर गणना नहीं बल्कि ई-गणना टेबलेट के माध्यम से कराई जाए • आर्थिक और जातिय के साथ-साथ सामाजिक मुद्दे से जुड़े प्रश्नों के आधार पर सर्वेक्षण हो • राजनैतिक दबाव में जल्दबाजी नहीं बल्कि पूरी तैयारी के साथ सर्वे किया जाए
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सम्प्रति राज्यसभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी ने एक बयान जारी कर बिहार सरकार को सुझाव दिया है कि प्रस्तावित जातिय गणना पेपर सर्वे के बजाय इलोक्ट्रोनिक सर्वे या ई-सर्वे के माध्यम से कराया जाना चाहिए जिसमें प्रगणक टेबलेट के माध्यम से सारी सुचना एकत्र करेंगे ताकि रियल टाइम आंकड़े अपलोड किया जा सके । साथ ही जनगणना 2022 एवं बिहार की जातिय गणना एक समय में न हो।
श्री मोदी ने कहा कि 2021 कि जनगणना ई – सेन्सस होने जा रही है । उसी तर्ज पर प्रत्येक जिले कि जातियों – उप जातियों को कोडिंग कर, ड्राप डाउन मेनू के माध्यम से जातिय गणना करने के लिए साफ्टवेयर विकसित किया जाय ताकि मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम हो सके ।
श्री मोदी ने कहा कि यह सर्वे केवल आर्थिक और जातिय ही नही बल्कि सामाजिक भी होना चाहिए । प्रत्येक जाति कि स्थिति का आकलन करने के लिए प्रत्येक परिवार कि शिक्षा, दिव्यांगता, ग्रसित बीमारियाँ , पशु-धन , चल -अचल सम्पति , रोजगार, भूमि की उपलब्धता, स्वास्थ्य आदि से जुड़े प्रश्नों की सूची तैयार कर पूछा जाना चाहिए।
श्री मोदी ने कहा कि अन्य दलों के दबाव में जल्दबाजी की आवश्यकता नहीं है बल्कि पूरी तैयारी, प्रशिक्षण, मार्गदर्शिका निर्माण, प्रश्न-सूची, सोफ्टवेयर, टेबलट की व्यवस्था कर ही सर्वे किया जाना चाहिए।
स्वाधीनता के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर हम सभी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं| 75 वर्षों के इस कालखंड में भारत ने एक राष्ट्र के रूप में उल्लेखनीय उपलब्धियों को हासिल किया है और आज जब देश कर्मशील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है तो हम यह कह सकते हैं कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया के मानचित्र पर अपनी वह छाप छोड़ेगा जिसकी कल्पना आजादी के लड़ाई में भाग लेने वाले सभी क्रांतिकारियों ने की थी |
राष्ट्र जीवन की दिशा नामक पुस्तक में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने राष्ट्र को किसी कालखंड की गणनात्मक इकाई की जगह एक शाश्वत इकाई माना है। वास्तविकता भी यही है। राष्ट्र की संकल्पना विशेषकर इस धरा भारत के संदर्भ में अनादि काल से विद्यमान रहा है । इसकी झलक सांस्कृतिक रूप से देश के जन-जन में हमेशा से विद्यमान रही है और यह राजनीतिक रूप से हमारे राजा महाराजाओं में चक्रवर्ती सम्राट बनने की लालसा में दृष्टिगोचर होती है। यूरोपीय नूतन राष्ट्रवाद से इसकी तुलना बिल्कुल बेतुकी है। भारत में कांग्रेस तथा उसके वित्त पोषित वामपंथ के द्वारा वर्तमान में राष्ट्र एवं राष्ट्रवाद के संदर्भ में जिस विरोधाभास को प्रतिस्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है , वह वास्तव में नेहरूवियन आइडिया ऑफ इंडिया के विफल होने का ही प्रमाण है।
राम मंदिर तथा काशी विश्वनाथ का निर्माण हमारे पूर्वजों के संघर्ष तथा बलिदान की क्षतिपूर्ति मात्र के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वास्तव में इन्हें देश के ऐतिहासिक कालखंड में एक ऐसे मोड़ के रूप में देखा जा सकता है जहां से भारत अपनी सांस्कृतिक एवं आत्मिक आइडिया ऑफ भारत को अंगीकार करने की दिशा में बढ़ चला है। इस दृष्टि से पीढ़ियों को जोड़ने तथा माननीय नरेंद्र मोदी जी जैसे विराट नेतृत्व में अपने सभी पुरोधाओं को नमन करते हुए राष्ट्र को विकसित व पल्लवित करने में तन मन धन से खुद को समर्पित करने का वक्त आ गया है।
माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी ,प्रभावी एवं साहसी नेतृत्व एवं देश भर के कार्यकर्ताओं के अटूट मेहनत का नतीजा है कि आज भाजपा एक सबल भारत के निर्माण की दिशा में अग्रसर है | विश्व के मानचित्र पर भारत का नाम अब गौरव से लिया जाता है क्योंकि नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर के महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों पर जिस प्रकार अपना प्रामाणिक हस्तक्षेप किया है वह अभिनंदनीय है | विगत एक महीने में सम्पन्न हुए संयुक्त राष्ट्र, क्वाड, जी-23 सहित दुनिया के तेल उत्पादक देशों के संघ के बीच भारत ने अपनी स्थिति को मजबूत किया है तथा चीन एवं पाकिस्तान द्वारा भारत की सीमाओं पर लगातार किए जा रहे कुत्सित प्रयासों से दुनिया को अवगत कराकर उन्हे अलग-थलग करने में उल्लेखनीय सफलता पायी है |
आजादी के बाद 70 वर्षों तक कॉंग्रेस, वामपंथ तथा समाजवाद के नाम पर गैर-यथार्थवादी, सांप्रदायिक, परिवार केंद्रित नेतृत्व ने विकास की संभावनाओं को कुंद करने में कोई कसर नहीं छोड़ा | लोकतंत्र की हत्या करके इमरजेंसी लगाई गई । कांग्रेस ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई राज्य सरकारों को लगभग 90 बार बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया । कॉंग्रेस ने जहां देश में निर्भर अर्थव्यवस्था को खड़ा किया, वामपंथियों ने भारत के मौलिक चिंतन धारा को कुंद करने का कुत्सित प्रयास किया वहीं तथाकथित समाजवादियों ने जातिवाद, भ्रष्टाचार तथा परिवारवाद को पोषित किया है | लोकतंत्र की हत्या करके इमरजेंसी लगाई गई । कांग्रेस ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई राज्य सरकारों को लगभग 90 बार बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन क्या यह सच्चाई नहीं है इन्हीं दलों ने जयप्रकाश नारायण, लोहिया, कर्पूरी ठाकुर जैसे नेताओं के विचारों को तिलांजलि देकर अपने परिवार को मजबूत किया है और भ्रष्टाचार के प्रतिमान गढ़े ।जबकि भाजपा की आधारशिला लोकतंत्र , सांस्कृतिक राष्ट्रवाद , लोक कल्याण , सामाजिक समरसता तथा अंत्योदय के लक्ष्यों में निहित है । श्री नरेंद्र मोदी ने इन्हीं उद्देश्यों को अंगीकार करते हुए सबका साथ , सबका विकास , सबका विश्वास और सब का प्रयास को अपने शासन का मूल मंत्र बनाया ।
हमे विश्वास है कि धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर भी राज्य और केंद्र सरकार गंभीरता से विचार करेगी । देश ने केंद्र में कॉंग्रेस नीत यूपीए सरकार तथा बिहार में राजद के शासनकाल को देखा है और उसके दंश को झेला है | यूपीए 1 एवं 2 में राजद कॉंग्रेस पार्टी का साझीदार था | इस सरकार के भ्रष्टाचार के कारनामों ने दुनियाभर में भारत को शर्मसार किया था | राजद के पंद्रह साल के कालखंड में अलकतरा घोटाला,चारा घोटाला , पैसों का गबन, नौकरियों के बदले जमीन या मकान लिखवाना साथ-साथ अपराध का वह सिलसिला जिसमें हत्या, लूट, नक्सलवादी आंदोलन, जातीय हिंसा जैसे कारनामें रोजमर्रा की बातें हो गई थी | शाम ढलते ही सड़कों के सुनसान होने की बात आज भी लोगों के रोंगटे खड़ा कर देता है।
आज श्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार हो या बिहार में एनडीए की सरकार भ्रष्टाचार का कहीं नाम नहीं है | प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए कहा है कि हमने 8 वर्षों के गरीब कल्याण, सेवा और सुशासन को समर्पित कार्यकाल में एक भी ऐसा काम नहीं किया है जिससे हमारा देश या देशवासियों का सर झुके | यह हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है कि इस अवधि मे इस सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई आरोपनहीं लगा |माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जो विषय 8 वर्ष पहले कहा था कि ना खाऊँगा ना खाने दूंगा आज उसको चरितार्थ कर दिया है | आज जब विरोधियों पर भ्रष्टाचार सम्बन्धी कोई कार्यवाई होती है तो वे अपने काले कारनामों पर से लोगों का ध्यान हटाने के लिए स्वयं को सताये जाने का आरोप लगते हैं ।
रामधारी सिंह दिनकर ने परशुराम की प्रतीक्षा में इनके जैसे हीं नेताओं के काले कारनामों को देखकर लिखा था – घातक है जो देवता-सदृश दिखता है लेकिन, कमरे में गलत हुक्म लिखता है। जिस पापी को गुण नहीं गोत्र प्यारा है समझो उसने ही हमें मारा है।
हलांकि ये पंक्तियाँ उन्होंने कॉंग्रेस के कार्यशैली पर लिखी थी जो आज भी काँग्रेस और राजद जैसी दलों पर सटीक बैठती है ।
समाज के सभी वर्गों, जातियों के लिए भाजपा तथा एनडीए की सरकार ने श्रेष्ठ प्रयास किए हैं | पिछड़े वर्ग को संवैधानिक दर्जा देना एक ऐसा कदम है जिसे राजद ने वर्षों तक यूपीए सरकार के वक्त दबाकर रखा था ।बाबा साहब अंबेडकर के जन्म स्थली , शिक्षा स्थान सहित पांच स्थानों को पंच तीर्थ स्थल के रूप में विकसित कर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें यथोचित सम्मान दिया । उनके व्यक्तित्व को पूर्ववर्ती सरकारों ने मान्यता नहीं दी थी । माननीय प्रधानमंत्री ने जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटा कर वहां के कमजोर वर्ग विशेषकर बाल्मीकि और बक्करवाल समाज को आरक्षण उपलब्ध करा कर सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर दी है।नीट में ओबीसी को 27% एवं सामान्य वर्ग के गरीबों को 10% आरक्षण का प्रावधान इसी दिशा मे उठाए गए कदमहैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने “प्रधानमंत्री मतस्य संपदा योजना” के माध्यम से निषाद समुदाय के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं | इस योजना के अंतर्गत 20,050 करोड़ रुपए निषाद समुदाय की आर्थिक उन्नति के लिए दिए गए हैं बिहार मीठे पानी में मछली उत्पादन में देश में अव्वल राज्य बन चुका है | आज बिहार में 2005की तुलना मे मछली का उत्पादन लगभग 3 गुना बढ़ चुका है |
स्वास्थ्य, सड़कें-हाइवे, बिजली, पानी, उद्योग, कृषि, शिक्षा, शुद्ध पेयजल सहित अन्य सभी महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं के क्षेत्र में हमने तेजी से काम संपादित किए है | राज्य में प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2005 के 8000 रुपए के मुकाबले आज 48000 रुपए तक पहुँच गयी है और जीडीपी की दर जो 2005 के पूर्व 3% के आसपास थी वह आज 11% पार कर चुकी है | आज हमें इस बात की खुशी है की विगत वर्षों में राज्य में मँझले कद के उद्योगों का संजाल विकसित हो रहा है
आज देश अपने सांस्कृतिक विरासतों तथा उसके वैभव को पुनः स्थापित कर रहा है | नेहरू के छद्म-सेक्युलरवाद का दर्शन जिसे हम वामपंथ का भी साझा दर्शन कह सकते हैं उसने हिंदुओं के सांस्कृतक अधिष्ठानों, उसके प्रामाणिक जीवनशैली तथा उसके परम्पराओं के संदर्भ में लगातार दुष्प्रचार किए हैं | क्या यह सच्चाई नहीं है कि भारत का समाज हिंदुओं की बहुलता की वजह से सहिष्णु है और हमने भारत के साझी विरासत में सभी को स्थान दिया है ? आज आतंकवाद केवल कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों मे सिमट के रह गया है ।कॉंग्रेस तथा राजद के युवराज पाकिस्तान समर्थक तथाकथित सेमिनारों में भारत-विरोध की भाषा बोल रहे हैं | कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के जिस प्रांगण में वो भारत विरोधी “आइडिया ऑफ इंडिया” सेमीनार का हिस्सा बनने गए थे उससे उन्हें वामपंथीयों की मान्यता तो जरूर मिल सकती है परंतु देश की जनता उन्हे कभी माफ नहीं करेगी |
भारत प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इतिहास से सबक लेकर एक सबल-सक्षम तथा क्रियाशील राष्ट्र के रूप में समावेशी सांस्कृतिक अधिष्ठान वाली पहचान को पुनर्जीवित कर रहा है | काशी का ज्ञानवापी हो या कश्मीर घाटी में फैले सूर्य मंदिर के अवशेष सभी राम मंदिर और काशी विश्वनाथ की तरह वापस जीवंत हो उठने को तत्पर हैं । राजनीति की तमाम चुनौतियों के बीच भाजपा ने देश की जनता के बीच नई आशा और विश्वास का संचार किया हैऔर भारत श्री नरेंद्र मोदी के साहसी और कुशल नेतृत्व में विश्व गुरु बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
पटना । 27.05.2022 । बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सम्प्रति राज्य सभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है राजद के लिए भ्रष्टाचार, परिवारवाद, नैतिकता तो कोई मुद्दा ही नहीं है। राजद परिवार से बाहर निकल ही नहीं सकता है। परिवार में ही किसी दूसरी बहन को देते, परन्तु भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप जिन पर हैं उन्हें पुनः राज्यसभा का उम्मीदवार बना दिया।
• ए टू जेड की बात करने वाले माई समीकरण से बाहर नहीं निकल सकते • राजद के राज्यसभा में अब छह में से तीन जेल रिटर्न और एक बेल पर • ऐसी पार्टी सत्ता में आ गई तो बिहार का क्या होगा?
मोदी ने कहा कि राजद लाख ए टू जेड की बात कर ले, परंतु न तो वह माई से बाहर निकल सकता है और ना ही परिवार से। राज्यसभा में टिकट का मौका आया तो बाबा और जगता बाबू को दरकिनार कर परिवार और माई को ही तरजीह मिली।
मोदी ने कहा कि बाबा को नहीं बनाया तो समझ में आ सकता है क्योंकि लालू जी की दुर्दशा के लिए बाबा ही जिम्मेवार हैं। परंतु जगता बाबू जिन्होंने लालू जी के जेल जाने के बाद खडाऊं को ईमानदारी से संभाल कर रखा और जो पार्टी का अध्यक्ष के रूप में बेहतर काम कर रहे हैं उन को अपमानित कर राज्यसभा नहीं भेजा।
मोदी ने कहा कि 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद ने 144 में 76 टिकट माई समीकरण को दिया। भूमिहार को एक और कुर्मी को भी मात्र एक टिकट दिया। वही माई के एम को 18 और वाई को 58 टिकट दिया।
मोदी ने कहा कि अब लालू परिवार के 4 सदस्य संसद और विधान मंडल में है। राज्यसभा के 6 में से तीन सदस्य जेल रिटर्न (प्रेमचंद गुप्ता, अशफाक करीम, अमरेंद्र धारी सिंह) है, एक चार्जशीटेड हैं और बेल पर हैं और 4 धन पशु हैं जिनकी योग्यता केवल धन है।
मोदी ने कहा कि ऐसी पार्टी 15 साल सत्ता में थी तो लोगों ने देखा है और यदि पुनः गलती से लौट आए तो बिहार का क्या होगा?