प्राथमिक जांच से पता चला कि पीड़ितों ने एक ही बैरन से खरीदी गई शराब का सेवन किया था। पुलिस ने बताया कि यह शराब “नकली” या “मिलावटी” थी, जिसमें मेथनॉल और अन्य विषाक्त पदार्थों का मिश्रण था। अधिकारी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि यह शराब स्थानीय स्तर पर निर्मित नहीं थी, बल्कि बाहर से लाकर वितरित की गई थी। इस प्रकार के मिश्रण से शरीर में तेजी से विषाक्त प्रभाव उत्पन्न होते हैं, जिससे श्वास अवरोध और अंततः मृत्यु भी हो सकती है।
घटना के तुरंत बाद पुलिस ने क्षेत्र में गश्त तेज कर दी और चार संदिग्ध शराब तस्करों को पकड़ लिया। ये चार व्यक्ति स्थानीय शराब बाजार में सक्रिय थे और इस मामले में मुख्य आपूर्ति श्रृंखला के रूप में पहचाने गए हैं। पुलिस ने कहा कि इनकी हिरासत के दौरान उनकी पूछताछ जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि शराब बनाने वाले उपकरण और बचे हुए शराब के नमूने को फोरेंसिक लैब में भेजा गया है।
आसपास के कई निवासियों ने कहा कि इस तरह की शराब का सेवन पहले भी कभी नहीं किया था। उन्होंने बताया कि अक्सर वे “सस्ती” शराब के लिए स्थानीय विक्रेताओं पर भरोसा करते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने एक अनजान व्यक्ति से शराब खरीदी। कई लोगों ने कहा कि शराब के रंग और स्वाद में कुछ असामान्य था, परन्तु उन्हें इसका शंका नहीं हुई। यह घटना स्थानीय लोगों के बीच शराब के स्रोत को लेकर सतर्कता बढ़ाने का कारण बन गई है।
स्वास्थ्य अधिकारी बताते हैं कि मिलावटी शराब के कारण उत्पन्न होने वाले लक्षणों में अत्यधिक उल्टी, सिरदर्द, श्वास में कठिनाई और अचानक बेहोशी शामिल हैं। इस मामले में अस्पताल में भर्ती रोगियों को तत्काल रेस्पिरेटरी सपोर्ट, डायलिसिस और विषाक्त पदार्थों के खिलाफ एंटीटॉक्सिक उपचार दिया गया। डॉक्टरों ने कहा कि यदि समय पर उपचार न किया जाये तो मृत्युदर बढ़ सकता है।
राज्य सरकार ने इस घटना पर तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी घटनाएँ “न्याय के सामने नहीं रह सकतीं” और सभी तस्करों को कड़ी सजा दिलाने का वादा किया। उन्होंने राज्य स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि मिलावटी शराब की रोकथाम के लिए विशेष निगरानी प्रणाली स्थापित की जाए। इस दिशा में, राज्य ने अब तक की सबसे सख्त शराब नियंत्रण अधिनियम को लागू करने की घोषणा की है।
बाजार में शराब की कीमतों में बढ़ोतरी और आयातित शराब की कमी को लेकर स्थानीय व्यापारी भी चिंतित हैं। कुछ व्यापारी ने कहा कि किफायती शराब की कमी से लोग अनजाने में खतरनाक विकल्प चुन रहे हैं। इस संदर्भ में, व्यापार संघ ने कहा कि सरकार को सस्ती और सुरक्षित शराब की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि लोगों को “बिना जोखिम” विकल्प मिले।
अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए “नकली शराब विरोधी समिति” का गठन किया गया है। यह समिति विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पुलिस बल के साथ मिलकर कार्य करेगी। समिति का मुख्य उद्देश्य शराब के स्रोत की पहचान, उत्पादन प्रक्रिया की निगरानी और उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाना है।
Updated: August 19, 2026
A batch of illicit, methanol‑laden liquor consumed by villagers in Bhavnagar’s Bhanvad town left 19 people hospitalized and two dead, prompting police to arrest four suspected bootleggers and seize the contaminated stock. State officials vowed tougher enforcement and a dedicated anti‑spurious liquor task force to curb such deadly scams.
The tragedy exposes how “cheap” alcohol becomes a silent weapon when market pressures push desperate buyers toward unregulated, imported brews, turning profit motives into public‑health catastrophes.
Unless Gujarat’s new crackdown pairs strict supply monitoring with affordable, safe alternatives, the cycle of illicit, toxin‑laden liquor will
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