बिहार विधानसभा की पर्यटन उद्योग संबंधी समिति का गठन 2019 में किया गया था, जिसका प्राथमिक उद्देश्य राज्य के पर्यटन संसाधनों का सर्वांगीण विकास, निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन करना रहा है। समिति में पहले नौ सदस्य थे, जिनमें जदयू विधायक मनोरंजन सिंह सभापति के रूप में कार्यरत थे। समिति ने पिछले दो वर्षों में कई परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार की, जैसे मिथिला कला केंद्र, बोधगया पर्यटन सर्किट और जल पर्यटन पहल।
नई नियुक्ति के बाद, समिति ने अगले दो महीनों में प्राथमिक कार्यसूची तैयार करने का प्रस्ताव रखा है। इसमें पर्यटन स्थलों के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करना, स्थानीय उद्यमियों को ऋण सुविधा प्रदान करना और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से प्रमोशन को तेज़ करना शामिल है। समिति ने यह भी संकेत दिया कि वे राज्य सरकार के पर्यटन नीति 2025 के पुनरावलोकन में सक्रिय भूमिका निभाएंगे, जिससे निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण बन सके।
प्रशांत किशोर ने नियुक्ति पर अभिप्राय देते हुए कहा कि वे बिहार के सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति और तकनीकी नवाचार को मिलाकर पर्यटन को सतत विकास के मार्ग पर ले जाना उनका लक्ष्य होगा। किशोर ने यह भी कहा कि वे स्थानीय समुदायों को पर्यटन विकास प्रक्रिया में जोड़कर सामाजिक लाभ को अधिकतम करना चाहते हैं।
समिति के सभापति मनोरंजन सिंह ने इस नियुक्ति को सकारात्मक रूप में देखा और कहा कि प्रशांत किशोर जैसे अनुभवी राजनेता का जुड़ना समिति की कार्यक्षमता को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि अब समिति अधिक सटीक डेटा‑आधारित निर्णय ले सकेगी और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय को बेहतर बना सकेगी। सिंह ने यह भी संकेत दिया कि आगामी महीनों में समिति द्वारा कई सार्वजनिक सुनवाइयाँ आयोजित की जाएँगी, जिससे सभी हितधारकों की राय सम्मिलित की जा सके।
राज्य के पर्यटन विभाग के मुख्य सचिव ने भी इस विकास पर टिप्पणी की और कहा कि नई सदस्यता से समिति के कार्यान्वयन में गति आएगी। उन्होंने बताया कि विभाग पहले से ही कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, जैसे वार्षिक पर्यटन मेले का विस्तार और ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष योजना। विभाग ने कहा कि वे समिति के साथ मिलकर वित्तीय योजना तैयार करेंगे, जिससे बजट के भीतर अधिकतम प्रभावी परिणाम प्राप्त हो सके।
बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थल, जैसे राजगीर, वैशाली और कुशेश्वर, के प्रबंधन में अब नई नीति‑निर्माण प्रक्रियाएँ लागू की जाएँगी। स्थानीय व्यापारियों और होटल मालिकों ने इस विकास को आर्थिक अवसर के रूप में स्वागत किया है, क्योंकि इससे उनकी आय में वृद्धि की संभावना है। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण संगठनों ने सतत पर्यटन के लिए कड़े मानकों की मांग की है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों ने इस नियुक्ति को राज्य में पर्यटन को प्राथमिकता देने के संकेत के रूप में पढ़ा है। उन्होंने कहा कि पर्यटन के माध्यम से रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बिना ठोस निगरानी और पारदर्शी प्रक्रिया के निवेश आकर्षित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
आर्थिक विशेषज्ञों ने बताया कि पर्यटन उद्योग के विस्तार से राज्य की कुल घरेलू उत्पाद (GDP) में 1.5‑2 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है, यदि सही निवेश और प्रबंधन हो।
The appointment expands the committee to ten members, enhancing its capacity to shape tourism policy and oversee project implementation. It aligns the body with the state’s agenda to boost tourism‑related investment, infrastructure and employment.
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