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स्वदेशी “इंस निपुण” डाइविंग सपोर्ट वेसल का भारतीय नौसेना में औपचारिक कमीशनिंग, रणनीतिक लचीलापन बढ़ेगा

31 अगस्त को भारतीय नौसेना के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने वाला है; मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में INS निपुण को औपचारिक रूप से कमीशन किया जाएगा। यह द्वितीय ‘डाइविंग सपोर्ट वेसल’ (DSV) निस्तार‑क्लास का सदस्य है, जो गहरे समुद्र में डाइविंग, पनडुब्बी बचाव और विशेष समुद्री अभियानों

के लिए विशेष क्षमताएं प्रदान करेगा। निपुण की तैनाती से भारतीय नौसेना की रणनीतिक लचीलापन और परिचालन दूरी दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है, जिससे समुद्री सुरक्षा एवं मानवीय सहायता में नई संभावनाएँ खुलेंगी।

निपुण की निर्मिती का कार्यभार विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) ने संभाला है। इस

परियोजना को ‘स्वदेशी’ कहा गया है, क्योंकि इसका डिजाइन, विकास और निर्माण पूरी तरह से भारतीय तकनीक और सामग्रियों पर आधारित है। इस जहाज का निर्माण 2022 में शुरू हुआ, और पिछले चार साल में कई परीक्षण चरणों से गुज़रते हुए आज समुद्री परीक्षण क्षेत्रों में सफलतापूर्वक कार्य कर

चुका है। इस प्रकार की स्वदेशी पहल भारतीय रक्षा उद्योग की आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करती है और विदेशियों पर निर्भरता को घटाती है।

डाइविंग सपोर्ट वेसल की अवधारणा पहले भारत में केवल एक बार लागू हुई थी, जब पहली निस्तार‑क्लास की DSV को 2021 में कमीशन किया गया था। निपुण

के आगमन से उस अनुभव का विस्तार और सुधार संभव हो रहा है। इस जहाज में उन्नत डाइविंग एण्ड रेस्क्यू उपकरण, हाई‑टेक सोनार सिस्टम, और जल के नीचे कार्य करने वाले रोबोटिक आर्म स्थापित हैं, जो पनडुब्बी की आपातकालीन स्थितियों में तत्काल सहायता प्रदान करने में सक्षम हैं। इसके

अलावा, यह जहाज दीर्घकालिक जल निकासी मिशनों और समुद्री तल पर खोज‑बीन कार्यों में भी प्रयोग किया जाएगा।

नौसेना ने इस जहाज के परिचालन परिक्षण के दौरान कई कठिन परिस्थितियों का अनुकरण किया। भारतीय महासागर के दक्षिणी हिस्से में आयोजित समुद्री ड्रिल में निपुण ने 600 मीटर गहराई तक डाइविंग

मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसमें दो पनडुब्बी के डिकम्प्रेसन टेस्‍ट भी शामिल थे। इसके अलावा, यह जहाज जल में तैरते हुए सिमुलेटेड रेस्क्यू ऑपरेशन में भी काम आया, जहाँ डाइवर्स ने क्षतिग्रस्त पनडुब्बी से मानवीय जीवन बचाने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। इस प्रकार की परीक्षणों से निपुण की

तकनीकी क्षमता और विश्वसनीयता का स्पष्ट प्रमाण मिला।

निपुण के डिज़ाइन में कई नवीनतम प्रौद्योगिकी सम्मिलित की गई है। इसका हाइब्रिड प्रोपल्शन सिस्टम तेज गति और कम ईंधन खपत दोनों को संभव बनाता है, जिससे लंबी अवधि के मिशनों में आर्थिक लाभ मिलता है। जहाज के भीतर विशेष रूप से

निर्मित डाइविंग बैंक्स, वायुप्रेशर कंट्रोल सिस्टम और रीसाइक्लिंग यूनिट्स डाइवर्स को सुरक्षित और आरामदायक वातावरण प्रदान करते हैं। साथ ही, इसमें एंटी‑कर्बन फ्यूल सिस्टम भी स्थापित है, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम किया गया है।

इंस्पेक्शन के दौरान भारतीय नौसेना के कमांडर‑इन‑चीफ ने कहा कि निपुण का समावेश भारत की

समुद्री रणनीति को नई दिशा देगा। उन्होंने बताया कि यह जहाज केवल डाइविंग मिशनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समुद्री सीमा सुरक्षा, तेल रिसाव रोकथाम, और समुद्री विज्ञान अनुसंधान में भी योगदान देगा। इस प्रकार, निपुण न केवल एक तकनीकी उपकरण है, बल्कि भारत की समुद्री शक्ति के विस्तार

का प्रतीक भी माना जा रहा है।

कमीशनिंग समारोह में उपस्थित वरिष्ठ नौसेना अधिकारी और सरकार के प्रतिनिधियों ने इस अवसर को राष्ट्रीय गर्व के रूप में वर्णित किया। नेवी कमांडर‑इन‑चीफ ने कहा कि निपुण जैसी स्वदेशी निर्मितियों के माध्यम से भारत अपनी रक्षा क्षमताओं में आत्मविश्वास बढ़ा रहा है।

उद्योग प्रतिनिधियों ने भी इस बात पर बल दिया कि यह परियोजना भारतीय शिपिंग उद्योग के लिए एक मॉडल के रूप में काम करेगी, जिससे भविष्य में अधिक स्वदेशी जहाजों का निर्माण संभव होगा। स्थानीय समुदाय ने भी इस उपलब्धि को रोजगार सृजन और आर्थिक विकास की दिशा में

एक सकारात्मक कदम के रूप में सराहा।

राजनीतिक पक्ष ने इस विकास को राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। रक्षा सचिव ने कहा कि निपुण का समावेश भारत की समुद्री रक्षा क्षमताओं को बहुस्तरीय बनाता है, जिससे संभावित समुद्री संकटों में त्वरित प्रतिक्रिया संभव होगी।

विपक्षी दल ने भी इस पहल की प्रशंसा की, परन्तु कुछ नेताओं ने कहा कि स्वदेशी तकनीक की लागत‑प्रभावशीलता पर निरंतर निगरानी रखनी चाहिए। इस बीच, नागरिक समाज ने पर्यावरणीय पहलुओं को सराहा, क्योंकि निपुण में अपनाए गए हरित तकनीकें

Updated: August 25, 2026


India’s navy will commission INS Nipun, a domestically built diving support vessel equipped with advanced rescue gear, sonar and hybrid propulsion, to boost deep‑sea, submarine‑rescue and maritime‑security capabilities. Its induction is hailed as a stride toward self‑reliance, operational flexibility and greener, longer‑range naval missions.

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