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हरिश राव ने कांग्रेस सरकार के विकलांग वर्ग के वादों को ‘धोखा’ कहा, तुरंत कार्रवाई की माँग की

कांग्रेस सरकार पर हरिश राव ने फिर एक बार कड़ी टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने कहा कि सरकार ने विकलांग वर्ग के लोगों को भी धोखा दिया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने चुनाव से पहले किए गए कई वादे तोड़े, विशेषकर छोटे समूहों के लिए किए गए वादों को अब नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। यह बयान राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक सार्वजनिक सभामें दिया गया, जहाँ राव ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना की।हरिश राव, जो बिड़ला राष्‍ट्रीय समिति (BRS) के वरिष्ठ नेता हैं, ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने विकलांग नागरिकों के लिये विशेष योजनाओं का वादा किया था, लेकिन अब उन वादों को लागू करने में सरकार की पहल नहीं दिख रही। उन्होंने कहा कि इस वर्ग के लोगों को न केवल रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे, बल्कि स्वास्थ्य सुविधाओं में भी कमी देखी जा रही है। राव ने यह भी कहा कि इस प्रकार की नीति विफलता से सामाजिक असमानता बढ़ रही है।

पृष्ठभूमि में यह देखा गया कि पिछले साल राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विकलांग व्यक्तियों के लिये कई नीतिगत वादे किए गये थे। कांग्रेस ने चुनावी अभियानों में यह कहा था कि वह विकलांग वर्ग के लिये विशेष शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार योजनाएं शुरू करेगा। इन वादों को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने भी समर्थन जताया था। हालांकि, चुनाव जीतने के बाद इन वादों की कार्यवाही में देरी और अस्पष्टता देखी गई।

वर्तमान में, विकलांग अधिकार संगठनों ने सरकार से स्पष्ट जवाब माँगा है। उन्होंने कहा कि अब तक सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जिससे इस वर्ग के लोगों में निराशा बढ़ रही है। कई संगठनों ने दिल्ली में एक सामूहिक प्रदर्शन भी किया, जिसमें उन्होंने सरकार को तुरंत कार्यवाही करने का आह्वान किया।

हरिश राव ने इस मुद्दे को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर के विधानसभा में प्रस्तुत करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में सरकार की विफलताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है और इसके आधार पर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार ने तुरंत सुधार नहीं किया, तो वैधानिक कदम उठाने की संभावना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की आलोचना सरकार के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है। उन्होंने कहा कि विकलांग वर्ग के समर्थन को हासिल करना चुनावी जीत के लिये महत्वपूर्ण हो सकता है। कई विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि सरकार को इस वर्ग की समस्याओं को नजरअंदाज़ करने से सामाजिक असंतोष बढ़ेगा और यह राजनीति में नई चुनौतियां लाएगा।

कांग्रेस पक्ष से इस बयान पर त्वरित प्रतिक्रिया मिली। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि यह आरोप निराधार हैं और सरकार ने कई योजनाओं को लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने विकलांग वर्ग के लिये विशेष आरक्षण और वित्तीय सहायता के प्रावधान किए हैं, जो अभी कार्यान्वित हो रहे हैं।

विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार को अपने वादों को साकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकलांग व्यक्तियों की जीवन गुणवत्ता सुधारने के लिये सरकार को अधिक बजट आवंटित करना चाहिए और नीतियों को तेज़ी से लागू करना चाहिए। इस पर कई सांसदों ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की नीति में स्पष्टता क्यों नहीं है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि विकलांग वर्ग के लिये विशेष योजनाओं का न होना आर्थिक विकास को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ग के लिये उचित रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाएं न होने से उत्पादन क्षमता में कमी आएगी और सामाजिक खर्च में वृद्धि होगी। इस कारण सरकार को इस दिशा में निवेश बढ़ाना चाहिए।

सामाजिक वैज्ञानिकों ने इस मुद्दे को सामाजिक असमानता के एक प्रमुख संकेतक के रूप में पहचाना। उन्होंने कहा कि विकलांग व्यक्तियों को अक्सर सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है, और सरकार की नीतियों में यह ध्यान न देना सामाजिक बंधनों को और गहरा करता है। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि समावेशी विकास के लिये सभी वर्गों को समान अवसर देना आवश्यक है।

राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद स्पष्ट हैं। जबकि विपक्ष ने सरकार को कड़ी निंदा की, कुछ छोटे दलों ने कहा कि इस मुद्दे को हल करने के लिये गठबंधन में सहयोग की आवश्यकता है। इस बीच, राज्य सरकार ने कहा कि वह सभी वर्गों के लिये समान

Updated: August 29, 2026

Harish Rao’s salvo spotlights a ticking political time‑bomb: sidelining disability promises not only fuels voter alienation but also threatens the state’s growth engine, as exclusion drags down productivity and inflates welfare costs. If the government can’t translate rhetoric into rapid, funded action, it

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