रेलवे के आधिकारिक दस्तावेज़ में कहा गया है कि ट्रैक पर अनधिकृत प्रवेश न केवल रेलवे के संचालन को बाधित करता है, बल्कि यात्रियों और कर्मियों की जान को भी खतरे में डालता है। भारतीय रेल ने 2025 में ट्रैक पर अनधिकृत गतिविधियों की संख्या में 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी, जबकि दुर्घटनाओं की संख्या में भी समानुपातिक वृद्धि देखी गई। इस कारण से रेलवे ने सुरक्षा प्रोटोकॉल को सख्त करने का निर्णय लिया।
आरपीएफ ने इस अवधि में मुख्यतः हावड़ा जंक्शन के पास स्थित दो प्रमुख ट्रैक सेक्शन में बड़े पैमाने पर ऑपरेशन किया। एजेंटों ने पहले से स्थापित निगरानी कैमरों और मोबाइल पुलिस इकाइयों का उपयोग करके संभावित स्टंटबाजों को पहचान लिया। कई मामलों में, स्टंटबाजों ने अपनी कैमरा सेट‑अप को छुपाने के लिए ट्रैक के पास बांस के झाड़े और कंक्रीट के ढेर का सहारा लिया था, जिसे पुलिस ने तुरंत ही ध्वस्त कर दिया।
पुलिस ने बताया कि 428 मामलों में आरोपियों ने पहले ही ट्रैक पर वीडियो बनाने के लिए अनुमति नहीं ली थी, जबकि 210 मामलों में उन्होंने पूर्व में जारी चेतावनी को नज़रअंदाज़ किया। शेष 190 मामलों में वीडियो सामग्री को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर प्रकाशित करने के बाद शिकायत दर्ज की गई, जिससे जांच तेज़ी से आगे बढ़ी। सभी मामलों में आरोपी को तत्काल हिरासत में ले कर पूछताछ की गई और संबंधित दस्तावेज़ी साक्ष्य संग्रहीत किए गए।
जांच के दौरान, आरपीएफ ने कई स्टंटबाजों की मोबाइल फ़ोन और ड्रोन को जब्त किया, जो उन्होंने अपनी फ़िल्मी सामग्री को एडिट करने के लिए इस्तेमाल किया था। पुलिस ने यह भी बताया कि इन उपकरणों में GPS डेटा मौजूद था, जिससे ट्रैक पर उनकी गतिशीलता को सटीक रूप से ट्रैक किया गया। इस तकनीकी साक्ष्य ने अभियोजन को केस की मजबूती प्रदान की और कई आरोपी को भारी जुर्माना व कारावास की संभावना का सामना करना पड़ा।
स्टंटबाजों और रील निर्माताओं की प्रतिक्रिया में कुछ ने कहा कि उन्होंने सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज़ नहीं किया, बल्कि “रचनात्मक अभिव्यक्ति” का अधिकार माना। कुछ ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया की दबाव में वे आर्थिक लाभ के लिए इस जोखिम को स्वीकार कर रहे थे। हालांकि, कई आरोपी ने पुलिस के सामने यह स्वीकार किया कि उन्हें ट्रैक पर प्रवेश के संभावित जोखिम का पूरी तरह से ज्ञान नहीं था और यह एक “अवधि‑संकल्प” था।
रेलवे अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त निगरानी कैमरे और सिविल डिटेक्शन सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ट्रैक के किनारे पर विशेष चेतावनी संकेत और प्रतिबंधित क्षेत्रों के मानचित्र को सार्वजनिक किया जाएगा, जिससे नागरिकों को स्पष्ट जानकारी मिल सके। रेलवे ने इस दिशा में स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय को और सुदृढ़ करने का इरादा व्यक्त किया है।
राजनीतिक वर्ग ने भी इस कदम का स्वागत किया है; कई विधायक और सांसदों ने संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए रेलवे की सुरक्षा नीति को सुदृढ़ करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सामाजिक मीडिया की अंधाधुंध लोकप्रियता के कारण सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।
Updated: August 29, 2026
Summary: Railway security forces cracked down on stunt‑makers and reel‑shooters on West Bengal and Jharkhand tracks, registering 828 cases, fining ₹6,608 and arresting 853 people between May 1 and July 31, 2026. The sweep, driven by a surge in viral social‑media videos, aims to curb risky trespassing that has spiked accidents and drawn political and public support for tighter monitoring.
The crackdown shows that social‑media fame can eclipse common sense, turning dangerous “viral” stunts into a nationwide security concern.
By treating the tracks as a public asset, the railways are reclaiming narrative control and sending a clear message that digital notoriety must not come at the cost of lives.
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