बाढ़ के प्रकोप से पहले, नेपाल सरकार ने कई बार चेतावनी जारी की थी कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमनदियों में तेज़ पिघलाव और अस्थिर जलाशयों की संभावना बढ़ रही है। इस चेतावनी को कई स्थानीय समुदायों ने गंभीरता से नहीं लिया, जिससे कई ग्रामीण क्षेत्रों में निकासी की तैयारी नहीं हो पाई। पिछले साल के उसी अवधि में समान जलवायु स्थितियों के कारण भी छोटे स्तर की बाढ़ देखी गई थी, लेकिन इस बार बाढ़ की गति और पैमाना पहले की तुलना में कहीं अधिक था।
बाढ़ के बाद, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने तत्काल राहत कार्यों के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बचाव दल को तैनात किया। काठमांडू स्थित राष्ट्रीय आपातकालीन संचालन केंद्र (NEOC) ने ५०० से अधिक स्वयंसेवकों को विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों में भेजा, जहाँ वे जल निकासी, आपातकालीन चिकित्सा सहायता और शरणस्थली की व्यवस्था कर रहे हैं। साथ ही, भारतीय और चीनी सेना के हेलीकॉप्टरों को भी आपातकालीन आपूर्ति पहुँचाने के लिए भेजा गया, जिससे कई कठिन पहुँच वाले पहाड़ी इलाकों में राहत कार्य तेज़ी से जारी है।
स्थानीय अस्पतालों में घायल और बीमार लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। काठमांडू के तिब्बती अस्पताल में अब तक २३७ रोगी भर्ती हुए हैं, जिनमें से कई को गंभीर जलजनित संक्रमण और ठंडे मौसम के कारण शॉक जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित चिकित्सा सहायता और जल शुद्धिकरण उपकरण पहुँचाने की योजना बनाई है, लेकिन बाढ़‑ग्रस्त सड़कों के कारण कई गांवों तक पहुँच अभी भी बाधित है।
पर्यटक संघों ने बताया कि कई विदेशी यात्रियों को अब तक खोजा नहीं गया है, जिनमें यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया के कई नागरिक शामिल हैं। काठमांडू में स्थित नेपाल पर्यटन बोर्ड ने कहा कि उन्होंने सभी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों को स्थिति की जानकारी दी है और यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग या वापसी की सुविधा प्रदान करने के लिए काम कर रहे हैं।
बाढ़ की स्थिति को लेकर स्थानीय प्रशासन ने तत्काल निकासी आदेश जारी किया है और प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने का निर्देश दिया है। काठमांडू के महापौर ने कहा कि सभी सार्वजनिक संस्थानों को बाढ़‑रोकने वाली बाधाओं को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त संसाधन प्रदान किए जाएंगे। साथ ही, उन्होंने कहा कि बाढ़ के बाद के पुनर्वास कार्यों में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।
दुर्भाग्यवश, बाढ़‑रोकने वाली कई पहाड़ी नदियों में अब भी पानी का स्तर उच्च बना हुआ है, जिससे आगे के फटने की आशंका बनी हुई है। जलवायु विज्ञान संस्थान (ICIMOD) के प्रतिनिधियों ने कहा कि जल स्तर की निरंतर निगरानी और संभावित बाढ़‑रोकने वाली जलाशयों के स्थिरता परीक्षण को तुरंत किया जाना चाहिए, ताकि आगे की बड़ी तबाही को रोका जा सके।
राजनीतिक पक्ष ने इस आपदा पर गहरी चिंता जताई है। प्रधान मंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर आपातकाल घोषित कर सभी सरकारी एजेंसियों को एकीकृत कार्रवाई करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि इस आपदा को रोकने के लिए जलवायु परिवर्तन के खिलाफ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है और अंतर्राष्ट्रीय सहायता के लिए भी दरवाजा खुला रहेगा।
अर्थव्यवस्था पर भी इस बाढ़ का गंभीर असर पड़ेगा। कृषि मंत्रालय ने बताया कि बाढ़ के कारण धान, मक्का और सब्ज़ी की खेती पर बड़ी हानि हुई है, जिससे किसानों की आय पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
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