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केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा प्रश्नपत्र जांच हेतु चार‑स्तरीय कड़ी व्यवस्था लागू की, परीक्षण प्रणाली में भरोसा बढ़ाने का लक्ष्य

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की वाழशि पर एक बार फिर से चर्चा तेज हो गई है, जैसा कि केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से बताया है कि परीक्षा के प्रश्नपत्रों की जांच-पड़ताल के लिए अब एक कड़ी चार-स्तरीय व्यवस्था लागू की जाएगी। यह कदम उच्च शिक्षा और प्रवेश परीक्षाओं में बढ़ते भरोसे की कमी को दूर करने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि विसंगतियों को रोकने के लिए इस नई प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।गुजरे हुए कुछ हफ्तों में नीट-यूजी और यूजीसी-नेट जैसी प्रमुख राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में हुई घटनाओं ने सार्वजनिक खेद और प्रशंसित प्रश्न उठाए हैं। पिछले कुछ वर्षों में इन परीक्षाओं की प्रामाणिकता के प्रति सवालों ने बढ़ते हुए सामने आरे हैं कई प्रतियोगी वर्गों के छात्र। इसने देश भर में चिंता का एक नया आयाम जोड़ा है और उसे परीक्षा प्रणाली के प्रबंधन और गुणवत्ता नियंत्रण संबंधी मेमें पर प्रश्न खड़े किए हैं।

शिक्षा मंत्रालय ने पूर्व का आधार लिया जो कि उस समय की पुनरावलोकन पर आया था। जब विश्वस्तरीय मानकों के लिए परीक्षाओं की समीक्षा की गई थी इस अवसर में अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से पिछली त्रुटियों पर विचार किया था। लेकिन उस समीक्षा हेतु प्रायः कोर टीम को पुनर्निर्मित करने के लिए भारी पुनर्गठन को साधना पड़ी। इस संक्रमण के दौरान केंद्र ने अपने बयानों में स्पष्ट किया कि अब कोई भी परिचालन कदम निगरानी और आंतरिक नियंत्रण के रूपों पर आधारित हो जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत प्रश्न पत्र के निर्माण और सत्यापन में स्पष्ट सुधार है। जाँच की चार पृथक तहों में से प्रत्येक को निम्न में परिभाषित किया गया है। इस संक्रमण का उद्देश्य प्रश्न पत्रों को निर्माण से लेकर छात्रों तक पहुँचाने तक की प्रक्रिया में गलतियों का अवसर ही रोकने का रहा है।

प्रत्येक स्तर को स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिए इच्छा की जाती है ताकि कि किसी भी तरह की पूर्व अनिच्छस या त्रुटि की संभावना न हो।

परीक्षा प्रबंधन टीम के एक बड़े बिभाग में बदलाव किया गया है जहाँ करीब 600 विशेषज्ञों को हटा दिया गया है। यह एक बड़ा कदम है जिसमें हम वित्त या एक शिक्षा व्यवस्था में गिथकते कुशल वैज्ञानिक, पत्रकार और विभागों को निकाल दिया गया है। अधिकारियों ने कहा है कि इसमें रैथक नागरिक खर्च या गलत काम के अनुसार कोई वर्वलाइक टोलिच नहीं किया गया है किंतु एक निरावर परिवर्तन समूह के लिए सामाजिक कदम रहा है।

अब बचे हुए स्थानों पर नए विशेषज्ञों को नियुक्त किया जा रहा है। इन नया नाम सूचियों को विश्व स्तर की दक्षता और अनुभव की स्तर पर देखे गए हैं। NTA प्रबंधन ने यह भी स्पेशलिस्ट को परीक्षा की सुरक्षा बनाए रखने की दिशा में गहन रूप में प्रशिक्षित किया है। ऐसे में शिक्षा विभाग को पूरी तरह विश्वास है कि यह नया संघटन परीक्षा में हुई कई विसंगतियों को रोकने में सहायक हो रहा है निशुलक को बदलने का मुख्य उद्देश्य गलत हस्तक्षेप को रोकना है जिसके लिए अधिकारी पहले से तैयारियां कर रहे थे।

छात्रों और अभिभावकों में इस बदलाव के प्रति प्रतिक्रिया मिश्रित रही है। कुछ छात्रों ने इसे सकारात्मक कदम बताया, जबकि अन्य इसे ढलेटों का लाभ उठाने वाला शोर बता रहे हैं। इस घटनाक्रम के बाद छात्र बलों ने आशंका जताई कि क्या यह बदलाव सचमुच प्रभावी रूप से वैज्ञानिक निर्णयों पर आधारित रहेगा। इस बीच उनके द्वारा मांग की गई है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता आनी चाहिए।

Updated: August 19, 2026

The four‑tier vetting system signals that the NTA is shifting from reactive damage control to a pre‑emptive credibility strategy, trying to restore faith before scandals can erupt. Yet its real test will be whether the newly hired “global‑standard” experts can stay insulated from the same political pressures that once

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