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मुगमा स्टेशन रीमॉडलिंग के कारण सितंबर में प्रमुख ट्रेन मार्गों में वैकल्पिक रूट अपनाया जाएगा, यात्रा समय में 15‑20 मिनट वृद्धि की संभावना

मुगमा स्टेशन पर चल रहे रीमॉडलिंग कार्य के कारण भारतीय रेलवे ने सितंबर के मध्य में कई प्रमुख ट्रेन मार्गों में बदलाव करने का निर्णय लिया है, यह सूचना आज सुबह रेलवे सार्वजनिक संबंध विभाग ने जारी की। इस बदलाव से धारा में चल रही कई इंटरसिटी और एग्ज़िक्यूटिव सेवाओं को अस्थायी रूप से वैकल्पिक रूट अपनाना पड़ेगा, जिससे यात्रियों को कुछ हद तक असुविधा की आशंका है।
हालांकि, रेलवे ने कहा है कि यह परिवर्तन केवल कार्य की तीव्रता को ध्यान में रखकर किया गया है और दीर्घकालिक सुधारों के लिए आवश्यक कदम है।मुगमा स्टेशन, जो पूर्वी भारत के महत्वपूर्ण जंक्शन में से एक है, का आधुनिकीकरण 2022 में शुरू हुआ था। इस परियोजना में प्लेटफ़ॉर्म विस्तार, सिग्नलिंग सिस्टम का उन्नयन तथा स्टेशन परिसर का समग्र नवीनीकरण शामिल है। पिछले दो वर्षों में इस कार्य में कई चरणों में रुकावटें आई हैं, मुख्यतः धनराशि आवंटन और भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं के कारण। इन चुनौतियों के बावजूद, रेलवे ने 2025 के भीतर पूर्णता का लक्ष्य रखा है, जिससे इस क्षेत्र की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

रीमॉडलिंग के दौरान ट्रैक कार्य, सिग्नल प्रतिस्थापन और नई विद्युत आपूर्ति लाइनों की स्थापना प्रमुख कार्य हैं। इन कार्यों के कारण वर्तमान में ट्रेनों के सामान्य रूट पर बाधा उत्पन्न हो रही है, विशेषकर धनबाद‑पटना, पटना‑गया और गया‑दिल्ली मार्गों पर। रेलवे के अनुसार, इस अवधि में ट्रेनों को वैकल्पिक रूप से गया स्टेशन के माध्यम से चलाया जाएगा, जिससे यात्रा समय में लगभग 15‑20 मिनट की वृद्धि होगी। इस परिवर्तन को लागू करने के लिए रेलवे ने अतिरिक्त कोच और बोगी उपलब्ध कराई हैं, ताकि भीड़भाड़ को न्यूनतम किया जा सके।

सरकारी स्रोतों के अनुसार, रीमॉडलिंग कार्य के तहत मुगमा स्टेशन पर नई प्लेटफ़ॉर्म 4 और 5 का निर्माण चल रहा है, जो प्रत्येक 550 मीटर लंबी होगी और दो अतिरिक्त ट्रैक को संभाल सकेगी। इस सुधार के साथ स्टेशन की दैनिक यात्री क्षमता वर्तमान 30,000 से बढ़ाकर 45,000 यात्रियों तक ले जाया जाएगा। साथ ही, स्टेशन में डिजिटल सूचना बोर्ड, स्वचालित टिकटिंग कियोस्क और बेहतर सुरक्षा प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिससे यात्रियों को सुविधा और सुरक्षा दोनों में लाभ होगा।

रीमॉडलिंग के प्रभाव को कम करने के लिए रेलवे ने कुछ प्रमुख ट्रेनों के शेड्यूल में संशोधन किया है। धनबाद‑पटना इंटरसिटी एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 13331) अब चार दिनों तक गया के माध्यम से चलाया जाएगा, जबकि अन्य प्रमुख एग्ज़िक्यूटिव और सुपरफ़ास्ट ट्रेनें भी इसी प्रकार के रूट अपनाएंगी। इस अवधि में ट्रेनों की गति में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, परन्तु प्लेटफ़ॉर्म पर पहुँचने और छूटने के समय में थोड़ा अतिरिक्त समय निर्धारित किया गया है।

इन बदलावों के बारे में स्थानीय यात्रियों ने मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कई यात्रियों ने बताया कि गया के माध्यम से यात्रा करने से उनकी दैनिक कार्यस्थल तक पहुँच आसान हो रही है, क्योंकि गया एक प्रमुख बस और टैक्सी हब है। वहीं, कुछ यात्रियों ने कहा कि अतिरिक्त दूरी और रूट परिवर्तन के कारण यात्रा लागत में वृद्धि होगी, विशेषकर उन लोगों के लिए जो नियमित रूप से कामकाजी यात्रियों के रूप में इन ट्रेनों का उपयोग करते हैं।

रेलवे अधिकारियों ने इस बदलाव के दौरान यात्रियों को सूचित करने के लिए विस्तृत सूचना अभियान चलाया है। स्टेशन पर बड़े आकार के बोर्ड, मोबाइल एप्प और रेलवे वेबसाइट पर रीयल‑टाइम अपडेट जारी किए जा रहे हैं। साथ ही, यात्रियों को वैकल्पिक बस और टैक्सी सेवाओं के बारे में भी जानकारी प्रदान की जा रही है, ताकि उन्हें अपने सफर की योजना बनाने में आसानी हो। यह प्रयास यात्रियों की असुविधा को न्यूनतम करने के लिए किया गया है, जो कि बड़े स्तर पर सार्वजनिक परिवहन में परिवर्तन के दौरान सामान्य प्रथा है।

राजनीतिक दिग्गजों ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की है। स्थानीय सांसदों ने कहा कि रीमॉडलिंग कार्य राष्ट्रीय बुनियादी ढाँचा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, परन्तु यह आवश्यक है कि रेलवे द्वारा यात्रियों को पर्याप्त समर्थन प्रदान किया जाए। कुछ विपक्षी दल के नेता ने इस बदलाव के कारण उत्पन्न होने वाली आर्थिक बाधाओं को उजागर किया, यह दावा करते हुए कि अस्थायी रूट परिवर्तन से व्यापारियों और यात्रियों की आय में कमी आ सकती है।

आर्थिक विश्लेषकों ने कहा है कि मुगमा स्टेशन का आधुनिकीकरण दीर्घकालिक रूप से भारतीय रेलवे के राजस्व में वृद्धि करेगा। नया बुनियादी ढाँचा अधिक ट्रेनें चलाने की क्षमता प्रदान करेगा, जिससे माल एवं यात्री परिवहन दोनों में सुधार होगा। इस परियोजना से स्थानीय उद्योगों को भी लाभ मिलेगा, क्योंकि बेहतर कनेक्टिविटी से वस्तुओं की समय पर डिलीवरी संभव होगी।

Updated: August 28, 2026

The temporary rerouting around Mugma, while inconvenient, acts as a live stress‑test for the new hub—any bottlenecks uncovered now will be ironed out before the 2025 capacity boost, turning short‑term pain into a smoother, higher‑revenue network.

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