यह घटना बिहार के पटना जिले में 27 जनवरी को हुई थी, जब पुलिस ने एक शांतिपूर्ण जुलूस के दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया था। घटना के शिकंजा में आने वाले एक वीडियो में पुलिस के एक जवान ने एक युवक को जमीन पर लेटकर उसके साथ छेड़छाड़ किया था।
पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में बिहार पुलिस का नाज़ी जर्मनी की पुलिसिंग स्टाइल के मामले में एक सख्त नोटिस चस्पा किया है। कोर्ट ने कहा है कि पुलिस ने जुलूस के दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए नाज़ी जर्मनी के दौर को याद दिलाती तरीके से बल प्रयोग किया था।
बिहार पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। लेकिन पुलिस ने मौके पर ही विरोध प्रदर्शनकारियों को दबोच लिया था। पुलिस ने यह कहते हुए विरोध प्रदर्शनकारियों को छोड़ने से इनकार किया कि उन्होंने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।
यह घटना बिहार में पुलिस की क्रूरता और हिंसा की एक और मिसाल है। इससे पहले भी बिहार पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ कई घटनाएं हुई हैं। बिहार पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है, लेकिन पुलिस ने उनकी आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग किया है।
पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में अब पुलिस की कार्यवाही की भी जांच होगी।
बिहार पुलिस की क्रूरता और हिंसा के खिलाफ नाज़ी जर्मनी की पुलिसिंग स्टाइल के मामले में पटना हाईकोर्ट का यह आदेश एक बड़ा कदम है। इसे लेकर विरोधपक्षों में खुशी की लहर है।
बिहार में पुलिस की क्रूरता और हिंसा के खिलाफ पिछले कुछ वर्षों में कई घटनाएं हुई हैं। बिहार पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है, लेकिन पुलिस ने उनकी आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग किया है।
पटना हाईकोर्ट का यह आदेश अब पुलिस की कार्रवाई की भी जांच के लिए दिया गया है। इस मामले में अब पुलिस की कार्यवाही की भी जांच होगी। बिहार पुलिस की क्रूरता और हिंसा के खिलाफ नाज़ी जर्मनी की पुलिसिंग स्टाइल के मामले में पटना हाईकोर्ट का यह आदेश एक बड़ा कदम है।
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