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वंटारा ने वन्यजीव आयात नीति में “रीसेट” किया, कड़ी राष्ट्रीय मानकों व डिजिटल ट्रैकिंग से पारदर्शिता बढ़

वर्ल्ड-स्तरीय वान्य प्राणी संग्रहालय, वंटारा, अपने आयात नीति में ‘रीसेट’ की घोषणा कर रहा है, जिससे अंबानी समूह के प्रमुख निवेशक अनंत अंबानी के नेतृत्व में वाणिज्यिक प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत मिलता है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय प्रजाती संरक्षण नियमों के साथ संगति स्थापित करना तथा पिछले साल में उत्पन्न हुई कई आलोचनाओं को दूर करना है। वंटारा ने आधिकारिक रूप से बताया कि भविष्य में सभी पशु आयात को राष्ट्रीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के कठोर मानदंडों के तहत ही मंजूरी दी जाएगी, जिससे पारदर्शिता और जिम्मेदारी दोनों में वृद्धि होगी।

वंटारा, जो 2017 में अनंत अंबानी द्वारा स्थापित किया गया, जल्दी ही भारत में सबसे बड़े निजी चिड़ियाघरों में से एक बन गया, जिसमें 1,500 से अधिक प्रजातियों के 2,000 से अधिक जानवर शामिल थे। शुरुआत में इस संग्रहालय ने विदेशी प्रजातियों को तेज़ी से आयात करके आकर्षक प्रदर्शनियों की योजना बनाई, जिससे सार्वजनिक उत्साह बढ़ा और निवेशकों का ध्यान भी आकर्षित हुआ। हालांकि, 2022 में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संगठनों ने इस पर सवाल उठाए कि आयात प्रक्रिया में पर्याप्त पर्यावरणीय मूल्यांकन और कानूनी अनुमोदन नहीं किए गए थे।

इन आलोचनाओं के बाद, भारत सरकार ने 2023 में कई प्रजाती के आयात को रोकने के लिए एक आपातकालीन आदेश जारी किया, जिसमें एशियाई हाथी, ध्रुवीय भालू और कुछ दुर्लभ पंछी शामिल थे। इससे वंटारा के संचालन में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हुआ, क्योंकि कई प्रमुख प्रदर्शनियों को स्थगित करना पड़ा और आयात प्रक्रिया में दीर्घकालिक देरी होने लगी। इस दौरान, सामाजिक माध्यमों पर भी प्राणियों के कल्याण को लेकर व्यापक बहस चल रही थी, जिससे सार्वजनिक विश्वास में गिरावट आई।

वंटारा ने इस तनाव को दूर करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की, जिसमें आयात प्रक्रिया की समीक्षा, नवीनतम जैव-सुरक्षा मानकों का अपनाना और अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संधियों के साथ समन्वय शामिल है। इस योजना के तहत, सभी आयात के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की स्थापना की जाएगी, जो प्रजाति की संरक्षण स्थिति, जैव-भौतिक जोखिम और राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों की जाँच करेगी। साथ ही, संग्रहालय ने बताया कि भविष्य में आयात की लागत में 15% तक वृद्धि होगी, जिससे आर्थिक दबाव भी बढ़ेगा।

उसी समय, वंटारा के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी, शशि मेहता ने कहा कि यह ‘रीसेट’ केवल नियामक पालन के लिए नहीं, बल्कि दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अब से आयात के सभी चरणों को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार होगा। यह कदम वंटारा को विश्व स्तर पर मान्यताप्राप्त प्राणि संग्रहालय मानकों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

विकास के साथ, वंटारा के आर्थिक मॉडल में भी परिवर्तन का संकेत मिल रहा है। पूर्व में आयातित प्रजाती पर आधारित विशेष प्रवेश शुल्क और निजी कार्यक्रमों से आय मुख्य स्रोत थे; अब ये राजस्व स्रोत कम होने की सम्भावना है। इस कारण, वंटारा ने डिजिटल शैक्षिक मंचों और वर्चुअल टूर की दिशा में निवेश बढ़ाने की घोषणा की, जिससे वैश्विक दर्शकों तक पहुँच संभव हो सके और आय में विविधता लाई जा सके।

वंटारा के इस ‘रीसेट’ को लेकर विभिन्न हितधारकों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी। अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संगठनों ने इसे एक सकारात्मक कदम बताया, जबकि कुछ उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि आयात प्रक्रिया की जटिलता से निवेशकों को दीर्घकालिक जोखिम हो सकता है। साथ ही, स्थानीय पशु संरक्षण समूहों ने कहा कि यह कदम प्राणियों के कल्याण को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है, यदि इसके बाद भी उचित देखभाल न हो।

वंटारा के प्रतिद्वंद्वी निजी चिड़ियाघर, ‘सजग वन’, के सीईओ ने कहा कि उनका संग्रहालय पहले से ही सभी नियामक मानकों का पालन कर रहा है और वे इस बदलाव को ‘बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक दबाव’ के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने वंटारा को चुनौती दी कि वह अपने नए मानकों को प्रभावी रूप से लागू करे, अन्यथा जनता उनका भरोसा खो सकती है।

सरकारी पक्ष से, वन्यजीव संरक्षण मंत्रालय ने कहा कि यह कदम राष्ट्रीय संरक्षण नीतियों के अनुरूप है और यह ‘जैव विविधता संरक्षण’ के लक्ष्य को साकार करने में मदद करेगा। उन्होंने वंटारा को एक ‘पायलट प्रोजेक्ट’ के रूप में देखा है, जिससे भविष्य में अन्य निजी संस्थानों के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए जा सकते हैं।

आर्थिक दृष्टिकोण से, इस ‘रीसेट’ का प्रभाव वंटारा के निवेशकों के लिए दोधारी तलवार साबित हो सकता है। आयात लागत में वृद्धि और नियामक बाधाओं के कारण संक्षिप्त अवधि में लाभ कम हो सकता है, परन्तु दीर्घकाल में यह ब्रांड विश्वसनीयता को बढ़ाकर

Updated: August 22, 2026


वंटारा ने आलोचनाओं के मद्द neuron नए कड़े तारों को अपनाते हुए आयात सिद्धांतों में बदलाव की घोषणा की है।
यह पारदर्शिता बढ़ाने और वैश्विक मानकों के अनुपालन हेतु की गई कीमिंग धारापरिवर्तन है।

The policy reset aligns the zoo’s animal‑import procedures with India’s wildlife‑conservation law and international standards, enhancing regulatory compliance. It also introduces stricter oversight and digital tracking, which could affect the institution’s revenue model and operational costs.

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