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नीता नायडू ने स्कूल छात्रों की डेटा सेंटर प्रस्तुति की सराहना, गूगल परियोजना पर सार्वजनिक चर्चा जारी रही

गुजरे दिन में अंड्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नीता नायडू ने एक डेटा सेंटर परियोजना को लेकर उठाए विवादास्पद बयानों के बाद, आज अपने राज्य के एक स्कूल के छात्रों की प्रस्तुति को सराहा। उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर के आर्थिक एवं तकनीकी संभावनाओं को समझने में कई लोग अपरिचित हैं, जिससे अनावश्यक आलोचना उत्पन्न

हो रही है। इस बात को रेखांकित करते हुए, नायडू ने कहा कि सरकारी योजनाओं का व्यापक लाभ तभी संभव है जब जनता को उनके विस्तृत प्रभावों के बारे में सही जानकारी उपलब्ध कराई जाये। उनका यह बयान, गूगल द्वारा प्रस्तावित डेटा सेंटर के प्रति बढ़ते विरोध के बीच आया, जहाँ स्थानीय समूहों ने

पर्यावरणीय जोखिमों और भूमि अधिग्रहण को लेकर चिंता व्यक्त की थी।

डेटा सेंटर परियोजना का प्रस्ताव पिछले वर्ष के अंत में गूगल की भारतीय शाखा ने अंड्र प्रदेश के ए.कोडुरु ज़िल्हा के ज़िला परिषद हाई स्कूल (ZPHS) के पास स्थित भूमि पर प्रस्तुत किया। इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाओं

को सुदृढ़ करना, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना और विदेशी निवेश को आकर्षित करना था। गूगल ने कहा था कि इस निवेश से लगभग 5,000 प्रत्यक्ष नौकरियों और 20,000 अप्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन होगा, साथ ही स्थानीय आर्थिक परिदृश्य में परिवर्तन आएगा। सरकार ने प्रारम्भिक रूप से इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी थी, परन्तु सामाजिक

समूहों द्वारा पर्यावरणीय मूल्यांकन की मांग की गई, जिससे परियोजना की समयसीमा में देरी हुई।

पिछले दो महीनों में, कई स्थानीय एनजीओ और नागरिक समूहों ने इस योजना के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मुख्यतः दो मुद्दों को उठाया: पहले, डेटा सेंटर की विशाल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कोयले पर

आधारित विद्युत् उत्पादन से कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि; दूसरा, जमीन अधिग्रहण के चलते स्थानीय किसान और छोटे व्यवसायियों का विस्थापन। इन समूहों ने कई बार न्यायालय में याचिकाएँ दायर कीं, जिसमें पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) की पूर्ण प्रक्रिया की मांग की गई। इन आपत्तियों के बीच, राज्य सरकार ने दोबारा परियोजना को लेकर सार्वजनिक

परामर्श आयोजित करने का प्रस्ताव रखा।

आज ज़िला परिषद हाई स्कूल में आयोजित एक विशेष सभा में, ZPHS के छात्रों ने अंग्रेज़ी में स्वर्ण आंध्र – स्वच्छ आंध्र कार्यक्रम, शून्य‑वेस्ट प्रबंधन और उभरती तकनीकों पर एक प्रभावशाली प्रस्तुति दी। छात्रों ने बताया कि कैसे डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास, जलवायु‑स्मार्ट तकनीकों के साथ मिलकर,

पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखते हुए आर्थिक विकास को तेज़ कर सकता है। उन्होंने डेटा सेंटर के संभावित लाभों को स्थानीय स्तर पर व्याख्यायित किया, जैसे कि ग्रामीण क्षेत्रों में तेज़ इंटरनेट पहुँच, शिक्षा में सुधार और नई तकनीकी प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना। इस प्रस्तुति को दर्शकों ने सराहना के साथ स्वीकार किया, और

यह स्पष्ट हुआ कि युवा वर्ग में इस परियोजना के बारे में जागरूकता का अभाव है।

मुख्य विपक्षी समूहों ने फिर भी इस प्रस्तुति को अनदेखा कर, डेटा सेंटर की संभावनाओं को लेकर अपनी असंतुष्टि दोहराई। उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास केवल तभी सार्थक हो सकता है जब पर्यावरणीय संरक्षण को प्राथमिकता दी

जाए। कुछ समूहों के प्रतिनिधियों ने कहा कि गूगल को अपने ऊर्जा स्रोतों को नवीनीकृत स्रोतों तक सीमित करना चाहिए, और स्थानीय समुदाय को पर्याप्त मुआवजा और पुनर्वास योजना प्रदान करनी चाहिए। इस बीच, राज्य सरकार ने कहा कि सभी हितधारकों की चिंताओं को सुनना और संतुलित समाधान निकालना आवश्यक है, जिससे विकास और

पर्यावरण दोनों का संरक्षण संभव हो सके।

गूगल की ओर से भी एक बयान जारी किया गया, जिसमें कंपनी ने कहा कि उनका डेटा सेंटर 100 % नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर कार्य करेगा, और उन्होंने अपने ग्लोबल कार्बन‑न्यूट्रल लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्थानीय सौर व पवन ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश करने की

प्रतिबद्धता जताई। कंपनी ने यह भी कहा कि वह स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर सामाजिक विकास योजनाएँ तैयार करेगी, जिसमें कौशल प्रशिक्षण, स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार और स्वास्थ्य सेवाएँ शामिल होंगी। इस प्रकार की प्रतिबद्धता को देखते हुए, गूगल ने कहा कि वे सभी नियामक मानदंडों का पालन करेंगे और पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन के परिणामों

के अनुसार अपनी योजना में संशोधन करेंगे।

राज्य के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने इस विवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अंड्र प्रदेश को डिजिटल युग में अग्रसर होने के लिए ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर न केवल राज्य की आर्थिक वृद्धि को तेज़ करेगा, बल्कि

विदेशी निवेश को भी आकर्षित करेगा, जिससे निर्यात‑उन्मुख तकनीकी उद्योगों का विकास होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकारी नीतियों में डिजिटल बुनियादी ढाँचा, नवाचार एवं स्थायी विकास को एक साथ जोड़ा जाना चाहिए, ताकि सामाजिक असमानता को घटाया जा सके।

Updated: August 22, 2026


गुजरे दिन में अंड्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नीता नायडू ने एक स्कूल की प्रस्तुति की सराहना करते हुए, गूगल के डेटा सेंटर परियोजना पर उठ रहे पर्यावरणीय व भूमि अधिग्रहण चिंताओं को शांत करने का प्रयत्न किया। उन्होंने कहा कि सही जानकारी और संतुलित विकास से ही सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठाया जा सकता है।

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