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बिहार में अब अंकपत्र पर नहीं लिखा होगा ‘Fail’, छात्रों को मिलेगा ‘Eligible for Skill’ का दर्जा

बिहार सरकार ने कक्षा दस और बारह के अंकपत्रों पर “फ़ेल” शब्द को हटाकर “एलबले फ़ॉर स्किल” (Eligible for Skill) लिखने का निर्णय लिया है। यह बदलाव 30 जून को जारी एक सरकारी आदेश के तहत लागू होगा, जिससे विद्यार्थियों को स्वरोजगार और कौशल विकास कार्यक्रमों में भाग लेने की अनुमति मिलेगी।
शिक्षा विभाग ने बताया कि यह कदम निरंतर शिक्षा की दिशा में एक प्रगतिशील पहल है, जो छात्रों के भविष्य को सुदृढ़ करने हेतु विविध विकल्प प्रदान करेगा।बिहार के शैक्षणिक प्रणाली में पिछले दो दशकों में कई बार सुधारात्मक उपाय अपनाए गए हैं, परन्तु अंकपत्रों पर “फ़ेल” शब्द का उपयोग कई बार छात्र मनोवैज्ञानिक दबाव का कारण बना। विशेषज्ञों का कहना है कि “फ़ेल” शब्द के साथ जुड़ी सामाजिक कलंक कई बार छात्रों को आगे की पढ़ाई से दूर कर देती है। इस संदर्भ में, 2020 में बिहार ने “उच्चतम” अंक देने वाले छात्रों को स्कीमा के तहत छात्रवृत्ति दी थी, परन्तु गिरावट वाले छात्रों के लिए कोई विशेष योजना नहीं थी।वर्तमान नीति के तहत, यदि छात्र 33% से कम अंक प्राप्त करता है, तो उसे “एलबले फ़ॉर स्किल” के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा, न कि “फ़ेल” के रूप में। यह वर्गीकरण राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन (NSDM) के साथ संरेखित है, जहाँ पात्र छात्रों को विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण कोर्स में प्रवेश मिलता है। इस नई शब्दावली से छात्रों को यह स्पष्ट संकेत मिलेगा कि वे आगे के प्रशिक्षण में भाग लेकर अपनी क्षमताओं को निखार सकते हैं।

शिक्षा विभाग ने बताया कि यह परिवर्तन केवल शब्दावली तक सीमित नहीं है; साथ ही, जिलास्तर पर कौशल केंद्रों की संख्या को बढ़ाने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया है। सरकार ने 2025 तक प्रत्येक जिले में कम से कम दो कौशल प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इस योजना के तहत, छात्रों को डिजिटल मार्केटिंग, सिलाई-करघा, एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी और अन्य उन्नत कोर्सों में दाखिला मिलेगा।

वर्तमान में, बिहार में लगभग 2.5 करोड़ छात्रों को कक्षा दस और बारह की परीक्षाओं में भाग लेना अनिवार्य है। उनमें से लगभग 12% छात्रों का अंक 33% से कम है, जो अब “एलबले फ़ॉर स्किल” श्रेणी में आएँगे। इस वर्गीकरण के साथ, राज्य सरकार ने छात्रवृत्ति, ट्यूशन सहायता और रोजगार मंचों तक पहुंच को आसान बनाने के लिए एक विशेष पोर्टल विकसित करने की घोषणा की है।

इस कदम पर बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि “हम चाहते हैं कि हर छात्र को अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर मिले, चाहे उसका शैक्षणिक प्रदर्शन कुछ भी हो।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह नीति राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंडा के साथ तालमेल रखती है और राज्य की आर्थिक प्रगति में सहायक सिद्ध होगी।

बिहार के कई शिक्षकों ने इस परिवर्तन को सकारात्मक रूप में देखा है। जिला शिक्षकों के संघ के अध्यक्ष ने बताया कि अब छात्रों को “फ़ेल” के डर के बजाय कौशल प्राप्त करने की दिशा में प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और उन्हें रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगा।

विरोधी आवाज़ें भी उठी हैं। कुछ निजी विद्यालयों के प्रतिनिधियों ने कहा कि “एलबले फ़ॉर स्किल” शब्दावली छात्रों को वास्तविक शैक्षणिक सुधार से दूर कर सकती है। उन्होंने यह तर्क दिया कि इस प्रकार की शब्दावली से शैक्षणिक मानक घट सकते हैं और छात्रों को मूलभूत ज्ञान से अधिक व्यावसायिक कौशल पर जोर देने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नीति से राज्य के रोजगार बाजार में बदलाव आएगा। यदि बड़ी संख्या में युवा कौशल प्रशिक्षण ले लेंगे, तो छोटे और मध्यम उद्योगों को कुशल कार्यशक्ति उपलब्ध होगी, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि संभावित है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार अवसरों का विस्तार होगा, जिससे प्रवास की प्रवृत्ति में कमी की उम्मीद है।

सामाजिक स्तर पर, इस निर्णय से छात्रों के बीच आत्मसम्मान में वृद्धि की संभावना है। कई सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं कि “फ़ेल” शब्द को हटाकर सकारात्मक शब्दावली अपनाने से सामाजिक कलंक में कमी आएगी और छात्रों को अपने भविष्य के प्रति अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे परीक्षा में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने वाले विद्यार्थियों पर परिवार और समाज का दबाव भी कम हो सकता है। हालांकि, केवल शब्दावली बदलना पर्याप्त नहीं होगा। छात्रों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता, मार्गदर्शन और सुधार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है, ताकि सकारात्मक भाषा के साथ वास्तविक शैक्षणिक समर्थन सुनिश्चित हो सके।

Updated: August 29, 2026

The change replaces “fail” with “Eligible for Skill,” linking low‑scoring students to state‑run vocational training programs. It aligns Bihar’s exam reporting with the National Skill Development Mission to broaden post‑school pathways.

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