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बिहार में आज राजभवन मार्च करेंगे PhD स्कॉलर, TRE-4 परीक्षा वापस लेने की मांग; शिक्षक भर्ती को लेकर बढ़ा आंदोलन

पटना: बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा और उच्च शिक्षा से जुड़े नियमों को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज होता जा रहा है। शुक्रवार, 21 अगस्त को PhD स्कॉलर्स और शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों ने पटना में राजभवन मार्च का आह्वान किया है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शिक्षक भर्ती परीक्षा से जुड़े फैसले को वापस लेना और भर्ती प्रक्रिया में स्पष्टता लाना शामिल है। यह मार्च ऐसे समय हो रहा है जब बिहार में पिछले कुछ दिनों से परीक्षा और भर्ती व्यवस्था को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

TRE-4 परीक्षा को लेकर विरोध

प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध बिहार लोक सेवा आयोग की शिक्षक भर्ती परीक्षा के अगले चरण को लेकर है। अभ्यर्थी परीक्षा की प्रक्रिया, अधिसूचना और भर्ती से जुड़े फैसलों पर सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया में लगातार बदलाव और अनिश्चितता से हजारों उम्मीदवारों के भविष्य पर असर पड़ रहा है।

शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों का दबाव पिछले दिनों लगातार बढ़ा है। 18 अगस्त को भी पटना के गर्दनीबाग इलाके में नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों और अतिथि शिक्षकों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। उनकी मांगों में शिक्षक भर्ती परीक्षा के अलावा असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के नए नियम और दूसरी भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी विसंगतियां भी शामिल थीं।

24 घंटे में परीक्षा नोटिफिकेशन की मांग

शिक्षक भर्ती से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने सरकार से परीक्षा का नोटिफिकेशन जल्द जारी करने की मांग की थी। रिपोर्टों के अनुसार, आंदोलनकारियों ने सरकार को 24 घंटे के भीतर शिक्षक भर्ती परीक्षा से जुड़ी अधिसूचना जारी करने का अल्टीमेटम भी दिया था।

अभ्यर्थियों का तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी से उनकी तैयारी और रोजगार की संभावनाएं प्रभावित होती हैं। कई उम्मीदवार लंबे समय से परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं और चाहते हैं कि आयोग तथा सरकार परीक्षा की तारीख, पाठ्यक्रम और भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट समयसीमा जारी करे।

PhD स्कॉलर्स भी आंदोलन में शामिल

इस आंदोलन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि PhD स्कॉलर्स भी अपनी मांगों को लेकर राजभवन मार्च में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। उच्च शिक्षा और शिक्षक भर्ती से जुड़े मुद्दों को लेकर शोधार्थियों के बीच भी असंतोष दिखाई दे रहा है।

राजभवन मार्च के जरिए प्रदर्शनकारी राज्यपाल तक अपनी मांगें पहुंचाना चाहते हैं। उनका उद्देश्य भर्ती और परीक्षा से जुड़े निर्णयों पर पुनर्विचार कराने के साथ-साथ उच्च शिक्षा और अकादमिक क्षेत्र में लंबित मुद्दों को भी सामने रखना है।

असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के नियम भी मुद्दा

बिहार में इन दिनों केवल स्कूल शिक्षक भर्ती ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति के नियमों को लेकर भी विवाद चल रहा है। प्रदर्शनकारियों ने नए नियमों और भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। गर्दनीबाग में हुए हालिया प्रदर्शन में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती नियमों को लेकर भी अभ्यर्थियों ने विरोध दर्ज कराया था।

राज्यपाल सचिवालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जुलाई 2026 में बिहार विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति से जुड़े नए Statutes और बाद में Corrigendum जारी होने की जानकारी उपलब्ध है। इससे स्पष्ट है कि उच्च शिक्षा में नियुक्ति के नियमों को लेकर प्रक्रिया में हालिया बदलाव हुए हैं।

लगातार दूसरे बड़े राजभवन मार्च की तैयारी

आज का प्रस्तावित मार्च बिहार में एक सप्ताह के भीतर राजभवन की ओर होने वाला दूसरा बड़ा प्रदर्शन होगा। इससे पहले 19 अगस्त को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में RJD ने छात्रों, पेपर लीक, बेरोजगारी और सीवान में छात्र प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों को लेकर राजभवन मार्च किया था। उस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और तेजस्वी यादव तथा मीसा भारती को हिरासत में लिया गया था।

अब PhD स्कॉलर्स और शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों का मार्च शिक्षा और रोजगार के मुद्दों को केंद्र में रखकर किया जा रहा है। लगातार होने वाले इन प्रदर्शनों से बिहार की परीक्षा और भर्ती व्यवस्था राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती

एक ओर सरकार और भर्ती आयोगों के सामने समय पर परीक्षाएं आयोजित करने और नियुक्तियां पूरी करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर अभ्यर्थियों की मांगों और नियमों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देना भी जरूरी है। भर्ती प्रक्रिया में देरी होने पर उम्मीदवारों की उम्र, तैयारी और रोजगार के अवसर प्रभावित होने की आशंका रहती है।

सरकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह होगी कि शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया को लेकर उम्मीदवारों के बीच बनी अनिश्चितता को दूर किया जाए। परीक्षा की तारीख, रिक्तियों और चयन प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी जारी होने से आंदोलन को शांत करने में मदद मिल सकती है।

परीक्षा व्यवस्था पर बढ़ता दबाव

बिहार में पिछले कुछ दिनों में भर्ती परीक्षाओं को लेकर कई प्रदर्शन हुए हैं। छात्र और अभ्यर्थी अब केवल परीक्षा आयोजित कराने की मांग नहीं कर रहे, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निश्चित समयसीमा की भी मांग कर रहे हैं।

बिहार लोक सेवा आयोग के 2026 परीक्षा कैलेंडर में शिक्षक भर्ती सहित विभिन्न पदों की परीक्षाओं की जानकारी दी गई है, लेकिन कई भर्ती प्रक्रियाओं की तारीखें विभागीय निर्देश और अन्य प्रक्रियाओं पर निर्भर हैं।

आज के मार्च पर प्रशासन की नजर

राजभवन मार्च को देखते हुए पटना प्रशासन और पुलिस के सामने भीड़ प्रबंधन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती रहेगी। इससे पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान भी गर्दनीबाग और शहर के अन्य इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।

प्रदर्शनकारियों की कोशिश अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से राजभवन तक पहुंचाने की होगी। वहीं प्रशासन की प्राथमिकता संवेदनशील इलाकों में यातायात और कानून-व्यवस्था को बनाए रखना होगी।

क्या सरकार मानेगी मांगें?

आज के मार्च के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि सरकार शिक्षक भर्ती परीक्षा और उच्च शिक्षा से जुड़े नियमों पर प्रदर्शनकारियों की मांगों को किस तरह संबोधित करती है। अभ्यर्थी चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया में अनिश्चितता खत्म हो और उन्हें स्पष्ट रोडमैप दिया जाए।

यदि सरकार की ओर से परीक्षा की तारीख और भर्ती प्रक्रिया को लेकर ठोस घोषणा होती है तो आंदोलन का दबाव कम हो सकता है। लेकिन मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होने की स्थिति में आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

बिहार में शिक्षक भर्ती और उच्च शिक्षा से जुड़े आंदोलनों का लगातार बढ़ना राज्य की परीक्षा-भर्ती व्यवस्था में भरोसे की चुनौती को दिखाता है। आज का राजभवन मार्च इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों के साथ PhD स्कॉलर्स भी अपनी मांगें उठाने जा रहे हैं। सरकार के लिए सबसे प्रभावी रास्ता केवल आंदोलन को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि परीक्षा की स्पष्ट समयसीमा, भर्ती नियमों की पारदर्शी जानकारी और लंबित मामलों पर आधिकारिक स्थिति सार्वजनिक करना होगा। इससे अभ्यर्थियों के बीच बनी अनिश्चितता कम की जा सकती है।

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