Press "Enter" to skip to content

मूसलाधार बारिश से 20‑25 अगस्त तक उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड सहित 7 राज्यों में राष्ट्रीय स्तर पर भारी वर्षा

उत्तरी, मध्य, पूर्वी और दक्षिणी भारत के कई क्षेत्रों में 20 अगस्त से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने राष्ट्रीय स्तर पर आपातकालीन चेतावनियों को जन्म दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले पाँच दिनों के लिए व्यापक भारी वर्षा अलर्ट जारी किया है, जिसमें उत्तराखंड, उत्तर

प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पूर्वोत्तर के कई राज्य प्रमुख रूप से प्रभावित होंगे। विभाग ने बताया कि इस अवधि में तेज़ हवाओं, आंधी‑बिजली और संभावित बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे स्थानीय प्रशासन को त्वरित उपायों की जरूरत पड़ेगी।

वर्षा के

इस सत्र में पूर्वी उत्तर भारत में पहले भी असामान्य जलवायु परिवर्तन के संकेत दिखे थे, परंतु इस बार बारिश की तीव्रता और अवधि में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अटलांटिक में उत्पन्न हो रही गर्मी के प्रवाह ने मानसून की धारा

को तेज किया है, जिससे समुद्री जलवायु में परिवर्तन आया है। पिछले कुछ महीनों में ही विभिन्न क्षेत्रों में अनपेक्षित मौसमीय उतार‑चढ़ाव ने कृषि उत्पादन और जल संसाधन प्रबंधन को चुनौती दी थी, और इस वर्ष की बारिश इन चुनौतियों को और बढ़ा सकती है।

IMD

ने 20 अगस्त को जारी की गई शुरुआती चेतावनी के बाद लगातार अपडेट प्रदान किए हैं। विभाग के अनुसार, उत्तराखंड के गढ़वाल में 150 मिमी तक की बारिश दर्ज हो सकती है, जबकि उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में 120 मिमी से अधिक वर्षा का अनुमान है। मध्य प्रदेश में

बिनाध और इंदौर के आसपास भी 100 मिमी से अधिक बारिश की संभावना है, जिससे जल स्तर में तेज़ी से वृद्धि होगी। बिहार और झारखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में भी 130 मिमी से अधिक वर्षा का रिकॉर्ड देखा जा रहा है, जिससे नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि का

खतरा मंडरा रहा है।

इन चेतावनियों के प्रकाश में विभिन्न राज्य सरकारों ने आपातकालीन कार्यवाही शुरू कर दी है। उत्तराखंड में, जलस्रोत विभाग ने बाढ़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त पंपों की व्यवस्था की है और पहाड़ी गांवों में निकासी के लिए टेंपलेट तैयार किए हैं। उत्तर

प्रदेश में, जिला प्रशासन ने बाढ़‑प्रवण इलाकों में रह रहे नागरिकों को अस्थायी आश्रय प्रदान करने के लिए स्कूल और सामुदायिक हॉल को तैयार किया है। मध्य प्रदेश ने प्रमुख नदियों के किनारे बाढ़‑रोकथाम के लिए रेत की दीवारें स्थापित करने का आदेश दिया है, जबकि बिहार

ने जल प्रबंधन में सहायता के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल को तैनात किया है।

इन उपायों के साथ ही, भारतीय रेलवे ने कई प्रमुख मार्गों पर सेवाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया है। दिल्ली‑मुंबई, दिल्ली‑कोलकाता और अन्य मुख्य धारा के ट्रेनों को मौसम के

अनुकूलन हेतु पुनर्निर्धारित किया गया है। हवाई अड्डों पर भी रनवे की जल निकासी क्षमता को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे उड़ान संचालन में न्यूनतम व्यवधान हो सके।

राज्य सरकारों के अलावा, भारतीय सेना और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)

ने भी आपातकालीन सहायता के लिए तैनाती शुरू कर दी है। NDMA ने प्रत्येक प्रभावित राज्य में एक समन्वय केंद्र स्थापित किया है, जहाँ से जल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाएँ और आपदा‑राहत कार्यों का संचालन किया जाएगा। सेना ने विशेष रूप से दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में राहत कार्य

के लिए हेलीकॉप्टरों की तैनाती की है, जिससे कठिन पहुँच वाले क्षेत्रों में सहायता पहुंचाना आसान हो सके।

प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी इस स्थिति पर अपने-अपने बयान जारी किए हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख प्रतिनिधियों ने जलवायु परिवर्तन को गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार

से दीर्घकालिक जल संसाधन योजना की माँग की। वहीं भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने पहले ही कई राहत कार्य शुरू कर दिए हैं और जनता को सतर्क रहने की अपील की। विपक्षी दलों ने मौसमी आपदाओं के प्रबंधन में पारदर्शिता और

तेज़ी की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि केंद्र सरकार ने आपदा प्रबंधन के लिए बजट में अतिरिक्त आवंटन करने का आश्वासन दिया।

व्यापारी वर्ग ने भी इस बारिश के प्रभाव को महसूस किया है। कृषि उत्पादकों को बाढ़‑प्रवण क्षेत्रों में फसल क्षति

Updated: August 20, 2026


Heavy monsoon downpours that began on Aug 20 have triggered nationwide emergency alerts, with the IMD warning of extreme rainfall, strong winds and flood risks across Uttarakhand, UP, MP, Bihar, Jharkhand, Odisha and the Northeast. State authorities, the army and NDMA have mobilised rescue teams, temporary shelters and flood‑control measures while transport services are being curtailed to cope with the escalating threat.

Insight: The unprecedented intensity of this monsoon, amplified by Atlantic heat surges, signals that India’s flood‑risk map is shifting faster than its disaster‑response infrastructure can adapt.

If policymakers treat these events as isolated spikes rather than a new baseline, agricultural losses and urban disruptions will compound, eroding both food security

BiharNewsPost
The BiharNews Post

बिहार न्यूज़ पोस्ट - बिहार का नं. 1 न्यूज़ पोर्टल !

More from देश - भारतMore posts in देश - भारत »

Be First to Comment

    प्रातिक्रिया दे

    आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *