पिछले दो वर्षों में NEET‑UG में धांधली के आरोप कई बार सामने आए थे, परंतु इस बार EOU की विस्तृत पूछताछ ने नई तहों को उजागर किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि परीक्षा के क्रम में कुछ डॉक्टरों ने छात्रों के नाम पर फर्जी दस्तावेज़ तैयार किए और उन्हें स्कॉलरशिप के लिए प्रस्तुत किया। इसके अलावा, कई डॉक्टरों ने व्यक्तिगत लाभ के लिये परीक्षा केंद्रों में अनियमित प्रबंध किए, जिससे चयन प्रक्रिया में अनुचित लाभ प्राप्त हुआ। इस प्रकार की हेरफेर ने परीक्षा की निष्पक्षता को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
EOU की जांच में यह भी पता चला कि स्कॉलरशिप के लिए निर्धारित मानदंडों को बदला गया था, जिससे कम अंक वाले छात्रों को भी उच्चतम अंक वाले अभ्यर्थियों के साथ बराबर किया गया। इस प्रक्रिया में कई प्रमुख सरकारी कॉलेजों के प्रमुख और प्रोफेसर शामिल थे, जो स्कॉलरशिप के वितरण में प्रमुख भूमिका निभाते थे। रिपोर्ट के अनुसार, इन बदलावों को आधिकारिक तौर पर कोई सूचना नहीं दी गई, जिससे अभ्यर्थियों और उनके परिवारों में भ्रम उत्पन्न हुआ।
जांच के दौरान एम्बेडेड साक्ष्य ने यह भी दिखाया कि कुछ डॉक्टरों ने अपने निजी क्लीनिकों में परीक्षा से संबंधित सुविधाएँ प्रदान कीं, जिससे अभ्यर्थियों को अतिरिक्त मदद मिली। इस प्रकार के आर्थिक लेन‑देनों के दस्तावेज़ों में स्पष्ट रूप से भुगतान की गई रक़में और प्राप्तकर्ता के नाम दर्शाए गए थे। इन लेन‑देनों को छिपाने के लिये विभिन्न झूठे प्रमाणपत्र और फर्जी पहचान पत्र भी तैयार किए गए थे, जो अब EOU की रिपोर्ट में सामने आ गए हैं।
NEET‑UG 2026 के परिणाम में धांधली के आरोपों ने कई राष्ट्रीय स्तर के मेडिकल संस्थानों को भी प्रभावित किया। इन संस्थानों में से कुछ ने अपनी स्कॉलरशिप नीतियों को तत्काल रद्द कर दिया और पुनः समीक्षा का आदेश दिया। साथ ही, विभिन्न मेडिकल कॉलेजों ने अपने चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिये नई दिशानिर्देश अपनाए हैं। इस बीच, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर गहन जांच का आदेश दिया है और सभी संबंधित दस्तावेज़ों को संकलित करने का निर्देश दिया है।
जब रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, तो कई प्रमुख डॉक्टरों ने इस धांधली के संबंध में अपने आप को साफ़ करने के लिये बयान जारी किए। उन्होंने कहा कि वे इस प्रक्रिया में अनजाने में शामिल हुए और उन्हें इस प्रकार की हेरफेर की जानकारी नहीं थी। कुछ ने अपने पदों से इस्तीफा देने का भी संकेत दिया, जबकि अन्य ने अपने कार्यकाल की वैधता पर बल दिया। इस प्रकार के बयानों ने जांच प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है, क्योंकि अब यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि किस स्तर पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी और संस्थागत भागीदारी थी।
संबंधित कॉलेजों की प्रशासकीय टीम ने भी इस खुलासे पर प्रतिक्रिया दी। कई कॉलेजों ने कहा कि वे इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और सभी संबंधित पक्षों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में ऐसी धांधली को रोकने के लिये सख्त निगरानी और ऑडिट प्रणाली लागू की जाएगी।
कुछ प्रमुख कॉलेजों ने कहा कि उन्होंने पहले ही सभी स्कॉलरशिप के दस्तावेज़ों की पुन: जांच शुरू कर दी है और दोषी पाए जाने वाले छात्रों को बर्खास्त किया जाएगा।
राजनीतिक वर्ग ने इस मुद्दे पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। मुख्य स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार इस प्रकार की धांधली को बर्दाश्त नहीं करेगी और तत्काल कार्यवाही करेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ मेडिकल शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती हैं और उन्हें सख्त दंडित किया जाएगा।
Updated: August 23, 2026
The EOU findings expose a systemic loophole in the medical scholarship and admission process, where individuals with influence over scholarship criteria allegedly manipulated merit lists to benefit their own private interests, including funding or supporting their clinics. What was intended to be a transparent, merit-based selection process appears to have been vulnerable to favoritism, conflicts of interest and institutional influence. If proven, such practices would undermine the credibility of competitive examinations and damage public confidence in medical admissions. The issue therefore goes beyond an isolated controversy and points to deeper weaknesses in governance, oversight and accountability. A comprehensive review of the selection framework, independent auditing, transparent disclosure of evaluation criteria and strict conflict-of-interest safeguards may be necessary to restore trust and ensure that scholarships and admissions are awarded solely on merit.
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