ने हाल ही में अन्य राजनीतिक दलों से एकजुट होकर अनुच्छेद 370 को बहाल करने की मांग की थी। इस बयान के ठीक बाद, बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने एक स्पष्ट और द्रुत प्रतिक्रिया देते हुए इस मांग को पूरी तरह से खारिज
कर दिया। उन्होंने यह तर्क दिया कि जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा हमेशा के लिए समाप्त हो चुका है, लेकिन अब उसे फिर से प्रदान करने की कोई चर्चा नहीं हो सकती। यह प्रतिक्रिया कोर्ट रूम और संसद के इतिहास को याद दिलाती है।
अनुच्छेद
370 को समाप्त करने का निर्णय अगस्त 2019 में लिया गया था। यह कदम तब उठाया गया जब भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत प्रकाशित एक अधिनियम के जरिए इसे लागू किया। इस निर्णय से जम्मू और कश्मीर को संघ राज्य
क्षेत्र का दर्जा दिया गया। इसके साथ ही राज्य की संसदीय सीटों का भी पुनर्निरधारण किया गया। यह कानूनी बदलाव भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर रहा। गोंडवाना संघटन अधिनियम ने औपचारिक तौर पर इस प्रक्रिया को पूरा किया।
तांत्रिक पहलू से देखें
तो सविनय असाहय पथ पर चलने वाला यह निर्णय सरकारी राजपत्र में प्रकाशित हो चुका है। इससे कोई वाद विवाद प्रभावित नहीं होता। इस कानूनी ढांचे ने सुनिश्चित किया कि यह निर्णय चुस्त और दुरुस्त हो। यह केवल एक राजनीतिक कदम नहीं था बल्कि एक
कानूनी आवश्यकता भी थी। इससे पहले के कई दशकों में जो व्यवस्था रही थी, उसमें कई कमी की गई थी।
अल्ताफ ठाकुर ने अपनी प्रतिक्रिया में स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 370 को वापस लाने का कोई भी प्रस्ताव असंगत है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भारतीय
संसद के दोनों सदनों द्वारा लिया गया था। साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस फैसले का समर्थन करते हुए इसे वैध माना है। ठाकुर ने तर्क दिया कि जब तक कोर्ट ने इसे हटाया नहीं है, तब तक यह वापस नहीं आ सकता। इस
लिए राजनीतिक शोर मचाने से लाभ नहीं होगा।
मीरवाइज उमर फारूक के बयान पर आपत्ति जताते हुए ठाकुर ने आरोप लगाया कि वे सीमांत विवादित बयान देकर क्षेत्र में अफरातफरी फैला रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मीरवाइज ने हाल ही में एक सभा को संबोधित
किया था। उन्होंने वहां कहा कि अब कमर कसने का समय आ गया है। उनकी बात का तात्पर्य स्पष्ट रूप से 1947 के कानूनी प्रावधान की towards होती थी।
यह बयान उस समय आया है जब क्षेत्र में शांति की स्थिति सामान्य है। पिछले कई वर्षों
में कश्मीर में हिंसा का सिलसिला बढ़ा था। खून खराबा हुई थी और आतंकवाद का कहर से बातें हो रही थी। विरोधारण और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई के बाद अब स्थिति में खूबसूरती आई है। लोगों की दिनचर्या में सुधार देखा जा सकता है।
यह बदलाव सरकार की नीतियों का परिणाम है।
बीजेपी ने इस बात पर जोर दिया कि पिछली व्यवस्था में भ्रष्टाचार और अनियमितता का कहर था। विशेषाधिकार के कारण अन्य राज्यों के लोग यहाँ निवेश नहीं करते थे। अब मैं उसका दावा कर सकता हूं कि निवेश
में टक्कान है। लोगों को रोजगार मिल रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार हुए हैं। यह बदलाव सीधे समुदाय के कल्याण के लिए है।
मीरवाइज उमर फारूक ने अपनी मांग के पीछे यह तर्क दिया है कि विशेष दर्जा रद्द करने के बाद
लोगों को नुकसान हुआ है। उनका मानना है कि छूटों को वापस लिया जाना चाहिए। इसके लिए उन्हें राजनीतिक दलों को एकजुट करें। उन्होंने इसे एक एकता का काम बताया। उन्होंने इस सब की स
Updated: August 31, 2026
Insight: The response underscores the legal finality of the 2019 amendment that removed Jammu‑Kashmir’s special status.
It also signals the BJP’s stance against any move to reinstate Article 370, shaping future regional political discourse.
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