सीमापार गश्त बटालियन ने इस क्षेत्र में कई बार घुसपैठ की कोशिश की, जिससे भारतीय रक्षा बलों को सतर्क रहने पर मजबूर होना पड़ा। इस घटना को लेकर केंद्रीय मंत्री ऋजिवु ने कहा कि यह “भू‑राजनीतिक स्थिति में एक गंभीर परिवर्तन” दर्शाता है और मोदी सरकार की शीर्ष
प्राथमिकता बन गया है।
अरुणाचल प्रदेश की सीमाओं की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि जटिल है। 1962 के भारत‑चीन युद्ध के बाद, कई बार सीमा पर असमान्य गतिविधियों की सूचना मिली, परंतु अधिकांश मामलों में उन्हें सीमित रिपोर्ट के रूप में ही दर्ज किया गया। 1990 के दशक में दो
देशों के बीच कई बार सीमापर समझौते हुए, लेकिन ग्राउंड लेवल पर नियंत्रण और निगरानी में लगातार खामियां रही। इस दौरान भारत ने कई बार सीमा पर बुनियादी ढांचा विकसित किया, परंतु ऊपरी सबनसिरी जैसे दुर्गम क्षेत्रों में सड़कों, संचार और निगरानी उपकरणों की कमी बनी रही।
नवम्बर 2023 में भारतीय सेना ने पहली बार ऊपरी सबनसिरी में चीनी टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों की उपस्थिति की पुष्टि की। तब से लेकर अब तक, इस क्षेत्र में चीन की नियमित सैन्य अभ्यास, ड्रोन उडान और इलेक्ट्रॉनिक जामिंग के कई मामले दर्ज हुए हैं। इस संदर्भ में,
भारतीय सेना के मुख्य रणनीतिकारों ने बताया कि इन गतिविधियों ने भारतीय सुरक्षा संरचना को तनावपूर्ण बना दिया है और सीमा पर तैनात जवानों के मनोबल को प्रभावित किया है।
पिछले दो हफ्तों में, भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने कई बार सीमा पार अज्ञात वस्तुओं को
उजागर किया। एक घटना में, BSF के एक टीम ने सीमापार दो टैंक के ट्रैक को देखा, जो कि भारतीय मानचित्र से बाहर के इलाके में घुसे थे। इस दौरान, भारतीय जासूसी एजेंसियों ने चीन के कई सैटेलाइट इमेज को भी हासिल किया, जिसमें ऊपरी सबनसिरी के कुछ
पहाड़ी मार्गों पर नई निर्माण कार्य चल रहे थे।
इन घटनाओं के बाद, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तुरंत एक विशेष जाँच टीम का गठन किया। टीम ने बताया कि चीनी सेना ने इस वर्ष कम से कम पाँच बार सीमा पर ‘अवैध प्रवेश’ किया, जिससे भारतीय सैनिकों
को सतर्क रहने की आवश्यकता बढ़ गई। साथ ही, भारतीय रक्षा मंत्रालय ने सीमा क्षेत्रों में ड्रोन निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ करने का आदेश दिया और स्थानीय जनसंख्या को संभावित खतरे के बारे में सूचित किया गया।
भू‑राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं का मुख्य
कारण चीन के ‘भौगोलिक पुनर्गठन’ के प्रयास हैं, जो कि बायडेन प्रशासन के साथ अंतरराष्ट्रीय दबाव को संतुलित करने की रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। इस दिशा में, चीन ने हाल ही में कई नए सैन्य अड्डे स्थापित किए हैं, जो भारतीय सीमा
के निकट स्थित हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव का स्तर बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुद्दे को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा की शीर्ष प्राथमिकता’ के रूप में वर्गीकृत किया। उनका मानना है कि भारत को अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए अधिक सक्रिय और तकनीकी
रूप से उन्नत रणनीति अपनानी होगी। इस संदर्भ में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि “हमारी प्राथमिकता सीमाओं को दृढ़ता से सुरक्षित करना और किसी भी प्रकार की विदेशी अतिक्रमण को रोकना है।”
केंद्र सरकार ने इस दिशा में कई नई योजनाओं की घोषणा की। राष्ट्रीय
रक्षा विश्वविद्यालय ने ‘सीमा सुरक्षा प्रौद्योगिकी’ पर विशेष कोर्स शुरू किए हैं, जबकि भारतीय सेना ने नई ‘वायरलेस इंटेलिजेंस’ इकाइयों को स्थापित करने का आदेश दिया। साथ ही, स्थानीय प्रशासन ने भी सीमापार गाँवों में शैक्षिक और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने का वादा किया, ताकि स्थानीय जनसंख्या
सुरक्षा में सहयोगी बन सके।
राजनीतिक पक्षों की प्रतिक्रियाएँ विभिन्न स्तरों पर देखी गईं। विपक्षी दल के नेता ने सरकार पर “सीमा पर पर्याप्त निवेश नहीं करने” का आरोप लगाया, जबकि कुछ राज्य स्तर के नेता ने कहा कि “स्थानीय प्रशासन को सीमा सुरक्षा में
– The report highlights repeated cross‑border incursions, prompting heightened alertness among Indian defence forces.
– It has led to accelerated deployment of surveillance assets and a review of security priorities along the Arunachal‑Pradesh frontier.
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