मैसर्स एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड एक प्रमुख विद्युत सिग्नलिंग कंपनी है जो भारत में विद्युत सिग्नलिंग प्रणालियों का स्थापना करती है. कंपनी ने भारतीय रेलवे के लिए कई महत्वपूर्ण सिग्नलिंग परियोजनाओं पर काम किया है.
नई दिल्ली से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि सीबीआई ने इस मामले में रेलवे के एक अन्य अधिकारी और दो प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया है. सूत्र ने बताया कि इन गिरफ्तारियों के मद्देनजर रेलवे के कई अधिकारियों और नीतिगत स्तर पर मंथन शुरू हो गया है.
रेलवे के डिप्टी चीफ इंजीनियर सत्यम कुमार ने 4 लाख रुपये की रिश्वत ली थी. यह रकम 5 से 7 सितंबर के बीच शेयर में किया गया था. रेलवे अधिकारी के अनुसार, मैसर्स एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड ने रेलवे से एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे जो कि एक विशेष सिग्नलिंग परियोजना के लिए था. संबंधित पक्षों का दावा रहा कि रिश्वत में ली गई रकम में तीन फीसदी की दर पर बकाया थे.
संबंधित पक्षों ने दावा किया है कि इस पूरे घोटाले के पीछे कई बड़े लोग हैं और इनके द्वारा मोटी रकम का पुलट लिया गया है.
इस मामले में पुलिस ने कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए हैं जिनमें लिपटे और गवाहों के बयान शामिल है. पुलिस ने बताया है कि इस मामले में कई अन्य लोग भी गिरफ्तार हो सकते हैं और फिर से जाँच कराई जाएगी.
निशाना बनाए गए विभाग से जुड़कर, रेलवे विभाग ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में भारतीय रेलवे द्वारा एक उच्च-स्तरीय परिभाषित शिष्टता संबंधी जांच बोर्ड बनाया गया है जिसके सदस्य विश्वासपात्र अधिकारियों के समूह से आते हैं।
भारत में रेलवे परियोजनाओं के लिए मैसर्स एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड की सेवाएं ली जाती है. पिछले कुछ वर्षों में, रेलवे ने कई महत्वपूर्ण सिग्नलिंग परियोजनाओं पर काम किया है और इन परियोजनाओं के लिए मैसर्स एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड को कार्य मिला है.
लंदन बेस्ड ब्रिटिश रेलवे के प्रमुख इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी पार्टनर होने का दावा करती हुए, सिग्नल कंपनी ने साल-दर-साल कई सारे वित्तीय खेल ब्रांस देखने के बाद 2023 के पहली तिमाही में निरंतर मुनाफे की प्रतिपूर्ति करती हुई कंपनी बनी हुयी है।
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