IMD की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2026 ने 1901 के बाद से भारत का सबसे गर्म महीना दर्ज किया, जहाँ औसत तापमान 28.01 डिग्री सेल्सियस रहा। यह आंकड़ा पिछले 125 वर्षों के तापमान रुझानों को पीछे छोड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस असामान्य गर्मी ने मौसमी चक्र को बाधित किया, जिससे बाद के महीनों में वर्षा पैटर्न में परिवर्तन आया।
लॉन्ग‑टर्म प्रेसीपिटेशन एवरीज (LPA) का अर्थ है किसी विशेष क्षेत्र में 30‑50 वर्षों के औसत वर्षा डेटा का आधार। IMD ने 1971‑2020 की अवधि के आँकड़ों को आधार बनाकर इस साल के सितंबर के लिए LPA‑91 % की संभावना बताई है। इसका मतलब है कि इस महीने की कुल वर्षा औसत से लगभग दस प्रतिशत कम हो सकती है, जो कई कृषि‑आधारित राज्यों के लिए गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकती है।
पिछले दो दशकों में भारत में मौसमी असंतुलन बढ़ता जा रहा है। 2019‑2022 के बीच भी LPA‑90 % से नीचे के महीनों की संख्या बढ़ी थी, जिससे जलस्रोतों पर दबाव बना। इस वर्ष के डेटा को देखते हुए, विशेषज्ञों का कहना है कि जलभंडारण और सिंचाई रणनीतियों में बदलाव आवश्यक हो सकता है।
सत्रह राज्य में जलसंधारण क्षमता पहले ही सीमित थी। विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में जलस्रोतों पर पहले से ही तनाव बना हुआ है। कृषि मंत्रालय ने पिछले सप्ताह जल संरक्षण के लिए आपातकालीन उपायों की घोषणा की थी, जिसमें जल‑संचयन टैंक और सूखे‑सहनशील बीजों का प्रावधान शामिल था।
मौसम विभाग ने कहा कि सितंबर में दक्षिण‑पूर्वी भारत में बाढ़ की संभावना कम है, लेकिन पश्चिमी भाग में कभी‑कभी अस्थायी बवंडर का खतरा बना रह सकता है। इस संबंध में स्थानीय प्रशासन ने त्वरित आपातकालीन तैयारियों की सूचना जारी की है, जिससे संभावित बाढ़‑प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ेगी।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने पूर्वानुमानित कम वर्षा को ध्यान में रखते हुए जल‑संकट के लिए आपातकालीन योजना तैयार करने का आह्वान किया। विभाग ने राज्य स्तर पर जल‑संकट प्रतिक्रिया टीमों को सक्रिय करने और जल‑संसाधन प्रबंधन में लचीलापन लाने की दिशा में कदम उठाने का निर्देश दिया।
केंद्रीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने किसानों को सूखे‑सहनशील फसलों की ओर स्थानांतरित होने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि धान की बजाय ज्वार, बाजरा और मक्का जैसी कम‑पानी वाली फसलों को उगाने से उत्पादन में गिरावट को कुछ हद तक रोका जा सकता है।
वित्त मंत्रालय ने जल‑संकट के संभावित आर्थिक प्रभाव को लेकर सावधानी बरतने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि कृषि‑वित्त में बैंकों को ऋण पुनर्संरचना के विकल्प प्रदान करने चाहिए, जिससे किसानों को आर्थिक दबाव से बचाया जा सके।
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं में प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि जल‑संकट के समय में जल‑प्रबंधन और जल‑संरक्षण को प्राथमिकता देना आवश्यक है। विपक्षी दलों ने सरकार की जल‑नीति में सुधार की मांग की, जबकि राज्य प्रमुखों ने जल‑संकट राहत के लिए अतिरिक्त बजट
Updated: September 1, 2026
Insight: The forecast anticipates below-average rainfall, compounding existing water shortages in key agricultural regions.
Record prior-season heat is likely to disrupt seasonal cycles, intensifying pressure on irrigation systems and water reserves.
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