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आईआईटी पूर्व छात्र ने स्वच्छ नाली रोबोटिक प्रणाली विकसित की, स्टार्ट‑अप का मूल्यांकन 15 करोड़ रुपये

बिहार के एक छोटे कस्बे के बगल में स्थित छोटे प्रयोगशाला में, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के पूर्व छात्र अभिषेक सिंह ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो मानव श्रम को हटाकर नालियों की सफाई में रोबोट का उपयोग कर सकेगी।
इस नवाचारी परियोजना को “स्वच्छ नाली” नामक स्टार्ट‑अप के रूप में कार्यान्वित किया गया है, जिसकी वर्तमान बाजार मूल्यांकन लगभग पंद्रह करोड़ रुपये बताया गया है। यह पहल न केवल शहरी स्वच्छता में सुधार का वादा करती है, बल्कि जोखिमभरे कार्य में श्रमिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी।अभिषेक सिंह ने आईआईटी बनारस में मेक्ट्रॉनिक्स में स्नातकोत्तर किया और अपने गृह नगर दरभंगा में ही इस विचार को धरातल पर उतारने का निर्णय लिया। कई वर्षों तक भारत में नालियों की सफाई के लिए हाथों‑से काम करने वाले श्रमिकों को अत्यधिक स्वास्थ्य जोखिम झेलना पड़ता था, जिससे इस क्षेत्र में स्वचालन की आवश्यकता स्पष्ट थी। इस पृष्ठभूमि में, स्थानीय निकायों और निजी संस्थाओं ने भी इस समस्या को हल करने के लिए विभिन्न उपाय आज़माए, पर तकनीकी समाधान अभी तक उपलब्ध नहीं था।

स्टार्ट‑अप “स्वच्छ नाली”की स्थापना 2022 में हुई, जब अभिषेक ने अपने प्रोटोटाइप को एक स्थानीय स्वच्छता निगम के सामने प्रदर्शित किया। प्रारंभिक चरण में उन्होंने दो प्रकार के रोबोट विकसित किए: एक जो नाली के अंदरूनी भाग को स्कैन करके गंदगी की पहचान करता है, और दूसरा जो स्वचालित रूप से कचरा इकट्ठा कर उसे प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुँचाता है। इन रोबोटों को सौर ऊर्जा और बैटरी दोनों से संचालित किया जाता है, जिससे संचालन लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।

प्रोतो‑टाइप परीक्षण के दौरान, अभिषेक की टीम ने 10 किलोमीटर लंबी नाली नेटवर्क पर रोबोट का प्रयोग किया। परिणामस्वरूप, शुद्धता स्तर 95 प्रतिशत तक पहुँच गया, जबकि मानव श्रमिकों द्वारा किए जाने वाले कार्य में औसत त्रुटि दर 12 प्रतिशत थी। इस परीक्षण ने न केवल सफाई की गति बढ़ाई, बल्कि जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में कार्बन उत्सर्जन को भी लगभग 30 प्रतिशत घटाया।

स्थानीय नगर निगम के प्रमुख, शरद सिंह ने इस तकनीक को अपनाने की घोषणा की और कहा कि अगले छह महीने में 50 रोबोट को स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह पहल शहरी स्वच्छता के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मददगार होगी और साथ ही श्रमिकों को अन्य उत्पादक कार्यों में पुनःस्थापित किया जा सकेगा। इसी क्रम में, राज्य सरकार ने इस स्टार्ट‑अप को अनुदान की रूपरेखा तैयार की, जिससे आगे के विकास में वित्तीय समर्थन सुनिश्चित हो सके।

वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि “स्वच्छ नाली” का मूल्यांकन पंद्रह करोड़ रुपये होना एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि स्वच्छता और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश धीरे‑धीरे बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी कंपनियों के साथ तुलना करने पर, अभिषेक की तकनीक अधिक किफायती और पर्यावरण‑अनुकूल मानी जा रही है। निवेशकों ने कहा कि यदि यह मॉडल बड़े शहरी केंद्रों में सफल रहता है, तो कंपनी की बाजार पूंजी में दो‑तीन गुना वृद्धि की संभावना है।

श्रम संघ के प्रतिनिधियों ने इस पहल पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी। एक तरफ, उन्होंने रोबोटिक सफाई से श्रमिकों की सुरक्षा में सुधार की सराहना की, जबकि दूसरी ओर उन्होंने रोजगार के संभावित नुकसान को लेकर चिंता जताई। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को पुनःप्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना चाहिए, जिससे प्रभावित श्रमिक नई तकनीकी भूमिकाओं में स्थान पा सकें।

नागरिक समूहों ने भी इस विकास को सकारात्मक रूप से देखा। दिल्ली स्थित पर्यावरण संरक्षण फोरम के प्रवक्ता ने कहा कि नालियों की स्वच्छता में सुधार से सार्वजनिक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार होगा, विशेषकर मौसमी बाढ़ के समय में। उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीकी नवाचारों को सार्वजनिक‑निजी साझेदारी के माध्यम से विस्तार देना चाहिए, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लाभ मिल सके।

Updated: September 1, 2026

The robot‑based sewer‑cleaning system automates inspection and waste removal, reducing reliance on manual labor. Its deployment is expected to lower operational costs, improve safety for workers, and cut carbon emissions in municipal sanitation.

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