पिछले कुछ वर्षों में भारत में बाल तस्करी के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। विशेषकर उत्तर-पूर्वी राज्य और दक्षिणी राज्यों में बच्चों को काम या शोषण के लिये लुभाने वाले नेटवर्क सक्रिय हैं। इस संदर्भ में, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले पाँच वर्षों में बाल तस्करी के मामलों में लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह प्रवृत्ति पुलिस को सशक्त करने तथा प्री-एंट्री इंटेलिजेंस को सुदृढ़ करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने प्रथम चरण में 45 मामलों की पहचान की, जहाँ शिशु एवं किशोर विभिन्न घरों, गेराज, तथा अनैतिक कार्यस्थलों में फंसे हुए पाए गए। इन मामलों में से अधिकांश में बच्चों को नकली रोजगार, शादियों या घरेलू श्रम के नाम पर लुभाया गया था। पुलिस ने बताया कि इन शिकारों को बचाने के लिये विशेष रूप से प्रशिक्षित इकाइयों ने गुप्त रूप से प्रवेश कर सबूत इकट्ठा किए और तत्पश्चात तत्काल बचाव कार्य किया।
दूसरे चरण में, स्थानीय पुलिस एवं बाल संरक्षण विभागों के सहयोग से बचाव का दायरा विस्तारित किया गया। 17 राज्यों की पुलिस ने समन्वय समिति के माध्यम से सूचनाएँ साझा कीं, जिससे कई छिपे हुए ठिकानों का पता चला। इन ठिकानों में छोटे गांव, औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास के आवासीय क्षेत्रों, तथा कुछ निजी घर शामिल थे, जहाँ बच्चों को अक्सर अनैच्छिक श्रम या यौन शोषण के लिये रखा जाता था।
तीसरे चरण में, बचाए गए बच्चों की सुरक्षा एवं पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया गया। बचाव के बाद उन्हें तत्काल चिकित्सा जांच, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और पुनर्वास केन्द्रों में स्थानांतरित किया गया। पुलिस ने कहा कि प्रत्येक बच्चा अलग-अलग आवश्यकताओं के अनुसार उपयुक्त संस्थान में भेजा गया, जहाँ उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक पुनर्संयोजन के लिए व्यापक सहायता मिल रही है।
ऑपरेशन के दौरान एक विशेष केस ने सभी का ध्यान आकर्षित किया, जब 3 महीने की नन्ही बच्ची और उसकी 17 वर्षीया माँ को भी सुरक्षित निकाला गया। यह मामला इस तथ्य को उजागर करता है कि नाबालिग माताओं को भी अक्सर शोषण के चक्र में फंसा दिया जाता है। पुलिस ने बताया कि इस माँ को भी एक तस्कर समूह ने आर्थिक लाभ के लिए बेचने का इरादा किया था, लेकिन तेज़ कार्रवाई से उन्हें बचाया गया।
ऑपरेशन के परिणामस्वरूप कई तस्कर समूहों की पहचान हो सकी। पुलिस ने 12 प्रमुख तस्कर नेटवर्कों के प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया और उनके साक्ष्य एकत्रित कर कोर्ट में पेश किए। इन अभियुक्तों पर मानव तस्करी, बाल शोषण एवं अन्य संबंधित अपराधों के तहत कई सज़ाएँ तय की गईं। इस सफलता से विभिन्न राज्यों में समान अभियानों के लिये प्रोत्साहन मिला है।
इस बचाव मिशन पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी टिप्पणी की। आयोग ने कहा कि ऐसी तेज़ और सुदृढ़ कार्रवाई बाल अधिकारों की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम है, परन्तु यह केवल एक शुरुआत होनी चाहिए। आयोग ने सभी राज्यों को समान रूप से डेटा साझा करने, जागरूकता कार्यक्रम चलाने तथा शोषण के मूल कारणों को समाप्त करने की अपील की।
Updated: September 10, 2026
Odisha police’s “Operation Anveshan” rescued 101 minors, including 47 girls, from trafficking and illegal labor across 17 states between Aug 28 and Sept 8, and arrested 12 key traffickers. The multi‑agency effort, coordinated with child‑protection bodies and NGOs, highlighted a rising trend in child trafficking and called for broader data sharing and preventive measures nationwide.
Operation Anveshan shows that coordinated, data‑driven policing can crack entrenched child‑trafficking rings, but the 35 % rise in cases warns that rescue alone won’t curb the supply side.
Unless states turn these tactical wins into sustained socio‑economic safeguards for vulnerable families, the same networks
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