बाढ़ की पूर्वापेक्षा की जड़ें इस साल की अनियमित मौसमी बारिश में निहित हैं, जिसमें जून के मध्य से लेकर अब तक 1,200 mm से अधिक वर्षा दर्ज हुई है। जलवायु विज्ञानियों ने बताया कि हिमालयी जलधारा से बहने वाली गंगा, कोसी, सोन और पुनपुन जैसी नदियों की धारा में अत्यधिक वृद्धि हुई है, जिससे उनके जलस्तर ने पहले से तय किए गए “खतरे के निशान” को पार कर लिया। इन नदियों के किनारों पर स्थित बाड़ों और बांधों की उम्र और रख‑रखाव की कमी ने भी स्थिति को और बिगाड़ा है।
इतिहासिक आँकड़े दर्शाते हैं कि 2020‑2021 में इस प्रकार की बाढ़ ने लगभग 25 लाख लोगों को प्रभावित किया था, परंतु इस बार के आँकड़े पहले ही 30 लाख से अधिक दर्शा रहे हैं। राज्य के जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गंगा के जलस्तर में 2.5 मीटर की वृद्धि, कोसी में 2.2 मीटर, और सोन में 1.9 मीटर की बढ़ोतरी देखी गई है। पुनपुन, बागमती, गंडक, बूढ़ी गंडक और घघरा जैसी नदियों ने भी समान स्तर की वृद्धि दर्ज कराई है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है।
पटना में स्थित गंगा, सोन और पुनपुन के जलस्तर ने पहले ही हाई अलर्ट का स्तर पार कर लिया, जिससे शहर के कई प्रमुख सड़कों पर जल जमा हो गया है। गंगा घाटी में स्थित प्राचीन मंदिरों और व्यापारिक केंद्रों के आसपास की निचली बस्तियों में पानी की सतह 1.5 मीटर तक पहुँच गई है, जिससे निवासियों को अस्थायी शरणस्थल की तलाश करनी पड़ी। स्थानीय पुलिस ने बताया कि कई घरों की छतें भी पानी के नीचे धँस गई हैं, और कई परिवारों को अपनी वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए ऊँची जगहों पर स्थानांतरित होना पड़ा।
बिहार के 13 जिलों में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव स्पष्ट हो रहा है। जल निकासी की खराब व्यवस्था, कच्चे जलनिकायों का टूटना, और स्वास्थ्य सेवाओं की अपर्याप्त उपलब्धता ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। कई प्राथमिक विद्यालय बंद कर दिए गए हैं, और स्वास्थ्य केंद्रों में रोगी संख्या में तीव्र वृद्धि देखी जा रही है, विशेषकर जलजनित संक्रमण और श्वसन रोगों की शिकायतें बढ़ी हैं।
संबंधित प्राधिकरण ने तुरंत आपातकालीन उपायों के तहत राहत एवं पुनर्वास कार्य शुरू कर दिया है। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने 15 हजार से अधिक स्वयंसेवकों को तैनात कर प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य, जल, और चिकित्सीय सहायता पहुँचाने का आदेश दिया है। भारतीय सेना ने भी सहायता प्रदान करने के लिए दो हेलीकॉप्टर और दो एम्बुलेंस तैनात किए हैं, जबकि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल ने जल-उत्खनन मशीनों को तेज़ी से चलाने का आदेश दिया है।
बढ़ते जलस्तर के कारण स्थानीय व्यापारियों ने अपने स्टॉक्स को सुरक्षित रखने के लिए अस्थायी गोदामों में स्थानांतरित किया है, परंतु कई छोटे व्यवसायों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। बागमती नदी के किनारे स्थित कृषि बाजार में फसलें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे किसानों को संभावित आय में 30 % तक की घटावट का डर है। इस बीच, सरकारी विभागों ने बाढ़ प्रभावित लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा की है, जिसमें प्रत्येक हाउसहोल्ड को 25,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
राज्य के मुख्य मंत्री ने बाढ़ के कारण हुए मानवीय और आर्थिक नुकसान को कम करने हेतु विशेष समिति का गठन किया है, जिसमें जलवायु विशेषज्ञ, जल संसाधन प्रबंधन अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आगामी दो हफ्तों में जल स्तर की निरंतर निगरानी की जाएगी और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त राहत पैकेज जारी किए जाएंगे। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) से अतिरिक्त निधियों की मांग की है, ताकि जल निकासी, बाढ़ रोकथाम और पुनर्वास कार्य को तेज़ी से पूरा किया जा सके।
Updated: September 3, 2026
Bihar’s eight major rivers have surged past danger marks, plunging 13 districts into a severe flood crisis that has swamped roads, schools and health centres while displacing thousands. State disaster officials, the army and volunteers are racing to deliver food, water and medical aid as authorities brace for further rises and assess the looming economic fallout.
The flood has pushed water levels of eight major rivers past danger thresholds, endangering infrastructure and public safety.
It has prompted a coordinated emergency response involving state agencies, the military and relief volunteers to protect millions of residents.
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