पिछले दशक में ‘चिकन नेक’ पर विभिन्न आतंकवादी समूहों ने कई बार स्फोटक हमले और घातक हमलों की योजना बनायी थी, जिससे भारत की सीमायी सुरक्षा नीति में परिवर्तन आया। 2015 में इस गलियारे के पास एक बड़े पैमाने पर हथियार तस्करी का खुलासा हुआ था, जिसके बाद कई सुरक्षा एजेंसियों ने इस क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की इस यात्रा को एक रणनीतिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें नई तकनीकी उपायों को अपनाकर जोखिम को न्यूनतम करने की कोशिश की जाएगी।
सिलीगुड़ी पहुंचते ही अमित शाह का स्वागत पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्री ममता बनर्जी और स्थानीय प्रशासन के प्रमुख शुबेंदु अधिकारी ने किया। स्वागत समारोह में दो पक्षों ने पारस्परिक सहयोग के महत्व को रेखांकित किया और बताया कि स्मार्ट ग्रिड की स्थापना के लिए आवश्यक संसाधन और तकनीकी सहयोग जल्द ही उपलब्ध कराए जाएंगे। इस अवसर पर दोनों पक्षों ने यह भी कहा कि इस पहल से न केवल सीमा सुरक्षा में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
मुख्य एजेंडा में शामिल है सीमाओं पर उच्च‑रिज़ॉल्यूशन सेंसर, ड्रोन‑आधारित निगरानी प्रणाली और एकीकृत कमांड‑कंट्रोल सॉफ्टवेयर का निर्माण। इन तकनीकी उपायों के माध्यम से सीमावर्ती इलाकों में अनधिकृत प्रवेश, तस्करी और अवैध प्रवाह को रीयल‑टाइम में पहचाना और रोकथाम किया जा सकेगा। साथ ही, इस नेटवर्क को भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों के साथ एकीकृत करके राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे को और सुदृढ़ किया जाएगा।
तीन दिवसीय दौरे के पहले दिन, अमित शाह ने सिलीगुड़ी के प्रमुख बुनियादी ढाँचा, जैसे पुल, सड़क और रेलवे नेटवर्क का निरीक्षण किया, जहाँ उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सुरक्षा उपायों को बुनियादी सुविधाओं के साथ समन्वयित किया जाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि स्मार्ट ग्रिड की स्थापना के लिए आवश्यक भूमि और वित्तीय संसाधन जल्द से जल्द उपलब्ध कराए जाएँ। शुबेंदु अधिकारी ने इस पर जोर दिया कि स्थानीय प्रशासन इस योजना को पूरी गति से लागू करेगा और सभी आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा।
दूसरे दिन, गृह मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के साथ मिलकर एकत्रित सीमा सुरक्षा मॉड्यूल पर चर्चा की। इन देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते के तहत सीमा निगरानी में तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे पारस्परिक विश्वास और सहयोग में वृद्धि होगी। इस सहयोग के तहत प्रत्येक देश अपने-अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में समान तकनीकी उपकरण स्थापित करने का प्रस्ताव रख रहा है, जिससे एक समन्वित क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचा तैयार होगा।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल किया जाना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सेंसर आधारित निगरानी प्रणाली को और प्रभावी बनाया जाए तथा डाटा के त्वरित विश्लेषण और साझा करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सरकार का उद्देश्य ऐसी तकनीकी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे घुसपैठ, तस्करी और अन्य संदिग्ध गतिविधियों की पहचान समय रहते की जा सके और सुरक्षा एजेंसियां बिना देरी के कार्रवाई कर सकें।
Updated: August 21, 2026
Union Home Minister Amit Shah has launched a three-day review of security protocols at the strategic Siliguri corridor, aiming to fortify borders with a unified smart grid.
The initiative integrates real-time surveillance and regional cooperation with neighboring nations to swiftly counter cross-border threats and bolster national defense infrastructure.
Insight: Amit Shah’s push for a “smart‑grid” along the Chicken Neck signals a pivot from ad‑hoc patrols to a data‑driven border, turning a historic choke‑point into a real‑time surveillance hub.
If the tech integration clicks, it could reshape
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